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Current Affair 22 November 2021

Current Affairs – 22 November, 2021

यूनेस्को-एबीयू पीस मीडिया अवार्ड्स 2021

गुणवत्तापूर्ण कार्यक्रम निर्माण में प्रसार भारती की उत्कृष्टता प्रदर्शित करने वाले एक और उल्लेखनीय उपलब्धि में, दूरदर्शन और आकाशवाणी द्वारा निर्मित क्रमशः टीवी और रेडियो शो को मलेशिया के कुआलालंपुर में हाल ही में आयोजित एबीयू- यूनेस्को पीस मीडिया अवार्ड्स 2021 में कई पुरस्कार मिले।

दूरदर्शन के कार्यक्रम ‘डेफिनिटली लीडिंग द वे’ ने ‘लिविंग वेल विद सुपर डायवर्सिटी’ श्रेणी के तहत एक पुरस्कार जीता, जबकि ऑल इंडिया रेडियो के कार्यक्रम ‘लिविंग ऑन द एज – द कोस्टल लाइव्स’ ने ‘प्रकृति के साथ नैतिक और सतत संबंध’ की श्रेणी में एक और पुरस्कार जीता।

यूनेस्को द्वारा एशिया पैसिफिक ब्रॉडकास्टिंग यूनियन (एबीयू) के सहयोग से ‘टुगेदर फॉर पीस’ (टी4पी) पहल के तहत पुरस्कार दिए गए। पुरस्कार वितरण समारोह 17 नवंबर, 2021 को मलेशिया के कुआलालंपुर में आयोजित किया गया था। 5 महाद्वीपों के 33 देशों से व्यक्तियों और समुदायों की सौ से अधिक प्रेरक कहानियां प्राप्त हुई थीं। प्रतियोगिता रेडियो, टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए खुली थी।

‘डेफिनिटली लीडिंग द वे’ एक विशेष रूप से विकलांग बच्चे की प्रेरक यात्रा के बारे में बात करता है। वृत्तचित्र का उद्देश्य विकलांग व्यक्तियों को सम्मान के साथ अपना जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है। वृत्तचित्र का निर्माण और निर्देशन दूरदर्शन, दिल्ली के कार्यक्रम प्रबंधक श्री प्रदीप अग्निहोत्री ने किया था। ऑल इंडिया रेडियो श्रृंखला ‘लिविंग ऑन द एज – द कोस्टल लाइव्स’ बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित एक तटीय शहर विशाखापत्तनम में किनारे पर रहने वाले मछली पकड़ने वाले समुदायों के लिए जीवन की छानबीन करती है। यह कार्यक्रम ऑल इंडिया रेडियो, दिल्ली की कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री मोनिका गुलाटी द्वारा तैयार और निर्मित किया गया था।

यू-यूनेस्को टी4पी मीडिया अवार्ड्स मानव मन में सकारात्मक शांति लाने के लिए स्वतंत्र, नैतिक पत्रकारिता और नागरिकों की मीडिया साक्षरता की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करता है और बढ़ावा देता है। सकारात्मक शांति केवल संघर्षों और युद्धों की समाप्ति नहीं है, बल्कि पर्यावरण के साथ सम्मानजनक और स्थायी संबंध रखने वाले न्यायसंगत और निष्पक्ष समाज के लिए प्रयास करना है। पुरस्कार अभिनव और रचनात्मक सामग्री को सम्मानित करने के लिए दिए जाते हैं, जो दर्शकों को सकारात्मक शांति के निर्माण के सर्वोत्तम कार्यों के बारे में बताता है और शिक्षित करता है, जिसमें सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने और कोविड-19 महामारी से बेहतर ढंग से निपटने की सोच झलकती हो।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.1 PRE

 

NEIAFMR के विस्तार की घोषणा की

आयुष मंत्री और केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में ‘North Eastern Institute of Ayurveda and Folk Medicine Research’ (NEIAFMR) का विस्तार करने की घोषणा की।

मुख्य बिंदु

  • परिसर के भीतर नए बुनियादी ढांचे को विकसित करके NEIAFMR का विस्तार किया जाएगा।
  • यह पहल अरुणाचल प्रदेश और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में आयुष क्षेत्र के विकास के दृष्टिकोण के अनुरूप शुरू की गई।
  • NEIAFMR में अतिरिक्त बुनियादी ढांचे के विकास के लिए लगभग 72 करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता होगी।
  • विकासात्मक पहल के तहत, 30 सीटों वाला एक नया आयुर्वेद कॉलेज और 60 बिस्तरों वाला एक नया आयुर्वेद अस्पताल स्थापित किया जाएगा।
  • इस प्रकार, यह पहल 86 पदों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार पैदा करेगी।

NEIAFMR

NEIAFMR आयुष मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त राष्ट्रीय संस्थान है। पासीघाट में NEIFM की स्थापना क्षेत्र के पारंपरिक स्वास्थ्य प्रथाओं और लोक चिकित्सा के व्यवस्थित अनुसंधान, प्रलेखन और सत्यापन के संचालन के लिए की गई थी। लोक चिकित्सा के सभी पहलुओं के लिए एक शीर्ष अनुसंधान केंद्र के रूप में कार्य करने और लोक चिकित्सा पद्धतियों और पारंपरिक चिकित्सकों के वैज्ञानिक अनुसंधान, सर्वेक्षण, सत्यापन और प्रलेखन के बीच एक इंटरफेस बनाने के उद्देश्य से संस्थान की स्थापना की गई थी।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जुलाई 2021 में नॉर्थ ईस्टर्न इंस्टीट्यूट ऑफ फोक मेडिसिन (NEIFM) के नामकरण को “नॉर्थ ईस्टर्न इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद एंड फोक मेडिसिन रिसर्च (NEIAFMR)” के रूप में बदलने की मंजूरी दी थी।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

 

क्रिप्टोकार्य मुथुवरियाना

वैज्ञानिकों के एक समूह ने इडुक्की में इदमालक्कुडी कॉलोनी के वन क्षेत्र से एक नई पौधों की प्रजाति की पहचान की है, जहां मुथुवर (Muthuvar) आदिवासी समुदाय रहता है।

मुख्य बिंदु

  • केरल विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू ट्रॉपिकल बॉटनिकल गार्डन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (TBGRI) के वैज्ञानिकों ने इस पौधे की पहचान की।
  • पौधे की इस नई प्रजाति का नाम ‘क्रिप्टोकार्य मुथुवरियाना’ रखा गया है, यह नाम मुथुवर आदिवासी समुदाय के नाम पर रखा गया है।
  • मुथुवर जनजातीय समुदाय जंगल के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • राज्य में पहली बार किसी पौधे की प्रजाति का नाम स्थानीय जनजातीय समुदाय के नाम पर रखा गया है।

क्रिप्टोकार्य मुथुवरियाना

पेड़ की क्रिप्टोकार्य मुथुवरियाना प्रजाति क्रिप्टोकार्य जीनस से संबंधित है। यह पेड़ लगभग 10 से 15 मीटर की ऊंचाई तक बढ़ता है।

मुथुवर जनजातीय समुदाय (Muthuvar Tribal Community)

मुथुवन समुदाय मदुरै वंश की प्रजा थी। जब इस राजवंश को हटा दिया गया, तो जीवित शाही सदस्य केरल के त्रावणकोर चले गए। वे प्रवास के दौरान शाही परिवार की देवी मदुरै मीनाक्षी की मूर्तियों को ले गए। तमिलनाडु में इसी समुदाय को दर्शाने के लिए ‘मुथुवर शब्द’ का प्रयोग किया जाता है। मुथुवन लोग इस भूमि की प्राचीन जनजातियाँ हैं। वे रागी, लेमन ग्रास और इलायची उगाते हैं।

SOURCE-GK TODAY

PAPER-G.S.1PRE

 

मेन-सीक्वेंस रेडियो पल्स एमिटर

पुणे स्थित नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स (National Centre for Radio Astrophysics – NCRA) के खगोलविदों ने आठ सितारों की खोज की है जो एक दुर्लभ श्रेणी के हैं जिन्हें मेन-सीक्वेंस रेडियो पल्स एमिटर या MRP कहा जाता है।

मुख्य बिंदु

  • पुणे में स्थित ‘जाइंट मीटर-वेव रेडियो टेलीस्कोप (GMRT)’ का उपयोग करके MRP की खोज की गई।
  • वैज्ञानिकों के समूह ने दुर्लभ श्रेणी के रेडियो सितारों की खोज की जो सूर्य से भी अधिक गर्म होते हैं। उनके पास असामान्य रूप से मजबूत चुंबकीय क्षेत्र हैं। इसके परिणामस्वरूप, ये तारे प्रकाश स्तंभ की तरह चमकीले रेडियो स्पंदनों का उत्सर्जन करते हैं।
  • टीम ने पूर्व में जाइंट मीटर-वेव रेडियो टेलीस्कोप (GMRT) का उपयोग करते हुए इसी तरह के तीन और सितारों की खोज की थी।
  • इस प्रकार, अब तक 15 ज्ञात MRP हैं।

पहली MRP की खोज

पहली MRP 2000 में खोजी गई थी। GMRT की उच्च संवेदनशीलता के परिणामस्वरूप इसकी खोज की गई थी।

जाइंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (Giant Metrewave Radio Telescope – GMRT)

GMRT पुणे के पास स्थित है। यह तीस पूरी तरह से चलाने योग्य परवलयिक रेडियो दूरबीनों की एक सरणी है। इसका व्यास 45 मीटर है, जो मीटर तरंगदैर्घ्य (wavelength) पर प्रेक्षण करता है। यह टेलीस्कोप नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स (NCRA) द्वारा संचालित है, जो टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, मुंबई का एक हिस्सा है। इसकी कल्पना और निर्माण 1984 से 1996 के दौरान किया गया था। GMRT को हाल ही में नए रिसीवरों के साथ अपग्रेड किया गया था, जिसके बाद इसे अपग्रेडेड जाइंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (uGMRT) के रूप में जाना जाता है।

नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स (National Centre for Radio Astrophysics – NCRA)-NCRA एक शोध संस्थान है, जो रेडियो खगोल विज्ञान के क्षेत्र में काम करता है। यह पुणे विश्वविद्यालय परिसर में स्थित है। NCRA का खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी के कई क्षेत्रों जैसे सूर्य, पल्सर, इंटरप्लेनेटरी स्किंटिलेशन, सक्रिय आकाशगंगा, इंटरस्टेलर माध्यम आदि के अध्ययन में सक्रिय अनुसंधान कार्यक्रम हैं।

SOURCE-THE HINDU

PAPER-G.S.3

 

अनिवार्य बीआईएस मानकों का उल्लंघन

स्वतंत्रता के 75वें वर्ष – ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत हो रहे समारोहों के भाग के रूप में, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने ऐसे कृत्रिम और नकली सामानों की बिक्री रोकने का एक देशव्यापी अभियान शुरू किया है, जो केन्द्र सरकार द्वारा प्रकाशित गुणवत्ता नियंत्रण आदेश का उल्लंघन करते हों।

इस संबंध में सीसीपीए पहले ही अनुचित व्यापार व्यवहार और ऐसे सामानों के विनिर्माण या बिक्री से संबंधित उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन की जांच के लिए देश भर के जिलाधिकारियों को दिशानिर्देश जारी कर चुका है। अभियान के लिए चिह्नित किए गए आवश्यक, दैनिक उपयोग के सामानों में हेलमेट, प्रेशर कुकर और कुकिंग गैस सिलिंडर शामिल हैं।

अभियान को आगे बढ़ाने के लिए, सीसीपीए ने केन्द्र सरकार द्वारा 21 जनवरी, 2020 को जारी घरेलू प्रेशर कुकर (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश, 2020 का उल्लंघन करते हुए ई-कॉमर्स एंटिटी पर प्रेशर कुकरों की बिक्री के मामलों को स्वतः संज्ञान लिया है। उक्त आदेश के द्वारा, घरेलू प्रेशर कुकर को भारतीय मानक आईएस 2347:2017 के अनुरूप होना और 1 अगस्त 2020 से प्रभावी बीआईएस से लाइसेंस के तहत स्टैंडर्ड चिह्न का होना अनिवार्य है।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(10) के तहत “डिफेक्ट” का मतलब गुणवत्ता, मात्रा, शक्ति, शुद्धता या मानक में कोई दोष, अपूर्णता या कमी है, जिसे किसी भी सामान या उत्पाद के संबंध में किसी भी तरह से या किसी भी अनुबंध, अभिव्यक्ति या सूचना या ट्रेडर द्वारा किए गए दावे या लागू कानून के तहत बनाए रखा जाना आवश्यक है और इस क्रम में उसे “दोषपूर्ण” समझा जाएगा।

इस प्रकार, अनिवार्य मानकों के अनुरूप नहीं होने वाले प्रेशर कुकरों को अधिनियम के अंतर्गत ‘दोषपूर्ण’ माना जाता है।

साथ ही, अधिनियम की धारा 2(47) के तहत वर्णित ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ में किसी भी अनुचित तरीके या इस्तेमाल करने के इरादे या उपभोक्ताओं द्वारा इस्तेमाल की संभावना वाले से सामान की बिक्री या आपूर्ति को मंजूरी देकर प्रक्रिया को भ्रमित करना, यह जानने या विश्वास करने का कारण होना कि माल प्रदर्शन, संरचना, सामग्री, डिजाइन, निर्माण, परिष्करण या पैकेजिंग से संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित मानकों का पालन शामिल है, जो उपयोग करने वाले व्यक्ति को चोट के जोखिम को रोकने या कम करने के लिए आवश्यक हैं।

उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 का नियम 4(2) विशेष रूप से कहता है कि कोई भी ई-कॉमर्स एंटिटी व्यवसाय के दौरान अपने प्लेटफॉर्म पर या किसी अन्य रूप में अनुचित व्यापार व्यवहार नहीं अपनाएगी।

इसके साथ ही, बीआईएस अधिनियम की धारा 17 किसी भी व्यक्ति को ऐसे किसी भी सामान या वस्तु के विनिर्माण, आयात, वितरण, बिक्री, किराये पर लेने, लीज, स्टोर या बिक्री के लिए प्रदर्शन से रोकती है, जिसके लिए केंद्र सरकार द्वारा धारा 16(1) के तहत मानक चिह्न के अनिवार्य उपयोग करने का निर्देश प्रकाशित किया गया है।

इसके अलावा, धारा 29(3) और (4), धारा 17 के उल्लंघन के जुर्माने और इसे संज्ञेय अपराध के रूप में मानने का उल्लेख करता है।

सीसीपीए ने नोटिस जारी होने के 7 दिन के भीतर ई-कॉमर्स इकाइयों से प्रतिक्रिया मांगी है, ऐसा करने में नाकाम रहने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के तहत आवश्यक कार्रवाई शुरू की जा सकती है।

सीसीपीए ने मामले का तत्काल संज्ञान लेने और आवश्यक कार्रवाई करने के लिए डीजी बीआईएस को भी लिखा है।

बीआईएस के विषय में

बीआईएस भारत का राष्ट्रीय मानक निकाय है जिसकी स्था‍पना बीआईएस अधिनियम 2016 के अंतर्गत की गई। बीआईएस की स्था्पना वस्तु ओं के मानकीकरण, मुहरांकन और गुणता प्रमाणन गतिविधियों के सुमेलित विकास तथा उससे जुडे़ या उससे प्रसंगवश जुड़े मामलों के लिए की गई। बीआईएस मानकीकरण, प्रमाणन और परीक्षण द्वारा राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष एवं वास्तनविक रूप से कई तरह से लाभ पहुंचा रहा है –यह सुरक्षित विश्‍वसनीय गुणता वाले उत्पाद प्रदान करता है; उपभोक्‍ताओं के स्‍वास्‍थ्‍य जोखिम को न्‍यून करता है; निर्यात एवं आयात विकल्‍पों को प्रोत्‍साहित करता है; किस्‍मों के प्रसार को नियंत्रित करता है इत्‍यादि, इत्‍यादि।

उपभोक्ताओं तथा उद्योगों के हित को ध्यान में रखते हुए बीआईएस नीचे किए गए कई कार्य करता है :

  • मानक निर्धारण
  • उत्पादन प्रमाणन योजना
  • अनिवार्य पंजीकरण योजना
  • विदेशी निर्माता प्रमाणन योजना
  • हॉलमार्किंग योजना
  • प्रयोगशाला सेवाएं
  • प्रयोगशाला मान्ययता योजना
  • भारतीय मानकों की बिक्री
  • उपभोक्ता मामले गतिविधियां
  • प्रोत्सातहन गति‍विधियां
  • राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तंर की प्रशिक्षण सेवाएं
  • सूचना सेवाएं

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

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