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Current Affair 10 September 2021

Current Affairs – 10 September, 2021

परिवहन एवं विपणन सहायता (टीएमए) स्कीम में संशोधन किया

केंद्र ने निर्दिष्ट कृषि उत्पादों के लिए ‘परिवहन एवं विपणन सहायता (टीएमए)’ स्कीम को संशोधित कर दिया है।

वाणिज्य विभाग ने फरवरी, 2019 में माल भाड़े के अंतर्राष्‍ट्रीय घटक के लिए सहायता उपलब्ध कराने के लिए, कृषि उत्पादों के भारतीय निर्यातकों के सामने आने वाली उच्चतर माल भाड़ा लागत के नुकसानों को कम करने के लिए ‘परिवहन एवं विपणन सहायता (टीएमए)’ स्कीम लागू की थी। आरंभ में यह स्कीम 01.03.2019 से 31.03.2020 की अवधि के लिए लागू थी और बाद में इसे विस्तारित कर 31.03.2021 तक के लिए प्रभावी कर दिया गया था।

अब विभाग ने निर्यात के लिए निर्दिष्ट कृषि उत्पादों के लिए ‘संशोधित परिवहन एवं विपणन सहायता (टीएमए)’ स्कीम को 01.04.2021 को या बाद में 31.03.2022 तक के लिए प्रभावी करने को अधिसूचित कर दिया है। वर्तमान स्कीम निर्यात के लिए 31.03.2021 तक प्रभावी रूप से प्रचालन में बनी रहेगी।

संशोधित स्कीम में निम्नलिखित प्रमुख बदलाव किए गए हैं :

  • डेयरी उत्पाद, जो पहले की स्कीम के तहत शामिल नहीं थे, संशोधित स्कीम के तहत अब सहायता के पात्र होंगे।
  • सहायता की दरें बढ़ा दी गई हैं, समुद्र द्वारा निर्यात किए जाने पर 50 प्रतिशत तथा हवाई जहाज द्वारा निर्यात किए जाने पर 100 प्रतिशत की बढोतरी की गई है।

परिवहन एवं विपणन सहायता (टीएमए)

प्रमुख बिंदु

  • हाल में सरकार ने यूरोप और उत्तरी अमेरिका के कुछ देशों में कृषि संबंधी वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिये परिवहन और विपणन सहायता योजना की घोषणा की, इससे कृषि उत्पादों के परिवहन और विपणन के लिये वित्तीय सहायता प्राप्त करने में आसानी होगी।
  • इस योजना के अंतर्गत माल ढुलाई प्रभार के एक निश्चित हिस्से की प्रतिपूर्ति सरकार द्वारा की जाएगी और कृषि उपज के विपणन के लिये किसानों को सहायता प्रदान की जाएगी।
  • विदेश व्यापार महानिदेशालय (Directorate General of Foreign Trade – DGFT) ने निर्दिष्ट कृषि उत्पादों के लिये TMA प्राप्त करने हेतु प्रक्रिया और आयात-निर्यात फॉर्म जारी कर दिया है।
  • इस योजना में हवाई और समुद्री मार्ग (सामान्य और प्रशीतित दोनों कार्गो) द्वारा निर्यात के लिये माल ढुलाई और विपणन सहायता शामिल है।
  • इस प्रक्रिया के अनुसार, एक पंजीकृत और पात्र निर्यातक जिसके पास निर्यात संवर्द्धन परिषद या कमोडिटी बोर्ड द्वारा जारी वैध पंजीकरण सह सदस्यता प्रमाण पत्र (Registration Cum Membership Certificate – RCMC) हो, सहायता प्राप्त करने/दावा करने के लिये ऑनलाइन आवेदन कर सकता है।

आवेदन की प्रक्रिया

  • आवेदन पत्र विदेश व्यापार महानिदेशालय की वेबसाइट पर ऑनलाइन उपलब्ध है। एक निश्चित शुल्क के साथ इसे ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा।
  • TMA पर दावे के लिये आवेदन त्रैमासिक आधार पर किया जाएगा।
  • अधिसूचना के अनुसार तिमाही के पूरा होने से एक साल की अवधि के भीतर ऑनलाइन दावे दर्ज किये जाने चाहिये।
  • आवेदन पत्र दाखिल करने के लिये जिन दस्तावेज़ों की आवश्यकता होती है, उनमें शिपिंग या एयरवेज़ बिल, वाणिज्यिक चालान, लदान के ऑनबोर्ड बिल और लैंडिंग का प्रमाण शामिल हैं।
  • यह सहायता केवल कार्गो को शिपिंग करने वाले निर्यातक को दी जाएगी और उसके नाम पर भुगतान सामान्य बैंकिंग चैनलों के माध्यम से किया जाएगा।
  • DGFT के अनुसार, यह योजना केवल EDI (इलेक्ट्रॉनिक डेटा इंटरचेंज) बंदरगाहों के माध्यम से निर्यात के लिये स्वीकार्य है।

परिदृश्य

  • यह 1 मार्च, 2019 से मार्च 2020 तक किये जाने वाले निर्यात के लिये उपलब्ध होगा।
  • इस योजना का लाभ उठाते हुए व्यापार विशेषज्ञों ने कहा कि इस योजना से भारत से कृषि निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी।

उद्देश्य

  • इसका उद्देश्य चाय, कॉफी और चावल जैसी कृषि वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा देना तथा वैश्विक कृषि व्यापार में देश की हिस्सेदारी बढ़ाना है।
  • भारत के कृषि निर्यात बढ़ाने की बहुत बड़ी संभावना है। लेकिन निर्यात को बढ़ावा देने के लिये और अधिक वैश्विक कृषि बाज़ार तलाशने की ज़रूरत है।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

 

अकाउंट एग्रीगेटर नेटवर्क

पिछले सप्ताह, भारत ने वित्तीय डेटा-साझा प्रणाली – अकाउंट एग्रीगेटर (एए) नेटवर्क का अनावरण किया, जो निवेश और ऋण के क्षेत्र में क्रांति ला सकता है। इससे लाखों उपभोक्ताओं को अपने वित्तीय रिकॉर्ड के उपयोग पर आसान पहुंच और नियंत्रण मिल सकता है और ऋण प्रदाता तथा फिनटेक कंपनियों के लिए ग्राहकों की संभावित संख्या में अत्यधिक विस्तार हो सकता है। अकाउंट एग्रीगेटर व्यक्ति को अपने व्यक्तिगत वित्तीय डेटा पर नियंत्रण के साथ सशक्त बनाता है, जो डेटा सामान्यतया अलग-थलग और आसान पहुँच से बाहर रहते हैं।

यह भारत में ओपन बैंकिंग की व्यवस्था शुरू करने की दिशा में पहला कदम है, जो लाखों ग्राहकों को सुरक्षित और कुशल तरीके से अपने वित्तीय डेटा तक डिजिटल रूप में पहुँचने और इसे अन्य संस्थानों के साथ साझा करने के लिए सशक्त बनाता है।

बैंकिंग में अकाउंट एग्रीगेटर प्रणाली, भारत के आठ सबसे बड़े बैंकों के साथ शुरू की गई है। अकाउंट एग्रीगेटर प्रणाली ऋण और धन प्रबंधन को बहुत तेज और किफायती बना सकता है।

  1. अकाउंट एग्रीगेटर क्या है?

अकाउंट एग्रीगेटर (एए) आरबीआई द्वारा विनियमित एक ऐसी इकाई है, (एनबीएफसी-एए लाइसेंस के साथ) जो किसी व्यक्ति को सुरक्षित और डिजिटल रूप में एक वित्तीय संस्थान से प्राप्त अपने खाते की जानकारी को एए में शामिल किसी अन्य विनियमित वित्तीय संस्थान के साथ साझा करने में मदद करती है। व्यक्ति की सहमति के बिना डेटा को साझा नहीं किया जा सकता है।

ऐसी सुविधा देने वाले कई अकाउंट एग्रीगेटर होंगे और उपभोक्ता जिसे चाहे उसे चुन सकता है।

अकाउंट एग्रीगेटर; आपके डेटा के प्रत्येक उपयोग के लिए ‘रिक्त चेक’ स्वीकृति के लंबे नियम और शर्तों के बदले एक संक्षिप्त, चरण-दर-चरण अनुमति और नियंत्रण का प्रस्ताव देता है।

  1. नया अकाउंट एग्रीगेटर नेटवर्क, व्यक्ति के वित्तीय कामकाज को कैसे आसान बनाएगा?

भारत की वित्तीय प्रणाली में उपभोक्ताओं को कई परेशानियां का सामना करना पड़ता है, जैसे बैंक खता विवरण की भौतिक रूप से हस्ताक्षरित और स्कैन की गई प्रतियों को साझा करना, दस्तावेजों को नोटरी से हस्ताक्षर करवाने या मुहर लगाने के लिए इधर-उधर परेशान होना या किसी तीसरे पक्ष को अपना वित्तीय विवरण देने के क्रम में व्यक्तिगत उपयोगकर्ता नाम और पासवर्ड साझा करना। अकाउंट एग्रीगेटर नेटवर्क इन सभी समस्याओं के बदले एक सरल, मोबाइल-आधारित और सुरक्षित तरीके से डिजिटल डेटा तक पहुँचने व साझा करने की प्रक्रिया की पेशकश करता है। यह नई प्रकार की सेवाओं के लिए अवसर सृजित करेगा — जैसे नए प्रकार के ऋण।

एक बैंक को केवल अकाउंट एग्रीगेटर नेटवर्क से जुड़ने की आवश्यकता है। आठ बैंक पहले से ही सहमति के आधार पर डेटा साझा कर रहे हैं, चार बैंक यह सुविधा शुरू कर चुके हैं, (एक्सिस, आईसीआईसीआई, एचडीएफसी और इंडसइंड बैंक) और चार जल्द ही शुरू करने वाले हैं (भारतीय स्टेट बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और फेडरल बैंक)।

  1. अकाउंट एग्रीगेटर, आधार ईकेवाईसी डेटा साझा, क्रेडिट ब्यूरो डेटा साझा और सीकेवाईसी जैसे प्लेटफॉर्म से कैसे अलग है?

आधार ईकेवाईसी और सीकेवाईसी; केवल केवाईसी उद्देश्यों (जैसे नाम, पता, लिंग, आदि) के लिए ‘पहचान’ आधारित केवल चार प्रकार के डेटा साझा करने की अनुमति देते हैं। इसी तरह, क्रेडिट ब्यूरो डेटा केवल ऋण इतिहास और/या क्रेडिट स्कोर दिखाता है। अकाउंट एग्रीगेटर नेटवर्क बचत/जमा/चालू खातों से लेनदेन डेटा या बैंक खाता विवरण साझा करने की अनुमति देता है।

  1. किस प्रकार का डेटा साझा किया जा सकता है?

आज, बैंकिंग लेनदेन डेटा, उन बैंकों के साथ साझा किये जाने के लिए उपलब्ध है, (उदाहरण के लिए, एक चालू या बचत खाते से बैंक विवरण) जो अभी नेटवर्क पर लाइव हैं।

धीरे-धीरे एए व्यवस्था साझा करने के लिए सभी वित्तीय डेटा उपलब्ध कराएगी, जिसमें कर डेटा, पेंशन डेटा, प्रतिभूति डेटा (म्यूचुअल फंड और ब्रोकरेज) शामिल होंगे, जबकि बीमा डेटा उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध होगा। वित्तीय क्षेत्र के अलावा भी इस सुविधा का विस्तार होगा, ताकि एए के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा और दूरसंचार डेटा भी लोगों के लिए सुलभ हो सके।

  1. क्या एए व्यक्तिगत डेटा को देख या एकत्रितकर सकते हैं? क्या डेटा साझा करना सुरक्षित है?

अकाउंट एग्रीगेटर डेटा देख नहीं सकते हैं; केवल व्यक्ति के निर्देश और सहमति के आधार पर वे इसे एक वित्तीय संस्थान से दूसरे वित्तीय संस्थान में भेज सकते हैं। नाम के विपरीत, वे आपके डेटा को ‘एकत्रित’ नहीं कर सकते। एए प्रौद्योगिकी कंपनियों की तरह नहीं हैं, जो आपके डेटा को एकत्रित करती हैं और आपका विस्तृत व्यक्तिगत विवरण (प्रोफाइल) तैयार करती हैं।

एए डेटा को कूटभाषा (एन्क्रिप्ट) में साझा करता है और केवल प्राप्तकर्ता द्वारा इसे समझा (डिक्रिप्ट) जा सकता है। एक छोर से दूसरे छोर तक कूटभाषा और ‘डिजिटल हस्ताक्षर’ जैसी तकनीक का उपयोग, कागजी दस्तावेजों को साझा करने की तुलना में, इस साझा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाता है।

  1. क्या कोई उपभोक्ता यह तय कर सकता है कि वे डेटा साझा करना नहीं चाहते हैं?

हां। एए के साथ पंजीकरण करना उपभोक्ताओं के लिए पूरी तरह से स्वैच्छिक है। यदि उपभोक्ता जिस बैंक का उपयोग कर रहा है और वह नेटवर्क में शामिल हो गया है, तो कोई व्यक्ति एए पर पंजीकरण करने का विकल्प चुन सकता है। व्यक्ति यह भी तय कर सकता है कि वे किन खातों को इससे जोड़ना चाहते हैं और वह अपने किसी एक खाते से डेटा को किसी विशेष उद्देश्य के लिए किसी एक अकाउंट एग्रीगेटर के माध्यम से ‘सहमति’ देने के चरण में किसी नए ऋण प्रदाता या वित्तीय संस्थान से साझा कर सकता है। एक ग्राहक किसी भी समय साझा करने संबंधी सहमति को वापस ले सकता है। यदि किसी उपभोक्ता ने एक अवधि (जैसे ऋण अवधि के दौरान) में आवर्ती तरीके से या बार-बार डेटा साझा करना स्वीकार किया है, तो इस सहमति को भी बाद में किसी भी समय उपभोक्ता द्वारा रद्द किया जा सकता है।

  1. यदि किसी उपभोक्ता ने अपना डेटा किसी संस्थान के साथ एक बार साझा किया है, तो संस्थान कितनी अवधि तक इसका उपयोग कर सकता है?

डेटा साझा करने के लिए सहमति के समय प्राप्तकर्ता संस्थान द्वारा उपयोग की समयावधि उपभोक्ता को बतायी जाएगी।

  1. ग्राहक एए के साथ कैसे पंजीकृत हो सकता है?

आप एए के साथ उनके ऐप या वेबसाइट के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। एए एक हैंडल (जैसे उपयोगकर्ता नाम) प्रदान करेगा, जिसका उपयोग सहमति प्रक्रिया के दौरान किया जा सकता है।

आज, चार ऐप डाउनलोड के लिए उपलब्ध हैं, (फिनव्यू, वनमनी, सीएएमएस फिनसर्व, और एनएडीएल) जिनके पास एए होने के लिए परिचालन लाइसेंस हैं। तीन और को (फोनपे, योडली और परफियोस) आरबीआई से सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है और वे जल्द ही ऐप लॉन्च कर सकते हैं।

  1. क्या ग्राहक को प्रत्येक एए के साथ पंजीकरण करने की आवश्यकता है?

नहीं, ग्राहक नेटवर्क पर किसी भी बैंक से डेटा तक पहुँचने के लिए किसी एक एए के साथ पंजीकरण कर सकता है।

  1. क्या इस सुविधा का उपयोग करने के लिए ग्राहक को एए को भुगतान करने की आवश्यकता है?

यह एए पर निर्भर करेगा। कुछ एए निःशुल्क हो सकते हैं, क्योंकि वे वित्तीय संस्थानों से सेवा शुल्क लेते हैं। कुछ अन्य एए उपयोगकर्ता शुल्क के रूप में एक छोटी राशि ले सकते हैं।

  1. यदि ग्राहक का बैंक डेटा साझा के एए नेटवर्क में शामिल हो गया है, तो ग्राहक किन नई सेवाओं का लाभ उठा सकता है?

किसी व्यक्ति के लिए दो प्रमुख सेवाओं में सुधार किया जाएगा- ऋण प्राप्ति  और धन प्रबंधन की सुविधा। यदि कोई ग्राहक आज एक छोटे व्यवसाय के लिए या व्यक्तिगत ऋण प्राप्त करना चाहता है, तो ऐसे कई दस्तावेज हैं, जिन्हें ऋणदाता के साथ साझा करने की आवश्यकता होती है। यह आज एक बोझिल और कई चरणों में पूरी की जाने वाली प्रक्रिया है, जो ऋण प्राप्त करने और ऋण तक पहुंचने में लगने वाले समय को प्रभावित करती है। इसी तरह, आज धन प्रबंधन कठिन है, क्योंकि डेटा का संग्रह कई अलग-अलग स्थानों में किया जाता है और विश्लेषण के लिए आसानी से एक साथ नहीं लाया जा सकता है।

अकाउंट एग्रीगेटर के माध्यम से, एक कंपनी बिना किसी त्रुटि के तथा सुरक्षित तरीके से डेटा तक जल्दी और कम खर्च में पहुँच सकती है और ऋण मूल्यांकन प्रक्रिया को तेजी से पूरा कर सकती है, ताकि ग्राहक को ऋण मिल सके। साथ ही, एक ग्राहक जीएसटी या जीईएम जैसी सरकारी प्रणाली से सीधे नकदी प्रवाह पर या भविष्य के चालान संबंधी विश्वसनीय जानकारी साझा करके, बिना कोई सम्पत्ति दस्तावेज को गिरवी रखे, ऋण का उपयोग करने में सक्षम हो सकता है।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

 

अनार (पटाखा) बनाने की मशीन

हैदराबाद के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम टूल रूम सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ टूल डिज़ाइन (सीआईटीडी) ने 10 नवंबर 2015 से 20 वर्षों के लिए “शंक्वाकार आकार के पटाखे (अनार) के उत्पादन के लिए स्वचालित मशीन” नामक आविष्कार का एक पेटेंट प्राप्त किया है।

सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ टूल डिजाइन ने शिवकाशी के मेसर्स स्टैंडर्ड फायरवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड (एसएफपीएल) साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं और विभिन्न आतिशबाजी परियोजनाओं की स्वचालन प्रक्रियाओं के लिए मशीनों के वास्ते 11.49 करोड़ रुपये के ऑर्डर को अंतिम रूप दिया है। एसएफपीएल ने शुरुआत में नीचे के हिस्से फ्लॉवर पॉट्स भरने और पैकिंग, चक्कर भरने तथा चक्कर वाइंडिंग के लिए 300 लाख रुपये का ऑर्डर दिया था। पहली परियोजना के रूप में, सीआईटीडी ने मॉड्यूल-1 (फ्लावर पॉट केमिकल फिलिंग और पैकिंग को मिलाकर) के लिए काम किया है। पूरी परियोजना में 10 अलग-अलग हिस्से शामिल किये गए हैं, जिनमें पेपर कटिंग और पेस्टिंग, केमिकल फिलिंग, वॉशर इंसर्शन व रैमिंग, मड फिलिंग एवं सीलिंग आदि प्रमुख हैं। इस परियोजना का उद्देश्य मानवीय थकान को दूर करने और खतरनाक वातावरण से लोगों को बचाने के लिए उपरोक्त पूरी प्रक्रिया को स्वचालित करना है। इस पूरी प्रक्रिया में न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप है। इसलिए, पटाखा उद्योग में मशीन को संभालना लोगों के लिए पूर्णतया सुरक्षित है।

यह पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक के साथ अपनी तरह का पहला प्रयास है। सीआईटीडी और एसएफपीएल ने मिलकर इस नवाचार के लिए एक संयुक्त पेटेंट आवेदन दायर किया था। इस मशीन की विशिष्टता है कि निर्माण की पूरी प्रक्रिया के दौरान यह पूरी तरह से वायुचालित प्रणाली पर काम करती है। इस प्रक्रिया में उपयोग की जाने वाली कोई भी प्रणाली विद्युत या इलेक्ट्रॉनिक्स नहीं है। इसलिए, इस प्रणाली से आतिशबाजी उद्योगों के क्षेत्र में अक्सर होने वाली अग्नि दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। फ्लावर पॉट में मूल रसायन के साथ इसके ग्राहक द्वारा परीक्षण किए गए और 120 पीस प्रति मिनट के लक्ष्य उत्पादित पटाखे को प्राप्त किया गया।

सीआईटीडी भारत सरकार का एक संगठन है जो एमएसएमई मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करता है। यह वर्ष 1968 में स्थापित किया गया था और उपकरण डिजाइन, सीएडी/सीएएम, कम लागत स्वचालन आदि के क्षेत्र में तकनीकी कर्मियों को प्रशिक्षित करने का एक अग्रणी संस्थान है। यह संस्थान डिप्लोमा स्तर से लेकर स्नातकोत्तर तक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

 

स्पेस चैलेंज लॉन्च किया

अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम), नीति आयोग ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के साथ मिलकर देश के सभी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए एटीएल स्पेस चैलेंज 2021 लॉन्च किया है।

इस चैलेंज को देश के सभी स्कूलों के विद्यार्थियों, मेंटर और शिक्षकों के लिए तैयार किया गया है, जो न सिर्फ एटीएल लैब वाले स्कूलों के साथ, बल्कि गैर एटीएल स्कूलों से जुड़े हैं।

इसमें यह सुनिश्चित किया जाना है कि कक्षा 6 से 12 के विद्यार्थियों को एक खुला मंच उपलब्ध कराया जाए, जहां वे नवाचार कर सकें और खुद डिजिटल युग की अंतरिक्ष तकनीक से जुड़ी समस्याओं के समाधान में सक्षम हो सकें।

एटीएल स्पेस चैलेंज 2021 को वर्ल्ड स्पेस वीक 2021 के साथ श्रेणीबद्ध किया गया है, जो अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के योगदान को मनाने के क्रम में वैश्विक स्तर पर हर साल 4 से 10 अक्टूबर के दौरान मनाया जाता है।

आधिकारिक लॉन्च के दौरान अपने संबोधन में एआईएम के मिशन निदेशक डॉ. चिंतन वैष्णव ने कहा कि इस चुनौती का उद्देश्य अंतरिक्ष क्षेत्र में कुछ निर्माण के लिए युवा स्कूली विद्यार्थियों को नवाचार में सक्षम बनाना है, जिससे न सिर्फ उन्हें अंतरिक्ष के बारे में सीखने, बल्कि कुछ ऐसा तैयार करने में सहायता मिलेगी जिसे अंतरिक्ष कार्यक्रम में उपयोग किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, “हम उम्मीद कर रहे हैं कि देश भर के युवा इनोवेटर इससे शिक्षा लेंगे और अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए कुछ नया तैयार करने के काम से जुड़ेंगे, साथ ही ऐसे समाधान विकसित करेंगे जो खासे फायदेमंद हो सकते हैं। हम इसरो और सीबीएसई के आभारी हैं, जिन्होंने बड़ी सफलता दिलाने के लिए हमारे साथ भागीदारी की है। शीर्ष पर रहने वाले छात्रों को चैलेंज के समापन के अवसर पर आकर्षक पुरस्कार दिए जाएंगे।”

उन्होंने कहा कि एटीएल स्पेस चैलेंज 2021 पूरे भारत के स्कूली छात्रों के लिए अपनी तरह का एक विशेष चैलेंज है, जिसे भारत की स्वतंत्रता की 75वें साल के आयोजन की इस साल की विषय वस्तु आजादी का अमृत महोत्सव के साथ श्रेणीबद्ध किया गया है, जो प्रगतिशील भारत के 75वें साल और यहां के लोगों, संस्कृति व उपलब्धियों को मनाने और उसकी स्मृति में भारत सरकार की एक पहल है।

स्पेस चैलेंज को राष्ट्रव्यापी महोत्सव और युवा इनोवेटर्स को समर्थन देने, साथ ही उन्होंने नई तकनीकों और कौशलों से परिचित करने के लिए तैयार किया गया है।

कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम ऑफिस (इसरो) के निदेशक डॉ. सुधीर कुमार ने छात्रों के लिए इस तरह का चैलेंज शुरू करने पर खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा, “हम इस चैलेंज को लॉन्च करने के लिए एआईएम और सीबीएसई के साथ भागीदारी करके गौरवान्वित हैं, जहां छात्र रचनात्मक स्वतंत्रता के साथ अंतरिक्ष में खोज कर सकते हैं। हम प्रत्येक वर्ष इस चैलेंज के लॉन्च होने की उम्मीद कर रहे हैं।”

सीबीएसई के चेयरमैन श्री मनोज आहुजा ने अपने संबोधन में कहा कि एटीएल स्पेस चैलेंज 2021 में बच्चों को नए विचारों के साथ आगे आने का मौका देने और ऐसा माहौल तैयार करने की काफी संभावनाएं हैं, जहां वे ऐसे इकोसिस्टम के माध्यम से अपने विचारों को हकीकत बनता देख सकते हैं जिसे एआईएम, इसरो और सीबीएसई इस चैलेंज के माध्यम से उपलब्ध करा रहे हैं।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि शिक्षा क्षेत्र के लिए और छात्रों में नवाचार और रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए, सरकारी संगठनों को बार-बार साथ में आने की जरूरत होती है।”

इसके अलावा, विद्यार्थी (एटीएल और गैर एटीएल स्कूलों के) तीन सदस्यों की एक टीम के रूप में एक समाधान या एक नवाचार के लिए अपनी प्रविष्टियां जमा कर सकती हैं। टीम चैलेंज की विषयवस्तुओं में से एक से जुड़ी होनी चाहिए, जिसके अंतर्गत समस्याओं की पहचान की जा सकती है।

छात्र एक समाधान तैयार कर सकते हैं, जिन्हें लागू किया जा सकता है और ऐसी तकनीकों का लाभ उठाया जा सकता है :

  1. एक्सप्लोर स्पेस
  2. रीच स्पेस
  3. इनहैबिट स्पेस
  4. लीवरेज स्पेस

स्पेस चैलेंज के लिए आवेदन एआईएम ऑनलाइन पोर्टल पर जमा किया जा सकता है। हर टीम को अपनी दिलचस्पी और समझ के आधार पर एक समस्या का चयन करना चाहिए, जो स्पेस चैलेंज की विषय वस्तुओं में एक के तहत आती हो।

हर विशेष समाधान को एक ही विषयवस्तु के तहत जमा किया जाना चाहिए। एक ही समाधान/नवाचार को कई विषयवस्तुओं के अंतर्गत जमा करने पर तत्काल अपात्र घोषित कर दिया जाएगा।

ऑनलाइन आवेदन पत्र जमा करने में- दस्तावेज जमा करना (नवाचार/समाधान का विवरण) और वीडियो प्रस्तुतीकरण (कार्यशील प्रोटोटाइप/समाधान का 360 डिग्री यानी पूरा विवरण) शामिल होगा।

स्कूल शिक्षकों, एटीएल प्रभारियों और मेंटर्स को छात्रों की टीमों को सहयोग करने की सलाह दी गई है। व्यक्तिगत प्रविष्टि के लिए अनुमति नहीं है। इसके साथ ही, यदि टीम में 3 से ज्यादा सदस्य हैं, तो प्रविष्टि/प्रस्तुतीकरण को तत्काल अपात्र घोषित कर दिया जाएगा।

अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम)

नीति आयोग के अटल नवाचार मिशन (एआईएम) ने 27 मार्च 2018 सैप के साथ आशय वक्‍तव्‍य (एसओआई) पर हस्‍ताक्षर किए जिसका उद्देश्‍य नवाचार एवं उद्यमिता की संस्‍कृति को बढ़ावा देना है।

सैप के कर्मचारी स्‍वयंसेवक उन्‍नत प्रौद्योगिकी से जुड़े विषयों में विद्यार्थियों को प्रशिक्षि‍त करने के साथ-साथ सैप लैब्‍स इंडिया की डिजाइन लैब में उनका मार्गदर्शन भी करेंगे। इसके अलावा, सैप के कर्मचारी स्‍वयंसेवक विद्यार्थियों को प्रौद्योगिकी से जुड़े उपकरणों के बारे में व्यावहारिक अनुभव प्राप्‍त करने का अवसर भी प्रदान करेंगे।

नीति आयोग ने अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम) सहित स्व-रोजगार और प्रतिभा उपयोग (एसईटीयू) लॉन्च किया है। नीति आयोग ने इनवेंटर्स और डिजाइनरों से अपने डिजाइन तैयार उत्पादों को पेश करने के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं, जिनका मूल्यांकन तीन लंबवत – क्षमता, इरादा और अटल न्यू इंडिया चैलेंज के तहत प्रौद्योगिकियों को उत्पादित करने की क्षमता पर किया जाएगा।

मिशन का उद्देश्य

एसओआई के एक हिस्‍से के तहत सैप देश भर में माध्‍यमिक स्‍कूली बच्‍चों के बीच विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग एवं गणित (स्‍टेम) की शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्ष 2018 में 100 अटल टिंकरिंग लैबों (एटीएल) की जिम्‍मेदारी पांच वर्षों के लिए लेगी। इस कार्यक्रम का उद्देश्‍य विद्यार्थियों को डिजिटल रूपांतरण एवं इंटरनेट ऑफ थिंग्‍स जैसे कि डिजाइन थिंकिंग विधि,  प्रोग्रामिंग लैंग्‍वेज और अनुभवात्मक विज्ञान शिक्षण से संब‍ंधित उन्‍नत प्रौद्योगिकी विषयों को सीखने में सक्षम बनाना है।

अटल इनोवेशन मिशन – अटल न्यू इंडिया चैलेंज क्या है?

अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम) एक अटल न्यू इंडिया चैलेंज है। यह नवाचार और उद्यमशीलता की संस्कृति को बढ़ावा देने का एक प्रयास है। जहां सरकार आविष्कारक और डिजाइनरों के लिए अपने नए विचारों के साथ अपने डिजाइन तैयार उत्पादों को पेश करने का अवसर प्रदान कर रही है। इस चुनौती में, सरकार शॉर्टलिस्ट जीतने वाले विचार को 1 करोड़ रुपये का इनाम देगी।

अटल न्यू इंडिया चैलेंज के तहत जहां नवप्रवर्तनकर्ता स्मार्ट मोबिलिटी, रोलिंग स्टॉक और अपशिष्ट प्रबंधन की भविष्यवाणी रखरखाव जैसे 17 पहचान वाले फोकस क्षेत्रों से अपने उत्पाद को लागू करने का विकल्प चुन सकते हैं। प्रतिभागियों के लिए 1 करोड़ रुपये तक जीतने का यह अच्छा मौका है। इसके अलावा, सरकार विजयी विचारों को भी मेंटरशिप भी देगी।

अटल इनोवेशन मिशन के दो मुख्य कार्य

  1. उद्यमिता संवर्धन – इस समारोह में, सरकार स्व-रोजगार और प्रतिभा उपयोग के माध्यम से नवाचार और उद्यमशीलता की संस्कृति को बढ़ावा देने की कोशिश करेगी, जिसमें नवप्रवर्तनकों को सफल उद्यमियों बनने के लिए समर्थित और मेंटरशिप दी जाएगी।
  2. अभिनव पदोन्नति – सरकार नवप्रवर्तनको के लिए एक मंच प्रदान करेगी जहां नवप्रवर्तनक नए अभिनव विचार उत्पन्न कर सकते हैं।

यदि एआईएम के लिए किसी भी व्यक्ति के विचार को सूचीबद्ध किया जाएगा तो उसे अपने जीते नए विचार के लिए मेंटरशिप प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा, परियोजना की आवश्यकताओं के अनुसार उन्हें अन्य सुविधाएं मिलेंगी। अटल इनोवेशन मिशन चैलेंज कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के साथ-साथ आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय में पांच अन्य मंत्रालयों में भी लागू किया जाएगा।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

 

मन्नार की खाड़ी में तमिलनाडु-डेनमार्क योजना ऊर्जा द्वीप

तमिलनाडु और डेनमार्क राज्य ने मन्नार की खाड़ी में एक ऊर्जा द्वीप (energy island) बनाने की योजना बनाई है जो श्रीलंका के पश्चिमी तट और भारत के दक्षिण-पूर्वी सिरे के बीच स्थित है।

मुख्य बिंदु

  • यह योजना इसलिए बनाई गई थी क्योंकि तमिलनाडु हरित ऊर्जा क्षेत्र में अपने पदचिह्न का विस्तार करना चाहता है।
  • इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए डेनमार्क तमिलनाडु में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में 5-10 अरब डॉलर का निवेश कर सकता है। इसमें मन्नार की खाड़ी में एक ऊर्जा द्वीप के लिए निवेश भी शामिल है ।
  • इस निवेश से द्वीप 4-10 गीगावाट ऊर्जा का उत्पादन करने में सक्षम होगा।

पृष्ठभूमि

डेनमार्क के विशेषज्ञों के एक प्रतिनिधिमंडल ने योजना पर चर्चा के लिए 8 सितंबर, 2021 को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से मुलाकात की। यदि यह योजना अमल में आती है, तो यह भारत का पहला अपतटीय तैरता पवन पार्क (offshore floating wind park) होगा।

तमिलनाडु में डेनमार्क का निवेश

जनवरी 2003 से जनवरी 2021 की अवधि में तमिलनाडु में डेनिश निवेश का मूल्य $751.72 मिलियन अनुमानित है। तमिलनाडु में काम करने वाली कुछ डेनिश कंपनियों में मेर्स्क, वेस्टास, क्यूबिक, डैनफॉस, ग्रंडफोस और एफएलएसमिथ शामिल हैं।

भारत-डेनिश सहयोग

लगभग 200 डेनिश कंपनियां भारत के अन्य हिस्सों में काम कर रही हैं, जिनमें रैम्बोल, एपी मोलर मार्सक और नोवो-नोर्डिस्क शामिल हैं। पिछले एक दशक में डेनमार्क ने भारत में एक अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है। डेनमार्क में काम कर रही भारतीय कंपनियों में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, आईटीसी इंफोटेक, इंफोसिस टेक्नोलॉजीज और एलएंडटी इंफोटेक शामिल हैं।

SOURCE-GK TODAY

PAPER-G.S.3

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