UN ने श्रीलंका के आर्थिक संकट को मानवाधिकार हनन से जोड़ा
- संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि श्रीलंका फिलहाल अहम राजनीतिक दौर से गुजर रहा है।
- द्वीपीय राष्ट्र की अर्थव्यवस्था के खस्ताहाल होने के लिए मानवाधिकार हनन, आर्थिक अपराधों व भ्रष्टाचार के मामलों की अनदेखी जिम्मेदार है।

- यूएन ने 6 सितंबर 2022 को जारी रिपोर्ट में श्रीलंका को मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए मूलभूत बदलावों व मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों की पुनरावृत्ति पर रोक लगाने की सलाह दी है।
- यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 51वें सत्र के पूर्व जारी की गई है। 12-17 अक्टूबर तक जेनेवा में होने वाले इस सत्र में श्रीलंका को लेकर प्रस्ताव पेश किए जाने की भी संभावना है।
- यह पहला मौका है जब संयुक्त राष्ट्र ने आर्थिक संकट को श्रीलंका के मानवाधिकार हनन के मामलों से जोड़ा है।
- रिपोर्ट के अनुसार, ‘श्रीलंका के सभी समुदायों की राजनीतिक सुधार व जवाबदेही तय करने की दूरगामी मांग, सुधारों व समेकित दृष्टि के विकास की शुरुआत का पहला कदम हो सकती है।‘
- रिपोर्ट में रानिल विक्रमसिंघे सरकार को तत्काल कठोर सुरक्षा कानूनों को खत्म करने तथा सुरक्षा क्षेत्र में बदलावों की पहल करने की सलाह दी गई है।
- आइएएनएस के अनुसार, खाद्यान्न व अन्य वस्तुओं की आसमान छूती महंगाई के बीच संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) ने श्रीलंका में बढ़ती भुखमरी के प्रति आगाह किया है। उसने कहा है कि देश के पांच में से चार घरों में खाद्यान्न की इतनी किल्लत है कि उन्हें दो वक्त का भोजन भी नसीब नहीं हो रहा है।
- अगस्त में जारी रिपोर्ट में डब्ल्यूएफपी ने कहा था कि श्रीलंका के2 करोड़ लोगों में से 63 लाख लोग खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, जबकि 67 लाख लोगों को अपर्याप्त मात्रा में ही भोजन मिल पा रहा है।
Note: यह सूचना प्री में एवं मेंस के GS -2, के “महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, एजेंसियां और मंच– उनकी संरचना, जनादेश” वाले पाठ्यक्रम से जुड़ा हुआ है।