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Current Affair 12 August 2021

Current Affairs – 12 August, 2021

अभ्यास इंद्र-2021

भारत और रूस की सेनाओं का संयुक्त युद्ध अभ्यास इंद्र का समापन समारोह 12 अगस्त 2021 को आयोजित किया गया। इस युद्धाभ्यास का उद्देश्य दोनों सेनाओं को एक दूसरे की परिचालन योजना, प्रक्रियाओं, युद्ध अभ्यास और अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी समूहों के खिलाफ संयुक्त अभियानों के संचालन से परिचित कराना था। युद्धाभ्यास के संचालन के दौरान संयुक्त प्रशिक्षण में हिस्सा लेते हुए दोनों सेनाओं के 250 सैनिकों की दो टुकड़ियों ने बेहद उत्साह और अपने पेशेवराना अंदाज का प्रदर्शन किया। अभ्यास के अंतिम चरण के दौरान मैकेनाइज्ड फोर्सेज और विशेष दस्तों ने एकीकृत लाइव फायरिंग तथा विशेष संयुक्त अभियानों में भाग लिया, इनमें शहरी इलाकों में विद्रोहियों की निकासी का अभियान भी शामिल था। इस दौरान सैनिकों ने न केवल एक-दूसरे के संगठनों के बारे में सीखा, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत शांति अभियानों में अपनाए जा रहे विचारों और सर्वोत्तम प्रथाओं का भी आदान-प्रदान किया।

यह युद्ध अभ्यास बेहद सफल रहा और इस दौरान प्रशिक्षण में भाग लेकर दोनों देशों के सैनिकों को महत्वपूर्ण कार्य विधियां सीखने को मिली हैं। युद्धाभ्यास के दौरान दोनों टुकड़ियों के बीच विकसित सौहार्द निश्चित रूप से सेनाओं के बीच आपसी विश्वास को बढ़ाने में मदद करेगा। इस तरह के संयुक्त सैन्य अभ्यास का आयोजन भारत और रूस के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

भारत-रूस संयुक्त सैन्य अभ्यास का 12वां संस्करण जिसे एक्सर्साइज़ इंद्र (Exercise INDRA) 2021′ कहा जाता है, 01 से 13 अगस्त 2021 तक रूस (Russia) के वोल्गोग्राड (Volgograd) में आयोजित किया जाएगा। यह अभ्यास संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के जनादेश के तहत एक संयुक्त रूप से अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी समूहों के खिलाफ और आतंकवाद विरोधी अभियानों का संचालन करेगा।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

TOPIC-INTERNATIONAL RELATIONS

 

संसद का मानसून सत्र-2021

  1. संसद का मानसून सत्र-2021, 19 जुलाई 2021 को शुरू हुआ था। इसे 11 अगस्त, 2021 को अनिश्चितकाल के लिए स्थागित कर दिया गया है। इस सत्र में 24 दिनों की अवधि में 17 बैठकें आयोजित की गई।
  2. इस सत्र में मूल रूप से 19 जुलाई से 13 अगस्त, 2021 तक 19 बैठकें आयोजित करने का कार्यक्रम था। दोनों सदनों में लगातार व्यवधान और आवश्यक सरकारी कामकाज के पूरा होने के कारण इस सत्र में कटौती की गई।
  3. सत्र के दौरान संसद के दोनों सदनों द्वारा 22 विधेयक पारित किए गए, जिनमें 2021-22 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों से संबंधित दो विनियोग विधेयक और 2017-2018 के लिए अधिक अनुदान की मांग शामिल हैं, जिन्हें लोकसभा द्वारा पारित किया गया और राज्यसभा को भेजा गया। इन विधेयकों को अनुच्छेद 109(5) के तहत पारित माना जाता है। इन 22 विधेयकों की पूरी सूची संलग्न है।
  4. अध्यादेशों का स्थान लेने वाले चार विधेयक, अर्थात् न्यायाधिकरण सुधार (तर्कसंगतिकरण और सेवा की शर्तें) अध्यादेश, 2021, दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2021, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और इसके आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अध्यादेश, 2021 तथा आवश्यक रक्षा सेवा अध्यादेश, 2021, जिन्हें राष्ट्रपति द्वारा मॉनसून सत्र से पहले घोषित किया गया था, पर विचार किया गया और सदनों द्वारा पारित किया गया।
  5. संसद के सदनों द्वारा पारित कुछ महत्वपूर्ण विधेयक इस प्रकार हैं:-
  • आर्थिक क्षेत्र/कारोबार को सुगम बनाने के उपाय

कराधान कानून (संशोधन) विधेयक, 2021 में प्रावधान है कि यदि लेनदेन 28 मई, 2012 से पहले किया गया था, तो भारतीय संपत्ति के किसी भी अप्रत्यक्ष हस्तांतरण के लिए कथित पूर्वव्यापी संशोधन के आधार पर भविष्य में किसी कर की मांग नहीं की जाएगी।

सामान्य बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) संशोधन विधेयक, 2021 में सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों में अधिक से अधिक निजी भागीदारी और अर्थव्यवस्था के तेजी से विकास में योगदान करने और पॉलिसी धारकों के हितों को बेहतर ढंग से सुरक्षित करने तथा बीमा निवेश और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ाने का प्रावधान है।

जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (संशोधन) विधेयक, 2021 बैंकों पर प्रतिबंध होने पर भी जमाकर्ताओं को उनके अपने धन तक आसान और समयबद्ध पहुंच में सक्षम बनाता है। इस विधेयक में यह प्रदान करने का प्रस्ताव है कि किसी बैंक पर लागू किए गए मोरिटोरियम जैसे प्रतिबंधों के कारण अपने दायित्वों को पूरा करने में असमर्थ होने पर जमाकर्ता निगम द्वारा अंतरिम भुगतान के माध्यम से जमा बीमा कवर की सीमा तक अपनी जमा राशि का उपयोग कर सकते हैं।

सीमित देयता भागीदारी (संशोधन) विधेयक, 2021 कुछ अपराधों को सिविल चूक में परिवर्तित कर देता है तथा इन अपराधों के लिए सजा के स्व रूप को भी बदल देता है। यह छोटे एलएलपी को भी परिभाषित करता है तथा कुछ निर्णायक अधिकारियों की नियुक्ति और विशेष अदालतों की स्थापना का प्रावधान करता है।

फैक्टरिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2021 विशेष रूप से व्यापार प्राप्य छूट प्रणाली के माध्यम से ऋण सुविधा प्राप्त करने के अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की मदद करने का प्रावधान करता है। कार्य पूंजी की उपलब्धता बढ़ाता है, जिससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र के व्यवसाय में वृद्धि हो सकती है और देश में रोजगार को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।

  • परिवहन क्षेत्र में सुधार

नौवहन के लिए समुद्री सहायता विधेयक, 2021 में भारत में नौवहन के लिए सहायता के विकास, रखरखाव और प्रबंधन संबंधी प्रावधान हैं। अन्य प्रावधान हैं – नौवहन के लिए समुद्री सहायताके संचालकों का प्रशिक्षण और प्रमाणन, समुद्री सहायता के ऐतिहासिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक मूल्य का विकास; समुद्री संधियों और अंतरराष्ट्रीय उपकरणों, जिसमें भारतएक पक्ष है, के तहत दायित्व का अनुपालन सुनिश्चित करना, आदि।

अंतर्देशीय पोत विधेयक, 2021 अंतर्देशीय जल के माध्यम से किफायती और सुरक्षित परिवहन और व्यापार को बढ़ावा देता है, देश के भीतर अंतर्देशीय जलमार्ग और परिवहन से संबंधित कानून के आवेदन में एकरूपता लाता है, पोत परिवहन के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करता है, जीवन और कार्गो की सुरक्षा तथा प्रदूषण की रोकथाम के लिए प्रावधान पेश करता है, जो अंतर्देशीय जहाजों के उपयोग या सञ्चालन के कारण हो सकता है, अंतर्देशीय जल परिवहन के प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है और अंतर्देशीय जहाजों के निर्माण, सर्वेक्षण, पंजीकरण, देखभाल, परिवहन को नियंत्रित करने वाली प्रक्रियाओं को मजबूत करता है, आदि।

भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2021 “प्रमुख हवाईअड्डे” की परिभाषा में संशोधन का प्रस्ताव करता है, ताकि हवाई अड्डों के एक समूह के लिए शुल्क निर्धारित करने के दायरे का विस्तार किया जा सके और इससे छोटे हवाई अड्डों के विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

  • शैक्षिक सुधार

राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान विधेयक, 2021 खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और प्रबंधन के कुछ संस्थानों को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान घोषित करता है और खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और प्रबंधन में निर्देश और अनुसंधान प्रदान करता है।

केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2021 अन्य बातों के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश, लद्दाख में “सिंधु केंद्रीय विश्वविद्यालय” के नाम से एक विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 2009 में संशोधन करना चाहता है।

  • सामाजिक न्याय क्षेत्र में सुधार

संविधान (एक सौ सत्ताईसवां संशोधन) विधेयक, 2021 पर्याप्त रूप से यह स्पष्ट करने का प्रयास करता है कि राज्य सरकार तथा केंद्र शासित प्रदेशों को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की अपनी राज्य सूची/केंद्र शासित प्रदेश सूची तैयार करने और इसे बनाए रखने का अधिकार है।

किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2021 यह प्रावधान करता है कि अदालत की बजाय, जिला मजिस्ट्रेट (अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट सहित) गोद लेने के आदेश जारी करेंगे। विधेयक में कहा गया है कि गंभीर अपराधों में वे अपराध भी शामिल होंगे जिनके लिए अधिकतम सजा सात वर्ष से अधिक कारावास की हैऔर न्यूनतम सजा या तो निर्धारित नहीं है या सात वर्ष से कम है।

संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (संशोधन) विधेयक, 2021; अरुणाचल प्रदेश राज्य के संबंध में अनुसूचित जनजातियों की सूची को संशोधित करने का प्रावधान करता है।

  1. राज्य सभा में, नियम 176 के तहत “कोविड-19 महामारी के प्रबंधन, टीकाकरण नीति के कार्यान्वयन और संभावित तीसरी लहर की चुनौतियों” एवं “कृषि क्षेत्र की समस्यायें और समाधान” पर दो छोटी अवधि की चर्चाएं आयोजित की गईं (अनिर्णायक रहे)।
  2. इसके अलावा, एक विधेयक “न्यायाधिकरण सुधार (युक्तिसंगत बनाना और सेवा की शर्तें) विधेयक, 2021” और एक पुराना लंबित विधेयक “महिलाओं का अश्लील निरूपण (निषेध) संशोधन विधेयक, 2012” को क्रमशः लोकसभा और राज्यसभा में वापस ले लिया गया।

2014 के बाद भारी व्यवधान के बावजूद, राज्यसभा में इस सत्र के दौरान पारित विधेयकों की संख्या 2014 के बाद सबसे ज्यादा (प्रति दिन 1.1 विधेयक पारित) थी। व्यवधानों/स्थगनों के चलते 76 घंटे 26 मिनट का समय व्यर्थ हो गया और यह 2014 में राज्यसभा के 231वें सत्र के बाद व्यवधानों/स्थगनों के चलते 4 घंटे 30 मिनट के साथ प्रतिदिन औसतन सबसे ज्यादा समय का नुकसान था।

इस अराजकता और व्यवधान के बावजूद, राज्यसभा में 19 विधेयक (ओबीसी आरक्षण पर पारित संवैधानिक संशोधन सहित) पारित हुए, जो राष्ट्रीय हित में हैं और इससे ओबीसी, कामगार, उद्यमी और हमारे समाज का हर तबका लाभान्वित होगा। इससे सरकार की संसद में विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धता, उत्पादकता और क्षमता का पता चलता है, जिसका उद्देश्य अपने नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा करना है। इससे हमारे देश का भविष्य आकार लेगा। सरकार सत्र के दौरान सरकारी काम करने में सफल रही है।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

TOPIC-INDIAN POLITY

 

रोबोटिक्स और जैव-चिकित्सा अनुप्रयोगों में इस्तेमाल के लिए कम लागत वाले लचीले स्पर्श सेंसर विकसित किए गए

एक भारतीय शोधकर्ता ने कम लागत वाले नरम, लचीले और पहनने योग्य स्पर्श सेंसर विकसित किए हैं, जिनका उपयोग किसी मनुष्य में नाड़ी की गति की अस्थिरता को जानने और उसका निदान करने के लिए किया जा सकता है। एक उच्च संवेदनशीलता वाले लचीले प्रेशर/स्ट्रेनसेंसर होने के कारण इसका उपयोग रोबोटिक्स तथा प्रोस्थेटिक्स में संभावित अनुप्रयोगों के साथ-साथ न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी और ट्यूमर/कैंसर कोशिकाओं की पहचान तथा छोटे व बड़े पैमाने पर गति निगरानी के लिए भी किया जा सकता है। आईआईटी बॉम्बे की डॉ. दीप्ति गुप्ता ने भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकी कार्यक्रम के सहयोग से पॉलीयूरेथेन फोम और नैनोमेटेरियल-आधारित स्याही का उपयोग करके कम लागत वाले इन स्पर्शक (प्रेशर/स्ट्रेन) सेंसर का निर्माण किया है, जो कई सब्सट्रेट को कोट कर सकते हैं। इसके लिए संवेदन सामग्री के रूप में रिड्यूस्ड ग्रेफीन ऑक्साइड (आरजीओ) का उपयोग किया गया था। सेंसिंग सामग्री के रूप में रिड्यूस्ड ग्रेफीन ऑक्साइड (आरजीओ) पर आधारित सेंसर का निर्माण ग्रेफीन ऑक्साइड स्याही के आंतरिक हाइड्रोफोबिक व्यवहार के साथ-साथ इसमें कुछ कमी के बाद ग्रेफीन ऑक्साइड फ्लेक्स के ढेर के कारण काफी चुनौतीपूर्ण था। हाइड्राज़िन नामक एक अपचायक एजेंट और एक दोहरे घटक योजक जिसमें बेंज़िसोथियाज़ोलिनोन और मेथिलिसोथियाज़ोलिनोन जैसे यौगिक उचित अनुपात में होते हैं, इनका उपयोग हाइड्रोफिलिक नेचर के साथ आरजीओ स्याही को संश्लेषित करने के लिए किया जाता था। एक बहुत ही सरल तरीके से मल्टीवॉल कार्बन नैनोट्यूब (एमडब्ल्यूएनटीएस) के साथ मिश्रित इस हाइड्रोफिलिक आरजीओ स्याही का उपयोग करते हुए एमडब्ल्यूएनटी−आरजीओ स्याही (एमडब्ल्यूएनटी− आरजीओ@पीयू फोम) के साथ लेपित पॉलीयुरेथेन (पीयू) फोम पर आधारित प्रेशर सेंसर के निर्माण के लिए इसमें कम लागत वाला दृष्टिकोण पाया गया। एमडब्ल्यूएनटी− आरजीओ@पीयू फोम-आधारित उपकरणों को अस्थिर प्रेशर सेंसर के रूप में दिखाया गया था, जिसमें छोटे और बड़े पैमाने पर दोनों तरह की हरकतों का पता लगाने की क्षमता थी।

यह शोध एसीएस एप्लाइड मैटेरियल्स एंड इंटरफेसेज पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। वास्तविक समय में ह्यूमन रेडियल आर्टरी की पल्स तरंगों की निगरानी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक को ‘मेक इन इंडिया’ पहल के साथ जोड़ा गया है। डॉ दीप्ति गुप्ता ने इन सेंसरों के लिए 3 राष्ट्रीय पेटेंट के लिए आवेदन किया है। सूक्ष्म और बड़े पैमाने पर गति की निगरानी जैसे विभिन्न स्तरों के तनावों को समझने के लिए इस सेंसर का परीक्षण किया गया है और इसको बायोमेडिकल उपकरणों, स्किन इलेक्ट्रॉनिक्स और मिनिमल इनवेसिव सर्जरी में प्रयोग करने की संभावनाएं हैं। पहनने योग्य और रोबोटिक उपकरणों के अनुप्रयोगों के वास्ते यह महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी, तकनीकी तैयारी स्तर के तीसरे चरण में है और डॉ गुप्ता आगे भविष्य में सेंसर की एक सारणी के लिए एक प्रोटोटाइप विकसित करने की योजना बना रही हैं।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3 TOPIC –SCIENCE AND TEC.

 

डूरंडकप

दुनिया का तीसरा सबसे पुराना और एशिया का सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट जिसे डूरंड कप कहा जाता है, 5 सितंबर से 21 अक्टूबर, 2021 तक कोलकाता में आयोजित किया जायेगा।

मुख्य बिंदु

  • कोविड-19 महामारी के कारण एक साल बाद डूरंड कप का आयोजन किया जाएगा।
  • इस टूर्नामेंट का आयोजन अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF), आईएफए (पश्चिम बंगाल) और पश्चिम बंगाल सरकार के सहयोग से किया जाएगा।
  • इस वर्ष डूरंड कप का 130वां संस्करण आयोजित किया जायेगा।

डूरंड कप (Durand Cup)

डूरंड कप एक प्रतिष्ठित फुटबॉल टूर्नामेंट है। यह पहली बार 1888 में हिमाचल प्रदेश के डगशाई (Dagshai) में आयोजित किया गया था। इस टूर्नामेंट का नाम मोर्टिमर डूरंड (Mortimer Durand) के नाम पर रखा गया है। वह भारत के प्रभारी तत्कालीन विदेश सचिव थे।

टूर्नामेंट की पृष्ठभूमि

यह टूर्नामेंट ब्रिटिश सैनिकों के बीच स्वास्थ्य और फिटनेस बनाए रखने का एक तरीका था। हालांकि बाद में इसे आम नागरिकों के लिए खोल दिया गया। वर्तमान में, यह विश्व स्तर पर अग्रणी खेल आयोजनों में से एक है।

सफल टीमें

डूरंड कप की सबसे सफल टीमें मोहन बागान और ईस्ट बंगाल हैं। दोनों टीमों ने सोलह-सोलह बार जीत हासिल की है।

ट्रॉफी

विजेता टीम को तीन ट्राफियां प्रदान की जाती हैं :

  1. प्रेसिडेंट्स कप जो पहली बार डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा प्रस्तुत किया गया था।
  2. डूरंड कप – यह वास्तविक पुरस्कार और एक रोलिंग ट्रॉफी है।
  3. शिमला ट्रॉफी जो पहली बार 1903 में शिमला के नागरिकों द्वारा प्रस्तुत की गई थी। 1965 से, यह एक रोलिंग ट्रॉफी बन गई है।

SOURCE-GK TODAY

TOPIC-CURRENT AFFAIRS(PRE)

 

इसरो का GISAT-1 मिशन

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का  जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल-F10 EOS-03 मिशन अथवा GISAT-1 मिशन अपने लक्ष्य को प्राप्त करने मंम असफल हो गया है। पृथ्वी अवलोकन उपग्रह-03 (Earth Observation Satellite-03) को 12 अगस्त को सुबह लॉन्च किया किया। इस लांच के पहले दो चरणों ने ठीक से काम किया, लेंकिन क्रायोजेनिक अप्पर स्टेज में तकनीकी खामी के कारण राकेट इस उपग्रह को उचित कक्षा में स्थापित करने में विफल रहा।

GSLV-F10 EOS-03 मिशन

  • जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल-F10 (GSLV-F10) 12 अगस्त को सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC), श्रीहरिकोटा के दूसरे लॉन्च पैड से अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (EOS-03) लॉन्च करेगा।
  • EOS-03 एक अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है। इसे GSLV-F10 द्वारा जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में रखा जाएगा।
  • GSLVकी इस उड़ान में पहली बार उपग्रह 4 मीटर व्यास वाले ओगिव के आकार का पेलोड भी ले जाएगा।
  • यह जीएसएलवी की 14वीं उड़ान होगी।

जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV)

GSLV इसरो का एक एक्सपेंडेबल लॉन्च सिस्टम है। 2001 से 2018 तक 13 लांच में इसका उपयोग किया गया है। GSLV, GSLV मार्क III से पूरी तरह से अलग है, भले ही वे नाम साझा करते हैं। GSLV परियोजना को पहली बार 1990 में भू-समकालिक उपग्रहों (geosynchronous satellites) के लिए भारतीय प्रक्षेपण क्षमता हासिल करने के उद्देश्य से लॉन्च किया गया था।

क्या GSLV PSLV के समान है?

GSLV पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) लॉन्च वाहनों के प्रमुख घटकों का उपयोग करता है। इसमें ठोस रॉकेट बूस्टर S125/S139 और तरल-ईंधन वाले विकास इंजन का उपयोग किया गया है। Geostationary Transfer Orbit (GTO) में उपग्रह को इंजेक्ट करने के लिए आवश्यक थ्रस्ट के लिए तीसरा चरण एक LOX/LH2 क्रायोजेनिक इंजन द्वारा संचालित है।

इसरो के बारे में

1962 में जब भारत सरकार द्वारा भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (इन्कोस्पार) का गठन हुआ तब भारत ने अंतरिक्ष में जाने का निर्णय लिया। कर्णधार, दूरदृष्टा डॉ. विक्रम साराभाई के साथ इन्कोस्पार ने ऊपरी वायुमंडलीय अनुसंधान के लिए तिरुवनंतपुरम में थुंबा भूमध्यरेखीय राकेट प्रमोचन केंद्र (टर्ल्स) की स्थापना की।

1969 में गठित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने तत्कालीन इन्कोस्पार का अधिक्रमण किया। डॉ. विक्रम साराभाई ने राष्ट्र के विकास में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की भूमिका तथा महत्व को पहचानते हुए इसरो को विकास के लिए एजेंट के रूप में कार्य करने हेतु आवश्यक निदेश दिए। तत्पश्चात् इसरो ने राष्ट्र को अंतरिक्ष आधारित सेवाएँ प्रदान करने हेतु मिशनों पर कार्य प्रारंभ किया और उन्हें स्वदेशी तौर पर प्राप्त करने के लिए प्रैद्योगिकी विकसित की।

इन वर्षों में इसरो ने आम जनता के लिए, राष्ट्र की सेवा के लिए, अंतरिक्ष विज्ञान को लाने के अपने ध्येय को सदा बनाए रखा है। इस प्रक्रिया में, यह विश्व की छठी बृहत्तम अंतरिक्ष एजेंसी बन गया है। इसरो के पास संचार उपग्रह (इन्सैट) तथा सुदूर संवेदन (आई.आर.एस.) उपग्रहों का बृहत्तम समूह है, जो द्रुत तथा विश्वसनीय संचार एवं भू प्रेक्षण की बढ़ती मांग को पूरा करता है। इसरो राष्ट्र के लिए उपयोग विशिष्ट उपग्रह उत्पाद एवं उपकरणों का विकास कर, प्रदान करता है: जिसमें से कुछ इस प्रकार हैं – प्रसारण, संचार, मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन उपकरण, भौगोलिक सूचना प्रणाली, मानचित्रकला, नौवहन, दूर-चिकित्सा, समर्पित दूरस्थ शिक्षा संबंधी उपग्रह।

इन उपयोगों के अनुसार, संपूर्ण आत्म निर्भता हासिल करने में, लागत प्रभावी एवं विश्वसनीय प्रमोचक प्रणालियां विकसित करना आवश्यक था जो ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचक राकेट (पी.एस.एल.वी.) के रूप में उभरी। प्रतिष्ठित पी.एस.एल.वी. अपनी विश्वसनीयता एवं लागत प्रभावी होने के कारण विभिन्न देशों के उपग्रहों का सबसे प्रिय वाहक बन गया जिसने पहले कभी न हुए ऐसे अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दिया। भू तुल्यकाली उपग्रह प्रमोचक राकेट (जी.एस.एल.वी.) को अधिक भारी और अधिक माँग वाले भू तुल्यकाली संचार उपग्रहों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया।

प्रौद्योगिक क्षमता के अतिरिक्त, इसरो ने देश में विज्ञान एवं विज्ञान की शिक्षा में भी योगदान दिया है। अंतरिक्ष विभाग के तत्वावधान में सुदूर संवेदन, खगोलिकी तथा खगोल भौतिकी, वायुमंडलीय विज्ञान तथा सामान्य कार्यों में अंतरिक्ष विज्ञान के लिए विभिन्न समर्पित अनुसंधान केंद्र तथा स्वायत्त संस्थान कार्यरत हैं। वैज्ञानिक परियोजनाओं सहित इसरो के अपने चन्द्र तथा अंतरग्रहीय मिशन वैज्ञानिक समुदाय को बहुमूल्य आंकड़ा प्रदान करने के अलावा, विज्ञान शिक्षण को बढ़ावा देते हैं, जो कि विज्ञान को समृद्ध करता है।

भविष्य की तैयारी प्रौद्योगिकी में आधुनिकता बनाए रखने की कुंजी है और इसरो, जैसे-जैसे देश की आवश्यकताएं एवं आकांक्षाएं बढ़ती हैं, अपनी प्रौद्योगिकी को इष्टतमी बनाने व बढ़ाने का प्रयास करता है। इस प्रकार इसरो भारी वाहक प्रमोचितों, समानव अंतरिक्ष उड़ान परियोजनाओं, पुनरूपयोगी प्रमोचक राकेटों, सेमी-क्रायोजेनिक इंजन, एकल तथा दो चरणी कक्षा (एस.एस.टी.ओ. एवं टी.एस.टी.ओ.) राकेटों, अंतरिक्ष उपयोगों के लिए सम्मिश्र सामग्री का विकास एवं उपयोग इत्यादि के विकास में अग्रसर है। इसरो की उत्पत्ति के बारे में और जानें।

SOURCE-PIB

PAPER –G.S.3

TOPIC-SCIENCE AND TEC.