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Current Affair 15 November 2021

Current Affairs – 15 November, 2021

थोक मूल्य सूचकांक

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के आर्थिक सलाहकार के कार्यालय ने अक्टूबर 2021 (अंतिम) और अगस्त 2021 (अंतिम) के लिए थोक मूल्य सूचकांक (आधार वर्षः 2011-12) जारी किया है। अक्टूबर 2021 के महीने के लिए (अक्टूबर 2020 की तुलना में) मुद्रास्फीति की वार्षिक दर 12.54 प्रतिशत (अंतिम) है जो कि अक्टूबर 2020 में 1.31 प्रतिशत थी। अक्टूबर 2021 में मुद्रास्फीति की उच्च दर होने का प्रमुख कारण खनिज तेल, मूल धातु, खाद्य उत्पाद, कच्चा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, रसायन और रासायनिक उत्पाद आदि की कीमतों में पिछले साल के अक्टूबर महीने की तुलना में बढ़ोतरी है।

अक्टूबर, 2021 के महीने के लिए (सितंबर 2021 की तुलना में) थोक मूल्य सूचकांक में महीने दर महीने बदलाव 2.28 प्रतिशत रहा।

थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के प्रमुख समूह में माह दर माह के आधार पर परिवर्तनः

  1. प्राथमिक वस्तुएं (भारित 22.62 प्रतिशत)- इस प्रमुख समूह का सूचकांक अक्टूबर, 2021 में (3.10%) बढ़कर 159.7 (अंतिम) हो गया, जो सितंबर, 2021 के महीने के लिए 154.9 (अंतिम) था। अक्टूबर 2021 में सितंबर 2021 की तुलना में कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस (9.48%) और खाद्य पदार्थों की कीमतें (5.05) में वृद्धि देखी। सितंबर, 2021 की तुलना में अक्टूबर, 2021 में गैर-खाद्य वस्तुओं
    (-4.59%) और खनिजों (-4.16%) की कीमतों में गिरावट देखी गई।
  2. ईंधन और बिजली (भारांक 13.15%)- इस प्रमुख समूह का सूचकांक अक्टूबर, 2021 में (8.72%) बढ़कर 124.7 (अंतिम) हो गया, जो सितंबर, 2021 के महीने में 114.7 (अंतिम) था। सितंबर 2020 की तुलना में अक्टूबर 2021 के दौरान बिजली की कीमतों (18.84%) खनिज तेल (7.74%) और कोयला (0.94%) की कीमतों में वृद्धि हुई।
  3. विनिर्मित उत्पाद (भारांक 64.23%)- इस प्रमुख समूह का सूचकांक अक्टूबर, 2021 में (0.82%) बढ़कर 134.9 (अंतिम) हो गया, जो सितंबर, 2021 के महीने के लिए 133.8 (अंतिम) था। विनिर्मित उत्पादों के लिए 22 एनआईसी दहाई अंकों के समूहों में से 18 समूहों की कीमतों में वृद्धि देखी गई; 3 समूहों में कमी देखी गई और एक समूह की कीमतें सितंबर 2021 की तुलना में अक्टूबर 2021 में अपरिवर्तित रहीं। कीमतों में वृद्धि मुख्य रूप से बुनियादी धातुओं का निर्माण; रसायन और रासायनिक उत्पाद; विद्युत उपकरण; रबर और प्लास्टिक उत्पाद और वस्त्र के विनिर्माण में हुई है। कुछ समूहों की कीमतों में सितंबर 2021 की तुलना में अक्टूबर 2021 में कमी देखने को मिली जैसे- खाद्य उत्पादों का निर्माण; मोटर वाहन, ट्रेलर और अर्ध-ट्रेलर और रिकॉर्ड किए गए मीडिया की छपाई और पुनरुत्पादन। जबकि कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक और ऑप्टिकल उत्पादों के निर्माण की कीमत अक्टूबर, 2021 में सितंबर, 2021 की तुलना में अपरिवर्तित रही।
  4. डब्ल्यूपीआई खाद्य सूचकांक (भार 24.38%)- खाद्य सूचकांक, जिसमें प्राथमिक वस्‍तु समूह की ‘खाद्य वस्‍तुएं’ और निर्मित उत्पाद समूह के ‘खाद्य उत्पाद’ शामिल हैं, सितंबर, 2021 के 159.8 से बढ़कर अक्टूबर, 2021 में 164.8 हो गया है। मुद्रास्फीति की दर डब्ल्यूपीआई पर आधारित खाद्य सूचकांक सितंबर, 2021 में 1.14% से बढ़कर अक्टूबर, 2021 में 3.06% हो गया।

अगस्त 2021 महीने के लिए सूचकांक के अंतिम आंकड़े (आधार वर्षः 2011-12=100) : अगस्त 2021 महीने के लिए ‘सभी जिंसों’ के लिए थोक मूल्य सूचकांक (अंतिम) और मुद्रास्फीति दर (आधार वर्षः 2011-12=100) क्रमशः 136.2 और 11.64 % रही। अक्टूबर 2021 के लिए विभिन्न जिंस समूहों के लिए अखिल भारतीय थोक मूल्य सूचकांक और मुद्रास्फीति की दरों का विवरण अनुलग्नक I में दिया है। पिछले छह महीने में विभिन्न जिंस समूहों के लिए डब्ल्यूपीआई पर आधारित मुद्रास्फीति की वार्षिक दर (वर्ष दर वर्ष) अनुलग्नक II में है। पिछले छह महीनों में विभिन्न जिंस समूहों के लिए डब्ल्यूपीआई सूचकांक अनुलग्नक III में है।

प्रतिक्रिया दरः अक्टूबर 2021 के लिए डब्ल्यूपीआई को 73 प्रतिशत की भारित प्रतिक्रिया दर पर संकलित किया गया है, जबकि अगस्त 2021 के लिए अंतिम आंकड़ा 93 प्रतिशत की भारित प्रतिक्रिया दर पर आधारित है। डब्ल्यूपीआई के अंतिम आंकड़ों को डब्ल्यूपीआई की अंतिम संशोधन नीति के अनुसार संशोधित किया जाएगा।

थोक मूल्य सूचकांक (WPI)

  • यह थोक व्यवसायों द्वारा अन्य व्यवसायों को बेचे जाने वाले सामानों की कीमतों में बदलाव को मापता है।
  • इसे वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा प्रकाशित किया जाता है।
  • यह भारत में सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला मुद्रास्फीति संकेतक (Inflation Indicator) है।
  • इस सूचकांक की सबसे प्रमुख समस्या यह है कि आम जनता थोक मूल्य पर उत्पाद नहीं खरीदती है।
  • वर्ष 2017 में अखिल भारतीय WPI के लिये आधार वर्ष को 2004-05 से संशोधित कर 2011-12 कर दिया गया था।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

 

काशी उत्सव

काशी की प्रतिष्ठित एवं पुरातन विरासत तथा संस्कृति का उत्सव मनाने के लिए वाराणसी में तीन दिवसीय कार्यक्रम ‘काशी उत्सव’ आयोजित किया जा रहा है। विशेष रूप से इस आयोजन में गोस्वामी तुलसीदास, संत कबीर, संत रैदास, भारतेंदु हरिश्चंद्र, मुंशी प्रेमचंद और श्री जयशंकर प्रसाद जैसे सदियों पुराने कवियों तथा लेखकों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का आयोजन वाराणसी के रुद्राक्ष अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं कन्वेंशन सेंटर में 16 से 18 नवंबर, 2021 तक किया जाएगा।

भारत सरकार की पहल पर प्रगतिशील भारत के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाने के लिए ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के अंतर्गत उत्तर प्रदेश राज्य सरकार और वाराणसी प्रशासन के सहयोग से भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओर से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र- आईजीएनसीए इस कार्यक्रम की मेजबानी कर रहा है।

वाराणसी या काशी को इसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शानदार इतिहास तथा देदीप्यमान सुंदरता के कारण इस महोत्सव के लिए चुना गया है। भारत की सबसे लंबी नदी गंगा काशी से होकर बहती है और इस आयोजन के लिए चुनी गई छह दिग्गज हस्तियों सहित शहर के कलाकारों, विद्वानों तथा लेखकों के लिए यह प्रेरणा का स्रोत है। यह उत्सव काशी के प्रतिष्ठित गौरव को सामने रखने में मदद करेगा जो हरेक समयकाल की पौराणिकता को जन्म देता है।

उत्सव के प्रत्येक दिन के लिए एक विषय निर्धारित किया गया है और ये हैं: ‘काशी के हस्ताक्षर’; ‘कबीर, रैदास की बानी और निर्गुण काशी’ तथा ‘कविता और कहानी- काशी की जुबानी’। कार्य्रक्रम का पहला दिन प्रख्यात साहित्यकारों, भारतेंदु हरिश्चंद्र और श्री जयशंकर प्रसाद पर केंद्रित होगा। दूसरे दिन प्रमुख कवि संत रैदास और संत कबीर दास पर प्रकाश डाला जाएगा तथा उत्सव के अंतिम दिन गोस्वामी तुलसीदास और मुंशी प्रेमचंद केंद्र बिंदु के रूप में होंगे।

यह आयोजन पैनल चर्चा, प्रदर्शनियों, फिल्म स्क्रीनिंग, संगीत, नाटक और नृत्य प्रदर्शन के माध्यम से काशी के इन व्यक्तित्वों को प्रमुखता देगा। नामी कलाकार इस कार्यक्रम में प्रस्तुति देंगे। डॉ. कुमार विश्वास 16 नवंबर, 2021 को ‘मैं काशी हूं’ विषय पर एक कार्य्रक्रम प्रस्तुत करेंगे, जबकि सदस्य संसद श्री मनोज तिवारी महोत्सव के अंतिम दिन ‘तुलसी की काशी’ पर एक संगीतमय प्रस्तुति देंगे। उत्सव के दौरान सुश्री कलापिनी कोमकली, श्री भुवनेश कोमकली, पद्मश्री से सम्मानित श्री भारती बंधु और सुश्री मैथिली ठाकुर जैसे कलाकारों द्वारा कई भक्तिमय कार्य्रक्रम भी प्रस्तुत होने हैं।

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के कलाकारों द्वारा रानी लक्ष्मी बाई पर आधारित एक नाटक ‘खूब लड़ी मर्दानी’ प्रस्तुत किया जाएगा, जिसे 18 नवंबर, 2021 को एनएसडी के सुश्री भारती शर्मा द्वारा निर्देशित किया गया है। इसके अलावा 16 नवंबर, 2021 को श्री जयशंकर प्रसाद के महाकाव्य ‘कामायनी: डांस ड्रामा’ पर आधारित एक और नाट्य प्रस्तुति दी जाएगी। इस नाटक का निर्देशन वाराणसी के श्री व्योमेश शुक्ल ने किया है।

महोत्सव में वाराणसी पर आईजीएनसीए की फिल्मों को भी शामिल किया गया है। ये फ़िल्में हैं: श्री वीरेंद्र मिश्रा की ‘बनारस एक सांस्कृतिक प्रयोग’; श्री पंकज पाराशर द्वारा निर्देशित ‘मेरी नज़र में काशी’; श्री पंकज पाराशर द्वारा ही निर्देशित ‘मनभवन काशी’; श्री दीपक चतुर्वेदी की ‘काशी पवित्र भुगोल’; श्री सत्यप्रकाश उपाध्याय द्वारा बनाई गई ‘मेड इन बनारस’; सुश्री राधिका चंद्रशेखर द्वारा निर्देशित ‘काशी गंगा विश्वेश्वरै’; सुश्री राधिका चंद्रशेखर की ही ‘मुक्तिधाम’; श्री अर्जुन पांडे द्वारा निर्देशित ‘काशी की ऐतिहसिकता’ और श्री अर्जुन पांडे द्वारा निर्देशित ‘काशी की हस्तियां’।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.1

 

सिटमेक्स

भारतीय नौसेना पोत (आईएनएस) कर्मुक, जो एक स्वदेश निर्मित मिसाइल कार्वेट है, अंडमान सागर में दिनांक 15 से 16 नवंबर 2021 तक भारत, सिंगापुर और थाईलैंड त्रिपक्षीय समुद्री अभ्यास सिटमेक्स – 21 के तीसरे संस्करण में भाग ले रहा है। रिपब्लिक ऑफ सिंगापुर नेवी (आरएसएस) का प्रतिनिधित्व आरएसएस टीनाशियस, जो एक फॉर्मिडेबल क्लास फ्रिगेट और रॉयल थाई नेवी (आरटीएन) हिज मैजेस्टी थाईलैंड शिप (एचटीएमएस) थायनचोन द्वारा किया जा रहा है, जो एक खामरोसिन क्लास एंटी-सबमरीन पैट्रोल क्राफ्ट है।

भारतीय नौसेना, आरएसएन और आरटीएन के बीच आपसी अंतर-संचालन को बढ़ाने और सर्वोत्तम प्रथाओं को आत्मसात करने के उद्देश्य से 2019 से सिटमेक्स प्रतिवर्ष आयोजित किया जा रहा है। सिटमेक्स के पहले संस्करण की मेजबानी सितंबर 2019 में पोर्ट ब्लेयर में भारतीय नौसेना द्वारा की गई थी। आरएसएस ने नवंबर 2020 में अभ्यास के दूसरे संस्करण की मेजबानी की। अभ्यास के 2021 संस्करण की मेजबानी आरटीएन द्वारा अंडमान सागर में की जा रही है।

यह अभ्यास कोविड-19 प्रतिबंधों के मद्देनजर ‘नॉन कॉन्टैक्ट, केवल समुद्र में’ अभ्यास के रूप में आयोजित किया जा रहा है और तीन मित्र नौसेनाओं के बीच समुद्री क्षेत्र में बढ़ते तालमेल, समन्वय और सहयोग पर प्रकाश डाला गया है। दो दिनों के समुद्री अभ्यास के दौरान तीन नौसेनाएं अनेक प्रकार के युद्धाभ्यास और सरफेस वारफेयर समेत विभिन्न सामरिक अभ्यासों में शामिल होंगी।

सिटमेक्स-21 मित्रता के लंबे समय से चले आ रहे रिश्ते को मजबूत करेगा और क्षेत्र में समग्र समुद्री सुरक्षा को बढ़ाने की दिशा में भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच सहयोग को और बढ़ाएगा।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

 

केसर-ए-हिंद

मुख्यमंत्री पेमा खांडू (Pema Khandu) की अध्यक्षता में अरुणाचल प्रदेश के राज्य मंत्रिमंडल ने 13 नवंबर, 2021 को “केसर-ए-हिंद” को राज्य तितली के रूप में मंजूरी दी।

मुख्य बिंदु

  • ‘केसर-ए-हिंद’ एक बड़ी और चमकीले रंग की तितली है।
  • यह एक स्वालोटेल बटरफ्लाई है।
  • यह चीन में पाई जाती है और अब इसे अरुणाचल प्रदेश की राज्य तितली के रूप में स्वीकृत किया गया है।

कैबिनेट बैठक

  • सरकार ने पहली बार ईटानगर के बाहर कैबिनेट की बैठक की। यह पक्के टाइगर रिजर्व में आयोजित की गई थी।
  • इस बैठक के दौरान, कैबिनेट ने उत्सर्जन को कम करने और सतत विकास के उद्देश्य से ‘जलवायु परिवर्तन-लचीला और उत्तरदायी अरुणाचल प्रदेश पर पक्के टाइगर रिजर्व 2047 घोषणा’ को भी अपनाया।

केसर-ए-हिन्द

केसर-ए-हिंद को वैज्ञानिक रूप से टीनोपालपस इम्पीरियलिस (Teinopalpus imperialis) के रूप में जाना जाता है। शाब्दिक रूप से इसका अर्थ ‘भारत का सम्राट’ होता है। तितली का पंख 90-120 मिमी का होता है।

केसर-ए-हिन्द का वितरण

यह पूर्वी हिमालय के साथ छह राज्यों में जंगली इलाके में 6,000-10,000 फीट की ऊंचाई पर पाई जाती है। यह भूटान, नेपाल, लाओस, म्यांमार, दक्षिणी चीन और वियतनाम में भी पाई जाती है।

तितली की सुरक्षा स्थिति

केसर-ए-हिंद वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची II के तहत संरक्षित है। इसके बावजूद, तितली संग्राहकों को आपूर्ति के लिए उनका शिकार किया जाता है।

IUCN स्थिति

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर ने केसर-ए-हिंद को रेड लिस्ट में शामिल कर दिया है।

SOURCE-THE HINDU

PAPER-G.S.1 PRE

 

बाबासाहेब पुरंदरे

पद्म विभूषण बाबासाहेब पुरंदरे ने 15 नवंबर, 2021 को पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में अंतिम सांस लीवह 99 साल के थे और लाइफ सपोर्ट पर थे। उनका अंतिम संस्कार पुणे के वैकुंठ श्मशान घाट में किया गया।

बाबासाहेब पुरंदरे कौन थे?

बाबासाहेब पुरंदरे एक प्रसिद्ध इतिहासकार, लेखक और रंगमंच व्यक्तित्व थे। उनका पूरा नाम बलवंत मोरेश्वर पुरंदरे (Balwant Moreshwar Purandare) था। वह छत्रपति शिवाजी महाराज पर अपने काम के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने शिवाजी महाराज, उनके प्रशासन के साथ-साथ शिवाजी के युग के किलों पर कई पुस्तकें लिखीं। उन्होंने ‘जनता राजा’ का भी निर्देशन किया, जो छत्रपति के जीवन पर एक लोकप्रिय नाटक है। उनकी रचनाएँ ज्यादातर शिवाजी से संबंधित हैं, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें अक्सर शिव-शाहीर कहा जाता था।

पुरस्कार

उन्हें जनवरी 2019 में भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। उन्हें 2015 में महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था, जो कि महाराष्ट्र का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है। मध्य प्रदेश सरकार ने उन्हें नाटक के क्षेत्र में उनके कार्यों के लिए 2007-08 में कालिदास सम्मान से सम्मानित किया था।

बाबासाहेब पुरंदरे की कृतियां

पुरंदरे ने छोटी उम्र में ही शिवाजी के शासनकाल पर कहानियां लिखना शुरू कर दिया था। इन कहानियों को बाद में संकलित किया गया। उनके अन्य कार्यों में शामिल हैं-

  1. राजा शिव-छत्रपति
  2. केसरी
  3. नारायणराव पेशवा के जीवन पर एक किताब।
  4. जनता राजा नामक एक नाटक।

जनता राजा

‘जनता राजा’ नाटक शिवाजी पर एक व्यापक रूप से लोकप्रिय नाटक है। इसका पहली बार मंचन 1985 में किया गया था। तब से लेकर अब तक महाराष्ट्र, दिल्ली, आगरा, भोपाल और अमेरिका के 16 जिलों में इस नाटक का 1000 से अधिक बार मंचन किया जा चुका है। यह मूल रूप से मराठी में लिखा गया था और बाद में इसका हिंदी में अनुवाद किया गया। नाटक का प्रदर्शन आमतौर पर हर साल दिवाली के आसपास शुरू होता है। यह 200 कलाकारों, हाथियों, घोड़ों और ऊंटों द्वारा किया जाता है।

SOURCE-GK TODAY

PAPER-G.S.1 PRE

 

जनजातीय गौरव दिवस

भारत 15 नवंबर, 2021 को जनजातीय गौरव दिवस मना रहा है।

मुख्य बिंदु

  • 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस मनाने का निर्णय 10 नवंबर, 2021 को पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लिया।
  • इस दिन को भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में घोषित किया गया है।
  • यह आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को स्मरण करेगा।

15 नवंबर का महत्व

15 नवंबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बिरसा मुंडा की जयंती की तारीख है।

बिरसा मुंडा

बिरसा मुंडा ने भारत की आजादी में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने शोषक ब्रिटिश औपनिवेशिक व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई लड़ी। वह मुंडा जनजाति के थे। उन्होंने 19वीं शताब्दी में वर्तमान बिहार और झारखंड के आदिवासी क्षेत्र में एक भारतीय आदिवासी धार्मिक सहस्त्राब्दि आंदोलन का नेतृत्व किया।

जनजातीय गौरव दिवस (Janjatiya Gaurav Divas)

आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों की याद में जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाएगा। यह आने वाली पीढ़ियों को भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा किए गए बलिदानों से अवगत कराएगा। सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और राष्ट्रीय गौरव और आतिथ्य के भारतीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए आदिवासियों द्वारा किए गए प्रयासों को सम्मान देने के लिए हर साल यह दिवस मनाया जाएगा।

इस उत्सव के एक हिस्से के रूप में भारत सरकार ने आदिवासी लोगों के 75 साल के इतिहास को मनाने के लिए एक सप्ताह तक चलने वाले उत्सव की शुरुआत की। यह समारोह 15 नवंबर से 22 नवंबर, 2021 के बीच आयोजित किया जाएगा। सरकार इस दिन को मनाने के लिए कई गतिविधियों का आयोजन करेगी। प्रत्येक गतिविधि विशिष्ट विषय के तहत आयोजित की जाएगी, जिसमें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासियों की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.1