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INS विक्रांत से हिंद-प्रशांत में शांति लाने में मदद मिलेगी

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INS विक्रांत से हिंदप्रशांत में शांति लाने में मदद मिलेगी

  • हिंद प्रशांत क्षेत्र जिस तरह से अभी वैश्विक कूटनीति के केंद्र में चुका है उसे देखते हुए आइएनएस विक्रांत के भारतीय नौ सेना में शामिल होने की घटना को बड़े परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।
  • भारत के इस पहले स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर को भारतीय नौ सेना में शामिल होने को भारत के रणनीतिक साझेदार देशों ने जिस तरह से हिंद प्रशांत क्षेत्र से जोड़ कर देखा है उसके संकेत साफ है।
  • फ्रांस, ब्रिटेन, अमेरिका जैसे देशों ने ना सिर्फ विक्रांत के साथ सहयोग करने की बात कही है बल्कि यह भी कहा है कि आइएनएस विक्रांत हिंद प्रशांत क्षेत्र को शांतिपूर्ण, बराबरी वाला और सभी को समान अवसर के लायक बनाने में मदद करेगा।
  • माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अमेरिका, जापान, आस्ट्रेलिया के साथ संयुक्त तौर पर होने वाले नौ सैन्य अभ्यास मालाबार में भी आइएनएस विक्रांत हिस्सा लेगा।
  • कोच्चि शिपयार्ड में जिस भव्य समारोह में आइएनएस विक्रांत को भारतीय नौ सेना में शामिल किया गया है उसमें कई देशों के राजनयिकों ने हिस्सा लिया है
  • नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास की तरफ से जारी ट्वीट में भारत को बधाई दी गई है कि वह दुनिया के उन पांच देशों में शामिल हो गया है जिनके पास अपना स्वनिर्मित एयरक्राफ्ट कैरियर है
  • उल्लेखनीय तथ्य यह है कि कोच्चि समारोह में भारत के सबसे पुराने सैन्य सहयोगी देश रूस के राजदूत डेनिस एलिपोव भी मौजूद थे

‘INS विशालनाम से अपना तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर बनाएगा भारत:

  • ऐसी चर्चा है कि भारत और अमेरिका के बीच पहले से ही संयुक्त तौर पर एक एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने को लेकर समझौता हो चुका है और इसके लिए दोनो देशों ने एक संयुक्त समूह का भी गठन किया हुआ है।
  • भारत ने पहले ही ऐलान किया हुआ है कि आइएनएस विशाल नाम से वह अपना तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर बनाएगा
  • अमेरिका के अलावा ब्रिटेन भी इसके डिजाइन को तैयार करने में मदद करने की पेशकश कर चुका है। जबकि रूस भी चाहता है कि वह इसमें भारत की मदद रे।
  • वैसे इसको लेकर भारतीय नौ सेना ने अभी तक अंतिम फैसला नहीं किया हुआ है।
  • जानकारों का कहना है कि चीन पाकिस्तान की चुनौतियों को देखते हुए भारत के पास कम से कम तीन एयरक्राफ्ट कैरियर होने चाहिए।

Note: यह सूचना प्री में एवं मेंस के GS -2, के विकसित और विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का भारत के हितों पर प्रभाववाले पाठ्यक्रम से जुड़ा हुआ है।

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