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प्रसाद योजना में पुनौरा धाम को शामिल किया गया

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बिहार सरकार से प्राप्त अनुरोध के आधार पर पर्यटन मंत्रालय ने पुनौरा धाम को स्वदेश दर्शन योजना के रामायण सर्किट में शामिल किया है। पुनौरा धाम के गंतव्य को हाल ही में पर्यटन मंत्रालय की प्रसाद योजना में शामिल किया गया है।

बिहार राज्य के लिए स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं का विवरण नीचे दिया गया है :

  • जैन थीम के अंतर्गत वैशाली-आरा-मसाद-पटना-राजगीर-पावापुरी-चंपापुरी में तीर्थांकर सर्किट के विकास की वर्ष 2016-17 में 20 करोड़ रुपये की राशि के साथ स्वीकृत दी गई थी। इसके लिए अब तक 26.11 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई है।
  • सुल्तानगंज-धर्मशाला-देवघर में आध्यात्मिक विषय के अंतर्गत आध्यात्मिक सर्किट का एकीकृत विकास, वर्ष 2016-17 में 76 करोड़ रुपये की राशि की लागत से स्वीकृत। 42.52 करोड़ रुपए की राशि अब तक जारी की गई है।
  • बौद्ध सर्किट का विकास – बोधगया में कन्वेंशन सेंटर के निर्माण की वर्ष 2016-17 में 73 करोड़ रुपये की राशि की लागत से स्वीकृति दी गई थी। 93.22 करोड़ रुपए अब तक जारी किए गए हैं।
  • गांधी सर्किट का विकास : ग्रामीण थीम के तहत भितिहारवा-चन्द्रहिया-तुर्कौलिया को वर्ष 2017-18 में 65 करोड़ रुपये की राशि की लागत से स्वीकृत किया गया। 35.72 करोड़ रुपए अब तक जारी किए गए हैं।
  • वर्ष 2017-18 में स्वीकृत आध्यात्मिक विषय के तहत मंदार हिल और अंग प्रदेश में तीर्थयात्रा सर्किट का विकास 53 करोड़ रुपये की राशि की लागत से स्वीकृति दी गई। इसके लिए 38.02 करोड़ रुपए अब तक जारी किए गए हैं।

प्रसाद (PRASHAD) योजना

  • शुरुआत :
    • पर्यटन मंत्रालय द्वारा वर्ष 2014-15 में चिह्नित तीर्थ स्थलों के समग्र विकास के उद्देश्य से ‘तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक संवर्द्धन पर राष्ट्रीय मिशन’ शुरू किया गया था।
    • अक्तूबर 2017 में योजना का नाम बदलकर ‘तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक विरासत संवर्द्धन अभियान’ (यानी ‘प्रसाद’) राष्ट्रीय मिशन कर दिया गया।
  • क्रियान्वयन एजेंसी :
    • इस योजना के तहत चिह्नित परियोजनाओं को संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र की सरकार द्वारा चिह्नित एजेंसियों के माध्यम से क्रियान्वित किया जाएगा।
  • उद्देश्य :
    • महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय/वैश्विक तीर्थ और विरासत स्थलों का कायाकल्प एवं आध्यात्मिक संवर्द्धन।
    • समुदाय आधारित विकास का पालन करना और स्थानीय समुदायों में जागरूकता पैदा करना।
    • आजीविका उत्पन्न करने के लिये विरासत शहर, स्थानीय कला, संस्कृति, हस्तशिल्प, व्यंजन आदि का एकीकृत पर्यटन विकास।
    • अवसंरचनात्मक कमियों को दूर करने के लिये तंत्र को सुदृढ़ बनाना।
  • वित्तपोषण :

इसके तहत पर्यटन मंत्रालय द्वारा चिह्नित स्थलों पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये राज्य सरकारों को केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) प्रदान की जाती है।

इस योजना के तहत सार्वजनिक वित्तपोषण के घटकों के लिये शत-प्रतिशत निधि केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी। परियोजना की बेहतर स्थिरता/निरंतरता के लिये यह सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) को भी शामिल करने का उद्देश्य रखता है।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.1PRE

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