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Current Affair 6 October 2021

Current Affairs – 6 October, 2021

पीएम केयर्स

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 7 अक्टूबर, 2021 को सुबह 11 बजे उत्तराखंड में एम्स ऋषिकेश में आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में 35 राज्यों और केन्‍द्रशासित प्रदेशों में पीएम केयर्स के तहत स्थापित 35 प्रेशर स्विंग ऐड्सॉर्प्शन (पीएसए) ऑक्सीजन संयंत्र राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इससे देश के सभी जिलों में अब पीएसए ऑक्सीजन संयंत्र चालू हो जाएंगे।

पीएम केयर्स फंड के बारे में जानें

क्या है पीएम केयर्स फंड :

कोविड-19 महामारी जैसी किसी भी तरह की आपातकालीन या संकट की स्थिति से निपटने के प्राथमिक उद्देश्य के साथ एक समर्पित राष्ट्रीय निधि की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए और उससे प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने के लिए ‘आपात स्थितियों में प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और राहत कोष (पीएम केयर्स फंड)’ के नाम से एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट बनाया गया है।

उद्देश्य :

संकट की स्थिति, चाहे प्राकृतिक हो या कोई और, में प्रभावित लोगों की पीड़ा को कम करने और बुनियादी ढांचागत सुविधाओं एवं क्षमताओं को हुए भारी नुकसान में कमी/नियंत्रण करने, इत्यादि के लिए त्‍वरित और सामूहिक कदम उठाना जरूरी हो जाता है। अत: अवसंरचना और संस्थागत क्षमता के पुनर्निर्माण/विस्‍तार के साथ-साथ त्वरित आपातकालीन कदम उठाना और सामुदाय की प्रभावकारी सुदृढ़ता के लिए क्षमता निर्माण करना आवश्‍यक है।

प्रभावित लोगों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए, पैसे के भुगतान हेतु अनुदान प्रदान करने या ऐसे अन्य कदम उठाने के लिए पैसे के भुगतान के लिए न्यासी बोर्ड द्वारा आवश्यक समझा जा सकता है।

किसी अन्य गतिविधि को करने के लिए, जो उपरोक्त वस्तुओं के साथ असंगत नहीं है।

ट्रस्ट का गठन :

प्रधानमंत्री, PM CARES कोष के पदेन अध्यक्ष और भारत सरकार के रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री, निधि के पदेन ट्रस्टी होते हैं।

बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के अध्यक्ष (प्रधानमंत्री) के पास 3 ट्रस्टीज को बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज में नामित करने की शक्ति होगी, जो अनुसंधान, स्वास्थ्य, विज्ञान, सामाजिक कार्य, कानून, लोक प्रशासन और परोपकार के क्षेत्र में प्रतिष्ठित व्यक्ति होंगे।

ट्रस्टी नियुक्त किया गया कोई भी व्यक्ति निशुल्क रूप से कार्य करेगा।

अन्य जानकारी :

इस कोष में पूरी तरह से व्यक्तियों/संगठनों से स्वैच्छिक योगदान होता है और इसे कोई बजटीय सहायता नहीं मिलती है। निधि का उपयोग ऊपर बताए गए उद्देश्यों को पूरा करने में किया जाएगा।

पीएम-केयर्स फंड में दान दी गई रकम पर इनकम टैक्‍स से 100 फीसदी छूट मिलेगी। यह राहत इनकम टैक्‍स कानून के सेक्‍शन 80जी के तहत मिलेगी। पीएम-केयर्स फंड में दान भी कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) व्यय के रूप में गिना जाएगा।

पीएम केयर्स फंड को भी FCRA के तहत छूट मिली है और विदेशों से दान प्राप्त करने के लिए एक अलग खाता खोला गया है। इससे विदेशों में स्थित व्यक्ति और संगठन पीएम केयर्स फंड में दान दे सकते हैं। यह प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) की ही तरह है। पीएमएनआरएफ को 2011 से एक सार्वजनिक ट्रस्ट के रूप में विदेशी योगदान भी मिला है।

PM-CARES Fund :

देश में COVID-19 जैसे आपातकालीन संकट से निपटने के लिए बनाए गए प्राइम मिनिस्टर सिटीजन असिस्टेंस एंड रिलीफ इन इमरजेंसी सिचुएशन फंड (PM-CARES Fund) भारत सरकार का फंड नहीं है और इसकी राशि भारत सरकार के संचित निधि में नहीं जाती। यह जानकारी केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को दी है। केंद्र सरकार ने एक याचिका के जवाब में दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि पीएम केयर्स फंड को सूचना के अधिकार (RTI) के दायरे में नहीं लाया जा सकता है और इसे “राज्य” के रूप में भी घोषित नहीं किया जा सकता है।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

 

ब्लेज़र

वैज्ञानिक पृथ्वी से 3.5 बिलियन प्रकाश-वर्ष की दूरी पर स्थित एक ब्लेज़र पर नजर रखे हुए है जो सूर्य की चमक से 1 खरब गुणा से अधिक समय तक अपने अर्ध-आवधिक ऑप्टिकल विस्फोटों के साथ विद्यमान है। लगभग 120 वर्ष पहले इसकी प्रवाह स्थिति में अचानक जो बढ़ोतरी हुई थी उसका पता लगा लिया है। ऑप्टिकल चमक के स्रोत के साथ जिन्हें पहले बाइनरी सुपरमैसिव ब्लैक होल समझा जाता था उनके बारे में यह अध्ययन से पता चला है कि यह स्रोत कहीं अधिक जटिल है। इस अध्ययन ब्लेज़रों और ऑप्टिकल चमक के स्रोत को शक्ति प्रदान करने वाले भौतिक विज्ञान की बेहतर समझ उपलब्ध कराएगा।

इसके ब्लेज़र्स ब्रह्मांड सबसे चमकीले स्रोतों में से एक है और इन वस्तुओं की विशेष श्रेणी को बीएल लाक्स कहा जाता है, जो उत्सर्जन में तेजी और बड़ी परिवर्तनशीलता दिखाते हैं। ओजे287 नामक एक ब्लेज़र, केंद्रीय सुपरमैसिव ब्लैक होल है सबसे बड़ा ज्ञात ब्लैक होल है, जो इसी वर्ग से संबंधित है। हालांकि, इसकी ऑप्टिकल चमक विशिष्ट और बीएल लाक्स से अलग है। इसे एक बाइनरी ब्लैक होल सिस्टम के रूप में प्रस्तावित किया गया था, जहां केन्द्रीय ब्लैक के चारों ओर एक सुपरमैसिव ब्लैक होल लगभग 12 वर्षों (एक सदी-लंबी ऑप्टिकल निगरानी के परिणामस्वरूप) की कक्षीय अवधि के साथ केंद्रीय ब्लैक होल के चारों ओर परिक्रमा कर रहा है। इस ऑप्टिकल चमक का अंतर्निहित भौतिक तंत्र मुख्य रूप से इसकी अप्रत्याशितता और विशाल चमक के कारण लंबे समय से एक पहेली बना हुआ है।

ओजे287 के बारे में विगत में किए गए अध्ययनों द्वारा इस स्रोत के लिए एक बाइनरी ब्लैक होल मॉडल को प्राथमिकता दी गई है लेकिन अप्रैल-मई, 2020 में एक चमक देखी गई, जिसकी भविष्यवाणी बाइनरी ब्लैक होल परिदृश्य के तहत नहीं की गई थी, जो यह सुझाव देती है कि इस स्रोत में अन्य भौतिक घटनाएं शामिल हैं जो चमकीली एक्स-रे और ऑप्टिकल चमक का कारण बन रही हैं जिनका पता लगाए जाने की जरूरत है।

भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत एक स्वायत्त संस्थान, रमन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों के एक समूह ने तेजपुर विश्वविद्यालय की रुकैय्या खातून, पोलैंड के सैद्धांतिक भौतिकी केंद्र के प्रो. बोजेना ज़ेर्नी और साहा इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर इंस्टीट्यूट के डॉ. प्रतीक मजूमदार ब्लेज़र ओजे287 का अध्ययन कर रहे हैं, जिन्होंने एक्स-रे में देखी गई दूसरी सबसे चमकीली चमक का अध्ययन किया। अप्रैल-मई, 2020 में इसकी चमकीली और गैर-चमकीली स्थितियों के दौरान उन्होंने एक्स-रे स्पेक्ट्रम के व्यवहार में बहुत दिलचस्प बात का पता चला है। इस टीम में राज प्रिंस, गायत्री रमन और वरुण शामिल थे जो रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट के पीएच.डी. पास छात्र थे। इनके साथ रमन अनुसंधान संस्थान में पोस्टडॉक्टोरल फेलो कर रही अदिति अग्रवाल और इसी संस्थान की फैकल्टी सदस्य नयनतारा गुप्ता शामिल थी। जिन्होंने यह पता लगाया कि एक्स-रे और ऑप्टिकल-यूवी में महत्वपूर्ण स्पेक्ट्रम परिवर्तन हुआ है जो यह सुझाव देता है कि ब्लेज़र ओजे287 का जटिल स्वरूप है।

इनमें एस्ट्रोसैट द्वारा रिकॉर्ड किए गए पर्यवेक्षणीय संबंधी डेटा शामिल थे, पहले समर्पित भारतीय खगोल विज्ञान मिशन का उद्देश्य एक्स-रे, ऑप्टिकल और यूवी स्पेक्ट्रल बैंड में खगोलीय स्रोतों का एक साथ अध्ययन करना था, साथ ही दुनिया भर के स्विफ्ट- एक्सआरटी/यूवीओटी, नूस्टार जैसे अन्य डिटेक्टरों से सार्वजनिक रूप से प्राप्त किए गए उपलब्ध आंकड़ों का उपयोग इस स्रोत के टेम्पोरल के साथ-साथ स्पेक्ट्रम व्यवहार का पता लगाने के लिए किया गया था।

उन्होंने यह पता लगाया कि ऑप्टिकल-यूवी और एक्स-रे स्पेक्ट्रम में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है, जो चुंबकीय क्षेत्र में बहुत अधिक ऊर्जावान इलेक्ट्रॉनों से रेडिएशन के शिखर स्थल में परिवर्तन या उच्च ऊर्जा की ओर से सिंक्रोट्रॉन उत्सर्जन के शिखर की ओर ले जाता है। जिसके परिणामस्वरूप ब्लेज़र ओजे287, जिसे कम ऊर्जा पर चरम ऊर्जा प्रवाह के साथ बीएल लाक्स तरह की वस्तु के रूप में जाना जाता है, जिसने उच्च ऊर्जा पर एक शिखर को दिखलाया है।

“मंथली नोटिस ऑफ दा रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी (एमएनआरएएस)” में प्रकाशित ब्लैजर ओजे287 के टेम्पोरल और स्पेक्ट्रम गुण यह दर्शाते है कि स्पेक्ट्रम गुणधर्म में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है क्योंकि स्रोत कम फलक्स से उच्च फलक्स अवस्था तक यात्रा करता है। पर्यवेक्षणीय डेटा की मॉडलिंग यह सुझाव देती है कि चमक की स्थिति के दौरान जेट चुंबकीय क्षेत्र (जेट जैसे उत्सर्जन क्षेत्र में चुंबकीय क्षेत्र) में वृद्धि हुई है।

ब्लेज़र में बाइनरी ब्लैक होल सिस्टम और उनका अध्ययन ब्रह्मांड के शुरू में आकाशगंगा में विलय के सिद्धांत को स्थापित कर सकता है, जिसके परिणामस्वरूप एक बाइनरी ब्लैक होल सिस्टम पैदा हुआ है। इस प्रकार आंशिक रूप से पोलिश फंडिंग एजेंसी, नेशनल साइंस सेंटर द्वारा समर्थित यह अध्ययन ब्लेज़र ओजे287 की बेहतर समझ प्रदान कर सकता है।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

 

पीएम मित्र पार्क

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के एक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण और भारत को वैश्विक वस्त्र मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए, सरकार ने 2021-22 के केंद्रीय बजट में की गई घोषणा के अनुरूप 7 पीएम मित्र पार्कों की स्थापना को स्वीकृति दे दी है।

पीएम मित्र माननीय प्रधानमंत्री के 5एफ विजन से प्रेरित है। ‘5एफ’ फॉर्मूला में- फार्म टू फाइबर; फाइबर टू फैक्ट्री; फैक्ट्री टू फैशन; फैशन टू फॉरेन शामिल हैं। यह एकीकृत दृष्टिकोण अर्थव्यवस्था में वस्त्र क्षेत्र के विकास को और आगे बढ़ाने में सहायता प्रदान करेगा। किसी अन्य प्रतिस्पर्धी देश में हमारे जैसा संपूर्ण टेक्सटाइल इकोसिस्टम नहीं है। भारत सभी पांचों एफ के मामले में मजबूत है।

व्यापक एकीकृत वस्त्र क्षेत्र और परिधान (पीएम मित्र) पार्कों को विभिन्न इच्छुक राज्यों में स्थित ग्रीनफील्ड/ब्राउनफील्ड स्थलों पर स्थापित किया जाएगा। अन्य कपड़ा संबंधी सुविधाओं और इकोसिस्टम के साथ-साथ 1,000+ एकड़ के निकटवर्ती और बाधा-मुक्त भूमि खंडों की उपलब्धता वाले राज्य सरकारों के प्रस्तावों का स्वागत है।

समान बुनियादी ढांचे (परियोजना लागत का 30 फीसदी) के विकास के लिए सभी ग्रीनफील्ड पीएम मित्र को अधिकतम विकास पूंजी सहायता (डीसीएस) 500 करोड़ रूपए और ब्राउनफील्ड पीएम मित्र को अधिकतम 200 करोड़ रुपये प्रदान किए जाएंगे। इसके अलावा पीएम मित्र में कपड़ा निर्माण इकाइयों की शीघ्र स्थापना के लिए प्रत्येक पीएम मित्र पार्क को प्रतिस्पर्धात्मकता प्रोत्साहन सहायता (सीआईएस) के रूप में 300 करोड़ रूपए भी प्रदान किए जाएंगे। राज्य सरकार की ओर से समर्थन के तौर पर विश्व स्तरीय औद्योगिक संपदा के विकास के लिए 1,000 एकड़ भूमि का प्रावधान शामिल होगा।

एक ग्रीनफील्ड पीएम मित्र पार्क के लिए भारत सरकार की ओर से विकास पूंजीगत सहायता कुल परियोजना लागत की 30 फीसदी होगी। इसकी अधिकतम सीमा 500 करोड़ रुपये तक की होगी। मूल्यांकन के बाद ब्राउनफील्ड स्थलों को लेकर बाकी अवसंरचना और दूसरे सहायक सुविधाओं को विकसित करने के लिए विकास पूंजीगत सहायता कुल परियोजना की 30 फीसदी होगी। इसे 200 करोड़ रुपये तक सीमित किया गया है। यह निजी क्षेत्र की भागीदारी को लेकर परियोजना को आकर्षक बनाने के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्त पोषण के रूप में है।

इन पीएम मित्र पार्कों में निम्नलिखित सुविधाएं होंगी :

मूल अवसंरचना : ऊष्मायन केंद्र और प्लग व प्ले सुविधा, विकसित फैक्ट्री स्थल, सड़कें, विद्युत, जल व अवशिष्ट जल प्रणाली, साझा प्रोसेसिंग हाउस व सीईटीपी और अन्य संबंधित सुविधाएं जैसे कि डिजाइन सेंटर, परीक्षण केंद्र आदि।

सहायक अवसंरचना : कामगारों के लिए हॉस्टल व हाउसिंग, लॉजिस्टिक पार्क, वेयरहाउसिंग, मेडिकल, प्रशिक्षण व कौशल विकास सुविधाएं।

पीएम मित्र शुद्ध विनिर्माण गतिविधि के लिए 50 फीसदी क्षेत्र, उपयोगिताओं के लिए 20 फीसदी क्षेत्र और वाणिज्यिक विकास के लिए 10 फीसदी क्षेत्र विकसित करेगा। पीएम मित्र का एक ढांचागत प्रतिनिधित्व नीचे दिया गया है।

इस उद्देश्य के लिए मेगा एकीकृत वस्त्र क्षेत्रों और वस्त्र पार्कों के प्रमुख घटक- * 5 फीसदी क्षेत्र और # 10 फीसदी क्षेत्र का संकेत करता है।

पीएम मित्र पार्क को एक विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) के जरिए विकसित किया जाएगा, जिसका स्वामित्व सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड में राज्य सरकार और भारत सरकार के पास होगा। मास्टर डेवलपर न केवल औद्योगिक पार्क का विकास करेगा बल्कि, छूट की अवधि के दौरान इसका रखरखाव भी करेगा। इस मास्टर डेवलपर का चयन केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा  संयुक्त रूप से विकसित वस्तुनिष्ठ मानदंडों के आधार पर किया जाएगा।

एसपीवी जिसमें राज्य सरकार का अधिकांश स्वामित्व है, विकसित औद्योगिक स्थलों से पट्टे के किराये का हिस्सा प्राप्त करने का हकदार होगा। इसके अलावा श्रमिकों के लिए कौशल विकास पहल और अन्य कल्याणकारी उपायों को प्रदान करके पीएम मित्र पार्क का विस्तार कर क्षेत्र में वस्त्र उद्योग के और अधिक विस्तार के लिए इसका उपयोग करने में सक्षम होगा।

भारत सरकार निर्माण इकाइयों को स्थापित करने को लेकर प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्येक पीएम मित्र पार्क के लिए 300 करोड़ रुपये की निधि भी प्रदान करेगी। इसे प्रतिस्पर्धात्मकता प्रोत्साहन सहायता (सीआईएस) के रूप में जाना जाएगा और पीएम मित्र पार्क में एक नई स्थापित इकाई के कारोबार के 3 फीसदी तक का भुगतान किया जाएगा।

एक नई परियोजना की स्थापना के लिए इस तरह की सहायता महत्वपूर्ण है और उत्पादन बढ़ाने और अपनी व्यवहार्यता स्थापित करने में सक्षम होने तक जब तक इसकी जरूरत है, इसे बंद नहीं किया जाएगा।

केंद्र सरकार और राज्य सरकार की अन्य योजनाओं के साथ सम्मिलन उन योजनाओं के दिशानिर्देशों के तहत उनकी पात्रता के अनुसार उपलब्ध है। यह वस्त्र उद्योग में प्रतिस्पर्धा को बढ़ाएगा, सस्ती अर्थव्यवस्थाओं को प्राप्त करने में सहायता करेगा और लाखों लोगों के लिए रोजगार के बड़े अवसर पैदा करेगा। कम लागत वाली अर्थव्यवस्था का लाभ उठाते हुए यह योजना भारतीय कंपनियों को वैश्विक विजेता के रूप में उभरने में सहायता करेगी।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

 

विश्व पर्यावास दिवस

विश्व पर्यावास दिवस 4 अक्टूबर, 2021 को मनाया गया। यह दिन संयुक्त राष्ट्र की एक पहल है।

मुख्य बिंदु

  • इस दिन को दुनिया भर में हर किसी के लिए पर्याप्त आश्रय और आवास के मूल अधिकार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मनाया जाता है, जो घनी आबादी वाले हैं और तेजी से शहरीकरण के कारण प्रभावित हुए हैं।
  • यह दिन हर साल अक्टूबर के पहले सोमवार को मनाया जाता है।

थीम : Accelerating urban action for a carbon-free world

दिवस का इतिहास

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा 1985 में प्रतिवर्ष विश्व पर्यावास दिवस मनाने का निर्णय लिया गया था। इस निर्णय के बाद, पहला विश्व पर्यावास दिवस 1986 में नैरोबी, केन्या में मनाया गया था।

महत्व

  • इस दिवस का पालन इस प्रकाश में महत्वपूर्ण है क्योंकि कि जनसंख्या घनत्व (विविधता), गरीबी, जलवायु संकट और प्राकृतिक आपदाओं ने जीवन की गुणवत्ता के लिए खतरा पैदा कर दिया है।
  • अनियोजित शहर, तेजी से शहरीकरण और पर्यावरण पर इसके प्रतिकूल प्रभावों ने आश्रय संकट जैसी कई अन्य समस्याओं को जन्म दिया है।
  • वैश्विक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन का 70% शहरी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से आता है।
  • इस प्रकार, समाधान खोजने और उपयुक्त आश्रय प्रावधानों के लिए यह दिवस महत्वपूर्ण हो जाता है।
  • इस दिन का उद्देश्य कार्रवाई योग्य शून्य-कार्बन योजनाओं को विकसित करना भी है।

SOURCE-GK TODAY

PAPER-G.S.1 PRE

 

रूस ने पनडुब्बी से हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया

रूस ने 4 अक्टूबर, 2021 को पहली बार परमाणु पनडुब्बी से हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है।

मुख्य बिंदु

  • जिरकोन (Zircon) मिसाइल नाम की इस मिसाइल को सेवेरोडविंस्क पनडुब्बी से लॉन्च किया गया था। जिरकोन ने बैरेंट्स सागर में एक निर्धारित लक्ष्य को नष्ट किया।
  • यह किसी पनडुब्बी से जिरकोन का पहला लांच था।
  • अतीत में नौसेना के युद्धपोत से मिसाइल का बार-बार परीक्षण किया जा चुका है।
  • 2022 में इस मिसाइल को रूसी नौसेना में शामिल किया जाएगा।

मिसाइल का महत्व

जिरकोन मिसाइल को रूसी क्रूजर, फ्रिगेट और पनडुब्बियों को मज़बूत बनाने के लिए विकसित किया गया है। यह रूस में विकसित की जा रही कई हाइपरसोनिक मिसाइलों में से एक है।

जिरकोन मिसाइल (Zircon Missile)

3M22 Zircon या 3M22 Tsirkon मिसाइल एक स्क्रैमजेट पावर्ड, एंटी-शिप हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। फिलहाल रूस इस मिसाइल का परीक्षण कर रहा है। 2012-2013 में एक Tu-22M3 बॉम्बर से Zircon मिसाइलों के प्रोटोटाइप का परीक्षण किया गया था। अप्रैल 2017 तक, Zircon एक परीक्षण के दौरान 8 मैक की गति तक पहुँच गयी थी। 3 जून 2017 को जिरकोन का फिर से परीक्षण किया गया।

जिरकोन मिसाइल ध्वनि की गति से 9 गुना तेज उड़ान भरने की क्षमता रखती है। इसकी मारक क्षमता 1000 किलोमीटर है सॉलिड-फ्यूल इंजन के साथ बूस्टर स्टेज इसे सुपरसोनिक गति तक बढ़ा देता है। इस चरण के बाद, तरल-ईंधन से युक्त एक स्क्रैमजेट मोटर इसे हाइपरसोनिक गति तक बढ़ा देता है। यह मैक 8 – मैक 9 तक की गति से यात्रा कर सकता है।

हाइपरसोनिक स्पीड क्या है?

कहा जा रहा है ये एक ऐसी तकनीक है जिसमें किसी मिसाइल को सुरपरसोनिक स्पीड से नहीं बल्कि हाइपरसोनिक स्पीड से छोड़ा जा सकता है।

पॉपुलर मेकैनिक्स के अनुसार विज्ञान की भाषा में हाइपरसोनिक को ‘सुपरसोनिक ऑन स्टेरायड्स’ कहा जाता है यानी तेज़ गति से भी अधिक तेज़ गति। सुपरसोनिक का मतलब होता है ध्वनि की गति से तेज़ (माक-1) और हाइपरसोनिक स्पीड का मतलब है सुपरसोनिक से भी कम से कम पांच गुना अधिक की गति। इसकी गति को माक-5 कहते हैं, यानी आवाज़ की गति से पांच गुना ज़्यादा की स्पीड।

हाइपरसोनिक स्पीड वो गति होती है जहां तेज़ी से जा रही वस्तु के आसपास की हवा में मौजूद अणु के मॉलिक्यूल भी टूट कर बिखरने लगते हैं।

डीआरडीओ का कहना है कि जिस यान का प्रक्षेपण हुआ है वो पहले आसमान में 30 किलोमीटर ऊपर तक गया, और फिर उसने माक-6 की स्पीड पकड़ी।

परसोनिक विमानों की रफ़्तार मापने का पैमाना अमूमन ध्वनि की गति या मैक वन रखा जाता है। ये तकरीबन 1235 किलोमीटर प्रति घंटा है।

स। सोनिक – वो रफ़्तार जो ध्वनि की गति से कम हो जैसे यात्री विमानों की स्पीड।

सुपरसोनिक – मैक वन से तेज़ और मैक फ़ाइव तक (ध्वनि की स्पीड से पांच गुना ज़्यादा) जैसे कॉनकॉर्ड विमान यूरोप और अमरीका के बीच 1976 से 2003 तक उड़ान भरता रहा।

हाइपरसोनिक – वो रफ़्तार जो मैक फ़ाइव से ज़्यादा तेज़ हो. इस समय कुछ गाड़ियों पर इसके प्रयोग चल रहे हैं।

SOURCE-BBC NEWS

PAPER-G.S.3

 

वन्यजीव सप्ताह 2021

जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 2 अक्टूबर, 2021 को श्रीनगर में शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC) में वन्यजीव सप्ताह 2021 का उद्घाटन किया।

थीम : Forests and Livelihoods: Sustaining People and Planet

मुख्य बिंदु

  • वन्यजीव सप्ताह 2021 अक्टूबर 2 से 8 अक्टूबर तक मनाया जा रहा है।
  • यह सप्ताह एक प्रयास है जो वन्यजीव संसाधनों के संरक्षण के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाता है।
  • इस अवसर पर, जम्मू-कश्मीर सरकार ने जनता के लिए दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान (Dachigam National Park) खोला है। पार्क तक आसान पहुंच प्रदान करने के लिए, एक ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग करके अनुमति दी जाएगी जो जम्मू-कश्मीर वन और वन्यजीव विभाग द्वारा संचालित है।

वन्यजीव सप्ताह (Wildlife Week)

भारत 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक वन्य जीव सप्ताह मनाता है, इसे भारत के जीव-जंतुओं की रक्षा करने के उद्देश्य से हर साल मनाया जाता है। इस सप्ताह के दौरान, लोगों को वन्यजीव संरक्षण के महत्व को समझाने के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं। इस सप्ताह के दौरान, लोगों को वन्यजीवों के बारे में जागरूक करने के लिए विभिन्न स्तरों पर कई जागरूकता-निर्माण गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।

यह सप्ताह क्यों मनाया जाता है?

यह सप्ताह इसलिए मनाया जाता है क्योंकि प्रकृति के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में वन्यजीव महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसका कोई भी नुकसान पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा पैदा कर सकता है। इस प्रकार, वनस्पतियों और जीवों को संरक्षित करना महत्वपूर्ण हो जाता है।

जैविक हॉटस्पॉट (Biological Hotspot)

भारत एक जैविक हॉटस्पॉट है। यह कई जानवरों की प्रजातियों का समर्थन करता है। भारत विश्व की 7% से अधिक जैव विविधता का घर है। भारत की पशु संपदा भी अविश्वसनीय रूप से विविध है। यह दुनिया के जीवों का 7.4% हिस्सा है।

वन्यजीव सप्ताह का इतिहास

वर्ष 1957 में पहली बार वन्यजीव सप्ताह मनाया गया था। भारत भर में वन्यजीवों की रक्षा के दीर्घकालिक लक्ष्यों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 1952 में भारतीय वन्यजीव बोर्ड द्वारा वन्यजीव सप्ताह की अवधारणा की गई थी। प्रारंभ में, वन्यजीव दिवस 1955 में मनाया गया था, लेकिन 1957 में इसे वन्यजीव सप्ताह के रूप में अपग्रेड किया गया था।

SOURCE-G.K TODAY

PAPER-G.S.1 PRE