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Current Affair 14 April 2021

14 April Current Affairs

हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अंतर्गत द एनर्जी फोरम (टीईएफ) और फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री (एफ़आईपीआई) 15 अप्रैल, 2021 को वर्चुअल माध्यम से हाइड्रोजन गोलमेज सम्मेलन का आयोजन कर रहा है जिसका विषय है ‘हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था भारतीय संवाद-2021’। इसका उद्देश्य उभरते हाइड्रोजन इकोसिस्टम और साझेदारी, सहयोग तथा संगठन की संभावनाओं से जुड़े अवसरों का पता लगाना है।

दुनिया अंतरराष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं को हासिल करने की दिशा में अग्रसर है और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए कदम आगे बढ़ा रही है, ऐसे में हाइड्रोजन की महत्ता दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है, क्योंकि यह एक मात्र ऐसा पारंपरिक ईंधन का स्रोत है जो ऊर्जा आवश्यकता की खाई को पाट सकता है।

हाइड्रोजन राउंडटेबल अपनी तरह का पहला आयोजन है जिसमें मंत्रिस्तरीय सत्रों का आयोजन होगा। उसके बाद पांच संगोष्ठी सत्र आयोजित किए जाएंगे जिसमें जाने-माने नीति निर्माता, विशेषज्ञ, और उद्योग जगत के प्रमुख दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों से भाग लेंगे। इन गोष्ठियों में नीतिगत रोडमैप तैयार करने से लेकर हाइड्रोजन की मांग और आपूर्ति की मैपिंग की जाएगी।

इस उच्चस्तरीय गोलमेज सम्मेलन का नेतृत्व पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस तथा इस्पात मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान करेंगे और आयोजन में उद्घाटन भाषण देंगे। उनके संबोधन के बाद यूएई के उद्योग और उन्नत प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. सुल्तान बिन अहमद सुल्तान अल जबेर, ऑस्ट्रेलिया के ऊर्जा तथा उत्सर्जन न्यूनीकरण मंत्री श्री अंगस टेलर, डेनमार्क के जलवायु, ऊर्जा और यूटिलिटीज मंत्री श्री डैन जुर्गेनसेन, अमेरिका के सहायक ऊर्जा मंत्री श्री डेविड एम टर्क भी आयोजन को संबोधित करेंगे। सभी वक्ता नीतिगत खाका तैयार करने पर अपने अनुभव और जानकारी साझा करेंगे और मांग तथा आपूर्ति विषय पर चर्चा करेंगे।

आयोजन में अलग से एक सत्र भारत के हाइड्रोजन मिशन को समर्पित होगा, जिसमें नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा सचिव डॉ. इंदु शेखर चतुर्वेदी मुख्य भाषण देंगे। आयोजन के समापन सत्र की अध्यक्षता पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस सचिव श्री तरुण कपूर करेंगे।

हाइड्रोजन गोलमेज सम्मेलन में 15 अलग-अलग देशों से कुल 25 वक्ता हिस्सा लेंगे जो विभिन्न स्रोतों से हाइड्रोजन की क्षमता और राष्ट्रीय ऊर्जा परिवर्तन के लिए इसके महत्व पर चर्चा करेंगे। गोलमेज सम्मेलन के इस वर्चुअल आयोजन में दुनिया भर से लगभग 3000 प्रतिभागियों के जुड़ने की संभावना है।

इस गोलमेज सम्मेलन का उद्देश्य विश्व के महाद्वीपों पर मौजूद हाइड्रोजन की वर्तमान पारिस्थितिकी की प्रगति को समझना और थिंक टैंक, सरकारों तथा उद्योग जगत के लिए एक ऐसा मंच उपलब्ध कराना है जहां सभी पक्ष एक साथ आ सकें और सस्ती तथा टिकाऊ प्रौद्योगिकी विकसित करने के अभियान से जुड़ सकें।

Source –PIB

 

अटल नवाचार मिशन और डसॉल्ट सिस्टम्स फाउंडेशन

अटल नवाचार मिशन (एआईएम), नीति आयोग ने आज भारत में डिजिटली रूप से समृद्ध माहौल उपलब्ध कराने और पूरे देश में युवाओं में एसटीईएम आधारित नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त रूप से कार्य करने के बारे में डसॉल्ट सिस्टम्स फाउंडेशन के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

अटल टिंकरिंग लैब्स (एटीएल), एआईएम के प्रमुख कार्यक्रमों में से एक है। इसने स्कूली बच्चों के बीच रचनात्मकता और कल्पनाशीलता को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डसॉल्ट सिस्टम्स फाउंडेशन 3 डी प्रौद्योगिकियों और वर्चुअल यूनिवर्सेस के साथ भारत में शिक्षा और अनुसंधान के भविष्य को बदलने के लिए समर्पित है। यह तीन प्रमुख क्षेत्रों- परियोजना आधारित, स्व-शिक्षा विषय, हैकथॉन एवं चुनौतियां तथा अंतर-देशीय शैक्षिक सहयोग में एटीएल कार्यक्रम में योगदान देने के लिए तैयार हैं।

डसॉल्ट सिस्टम्स फाउंडेशन ने सीएसआर उद्देश्यों के हिस्से के रूप में एक पहल तैयार और विकसित की है, जो ‘रेडी टू यूज़’  के शुरुआती निर्धारण और अच्छी तरह से प्रलेखित स्व-शिक्षण, प्रशिक्षण एवं इंस्ट्रक्शनल प्लेबुक है। इसमें विजुअल समझ के लिए उचित वीडियो का प्रावधान है जिसे वे एटीएल छात्रों के साथ साझा करेंगे और उन तक डिजिटली रूप से पहुंच स्थापित की जा सकती हैं। यह प्लेबुक अध्यापकों के लिए निर्देशात्मक वीडियो से युक्त है। ताकि इसे विशेषज्ञों के न्यूनतम समर्थन के साथ लागू किया जा सके। यह सामग्री एआईएम के लिए सभी स्कूलों में एटीएल और अन्य स्कूलों के साथ-साथ भारत में स्कूली बच्चों के उपयोग के लिए उपलब्ध होगी।

इस एसओआई के तहत, डसॉल्ट सिस्टम्स फाउंडेशन एटीएल के लिए नवाचारी चुनौतियों / हैकथॉन को तैयार और व्यवस्थित करेगा, जिससे छात्रों और शिक्षकों के बीच समस्यों के निवारण, कौशल, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी आधारित खोजपूर्ण शिक्षण कौशल और नवाचार संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा।

एसओआई पर हस्ताक्षर करने के वर्चुअल सत्र के दौरान एआईएम, नीति आयोग के मिशन निदेशक आर. रामानन ने कहा कि डसॉल्ट सिस्टम्स फाउंडेशन के साथ अटल नवाचार मिशन की भागीदारी शुरू करने पर हम गर्व का अनुभव करते हैं। डसॉल्ट सिस्टम्स बड़े पैमाने पर मिशन क्रिटिकल सिस्टम्स के डिजाइन और इंजीनियरिंग में वैश्विक दिग्गज हैं। यह न केवल हमारे एटीएल टिंकरिंग लैब के छात्रों के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार में रुचि पैदा करेगा, बल्कि इंजीनियरिंग नवाचारी क्षमता को बढ़ाने में भी प्रोत्साहन देगा। इससे यह भविष्य के नवप्रवर्तकों और नौकरी सृजनकर्ताओं को डसाल्ट के माध्यम से विश्व स्तर की सामग्री उपलब्ध कराने में भी सक्षमता प्रदान करता है।

एआईएम के निदेशक मंडल के अध्यक्ष श्री सुदर्शन मोगासेले के साथ सहयोग के बारे में अपने विचार साझा करते हुए डसॉल्ट सिस्टम्स फाउंडेशन, इंडिया ने कहा कि भारत में डसॉल्ट सिस्टम्स फाउंडेशन शुरूआत से ही नवाचार की भावनाओं को अपनाने के लिए कई गतिविधियों में कार्यरत हैं। हमें अगली पीढ़ी के छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए सशक्त बनाना है। अटल नवाचार मिशन के साथ हमारी यह यात्रा हमें नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी, क्योंकि हम स्कूली छात्रों में नवाचार की भावना को प्रोत्साहन देने के लिए देश में  अटल टिंकरिंग लैब्स के साथ काम कर रहे हैं। हम भारत के स्कूलों में इस परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए अटल नवाचार मिशन के सपनों को पूरा करने में योगदान देने के लिए बहुत प्रसन्न हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि इस भागीदारी के एक हिस्से के रूप में डसॉल्ट सिस्टम्स फाउंडेशन  अटल टिंकरिंग लैब्स के लिए परियोजना आधारित, गतिविधियों पर आधारित और
स्वयं शिक्षण सामग्री के साथ अपना योगदान देगा। इस क्षेत्र में अनुभवी संकाय सदस्यों द्वारा शिक्षण सामग्री तैयार की गई है। अटल नवाचार  मिशन के साथ संयुक्त हैकथॉन की मेजबानी भी की जाएगी। स्कूली छात्रों को नवाचारों, उत्पाद डिजाइन और निर्माण की संस्कृति विकसित करने तथा भविष्य के नवप्रवर्तकों, उद्यमियों की भलाई के लिए योगदान देने और छात्रों के लिए चुनौतियों और अंतर-देशीय शैक्षिक सहयोग कार्यक्रमों का भी आय़ोजन किया जाएगा। इस सहयोग के माध्यम से अटल नवाचार मिशन और डसॉल्ट सिस्टम्स फाउंडेशन सांस्कृतिक विचार-विमर्श के लिए अंतर-देशीय सहयोग को प्रोत्साहन प्रदान करेगा।

SOURCE-PIB

 

बोहाग बिहु पक्षी गणना 2021

14 अप्रैल, 2021 को असम में बोहाग बिहु पक्षी गणना (Bohag Bihu Bird Count) शुरू हुई। बोहाग बिहु पक्षी गणना Bird Count of India (BCI) द्वारा शुरू की गई थी। BCI एक गैर-सरकारी संगठन है। यह पहली बार है जब BCI बोहाग बिहु पक्षी गणना शुरू कर रहा है।

बोहाग बिहू (Bohag Bihu)

बोहाग बिहू को Xaat Bihu भी कहा जाता है। यह असम में मनाया जाने वाला पारंपरिक त्योहार है। यह असमिया नए साल की शुरुआत का प्रतीक है। बोहाग असमिया कैलेंडर है। बोहाग के साथ रोंगाली बिहू (Rongali Bihu) की शुरुआत होती है। रोंगाली बिहू असम के तीन सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। अन्य दो त्योहार कटि बिहू (Kati Bihu) और कोंगाली बिहू (Kongali Bihu) हैं।

रोंगाली बिहू (Rongali Bihu)

रोंगाली बिहू के दौरान, सर्दियों के दौरान असम और इसके आसपास के क्षेत्रों में आने वाले पक्षियों की कई प्रवासी प्रजातियां अपने घरों के लिए वापस जाने लगती हैं।

महत्व

इस तरह की पक्षी गणना को आयोजित करना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में पक्षियों को निवास के नुकसान के कारण बढ़ते खतरों का सामना करना पड़ रहा है। State of India’s Birds, 2020 के अनुसार, निवास का नुकसान मुख्य रूप से मानव गतिविधियों, विषाक्त पदार्थों, शिकार इत्यादि के कारण होता है।

State of Birds 2020

स्टेट ऑफ़ बर्ड्स रिपोर्ट, 2020 के मुख्य निष्कर्ष निम्नलिखित हैं:

भारत में 867 पक्षी प्रजातियों में से 50% जनसंख्या में गिरावट दर्ज कर रहीं हैं।

2000 के बाद से पश्चिमी घाट में पक्षियों की संख्या में 75% की गिरावट आई है।

भारत में लगभग 101 पक्षी प्रजातियों को “उच्च चिंता” श्रेणी में, “निम्न चिंता श्रेणी” में 442 और “मध्यम चिंता वर्ग” में 319 को रखा गया है।

घरेलु गौरैया की जनसंख्या स्थिर है। हालांकि, बड़े शहरों में उनकी आबादी घट रही थी। घरेलु गौरैया को “दिल्ली का राज्य पक्षी” घोषित किया गया है।

घरेलु गौरैया की आबादी मुख्यतः शहरों में घटती हुई कीट आबादी के कारण घट रही है।

भारत में बस्टर्ड (गोडावण) की जनसंख्या में भारी गिरावट आ रही है। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, लेसर फ्लोरिकन, मैक्क्वीन्स बस्टर्ड और बंगाल फ्लोरिकन भी जनसंख्या में गिरावट से प्रभावित हैं।

SOURCE-GK.TODAY

 

करेंसी चेस्ट

करेंसी चेस्ट ऐसी जगहें हैं जहां RBI (भारतीय रिजर्व बैंक) बैंकों और एटीएम के लिए भेजे जाने वाले पैसे को रखता है। करेंसी चेस्ट विभिन्न बैंकों में स्थित हैं और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रशासित हैं।

हाल ही में करेंसी चेस्ट ख़बरों में क्यों है?

चंडीगढ़ में एक्सिस बैंक की करेंसी चेस्ट से एक प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड ने 4.04 करोड़ रुपये लूट लिए है। इसके चलते करेंसी चेस्ट सुर्खियों में आ गया है।

करेंसी चेस्ट क्या है? (What is Currency Chest?)

करेंसी चेस्ट ऐसी जगहें हैं, जहां RBI एटीएम और बैंकों के लिए पैसे जमा करता है। RBI के प्रतिनिधि समय-समय पर इन करेंसी चेस्ट का निरीक्षण करते हैं। ये करेंसी चेस्ट पूरे देश में बैंकों में रखे गए हैं। करेंसी चेस्ट में पैसा आरबीआई का है और स्ट्रांग रूम में करेंसी चेस्ट के बाहर रखा पैसा बैंक का है।

जब भी RBI नए करेंसी नोट छापता है, तो वह सबसे पहले इन करेंसी चेस्ट में पहुंचाता है। करेंसी चेस्ट रखने वाले बैंक फिर उन्हें अन्य बैंकों में वितरित करेंगे।

घाटे को कौन पूरा करेगा?

अब, आरबीआई को चोरी के कारण नुकसान होने का खतरा है। चेस्ट में रखा हुआ पूरा पैसा RBI का है। अब सवाल उठता है कि नुकसान कौन उठाएगा? करेंसी चेस्ट रखने वाले बैंक को घाटा उठाना चाहिए। बैंक को RBI को एक धोखाधड़ी निगरानी रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी।

करेंसी चेस्ट की सुरक्षा

RBI बैंक को सुरक्षा खर्चों की प्रतिपूर्ति करता है। इस प्रतिपूर्ति में एक बैंक से दूसरे बैंक में पैसे का परिवहन भी शामिल है। नकदी की सुरक्षा करना बैंकों की एकमात्र जिम्मेदारी है।

भारत में मुद्रा कैसे वितरित की जाती है?

भारत में RBI के 31 कार्यालय हैं। जब नई मुद्राएँ छपती हैं, तो RBI उन्हें इन कार्यालयों में भेजता है। फिर ये कार्यालय नोटों को करेंसी चेस्ट और छोटे सिक्के डिपो में भेजते हैं।

देश में 4,075 करेंसी चेस्ट हैं।

लगभग 3,746 बैंक छोटे सिक्का डिपो के रूप में कार्य करते हैं।

रायसीना डायलॉग

पीएम मोदी एक वीडियो संदेश के माध्यम से रायसीया डायलॉग (Raisina Dialogue) का उद्घाटन करेंगे। इस वार्ता के उद्घाटन सत्र में रवांडा के राष्ट्रपति पॉल कागमे (Paul Kagame) और डेनमार्क के प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन (Mette Frederiksen) भी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन (Scott Morrison) भी एक सत्र में सम्मेलन में भाग लेंगे।

थीम : #ViralWorld: Outbreaks, Outliers and Out of Control

मुख्य बिंदु

इस बार रायसीना डायलॉग 4 दिन तक आयोजित किया जाएगा, यह संवाद वर्चुअली आयोजित किया जायेगा।  इस इवेंट में स्वीडन के पूर्व प्रधानमंत्री कार्ल बिल्ड, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री एंथोनी एबॉट और न्यूजीलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री हेलेन क्लार्क भी हिस्सा लेंगे। इसके अलावा इसमें पुर्तगाल, स्लोवेनिया, रोमानिया, सिंगापुर, नाइजीरिया, जापान, इटली, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया, केन्या, चिली, मालदीव, ईरान, कतर और भूटान के विदेश मंत्री भी भाग लेंगे।

रायसीना डायलॉग (Raisina Dialogue)

रायसीना संवाद भारत के विदेश मंत्रालय और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (Observer Research Foundation) द्वारा हर साल नई दिल्ली में आयोजित किया जाता है। यह संवाद सिंगापुर में आयोजित किये जाने वाले शांगरी-ला संवाद (Shangri-La Dialogue) की तर्ज पर आयोजित किया गया है। “रायसीना डायलॉग” नाम रायसीना हिल पर रखा गया है, जो नई दिल्ली में स्थित है जहाँ पर राष्ट्रपति भवन भी है।

SOURCE-PIB

 

India Energy Dashboards

नीति आयोग ने हाल ही में India Energy Dashboards Version 2.0 लॉन्च किया है। यह देश में ऊर्जा के उपयोग, मूल्य निर्धारण, उत्पादन, वितरण से संबंधित आंकड़ों के लिए सिंगल विंडो प्रदान करेगा। यह केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय और कोयला नियंत्रक संगठन से डेटा प्रदान करेगा। इंडिया एनर्जी डैशबोर्ड वर्जन 1.0 को 2017 में लॉन्च किया गया था।

India Energy Dashboard Version 2.0 की मुख्य विशेषताएं

इंडिया एनर्जी डैशबोर्ड का नया संस्करण वित्तीय वर्ष 2005-06 और 2019-20 के बीच डेटा प्रदान करता है।

यह सुविधाजनक स्प्रैडशीट प्रारूपों में डेटा डाउनलोड करने की अनुमति देता है।

इसके अलावा, नया इंडिया एनर्जी डैशबोर्ड उप-वार्षिक आवृत्तियों में डेटा प्रदान करता है। इसमें सरकारी एजेंसियों के पोर्टलों का मासिक डेटा शामिल है। भारत में मासिक डेटा नियमित रूप से पेट्रोलियम, बिजली और प्राकृतिक गैस क्षेत्रों के लिए प्रकाशित किया जाता है।

इंडिया एनर्जी डैशबोर्डसौभाग्य, प्राप्ति, उजाला और विद्युत् प्रवाह जैसी योजनाओं से भी डेटा प्रदान करेगा।

उजाला (UJALA)

UJALA का अर्थ Unnat Jyoti by Affordable LEDs for All है। इस योजना को पीएम मोदी ने 2015 में लांच किया था। इसने बचत लैंप योजना की जगह ली है। UJALA को DELP भी कहा जाता है। DELP का अर्थ Domestic Efficient Lighting Programme है। इसका उद्देश्य सभी के लिए ऊर्जा के कुशल उपयोग को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत, बिजली वितरण कंपनियों को रियायती दरों पर एलईडी बल्ब वितरित किए गए। इस योजना का उद्देश्य 79 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करना है।

बिजली (उपभोक्ताओं के अधिकार) (संशोधन) नियम, 2021

विद्युत मंत्रालय ने हाल ही में एक ड्राफ्ट बिजली (उपभोक्ताओं के अधिकार) नियम, 2021 जारी किए हैं। ये नए नियम छत सौर प्रणाली की नेट मीटरिंग की अनुमति देते हैं।

नए नियम

नए नियमों में रूफ टॉप की नेट मीटरिंग के लिए 500 किलोवाट तक की अनुमति दी गई है।

निम्नलिखित परिभाषाएँ जोड़ी गईं:

ग्रॉस मीटरिंग का मतलब एक ऐसा मैकेनिज्म है जहां ग्रिड इंटरएक्टिव रूफटॉप सौर प्रणाली से उत्पन्न कुल सौर ऊर्जा और खपत की गई ऊर्जा का अलग-अलग हिसाब लगाया जाता है।

नेट मीटरिंग को उस मैकेनिज्म के रूप में परिभाषित किया गया है जहां ग्रिड इंटरएक्टिव रूफटॉप सोलर पीवी (फोटो वोल्टाइक) सिस्टम से सौर ऊर्जा ग्रिड को निर्यात की जाती है।

ये संशोधन बिजली (उपभोक्ताओं के अधिकार) नियम, 2020 में किए गए हैं। बिजली एक समवर्ती विषय है।

बिजली (उपभोक्ताओं का अधिकार) नियम, 2020

यह नियम मुख्य रूप से उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति के पहलुओं को कवर करते हैं। इसमें मुख्य रूप से मीटरिंग की व्यवस्था, वितरण लाइसेंस के दायित्व, नए कनेक्शन जारी करना, शिकायत निवारण, मौजूदा कनेक्शन के संशोधन और मुआवजा तंत्र शामिल हैं।

बिना मीटर के कोई कनेक्शन नहीं दिया जाएगा।

उपयोग किया जाने वाला मीटर प्रीपेमेंट मीटर या स्मार्ट प्रीपेमेंट मीटर होना चाहिए।

उपभोक्ता के पास बिल ऑफलाइन या ऑनलाइन भुगतान करने का विकल्प होगा।

एक prosumer को उपभोक्ता के समान अधिकार प्राप्त होंगे। Prosumer वह व्यक्ति होता है जो बिजली का उत्पादन और उपभोग करता है।

SOURCE-GK.TODAY

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