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Current Affair 7 October 2021

Current Affairs – 7 October, 2021

न्यूनतम थ्रेसहोल्ड पैरामीटर (एमटीपी)

व्यापारियों एवं बिचौलियों को दूर रखने के साथ-साथ किसानों के लाभ को ध्यान में रखते हुए, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने एक एप्लीकेशन इकोसिस्टम विकसित किया है, जो निगरानी और रणनीतिक फैसला लेने के लिए न्यूनतम थ्रेसहोल्ड पैरामीटर (एमटीपी) की व्यवस्था वाले सभी राज्यों के खरीद पोर्टल के एकीकरण में मदद करेगा।

यह प्रक्रिया अक्टूबर, 2021 में केएमएस 2021-22 की शुरुआत के साथ शुरू हुई। खरीद में बिचौलियों से बचने और किसानों को उनकी उपज का सर्वश्रेष्ठ मूल्य प्रदान करने के लिए खरीद कार्यों में न्यूनतम थ्रेसहोल्ड पैरामीटर्स (एमटीपी) का इस्तेमाल करने की जरूरत पड़ी। केंद्रीय पोर्टल के साथ एकीकरण राज्यों के साथ खरीद के आंकड़ों के समाधान में तेजी लाने और केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को धन जारी करने में काफी मदद करेगा।

लाभ सामान्य रूप से समाज द्वारा प्राप्त किया जाएगा, लेकिन हितधारकों के लिए परिकल्पित विशिष्ट लाभ निम्नानुसार हैं :

  • किसान : अपनी उपज को उचित मूल्य पर बेच सकेंगे और संकटग्रस्त बिक्री से बच सकेंगे।
  • खरीद एजेंसियां : खरीद संचालन के बेहतर प्रबंधन के साथ, राज्य एजेंसियां और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) सीमित संसाधनों के साथ कुशलतापूर्वक खरीद करने में सक्षम होंगे।
  • अन्य हितधारक : खरीद कार्यों का स्वचालन और मानकीकरण खाद्यान्नों की खरीद तथा गोदामों में इसके भंडारण का एक एकीकृत दृष्टिकोण प्रदान करेगा।

एमटीपी जो अनिवार्य रूप से सभी खरीद पोर्टल में एकरूपता और अंतर-संचालन सुनिश्चित करने के लिए शामिल किए जाने चाहिए, वे निम्नानुसार हैं :

  • किसानों/बटाईदारों का ऑनलाइन पंजीकरण : नाम, पिता का नाम, पता, मोबाइल नंबर, आधार नंबर, बैंक खाता विवरण, भूमि विवरण (खाता/खसरा), स्व-खेती या किराए पर जमीन/बटाईदारी/अनुबंध।
  • राज्य के भूमि रिकॉर्ड पोर्टल के साथ पंजीकृत किसान डेटा का एकीकरण
  • डिजिटलीकृत मंडी/ खरीद केंद्र के संचालन का एकीकरण : क्रेता/विक्रेता फॉर्म, बिक्री से होने वाली आय के बिल तैयार करना आदि।
  • किसानों को एमएसपी के सीधे और त्वरित हस्तांतरण के लिए पीएफएमएस के व्यय अग्रिम हस्तांतरण (ईएटी) मॉड्यूल के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान।
  • सीएमआर/गेहूं वितरण प्रबंधन-स्वीकृति नोट/वेट चेक मेमो अपलोड करने और स्टॉक के अधिग्रहण पर बिलिंग का स्वत: उत्पादन (उत्तर प्रदेश मॉडल)

भारत सरकार के प्रस्तावित एकीकृत पोर्टल पर एपीआई आधारित एकीकरण के माध्यम से डेटा भेजा जाएगा जिससे लाभान्वित किसानों/बटाईदारों, छोटे/सीमांत किसानों की संख्या, उपज, खरीद की मात्रा, भुगतान, केंद्रीय पूल स्टॉक की सूची प्रबंधन की रियल टाइम जानकारी मिलेगी।

यहां यह उल्लेख करना उचित होगा कि सभी राज्यों में सूचना प्रौद्योगिकी आधारित उपकरणों के कार्यान्वयन के विभिन्न पैमाने हैं। इसके अलावा, स्थानीय आवश्यकताओं और प्रथाओं की प्राथमिकता के कारण, एक अखिल भारतीय मानक खरीद पारिस्थितिकी तंत्र मौजूद नहीं था।

खरीद प्रणालियों में भिन्नता के कारण, केंद्र सरकार की योजनाओं को लागू करने के लिए प्रणालीगत और कार्यान्वयन दोनों चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। विभिन्न राज्यों के साथ खरीद कार्यों का समाधान, कभी-कभी एक लंबी खींची गई कवायद होती है, जिससे राज्यों को धन जारी करने में देरी होती है, जिससे बचा सकता है। इसके अलावा, गैर-मानक खरीद संचालन/संसाधित भी उन अक्षमताओं का कारण बनते हैं, जिनसे बचा जा सकता है, ये अक्षमताएं खरीद कार्यों में बिचौलियों के रूप में प्रकट होती हैं।

निस्संदेह, केंद्र सरकार किसानों के कल्याण पर बहुत जोर देती है और एमएसपी आधारित खरीद यह सुनिश्चित करने का पारंपरिक तरीका है कि किसानों को उनकी उपज का उचित बिक्री मूल्य मिले। यह अंततः केंद्र के उद्देश्यों को प्राप्त करने और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के कार्यान्वयन में मदद करता है। संचालन का मानकीकरण देश को खरीद कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता के अधिक से अधिक स्तर प्राप्त करने में मदद करने के लिए आवश्यक है, जो अंततः देश के लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

भारत सरकार ने कई मंचों पर राज्य सरकारों और अन्य सार्वजनिक खरीद एजेंसियों को खरीद कार्यों के लिए न्यूनतम थ्रेसहोल्ड पैरामीटर अनुपालन की आवश्यकता के बारे में बताया है। साथ ही केंद्र ने खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के संबंधित राज्य सरकारों के साथ चर्चा के दौरान उन्हें न्यूनतम थ्रेसहोल्ड पैरामीटर के केंद्रीय पोर्टल, यानी केंद्रीय खाद्यान्न खरीद पोर्टल (सीएफपीपी) के साथ एकीकरण की आवश्यकता के बारे में भी बताया है।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

 

अभ्यास अजेय वारियर चौबटिया

भारत – यूके संयुक्त कंपनी स्तर का सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास अजेय वारियर का छठा संस्करण उत्तराखंड के चौबटिया में शुरू हुआ है और दिनांक 20 अक्टूबर 2021 को समाप्त होगा। यह अभ्यास मित्र विदेशी राष्ट्रों के साथ अंतर-संचालनीयता और विशेषज्ञता साझा करने की पहल का हिस्सा है। इस अभ्यास के दौरान भारतीय सेना की एक इन्फैंट्री कंपनी और युनाइटेड किंगडम सेना की भी इतनी ही संख्या में सैन्य ताक़त अपने-अपने देशों में विभिन्न सैन्य अभियानों के संचालन के दौरान और विदेशी गतिविधियों के दौरान प्राप्त अपने अनुभवों को साझा करेगी। साथ में दोनों सेनाएं अपने विविध अनुभवों से लाभान्वित होने के लिए तैयार हैं।

प्रशिक्षण के अंतर्गत दोनों देशों की सेना संयुक्त सैन्य अभियानों को अंजाम देने के लिए एक-दूसरे के हथियारों, उपकरणों, रणनीति, तकनीकों और प्रक्रियाओं से परिचित होंगी। इसके अलावा आपसी हित के विभिन्न विषयों जैसे कि संयुक्त शस्त्र अवधारणा, संयुक्त बल में अनुभवों को साझा करना, ऑपरेशन लॉजिस्टिक्स आदि पर विशेषज्ञ अकादमिक चर्चाओं की एक श्रृंखला भी आयोजित होगी। संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण का समापन 48 घंटे के कठिन अभ्यास के साथ अर्द्ध-शहरी वातावरण में संयुक्त सैन्य अभियान चलाने में दोनों सेनाओं के प्रदर्शन को मान्यता प्रदान करने के लिए किया जाएगा।

यह संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने में एक लंबा रास्ता तय करेगा और दोनों देशों के बीच दोस्ती के पारंपरिक बंधन को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

 

एनईआरसीआरएमएस

पूर्वोत्तर क्षेत्र सामुदायिक संसाधन प्रबंधन सोसायटी (एनईआरसीआरएमएस), पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के पूर्वोत्तर परिषद के अंतर्गत आने वाली एक पंजीकृत सोसायटी है। यह सोसाइटी विभिन्न आजीविका पहलों के माध्यम से भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) के दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में परिवर्तन के लिए समर्पित है। अब तक इस सोसाइटी ने पूर्वोत्तर के चार राज्यों को कवर किया है, जैसे अरुणाचल प्रदेश (चांगलांग, तिरप और लोंगडिंग जिला), असम (कार्बी आंगलोंग और दीमा हासाओ जिला), मणिपुर (उखरुल, सेनापति, चूराचंदपुर और चंदेल जिला) और मेघालय (पश्चिम गारो हिल्स और पश्चिम खासी हिल्स जिला)। 1999 से इस सोसायटी ने अपनी परियोजना- पूर्वोत्तर क्षेत्र सामुदायिक संसाधन प्रबंधन परियोजना (एनईआरसीओआरएमपी) के माध्यम से 2,532 गांवों में 8,403 एसएचजी (स्वयं सहायता समू) और 2,889 एनएआरएमजी (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन समूह) का गठन किया है, जिससे 1,18,843 परिवार लाभान्वित हुए हैं।

इस सोसाइटी ने दो व्यापक फोकस क्षेत्रों के साथ विकास का एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया है, अर्थात (i) समुदायों की महान अंतर्निहित क्षमता का उपयोग और अनुभव प्राप्त करने के लिए उनकी पारंपरिक मूल्य प्रणालियों और संस्कृति का परीक्षण जिससे सामाजिक लामबंदी, संगठन और क्षमता निर्माण किया जा सके और (ii) आर्थिक परिवर्तन प्राप्त करने के लिए आय सृजन गतिविधियों पर प्रमुख बल देने के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों और अवसंरचना में मध्यवर्तन करना।

लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अपनाई गई रणनीति निम्न है :

  1. समुदायों और सहभागी एजेंसियों का क्षमता निर्माण : समुदाय आधारित संगठनों (सीबीओ) को संस्थागत रूप से मजबूत करना और सहभागी एजेंसियों की क्षमता को मजबूत करना अर्थात् गैर सरकारी संगठन, लाइन विभाग आदि के लिए सहभागी योजना, संगठनात्मक और वित्तीय प्रबंधन, कृषि और गैर-कृषि गतिविधियों पर तकनीकी प्रशिक्षण, मॉनेरटरिंग आदि।
  2. आर्थिक और आजीविका गतिविधियां : चिरस्थायी और पर्यावरण अनुकूल प्रथाओं का उपयोग करते हुए खेत की फसलों का उत्पादन, बागवानी, वानिकी, पशुधन, मत्स्य पालन और गैर-कृषि गतिविधियों के माध्यम से गरीब परिवारों के लिए व्यवहार्य आय सृजन गतिविधियों (आईजीए) को बढ़ावा देना। साथ ही नई प्रौद्योगिकियों की शुरुआत, सीबीओ को आंतरिक ऋण के लिए क्रेडिट/परिरिवाल्विंग फंड के माध्यम से समुदायों को समर्थन प्रदान करना।
  3. सामाजिक क्षेत्र का विकास : इस घटक का विशिष्ट उद्देश्य समुदायों को सुरक्षित पेयजल और बेहतर स्वच्छता तक पहुंच प्रदान करना है। इसे पेयजल भंडारण टैंकों का निर्माण, निकट के झरने या धारा से पानी की पाइप लाइन के माध्यम से आपूर्ति और सामुदायिक भागीदारी के साथ कम लागत वाले शौचालयों (एलसीएल) का निर्माण से प्राप्त किया जाना है।
  4. ग्रामीण सड़कें और ग्रामीण विद्युतीकरण : समुदायों की पहुंच को बाजारों, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा सुविधाओं और ऊर्जा तक बढ़ाने के उद्देश्य से, यह घटक सामान्य सुविधा केंद्रों (सीएफसी), अंतर-ग्रामीण सड़कों, पुलियों और झूला पुलों का निर्माण और घरेलू सौर प्रकाश की व्यवस्था करने की मांग करता है।
  5. समुदाय आधारित जैव-विविधता संरक्षण और संचार : इसका विशिष्ट उद्देश्य इस क्षेत्र के अद्वितीय प्राकृतिक संसाधनों और समृद्ध जैव विविधता की रक्षा और संरक्षण प्रदान करना है। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए उप-घटक हैं : (i) जैव विविधता संरक्षण और अनुसंधान, जिसका उद्देश्य सामुदायिक संरक्षित क्षेत्रों (सीसीए) को पवित्र उपवनों, संरक्षित जलग्रहण क्षेत्रों और अभयारण्यों के रूप में बढ़ावा देना है, (ii) पर्यावरण के दृष्टिकोण से चिरस्थायी गैर-इमारती वन उत्पादों (एनटीएफपी) और वानिकी उत्पादन प्रणालियों को बढ़ावा देने और प्रदर्शित करने के लिए वानिकी विकास, और (iii) समुदायों के बीच अच्छी प्रथाओं और उत्पादन प्रणालियों पर सूचना और ज्ञान साझा करने की सुविधा प्रदान करने के लिए संचार और ज्ञान प्रबंधन।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

 

इथेनॉल योजना से देश की खाद्य सुरक्षा को प्रभावित

बताने वाली रिपोर्ट दुर्भावनापूर्ण हैं

मीडिया के एक हिस्से में, महत्वाकांक्षी इथेनॉल योजना को देश में खाद्य सुरक्षा पर संकट से जोड़ते हुए कुछ रिपोर्ट आई थीं। यह स्पष्ट किया जाता है कि ये रिपोर्ट निराधार, दुर्भावनापूर्ण और तथ्यों से परे हैं।

यह समझना बहुत जरूरी है कि भारत जैसे युवा देश के लिए, जहां भोजन की जरूरतों को पूरा करना सर्वोपरि है, वहीं हर तरह से ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करना भी महत्वपूर्ण है। इस प्रकार, बदले हुए परिदृश्य में “ईंधन के साथ आहार” होना चाहिए न कि “आहार बनाम ईंधन”।

सबसे तेजी से बढ़ते अपने देश में ईंधन की मांग लगातार बढ़ रही है और कच्चे तेल के आयात पर लगातार बढ़ती निर्भरता हमारी भविष्य की विकास क्षमता को काफी हद तक बाधित कर सकती है। एथनॉल, बायोडीजल, कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) जैसे घरेलू ईंधन के विकास में ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव लाने की क्षमता है। पिछले छह वर्षों के दौरान, इस सरकार ने इथेनॉल उत्पादन के लिए अतिरिक्त गन्ना आधारित कच्चे माल (जैसे गन्ने का रस, चीनी, चीनी सिरप) के रूपांतरण की अनुमति देकर तरलता की कमी वाले चीनी उद्योग में 35,000 करोड़ रुपये का सफलतापूर्वक निवेश किया है। इससे निश्चित रूप से गन्ना किसानों के बकाया के जल्द निपटान में मदद मिली है और उनकी वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है। मौजूदा सीज़न के लिए, यह उम्मीद की जाती है कि अकेले इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम के माध्यम से 20,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश किया जाएगा, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विकास को बढ़ावा देगा, जो चुनौतीपूर्ण कोरोना काल में सबसे अनुकूल क्षेत्र है।

गन्ना सीजन 2021-22 के लिए चीनी का उत्पादन लगभग 340 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान है, जो 90 लाख मीट्रिक टन के शुरुआती भंडार से अधिक होने के साथ-साथ कुल मिलाकर 260 लाख मीट्रिक टन की घरेलू खपत से बहुत अधिक है। इसमें से 35 लाख मीट्रिक टन चीनी की अतिरिक्त मात्रा को इथेनॉल में बदलने का प्रस्ताव है। यह नहीं भूलना चाहिए कि ये इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी की अतिरिक्त मात्रा है, जिसे अन्य देशों को रियायती दर पर निर्यात करना होगा या यदि बाजार में जारी किया जाता है तो चीनी की कीमतें उत्पादन लागत से काफी कम हो जाती हैं तथा इससे पूरी तरह से उथल-पुथल हो जाता है। इसी तरह, अकेले भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास (05.10.2021 तक) चावल का स्टॉक 202 लाख मीट्रिक टन है, जो देश की बफर स्टॉक की आवश्यकता से बहुत अधिक है।

पिछले छह वर्षों के दौरान पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर 20,000 करोड़ रुपये से अधिक विदेशी मुद्रा की बचत की गई है। चालू वर्ष के लिए, लगभग 10,000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत होने की संभावना है। यह धनराशि कच्चे तेल की खरीद के स्थान पर आम भारतीय लोगों की जेब में पहुंचती है।

उपर्युक्त से संकेत लेते हुए तथा वैश्विक प्रचलनों के अनुसार, सरकार ने इथेनॉल उत्पादन के लिए चावल के अतिरिक्त भंडार को भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास बदलने की अनुमति दी है। इसके अलावा, सरकार ने इथेनॉल उत्पादन के लिए मक्का जैसे मोटे अनाज के रूपांतरण की भी अनुमति दी है। कोविड-19 के दौरान मुफ्त चावल और अन्य अनाज वितरित करने के बावजूद, भारतीय खाद्य निगम के पास अभी भी चावल का विशाल भंडार है। इसके अलावा, ताजा चावल के स्टॉक की बढ़ी हुई मात्रा आने लगेगी, क्योंकि कृषि का मौसम बहुत अच्छा रहा है।

मक्के के एथनॉल में उच्च रूपांतरण से देश भर में उच्च डीडीजीएस (मवेशी चारा) का उत्पादन भी संभव होगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फिर से मदद मिलेगी। खाद्यान्नों को ईंधन में बदलने से उत्पन्न अतिरिक्त मांग को देखते हुए, किसान फसलों को बदलने और अपने फसल पैटर्न को बदलने के लिए भी प्रोत्साहित होंगे।

चावल और मक्का के वैकल्पिक इस्तेमाल की अनुमति देने से न केवल किसानों को उनके उत्पादन के लिए मूल्य स्थिरता (खाद्यान्न के अतिरिक्त भंडार के वैकल्पिक उपयोग के अभाव में, कीमतें गिर सकती हैं) में मदद मिलेगी, बल्कि डिस्टिलरी और संबद्ध बुनियादी ढांचे में नया निवेश भी हो सकेगा। यह पहल प्रधानमंत्री के “आत्मनिर्भर भारत” के आह्वान के साथ भी अच्छी तरह तालमेल रखती है, क्योंकि आयातित कच्चे तेल पर हमारी निर्भरता कम होती है, अपने स्वयं के उत्पादित पर्यावरण के अनुकूल ईंधन का उपभोग करते हैं और उद्योग तथा किसानों को लाभकारी कीमतों का भुगतान करना संभव होता है।

यह दोहराया जाता है कि लोगों और मवेशियों के आहार के लिए खाद्यान्न की मांग को पूरा करना हमेशा सरकार की पहली प्राथमिकता रहेगी। चीनी (2021-22 के लिए 35 लाख मीट्रिक टन) और खाद्यान्न के इन अतिरिक्त भंडार को अब नुकसान से अधिक लाभ के साथ एक वैकल्पिक इस्तेमाल का रास्ता मिल गया है।

  • इथेनॉल
    • यह प्रमुख जैव ईंधनों में से एक है, जो प्राकृतिक रूप से खमीर अथवा एथिलीन हाइड्रेशन जैसी पेट्रोकेमिकल प्रक्रियाओं के माध्यम से शर्करा के किण्वन द्वारा उत्पन्न होता है।
  • सम्मिश्रण लक्ष्य
    • सरकार ने वर्ष 2025 तक पेट्रोल (जिसे E20 भी कहा जाता है) में 20% इथेनॉल सम्मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित किया है भारत ।
    • वर्तमान में भारत में पेट्रोल के साथ 5% इथेनॉल मिश्रित होता है।
  • इथेनॉल सम्मिश्रण का उद्देश्य
    • ऊर्जा सुरक्षा
      • इथेनॉल के अधिक उपयोग से तेल आयात बिल को कम करने में मदद मिल सकती है। वर्ष 2020-21 में भारत की शुद्ध आयात लागत 551 बिलियन अमेरिकी डॉलर है।
      • E20 कार्यक्रम देश के लिये प्रतिवर्ष 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर (30,000 करोड़ रुपए) बचा सकता है।
    • किसानों के लिये प्रोत्साहन
      • तेल कंपनियाँ किसानों से इथेनॉल खरीदती हैं, जिससे गन्ना किसानों को फायदा होता है।
      • इसके अलावा सरकार की योजना पानी बचाने वाली फसलों जैसे कि मक्का आदि को इथेनॉल का उत्पादन करने और गैर-खाद्य फीडस्टॉक से इथेनॉल के उत्पादन को प्रोत्साहित करने की है।
    • उत्सर्जन पर प्रभाव
      • इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल के उपयोग से कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), हाइड्रोकार्बन (HC) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) आदि के उत्सर्जन में कमी आती है।
      • हालाँकि एसीटैल्डिहाइड उत्सर्जन जैसे अनियमित कार्बोनिल उत्सर्जन सामान्य पेट्रोल की तुलना में E10 और E20 में अधिक होता है, किंतु यह उत्सर्जन अपेक्षाकृत काफी कम होता है।

इस संबंध में शुरू की गई अन्य पहलें

  • राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति-2018, वर्ष 2030 तक इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम के तहत 20% इथेनॉल सम्मिश्रण का एक सांकेतिक लक्ष्य प्रदान करती है।
  • केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने वाहनों पर उनकी E20, E85 या E100 अनुरूपता का उल्लेख करते हुए स्टिकर लगाना अनिवार्य कर दिया है।
    • इससे फ्लेक्स ईंधन वाले वाहनों का मार्ग प्रशस्त होगा।
    • फ्लेक्स ईंधन वाले वाहन मिश्रित पेट्रोल के किसी भी अनुपात (E20 से E100 तक) पर चल सकते हैं।
  • E100 पायलट प्रोजेक्ट : इसकी शुरुआत पुणे में की गई है।
    • ‘टीवीएस अपाचे’ दोपहिया वाहनों को E80 या शुद्ध इथेनॉल (E100) पर चलाने के लिये डिज़ाइन किया गया है।
    • प्रधानमंत्री ‘जी-वन’ योजना 2019 : इस योजना का उद्देश्य 2G इथेनॉल क्षेत्र में वाणिज्यिक परियोजनाओं की स्थापना और अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है।
    • गोबर-धन (गैल्वनाइजिंग जैविक जैव-एग्रो संसाधन) योजना : इस योजना का उद्देश्य गाँव की स्वच्छता पर सकारात्मक प्रभाव डालना और मवेशियों तथा जैविक कचरे से धन और ऊर्जा उत्पन्न करना है।
      • इसका उद्देश्य नए ग्रामीण आजीविका के अवसर पैदा करना और किसानों एवं अन्य ग्रामीण लोगों की आय में वृद्धि करना है।

रिपर्पज़ यूज़्ड कुकिंग आयल (RUCO) : भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने यह पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य इस्तेमाल किये गए खाना पकाने के तेल को बायोडीजल में रूपांतरित करना है।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

 

पारेषण प्रणाली की शुरूआत

पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पॉवरग्रिड) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी – पावरग्रिड खेतड़ी ट्रांसमिशन सिस्टम लिमिटेड (पीकेटीएसएल) ने 4 अक्टूबर, 2021 को राजस्थान सौर ऊर्जा क्षेत्र (एसईजेड) पार्ट-सी से जुड़ी पारेषण प्रणाली को चालू किया है। यह राजस्थान राज्य में स्थापित सबसे बड़ी अंतरराज्यीय टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (टीबीसीबी) वाली परियोजनाओं में शामिल है।

पारेषण परियोजना में खेतड़ी (राजस्थान) में एक नया 765 केवी सब-स्टेशन शामिल है और 765 केवी डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाइन के माध्यम से देश की राजधानी झटिकारा (दिल्ली) से जोड़ने के साथ-साथ 400 केवी डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाइन के माध्यम से सीकर (राजस्थान) को भी जोड़ता है।

पीकेटीएसएल प्रणाली के चालू होने से राजस्थान से देश के विभिन्न हिस्सों में अक्षय ऊर्जा के अंतरण की सुविधा होगी। यह उद्योगों, घरों और व्यवसायों को लाभान्वित करेगा, जिससे राजस्थान सहित देश के आर्थिक विकास को समग्र रूप से बढ़ावा मिलेगा। यह 2030 तक 450 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा का लक्ष्य प्राप्त करने के भारत सरकार के सपने के अनुरूप, नवीकरणीय ऊर्जा का लाभ प्राप्त करने के लिए पारेषण बुनियादी ढांचे को बढ़ाएगा, जिससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी।

इस महत्वपूर्ण पारेषण परियोजना को चालू करने से जीवन अधिक सुगम होगा और साथ ही देश भर में गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय हरित ऊर्जा की आपूर्ति के माध्यम से बुनियादी ढांचे के विकास की गतिविधियों को बल मिलेगा।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

 

पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 29 मई, 2021 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उन बच्चों के लिए व्यापक सहायता की घोषणा की थी जिन्होंने कोविड-19 महामारी के कारण अपने माता-पिता दोनों को खो दिया है। इस योजना का उद्देश्य उन बच्चों की निरंतर तरीके से व्यापक देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जिन्होंने अपने माता-पिता को कोविड महामारी में खो दिया है। साथ ही इसका उद्देश्य उन बच्चों को स्वास्थ्य बीमा के माध्यम से उनके कल्याण में मदद करना, उन्हें शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाना तथा 23 वर्ष की आयु होने पर वित्तीय सहायता के साथ उन्हें एक आत्मनिर्भर अस्तित्व के लिए तैयार करना है।

पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना अन्य बातों के साथ-साथ इन बच्चों को समेकित दृष्टिकोण, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए गैप फंडिंग, 18 वर्ष की आयु से मासिक वृत्ति और 23 वर्ष की आयु होने पर 10 लाख रुपये की एकमुश्त राशि प्रदान करने के माध्यम से सहायता प्रदान करती है। पात्र बच्चों का नामांकन 29.05.2021 से शुरू किया जाएगा और प्रधानमंत्री की घोषणा के अनुरूप 31.12.2021 तक पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के लिए पंजीकरण कराया जा सकता है। इस योजना के उस वर्ष तक प्रभाव में रहने की उम्मीद है जब प्रत्येक चिन्हित लाभार्थी 23 वर्ष की आयु का हो जाएगा।

योजना के लिए पात्रता मानदंड में उन सभी बच्चों को शामिल किया जाएगा जिन्होंने कोविड-19 की वजह से अपने i) माता-पिता दोनों या ii) माता-पिता में से एकमात्र बचे किसी एक को या iii) कानूनी अभिभावक/गोद लेने वाले माता-पिता/गोद लेने वाले माता या पिता को खो दिया है। इनमें वे बच्चे योजना का लाभ हासिल करने के पात्र होंगे जिन्होंने 11.03.2020 से 31.12.2021 के बीच महामारी की वजह से अपने माता-पिता को खोया है। 11.03.2020 की तारीख इस वजह से मान्य है क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसी दिन से कोविड-19 को एक महामारी घोषित किया था। iv) माता-पिता की मृत्यु की तारीख को बच्चे की आयु 18 वर्ष से कम होनी चाहिए।

इस योजना के तहत दी जाने वाली सहायता में ये चीजें शामिल हैं :

  1. बोर्डिंग और लॉजिंग के लिए सहायता :
    • जिला मजिस्ट्रेट द्वारा बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की सहायता से प्रयास किया जाएगा कि बच्चे का उसके विस्तृत परिवार, रिश्तेदारों आदि के पास पुनर्वास की संभावना का पता लगाया जाएगा।
    • यदि बच्चे के विस्तृत परिवार, रिश्तेदार, परिजन उपलब्ध नहीं हैं/उसे रखने के लिए तैयार नहीं हैं/सीडब्ल्यूसी के हिसाब से उपयुक्त नहीं हैं या बच्चा (4-10 वर्ष या उससे अधिक आयु का) उनके साथ रहने को तैयार नहीं है, तो पूरी तरह से पड़ताल करने के बाद बच्चे को किशोर न्याय अधिनियम, 2015 और समय-समय पर यथा संशोधित उसके बनाए गए नियमों के तहत फोस्टर केयर (कुछ समय के लिए किसी परिवार द्वारा बच्चे को आधिकारिक रूप से अपने पास रखना) में रखा जाएगा।
    • यदि फोस्टर फैमिली उपलब्ध नहीं है/इच्छुक नहीं है/सीडब्ल्यूसी उसे उपयुक्त नहीं पाता, या बच्चा (4-10 वर्ष या उससे अधिक आयु का) उनके साथ रहने के लिए तैयार नहीं है, तो लाभार्थी बच्चा/बच्चे यानी पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत पात्र लाभार्थी बच्चे को उसकी उम्र एवं लैंगिक आधार पर उपयुक्त बाल देखभाल संस्थान (सीसीआई) में रखा जाएगा।
    • 10 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चे, जो विस्तृत परिवारों या रिश्तेदारों या फोस्टर फैमिली द्वारा अपने पास नहीं रखे जाते या माता-पिता के निधन के बाद उनके साथ रहने के इच्छुक नहीं हैं या बाल देखभाल संस्थानों में रहते हैं, उन्हें जिलाधिकारी (डीएम) नेताजी सुभाष चंद बोस आवासीय विद्यालय, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, एकलव्य मॉडल स्कूल, सैनिक स्कूल, नवोदय विद्यालय, या किसी भी अन्य आवासीय विद्यालय में संबंधित योजना दिशा-निर्देशों के अधीन दाखिला दिला सकते हैं।
    • यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि जहां तक संभव हो एक माता-पिता के बच्चे एक ही साथ रहें।
    • गैर-संस्थागत देखभाल के लिए, बाल संरक्षण सेवा (सीपीएस) योजना के तहत निर्धारित प्रचलित दरों पर वित्तीय सहायता बच्चों को (अभिभावक के खाते में) प्रदान की जाएगी। संस्थागत देखभाल में बच्चे के लिए, बाल संरक्षण सेवा (सीपीएस) योजना के तहत निर्धारित प्रचलित दरों पर बाल देखभाल संस्थानों को रख-रखाव के लिए अनुदान दिया जाएगा। सरकारी योजना के तहत निर्वाह सहायता की कोई भी व्यवस्था बच्चों को अतिरिक्त रूप से प्रदान की जा सकती है।
  2. प्री-स्कूल और स्कूली शिक्षा के लिए सहायता :
    • छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए पहचान किए गए लाभार्थियों को पूरक पोषण, प्री-स्कूल शिक्षा/ईसीसीई, टीकाकरण, स्वास्थ्य रेफरल और स्वास्थ्य जांच के लिए आंगनबाड़ी सेवाओं से सहायता दी जाएगी।
    • 10 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए
      • डे स्कॉलर के तौर पर किसी भी नजदीकी स्कूल में यानी सरकारी/सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल/केंद्रीय विद्यालय (केवी)/निजी स्कूलों में प्रवेश दिया जाएगा।
      • सरकारी स्कूलों में समग्र शिक्षा अभियान के तहत, योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, दो मुफ्त यूनिफॉर्म और पाठ्यपुस्तक प्रदान किए जाएंगे।
      • निजी स्कूलों में, आरटीई अधिनियम की धारा 12(1)(सी) के तहत शिक्षण शुल्क में छूट दी जाएगी।
      • ऐसी परिस्थितियों में जहां बच्चा उपरोक्त लाभ प्राप्त करने में असमर्थ है, आरटीई मानदंडों के अनुसार फीस पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना से दी जाएगी। इस योजना के तहत यूनिफॉर्म, पाठ्यपुस्तकों और नोटबुक पर होने वाले खर्च के लिए भी भुगतान किया जाएगा। ऐसी पात्रताओं की एक सूची परिशिष्ट-1 में दी गयी है।
    • 11-18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए
      • यदि बच्चा विस्तृत परिवार के साथ रह रहा है, तो डीएम द्वारा निकटतम सरकारी/सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल/केन्द्रीय विद्यालयों (केवी)/निजी स्कूलों में डे स्कॉलर के रूप में उसका दाखिला सुनिश्चित किया जा सकता है।
      • बच्चे का संबंधित योजना दिशा-निर्देशों के अधीन, डीएम द्वारा नेताजी सुभाष चंद बोस आवासीय विद्यालय/कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय/एकलव्य मॉडल स्कूल/सैनिक स्कूल/नवोदय विद्यालय/या किसी अन्य आवासीय विद्यालय में दाखिला कराया जा सकता है।
      • डीएम ऐसे बच्चों के लिए छुट्टियों के दौरान सीसीआई या किसी उपयुक्त स्थान पर रहने की वैकल्पिक व्यवस्था कर सकते हैं।
      • ऐसी परिस्थितियों में जहां बच्चा उपरोक्त लाभ प्राप्त करने में असमर्थ है, आरटीई मानदंडों के अनुसार फीस पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना से दी जाएगी। इस योजना के तहत यूनिफॉर्म, पाठ्यपुस्तकों और नोटबुक पर खर्च के लिए भी भुगतान किया जाएगा। ऐसी पात्रताओं की एक सूची विस्तृत परिशिष्ट में दी गयी है।
    • उच्च शिक्षा के लिए सहायता :
      • भारत में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों/उच्च शिक्षा के लिए शिक्षा ऋण प्राप्त करने में बच्चे की सहायता की जाएगी।
      • उन परिस्थितियों में जहां लाभार्थी मौजूदा केंद्र और राज्य सरकार की योजना से ब्याज संबंधी छूट का लाभ उठाने में असमर्थ है, शैक्षिक ऋण पर ब्याज का भुगतान पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना से किया जाएगा।
      • एक विकल्प के रूप में, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, जनजातीय कार्य मंत्रालय, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और उच्च शिक्षा विभाग की योजनाओं से पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के लाभार्थियों को मानदंडों के अनुसार छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। ऐसी पात्रताओं का लाभ उठाने के लिए लाभार्थियों को राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल के माध्यम से सहायता प्रदान की जाएगी। लाभार्थियों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति के बारे में पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन पोर्टल पर अपडेट किया जाएगा।
  1. स्वास्थ्य बीमा :
    • सभी बच्चों को आयुष्मान भारत योजना (पीएम-जेएवाई) के तहत लाभार्थी के रूप में नामांकित किया जाएगा, जिसमें पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर होगा।
    • यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत चिन्हित बच्चे को पीएम-जेएवाई के तहत लाभ मिले।
    • योजना के तहत बच्चों को दिए जाने वाले लाभों का विवरण परिशिष्ट में है।
  1. वित्तीय सहायता :
    • लाभार्थियों का खाता खोलने और सत्यापन करने पर एकमुश्त राशि सीधे लाभार्थियों के डाकघर खाते में स्थानांतरित कर दी जाएगी। प्रत्येक पहचाने गए लाभार्थी के खाते में एक यथानुपात राशि अग्रिम रूप से जमा की जाएगी, ताकि प्रत्येक लाभार्थी के लिए 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने के समय कुल कोष 10 लाख रुपये हो जाए।
    • बच्चों को 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद, 10 लाख रुपये के कोष का निवेश करके मासिक वृत्ति मिलेगी। लाभार्थी को 23 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक वृत्ति मिलेगी।
    • उन्हें 23 वर्ष की आयु होने पर 10 लाख रुपये की राशि दी जाएगी।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

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