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Current Affair 10 October 2021

Current Affairs – 10 October, 2021

कोयले की उपलब्धता पर्याप्त है

कोयला मंत्रालय आश्वस्त करता है कि बिजली संयंत्रों की मांग को पूरा करने के लिए देश में पर्याप्त कोयला उपलब्ध है। बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका पूरी तरह गलत है। बिजली संयंत्र के पास कोयले का स्टॉक लगभग 72 लाख टन है, जो 4 दिनों की आवश्यकता के लिए पर्याप्त है। कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के पास 400 लाख टन से अधिक कोयला है जिसकी बिजली संयंत्रों को आपूर्ति की जा रही है।

कोयला कंपनियों से मजबूत आपूर्ति के आधार पर इस वर्ष (सितंबर 2021 तक) घरेलू कोयला आधारित बिजली उत्पादन में लगभग 24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बिजली संयंत्रों में कोयले की दैनिक औसत आवश्यकता लगभग 18.5 लाख टन प्रतिदिन है जबकि दैनिक कोयले की आपूर्ति लगभग 17.5 लाख टन प्रतिदिन है। ज्यादा मॉनसून के कारण कोयले की आपूर्ति बाधित थी। बिजली संयंत्रों में उपलब्ध कोयला एक रोलिंग स्टॉक है जिसकी भरपाई कोयला कंपनियों से दैनिक आधार पर आपूर्ति द्वारा की जाती है। इसलिए बिजली संयंत्र के पास कोयले के स्टॉक के घटने का कोई भी डर गलत है। वास्तव में इस वर्ष घरेलू कोयले की आपूर्ति ने आयात को एक महत्वपूर्ण कदम द्वारा प्रतिस्थापित किया है।

कोयला क्षेत्रों में भारी बारिश के बावजूद, सीआईएल ने इस वर्ष बिजली क्षेत्र को 255 मीट्रिक टन से अधिक कोयले की आपूर्ति की थी जो कि सीआईएल से बिजली क्षेत्र को अब तक की सबसे अधिक एच-1 आपूर्ति है। सभी स्रोतों से कुल कोयले की आपूर्ति में से सीआईएल से बिजली क्षेत्र को वर्तमान कोयले की आपूर्ति प्रति दिन 14 लाख टन से अधिक है और घटती बारिश के साथ यह आपूर्ति पहले ही बढ़कर 15 लाख टन हो गई है और अक्टूबर 2021 के अंत तक प्रति दिन 16 लाख टन से अधिक तक बढ़ने की संभावना है। एससीसीएल और कैप्टिव कोयला ब्लॉकों से  हर दिन 3 लाख टन से अधिक कोयले के योगदान की उम्मीद है।

भारी मॉनसून, कम कोयले के आयात और आर्थिक सुधार के कारण बिजली की मांग में भारी वृद्धि के बावजूद घरेलू कोयले की आपूर्ति ने बिजली उत्पादन को बड़े पैमाने पर समर्थन दिया है। चालू वित्त वर्ष में कोयले की आपूर्ति रिकॉर्ड स्तर पर रहने की उम्मीद है।

कोयले की उच्च अंतर्राष्ट्रीय कीमतों के कारण, आयात आधारित बिजली संयंत्रों द्वारा पीपीए के तहत भी बिजली की आपूर्ति लगभग 30 प्रतिशत कम हो गई है, जबकि घरेलू आधारित बिजली आपूर्ति इस वर्ष की पहली छमाही में लगभग 24 प्रतिशत बढ़ गई है। आयातित कोयला आधारित बिजली संयंत्रों ने 45.7 बीयू के एक कार्यक्रम के मुकाबले लगभग 25.6 बीयू उत्पन्न किया है।

देश में कोयले की आरामदायक स्थिति इस तथ्य से भी साफ होती है कि सीआईएल देश के थर्मल प्लांट को कोयले की आपूर्ति के साथ एल्युमिनियम, सीमेंट, स्टील आदि गैर-विद्युत उद्योगों की मांग को पूरा करने के लिए प्रतिदिन 2.5 लाख टन (लगभग) से अधिक की आपूर्ति कर रहा है।

कोयला

एक ठोस कार्बनिक पदार्थ है जिसको ईंधन के रूप में प्रयोग में लाया जाता है। ऊर्जा के प्रमुख स्रोत के रूप में कोयला अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं। कुल प्रयुक्त ऊर्जा का 35% से 40% भाग कोयलें से प्राप्त होता हैं। कोयले से अन्य दहनशील तथा उपयोगी पदार्थ भी प्राप्त किए जाते हैं। ऊर्जा के अन्य स्रोतों में पेट्रोलियम तथा उसके उत्पाद का नाम सर्वोपरि है। विभिन्न प्रकार के कोयले में कार्बन की मात्रा अलग-अलग होती है।

(1) ऐन्थ़्रसाइट(Anthracite)

यह सबसे उच्च गुणवत्ता वाला कोयला माना जाता है क्योंकि इसमें कार्बन की मात्रा 94 से 98 प्रतिशत तक पाई जाती है। यह कोयला मजबूत, चमकदार काला होता है। इसका प्रयोग घरों तथा व्यवसायों में स्पेस-हीटिंग के लिए किया जाता है।

(2) बिटुमिनस (Bituminous)

यह कोयला भी अच्छी गुणवत्ता वाला माल्ना जाता है। इसमें कार्बन की मात्रा 77 से 86 प्रतिशत तक पाई जाती है। यह एक ठोस अवसादी चट्टान है, जो काली या गहरी भूरी रंग की होती है। इस प्रकार के कोयले का उपयोग भाप तथा विद्युत संचालित ऊर्जा के इंजनों में होता है। इस कोयले से कोक का निर्माण भी किया जाता है।

(3) लिग्नाइट (Lignite)

यह कोयला भूरे रंग का होता है तथा यह स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक हानिकारक सिद्ध होता है। इसमें कार्बन की मात्रा 28 से 30 प्रतिशत तक होती है। इसका उपयोग विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।

(4) पीट (Peat)

यह कोयले के निर्माण से पहले की अवस्था होती है। इसमें कार्बन की मात्रा 27 प्रतिशत से भी कम होती है। तथा यह कोयला स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यधिक हानिकारक होता है।

भारत में साधारण कोयले के भंडार तो प्रचुर मात्रा में प्राप्त हैं, किंतु कोक उत्पादन के लिये उत्तम श्रेणी का कोयला अपेक्षाकृत सीमित है।

भारत में कोयला मुख्यत: दो विभिन्न युगों के स्तरसमूहों में मिलता है :

पहला गोंडवाना युग (Gondwana Period) में, तथा

दूसरा तृतीय कल्प (Tertiary Age) में।

इनमें गोंडवाना कोयला उच्च श्रेणी का होता है। इसमें राख की मात्रा अल्प तथा तापोत्पादक शक्ति अधिक होती है। तृतीय कल्प का कोयला घटिया श्रेणी का होता है। इसमें गंधक की प्रचुरता होने के कारण यह कतिपय उद्योगों में प्रयुक्त नहीं किया जा सकता।

भारत में गोंडवाना युग के प्रमुख क्षेत्र झरिया (झारखंड) तथा रानीगंज (बंगाल) में स्थित है। अन्य प्रमुख क्षेत्रों में बोकारो, गिरिडीह, करनपुरा, पेंचघाटी, उमरिया, सोहागपुर, सिगरेनी, कोठा गुदेम आदि उल्लेखनीय हैं। भारत में उत्पादित संपूर्णै कोयले का ७० प्रतिशत केवल झरिया और रानीगंज से प्राप्त होता है। तृतीय कल्प के कोयले, लिग्नाइट और बिटूमिनश आदि के निक्षेप असम, कशमीर, राजस्थान, तमिलनाडू और गुजरात राज्यों में है।

मुख्य गोंडवाना विरक्षा (Exposures) तथा अन्य संबंधित कोयला निक्षेप प्रायद्वीपीय भारत में दामोदर, सोन, महानदी, गोदावरी और उनकी सहायक नदियों की घाटियों के अनुप्रस्थ एक रेखाबद्ध क्रम (linear fashion) में वितरित हैं।

कोयले के प्रकार

नमीरहित कार्बन की मात्रा के आधार पर कोयले को निम्नलिखित चार प्रकारों में बांटा गया हैं –

एन्थ्रेसाइट (94-98%)

बिटूमिनस (78-86%)

लिग्नाइट (28-30%)

पीट (27%)

कोल इण्डिया लिमिटेड

कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) एक भारत का सार्वजनिक प्रतिष्ठान है। यह भारत और विश्व में भी सबसे बड़ी कोयला खनन कंपनी है। यह भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है, जो कोयला मंत्रालय, भारत सरकार के अधीनस्थ है। यह कोयला खनन एवं उत्पादन में लगी कंपनी है। यह अनुसूची ‘ए’ ‘नवरत्न’ सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है। इसका मुख्यालय कोलकाता, पश्चिम बंगाल में स्थित है।

31 मार्च 2010 तक इसके संचालन में भारत के आठ राज्यों के 21 प्रमुख कोयला खनन क्षेत्रों के 471 खान थे, जिनमें 273 भूमिगत खान, 163 खुली खान और 35 मिश्रित खान (भूमिगत और खुली खानों का मिश्रण) शामिल थे। हम 17 कोयला परिष्करण सुविधाओं का भी संचालन कर रहे थे, जिनका समग्र फीडस्टॉक क्षमता सालाना 39.40 मिलियन टन की है। हमारा इरादा है इसके अतिरिक्त सालाना 111.10 मिलियन टन की समग्र फीडस्टॉक क्षमता के 20 और कोयला परिष्करण सुविधाओं का विकास करना। इस के अलावा हमने 85 अस्पतालों और 424 औषधालयों के सेवाएं भी प्रदान किये।

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ कोल मैनजमेंट (आई.आई.सी.एम.) सी.आई.एल. के तहत संचालित है और अधिकारियों के लिए विभिन्न बहु–अनुशासनात्मक प्रबंधन विकास कार्यक्रम प्रदान करता है।

कोल इंडिया के प्रमुख उपभोक्ता बिजली और इस्पात क्षेत्र हैं। अन्य क्षेत्रों में सीमेंट, उर्वरक, ईंट भट्टे और विभिन्न लघु उद्योग शामिल हैं। हम तरह तरह के अनुप्रयोगों के लिए विभिन्न ग्रेड के कोकिंग और गैर कोकिंग कोयले का उत्पादन करते है।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

 

बहुपक्षीय समुद्री अभ्यास मालाबार 2021

भारतीय नौसेना, जापान मैरीटाइम सेल्फ डिफेंस फोर्स (जेएमएसडीएफ), रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी (आरएएन) और यूनाइटेड स्टेट्स नेवी (यूएसएन) के साथ बहुपक्षीय समुद्री अभ्यास मालाबार के दूसरे चरण में भाग लेगी। यह अभ्यास 12-15 अक्टूबर 2021 तक बंगाल की खाड़ी में आयोजित किया जा रहा है। अभ्यास का पहला चरण दिनांक 26 से 29 अगस्त 2021 तक फिलीपींस सागर में आयोजित किया गया था।

भारतीय नौसेना की ओर से आईएनएस रणविजय, आईएनएस सतपुड़ा, लंबी दूरी का समुद्री गश्ती विमान पी8आई और एक पनडुब्बी शामिल है। यूएस नेवी का प्रतिनिधित्व एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस कार्ल विंसन द्वारा दो विध्वंसक, यूएसएस लेक शैम्प्लेन और यूएसएस स्टॉकडेल के साथ किया जाएगा। जेएमएसडीएफ का प्रतिनिधित्व जेएस कागा और जेएस मुरासामे करेंगे, जबकि रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी का प्रतिनिधित्व एचएमएएस बैलेराट और एचएमएएस सीरियस करेंगे।

अभ्यास का दूसरा चरण अभ्यास के पहले चरण के दौरान बनाए गए तालमेल, समन्वय और अंतर-संचालन पर आधारित होगा और उन्नत सतह तथा पनडुब्बी रोधी युद्ध अभ्यास, सीमेनशिप विकास और हथियार फायरिंग पर ध्यान केंद्रित करेगा।

अभ्यास की मालाबार श्रृंखला जो 1992 में भारत और अमेरिका के बीच एक वार्षिक द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास के रूप में शुरू हुई थी, ने पिछले कुछ वर्षों में विस्तार और जटिलता देखी है। मालाबार का 25वां संस्करण दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है, जो कोविड-19 महामारी के दौरान सभी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए, एक मुक्त, खुले, समावेशी इंडो-पैसिफिक के साथ-साथ एक नियम-आधारित अंतर्राष्‍ट्रीय व्यवस्था के पक्ष में भाग लेने वाले देशों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भारत की रक्षा नीति में मालाबार अभ्यासों का योगदान

इस लिहाज से मालाबार युद्धाभ्यासों का भारत की सुरक्षा कूटनीति और रक्षा सहयोगों में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। साल 1992 को वैसे तो भारत की लुक ईस्ट नीति की शुरुआत के लिए जाना जाता है लेकिन यह साल अमेरिका के साथ सैन्य सहयोग के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसी साल मालाबार संयुक्त अभ्यासों की भी शुरुआत हुई जिसके बाद भारत और अमेरिका की नौसेनाओं के बीच सहयोग तेजी से बढ़ा।

2007 में इसका दायरा बढ़ा कर जापान, सिंगापुर, और ऑस्ट्रेलिया को भी इस संयुक्त अभ्यास में जोड़ा गया लेकिन चीनी विरोध के चलते बात ज्यादा आगे बढ़ नहीं पाई। चीन ने इन देशों के राजदूतों को डीमार्श जारी कर अपना कड़ा विरोध जताया। उस समय चीन से कोई पंगा नहीं लेना चाहता था लेकिन एक दशक बाद स्थिति बदल गई थी। आखिरकार 2015 में जापान इसका हिस्सा बना और 2020 में ऑस्ट्रेलिया भी वापस जुड़ा।

क्वाड के अन्य सैन्य अभ्यास अलावा कई

आने वाले हफ्तों में भारतीय नौसेना कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय अभ्यास करेगी जिसमें आस्ट्रेलिया के साथ आस-इंडेक्स, इंडोनेशिया के साथ समुद्र-शक्ति, और सिंगापुर के साथ सिम्बेक्स अभ्यास उल्लेखनीय है। इंडो पेसिफिक में अमेरिका और पश्चिमी देशों की बढ़ती दिलचस्पी और दक्षिण चीन सागर में चीन के दबदबे के कारण चीन अंतरराष्ट्रीय आलोचना के केंद्र में। साथ ही भारत के साथ बढ़ते तनातनी के कारण भारत भी प्रशांत क्षेत्र को अपनी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मान रहा है।

यही वजह है कि द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों के अलावा बहुपक्षीय युद्धाभ्यासों के मामले में भारतीय सेना की भागीदारी बढ़ रही है। ऑस्ट्रेलिया चाहता है कि 2023 में उसकी मेजबानी में होने वाले तलिस्मान साबर में भारत भी भाग ले। कुल मिलाकर तैयारियां काफी बड़े स्तर पर हो रही हैं और इशारा साफ तौर पर चीन की ओर है। शुरुआती हिचकिचाहट के बाद अब इन देशों को अब कोई हिचक भी नहीं रह गई है।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

 

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने आज विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निमहंस) बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

डॉ. मनसुख मंडाविया ने अपने संबोधन में आगाह किया कि मानसिक स्वास्थ्य विकार देश में मधुमेह की तरह एक साइलेंट किलर है। उन्होंने कहा, ‘‘मधुमेह घातक हो जाता है क्योंकि इसका अक्सर पता नहीं चलता है, जबकि मानसिक स्वास्थ्य विकारों से पीड़ित लोग कलंकित होने के डर से आगे नहीं आते हैं।”

उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य विकार के मामलों में हालिया वृद्धि के लिए हमारी जीवनशैली और पारिवारिक संरचना में बदलाव एक प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा, ‘अस्पताल अंतिम चरण है। परिवार अपने सदस्यों में परेशानी के शुरुआती लक्षण देख सकता है और समस्या के बिगड़ने से पहले मदद कर सकता है। इसी तरह, शिक्षक अपने विद्यार्थियों में व्यवहार परिवर्तन देख सकते हैं और समाधान प्रदान कर सकते हैं। इस तरह के कदम समस्या को जड़ से खत्म कर देंगे।”

डॉ. मंडाविया ने कहा कि सरकार और समाज एक साथ मिलकर काम कर सकते हैं। मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में और अधिक शोध किए जाने की आवश्यकता है, जिस पर सरकार की भविष्य की नीति आधारित होगी जिस कार्य में निमहंस जैसे पुराने और प्रसिद्ध संस्थान सामने आएं।

World Mental Health Day 2021 : विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस प्रतिवर्ष 10 अक्टूबर को मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के खिलाफ दुनिया भर में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है। मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्रों में से एक है। आज लगभग 1 अरब लोग मानसिक विकारों से पीड़ित हैं, जबकि 30 लाख लोग हर साल आत्महत्या या शराब के हानिकारक उपयोग से मर जाते हैं। इस दिन की शुरुआत विश्व मानसिक स्वास्थ्य संगठन वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ द्वारा की गई थी। इस दिन हजारों की संख्या में लोग स्कूल, कॉलेज, कार्यस्थल आदि में जागरूकता अभियान चलाकर बाहर निकलते हैं और जश्न मनाते हैं।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस का इतिहास

यह पहली बार वर्ष 1992 में 10 अक्टूबर को उप महासचिव रिचर्ड हंटर की पहल पर मनाया गया था। 1993 तक, इस दिन का कोई विशेष विषय नहीं था। 1994 में तत्कालीन महासचिव यूजीन ब्रॉडी के सुझाव पर एक थीम के साथ विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया गया था। विषय था “दुनिया भर में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार”। डब्ल्यूएचओ द्वारा तकनीकी और संचार सामग्री विकसित करने के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता बढ़ाने के माध्यम से समर्थित है।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

 

पहली बार दो लंबी दूरी की मालगाड़ियों त्रिशूलऔर

गरुड़का सफलतापूर्वक संचालन किया

रतीय रेलवे ने दक्षिण मध्य रेलवे (एससीआर) पर पहली बार दो लंबी दूरी की मालगाड़ियों “त्रिशूल” और “गरुड़” का सफलतापूर्वक संचालन किया है। मालगाड़ियों की सामान्य संरचना से दोगुनी या कई गुना बड़ी, लंबी दूरी की यह रेल महत्वपूर्ण सैक्‍शनों में क्षमता की कमी की समस्या का एक बहुत प्रभावी समाधान प्रदान करती हैं।

त्रिशूल दक्षिण मध्य रेलवे की पहली लंबी दूरी की रेल है जिसमें तीन मालगाड़ियां, यानी 177 वैगन शामिल हैं। यह रेल 07.10.2021 को विजयवाड़ा मंडल के कोंडापल्ली स्टेशन से पूर्वी तट रेलवे के खुर्दा मंडल के लिए रवाना हुई थी। एससीआर ने इसके बाद 08.10.2021 को गुंतकल डिवीजन के रायचूर से सिकंदराबाद डिवीजन के मनुगुरु तक इसी तरह की एक और रेल को रवाना किया और इसे गरुड़ नाम दिया गया है। दोनों ही मामलों में लंबी दूरी की रेलों में मुख्य रूप से थर्मल पावर स्टेशनों के लिए कोयले की लदान के लिए खाली खुले वैगन शामिल थे।

एससीआर भारतीय रेल पर पांच प्रमुख माल ढुलाई वाले रेलवे में से एक है। विशाखापत्तनम-विजयवाड़ा-गुडुर-रेनिगुंटा, बल्लारशाह-काजीपेट-विजयवाड़ा, काजीपेट-सिकंदराबाद-वाडी, विजयवाड़ा-गुंटूर-गुंतकल खंडों जैसे कुछ मुख्य मार्गों पर एससीआर थोक माल के यातायात का संचालन करता है। चूंकि इसके अधिकांश माल यातायात को इन प्रमुख मार्गों से होकर गुजरना पड़ता है, इसलिए एससीआर के लिए इन महत्वपूर्ण सैक्‍शनों में उपलब्ध प्रवाह क्षमता को अधिकतम करना आवश्यक है।

लंबी दूरी की इन रेलों के माध्‍यम से परिचालन में भीड़भाड़ वाले मार्गों पर पथ की बचत, शीघ्र आवागमन समय, महत्वपूर्ण सैक्‍शन में प्रवाह क्षमता को अधिकतम करना, चालक दल में बचत करना जैसे लाभ शामिल हैं। इन उपायों के माध्‍यम से भारतीय रेल अपने मालवाहक ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करने में मदद करती है।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.1 PRE

 

एनएमडीसी

इस्पात मंत्रालय के तहत एक सीपीएसई (केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम) राष्ट्रीय खनिज विकास निगम लिमिटेड (एनएमडीसी) ने पर्यावरण स्थिरता श्रेणी में स्वर्ण पुरस्कार जीता है। वहीं कुमारस्वामी लौह अयस्क खान ने पर्यावरण प्रबंधन श्रेणी में प्लेटिनम पुरस्कार जीता है। एनएमडीसी, देश की सबसे बड़ी लौह अयस्क उत्पादन कंपनी है। इस समारोह का आयोजन सतत विकास फाउंडेशन (एक काम देश के नाम- की एक इकाई) ने किया गया था और देहरादून में आयोजित 10वें सम्मेलन में इन पुरस्कारों को प्रदान किया गया।

एनएमडीसी लिमिटेड, (पूर्व में राष्ट्रीय खनिज विकास निगम), एक सरकारी स्वामित्व वाला खनिज उत्पादक है। यह भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है। यह लौह अयस्क, तांबा, रॉक फॉस्फेट, चूना पत्थर, डोलोमाइट, जिप्सम, बेंटोनाइट, मैग्नेसाइट, हीरा, टिन, टंगस्टन, ग्रेफाइट, आदि की खोज में शामिल है।यह भारत का सबसे बड़ा लौह अयस्क उत्पादक और निर्यातक है, जो छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में तीन मशीनीकृत खदानों से 35 मिलियन टन से अधिक लौह अयस्क का उत्पादन करता है। यह मध्य प्रदेश के पन्ना में देश में एकमात्र यंत्रीकृत हीरे की खान भी संचालित करता है।

संचालन खदान

बैलाडीला लौह अयस्क खदान, किरंदुल परिसर, दक्षिण बस्तर जिला, दंतेवाड़ा (छ.ग.) इस्पात

बैलाडीला लौह अयस्क खदान, बचेली कॉम्प्लेक्स, दक्षिण बस्तर जिला, दंतेवाड़ा (छ.ग.)

डोनिमलाई लौह अयस्क खदान, डोनिमलाई, बेल्लारी जिला, कर्नाटक (दिसंबर 2019 में एक रॉयल्टी विवाद के कारण एक वर्ष से अधिक के लिए निलंबित)[6]

हीरा खनन परियोजना, मझगवां, पन्ना (म.प्र.)

एनएमडीसी लिमिटेड इस्पात उद्योग के लिए अन्य कच्चे माल जैसे कम सिलिका चूना पत्थर में विविध है। इसकी सहायक कंपनी जेके मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से मृत जले हुए मैग्नेसाइट का उत्पादन और आगे मूल्यवर्धन का अध्ययन किया जा रहा है।

एनएमडीसी लिमिटेड ने उत्तर प्रदेश राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड से एक सिलिका रेत खनन और लाभकारी परियोजना का अधिग्रहण किया है। संयंत्र को फ्लोट/उत्पादन के लिए कच्चे माल के रूप में प्रति वर्ष 300,000 टन की क्षमता के लिए उच्च शुद्धता वाली सिलिका रेत का उत्पादन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। शीट ग्लास।

भीमुनिपट्टनम बीच रेत के विकास के लिए एक संयुक्त उद्यम स्थापित करने के लिए एनएमडीसी, इंडियन रेयर अर्थ लिमिटेड, (आईआरई) और आंध्र प्रदेश खनिज विकास निगम के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस परियोजना में समुद्र तट की रेत का खनन, इल्मेनाइट कंसंट्रेट के लिए खनिज पृथक्करण संयंत्र की स्थापना और इल्मेनाइट को सिंथेटिक रूटाइल/टीओओ2 स्लैग/टीओओ2 वर्णक में पिग आयरन के साथ उप-उत्पाद के रूप में परिवर्तित करने के लिए एक डाउनस्ट्रीम मूल्य संवर्धन संयंत्र की परिकल्पना की गई है।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.1 PRE

 

राष्ट्रव्यापी नदी पशुपालन कार्यक्रम

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने 8 अक्टूबर, 2021 को नदी पशुपालन कार्यक्रम (River Ranching Programme) का शुभारंभ किया।

मुख्य बिंदु

  • इस कार्यक्रम का शुभारंभ बृजघाट, गढ़ मुक्तेश्वर, उत्तर प्रदेश में किया गया।
  • उत्तर प्रदेश के साथ, अन्य 4 राज्यों उड़ीसा, उत्तराखंड, त्रिपुरा और छत्तीसगढ़ ने ‘राष्ट्रव्यापी नदी पशुपालन कार्यक्रम’ के शुभारंभ में भाग लिया।
  • उत्तर प्रदेश में, लगभग 500 लोगों ने राष्ट्रीय स्तर पर नदी पशुपालन कार्यक्रम के शुभारंभ में भाग लिया।
  • उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में गंगा नदी के चंडी घाट पर 1 लाख फिंगरलिंग्स (एक प्रकार की मछली) का प्रजनन किया गया।

नदी पशुपालन कार्यक्रम (River Ranching Programme)

नदी पालन कार्यक्रम को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) योजना के तहत विशेष गतिविधि के रूप में शुरू किया गया था ताकि भूमि और पानी का उत्पादक रूप से विस्तार, गहन, विविधीकरण और उपयोग करके मछली उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाया जा सके।

कार्यान्वयन एजेंसी

राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड, हैदराबाद PMMSY के केंद्रीय घटक के तहत नोडल एजेंसी है। इस बोर्ड को “मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य मंत्रालय” द्वारा नामित किया गया है।

कार्यक्रम की आवश्यकता

जैसे-जैसे मानव आबादी बढ़ रही है, उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन की आवश्यकता और मछली की मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है। इस प्रकार, एक किफायती और पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार तरीके से मत्स्य संसाधनों के सतत उपयोग और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए, नदी पशुपालन कार्यक्रम शुरू किया गया था। यह कार्यक्रम सतत मत्स्य पालन, जैव विविधता के संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का आकलन करने, आवास क्षरण को कम करने और सामाजिक-आर्थिक लाभों को अधिकतम करने में मदद करेगा।

SOURCE-GK TODAY

PAPER-G.S.1 PRE

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