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Current Affair 12 October 2021

Current Affairs – 12 October, 2021

पीएम गतिशक्ति

देश के अवसंरचना परिदृश्य से जुड़े एक ऐतिहासिक आयोजन के तहत प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 13 अक्टूबर, 2021 को प्रात: 11 बजे प्रगति मैदान, नई दिल्ली में ‘पीएम गतिशक्ति – मल्टी- मॉडल कनेक्टिविटी के लिए राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ का शुभारंभ करेंगे।

भारत में अवसंरचना या बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के निर्माण में पिछले कई दशकों से अनगिनत समस्‍याएं आड़े आती रही थीं। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय का घोर अभाव देखा जाता था। उदाहरण के लिए, एक बार कोई सड़क बन जाने के बाद अन्य एजेंसियां भूमिगत केबल, गैस पाइपलाइन, इत्‍यादि बिछाने जैसी गतिविधियों के लिए निर्मित सड़क को फिर से खोद देती थीं। इससे न केवल लोगों को भारी असुविधा होती थी, बल्कि यह एक फिजूलखर्ची भी होती थी। इस समस्‍या के समाधान के लिए आपस में समन्वय बढ़ाने के ठोस प्रयास किए गए ताकि सभी केबल, पाइपलाइन, इत्‍यादि एक साथ बिछाई जा सकें। अनुमोदन प्रक्रिया में काफी समय लगने, तरह-तरह की नियामक मंजूरियां लेने, इत्‍यादि समस्‍याओं के समाधान के लिए भी अनेक ठोस कदम उठाए गए हैं। पिछले सात वर्षों में सरकार ने समग्र दृष्टिकोण के जरिये बुनियादी ढांचागत सुविधाओं या अवसंरचना पर अभूतपूर्व ध्यान देना सुनिश्चित किया है।

पीएम गतिशक्ति प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं हेतु समस्‍त पक्षों के लिए समग्र योजना को संस्थागत रूप देकर पिछले सभी मुद्दों को सुलझाएगी। एक-दूसरे से अलग-थलग रहकर योजना बनाने और डिजाइन तैयार करने के बजाय परियोजनाओं को एक साझा नजरिए से तैयार और कार्यान्वित किया जाएगा। इसमें विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों की अवसंरचना योजनाओं जैसे कि भारतमाला, सागरमाला, अंतर्देशीय जलमार्गों, शुष्क/भूमि बंदरगाहों, उड़ान, इत्‍यादि को शामिल किया जाएगा। कनेक्टिविटी बेहतर करने एवं भारतीय व्यवसायों को और भी अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए टेक्सटाइल क्लस्टर, फार्मास्युटिकल क्लस्टर, रक्षा कॉरिडोर, इलेक्ट्रॉनिक पार्क, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, फिशिंग क्लस्टर, एग्री जोन जैसे आर्थिक क्षेत्रों को कवर किया जाएगा। इसमें विभिन्‍न प्रौद्योगिकियों का भी व्‍यापक उपयोग किया जाएगा जिनमें बीआईएसएजी-एन (भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग और भू-सूचना संस्थान) द्वारा विकसित इसरो इमेजरी युक्‍त स्थानिक नियोजन उपकरण भी शामिल होंगे।

पीएम गतिशक्ति छह स्तंभों पर आधारित है:

  1. व्यापकता : इसमें एक केंद्रीकृत पोर्टल में विभिन्न मंत्रालयों तथा विभागों की सभी मौजूदा और नियोजित पहलों का विवरण शामिल होगा। अब परियोजनाओं के व्यापक नियोजन और निष्पादन के क्रम में महत्वपूर्ण डेटा का आदान – प्रदान करते हुए प्रत्येक विभाग को एक-दूसरे की गतिविधियों से अवगत रहने की सुविधा होगी।
  2. प्राथमिकता : इसके माध्यम से विभिन्न विभाग विविध क्षेत्रों से संबंधित पारस्परिक व्यवहार के जरिए अपनी परियोजनाओं को प्राथमिकता देने में सक्षम होंगे।
  3. अधिकतम उपयोग : यह राष्ट्रीय मास्टर प्लान महत्वपूर्ण खामियों की पहचान के बाद विभिन्न परियोजनाओं की योजना बनाने में विभिन्न मंत्रालयों की सहायता करेगा। माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए, यह मास्टर प्लान समय और लागत की दृष्टि से अधिकतम उपयोगी मार्ग चुनने में मदद करेगा।
  4. सामंजस्यीकरण : अलग-अलग मंत्रालय और विभाग अक्सर एक – दूसरे से अलग – थलग होकर काम करते हैं। परियोजनाओं के नियोजन एवं क्रियान्वयन को लेकर उनके बीच समन्वय का अभाव होता है जिसके परिणामस्वरूप विलम्ब होता है। पीएम गतिशक्ति प्रत्येक विभाग की गतिविधियों के साथ-साथ शासन – प्रणाली की विभिन्न परतों के बीच काम का समन्वय सुनिश्चित करके उनके बीच समग्र रूप से सामंजस्य स्थापित करने में मदद करेगी।
  5. विश्लेषणात्मक : यह मास्टर प्लान जीआईएस आधारित स्थानिक नियोजन एवं 200 से अधिक परतों वाले विश्लेषणात्मक उपकरणों के जरिए एक ही स्थान पर संपूर्ण डेटा प्रदान करेगा, जिससे कार्यान्वन से जुड़ी एजेंसी को अपना कामकाज करने में सहूलियत होगी।
  6. गतिशीलता : सभी मंत्रालय और विभाग अब जीआईएस प्लेटफॉर्म के माध्यम से विविध क्षेत्रों से संबंधित परियोजनाओं की प्रगति की परिकल्पना, समीक्षा और निगरानी करने में सक्षम होंगे, क्योंकि उपग्रह इमेजरी समय-समय पर धरातल पर होने वाली प्रगति की जानकारी देगी और उसके अनुरूप परियोजनाओं की प्रगति से संबंधित जाकारी को नियमित रूप से पोर्टल पर अपडेट किया जाएगा। यह कदम इस मास्टर प्लान को आगे बढ़ाने और उसे अपडेट करने से संबंधित महत्वपूर्ण उपायों की पहचान करने में मदद करेगा।

पीएम गतिशक्ति अगली पीढ़ी के अवसंरचना के निर्माण से संबंधित प्रधानमंत्री के निरंतर प्रयासों का परिणाम है, जो कि जीवन को सुगम बनाने के साथसाथ व्यापार करना और अधिक आसान बनाता है। मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी, परिवहन के एक साधन से दूसरे साधन में लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए एकीकृत और निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। यह कदम बुनियादी ढांचे को अंतिम मील तक कनेक्टिविटी की सुविधा प्रदान करेगा और यात्रा में लोगों को लगने वाले समय को भी कम करेगा।

पीएम गतिशक्ति कनेक्टिविटी से जुड़ी आगामी परियोजनाओं, अन्य व्यावसायिक केंद्रों, औद्योगिक क्षेत्रों और आसपास के वातावरण के बारे में जनता और व्यावसायिक समुदाय को जानकारी प्रदान करेगी। यह निवेशकों को उपयुक्त स्थानों पर अपने व्यवसाय की योजना बनाने में सक्षम बनाएगी जिससे पारस्परिक व्यवहार में वृद्धि होगी। यह रोजगार के कई अवसर पैदा करेगी और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी। यह लॉजिस्टिक्स से जुड़ी लागत में कटौती और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार करके स्थानीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बेहतर बनाएगी और स्थानीय उद्योग एवं उपभोक्ताओं के बीच उपयुक्त जुड़ाव भी सुनिश्चित करेगी।

इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री प्रगति मैदान में नए प्रदर्शनी परिसर (प्रदर्शनी हॉल 2 से 5) का भी उद्घाटन करेंगे। भारत व्यापार संवर्धन संगठन का प्रमुख कार्यक्रम, भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला (आईआईटीएफ) 2021 भी इन नए प्रदर्शनी हॉल में 14-27 नवंबर, 2021 के दौरान आयोजित किया जाएगा।

इस अवसर पर केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, रेल मंत्री, नागरिक उड्डयन मंत्री, पोत परिवहन (शिपिंग) मंत्री, विद्युत मंत्री, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री भी मौजूद रहेंगे।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

 

स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) (एसबीएमयू) को 2025-26 तक

जारी रखने को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) के परिणामों पर जोर, सभी शहरों में ठोस कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण शुरू करने और जनगणना 2011 में 1 लाख से कम आबादी वाले शहरों (ऐसे शहर जिन्हें अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) में शामिल नहीं किया गया था) में अपशिष्ट जल के प्रबंधन पर जोर के साथ, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) को 2025-26 तक जारी रखने को मंजूरी दे दी है।

स्वच्छ भारत मिशन- शहरी 2.0 : मुख्य बिंदु

अगले 5 साल में, माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 1 अक्टूबर 2021 को लॉन्च किए गए एसबीएम-यू 2.0 का मुख्य जोर हासिल की गई स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन के परिणामों को बनाए रखना व उनकी गति बढ़ाने पर होगा, जिससे मिशन के “गारबेज मुक्त” शहरी भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।

मिशन के विभिन्न भागों का कार्यान्वयन एक व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से किया जाएगा, जिसमें आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर का विश्लेषण, 5 वर्षीय विस्तृत कार्य योजना और समयसीमा के साथ वार्षिक कार्य-योजनाएं शामिल हैं।

यह मिशन कागज रहित, डिजिटल होगा और जीआईएस चिह्नित कचरा प्रबंधन इन्फ्रास्ट्रक्चर, मजबूत यूजर इंटरफेस, ऑनलाइन शिकायत समाधान व्यवस्था, परियोजना निर्माण से लेकर फंड जारी करने तक परियोजना की ऑनलाइन निगरानी और एकीकृत जीआईएस आधारित प्लेटफॉर्म पर परियोजना की प्रगति की निगरानी के माध्यम से पूर्ण रूप से पारदर्शिता व विश्वसनीयता के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाएगा।

परिणाम आधारित फंड जारी करने, छोटे यूएलबी को ज्यादा वित्तीय सहायता और अतिरिक्त वित्तीय सहायता के लिए 15वें वित्त आयोग से अनुदानों का मिलाना, हर भाग के लिए व्यवस्थित कार्यान्वयन, मजबूत क्षमता निर्माण, व्यवहार में निरंतर बदलाव के लिए संवाद और हिमायत, निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना और ज्यादा उद्योग भागीदारी से निर्धारित समयसीमाओं के भीतर मिशन के लक्ष्यों को हासिल करने में सहायता मिलेगी।

स्वच्छ भारत मिशन- शहरी 2.0 के अंतर्गत मुख्य भाग

एसबीएम-यू 2.0 के तहत कार्यान्वयन के लिए मुख्य भाग निम्नलिखित होंगे :

नियमित रूप से स्वच्छता :

  1. मिशन में अगले 5 साल के दौरान रोजगार और बेहतर अवसरों की खोज में ग्रामीण से शहरी इलाकों में जाने वाली अतिरिक्त आबादी को सेवाएं देते हुए स्वच्छता सेवाओं तक पूर्ण पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा। ऐसा 5 लाख व्यक्तिगत, सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण के माध्यम से किया जाएगा।
  2. एसबीएम-शहरी के अंतर्गत पेश किए गए एक नए भाग- 1 लाख से कम जनसंख्या वाले शहरों में पूर्ण तरल कचरा प्रबंधन से हर शहरों में प्रणालियों और प्रक्रियाओं की स्थापना सुनिश्चित होगी, जिससे सभी अपशिष्ट जल को सुरक्षित रूप से समाहित, संग्रहित, उसका परिवहन और शोधन हो, साथ ही किसी प्रकार का अपशिष्ट जल हमारे जल स्रोतों को प्रदूषित नहीं कर सकेगा।

टिकाऊ ठोस अपशिष्ट प्रबंधन :

  1. प्रत्येक शहर में सिंगल यूज प्लास्टिक को चरणबद्ध रूप से समाप्त करने पर ध्यान केन्द्रित करते हुए, फंक्शनल मैटेरियल रिकवरी फैसिलटी (एमआरएफ) के साथ कचरे का शत-प्रतिशत स्रोत पृथक्करण,
  2. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) वाले शहरों और 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में निर्माण और तोड़-फोड़ (सीएंडडी) अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाओं की स्थापना तथा मैकेनिकल स्वीपर की तैनाती,
  3. सभी पुरानी डंपसाइटों का जीर्णोद्धार, ताकि 15 करोड़ टन पुराने कचरे से ढकी 14,000 एकड़ भूमि को मुक्त किया जा सके।

जन आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए, शहरी स्‍थानीय निकायों (यूएलबी) और सभी संबंधित हितधारकों की मजबूत क्षमता निर्माण तथा संवाद और प्रचार के जरिए नागरिकों को शामिल करके उपर्युक्‍त लक्ष्‍य तक पहुंचा जा सकेगा।

स्वच्छता और अनौपचारिक अपशिष्ट श्रमिकों के व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण और सुरक्षा किट, सरकारी कल्याण योजनाओं के साथ जुड़ाव के साथ-साथ क्षमता निर्माण के प्रावधान के माध्यम उनके कल्याण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्य- शहरी

प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में, 2014 में, भारत ने शहरी योजना के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया और जल तथा स्वच्छता के क्षेत्र में सुधार की दिशा में यात्रा शुरू की। प्रधानमंत्री ने निम्‍नलिखित उद्देश्‍य से 15 अगस्‍त, 2014 को स्‍वच्‍छ भारत अभियान (एसबीएम) की शुरुआत की घोषणा की,  जिसे औपचारिक रूप से 2 अक्टूबर, 2014 को लॉन्च किया गया
था :

  • सभी सांविधिक कस्बों में खुले में शौच का उन्मूलन।
  • सभी सांविधिक कस्बों में नगरपालिका ठोस कचरे का 100 प्रतिशत वैज्ञानिक प्रबंधन।
  • जन आंदोलन के माध्यम से व्यवहार में बदलाव लाना।

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी की उपलब्धियां

पिछले सात वर्षों में, मिशन ने देश के कोने-कोने तक पहुंच बनाई है और अपने ‘नागरिक प्रथम’ पर जोर देकर बड़ी संख्या में नागरिकों के जीवन को बदल दिया है। एसबीएम-शहरी के तहत प्रमुख पड़ाव, उपलब्धियां और प्रभाव निम्नलिखित हैं :

  • मिशन ने शहरी भारत में स्वच्छता सुविधाओं तक 100 प्रतिशत पहुंच प्रदान करके शहरी भारत में स्वच्छता के क्षेत्र में क्रांति ला दी है। एसबीएम-शहरी के तहत, 70 लाख से अधिक घरों, सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया गया है, इस प्रकार सभी के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक स्वच्छता समाधान प्रदान किया गया है। मिशन ने महिलाओं, ट्रांसजेंडर समुदायों और दिव्यांगजनों की जरूरतों को प्राथमिकता दी है।
  • गूगल मैप्स पर एसबीएम शौचालय जैसे डिजिटल नवाचार के माध्यम से स्वच्छता सुविधाओं तक पहुंच में और सुधार किया गया है, जहां 3,300 से अधिक शहरों में 65,000 से अधिक सार्वजनिक शौचालयों को दर्शाया गया है।
  • शहरी भारत को 2019 में खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया था, जिसके बाद मिशन ने शहरी भारत को स्थायी स्वच्छता के पथ पर अग्रसर किया है, जिसमें 3,300 से अधिक शहरों और 960 से अधिक शहरों को क्रमशः ओडीएफ1+ और ओडीएफ ++2 प्रमाणित किया गया है।
  • शहर जल+ प्रोटोकॉल3 के तहत जल+ प्रमाणीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जो अपशिष्ट जल के शोधन और इसके इष्टतम पुन: उपयोग पर केन्द्रित है।
  • वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में, भारत में अपशिष्ट प्रसंस्करण 2014 में 18 प्रतिशत से चार गुना बढ़कर आज 70 प्रतिशत हो गया है।
  • 97 प्रतिशत वार्डों में 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और 85 प्रतिशत वार्डों में नागरिकों द्वारा किए जा रहे कचरे के स्रोत पृथक्करण के माध्यम से इसमें सहायता की गई है।
  • यह अभियान समाज कल्याण योजनाओं से जुड़े 5 लाख से अधिक सफाई कर्मचारियों के साथ स्वच्छता कार्यकर्ताओं और अनौपचारिक अपशिष्ट श्रमिकों के जीवन में महत्‍वपूर्ण बदलाव लाने में सक्षम रहा है। अग्रिम मोर्चे के सफाई कर्मियों की निर्बाध सेवाओं ने कोविड-19 महामारी के दौरान शहरी भारत की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • कार्यक्रम में 20 करोड़ नागरिकों (भारत की शहरी आबादी का 50 प्रतिशत से अधिक शामिल) की सक्रिय भागीदारी ने मिशन को बड़े पैमाने पर आईईसी और व्यवहार परिवर्तन अभियानों के माध्यम से एक जन आंदोलन, एक सच्चे जन आंदोलन में सफलतापूर्वक बदल दिया है।
  • आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा 2016 में डिजिटल शिकायत निवारण प्लेटफॉर्म के तौर पर स्‍वच्‍छता ऐप जैसे डिजिटल सामर्थ्‍य से जन शिकायत निवारण के प्रबंधन को एक नया रूप मिला है। ऐप ने अब तक नागरिकों से सक्रिय जुड़ाव के साथ 2 करोड़ से अधिक जन शिकायतों का समाधान किया है। आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने हाल ही में स्वच्छता ऐप 0 का नया संस्करण लॉन्च किया है।
  • एसबीएम-शहरी के तहत 4,000 से अधिक शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) को कवर करने वाला दुनिया का सबसे बड़ा शहरी स्वच्छता सर्वेक्षण – स्वच्छ सर्वेक्षण 2016 में शुरू किया गया था। सर्वेक्षण कार्यक्रम कई वर्षों में विकसित हुआ है और आज एक अनूठा प्रबंधन उपकरण बन गया है, जो स्वच्छता परिणामों को प्राप्त करने के लिए जमीनी स्तर के कार्यान्वयन को तेज करता है। महामारी से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 को रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया। इन वर्षों में, सर्वेक्षण को कुल मिलाकर 7 करोड़ से अधिक नागरिकों की ओर से प्रतिक्रिया मिली हैं।
  • विभिन्न मिशन घटकों के तहत प्रशिक्षित 10 लाख से अधिक नगरपालिका अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ राज्य तथा शहर स्तर के अधिकारियों की निरंतर क्षमता निर्माण।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

 

राष्ट्रीय डाक सप्ताह

डाक विभाग, संचार मंत्रालय ने राष्ट्रीय डाक सप्ताह और आजादी का अमृत महोत्सव समारोह के हिस्से के रूप में आज डाक जीवन बीमा (पीएलआई) दिवस मनाया। डाक विभाग हर साल अक्टूबर महीने में राष्ट्रीय डाक सप्ताह मनाता है, जिसकी शुरुआत 9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस से होती है जो यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (यूपीयू) की स्थापना की वर्षगांठ है। इस वर्ष राष्ट्रीय डाक सप्ताह 2021 के दौरान 12 अक्टूबर 2021 (मंगलवार) को पीएलआई दिवस मनाने का निर्णय लिया गया।

पीएलआई दिवस पर आयोजित की गई गतिविधियां:

12 अक्टूबर 2021 को पीएलआई दिवस मनाने के लिए डाक मंडलों ने पीएलआई और आरपीएलआई पर विशेष ध्यान देने के साथ ही देश के प्रत्येक जिले में वित्तीय समावेशन मेलों का आयोजन किया। दावा निवारण में लंबित चल रहे मामलों की संख्या में कमी लाने के लिए डाक मंडलों में विशेष दावा निपटान अभियान चलाए गए। पीएलआई और आरपीएलआई में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले बिक्री दलों के योगदान को मान्यता देने हेतु राष्ट्रीय तथा मंडल स्तर पर पुरस्कार प्रदान किये गए।

पोस्टल सर्किलों द्वारा आयोजित की जाने वाली कुछ गतिविधियों का उल्लेख नीचे किया गया है।

पीएलआई पर संक्षिप्त जानकारी:

  1. डाक विभाग दो प्रकार की जीवन बीमा योजनाएं प्रदान करता है, अर्थात् 1884 में शुरू की गई डाक जीवन बीमा (पीएलआई) और 1995 में शुरू की गई ग्रामीण डाक जीवन बीमा (आरपीएलआई)।
  2. डाक जीवन बीमा (“पीएलआई”) को डाक विभाग के कर्मचारियों के लिए 1884 में एक कल्याणकारी उपाय के रूप में शुरू किया गया था और इसे 1888 में टेलीग्राफ विभाग के कर्मचारियों के लिए विस्तारित किया गया। वर्ष 1894 में पीएलआई ने पी एंड टी विभाग की महिला कर्मचारियों को ऐसे समय में बीमा कवर दिया, जब कोई अन्य बीमा कंपनी महिलाओं को जीवन बीमा प्रदान नहीं करती थी। पीएलआई के लाभ सरकारी कर्मचारियों जैसे केंद्र और राज्य सरकारों के कर्मचारियों, सार्वजनिक उपक्रमों, सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों, राष्ट्रीयकृत बैंकों, रक्षा सेवाओं तथा अर्ध-सैन्य बलों के लिए उपलब्ध कराये गए थे। हाल ही में सितंबर 2017 में पीएलआई का लाभ पेशेवरों (जैसे इंजीनियर, डॉक्टर, बैंकर, वकील, आर्किटेक्ट, पत्रकार आदि) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) तथा बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में सूचीबद्ध कंपनियों के कर्मचारियों को भी दिया गया है।
  3. ग्रामीण डाक जीवन बीमा (“आरपीएलआई”) की शुरुआत 1995 में देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उन लोगों को जीवन बीमा कवर प्रदान करने के लिए की गई थी, जिन्होंने परिपक्वता की आयु प्राप्त कर ली है।
  4. पीएलआई के साथ-साथ आरपीएलआई द्वारा पेश किए जाने वाले उत्पादों में 6 प्रकार की पारंपरिक पॉलिसी (संपूर्ण जीवन, बंदोबस्ती, परिवर्तनीय संपूर्ण जीवन, प्रत्याशित बंदोबस्ती, संयुक्त जीवन और बच्चों के लिए बीमा पॉलिसी) शामिल हैं। कम प्रीमियम और उच्च बोनस इन पॉलिसियों की अनूठी विशेषता है, जो इसे भारत में अन्य जीवन बीमाकर्ताओं से अलग करती है। बचत लाभ और जीवन बीमा कवर प्रदान करने के अलावा ये पॉलिसी ग्राहकों को ऋण सुविधा भी प्रदान करती हैं। अधिकतम बीमा सीमा (बीमा राशि) पीएलआई पॉलिसियों के लिए 50 लाख रुपये और आरपीएलआई पॉलिसियों के लिए 10 लाख रुपये है।
  5. वर्तमान में पीएलआई तथा आरपीएलआई में सक्रिय पॉलिसियों की संख्या क्रमशः 18 लाख और 51.88 लाख है, जिनकी कुल बीमा राशि 3.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक है और प्रबंधन के तहत संपत्ति (एयूएम) 1.25 लाख करोड़ रुपये है।
  6. पीएलआई और आरपीएलआई पॉलिसी की देश भर में फैले 55 लाख डाकघरों के माध्यम से बिक्री व देख-रेख की जाती है। पीएलआई और आरपीएलआई पॉलिसीधारक देश भर में किसी भी डाकघर में अपने प्रीमियम का भुगतान कर सकते हैं। वेतनभोगी कर्मचारियों के मामले में वेतन से प्रीमियम की वसूली संभव है। ग्राहक पॉलिसी के प्रीमियम का भुगतान ग्राहक पोर्टल के माध्यम से नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, भीम/यूपीआई और वॉलेट का उपयोग करके ऑनलाइन भी किया जा सकता है। ग्राहक पोर्टल पॉलिसीधारकों को किसी भी समय और कहीं पर भी प्रीमियम भुगतान का एक सुविधाजनक विकल्प प्रदान करता है तथा पॉलिसीधारकों को वास्तविक समय के आधार पर अपनी पॉलिसी की स्थिति देखने की अनुमति देता है।
  7. पॉलिसीधारक अपनी शिकायतों के निवारण के लिए निकटतम डाकघर, प्रधान डाकघर (सीपीसी), मंडल प्रमुखों/क्षेत्रीय पीएमजी और सीपीएमजी के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। पीएलआई और आरपीएलआई में सभी प्रकार के दावों का निपटारा निर्धारित नागरिक चार्टर मानदंडों के अनुसार किया जाता है। इसके अलावा, दावेदार द्वारा डाक विभाग में अगले उच्च प्राधिकारी के समक्ष मृत्यु के दावे की अस्वीकृति के खिलाफ अपील की जा सकती है।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S2

 

अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार

इस बार तीन अर्थशास्त्रियों डेविड कार्ड (David Card), जोशुआ अंग्रिस्ट (Joshua Angrist) और गुइदो इम्बेन्स (Guido Imbens) को अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize in Economics) 2021 से सम्मानित किया गया है।

मुख्य बिंदु

डेविड कार्ड एक अमेरिकी कनाडाई, जोशु आ एंग्रिस्ट एक इजरायल-अमेरिकी और गुइदो इम्बेन्स एक डच-अमेरिकी अर्थशास्त्री हैं, इस बार अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार  श्रम बाजार और “प्राकृतिक प्रयोगों” में अंतर्दृष्टि के लिए प्रदान किया गया है।

इस पुरस्कार का आधा हिस्सा डेविड कार्ड (कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले के एक प्रोफेसर) को “श्रम अर्थशास्त्र में उनके अनुभवजन्य योगदान के लिए” प्रदान किया गया। डेविड कार्ड का काम न्यूनतम मजदूरी, आप्रवास और शिक्षा के श्रम बाजार प्रभावों पर केंद्रित है।

पुरस्कार अन्य आधा हिस्सा जोशुआ एंग्रिस्ट (मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के प्रोफेसर) और स्टैनफोर्ड के प्रोफेसर गुइदो इम्बेन्स को प्रदान किया गया, उन्हें “कारण संबंधों के विश्लेषण में उनके पद्धतिगत योगदान के लिए” इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize in Economics)

अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize in Economics) पहली बार 1969 में प्रदान किया गया था। यह पुरस्कार Royal Swedish Academy of Sciences द्वारा प्रदान किया जाता है। 1969 में जेन टिनबर्जन और रैगन्र फ़्रिश इस पुरस्कार के पहले विजेता थे। इस पुरस्कार का आधिकारिक नाम Sveriges Riksbank Prize in Economic Sciences in Memory of Alfred Nobel है।

SOURCE-GK TODAY

PAPER-G.S.1 PRE

 

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने ‘स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार’

को मान्यता दी

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) ने सर्वसम्मति से एक सार्वभौमिक अधिकार के रूप में एक स्वच्छ, स्वस्थ और स्थायी पर्यावरण पहचान करने के लिए मतदान किया। इस अधिकार को UNHRC द्वारा 8 अक्टूबर, 2021 को जिनेवा, स्विट्जरलैंड में मान्यता दी गई थी।

मुख्य बिंदु

एक बार इस अधिकार को सभी द्वारा मान्यता प्रदान किये जाने के बाद, यह 70 वर्षों में अपनी तरह का पहला होगा, जब से संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 1948 में मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा को अपनाया गया था।

स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार

स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार सबसे पहले “1972 स्टॉकहोम घोषणा” में निहित था।

संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव

यह प्रस्ताव पर्यावरण मामलों में काम कर रहे मानवाधिकार रक्षकों के “जीवन, स्वतंत्रता और सुरक्षा के अधिकार” पर जोर देता है। उन्हें पर्यावरण मानवाधिकार रक्षकों के रूप में जाना जाता है। मानव अधिकार परिषद द्वारा स्वच्छ पर्यावरण प्रस्ताव पारित किया गया था। इस प्रस्ताव ने देशों से पर्यावरण में सुधार की अपनी क्षमताओं को बढ़ावा देने का भी आह्वान किया। इसे 43-0 से पारित कर दिया गया।

पर्यावरण रक्षकों की चिंताएं

दुनिया भर में पर्यावरण रक्षक लगातार शारीरिक हमलों, कानूनी कार्रवाइयों, नजरबंदी, गिरफ्तारी इत्यादि से प्रताड़ित किये जा रहे हैं। अकेले 2020 में, लगभग 200 पर्यावरण रक्षकों की हत्या कर दी गई थी।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC)

UNHRC एक संयुक्त राष्ट्र निकाय है जो दुनिया भर में मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने का प्रयास करता है। इस परिषद में 47 सदस्य होते हैं और वे क्षेत्रीय समूह के आधार पर तीन साल की अवधि के लिए चुने जाते हैं। इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है।

SOURCE-GK TODAY

PAPER-G.S.3

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