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Current Affair 11 March 2021

Current Affairs – 11 March, 2021

भूमिबोल वर्ल्ड सॉइल डे – 2020” पुरस्कार

थाईलैंड में भारत की राजदूत सुश्री सुचित्रा दुरई ने आज भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की तरफ से एफएओ का प्रतिष्ठित “किंग भूमिबोल वर्ल्ड सॉइल डे – 2020” पुरस्कार ग्रहण किया। थाईलैंड के कृषि एवं सहकारिता मंत्री डॉ. शैलेरमचाई स्रिओन ने बैंकॉक, थाईलैंड में हुए एक समारोह में यह पुरस्कार प्रदान किया।

एफएओ, रोम ने विश्व मृदा दिवस – 2020 की शाम को बीते साल के दौरान “मृदा क्षरण रोको, हमारा भविष्य बचाओ” विषय पर “मृदा स्वास्थ्य जागरूकता” में योगदान के लिए आईसीआरए को अंतर्राष्ट्रीय सम्मान देने का ऐलान किया था।

आईसीएआर- मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल, मध्य प्रदेश ने स्कूली छात्रों, कृषि समुदाय और आम जनता के लिए भारी उत्साह के साथ कई कार्यक्रमों का आयोजन किया। संस्थान ने विश्व मृदा दिवस के आयोजन के तहत “मृदा- हमारी धरती मां” के संरक्षण के लिए व्यापक जागरूकता अभियान का आयोजन किया, जिसमें मार्च-पास्ट और प्रतिभागियों को मृदा स्वास्थ्य पर प्रचार सामग्री का वितरण शामिल था।

इस कार्यक्रम में कृषि एवं सहकारिता विभाग के कार्यकारी; थाईलैंड के भूमि विकास, मृदा और उर्वरक समिति के कार्यकारी; थाईलैंड की मृदा और जल संरक्षण समिति; वर्ल्ड सॉइल एसोसिएशन और कृषि एवं सहकारिता मंत्रालय के तहत आने वाले अन्य विभागों के कार्यकारियों ने भाग लिया।

SOURCE-PIB

 

प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा निधि (पीएमएसएसए)

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने आज वित्त अधिनियम 2007 के सेक्सन 136 बी के तहत लिए जाने वाले स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर से प्राप्त होने वाली राशि से स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक ‘सिंगल नॉन लैप्सेबल रिजर्व फंड’ के रूप में ‘प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा निधि’ (पीएमएसएसएन) बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।

पीएमएसएसएन की मुख्य बातें

सार्वजनिक खाते में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक ‘सिंगल नॉन लैप्सेबल रिजर्व फंड’

स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर से प्राप्त राशि में से स्वास्थ्य का अंश पीएमएसएसएन में भेजा जाएगा।

पीएमएसएसएन में भेजी गई इस राशि का इस्तेमाल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की इन महत्वपूर्ण योजनाओं में किया जाएगा :-

आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई)

आयुष्मान भारत-स्वास्थ्य एवं देखभाल केंद्र (एबी-एचडब्ल्यूसी)

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन

प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई)

स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों में आपातकाल एवं आकस्मिक विपत्ति काल में तैयारी एवं प्रतिक्रिया

कोई भी अन्य भावी कार्यक्रम/योजना जिसका लक्ष्य एसडीजी की दिशा में प्रगति हासिल करना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के तहत तय लक्ष्यों को प्राप्त करना हो

पीएमएसएसएन को लागू करने और उसकी रखरखाव की जिम्मेदारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की होगी।

किसी भी वित्तीय वर्ष में, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की उक्त योजनाओं का व्यय प्रारंभिक तौर पर पीएमएसएसएन से लिया जाएगा और बाद में सकल बजट सहायता (ग्रॉस बजटरी स्पोर्ट) से लिया जाएगा।

लाभः-

इसके मुख्य लाभ यह होंगे कि तय संसाधनों की उपलब्धता के जरिए सार्वभौमिक और वहनीय स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच मुहैया कराई जा सकेगी और इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किसी भी वित्तीय वर्ष के अंत में इसके लिए तय राशि समाप्त (लैप्स) नहीं होगी।

पृष्ठभूमि:-

संशोधित विकास निष्कर्षों को प्राप्त करने के लिए स्वास्थ्य बहुत महत्वपूर्ण है। आर्थिक दृष्टि से देखें तो स्वास्थ्य उत्पादकता में सुधार करता है और असामयिक मौत, लम्बे समय तक चलने वाली अपंगता और जल्द अवकाश लेने से होने वाले नुकसान को कम करता है। स्वास्थ्य और पोषण सीधे तौर पर पठन-पाठन की उपलब्धियों पर असर डालता है और इसका उत्पादकता और आय पर भी प्रभाव पड़ता है। स्वास्थ्य निष्कर्ष पूरी तरह स्वास्थ्य क्षेत्र में किए जाने वाले सार्वजनिक व्यय पर निर्भर करते हैं। आबादी की जीवन आकांक्षा के एक अतिरिक्त वर्ष बढ़ने से सकल घरेलू उत्पाद में प्रति व्यक्ति 4 प्रतिशत की वृद्धि होती है। स्वास्थ्य में निवेश से लाखो नौकरियां सृजित होती हैं, खासतौर से महिलाओं के लिए, क्योंकि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की जरूरत बढ़ने से उनके लिए नौकरियां बढ़ती हैं।

2018 के बजट भाषण में वित्त मंत्री ने आयुष्मान भारत योजना की घोषणा करते हुए मौजूदा 3 प्रतिशत शिक्षा उपकर के स्थान पर 4 प्रतिशत स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर लगाने की घोषणा की थी।

SOURCE-PIB

 

हेराथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हेराथ त्यौहार के अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं।

हर-हर महादेव, बम-बम भोले, शंकर संकट हरना जैसे जयकारों की जम्मू-कश्मीर में धूम है। श्रीनगर के ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर, हनुमान मंदिर और गणपत्यार मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों को भी सजाया गया है। महाशिवरात्रि पर कश्मीर घाटी में खास तैयारियां की गई हैं। कश्मीरी पंडितों का यह सबसे बड़ा त्योहार होता है। देश के अन्य हिस्सों की अपेक्षा इसे यहां ज्यादा धूमधाम से मनाया जाता है। कश्मीरी पंडित इसे ‘हेरथ’ के रूप में मनाते हैं। हेरथ शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है जिसका हिंदी अर्थ हररात्रि या शिवरात्रि होता है।

हेरथ को कश्मीरी संस्कृति के आंतरिक और सकारात्मक मूल्यों को संरक्षित रखने का पर्व भी माना जाता है। इसके साथ ही यह लोगों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बता दें कि कश्मीरी पंडित महाशिवरात्रि पर भगवान शिव सहित उनके परिवार की स्थापना घरों में करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से वटुकनाथ घरों में मेहमान बनकर रहते हैं। करीब एक महीने पहले से इसे मनाने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।

खास बातें

इस त्योहार के दिन पूजन में प्रयोग में लाए जाने वाले बर्तनों को प्रतीकों के रूप में प्रयोग किया जाता है। उपलब्धता के अनुरूप कई घरों में पुराने समय के पीतल के बर्तनों को प्रयोग में लाते हैं। इस पूजन व घरों में बनने वाले व्यंजनों में कमल ककड़ी और गांठगोभी काफी प्रमुख होती है। जम्मू-कश्मीर में इसे मोंजी और नदरू के नाम से जाना जाता है।

महाशिवरात्रि पर आज मुस्लिम समुदाय के लोग सलाम की रस्म निभाएंगे। इस रस्म के तहत शिवरात्रि मना रहे कश्मीरी पंडितों को समुदाय के लोग घर जाकर मुबारकबाद देते हैं। तीन दशक से अधिक समय से विस्थापन का दंश झेल रहे कश्मीरी पंडित महाशिवरात्रि पर सभी परंपराएं निभा रहे हैं। मुस्लिम समुदाय के लोगों की इस पर्व में शिरकत कश्मीरियत का पैगाम भी देती है।

कश्मीरी पंडितों का कहना है कि अब भी यह परंपरा जारी है, यही कश्मीरियत और इंसानियत की खूबसूरती है। शिवरात्रि पर वे भगवान भैरव की भी पूजा करते हैं। भगवान भैरव को मांस और मछली का भोग लगाने की परंपरा है, जिसे वह निभा रहे हैं। रीति के अनुसार शाकाहारी भोग भी लगाए जाते हैं। इसमें पांच-छह प्रकार की सब्जियां होती हैं। रात में पूजा अर्चना करने के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है।

SOURCE-AMAR UJJALA

 

एम.एस.एम.ई.

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में और मध्य प्रदेश के भोपाल में दो प्रौद्योगिकी केंद्रों, बड़े तकनीकी केंद्रों के तीन विस्तार केंद्रों और सात मोबाइल उद्योग एक्सप्रेस का उद्घाटन किया।

एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। एमएसएमई का मतलब सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम है। ये देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 29 फीसदी का योगदान करते हैं। एमएसएमई सेक्टर देश में रोजगार का सबसे बड़ा जरिया है।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम को संक्षिप्त में MSME कहा जाता है। एमएसएमई दो प्रकार के होते हैं। मैनुफैक्चरिंग उद्यम यानी उत्पादन करने वाली इकाई। दूसरा है सर्विस एमएसएमई इकाई। यह मुख्य रुप से सेवा देने का काम करती हैं। हाल ही में सरकार ने एमएसएमई की परिभाषा बदली है। नए बदलाव के निम्न श्रेणी के उद्यम सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग में आएंगे।

सूक्ष्म उद्योग : सूक्ष्म उद्योग के अंतर्गत रखा अब वह उद्यम आते हैं जिनमें एक करोड़ रुपये का निवेश (मशीनरी वगैरह में) और टर्नओवर 5 करोड़ तक हो। यहां निवेश से मतलब यह है कि कंपनी ने मशीनरी वगैरह में कितना निवेश किया है। यह मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर दोनों क्षेत्र के उद्यमों पर लागू होता है…

लघु उद्योग : उन उद्योगों को लघु उद्योग की श्रेणी में रखते है जिन उद्योगों में निवेश 10 करोड़ और टर्नओवर 50 करोड़ रुपये तक है। यह निवेश और टर्नओवर की सीमा मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों सेक्टर में लागू होती है।

मध्यम उद्योग : मैनुफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के ऐसे उद्योग जिनमें 50 करोड़ का निवेश और 250 करोड़ टर्नओवर है वह मध्मम उद्योग में आएंगे। इससे पहले वित्त मंत्री ने आत्मनिर्भर पैकेज का ऐलान करते हुए एमएसएमई की परिभाषा बदली थी। वित्त मंत्री ने 20 करोड का निवेश और 100 करोड़ रुपये का टर्नओवर वाले उद्यमों को मध्यम उद्योग में रखा था। लेकिन उद्यमी सरकार के इस नए बदलाव से भी खुश नहीं था। इसके बाद 1 जून 2020 को हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने उद्यमियों की मांग को पूरा करते हुए यह बदलाव किया है। अब मैनुफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के ऐसे उद्योग जिनमें 50 करोड़ का निवेश (मशीन और यूनिट लगाने का खर्च आदि) और 250 करोड़ टर्नओवर है वह मध्मम उद्योग में आएंगे।

SOURCE-ALL INDIA RADIO

 

मध्यस्थता और सुलह (संशोधन) विधेयक, 2021

संसद ने मध्यस्थता और सुलह (संशोधन) विधेयक, 2021 को राज्यसभा से पास कराने के लिए अपनी सहमति दी। लोकसभा ने पिछले महीने ही विधेयक पारित किया है।

विधेयक की विशेषताएँ :

मध्यस्थों की योग्यता :

इस विधेयक में मध्यस्थों की योग्यता को मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की 8वीं अनुसूची से परे रखा गया है। इस अधिनियम में एक मध्यस्थ का प्रावधान है :

उसे अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के अंतर्गत एक वकील होना चाहिये, जिसके पास 10 साल का अनुभव हो, या

भारतीय विधिक सेवा का एक अधिकारी होना चाहिये।

इस विधेयक के अनुसार, मध्यस्थों की योग्यता का निर्धारण एक मध्यस्थता परिषद द्वारा निर्धारित नियमों द्वारा किया जाएगा।

पुरस्कार पर बिना शर्त रोक :

यदि पुरस्कार भ्रष्टाचार के आधार पर दिया जा रहा है तो अदालत मध्यस्थता कानून की धारा 34 के तहत की गई अपील पर अंतिम फैसला आने तक इस पुरस्कार पर बिना शर्त रोक लगा सकती है।

भारतीय मध्यस्थता परिषद

मध्यस्थता, सुलह तथा अन्य विवादों के निवारण के लिये एक निवारण तंत्र के रूप में भारतीय मध्यस्थता परिषद (Arbitration Council of India) का प्रावधान करना।

मध्यस्थता : यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें विवाद को एक स्वतंत्र तीसरे पक्ष को नियुक्त कर सुलझाया जाता है जिसे मध्यस्थ (Arbitrator) कहा जाता है। मध्यस्थ समाधान पर पहुँचने से पहले दोनों पक्षों को सुनता है।

सुलह : यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें विवादों के सुलह के लिये एक समझौताकार (Conciliator) को नियुक्त किया जाता है। यह विवादित पक्षों को समझौते पर पहुँचने में मदद करता है। बिना मुकदमे के विवाद का निपटारा करना एक अनौपचारिक प्रक्रिया है। इस प्रकार से तनाव को कम कर, मुद्दों की व्याख्या कर, तकनीकी सहायता आदि द्वारा सुलह कराया जाता है।

ACI की संरचना :

ACI में एक अध्यक्ष होगा, जिसे :

सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश; या

उच्च न्यायालय का न्यायाधीश; या

उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश; या

मध्यस्थता के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाला एक प्रतिष्ठित व्यक्ति होना चाहिये।

अन्य सदस्यों में सरकार द्वारा नामित लोगों के अतिरिक्त जाने-माने शिक्षाविद्, व्यवसायी आदि शामिल किये जाएंगे।

SOURCE-THE HINDU

 

राष्ट्रीय रेल योजना

केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने 10 मार्च, 2021 को घोषणा की कि भारतीय रेलवे ने वर्ष 2030 तक भविष्य के लिए तैयार रेलवे प्रणाली स्थापित करने के लिए एक राष्ट्रीय रेल योजना (NRP) तैयार की है।

राष्ट्रीय रेल योजना (National Rail Plan-NRP)

केंद्रीय रेल मंत्री ने इस पर प्रकाश डाला कि राष्ट्रीय रेल योजना को परिचालन क्षमता और वाणिज्यिक नीति दोनों पहलों के आधार पर रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। मालभाड़े में रेलवे की हिस्सेदारी को 45 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

मुख्य बिंदु

रेल मंत्री ने निचले सदन को एक लिखित जवाब में कहा कि शहरी परिवहन शहरी विकास का एक अभिन्न अंग है और राज्य का विषय है। इसलिए, संबंधित राज्य शहरी परिवहन बुनियादी ढांचे या मेट्रो इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे मेट्रो रेल परियोजनाओं या मेट्रोलाइट या मेट्रोनेटो को शुरू करने और विकसित करने के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने यह भी कहा कि, लॉजिस्टिक्स के लिए वैल्यू-फॉर-मनी समाधान प्रदान करके नए बिजनेस को आकर्षित करने के लिए कई बिजनेस डेवलपमेंट यूनिट्स (BDU) स्थापित की गयी हैं।

Business Development Units

नए ट्रैफिक को आकर्षित करने और ट्रैफिक की मौजूदा धारा में रेल की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए ऐसी इकाइयों को भारतीय रेलवे के सभी क्षेत्रों में बनाया गया है। BDU उद्योगों के साथ बातचीत करेंगे और उन उद्योगों को रेल द्वारा खेप ले जाने में सुविधा प्रदान करेंगे।

BDU का कार्य

BDU के मुख्य कार्यों में शामिल हैं :

पारंपरिक थोक वस्तुओं के परिवहन में रेलवे की वर्तमान रेल हिस्सेदारी बढ़ाना।

स्थानीय उद्योगों से नए गैर-थोक ट्रैफिक को आकर्षित करना।

SOURCE-G.K.TODAY

 

अर्जुन सहायक सिंचाई परियोजना

अर्जुन सहायक सिंचाई परियोजना” (Arjuna Sahayak Irrigation Project) को उत्तर प्रदेश में एक या दो महीने में पूरा किया जाएगा। इस परियोजना का उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा किया जाएगा।

मुख्य बिंदु

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 11 मार्च, 2021 को इस परियोजना के शुभारंभ की घोषणा की गई थी। यह सिंचाई परियोजना किसानों के लिए सकारात्मक बदलाव लाएगी। उन्होंने महोबा जिले में अर्जुन सहायक परियोजना के तहत लहचूरा बांध का शुभारंभ करते समय इसकी घोषणा की थी।

अर्जुन सहायक परियोजना (Arjuna Sahayak Project)

यह 2,600 करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजना है। यह धसान नदी पर बनाई जा ही है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश के बांदा, महोबा और हमीरपुर के 168 गांवों में 1.5 लाख किसानों को सिंचाई की सुविधा प्रदान करेगी। इस परियोजना के पूरा होने के बाद, लगभग चार लाख लोगों को शुद्ध पेयजल मिलेगा। इस परियोजना के तहत 15,000 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा प्रदान की जाएगी।

धसान नदी

यह बेतवा नदी की एक दाहिनी किनारे की सहायक नदी है। यह मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में बेगमगंज तहसील से निकलती है। इस नदी की लंबाई 365 किमी है।  इस नदी को प्राचीन काल में दशार्ण के नाम से भी जाना जाता था। लहचूरा बांध इस नदी पर बना है। इस नदी को आसपास के गांवों के निवासियों द्वारा एक पवित्र नदी माना जाता है।

 

IDBI Bank को PCA Framework से बाहर निकाला गया

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने IDBI बैंक को प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (Prompt Corrective Action-PCA) फ्रेमवर्क से बाहर निकाल दिया है। IDBI बैंक को इसके वित्तीय प्रदर्शन में सुधार के परिणामस्वरूप चार साल के बाद इस ढांचे से हटा दिया गया है।

पृष्ठभूमि

भारतीय रिजर्व बैंक ने मई, 2017 में IDBI बैंक को PCA ढांचे के तहत सूचीबद्ध किया था। इसका कारण यह है कि बैंक ने पूंजी पर्याप्तता (capital adequacy), उत्तोलन अनुपात (leverage ratio), परिसंपत्ति की गुणवत्ता (asset quality) और परिसंपत्तियों पर रीटर्न (return on assets) के लिए सीमाएं तोड़ दी थीं। मार्च, 2017 के महीने में शुद्ध एनपीए 13% से अधिक था।

मुख्य बिंदु

31 दिसंबर, 2020 के अंत तक, यह नोट किया गया था कि बैंक नियामक पूंजी, उत्तोलन अनुपात और शुद्ध एनपीए पर पीसीए मापदंडों का उल्लंघन नहीं कर रहा था। इसने उस तिमाही में 378 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया। इस प्रकार, इसे नियामक फ्रेमवर्क से हटा दिया गया था।

Prompt Corrective Action (PCA)

यह एक फ्रेमवर्क है जिसके तहत कमजोर वित्तीय मैट्रिक्स वाले बैंकों को केंद्रीय बैंक द्वारा नियमन के तहत रखा जाता है। आरबीआई द्वारा 2002 में यह फ्रेमवर्क पेश किया गया था। यह उन बैंकों के लिए एक संरचित प्रारंभिक हस्तक्षेप तंत्र है जो खराब गुणवत्ता वाले हैं या घाटे की वजह से कमजोर हैं। PCA को बैंकिंग क्षेत्र में नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) के मुद्दे की जांच के उद्देश्य से लॉन्च किया गया था।  यह फ्रेमवर्क केवल वाणिज्यिक बैंकों पर लागू होता है।

SOURCE-G.K.TODAY

 

तुर्की की साल्दा झील को ‘Mars on Earth’ क्यों कहा जाता है?

वैज्ञानिक मंगल ग्रह पर प्राचीन जीवन के संकेतों की तलाश कर रहे हैं, इसके लिए नासा के परसेवेरांस रोवर (Perseverance Rover) द्वारा एकत्र किए गए डेटा का उपयोग किया जा रहा है। वैज्ञानिकों ने पाया कि इस मिशन पर एकत्र किया गया डेटा दक्षिण-पश्चिम तुर्की में स्थित साल्दा झील (Salda Lake) से मिलता-जुलता है।

मुख्य बिंदु

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी, नासा ने कहा कि साल्दा झील में खनिज और चट्टानें, जेजेरो क्रेटर पर जमा चट्टानों से मिलती-जुलती है, जेजेरो क्रेटर पर यह अंतरिक्ष यान उतरा था। माना जाता है कि जेज़ेरो क्रेटर एक बार पानी से भर गया था। साल्दा झील से जो जानकारी एकत्र की गई थी, वह वैज्ञानिकों को सूक्ष्मजीवों के जीवाश्म के निशान की खोज करने में मदद करेगी जो कि तलछट और लंबे समय से लुप्त हो चुकी झील के आसपास जमा तलछट में संरक्षित है।

साल्दा झील

यह एक मध्य आकार की क्रेटर झील है जो दक्षिण-पश्चिमी तुर्की में स्थित है। यह बर्दुर प्रांत (Burdur Province) में येसिलोवा जिले की सीमाओं के भीतर स्थित है। यह झील बर्दुर से पश्चिम में लगभग पचास किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह झील तुर्की झीलों के क्षेत्र में शामिल है, जो आंतरिक पश्चिमी से दक्षिणी अनातोलिया तक फैला हुआ है। इसमें 4,370 हेक्टेयर का क्षेत्रफल और 196 मीटर की गहराई है।

जेजेरो क्रेटर

यह क्रेटर Syrtis Major quadrangle में मंगल पर स्थित है। इसका व्यास लगभग 49.0 किमी है। माना जाता है कि यह गड्ढा एक बार पानी से भर गया था। इसमें फैन-डेल्टा जैसी आकृतियाँ बनीं हैं। डेल्टा और चैनलों के एक अध्ययन से, वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला था कि क्रेटर के अंदर झील का निर्माण उस अवधि के दौरान हुआ था जब निरंतर जल अपवाह था।

 

पूर्वी दक्षिण एशिया में परिवहन एकीकरणपर विश्व बैंक की रिपोर्ट

विश्व बैंक ने हाल ही में “पूर्वी दक्षिण एशिया में परिवहन एकीकरण की चुनौतियां और अवसर” (Connecting to thrive: Challenges and Opportunities of Transport Integration in Eastern South Asia) नामक अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत और बांग्लादेश के बीच अधिक परिवहन कनेक्टिविटी दोनों देशों की राष्ट्रीय आय में वृद्धि कर सकती है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच निर्बाध द्विपक्षीय कनेक्टिविटी में भारत की राष्ट्रीय आय को 8% और बांग्लादेश की राष्ट्रीय आय को 17% तक बढ़ाने की क्षमता है। इसमें आगे कहा गया है कि, भारत को बांग्लादेश का निर्यात 182% बढ़ सकता है और यदि वे एक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करते हैं, जबकि बांग्लादेश के लिए भारत का निर्यात 126% बढ़ सकता है। इस रिपोर्ट के अनुसार, अगर ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी बढ़ जाती है, तो इससे भारत को बांग्लादेश का निर्यात 297% और बांग्लादेश को भारत का निर्यात 172% बढ़ जाएगा।

रिपोर्ट का महत्व

यह रिपोर्ट “मैत्री सेतु” के उद्घाटन के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो जाती है, जो त्रिपुरा (भारत) और बांग्लादेश के बीच फेनी नदी पर बना एक पुल है। यह 1.9 किमी लंबा पुल है जो त्रिपुरा को बांग्लादेश में चटगांव बंदरगाह तक पहुंचने की अनुमति देगा।

रिपोर्ट में बांग्लादेश के बारे में क्या कहा गया है?

इस रिपोर्ट ने यह भी कहा कि, बांग्लादेश भारत, भूटान, नेपाल और अन्य पूर्वी एशिया के देशों के लिए एक रणनीतिक प्रवेश द्वार है। इस रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्रीय व्यापार, पारगमन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में सुधार करके बांग्लादेश इस क्षेत्र में आर्थिक महाशक्ति बन सकता है।

SOURCE-WORLD BANK

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