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Current Affair 15 October 2021

Current Affairs – 15 October, 2021

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी है।

प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कहा;

“मिसाइल मैन के रूप में विख्यात देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जी को उनकी जयंती पर सादर नमन। उन्होंने अपना जीवन भारत को सशक्त, समृद्ध और सामर्थ्यवान बनाने में समर्पित कर दिया। देशवासियों के लिए वे हमेशा प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।

“अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम (अंग्रेज़ी: A P J Abdul Kalam), जो मिसाइल मैन और जनता के राष्ट्रपति नाम से भी जाने जाते हैं, भारतीय गणतंत्र के ग्यारहवें निर्वाचित राष्ट्रपति थे। वे भारत के पूर्व राष्ट्रपति, जाने-माने वैज्ञानिक और अभियंता (इंजीनियर) के रूप में विख्यात थे। उन्होंने सिखाया जीवन में चाहें जैसे भी परिस्थिति क्यों न हो पर जब आप अपने सपने को पूरा करने की ठान लेते हैं तो उन्हें पूरा करके ही रहते हैं। अब्दुल कलाम मसऊदी के विचार आज भी युवा पीढ़ी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

इन्होंने मुख्य रूप से एक वैज्ञानिक और विज्ञान के व्यवस्थापक के रूप में चार दशकों तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) संभाला व भारत के नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम और सैन्य मिसाइल के विकास के प्रयासों में भी शामिल रहे। इन्हें बैलेस्टिक मिसाइल और प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी के विकास के कार्यों के लिए भारत में ‘मिसाइल मैन’ के रूप में जाना जाता है।

इन्होंने 1974 में भारत द्वारा पहले मूल परमाणु परीक्षण के बाद से दूसरी बार 1998 में भारत के पोखरान-द्वितीय परमाणु परीक्षण में एक निर्णायक, संगठनात्मक, तकनीकी और राजनैतिक भूमिका निभाई।

कलाम सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी व विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दोनों के समर्थन के साथ 2002 में भारत के राष्ट्रपति चुने गए। पांच वर्ष की अवधि की सेवा के बाद, वह शिक्षा, लेखन और सार्वजनिक सेवा के अपने नागरिक जीवन में लौट आए। इन्होंने भारत रत्न, भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त किये। कलाम ने साहित्यिक रूप से भी अपने विचारों को चार पुस्तकों में समाहित किया है, जो इस प्रकार हैं: ‘इण्डिया 2020 ए विज़न फ़ॉर द न्यू मिलेनियम’, ‘माई जर्नी’ तथा ‘इग्नाटिड माइंड्स-अनलीशिंग द पॉवर विदिन इंडिया’। इन पुस्तकों का कई भारतीय तथा विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। इस प्रकार यह भारत के एक विशिष्ट वैज्ञानिक थे, जिन्हें 40 से अधिक विश्वविद्यालयों और संस्थानों से डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्राप्त हो चुकी है।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.1 PRE

 

आयुध निर्माणी बोर्ड की सात नई रक्षा कंपनियां राष्ट्र को समर्पित

15 अक्टूबर 2021 को नई दिल्ली में ‘विजयादशमी’ के अवसर पर रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) की सात नई रक्षा कंपनियों को राष्ट्र को समर्पित किया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कार्यक्रम के दौरान वीडियो संबोधन दिया। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ भवन के कोठारी सभागार में आयोजित समारोह की अध्यक्षता की।

संचालन स्वायत्तता, दक्षता बढ़ाने और नई विकास क्षमता और नवाचार लाने के लिए, सरकार ने देश की रक्षा तैयारियों में आत्मनिर्भरता में सुधार के उपाय के रूप में ओएफबी को सरकारी विभाग से सात शत प्रतिशत सरकारी स्वामित्व वाली कॉर्पोरेट कंपनियों में बदलने का निर्णय लिया था। सात नई रक्षा कंपनियां हैं: मुनीशन्स इंडिया लिमिटेड (एमआईएल); आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (अवनी); एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (एडब्ल्यूई इंडिया); ट्रूप कम्फर्ट्स लिमिटेड (टीसीएल) (ट्रूप कम्फर्ट आइटम); यंत्र इंडिया लिमिटेड (वाईआईएल); इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड (आईओएल) और ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड (जीआईएल)। इन कंपनियों ने 01 अक्टूबर, 2021 से कारोबार शुरू कर दिया है।

अपने वीडियो संबोधन में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज विजयादशमी के शुभ अवसर और इस दिन अस्त्र-शस्त्र की पूजा करने की परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, भारत में हम शक्ति को सृजन के माध्यम के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा कि इसी भावना से देश सामर्थ्य की ओर बढ़ रहा है।

श्री नरेन्द्र मोदी ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि डॉ. कलाम ने एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया और कहा कि आयुध कारखानों के पुनर्गठन और सात कंपनियों के निर्माण से उनके मजबूत भारत के सपने को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि नई रक्षा कंपनियां भारत की आजादी के इस अमृत काल के दौरान देश के लिए एक नया भविष्य बनाने के लिए विभिन्न संकल्पों का हिस्सा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन कंपनियों को बनाने का निर्णय लंबे समय से अटका हुआ था। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये सात नई कंपनियां आने वाले समय में देश की सैन्य ताकत के लिए एक मजबूत आधार बनेंगी। भारतीय आयुध कारखानों के गौरवशाली अतीत का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद की अवधि में इन कंपनियों के उन्नयन की अनदेखी की गई, जिससे देश अपनी जरूरतों के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर हो गया। उन्होंने कहा, “ये 7 रक्षा कंपनियां इस स्थिति को बदलने में प्रमुख भूमिका निभाएंगी।”

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि ये नई कंपनियां ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के अनुरूप आयात को कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि 65,000 करोड़ रुपये से अधिक की ऑर्डर बुकिंग इन कंपनियों में देश के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री ने हाल के दिनों में की गई विभिन्न पहलों और सुधारों को रेखांकित किया, जिन्होंने रक्षा क्षेत्र में विश्वास, पारदर्शिता और प्रौद्योगिकी संचालित दृष्टिकोण पैदा किया है जैसा पहले कभी नहीं देखा गया। उन्होंने कहा कि आज निजी और सार्वजनिक क्षेत्र राष्ट्रीय सुरक्षा के मिशन में साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने नए दृष्टिकोण के उदाहरण के रूप में उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु रक्षा गलियारों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं और एमएसएमई के लिए नए अवसर उभर रहे हैं, देश हाल के वर्षों में हुए नीतिगत बदलावों का परिणाम देख रहा है। उन्होंने कहा, “पिछले पांच वर्षों में हमारा रक्षा निर्यात 325 प्रतिशत बढ़ा है।”

श्री नरेन्द्र मोदी ने उल्लेख किया कि हमारा लक्ष्य है कि हमारी कंपनियां न केवल अपने उत्पादों में विशेषज्ञता स्थापित करें बल्कि एक वैश्विक ब्रांड भी बनें। उन्होंने कहा कि जहां प्रतिस्पर्धी लागत हमारी ताकत है, वहीं गुणवत्ता और विश्वसनीयता हमारी पहचान होनी चाहिए। उन्होंने आगे उल्लेख किया कि 21वीं सदी में, किसी भी राष्ट्र या किसी कंपनी का विकास और ब्रांड मूल्य उसके अनुसंधान एवं विकास और नवाचार से निर्धारित होता है। उन्होंने नई कंपनियों से अपील की कि अनुसंधान और नवाचार उनकी कार्य संस्कृति का हिस्सा होना चाहिए, जिससे वह न केवल दुनिया की बड़ी कंपनियों की बराबरी करें बल्कि भविष्य की प्रौद्योगिकियों में अग्रणी भी बने। उन्होंने कहा कि यह पुनर्गठन नई कंपनियों के नवाचार को बढ़ाने और विशेषज्ञता को हासिल करने के लिए अधिक स्वायत्तता प्रदान करेगा साथ ही नई कंपनियों को ऐसी प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करेगा। उन्होंने स्टार्ट-अप कंपनियों से इन कंपनियों के माध्यम से एक दूसरे के अनुसंधान और विशेषज्ञता का लाभ उठाकर इस नई यात्रा का हिस्सा बनने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि सरकार ने इन नई कंपनियों को न केवल बेहतर उत्पादन वातावरण दिया है बल्कि कार्य-संबंधी पूर्ण स्वायत्तता भी दी है। उन्होंने दोहराया कि सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि कर्मचारियों के हितों की पूरी तरह से रक्षा की जाए।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

 

भारत-अमेरिका आर्थिक एवं वित्तीय भागीदारी वार्ता की 8वीं मंत्रिस्तरीय बैठक

भारत-अमेरिका आर्थिक एवं वित्तीय भागीदारी वार्ता की 8वीं मंत्रिस्तरीय बैठक आज वाशिंगटन डीसी में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण और संयुक्त राज्य अमेरिका के वित्त मंत्री डॉ. जेनेट येलेन ने की।

भारत-अमेरिका आर्थिक एवं वित्तीय साझेदारी की मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान, व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण व कोविड-19 महामारी से उबरने, वित्तीय नियामक और तकनीकी सहयोग, बहुपक्षीय संवाद, जलवायु वित्त तथा धन-शोधन रोधी तथा आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने (एएमएल/सीएफटी) समेत कई विषयों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने आपसी और वैश्विक आर्थिक मुद्दों को हल करने तथा सौहार्दपूर्ण रणनीतियों और समाधानों की दिशा में प्रयास करने के लिए द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय, दोनों मंचों पर सहयोग जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री और अमेरिका के वित्त मंत्री द्वारा संयुक्त वक्तव्य को अंगीकार करने के साथ बैठक का समापन हुआ।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

 

ग्लोबल हंगर रिपोर्ट 2021

वैश्विक भुखमरी सूचकांक(GHI) 2021 में भारत 116 देशों में 101वें स्थान पर अपनी जगह बना पाया है। यह पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से भी पीछे है। इससे पहले भारत 2020 में 94वें स्थान पर था लेकिन 2021 में वो सात पायदान नीचे खिसक गया है। सहायता कार्यों से जुड़ी आयरलैंड की एजेंसी कंसर्न वर्ल्डवाइड और जर्मनी का संगठन वेल्ट हंगर हिल्फ की संयुक्त रिपोर्ट में भारत में भूख के स्तर को ‘खतरनाक’ बताया गया है।

वहीं भारत के पड़ोसी देशों की बात करें तो इस रिपोर्ट में पड़ोसी देश नेपाल का 76वां स्थान है, बांग्लादेश (76), म्यांमार (71) और पाकिस्तान ने 92वां स्थान हासिल किया है। हालांकि इन देशों में भी भुखमरी की स्थिति चिंताजनक हैं, लेकिन भारत से अगर इनकी तुलना देखें तो ये सभी देश आगे नजर आ रहे हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान जैसे देशों ने अपने नागरिकों को भोजन उपलब्ध कराने में भारत से अच्छा प्रदर्शन किया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना काल में कोविड-19 से जुड़े प्रतिबंधों के चलते लोगों पर बुरा प्रभाव पड़ा है। यहां दुनिया भर में बच्चों की वेस्टिंग की दर सबसे ज्यादा है। 1998 और 2002 के बीच भारत में चाइल्ड वेस्टिंग की दर 17.1% से बढ़कर 2016 और 2020 के बीच 17.3 प्रतिशत हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने बाल मृत्यु दर, बाल स्टंटिंग की व्यापकता और अपर्याप्त भोजन के कारण अल्पपोषण की व्यापकता जैसे अन्य पैरामीटरों में अपने यहां सुधार दिखाया है। गौरतलब है कि भारत का जीएचआई स्कोर 2000 में 38.8 था, और 2012 और 2021 के बीच 28.8-27.5 पाया गया। जीएचआई स्कोर की गणना के लिए चार पैरामीटर पर नजर रखी जाती है, जिसमें कुपोषण, बच्चों की वृद्धि दर, अल्पपोषण और बाल मृत्यु से जुड़े आंकड़ें लिए जाते हैं। इस रिपोर्ट में चीन, ब्राजील और कुवैत सहित 18 देशों ने पांच से कम का जीएचआई स्कोर हासिल किया है और टॉप स्थान साझा किया है। जीएचआई की रिपोर्ट के अनुसार, भुखमरी के खिलाफ पूरी दुनिया की लड़ाई को खतरनाक तरीके से झटका लगा है। मौजूदा समय में अनुमानों के आधार पर, दुनिया और खास तौर पर 47 देश 2030 तक निम्न स्तर की भूख को प्राप्त करने में समर्थ नहीं होंगे।

SOURCE-JANSATTA

PAPERT-G.S.2

 

एनएचपीसी दुलहस्ती पावर स्टेशन और किशनगंगा पावर स्टेशन

केंद्रीय विद्युत, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री आर. के. सिंह ने आज केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के बांदीपोरा जिले के गुरेज में 330 मेगावाट की एनएचपीसी किशनगंगा बिजली स्टेशन के बांध स्थल का दौरा किया।

दुलहस्ती पावर स्टेशन चेनाब नदी पर आधारित है?

चंद्र नदी

पावर प्लांट चंद्रा नदी पर एक रन-ऑफ-द-रिवर प्रकार है, जो कि किश्तवाड़ क्षेत्र में हिमालय के एक बीहड़, पहाड़ी खंड और बड़े शहरों से कई सौ किलोमीटर की दूरी पर चेनाब नदी की एक सहायक नदी है।

दुलहस्ती पावर स्टेशन 390 मेगावाट (3 x 130 मेगावाट) क्षमता की जल संचय वाली रन आफ द रिवर स्कीम है, जो चेनाब नदी की जल विद्युत क्षमता का दोहन करती है। यह जम्मू व कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में स्थित है। इस पावर स्टेशन में 65 मी ऊंचा और 186 मीटर लंबा कंक्रीट बाँध, 7.46 मीटर व्यास एवं 10.586 किलोमीटर लम्बी हार्स-शू आकार की हेडरेस सुरंग, सर्ज शाफ्ट तथा प्रैशर शाफ्ट के साथ 3.65 मीटर व्यास एवं 93 मीटर लंबी 03 पेनस्टॉक हैं। 390 मेगावॉट की स्थापित क्षमता (130 मेगावाट की तीन इकाइयाँ) वाली इस भूमिगत पावर हाउस की सभी तीन इकाईयों को 207.5 मीटर के नेट रेटेड हैड पर संचालन तथा 90% डिपेंडेबल वर्ष में 95% मशीन उपलब्धता के साथ 1907 मिलियन यूनिट्स विद्युत ऊर्जा उत्पादन के लिए डिज़ाइन किया गया है। पावर स्टेशन के यूनिट संख्या-I व III को मार्च 2007 में और यूनिट संख्या-II को फरवरी 2007 में कमीशन किया गया। इस पावर स्टेशन से लाभान्वित होने वाले राज्य/केंद्र शासित प्रदेश उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, जम्मू व कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और चंडीगढ़ हैं।

किशनगंगा जलविद्युत संयंत्र

किशनगंगा जलविद्युत संयन्त्र किशनगंगा नदी पर बांध बनाकर जलविद्युत उत्पन्न की जाती है। यह जम्मू कश्मीर में बन्दीपुर से पाँच किमी उत्तर में स्थित है। इसकी स्थापित क्षमता ३३० मेगावट बिजली पैदा करने की है। इस परियोजना पर २००७ में कार्य आरम्भ हुआ और २०१६ में इसके पूरा होने की सम्भावना है।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.1

 

गृह मंत्रालय ने बढ़ाई BSF की शक्तियां

गृह मंत्रालय ने BSF की शक्तियों में वृद्धि की है। इन बढ़ी हुई शक्ति के तहत अधिकारियों के पास तलाशी और गिरफ्तारी की शक्ति होगी।

बढ़ी हुई शक्तियाँ

  • अब BSF के अधिकारियों के पास पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमा साझा करने वाले तीन नए राज्यों में 50 किमी की सीमा तक जब्ती की शक्ति भी होगी।
  • उन्हें दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), पासपोर्ट अधिनियम और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम के तहत यह कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है।
  • BSF अधिकारी पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम राज्यों में व्यापक क्षेत्र में तलाशी और गिरफ्तारी करने में सक्षम होंगे।
  • उक्त राज्यों में BSF को राज्य पुलिस की तरह ही तलाशी और गिरफ्तारी का अधिकार होगा।
  • उनके पास मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा और लद्दाख में तलाशी लेने और गिरफ्तार करने का भी अधिकार है।

यह फैसला क्यों लिया गया?

  • गृह मंत्रालय के अनुसार, सीमा पार से ड्रोन के द्वारा हथियारों की खेप भेजने की कारण BSF के अधिकार क्षेत्र का विस्तार करने का निर्णय लिया गया है।
  • इस निर्णय से 10 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
  • हालांकि, इसमें प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दों को उठाने की संभावना है।

इतिहास

1965 तक पाकिस्तान के साथ भारत की सीमाओं की सुरक्षा राज्य सशस्त्र पुलिस बटालियन द्वारा की जाती थी। पाकिस्तान ने कच्छ में 09 अप्रैल 1965 को सरदार पोस्ट, चार बेट एवं बरिया बेट पर हमला किया। इस हमले से यह बात सामने आई कि राज्य सशस्त्र पुलिस बटालियन सशस्त्र आक्रमण का सामना करने में अपर्याप्त है जिसके कारण भारत सरकार को केंद्र के अधीन एक विशेष सीमा सुरक्षा बल की जरूरत महसूस हुई जो सशस्त्र और प्रशिक्षित बल होगा और पाकिस्तान सीमा के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी करेगा। सचिवों की समिति की सिफारिशों के परिणामस्वरूप, सीमा सुरक्षा बल 1 दिसम्बर 1965 को अस्तित्व में आया और श्री के एफ रूस्तमजी इसके पहले प्रमुख और संस्थापक थे। 1965 में कुल 25 बटालियन के साथ सीमा सुरक्षा बल का गठन हुआ और समय के साथ पंजाब, जम्मू व कश्मीर, नार्थ ईस्ट में आतंकवाद की रोकथाम के लिए सीमा सुरक्षा बल का विस्तार होता रहा। वर्तमान समय में सीमा सुरक्षा बल की 192 बटालियन (03 एन.डी.आर.एफ बटालियन सहित) और 07 आर्टी रेजिमेंट भारत – पाकिस्तान और भारत – बंगलादेश की अन्तराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा में तैनात है। इसके अतिरिक्त सीमा सुरक्षा बल कश्मीर घाटी में घुसपैठ, नार्थ ईस्ट क्षेत्र में आन्तरिक सुरक्षा, उडीसा एवं छत्तीसगढ में नक्सली विरोधी अभियान और भारत – पाकिस्तान एवं भारत – बंगलादेश अन्तराष्ट्रीय सीमा पर एकीकृत जांच चौकी में तैनात है।

सी.सु.बल की भूमिका

शान्तिकालीन

  • सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के बीच सुरक्षा की भावना को बढावा देना।
  • वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान, सीमा सुरक्षा बल पर्वतों की चोटियों पर आर्मी के साथ सामंजस्य बिठाते हुए देश की सुरक्षा में तैनात रही। सीमा के आर-पार अपराधों की रोकथाम तथा भारतीय क्षेत्र में अनाधिकृत प्रवेश एवं निकासी को प्रतिबंधित करना।
  • तस्करी एवं अन्य अवैध गतिविधियों की रोकथाम।

युद्ध के समय

  • कम खतरे वाले सेक्टरों में तब तक मोर्चा संभाले रखना जब तक किसी सेक्टर विशेष में तेज हमला शुरू न हो जाए, और यह महसूस किया जाए कि वहां की स्थिति से निपटने में सीमा सुरक्षा बल समर्थ है।
  • महत्वपूर्ण संस्थानों विशेषतया हवाई अड्डों को दुश्मन के कमान्डो/छतरीधारी सैनिकों या हवाई हमलों से बचाना।
  • सशस्त्र बलों की समग्र योजना के अंतर्गत शत्रु के अर्द्ध सैनिक बलों या अनियमित सैनिकों के खिलाफ सीमित आक्रामक कार्रवाई।
  • छापे सहित आसूचना से संबंधित विशेष कार्य निष्पादित करना।
  • जिम्मेदारी वाले ऐसे क्षेत्र में मार्गदर्शक के रूप में कार्य करना जहां के रास्ते ज्ञात हो।
  • सेना के नियंत्रणाधीन शत्रु के क्षेत्र में कानून और व्यवस्था की स्थिति बनाए रखना।
  • युद्ध बंदियों के पिंजडों की सुरक्षा करना।
  • शरणार्थियों के नियंत्रण में सहायता।
  • विनिर्दिष्ट क्षेत्र में घुसपैठ विरोधी ड्यूटी।

क्या आप जानते हैं?

  • सीमा सुरक्षा बल प्रत्येक वर्ष यू.एन. मिशन में अपने कार्मिकों को भेजकर इस अभियान में सहयोग करती है।
  • वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान, सीमा सुरक्षा बल पर्वतों की चोटियों पर आर्मी के साथ सामंजस्य बिठाते हुए देश की सुरक्षा में तैनात रही।
  • सीमा सुरक्षा बल के कार्मिक विगत 10 वर्षो से मणिपुर में आंतरिक सुरक्षा ड्यूटी में तैनात हैं तथा इन क्षेत्रों में अलगाववाद के विरूद्ध सफलतापूर्वक कार्रवाई कर रहे है।
  • सीमा सुरक्षा बल विगत दस वर्षो से छत्तीसगढ एवं उडीसा में नक्सल विरोधी अभियान में तैनात है एवं सफलतापूर्वक इस क्षेत्रों को नक्सलियों की गिरफ्त से आजाद किया जा रहा है।
  • 26 जनवरी 2001 को गुजरात में आये भूकंप के दौरान सीमा सुरक्षा ने सबसे पहले पहुँच कर व्यथित लोगों की सहायता की थी।
  • सीमा सुरक्षा बल प्रसिद्ध करतारपुर कोरिडोर पर सुरक्षा कार्य देख रही है।
  • सीमा सुरक्षा बल विभिन्न आई.सी.पी. व एल.सी.एस. पर मुस्तैदी से तैनात है।
  • सीमा सुरक्षा बल ने कोविड महामारी के समय सीमा पर रहने वाले लोगों को जागरूक किया व उन्हें सिविक एक्सन प्रोग्राम के तहत जरूरी सहायता प्रदान की।
  • प्राकृतिक आपदाओं के समय सीमा सुरक्षा बल अपने तैनाती के इलाकों में सहायता उपलब्ध कराती है जैसे कि कश्मीर बाढ 2014, केरला बाढ 2018 एवं केदारनाथ त्रास्दी 2013।

SOURCE-DANIK JAGRAN

PAPER-G.S.3

 

भारत का प्लास्टिक कचरा रीसाइकिलिंग लक्ष्य

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने “प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016” के तहत विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी (Extended Producer Responsibility – EPR) को विनियमित करने के लिए एक मसौदा अधिसूचना जारी की है।

मुख्य बिंदु

  • इस मसौदे में प्रावधान है कि कचरे की मात्रा का प्रबंधन उत्पादकों, ब्रांड मालिकों और आयातकों को करना होगा, जो पूरे भारत में प्लास्टिक पैकेजिंग कचरा पैदा करते हैं।
  • जब मसौदा अधिसूचना पारित हो जाएगी, यह तुरंत प्रभाव में आ जाएगी।

विस्तारित निर्माता उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility – EPR)

EPR का अर्थ है उत्पाद और प्लास्टिक पैकेजिंग के जीवन के अंत तक पर्यावरण के अनुकूल प्रबंधन के लिए निर्माता की जिम्मेदारी। लोग और हितधारक 60 दिनों के भीतर पर्यावरण मंत्रालय को मसौदे पर आपत्ति या सुझाव प्रस्तुत कर सकते हैं।

प्लास्टिक पैकेजिंग की तीन श्रेणियां

EPR में प्लास्टिक पैकेजिंग की निम्नलिखित श्रेणियां शामिल हैं:

  1. कठोर प्लास्टिक पैकेजिंग
  2. एकल परत या बहुपरत की लचीली प्लास्टिक पैकेजिंग
  3. प्लास्टिक शीट, कैरी बैग, प्लास्टिक पाउच
  4. बहुपरत प्लास्टिक पैकेजिंग।

मसौदे के अन्य प्रावधान

  • इस ड्राफ्ट के मुताबिक 2021-22 में, प्लास्टिक पैकेजिंग कचरे के उत्पादकों को मीट्रिक टन में ‘Q1’ कचरे का 35% प्रबंधन करना आवश्यक है।
  • उत्पादकों का EPR लक्ष्य 2022-23 में बढ़कर 70% हो जाएगा, जबकि 2023-24 के बाद यह 100% होगा।
  • इसी तरह के EPR लक्ष्य आयातकों और ब्रांड मालिकों के लिए लागू होंगे।

SOURCE-GK TODAY

PAPER-G.S.3