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Current Affair 2 June 2021

2 June Current Affairs

भारत और मालदीव के बीच समझौता

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल को भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय तथा मालदीव सरकार के राष्ट्रीय योजना, आवास और अवसंरचना मंत्रालय के बीच टिकाऊ शहरी विकास के क्षेत्र में सहयोग के लिए हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के बारे में जानकारी दी गई। इस एमओयू पर फरवरी, 2021 में हस्ताक्षर किए गए थे।

एमओयू के अनुरूप सहयोग के लिए कार्यक्रमों की कार्यनीति बनाने तथा उन्हें कार्यान्वित करने के लिए एक संयुक्त कार्यसमूह (जेडब्ल्यूजी) का गठन किया जाएगा। संयुक्त कार्यसमूह की बैठक साल में एक बार बारी-बारी से मालदीव तथा भारत में होगी।

लाभ:

एमओयू दोनों देशो के बीच टिकाऊ शहरी विकास के क्षेत्र में मजबूत, गहरे तथा दीर्घकालिक द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देगा। एमओयू से शहरी नियोजन, स्मार्टसिटी विकास, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, किफायती आवासन, शहरी हरित गतिशीलता, शहरी मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सहित टिकाऊ शहरी विकास के क्षेत्र में रोजगार के सृजित होने की उम्मीद है।

विवरण:

एमओयू अनुबंध करने वाले दोनों पक्षों द्वारा हस्ताक्षर करने की तारीख अर्थात 20 फरवरी, 2021 से प्रभावी है तथा अनिश्चित अवधि तक लागू रहेगा।

एमओयू का उद्देश्य शहरी नियोजन, स्मार्टसिटी विकास, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, किफायती आवासन, शहरी हरित गतिशीलता, शहरी मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सहित टिकाऊ शहरी विकास के क्षेत्र में तथा अनुबंध करने वाले पक्षों द्वारा परस्पर सहमत किसी अन्य संबंधित क्षेत्र में भारत-मालदीव तकनीकी सहयोग को सुगम और सुदृढ़ बनाना है।

SOURCE-PIB

 

8 नई फ्लाइंग ट्रेनिंग अकादमियां

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) की उदार उड़ान प्रशिक्षण संगठन (एफटीओ) नीति के तहत भारत को 8 नई उड़ान प्रशिक्षण अकादमियां मिलने वाली हैं। ये अकादमियांबेलगावी, जलगांव, कलबुर्गी, खजुराहो और लीलाबाड़ी में स्थापित की जाएंगी। इन 8एफटीओ की स्थापना का उद्देश्य भारत को वैश्विक उड़ान प्रशिक्षण केंद्र बनाना और विदेश में स्थित एफटीओ में भारतीय कैडेटों के पलायन को रोकना है। इसके अतिरिक्त, इन एफटीओ को भारत के पड़ोसी देशों में कैडेटों की उड़ान प्रशिक्षण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भी डिजाइन किया जाएगा।

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) टीम की दृढ़ता और दृढ़ संकल्प इस बात से साबित होती है कि वह कोविड-19 की दूसरी लहर के कारण खड़ी हुई चुनौती के बावजूद बोली प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में सफल रही। इन पांच हवाई अड्डों का चयन बेहद सावधानीपूर्वक किया गया है। इन जगहों पर मौसम और नागरिक/सैन्य हवाई यातायात के कारण न्यूनतम व्यवधान रहता है। यह पहल भारतीय उड़ान प्रशिक्षण क्षेत्र को आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत अधिक आत्मनिर्भर बनने में मदद करेगी।

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने नवंबर 2020 में इसके लिए बोलियां आमंत्रित की थीं। 31 मई 2021 को चयनित हुए बोलीदाताओं को अवार्डलेटर जारी किए गए। इसके तहत एशिया-पैसिफिक, जेटसर्व, रेडबर्ड, सम्वर्धन और स्काईनेक्स का चयन हुआ। संभावित बोलीदाताओं के लिए निर्धारित मापदंडों में विमानन सुरक्षा पहलुओं, नियामक तंत्र, मानवयुक्त विमानों पर प्रशिक्षण पायलटों के क्षेत्र में अनुभव, उपकरण, प्रशिक्षकों की उपलब्धता आदि शामिल हैं। एफटीओ को बोलीदाताओं के लिए आकर्षक बनाने के लिए, एएआई ने न्यूनतम वार्षिक किराये को काफी कम कर 15 लाख रुपये तक कर दिया था। इसके अलावा, इन उपक्रमों को व्यवसाय के अनुकूल बनाने के लिए एयरपोर्ट रॉयल्टी को भी खत्म कर दिया गया था।

 

सतत विकास लक्ष्य भारत सूचकांक

भारत के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) सूचकांक का तीसरा संस्करण 3 जून, 2021 को नीति आयोग द्वारा जारी किया जाएगा। पहली बार दिसंबर 2018 में जारी किया गया  यह सूचकांक देश में एसडीजी पर प्रगति की निगरानी के लिए प्राथमिक उपकरण बन गया है और साथ ही साथ इसने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वैश्विक लक्ष्यों पर रैंकिंग देकर उनके बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार, नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. विनोद पॉल, नीति आयोग के सीईओ श्री अमिताभ कांत और नीति आयोग की सलाहकार (एसडीजी) सुश्री संयुक्ता समद्दर की उपस्थिति में एसडीजी इंडिया इंडेक्स और डैशबोर्ड, 2020-21 जारी करेंगे। नीति आयोग द्वारा निर्मित और विकसित इस सूचकांक की तैयारी प्राथमिक हितधारकों – राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों; भारत में संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाली उसकी एजेंसियों, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) और प्रमुख केंद्रीय मंत्रालयों के साथ व्यापक परामर्श के बाद की जाती है।

एसडीजी इंडिया इंडेक्स और डैशबोर्ड, 2020-21: सक्रियता के दशक में भागीदारी

भारत में संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से विकसित यह सूचकांक वैश्विक लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में अब तक राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर हुई प्रगति का मुल्यांकन करता है और यह स्थायित्व, दृढ़ता और सहयोग के संदेश को आगे बढाने में सफल रहा है I 2030 तक के लिए निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में अब तक एक तिहाई यात्रा कर चुके इन प्रयासों के बाद सूचकांक की यह रिपोर्ट सहभागिता के महत्व पर केन्द्रित है और इसका शीर्षक है: ‘’एसडीजी भारत सूचकांक और डैशबोर्ड 2020-21 : सक्रियता के दशक में भागीदारी’’।

हर नए संस्करण में कार्य निष्पादन में उत्कृष्टता के स्तर का निर्धारण करने और अब तक हुई प्रगति का आकलन करने के अलावा केंद्र और राज्यों से मिले आंकड़ों को अद्यतन रखने का प्रयास किया जाता है. वर्ष 2018-19 में जाई पहले संस्करण में 13, उद्देश्यों, 39 लक्ष्यों और 62 सूचकों का विवरण था, जबकि दूसरे संस्करण में 17 उद्देश्य, 54 लक्ष्य और 100 सूचक थे। तीसरे संस्करण में 17 उद्देश्य, 70 लक्ष्य और 115 सूचक शामिल किए गए हैं।

कार्यप्रणाली और प्रक्रिया

सूचकांक का निर्माण और आगामी कार्यप्रणाली एसडीजी पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रदर्शन को मापने और उन्हें रैंकिंग देने के केंद्रीय उद्देश्यों का प्रतीक है; ये उन क्षेत्रों की पहचान करने में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का समर्थन करता है जिन पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है; और यह उनके बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है। सूचकांक अनुमान 17 उद्देश्यों के गुणात्मक मूल्यांकन के साथ पहले 16 उद्देश्यों के लिए संकेतकों से संबंधित डेटा पर आधारित है। लक्ष्य निर्धारण और अंक के सामान्यीकरण की तकनीकी प्रक्रिया विश्व स्तर पर स्थापित पद्धति का पालन करती है। जहां लक्ष्य निर्धारण प्रत्येक संकेतक के लिए लक्ष्य से दूरी की माप को सक्षम बनाता है, सकारात्मक और नकारात्मक संकेतकों के सामान्यीकरण की प्रक्रिया राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए लक्ष्य के अनुसार अंक की तुलना और अनुमान लगाने में मदद करती है। 2030 एजेंडा की अविभाज्य प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, प्रत्येक लक्ष्य को समान महत्व देकर राज्य का समग्र अंक प्राप्त किया जाता है।

संकेतकों का चयन सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, केंद्रीय मंत्रालयों और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के हितधारकों के साथ करीबी समन्वय में की गई परामर्श प्रक्रिया से पहले होता है। चयन प्रक्रिया को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे जाने वाले संकेतकों की मसौदा सूची पर टिप्पणियों और सुझावों द्वारा सूचित किया जाता है। इस स्थानीयकरण उपकरण के आवश्यक हितधारक और दर्शकों के रूप में, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश स्थानीय अंतर्दृष्टि और जमीनी स्तर के अनुभव के साथ प्रतिक्रिया प्रक्रिया को समृद्ध करके सूचकांक को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सूचकांक राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप होने के साथ 2030 एजेंडा के तहत वैश्विक लक्ष्यों की व्यापक प्रकृति की अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। सूचकांक की प्रमापीय प्रकृति स्वास्थ्य, शिक्षा, लिंग, आर्थिक विकास, संस्थानों, जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण सहित लक्ष्यों की विस्तृत प्रकृति पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रगति का आकलन करने का एक नीति उपकरण बन गयी है। राज्यों पर 15वें वित्त आयोग की मात्रा को सूचित करने से लेकर इन्वेस्ट इंडिया के एसडीजी निवेशक मानचित्र तक, सूचकांक देश में एसडीजी एजेंडा चलाने में भी सफल रहा है, और इसके लिए उसने राज्य एसडीजी दृष्टि पत्रों एवं रोडमैप, राज्य और जिला संकेतक संरचना को प्रोत्साहित किया है तथा मजबूत समीक्षा और अनुवर्ती प्रणालियों के गठन में मदद की है।

नीति आयोग को राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तर पर एसडीजी को अपनाने और निगरानी करने की प्रक्रिया का समन्वय करने का अधिकार है। एसडीजी इंडिया इंडेक्स और डैशबोर्ड राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण को लेकर अपनी प्रतिबद्धता को मूर्त रूप देने और एसडीजी ढांचे के तहत प्रगति की निगरानी में सुधार के लिए निरंतर प्रयास करने में नीति आयोग के प्रयासों का प्रतिनिधित्व करता है।

SOURCE-PIB

 

‘SWASTIIK’

CSIR-National Chemical Laboratory (CSIR-NCL), पुणे ने प्राकृतिक तेलों का उपयोग करके पानी कीटाणुरहित करने के लिए SWASTIIK नामक एक नई तकनीक शुरू की है। इसे इसलिए लॉन्च किया गया था, क्योंकि जल जनित बीमारियों ने भारत में बीमारियों का बोझ बढ़ा दिया है।

SWASTIIK

पानी से होने वाली बीमारियों का कारण बनने वाले रोगजनकसूक्ष्मजीवों को हटाने के लिए पानी का कीटाणुशोधन आवश्यक है। लेकिन, पानी को कीटाणुरहित करने के लिए क्लोरीनीकरण जैसे रासायनिक तरीके हानिकारक या कार्सिनोजेनिक उपोत्पाद उत्पन्न करते हैं।

इस प्रकार, SWASTIIK तकनीक विकसित की गई जो दबाव में कमी के परिणामस्वरूप तरल को उबालती है। यह विधि पानी कीटाणुरहित करने के लिए रोगाणुरोधी गुणों वाले प्राकृतिक तेलों का उपयोग करती है।

पृष्ठभूमि

यह तकनीक राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (National Jal Jeevan Mission – NJJM) की पृष्ठभूमि में विकसित की गई थी, जिसने हाल ही में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पानी की गुणवत्ता की निगरानी और सर्वेक्षण करने और बढ़ते कोविड-19 मामलों के बीच पीने योग्य पानी सुनिश्चित करने के लिए एक एडवाइजरी जारी की थी।

स्वास्तिक प्रौद्योगिकी (SWASTIIK Technology)

यह विधि सस्ते में हानिकारक बैक्टीरिया और एंटीबायोटिक प्रतिरोधी उपभेदों को खत्म कर सकती है। यह आयुर्वेद के भारतीय पारंपरिक ज्ञान को पानी कीटाणुरहित करने और प्राकृतिक तेलों के संभावित स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने के लिए एकीकृत करती है। यह हाइड्रोडायनामिककेविटेशन; पानी कीटाणुरहित करने के लिए प्राकृतिक तेल और पौधों के अर्क जैसे प्राकृतिक संसाधनों के साथ रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और रासायनिक इंजीनियरिंग का उपयोग करती है।

SOURCE-GK TODAY

 

मॉडलटेनेंसीएक्ट

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए कानून बनाकर या मौजूदा रेंटल कानूनों में आवश्यकतानुसार संशोधन करके अनुकूलन के लिए “मॉडलटेनेंसीएक्ट” को मंजूरी दे दी है।

मुख्य बिंदु

यह अधिनियम भारत में किराये के आवास पर कानूनी ढांचे के पुनर्निर्माण में मदद करेगा जो बदले में समग्र विकास को बढ़ावा देगा।एक जीवंत, सतत और समावेशीकिराये के आवास बाजार बनाने के उद्देश्य से यह अधिनियम पारित किया गया था।यह सभी आय समूहों के लिए पर्याप्त किराये के आवास स्टॉक बनाने में मदद करेगा और बेघरों के मुद्दे को संबोधित करेगा।यह किराये के आवास को औपचारिक बाजार की ओर स्थानांतरित करके संस्थागतकरण को सक्षम करेगा।

यह किराये के आवास के प्रयोजनों के लिए खाली मकानों को खोलने की सुविधा प्रदान करता है और एक व्यवसाय मॉडल के रूप में किराये के आवास में निजी भागीदारी को बढ़ावा देता है। इससे आवास की भारी कमी को दूर करने में मदद मिलेगी।

मॉडलटेनेंसीएक्ट क्या है?

मॉडलकिरायेदारी अधिनियम, 2019 भारत में एक किरायेदारी कानून है, इसे किरायेदारी बाजार के पुनर्निर्माण के लिए डिज़ाइन किया गया था। इस अधिनियम के निर्माण की घोषणा पहली बार 2019 के बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मलासीतारमण ने की थी। यह भारत के पुराने किराये से सम्बन्धी कानूनों को बदलने और आवास की कम उपलब्धता को हल करने का प्रयास करता है। इस अधिनियम “2022 तक सभी के लिए आवास” के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा।

 

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग

जस्टिस (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार मिश्रा को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है। जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीश रह चुके हैं। इससे पहले वे कलकत्ता उच्च न्यायालय और राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश भी रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में भी न्यायधीश के रूप में कार्य किया है।

जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा (Arun Kumar Mishra)

अरुण कुमार मिश्रा का जन्म 3 सितम्बर, 1955 को हुआ था। उनके पिताजी हरगोविंदमिश्रा मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायधीश थे। अरुण कुमार मिश्रा ने अपने करियर की शुरुआत में ग्वालियर में कार्य किया। 25अक्टूबर, 1999 में उन्हें मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में अतिरिक्त न्यायधीश नियुक्त किया गया था। बाद में 24अक्टूबर, 2001 को उन्हें स्थायी न्यायधीश नियुक्त किया गया। 1 नवम्बर, 2010 को वे राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायधीश बने थे। 14 दिसम्बर, 2012 में उन्हें कलकत्ता उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायधीश नियुक्त किया गया था। उसके बाद वे भारत के उच्च न्यायालय के न्यायधीश बने।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission – NHRC)

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एक संवैधानिक निकाय है, इसका गठन 12अक्टूबर, 1993 को किया गया था। यह भारत में लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा व संवर्धन के लिए काम करता है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। इसका आदर्श वाक्य ‘सर्वेभवन्तुसुखिनः’ है

SOURCE-GK TODAY

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