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Current Affair 5 October 2021

Current Affairs – 5 October, 2021

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-पाम ऑयल पर व्यापार शिखर सम्मेलन

पूर्वोत्तर राज्यों के लिए राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-पाम ऑयल पर व्यापार शिखर सम्मेलन आज गुवाहाटी में आयोजित किया गया। पूर्वोत्तर के समग्र और संतुलित विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए सम्मेलन की शुरुआत केंद्रीय कृषि मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर की अध्यक्षता में पाम ऑयल पौधे को सींचने और इसके वृक्षारोपण पर एक फिल्म के प्रदर्शन के साथ हुई।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि पाम ऑयल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पूर्वोत्तर राज्यों में बड़ी पहलों के जरिये सरकार के निर्णय से पूर्वोत्तर राज्यों को देश के पाम ऑयल हब में परिवर्तित किया जाएगा। श्री तोमर ने फसल के बेहतर उत्पादन के लिए समान भूमिका निभाने पर जोर दिया और बीज नर्सरी, ड्रिप सिंचाई, तकनीकी सहायता, मिलों की स्थापना, खरीद केंद्र तथा किसानों के प्रशिक्षण हेतु बड़ा निवेश करने का आश्वासन दिया। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विशेष पैकेज और सहायता मिलने से किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति बदलेगी तथा बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ यहां स्थापित ऑयल पाम मिलों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

पाम ऑयल क्या है, इसे किस चीज से बनाया जाता है

पाम ऑयल वनस्पति तेल है। दुनिया में इसका व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल होता है। होटल, रेस्तरां में भी पाम तेल का इस्तेमाल खाद्य तेल की तरह होता है। इसके अलावा कई उद्योगों में इसका इस्तेमाल होता है। नहाने वाला साबुन बनाने में भी पाम तेल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। पाम तेल ताड़ के पेड़ के बीजों से निकाला जाता है। इसमें कोई महक नहीं होती। जिसकी वजह से हर तरह का खाना बनाने में इसका इस्तेमाल किया जाता है। यह बहुत ऊंचे तापमान पर पिघलता है। इसमें सैचुरेटेड फैट बहुत अधिक होता है। यही वजह है कि इससे मुंह में पिघल जाने वाली क्रीम और टॉफी-चॉकलेट बनाये जाते हैं। फिलहाल दुनियाभर में 8 करोड़ टन के आसपास पाम ऑयल पैदा होता है।

पाम तेल उत्पादन में इंडोनीशिया दुनिया में नंबर एक पर है। दूसरे नंबर पर है मलेशिया है। कुछ अफ्रीकी देशों में भी इसका उत्पादन होता है। खाने वाले तेलों के मामले में भारत के आयात का दो तिहाई हिस्सा केवल पाम ऑयल का है। भारत सालाना करीब 90 लाख टन पाम ऑयल का आयात करता है। भारत में इंडोनीशिया और मलेशिया दोनों ही देशों से पाम ऑयल का आयात किया जाता है। भारत अपने कुल आयात का 70 फीसदी पाम ऑयल इंडोनीशिया से खरीदता है, वहीं 30 फीसदी मलेशिया से खरीदता है। कुछ महीनों पहले भारत ने राजनीतिक कारणों से मलेशिया से पाम तेल खरीदना बंद कर दिया था। लेकिन अब फिर से इसका आयात हो रहा है। हालांकि, भारतीय कारोबारियों ने मलेशिया से पाम ऑयल का आयात पहले के मुकाबले कम कर दिया है।

खाने वाला तेल पाम ऑयल इतना विवादित क्यों

खाने में इस्तेमाल होने वाले तेल के रूप में पाम ऑयल का उपयोग 5000 सालों से हो रहा है, लेकिन जब तब इसे लेकर विवाद उठते रहते हैं। क्या वजह है कि इसे दुनिया का सबसे विवादित खाने का तेल भी कहा जाता है।

पश्चिम अफ्रीका में पैदाइश

पाम ऑयल ट्री या खजूर का पेड़ पश्चिम अफ्रीका के जंगलों में पैदा हुआ। यहां से ब्रिटिश इसे 1870 में सजावटी पौधे के रूप में मलेशिया लेकर गए और फिर वहां से यह दूसरे देशों में गया। भारत, चीन, इंडोनेशिया और यूरोप में मुख्य रूप से इसका इस्तेमाल होता है।

ऊंचा पेड़ खजूर का

करीब 60 फीट ऊंचे इस पेड़ से फल आने में करीब 30 महीने लगते हैं और उसके बाद यह अगले 20-30 सालों तक फल देता है। पाम ऑयल का इस्तेमाल खाने के साथ ही कई और चीजों में भी होता है इनमें बिस्किट, आइसक्रीम, चॉकलेट स्प्रेड के अलावा साबुन, कॉस्मेटिक और बायोफ्यूल भी शामिल है।

मुनाफे की खेती

इनके अलावा थाईलैंड, इक्वाडोर, नाइजीरिया और घाना में भी पाम ऑयल का उत्पादन होता है। खाने वाले दूसरे तेलों की तुलना में पाम ऑयल की खेती फायदेमंद हैं क्योंकि कृषि भूमि पर इसकी पैदावार करीब 4-10 गुना ज्यादा होती है।

खजूर के लिए जंगल साफ

दुनिया के कुछ इलाकों में खजूर के पेड़ लगाने के लिए जंगल साफ कर दिए गए और यह अब भी जारी है। हालांकि कंपनियों ने ऐसा नहीं करने का वचन दिया था। जंगलों के लिए काम करने वाले लोग दक्षिण पू्र्वी एशिया में कंपनियों पर हर साल जंगलों को काटने और जलाने का आरोप लगाते हैं।

मजदूरों का शोषण

मलेशिया और इंडोनेशिया में 40 फीसदी से ज्यादा खजूर के बाग छोटे किसानों के स्वामित्व में हैं। इन छोटे किसानों को नियमों में बांधना मुश्किल साबित हो रहा है, इन्हीं लोगों पर प्रकृति का दोहन और मजदूरों का शोषण करने के आरोप हैं।

कंपनियों पर दबाव

खजूर के बागों में किसानों पर मजदूरों का शोषण करने के भी आरोप हैं। कई देशों में इसे लेकर भारी विरोध भी हुआ, कंपनियों पर इस बात के लिए दबाव बनाया जा रहा है कि वे उचित मजदूरी देने वाले फार्म से ही तेल खरीदें।

जंगल की आग

किसानों की लगाई आग से पर्यावरण का बहुत नुकसान होता है बावजूद इसके यह वर्षों से जारी है। कई बार तो इनकी वजह से आपात स्थिति पैदा हो जाती है। 2013 में मलेशिया में ऐसा ही हुआ था।

यूरोप में सख्त नियम

बेल्जियम, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स और ब्रिटेन 2020 तक सौ फीसदी टिकाऊ तरीके से पाम ऑयल का उत्पादन करने की तैयारी या तो कर चुके हैं या पूरी कर लेंगे।

टिकाऊ तरीके से तेल

यूरोप के खाने में इस्तेमाल होने वाला करीब 60 फीसदी पाम ऑयल पहले से ही टिकाऊ तरीके से हासिल किया जा रहा है। यहां 2021 से इस तेल को वाहन के ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने पर भी रोक लग जाएगी।

कैंसर का खतरा!

पाम ऑयल के इस्तेमाल से कैंसर का खतरा होने की बात कही जाती है लेकिन इटली के मशहूर कंफेक्शनरी फेरेरो ने सार्वजनिक रूप से पाम ऑयल का बचाव किया है और उसका दावा है कि ऐसा कोई खतरा नहीं।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.1

 

मिठाई मिहिदाना

स्वदेशी तथा भौगोलिक पहचान (जीआई) टैग वाले उत्पादों को बढ़ावा देने के एक प्रयत्न के रूप में, पश्चिम बंगाल के बर्धमान से सोर्स की गई मिठाई मिहिदाना की पहली खेप बहरीन निर्यात कर दी गई है।

अनूठी मिठाई मिहिदाना की किस्त कोलकाता की एपीडा पंजीकृत मेसर्स डीएम एंटरप्राइजेज द्वारा निर्यात तथा बहरीन के अलजजीरा ग्रुप द्वारा आयात की गई। पश्चिम बंगाल की इस मिठाई का प्रदर्शन बहरीन में अलजजीरा सुपर स्टोर्स में उपभोक्ताओं के समक्ष (इसका स्वाद लेने के उद्देश्य से भी उपलब्ध कराया गया) किया जा रहा है। इस अनूठी मिठाई की और अधिक खेप आगामी दीवाली त्योहार के दौरान निर्यात की जाएंगी।

हाल ही में, पश्चिम बंगाल के जयनगर में पोप्ड-राइस बॉल तथा ताजे खजूर के गुड़ से तैयार एक सदी पुराने मीठे पकवान-जयनगर मोआ की ऐतिहासिक विरासत का समारोह मनाने के लिए इंडिया पोस्ट ने एपीडा के सहयोग से एक विशेष रूप से डिजाइन किया गया लिफाफा जारी किया था।

जनवरी, 2021 में जयनगर मोआ की एक खेप कोलकाता की एपीडा पंजीकृत मेसर्स डीएम एंटरप्राइजेज द्वारा निर्यात की गई थी। एपीडा देश से कम ज्ञात, स्वदेशी तथा जीआई टैग वाले खाद्य उत्पादों को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करता रहा है।

अगस्त, 2021 में इंडिया पोस्ट ने पश्चिम बंगाल के मीठे पकवानों मिहिदाना और सीताभोग पर एक विशेष कवर जारी किया था। पश्चिम बंगाल के बर्धमान को 2017 में एक सदी पुराने मीठे पकवानों के लिए जीआई टैग प्राप्त हुआ था।

जीआई टैग एक विशिष्ट भौगोलिक मूल को उल्लेखित करने वाला एक प्रतीक है और इसमें वैसी गुणवत्ता होती है या उस मूल के कारण वह विख्यात होता है। जीआई एक प्रकार का बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) होता है जो आईपीआर के अन्य रूपों से भिन्न होता है क्योंकि यह एक विशेष रूप से निर्धारित स्थान में समुदाय की विशिष्टता को श्रेय देता है, बजाये किसी व्यक्ति विशेष के जैसाकि ट्रेडमार्क या पैटेंटों के मामले में होता है।

जीआई टैग कृषि संबंधी, प्राकृतिक या विनिर्मित्त वस्तुओं के लिए जारी किया जा सकता है जिनमें अनूठे गुण, ख्याति या इसके भौगोलिक उद्भव के कारण जुड़ी अन्य लक्षणगत विशेषताएं होती हैं। दार्जिलिंग चाय, बासमती चावल, कांचीपुरम सिल्क, मैसूर सिल्‍क, हैदराबादी हलीम, नगालैंड मिर्च उत्पाद, आदि जीआई टैग के साथ बेचे जाते हैं जिनके प्रीमियम मूल्य होते हैं।

एपीडा खाद्य उत्पादों के निर्यात के लिए बाजार संवर्धन गतिविधियां, सूचित निर्णय लेने के लिए बाजार आसूचना, अंतरराष्ट्रीय ज्ञानवर्धन, कौशल विकास, क्षमता निर्माण तथा उच्च गुणवत्ता वाली पैकेजिंग का कार्य करता है।

एपीडा भारत के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात मानचित्र में अनूठे और जीआई प्रमाणित उत्पादों को लाने के लिए प्रमोशन संबंधी गतिविधियां आयोजित करता रहा है। एपीडा सभी राज्यों में पैक हाउसों की स्थापना के लिए सहायता उपलब्ध कराता है जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में ताजे फल और सब्जियों के निर्यात के लिए अनिवार्य अपेक्षाओं या अवसंरचना की आवश्यकताओं को पूरा करेगा।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.1&3

 

समुद्री अभ्यास जिमेक्स

भारतीय नौसेना और जापान मैरीटाइम सेल्फ डिफेंस फोर्स के बीच भारत-जापान द्विपक्षीय सामुद्रिक अभ्यास, जिमेक्स का पांचवां संस्करण दिनांक 6 से 8 अक्टूबर 2021 तक अरब सागर में आयोजित किया जाएगा। अभ्यास की जिमेक्स श्रृंखला जनवरी 2012 में समुद्री सुरक्षा सहयोग पर विशेष ध्यान देने के साथ शुरू हुई। जिमेक्स का पिछला संस्करण सितंबर 2020 में आयोजित किया गया था।

फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग वेस्टर्न फ्लीट रियर एडमिरल अजय कोचर की कमान में स्वदेश निर्मित गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ डिस्ट्रॉयर कोच्चि और गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट तेग, भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्व करेंगे। जापान मेरीटाइम सेल्फ डिफेंस फ़ोर्स का प्रतिनिधित्व जेएमएसडीएफ जहाज कागा, जो एक इज़ुमो क्लास हेलीकॉप्टर कैरियर है और मुरासामे, एक गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर द्वारा किया जाएगा, जिसका नेतृत्व रियर एडमिरल इकेउचीलज़ुरु, कमांडर एस्कॉर्ट फ्लोटिला-3 (सीसीएफ-3) करेंगे। इन जहाजों के अलावा, पी8आई लॉन्ग रेंज मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट, डोर्नियर मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट, इंटीग्रल हेलीकॉप्टर और मिग 29 के फाइटर एयरक्राफ्ट भी अभ्यास में भाग लेंगे।

जिमेक्स-21 का उद्देश्य समुद्री अभियानों के समस्त आयामों में अनेक उन्नत अभ्यासों के संचालन के माध्यम से अभियानगत प्रक्रियाओं की सामान्य समझ विकसित करना और अंतर-संचालन क्षमता को बढ़ाना है। हथियारों से फायरिंग, क्रॉस-डेक हेलीकॉप्टर संचालन और कॉम्प्लेक्स सरफेस, पनडुब्बी रोधी तथा एयर वॉरफेयर अभ्यास से जुड़े बहुआयामी सामरिक युद्धाभ्यास दोनों नौसेनाओं द्वारा निर्मित समन्वय को मजबूत करेंगे।

पिछले कुछ वर्षों में भारत एवं जापान के बीच नौसेना सहयोग का दायरा और जटिलता बढ़ी है। जिमेक्स-21 दोनों नौसेनाओं के बीच सहयोग और आपसी विश्वास को और बढ़ाएगा तथा दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही दोस्ती को मजबूत करेगा।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

 

स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री मनसुख मांडविया ने आज यूनिसेफ के ग्लोबल फ्लैगशिप पब्लिकेशन – “2021 में दुनिया भर में बच्चों की वर्तमान स्थिति, बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, संरक्षित करने और देखभाल करने के शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की है (“द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन 2021; ऑन माय माइंड: प्रोमोटिंग, प्रोटेक्टिव एंड केयरिंग फॉर चिल्ड्रनस मेंटल हेल्थ”)। इस रिपोर्ट में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर कोविड-19 महामारी के प्रभावों का विवरण दिया गया है।

रिपोर्ट को आज वैश्विक स्तर पर पेश किया गया। मानसिक स्वास्थ्य पर केंद्रित रिपोर्ट के महत्व के बारे में बताते हुए, श्री मांडविया ने कहा, “मानसिक स्वास्थ्य एक पुराना मुद्दा और उभरता हुआ मुद्दा है। जहां हमारी पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली समग्र स्वास्थ्य और पूर्ण कल्याण पर जोर देती है, भारत जैसे विकासशील देशों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं।” ग्रामीण-कृषि पृष्ठभूमि वाले अपने स्वयं के संयुक्त परिवार का उदाहरण देते हुए, उन्होंने समझाया कि इस तरह के वातावरण में बच्चों और किशोरों को परिवार के अन्य सदस्यों के साथ बातचीत करने का मौका मिलता है, जिनसे वे भावनात्मक संकट के समय अपने मन की बात कर सकते हैं और उन विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं जिनपर कभी-कभी माता-पिता बात करने से बचते हैं। उन्होंने कहा कि एकल परिवारों की संस्कृति के कारण अलगाव में वृद्धि हुई है और परिणामस्वरूप मानसिक तनाव बढ़ गया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि “कोविड-19 पूरे समाज के लिए मानसिक तनाव की परीक्षा थी। उन्होंने कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान औषधि मंत्री के रूप में अपने व्यक्तिगत अनुभव को याद किया। उन्होंने कहा, “दवाओं की उत्पादन क्षमता को बढ़ाना पड़ा और नए संयंत्र स्थापित करने की उचित आधिकारिक प्रक्रिया को तेज करना पड़ा। उस दौरान जारी मानवीय त्रासदी के बीच इस तरह का काम बहुत तनावपूर्ण था।” उन्होंने आगे कहा कि योग अभ्यास, गहरी सांस लेने और नियमित साइकिल चलाने से इस तनावपूर्ण स्थिति से उबरने में मदद मिली है।

श्री मांडविया ने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए मानसिक स्वास्थ्य को एक महत्वपूर्ण पहलू के रूप में देखना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि माता-पिता और परिवार के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर ध्यान देने के लिए शिक्षक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। परिवार और शिक्षकों को आपसी विश्वास एवं सम्मान की स्थिति के साथ बच्चों के साथ खुलकर चर्चा करनी चाहिए।

भारत में यूनिसेफ के प्रतिनिधि डॉ. यास्मीन अली हक ने रिपोर्ट के कुछ प्रमुख निष्कर्ष प्रस्तुत किए। स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन 2021 ने पाया है कि भारत में 15 से 24 साल के लोगों में से लगभग 14 प्रतिशत या सात में से एक ने यह कहा कि उसने खुद को अवसादग्रस्त महसूस किया या चीजों को करने में उसकी बहुत कम दिलचस्पी थी। उन्होंने कहा, “बच्चे ना केवल मानसिक पीड़ा का जीवन जी रहे हैं, बल्कि उनमें से कई को उपेक्षा और दुर्व्यवहार का खतरा है।

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ)

यूनिसेफ का इतिहास

  • संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (United Nations Children’s Fund-UNICEF) संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 11 दिसंबर, 1946 को बनाया गया था।
  • पूर्व में इसे संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष (United Nations International Children’s Emergency Fund) कहा जाता था।
  • पोलैंड के चिकित्सक लुडविक रॉश्मन ने यूनिसेफ का गठन करने में प्रमुख भूमिका निभाई।
  • इसे बनाने का प्रमुख उद्देश्य द्वितीय विश्वयुद्ध में तबाह हुए देशों में बच्चों और माताओं को आपातकालीन स्थिति में भोजन और स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना था।
  • 1950 में यूनिसेफ के दायरे को विकासशील देशों में बच्चों और महिलाओं की दीर्घकालिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिये विस्तारित किया गया था।
  • 1953 में यह संयुक्त राष्ट्र का एक स्थायी हिस्सा बन गया और इस संगठन के नाम में से ‘अंतर्राष्ट्रीय’ एवं ‘आपातकालीन’ शब्दों को हटा दिया गया।
  • अब इसका नाम संयुक्त राष्ट्र बाल कोष है किंतु मूल संक्षिप्त नाम ‘यूनिसेफ’ को बरकरार रखा गया।

वित्तीय स्थिति

  • यूनिसेफ का वित्त पोषण विभिन्न सरकारों और निजी दाताओं द्वारा किया जाता है। संगठन के संसाधनों का दो-तिहाई योगदान विभिन्न देशों की सरकारें करती हैं।
  • निजी समूहों और व्यक्तियों द्वारा राष्ट्रीय समितियों के माध्यम से शेष योगदान किया जाता है। यह अनुमान लगाया जाता है कि यूनिसेफ के राजस्व का 92 प्रतिशत सेवा कार्यक्रम के लिये वितरित किया जाता है।
  • यूनिसेफ के कार्यक्रम बच्चों के स्वास्थ्य और भलाई को बढ़ावा देने के लिये सामुदायिक स्तर की सेवाओं को विकसित करने पर ज़ोर देते हैं।
  • यूनिसेफ को वर्ष 1965 में नोबेल शांति पुरस्कार, वर्ष 1989 में इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार और वर्ष 2006 में प्रिंस ऑफ अस्तुरियस अवॉर्ड मिला था

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

 

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 3 सितंबर 2021 को नए नियमों के साथ राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड के गठन को अधिसूचित कर दिया है। ये नियम बोर्ड की संरचना, इसके अध्यक्ष एवं सदस्यों के लिए पात्रता, चयन प्रक्रिया, कार्यकाल की अवधि, त्यागपत्र और निष्कासन की प्रक्रिया, बोर्ड की शक्तियां व कार्य तथा बोर्ड की बैठकों इत्यादि के बारे में प्रावधानों को स्पष्ट रूप से बताते हैं।

बोर्ड का प्रधान कार्यालय राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में स्थित होगा और यह भारत में अन्य स्थानों पर कार्यालय स्थापित कर सकता है। बोर्ड में अध्यक्ष की नियुक्ति की जाएगी, जिनकी संख्या कम से कम तीन हो सकती है, जबकि अधिकतम सात सदस्य तक हो सकते हैं। इन्हें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा।

बोर्ड सड़क सुरक्षा, नवाचार को बढ़ावा देने और नई तकनीक को अपनाने तथा यातायात व मोटर वाहनों को विनियमित करने के लिए जिम्मेदार होगा। इस प्रयोजन के लिए, अन्य बातों के साथ-साथ, बोर्ड ये कार्य करेगा:-

  1. (अ) पहाड़ी क्षेत्रों के लिए सड़क सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और सड़क निर्माण के लिए विशिष्ट मानक तैयार करना; (ब) यातायात पुलिस, अस्पताल प्राधिकरणों, राजमार्ग प्राधिकरणों, शैक्षिक एवं अनुसंधान संगठनों और अन्य संगठनों के लिए क्षमता निर्माण तथा कौशल विकास के लिए दिशानिर्देश तय करना; (स) केंद्र सरकार के विचारार्थ ट्रॉमा सुविधाओं और पैरा-मेडिकल सुविधाओं की स्थापना तथा संचालन के लिए दिशानिर्देश तैयार करना।
  2. सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन पर केंद्र सरकार, राज्य सरकारों तथा स्थानीय प्राधिकरणों को तकनीकी सलाह व सहायता प्रदान करना;
  3. (अ) मुसीबत में मदद करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना; (ब) सड़क सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन में अच्छे तौर-तरीकों को प्रोत्साहन देना; (स) वाहन इंजीनियरिंग क्षेत्र में नई वाहन प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना; (द) अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ समन्वय; तथा (य) अंतरराष्ट्रीय तकनीकी मानकों और घरेलू तकनीकी मानकों के बीच निरंतरता को बढ़ाना।
  4. सड़क सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, दुर्घटना जांच में सुधार के लिए अनुसंधान करना।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

 

चिकित्सा में नोबेल पुरस्कार 2021

4 अक्टूबर, 2021 को, अमेरिकी वैज्ञानिक डेविड जूलियस (David Julius) और अर्देम पटापाउटियन (Ardem Patapoutian) ने प्रतिष्ठित “2021 चिकित्सा के लिए नोबेल पुरस्कार” (2021 Nobel Prize for Medicine) जीता।

मुख्य बिंदु

  • उन्होंने तापमान और स्पर्श के लिए रिसेप्टर्स की अपनी खोजों के लिए यह पुरस्कार जीता।
  • पुरस्कार देने वाली संस्था के अनुसार, ये खोजें नई दर्द निवारक दवाओं के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं।
  • इन खोजों से यह समझने में मदद मिली है कि कैसे गर्मी, ठंड और यांत्रिक बल तंत्रिका आवेगों (nerve impulses ) को शुरू करते हैं जो बदले में मनुष्यों को दुनिया को समझने और अनुकूलित करने की अनुमति देते हैं।
  • इस विकास और ज्ञान का उपयोग पुराने दर्द सहित कई रोग स्थितियों के लिए उपचार विकसित करने के लिए किया जा रहा है।
  • इस वर्ष, फिजियोलॉजी या मेडिसिन के लिए नोबेल पुरस्कार दोनों विजेताओं द्वारा समान भागों में साझा किया गया है।

नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize)

“विज्ञान, साहित्य और शांति” के लिए प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार स्वीडिश डायनामाइट आविष्कारक और व्यवसायी अल्फ्रेड नोबेल के नाम पर दिए जाते हैं। यह पुरस्कार 1901 से दिया जा रहा है। अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार पहली बार 1969 में दिया गया था।

अर्देम पटापाउटियन (Ardem Patapoutian) कौन हैं?

अर्देम पटापाउटियन का जन्म 1967 में लेबनान में अर्मेनियाई माता-पिता के यहाँ हुआ था। वह अपनी युवावस्था में लॉस एंजिल्स चले गए और वर्तमान में वे स्क्रिप्स रिसर्च, ला जोला, कैलिफोर्निया में प्रोफेसर हैं। उन्होंने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन फ्रांसिस्को के साथ-साथ कैलिफोर्निया प्रौद्योगिकी संस्थान, पासाडेना में शोध किया है।

डेविड जूलियस (David Julius) कौन है?

डेविस जूलियस का जन्म न्यूयॉर्क में हुआ था। वह कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन फ्रांसिस्को में प्रोफेसर हैं।

SOURCE-GK TODAY

PAPER-G.S.1 PRE

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