टेलीविजन दर्शक मापन रेटिंग

टीआरपी समिति की रिपोर्ट और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की सिफारिश दिनांक 28.04.2020 को ध्‍यान में रखकर मेसर्स ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) ने अपनी प्रक्रियाओं, प्रोटोकॉल, निगरानी व्‍यवस्‍था में संशोधन किया है और नियमन के स्‍वरूप, इत्‍यादि में परिवर्तन शुरू किया है। स्वतंत्र सदस्यों को शामिल करने के लिए बोर्ड और तकनीकी समिति का पुनर्गठन कार्य भी बार्क द्वारा शुरू किया गया है। एक स्थायी निगरानी समिति का भी गठन किया गया है। डेटा के लिए एक्सेस प्रोटोकॉल को नया रूप दिया गया है और सख्‍त बनाया गया है।

बार्क ने संकेत दिया है कि उसके द्वारा किए गए परिवर्तनों को देखते हुए वे नए प्रस्तावों के बारे में विस्‍तार से बताने के लिए संबंधित क्षेत्रों से संपर्क कर रहे हैं और वे वास्तव में नए प्रोटोकॉल के अनुसार रिलीज शुरू करने के लिए तैयार हैं।

उपर्युक्त बातों को ध्यान में रखते हुए सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने बार्क को तत्काल प्रभाव से समाचार रेटिंग जारी करने और इसके साथ ही मासिक प्रारूप में समाचार विधा के लिए पिछले तीन महीनों के आंकड़े भी जारी करने को कहा है, ताकि वास्‍तविक रुझान को निष्पक्ष और न्यायसंगत रूप से प्रस्‍तुत किया जा सके। संशोधित प्रणाली के अनुसार, समाचार और प्रमुख विधाओं की रिपोर्टिंग ‘चार सप्ताह की रोलिंग औसत अवधारणा’ पर होगी।

मंत्रालय ने टीआरपी सेवाओं के उपयोग हेतु रिटर्न पाथ डेटा (आरपीडी) क्षमताओं का उपयोग करने पर विचार करने के लिए प्रसार भारती के सीईओ की अध्यक्षता में एक ‘कार्य समूह’ का भी गठन किया है, जैसा कि ट्राई द्वारा और इसके साथ ही टीआरपी समिति की रिपोर्ट में भी सिफारिश की गई है। यह समिति चार माह में अपनी रिपोर्ट पेश कर देगी।

क्या होती है टीवी चैनल की टीआरपी?

टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट यानी टीआरपी एक ऐसा उपकरण है जिसके द्वारा यह पता लगाया जाता है कि कौन सा प्रोग्राम या टीवी चैनल सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। साथ ही इसके कारण किसी भी प्रोग्राम या चैनल की पॉपुलैरिटी को समझने में मदद मिलती है, यानी कि लोग किसी चैनल या प्रोग्राम को कितनी बार और कितने समय के लिए देख रहे हैं। प्रोग्राम की टीआरपी सबसे ज्यादा होना मतलब सबसे ज्यादा दर्शक उस प्रोग्राम को देख रहे हैं।

टीआरपी का डाटा विज्ञापनदाताओं के लिए बहुत ही उपयोगी होता है, क्योंकि विज्ञापनदाता उन्हीं प्रोग्राम को विज्ञापन देने के लिए चुनते हैं जिसकी टीआरपी ज्यादा होती है। बता दें कि टीआरपी को मापने के लिए कुछ जगहों पर ‘पीपल मीटर’ (People Meter) लगाए जाते हैं। इसे ऐसे समझ सकते है कि कुछ हजार दर्शकों को न्याय और नमूने के रूप में सर्वे किया जाता है और इन्हीं दर्शकों के आधार पर सारे दर्शक मान लिया जाता है जो टीवी देख रहे होते हैं। ये पीपल मीटर विशिष्ट आवृत्ति के द्वारा पता लगाते हैं कि कौन सा प्रोग्राम या चैनल कितनी बार देखा जा रहा है।

कैसे तय की जाती है टीआरपी?

इस मीटर के द्वारा टीवी की एक-एक मिनट की जानकारी को निगरानी दल, भारतीय टेलीविजन दर्शकों का मापन (INTAM) तक पहुंचा दिया जाता है. ये टीम पीपल मीटर से मिली जानकारी का विश्लेषण करने के बाद तय करती है कि किस चैनल या प्रोग्राम की टीआरपी कितनी है। इसकी गणना करने के लिए एक दर्शक के द्वारा नियमित रूप से देखे जाने वाले प्रोग्राम और समय को लगातार रिकॉर्ड किया जाता है और फिर इस डाटा को 30 से गुना करके प्रोग्राम का एवरेज रिकॉर्ड निकाला जाता है। यह पीपल मीटर किसी भी चैनल और उसके प्रोग्राम के बारे में पूरी जानकारी निकाल लेता है।

RP से चैनल की आय का संबंध

  • टेलीविज़न पर किसी चैनल के कार्यक्रम को देखते समय विज्ञापन प्रसारित किये जाते हैं, इन्हीं विज्ञापन के जरिये टेलीविज़न के चैनल्स की आय होती है। अधिकतर टीवी चैनलों की आय का ज़रिया विज्ञापन ही होते हैं।
  • विज्ञापनदाता अपनी कंपनी, उत्पाद और सर्विस का प्रमोशन करने के लिये टीवी चैनलों पर अपना विज्ञापन दिखाने के लिये करोड़ों रुपए देते हैं।
  • अब जिस टीवी चैनल की TRP सबसे ज्यादा होगी, उसे सबसे ज्यादा लोग देखते होंगे। इसलिये विज्ञापनदाता सबसे ज्यादा TRP वाले चैनलों पर विज्ञापन देना पसंद करते हैं।
  • इससे विज्ञापनदाता कंपनियों के विज्ञापन अधिक लोगों तक पहुँचते हैं और उन्हें ज्यादा लाभ प्राप्त होता है। चैनल की TRP जितनी अधिक होगी वह विज्ञापन दाताओं से विज्ञापन दिखाने के लिये उतना ही अधिक पैसे लेता है।

ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल

  • यह एक औद्योगिक निकाय है, जिसका स्वामित्व विज्ञापनदाताओं, विज्ञापन एजेंसियों और प्रसारण कंपनियों के पास है। जिसका प्रतिनिधित्व द इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवरटाइज़र्स (The Indian Society of Advertisers), इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन और एडवरटाइजिंग एजेंसीज़ एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (the Indian Broadcasting Foundation and the Advertising Agencies Association of India) द्वारा किया जाता है।
  • यद्यपि इसे वर्ष 2010 में बनाया गया था, परंतु सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 10 जनवरी 2014 को भारत में टेलीविजन रेटिंग एजेंसियों के लिये नीति दिशानिर्देशों को अधिसूचित किया और इन दिशानिर्देशों के तहत जुलाई 2015 में ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल को पंजीकृत किया गया।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.1PRE