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Current Affair 20 August 2021

Current Affairs – 20 August, 2021

ओणम

भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविंद ने ओणम की पूर्व संध्या पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में राष्ट्रपति ने कहा-

‘ओणम के पावन अवसर पर, मैं अपने सभी देशवासियों, विशेष रूप से देश और विदेश में रहने वाले केरल के भाइयों-बहनों को बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।

खेतों में नई फसल की उपज के उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला यह त्योहार, किसानों के अथक परिश्रम और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता को दर्शाता है। यह त्योहार समाज में समरसता, प्रेम और भाईचारे का संदेश भी देता है।

आइए इस अवसर पर, हम सब मिलकर देश की प्रगति और समृद्धि के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ने का संकल्प लें।’

ओणम केरल का एक प्रमुख त्योहार है। ओणम केरल का एक राष्ट्रीय पर्व भी है। ओणम का उत्सव सितम्बर में राजा महाबली के स्वागत में प्रति वर्ष आयोजित किया जाता है जो दस दिनों तक चलता है। उत्सव त्रिक्काकरा (कोच्ची के पास)  केरल के एक मात्र वामन मंदिर से प्रारंभ होता है। ओणम में प्रत्येक  घर के आँगन में फूलों की पंखुड़ियों से सुन्दर सुन्दर रंगोलिया (पूकलम) डाली जाती हैं। युवतियां  उन रंगोलियों के चारों तरफ वृत्त बनाकर उल्लास पूर्वक नृत्य (तिरुवाथिरा कलि) करती हैं। इस पूकलम का प्रारंभिक स्वरुप पहले (अथम के दिन) तो छोटा होता है परन्तु हर रोज इसमें एक और वृत्त फूलों का बढ़ा दिया जाता है। इस तरह बढ़ते बढ़ते दसवें दिन (थिरुवोणम)  यह पूकलम वृहत आकार धारण कर लेता है। इस पूकलम के बीच त्रिक्काकरप्पन (वामन अवतार में विष्णु), राजा महाबली तथा उसके अंग  रक्षकों की प्रतिष्ठा होती है जो कच्ची मिटटी से बनायीं जाती है। ओणम मैं नोका दौड जैसे खेलों का आयोजन भी होता है। ओणम एक सम्पूर्णता से भरा हुआ त्योहार है जो सभी के घरों को ख़ुशहाली से भर देता है।

ओणम पर्व से जुड़ी कथा (Onam Festival Story in hindi) –

महाबली, पहलाद के पोते थे। पहलाद जो असुर हिरनकश्यप के बेटे थे, लेकिन फिर भी वे विष्णु के भक्त थे। अपने दादा की तरह महाबली भी बचपन से ही विष्णु भक्त थे। समय के साथ महाबली बड़े होते गए और उनका साम्राज्य विशाल होते चला गया। वे एक बहुत अच्छे, पराक्रमी, न्यायप्रिय, दानी, प्रजा का भला सोचने वाले रजा थे। महाबली असुर होने के बाद भी धरती एवं स्वर्ग पर राज्य किया करते थे। धरती पर उनकी प्रजा उनसे अत्याधिक प्रसन्न रहती थी, वे अपने राजा को भगवान् के बराबर दर्जा दिया करते थे। इसके साथ ही महाबली में घमंड भी कहीं न कहीं आने लगा था। ब्रह्मांड में बढ़ती असुरी शक्ति को देख बाकि देवी देवता घबरा गए, उन्होंने इसके लिए विष्णु जी की मदद मांगी। विष्णु जी इसके लिए मान जाते है।

विष्णु जी महाबली को सबक सिखाने के लिए, सभी देवी देवताओं की मदद के लिए माता अदिति के बेटे के रूप में ‘वामन’ बन कर जन्म लेते है। ये विष्णु जी का पांचवां अवतार होते है। एक बार महाबली इंद्र से अपने सबसे ताकतवर शस्त्र को बचाने के लिए, नर्मदा नदी के किनारे अश्व्मेव यज्ञ करते है। इस यज्ञ की सफलता के बाद तीनों लोकों में असुर शक्ति और अधिक ताकतवर हो जाती। महाबली बोलते है, इस यज्ञ के दौरान उनसे जो कोई जो कुछ मांगेगा उसे दे दिया जायेगा। इस बात को सुन वामन इस यज्ञ शाला में आते है। ब्राह्मण के बेटे होने के कारण महाबली उन्हें पूरे सम्मान के साथ अंदर लाता है। महाबली वामन से बोलता है कि वो उनकी किस प्रकार सेवा कर सकता है, उन्हें उपहार में क्या दे सकता है। वामन मुस्कराते हुए कहते है, मुझे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए, बस मुझे तो 3 डग जमीन दे दो।

ये बात सुन महाबली के गुरु समझ जाते है कि ये कोई साधारण बालक नहीं है, वे महाबली को उनकी इच्छा पूरी न करने को कहते है। लेकिन महाबली एक अच्छे राजा थे, वे अपने वचनों के पक्के थे, उन्होंने वामन को हाँ कर दिया। महाबली वामन को अपनी इच्छा अनुसार भूमि लेने के लिए बोलते है। ये बात सुन वामन अपने विशाल रूप में आ जाते है। उनके पहले कदम में सारी धरती समां जाती है, उनके दुसरे कदम में स्वर्गलोक आ जाता है। अब उनके तीसरे कदम के लिए राजा के पास कुछ नहीं होता है, तो अपने वचन को पूरा करने के लिए, राजा अपना सर वामन के पैर के नीचे रख देते है। ऐसा करते ही, राजा धरती में पाताललोक में समां जाते है। पाताललोक में जाने से पहले महाबली से एक इच्छा पूछी जाती है। महाबली विष्णु जी से मांगते है कि हर साल धरती में ओणम का त्यौहार उनकी याद में मनाया जाए, और उन्हें इस दिन धरती में आने की अनुमति दी जाये, ताकि वे यहाँ आकर अपनी प्रजा से मिलकर, उनके सुख दुःख को जान सकें।

ओणम मनाने का तरीका (Onam festival celebrations Kerala) –

  • ओणम त्यौहार की मुख्य धूम कोच्ची के थ्रिक्कारा मंदिर में रहती है। इस मंदिर में ओणम के पर्व पर विशेष आयोजन होता है, जिसे देखने देश विदेश से वहां लोग पहुँचते है। इस मंदिर में पुरे दस दिन एक भव्य आयोजन होता है, नाच गाना, पूजा आरती, मेला, शोपिंग यहाँ की विशेषताएं है। इस जगह पर तरह तरह की प्रतियोगिताएं भी होती है, जिसमें लोग बढचढ कर हिस्सा लेते है।
  • ओणम के दस दिन के त्यौहार में पहले दिन अन्थं होता है, जिस दिन से ओणम की तैयारियां चारों ओर शुरू हो जाती है। ओणम के लिए घर की साफ सफाई चालू हो जाती है, बाजार मुख्य रूप से सज जाते है। चारों तरफ त्यौहार का मौहोल बन जाता है।
  • पूक्कालम फूलों का कालीन विशेष रूप से ओणम में तैयार किया जाता है। इसे कई तरह के फूलों से तैयार किया जाता है। अन्थं से थिरुवोनम दिन तक इसे बनाया जाता है। ओणम के दौरान पूक्कालम बनाने की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती है।
  • मार्किट में किसानों के लिए विशेष सेल लगाई जाती है, इसके साथ ही कपड़ो, गहनों के भी मार्किट लगाये जाते है।
  • नाव की रेस (Snake boat race) जिसे वल्लाम्काली कहते है, उसकी तैयारी जोरों शोरों से होती है। इस रेस का आयोजन ओणम के बाद होता है। इस नाव की रेस का आयोजन भारत के सिर्फ इस हिस्से में होता है, जो पुरे विश्व में प्रसिध्य है।
  • ओणम त्यौहार के समय छुट्टी भी होती है, जिससे लोग अपने अपने होमटाउन, अपने लोगों के साथ इस त्यौहार को मनाने के लिए जाते है।
  • आठवें दिन, जिसे पूरादम कहते है, महाबली एवं वामन की प्रतिमा को साफ़ करके, अच्छे से सजाकर घर एवं मंदिर में प्रतिष्ठित किया जाता है।
  • आखिरी दसवें थिरुवोनम के दिन चावल के घोल से घर के बाहर सजाया जाता है, जल्दी लोग नहाधोकर तैयार हो जाते है। घर को अच्छे से लाइट के द्वारा सजाया जाता है।
  • ओणम त्यौहार में नए कपड़े खरीदने एवं उसे पहनने का विशेष महत्व होता है। इसे ओनाक्कोदी कहते है।
  • जैसे महाबली दानवीर थे, इसलिए इस त्यौहार में दान का विशेष महत्व होता है। लोग तरह तरह की वस्तुएं गरीबों एवं दानवीरों को दान करते है।
  • ओणम के आखिरी दिन बनाये जाये वाले पकवानों को ओणम सद्या कहते है। इसमें 26 तरह के पकवान बनाये जाती है, जिसे केले के पत्ते पर परोसा जाता है।
  • ओणम के दौरान केरल के लोक नृत्य को भी वहां देखा जा सकता है, इसका आयोजन भी वहां मुख्य होता है। थिरुवातिराकाली, कुम्मात्तिकाली, कत्थककली, पुलिकाली आदि का विशेष आयोजन होता है।
  • वैसे तो ओणम का त्यौहार दसवें दिन ख़त्म हो जाता है, लेकिन कुछ लोग इसे आगे दो दिन और मनाते है। जिसे तीसरा एवं चौथा ओणम कहते है। इस दौरान वामन एवं महाबली की प्रतिमा को पवित्र नदी में विसर्जित किया जाता है. पूक्कालम को भी इस दिन हटाकर, साफ कर देते है।

10-12 दिन का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ ख़त्म होता है, जिसे केरल का हर इन्सान बहुत मन से मनाता है। इस रंगबिरंगे अनौखे त्यौहार में पूरा केरल चमक उठता है।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.1

TOPIC -HISTORY

 

हथकरघा उत्पादन को दोगुना करने और निर्यात को चार गुना करने के लिए एक समिति का गठन किया

सरकार ने कल श्री सुनील सेठी, अध्यक्ष, भारतीय फैशन डिजाइन परिषद (एफडीसीआई) नई दिल्ली की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। 7 अगस्त 2021 को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर तीन वर्षों में उत्पादन को दोगुना करने और हथकरघा के निर्यात को चार गुना करने के लिए की गई घोषणा के अनुसरण में यह गठन किया गया है। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक कार्य योजना का सुझाव देने के लिए निम्नलिखित संरचना वाली समिति का गठन किया गया है :

  1. श्री सुनील सेठी, अध्यक्ष, एफडीसीआई, नई दिल्ली, अध्यक्ष

सदस्य

  1. डॉ. सुधा ढींगरा, प्रोफेसर, एनआईएफटी, नई दिल्ली
  2. सुश्री शेफाली वैद्य, स्वतंत्र लेखक, पुणे
  3. सुश्री अनगा गाइसस, मालिक, मैसर्स सौदामिनी हैंडलूम्स, पुणे
  4. श्री सुकेत धीर, फैशन डिजाइनर, नई दिल्ली
  5. श्री सुनील अलघ, एमडी, मैसर्स एसकेए एडवाइजर्स प्रा. लिमिटेड और पूर्व एमडी और

सीईओ मेसर्स ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड, मुंबई

  1. डॉ. के.एन. प्रभु, मेसर्स पैराडाइम इंटरनेशनल, करूर
  2. श्री हेतल आर मेहता, चेयरमैन, साइंस इंजीनियरिंग एंड साइंस इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजिकल अपलिफ्टमेंट फाउंडेशन (एसईटीयू), सूरत

क्षेत्रीय निदेशक, श्री मनोज जैन और एस. एस. बंद्योपाध्याय आवश्यक इनपुट प्रदान करने में सुविधा के लिए समिति के साथ जुड़े रहेंगे।

समिति के विचारार्थ विषय इस प्रकार हैं :

  1. बुनकरों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से उत्पादन को दोगुना करने और हथकरघा उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के लिए रणनीति और नीतिगत ढांचे का सुझाव देना।
  2. हथकरघा बुनकर एजेंसियों के डिजाइनरों, खरीददारों और संस्थानों, संगठनों और निर्यातकों के साथ साझेदारी और सहयोग के तरीके सुझाना।
  3. हथकरघा उत्पादों के निर्यात को चौगुना करने के उपाय सुझाना।
  4. घरेलू बाजार में हथकरघा उत्पादों के विपणन में सुधार के उपाय सुझाना।
  5. इनपुट आपूर्ति (कच्चे माल, ऋण, प्रौद्योगिकी उन्नयन, कौशल, डिजाइन आदि) में सुधार के उपाय सुझाना।

समिति को देश में आवश्यकता के आधार पर यात्रा करने के लिए टीए/डीए का भुगतान किया जाएगा। समिति अपनी प्रारंभिक सिफारिशें समिति के गठन की तारीख से 30 दिनों के भीतर और अंतिम रिपोर्ट 45 दिनों के भीतर प्रस्तुत करेगी।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

 

प्रधानमंत्री ने सोमनाथ में कई परियोजनाओं का उद्घाटन

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सोमनाथ, गुजरात में विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उद्घाटन की गई परियोजनाओं में सोमनाथ समुद्र दर्शन पथ, सोमनाथ प्रदर्शनी केंद्र और पुराने (जूना) सोमनाथ का पुनर्निर्मित मंदिर परिसर शामिल हैं। इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने श्री पार्वती मंदिर की आधारशिला भी रखी।

इस पावन अवसर में वरिष्ठ नेता एवं श्री सोमनाथ ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री लालकृष्ण आडवाणी, श्री अमित शाह (केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री), श्री श्रीपद येसो नाइक (पर्यटन और पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग राज्य मंत्री), श्री विजय रूपाणी (मुख्यमंत्री, गुजरात), श्री नितिनभाई पटेल (उपमुख्यमंत्री, गुजरात), श्री जवाहर चावड़ा (पर्यटन मंत्री, गुजरात राज्य सरकार) एवं श्री वासन अहीर (पर्यटन राज्य मंत्री, गुजरात राज्य सरकार), श्री राजेशभाई चुड़ासमा (सांसद, जूनागढ़) और श्री सोमनाथ ट्रस्ट के ट्रस्टी– सचिव श्री पी के लाहिड़ी भी शामिल हुए। इस कार्यक्रम का संचालन पर्यटन मंत्रालय के सचिव श्री अरविंद सिंह ने किया। इस कार्यक्रम के दौरान, सोमनाथ में शुरू की गई विकास संबंधी विभिन्न अवसंरचना परियोजनाओं को प्रदर्शित करने वाली एक फिल्म भी दिखायी गयी।

दुनिया भर के श्रद्धालुओं को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने सरदार पटेल को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने भारत के प्राचीन गौरव को पुनर्जीवित करने के लिये अदम्य इच्छाशक्ति दिखाई थी। सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर को स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र भावना से जोड़ा था। श्री मोदी ने कहा, “यह हमारा सौभाग्य है कि हम आजादी के 75वें वर्ष में सोमनाथ मंदिर को नई भव्यता प्रदान करने में सरदार साहब के प्रयासों को आगे बढ़ा रहे हैं।” प्रधानमंत्री ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर को याद किया, जिन्होंने विश्वनाथ से लेकर सोमनाथ तक कई मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि परंपरा और आधुनिकता का जो संगम उनके जीवन में था, आज देश उसे अपना आदर्श मानकर आगे बढ़ रहा है।

पर्यटन मंत्रालय ने वर्ष 2014-15 में चिह्नित तीर्थस्थलों और विरासत स्थलों के एकीकृत विकास के उद्देश्य से राष्ट्रीय तीर्थयात्रा कायाकल्प और अध्यात्मिक, विरासत संवर्धन अभियान’ (प्रसाद) शुरू किया था। इस योजना के तहत विभिन्न परियोजनाओं को अंतिम रूप देने और उसे कार्यान्वित करने के क्रम में समान पहुंच की अवधारणा सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। इस योजना का उद्देश्य स्थलों पर तीर्थस्थल/धार्मिक और विरासत पर्यटन इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास का निर्माण है। वर्तमान में 24 राज्यों में 1,214.19 करोड़ रुपये की लागत वाली कुल 37 परियोजनाओं (15 पूरी हो चुकी परियोजनाओं सहित) को स्वीकृति दी जा चुकी है और योजना के तहत इन परियोजनाओं के लिए कुल 675.89 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की जा चुकी है।

“प्रसाद योजना के तहत सोमनाथ, गुजरात में तीर्थयात्रा सुविधाओं के विकास से सम्बंधित परियोजना का अनुमोदन पर्यटन मंत्रालय द्वारा मार्च, 2017 में किया गया था। इस परियोजना की लागत 45.36 करोड़ रुपये थी। परियोजना के विभिन्न घटकों जैसे ‘पार्किंग क्षेत्र विकास’, ‘पर्यटक सुविधा केंद्र’ और ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन’ को सफलतापूर्वक पूरा करके जुलाई, 2020 में राष्ट्र को समर्पित किया गया था। विश्वस्तरीय तीर्थयात्रा पर्यटन के बुनियादी ढांचे की परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। इन सुविधाओं में शामिल हैं- यात्रियों के लिए अमानती सामान घर, सार्वजनिक सुविधा सहित प्रतीक्षालय, बच्चों के लिए कमरे, विशेष रूप से सक्षम, कारों, बसों और दोपहिया वाहनों के लिए पार्किंग, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, चिकित्सा सुविधाएं, स्मारिका दुकानें, पारंपरिक दुकानें, जलपान गृह, पुस्तकालय, बैठक हॉल, बहुउद्देश्यीय कक्ष, वरिष्ठ नागरिक कक्ष, सत्संग भवन, पेयजल, समर्पित पार्किंग, सौर ऊर्जा विद्युत गृह, उद्यान का विकास आदि। इस योजना के तहत निर्मित पर्यटक सुविधा केंद्र में आज एक प्रदर्शनी गैलरी का उद्घाटन हुआ है, जिसे श्री सोमनाथ ट्रस्ट द्वारा विकसित किया गया है।

जूना सोमनाथ मंदिर परिसर के विकास कार्यों में सभी की पहुxच के लिए रैंप, आंगन, तीर्थयात्रियों के बैठने की व्यवस्था, 15 दुकानें, लिफ्ट और दो बड़े हॉल शामिल हैं। इसके लिए श्री सोमनाथ ट्रस्ट द्वारा 3.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

श्री सोमनाथ मंदिर परिसर में प्रस्तावित पार्वतीमाता मंदिर 1650 वर्गमीटर के क्षेत्रफल एवं 71 फीट की ऊंचाई के साथ एक भव्य संरचना होगी। इसके निर्माण में अंबाजी, बनासकांठा के अरास पत्थरों का उपयोग किया जायेगा। मूल मंदिर के अनुरूप 44 स्तम्भ होंगे, जिन्हें कलात्मक तरीके से संगमरमर का उपयोग करके बनाया जाएगा। मंदिर का मुख्य गर्भ गृह 380 वर्गमीटर का होगा, जबकि नृत्य मंडप का क्षेत्रफल 1250 वर्गमीटर होगा।

प्रसाद योजना के तहत गुजरात राज्य के लिए शुरू की जाने वाली नई परियोजनाएं हैं: मां अंबाजी मंदिर, बनासकांठा में तीर्थयात्री सुविधाओं का विकास और सोमनाथ में सार्वजनिक प्लाजा/एंट्री प्लाजा का विकास।

तीर्थयात्रियों की आवाजाही का प्रबंधन करने और मंदिर परिसर में पैदल चलने वालों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए सार्वजनिक प्लाजा/ एंट्री प्लाजा अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। इन अत्याधुनिक सुविधाओं में दिव्यांगजनों और आपातकालीन वाहनों (एम्बुलेंस और अग्निशमन वाहन) के लिए पार्किंग की सुविधा शामिल होगी। एंट्री प्लाजा की इमारत में विश्राम कक्ष, अमानती सामान घर (क्लोक रूम), कैफेटेरिया तथा महिलाओं एवं पुरुषों के लिए शौचालय और तीर्थयात्रियों की कतार के लिए बने परिसर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए छतरी से युक्त व्यवस्था जैसी अन्य सार्वजनिक सुविधाएं होंगी। आइकॉनिक डेस्टिनेशन डेवलपमेंट स्कीम (आईडीडीएस) के तहत तैयार मास्टर प्लान को ध्यान में रखते हुए इन सुविधाओं के लिए स्थान का प्रस्ताव किया गया है। अंबाजी मंदिर से संबंधित परियोजना के तहत, पर्यटक सुविधा केंद्र, पार्किंग, सार्वजनिक सुविधाएं, अमानती सामान घर (क्लोक रूम), गब्बर हिल पर सीढ़ियों का विकास और अन्य सुविधाओं जैसे तीर्थ पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे को विकसित किया जाना है।

पर्यटन मंत्रालय द्वारा अपनी इंटीग्रेटड डेस्टिनेशन डेवलपमेंट स्कीम (आईडीडीएस) के तहत प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों में से एक के रूप में सोमनाथ के विकास को प्रस्तावित किया गया है, जिसमें प्रभास पाटन संग्रहालय, पर्यटक सुविधाएं, हाट आदि जैसे घटकों का विकास शामिल है। इस पूरे क्षेत्र का व्यापक और समग्र विकास सुनिश्चित करते हुए इस विचाराधीन परियोजना के तहत सोमनाथ को बेहतर संपर्क– सुविधा (कनेक्टिविटी) प्रदान करने के लिए केशोद हवाई अड्डा, राष्ट्रीय राजमार्ग-51 का उन्नयन, सी-प्लेन सेवाओं का विकास आदि जैसे कुछ क्षेत्रीय उपाय भी प्रस्तावित हैं।

इन सबके अलावा, पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन योजना के तहत गुजरात सरकार के लिए निम्नलिखित परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है :

सर्किट का नाम परियोजना का नाम स्वीकृत लागत (करोड़ रुपये में) जारी की गई राशि (करोड़ रुपये में) वास्तविक प्रगति
हेरिटेज सर्किट अहमदाबाद-राजकोट-पोरबंदर– बारदोली-दांडी (2016-17) का विकास 59.17 54.79 95%
हेरिटेज सर्किट वडनगर–मोढेरा (2016-17) का विकास 91.84 87.25 98%
बौद्ध सर्किट जूनागढ़-गिरसोमनाथ-भरूच-कच्छ-भावनगर-राजकोट-मेहसाणा का विकास

(2017-18)

28.67 19.21 93%

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.1

TOPIC-HISTORY

 

संस्कृत सप्ताह

19 अगस्त से 25 अगस्त 2021 तक संस्कृत सप्ताह मनाया जा रहा है।

मुख्य बिंदु

  • इस प्राचीन भाषा को बढ़ावा देने और लोकप्रिय बनाने के लिए संस्कृत सप्ताह मनाया जाता है।
  • इस आयोजन की शुरुआत में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी से संस्कृत भाषा सीखने और बढ़ावा देने का आग्रह किया।

विश्व संस्कृत दिवस (World Sanskrit Day)

यह एक वार्षिक कार्यक्रम है जो प्राचीन भारतीय भाषा संस्कृत पर केंद्रित है। यह दिन संस्कृत के पुनरुद्धार और रखरखाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मनाया जाता है। हर साल, यह दिन हिंदू कैलेंडर में श्रावण महीने की पूर्णिमा के दिन श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है। वर्ष 2021 में यह दिन 22 अगस्त को मनाया जाएगा। संस्कृत संगठन संस्कृत भारती को इस दिन को बढ़ावा देने का काम सौंपा गया है।

श्रावणी पूर्णिमा

श्रावणी पूर्णिमा, जिसे रक्षा बंधन भी कहा जाता है, ऋषियों की याद और पूजा के साथ-साथ उनके समर्पण के लिए पूजा का त्योहार है। इस दिन, गुरुकुलों वेदों के अध्ययन से पहले एक पवित्र धागा पहना जाता है। पवित्र धागा पहनने के समारोह को उपनयन या उपकर्म संस्कार कहा जाता है। इस अवसर पर पुजारी यजमानों को रक्षा सूत्र भी बांधते हैं।

पृष्ठभूमि

सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने 1969 में संस्कृत दिवस मनाने के लिए अधिसूचना जारी की थी। तब से, यह दिवस पूरे भारत में मनाया जाता है।

SOURCE-GK TODAY

PAPER-G.S.1

TOPIC-HISTORY

 

आरोग्य धारा 2.0

आयुष्मान भारत-जन आरोग्य योजना (Ayushman Bharat – Jan Arogya Yojana) की पहुंच बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने 18 अगस्त 2021 को आरोग्य धारा 2.0 को लांच किया।

मुख्य बिंदु

  • आरोग्य धारा 0 आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Scheme) के बारे में अधिक जागरूकता पैदा करने का प्रयास करेगी।
  • इस अवसर पर, स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकार पत्र, आयुष्मान मित्र और अभिनंदन पात्र नामक तीन पहलों को लांच किया गया।

अधिकार पत्र

लाभार्थियों को अधिकार पत्र तब जारी किया जाएगा जब उन्हें PM-JAY योजना के तहत इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा। यह पत्र लाभार्थियों को उनके अधिकारों के बारे में इस तरह से जागरूक करेगा कि वे मुफ्त और कैशलेस स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं का दावा कर सकें।

अभिनंदन पत्र

यह एक ‘धन्यवाद नोट’ है और लाभार्थियों को तब जारी किया जाएगा जब लाभार्थियों को PM-JAY के तहत इलाज के बाद छुट्टी दे दी जाएगी।

आयुष्मान मित्र

यह नागरिकों को PM-JAY योजना के तहत सत्यापित होने के लिए पात्र लाभार्थियों को प्रेरित करने में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की गई एक पहल है। यह लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड जारी करने में मदद करने का भी प्रयास करता है।

पृष्ठभूमि

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (Ayushman Bharat Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana – AB PM-JAY) ने हाल ही में (18 अगस्त) अस्पताल में 2 करोड़ लोगों की भर्ती का आंकड़ा पार कर लिया। इस मील के पत्थर को चिह्नित करने के लिए, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (National Health Authority) ने आरोग्य धारा 2.0 नामक सत्र का आयोजन किया।

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना

यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (यू-एच-सी) के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए, भारत सरकार की एक प्रमुख योजना “आयुष्मान भारत” का प्रक्षेपण राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के द्वारा अनुशंसित किया गया। यह पहल, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) और इसकी रेखांकित प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य है की “कोई भी पीछे ना छूटे।”

“आयुष्मान भारत” स्वास्थ्य सेवा वितरण के क्षेत्रीय और खंडित दृष्टिकोण से हट कर, एक व्यापक और अपेक्षित स्वास्थ्य सेवा की ओर बढ़ने का प्रयास है। इस योजना का उद्देश्य प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक स्तर पर स्वास्थ्य सेवा प्रणाली (प्रिवेन्शन, प्रमोशन एवं एंबुलेटरी केयर) को समग्रित रूप से सम्बोधित करना है। आयुष्मान भारत अबाध्य स्वास्थ्य सेवाओं की ओर एक बड़ा क़दम है। इसमें दो अंतर-संबंधित घटक शामिल हैं, जो निमलिखित हैं:

  • स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (HWC’s)
  • प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जय)

स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (HWCs)

फरवरी 2018 में, भारत सरकार ने मौजूदा उप केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को बदलकर 1,50,000 स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (HWCs) बनाने की घोषणा की। यह पहल, व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (CPHC) और स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के घरों तक पहुंचाने की कोशिश हैं। इन केंद्रों में नि:शुल्क आवश्यक दवाइयाँ, गैर-संचारी रोगों सहित नैदानिक एवं मातृ और बाल स्वास्थ्य सेवाएँ भी उपलब्ध हैं।

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना

आयुष्मान भारत के तहत दूसरा घटक प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना है जिसे लोग (पीएम-जय)के नाम जानते हैं। यह योजना 23 सितंबर, 2018 को भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के द्वारा रांची, झारखंड में शुरू की गई।

आयुष्मान भारत (पीएम-जय) दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य आश्वासन योजना है, जिसका उद्देश्य प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का मुफ़्त इलाज माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 10.74 करोड़ से भी अधिक गरीब और वंचित परिवारों (या लगभग 50 करोड़ लाभार्थियों को) मुहैया कराना जो भारतीय आबादी का 40% हिस्सा हैं। यह संख्या और शामिल किए गए परिवार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना 2011 (SECC 2011) के अभाव और व्यावसायिक मापदण्डों पर आधारित हैं। (पीएम-जय)को पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (NHPS) के नाम से जाना जाता था। पूर्ववर्ती राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना (RSBY), जिसका प्रमोचन 2008 में हुआ था, का विलय (पीएम-जय) में किया गया। इसलिए (पीएम-जय)के तहत, उन परिवारों को भी शामिल किया गया है जो RSBY में उल्लिखित थे, लेकिन SECC 2011 के डेटाबेस में मौजूद नहीं हैं। (पीएम-जय) पूरी तरह से एक सरकार द्वारा वित्त-पोषित योजना है जिसकी कार्यान्वयन की लागत केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बाटी गई है।

(पीएम-जय) की मुख्य विशेषताएं

  • (पीएम-जय) पूरी तरह से सरकार द्वारा वित्त-पोषित दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा/आश्वासन योजना है।
  • यह योजना भारत में सार्वजनिक व निजी सूचीबद्ध अस्पतालों में माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य उपचार के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक की धन राशि लाभार्थियों को मुहया कराती है।
  • 74 करोड़ से भी अधिक गरीब व वंचित परिवार (या लगभग 50 करोड़ लाभार्थी) इस योजना के तहत लाभ प्राप्त कर सकतें हैं।
  • (पीएम-जय) सेवा संस्थान अर्थात “अस्पतालों” में लाभार्थी को स्वास्थ्य सेवाएँ निशुल्क प्रदान करती है।
  • (पीएम-जय) चिकित्सा उपचार से उत्पन अत्यधिक ख़र्चे को कम करने में मदद करती है, जो प्रत्येक वर्ष लगभग 6 करोड़ भारतीयों को गरीबी की रेखा से नीचे पहुचा देता है।
  • इस योजना के तहत अस्पताल में भर्ती होने से 3 दिन पहले और 15 दिन बाद तक का नैदानिक उपचार, स्वास्थ्य इलाज व दवाइयाँ मुफ्त उपलब्ध होतीं हैं।
  • इस योजना के तहत परिवार के आकार, आयु या लिंग पर कोई सीमा नहीं है।
  • इस योजना के तहत पहले से मौजूद विभिन्न चिकित्सीय परिस्थितियों और गम्भीर बीमारियों को पहले दिन से ही शामिल किया जाता है।
  • (पीएम-जय) एक पोर्टेबल योजना हैं यानी की लाभार्थी इसका लाभ पूरे देश में किसी भी सार्वजनिक या निजी सूचीबद्ध अस्पताल में उठा सकतें हैं।
  • इस योजना में लगभग 1,393 प्रक्रियाएं और पैकिज शामिल हैं जैसे की दवाइयाँ, आपूर्ति, नैदानिक सेवाएँ, चिकित्सकों की फीस, कमरे का शुल्क, ओ-टी और आई-सी-यू शुल्क इत्यादि जो मुफ़्त उपलब्ध हैं।
  • स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निजी अस्पतालों की प्रतिपूर्ति सार्वजनिक अस्पतालों के बराबर की जाती है।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

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