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Current Affair 20 July 2021

Current Affairs – 20 July, 2021

ईद-उज-जुहा

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ईद-उल-अजहा के अवसर पर देशवासियों को बधाई दी है।

प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कहा:

‘ईद मुबारक!

ईद-उल-अजहा की हार्दिक शुभकामनाएं। यह दिन समाज की बेहतरी के लिए सामूहिक सहानुभूति, सद्भाव और समावेश की भावना को आगे बढ़ाए।

ईद अल-अज़हा या बकरीद (अरबी में عید الاضحیٰ; ईद-उल-अज़हा अथवा ईद-उल-अद्’हा – जिसका मतलब क़ुरबानी की ईद) इस्लाम धर्म में विश्वास करने वाले लोगों का एक प्रमुख त्यौहार है। रमजान के पवित्र महीने की समाप्ति के लगभग ७० दिनों बाद इसे मनाया जाता है। इस्लामिक मान्यता के अनुसार हज़रत इब्राहिम अपने पुत्र हज़रत इस्माइल को इसी दिन खुदा के हुक्म पर खुदा कि राह में कुर्बान करने जा रहे थे, तो अल्लाह ने उसके पुत्र को जीवनदान दे दिया जिसकी याद में यह पर्व मनाया जाता है। लेकिन इधर हिंदी उर्दू भाषा के बकरी-बकरा से इसका नाम जुड़ा है, अर्थात इधर के देशों में बकरे की क़ुर्बानी के कारण असल नाम से बिगड़कर आज भारत, पाकिस्तान व बांग्ला देश में यह ‘बकरा ईद’ से ज्यादा विख्यात हैं। ईद-ए-कुर्बां का मतलब है बलिदान की भावना। अरबी में ‘क़र्ब’ नजदीकी या बहुत पास रहने को कहते हैं मतलब इस मौके पर अल्लाह् इंसान के बहुत करीब हो जाता है। कुर्बानी उस पशु के जि़बह करने को कहते हैं जिसे जि़लहिज्ज (हज का महीना) को खुदा को खुश करने के लिए ज़िबिह किया जाता है। कुरान में लिखा है : हमने तुम्हें हौज़-ए-क़ौसा दिया तो तुम अपने अल्लाह के लिए नमाज़ पढ़ो और कुर्बानी करो।

त्याग का उत्थान

बकरीद का त्यौहार हिजरी के आखिरी महीने ज़ु अल-हज्जा में मनाया जाता है। पूरी दुनिया के मुसलमान इस महीने में मक्का सऊदी अरब में एकत्रित होकर हज मनाते है। ईद उल अजहा भी इसी दिन मनाई जाती है। वास्तव में यह हज की एक अंशीय अदायगी और मुसलमानों के भाव का दिन है। दुनिया भर के मुसलमानों का एक समूह मक्का में हज करता है बाकी मुसलमानों के अंतरराष्ट्रीय भाव का दिन बन जाता है। ईद उल अजहा का अक्षरश: अर्थ त्याग वाली ईद है इस दिन जानवर की कुर्बानी देना एक प्रकार की प्रतीकात्मक कुर्बानी है।

जबकि ईद अल-अधा हमेशा इस्लामिक कैलेंडर के एक ही दिन होता है, लेकिन ग्रेगोरियन कैलेंडर की तारीख साल-दर-साल बदलती रहती है क्योंकि इस्लामी कैलेंडर एक चंद्र कैलेंडर है और ग्रेगोरियन कैलेंडर एक सौर कैलेंडर है। सौर कैलेंडर की तुलना में चंद्र कैलेंडर लगभग ग्यारह दिन छोटा होता है। प्रत्येक वर्ष, ईद अल-अधा (अन्य इस्लामी छुट्टियों की तरह) दुनिया के विभिन्न हिस्सों में लगभग दो से चार अलग-अलग ग्रेगोरियन तिथियों में से एक पर पड़ता है, क्योंकि अर्ध-दृश्यता की सीमा इंटरनेशनल डेट लाइन से अलग है।

SOURCE-PIB

 

आर्थिक एवं व्यापार मुद्दों पर ब्रिक्स संपर्क समूह (सीजीईटीआई)

भारत वर्ष 2021 के लिए, ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) का अध्यक्ष है। ब्रिक्स के विभिन्न समूहों में आर्थिक एवं व्यापार मुद्दों पर संपर्क समूह (सीजीईटीआई) आर्थिक तथा व्यापार मुद्दों के लिए उत्तरदायी है। वाणिज्य विभाग ब्रिक्स सीजीईटीआई के लिए राष्ट्रीय समन्वयक है।

सीजीईटीआई की बैठक 12-14 जुलाई 2021 को आयोजित हुई। तीन दिवसीय बैठक के दौरान, ब्रिक्स के सदस्यों ने अंतर-ब्रिक्स सहयोग एवं व्यापार को सुदृढ़ बनाने तथा बढ़ाने के लिए भारत द्वारा प्रस्तुत निम्नलिखित प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया :

  • बहुपक्षीय व्यापारिक प्रणाली पर ब्रिक्स सहयोग;
  • ई-कॉमर्स में उपभोक्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ब्रिक्स संरचना;
  • एसपीएस/टीबीटी उपायों के लिए गैर-टैरिफ उपाय (एनटीएम) समाधान तंत्र;
  • स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता (एसपीएस) कार्य तंत्र;
  • जैविक संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान तथा पारंपरिक सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों की सुरक्षा के लिए सहयोग संरचना;
  • व्यावसायिक सेवाओं में सहयोग पर ब्रिक्स संरचना।

ब्रिक्स सदस्यों ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता में 3 सितंबर 2021 को आयोजित होने वाली ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की बैठक से पूर्व उन्हें अंतिम रूप देने के लिए भारत के प्रस्तावों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

व्यापार एवं अर्थव्यवस्था में गहराई लाने तथा सुदृढ़ बनाने के लिए भारत द्वारा प्रस्तुत निम्नलिखित कार्यक्रमों पर भी ब्रिक्स सदस्यों ने सहमति जताई :

  • वाणिज्य विभाग द्वारा एक ब्रिक्स व्यापार मेला तथा 16-18 अगस्त 2021 तक क्रेता-विक्रेता वर्चुअल बैठक का आयोजन किया जाएगा;
  • सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रम मंत्रालय द्वारा 22 जुलाई 2021 को ब्रिक्स एमएसएमई पर गोलमेज का आयोजन किया जाएगा;
  • भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 16 जुलाई तथा 13 अगस्त 2021 को सेवा व्यापार आंकड़ों पर दो कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा।

SOURCE-PIB

 

भारतनेट परियोजना

दूरसंचार विभाग (“प्राधिकरण”) की ओर से भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड (बीबीएनएल) ने 9 अलग-अलग पैकेजों में 16 राज्यों में 30 साल की रियायती अवधि के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी मॉडल के माध्यम से भारतनेट के विकास (निर्माण, उन्नयन, संचालन और रख-रखाव तथा उपयोग) के लिए वैश्विक निविदा आमंत्रित की हैं। इस परियोजना के तहत, सरकार लागत में कम पड़ रही राशि की व्यवस्था के लिए वित्त पोषण (वायबिलिटी गैप फंडिंग) के उद्देश्य से अधिकतम 19,041 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान करेगी।

यह परियोजना केरल, कर्नाटक, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में अनुमानित 3.61 लाख गांवों (ग्राम पंचायतों सहित) को शामिल करेगी।

मौजूदा समय में भारतनेट ब्लॉक और ग्राम पंचायतों (जीपी) के बीच ऑप्टिकल फाइबर केबल-ओएफसी (मुख्य रूप से) बिछाकर देश की सभी ग्राम पंचायतों (जीपी) को जोड़ रहा था। भारतनेट का दायरा अब देश के लगभग सभी आबादी वाले 6.43 लाख गांवों (ग्राम पंचायतों सहित) को जोड़ने के लिए बढ़ा दिया गया है।

भारतनेट पीपीपी परियोजना के तहत कार्य के दायरे में शामिल हैं :

  • भारतनेट परियोजना (चरण 1 और चरण 2) के तहत शेष बिना सम्पर्क वाली ग्राम पंचायतों और ग्राम पंचायतों से परे सभी आबादी वाले गांवों को जोड़ना।
  • मौजूदा भारतनेट नेटवर्क को लीनियर से रिंग टोपोलॉजी में अपग्रेड करना।
  • संचालन और रख-रखाव (ओ एंड एम) और मौजूदा तथा साथ ही नए बिछाए गए नेटवर्क का उपयोग।
  • इन 16 राज्यों में मौजूदा भारतनेट नेटवर्क इस परियोजना का हिस्सा बन जाएगा। निविदा बोली जमा करने की अंतिम तिथि 24 अगस्त 2021 है।

रियोजना को सार्वजनिक निजी भागेदारी-पीपीपी ढांचे पर डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण (डीबीएफओटी) रियायत के माध्यम से निष्पादित किया जाएगा। भारतनेट को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने के लिए ओ एंड एम, उपयोग और राजस्व सृजन के लिए निजी क्षेत्र की क्षमता, समर्थता और दक्षता का उपयोग करने का विचार है। भारतनेट की यह परियोजना सरकार के प्रभावी वितरण के माध्यम से सामाजिक समावेशन के उद्देश्य को भी पूरा करेगी। ब्रॉडबैंड का उपयोग करने वाली योजनाओं और नागरिक केंद्रित सेवाओं, और ई-गवर्नेंस, ई-शिक्षा, टेली मेडिसिन, ई-बैंकिंग आदि को मजबूत करने के लिए भी यह परियोजना उपयोगी साबित होगी।

भारतनेट क्या है?

भारत नेट परियोजना का नाम पहले ओएफसी नेटवर्क (Optical Fiber Communication Network) था।

भारतनेट परियोजना के तहत 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर के ज़रिये हाईस्पीड ब्रॉडबैंड, किफायती दरों पर उपलब्ध कराया जाना है।

इसके तहत ब्रॉडबैंड की गति 2 से 20 mbps तक होगी।

इसके तहत ज़िला स्तर पर भी सरकारी संस्थानों के लिये ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।

इस परियोजना का वित्तपोषण यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (Universal Service Obligation Fund-USOF) द्वारा किया जा रहा है।

इस परियोजना का उद्देश्य राज्यों तथा निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी से ग्रामीण तथा दूर-दराज़ के क्षेत्रों में नागरिकों एवं संस्थानों को सुलभ ब्रॉड बैंड सेवाएँ उपलब्ध कराना है।

इस परियोजना के तहत ब्रॉडबैंड को ऑप्टिकल फाइबर के ज़रिये पहुँचाया जाएगा, लेकिन जहाँ ऑप्टिकल फाइबर पहुँचाना संभव नहीं हो, वहाँ वायरलैस एवं सैटेलाइट नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाएगा।

गाँवों में इंटरनेट पहुँचाने के बाद निजी सेवा प्रदाताओं को भी मौके दिये जाएंगे ताकि वे विभिन्न प्रकार की सेवाएँ मुहैया करा सकें।

स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों एवं कौशल विकास केंद्रों में इंटरनेट कनेक्शन नि:शुल्क प्रदान किये जाएंगे।

भारतनेट के पहले चरण में देश के कई राज्यों की एक लाख से अधिक ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई गई है।

भारतनेट परियोजना के दूसरे चरण के तहत मार्च 2019 तक 2.5 लाख ग्राम पंचायतों में हाई स्पीड ब्रॉड बैंड का लक्ष्य है।

SOURCE-PIB

 

माक्स एयर शो

भारतीय वायुसेना की सारंग हेलीकॉप्टर डिसप्ले टीम रूस के जुकोवस्की अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा में पहली बार माक्स अंतर्राष्ट्रीय एयर शो में प्रदर्शन करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह एयर शो एक द्विवार्षिक आयोजन है और इस वर्ष इसका आयोजन 20 जुलाई 2021 से 25 जुलाई 2021 तक किया जाएगा।

यह पहला अवसर है जब सारंग टीम अपने ‘मेड इन इंडिया’‘ध्रुव’ एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) के साथ रूस में अपने चार हेलीकॉप्टर एरोबेटिक्स डिसप्ले करेगी। एचएएल निर्मित इन मशीनों में हिन्ज रहित रोटोर हैं और ये अत्याधुनिक एवियोनिक्स से सुसज्जित हैं जो उन्हें सैन्य उड्डयन के लिए बेहद अनुकूल बनाता है। भारतीय वायुसेना के अतिरिक्त, उन्हें सैन्य उड्डयन के लिए बेहद अनुकूल बनाता है। भारतीय वायुसेना के अतिरिक्त, भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक भी इस हेलीकॉप्टर को ऑपरेट करते हैं।

सारंग टीम का निर्माण 2003 में बेंगलुरू में हुआ था और इसका पहला अंतर्राष्ट्रीय डिसप्ले 2004 में सिंगापुर में एशियन एयरोस्पेस एयर शो में हुआ था। उसके बाद से सारंग ने अभी तक संयुक्त अरब अमीरात, जर्मनी, ब्रिटेन, बहरीन, मॉरीशस तथा श्रीलंका में एयर शो तथा औपचारिक अवसरों पर भारतीय उड्डयन का प्रतिनिधित्व किया है।राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्थानों पर एयरोबेटिक्स डिसप्ले के अतिरिक्त इस टीम ने उत्तराखंड में ऑपरेशन राहत (2013), केरल में ओखी तूफान (2017) तथा केरल में ऑपरेशन करूणा बाढ़ राहत (2018) जैसे अनगिनत मानवीय सहायता और आपदा राहत मिशनों में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया है।

SOURCE-PIB

 

हाई स्ट्रेंथ बीटा टाइटेनियम मिश्र धातु

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने एयरोस्पेस स्ट्रक्चरल फोर्जिंग में इस्तेमाल के लिए औद्योगिक पैमाने पर वैनेडियम, आयरन और एल्युमिनियम युक्त एक हाई स्ट्रेंथ मेटास्टेबल बीटा टाइटेनियम मिश्र धातु Ti-10V-2Fe-3Al विकसित की है। इसे रक्षा धातुकर्म अनुसंधान प्रयोगशाला (डीएमआरएल) द्वारा विकसित किया गया है, जो डीआरडीओ की हैदराबाद स्थित एक प्रमुख प्रयोगशाला है। हाल के दिनों में इन मिश्र धातुओं का उपयोग कई विकसित देशों द्वारा अपेक्षाकृत भारी पारंपरिक Ni-Cr-Mo संरचनात्मक स्टील्स के लाभकारी और कम वज़न वाले विकल्प के रूप में किया जा रहा है।

उच्च शक्ति से वजन अनुपात Ti-10V-2Fe-3Al अलॉय की उत्कृष्ट फोर्जेबिलिटी वजन की महत्वपूर्ण बचत की क्षमता के साथ एयरोस्पेस अनुप्रयोगों के लिए जटिल रूप से विन्यस्त कलपुर्जों के निर्माण की सुविधा प्रदान करती है। इस मिश्र धातु से बनने वाले अनेक प्रकार के कलपुर्जों में से कुछ कलपुर्जे स्लैट/फ्लैप ट्रैक, लैंडिंग गियर और लैंडिंग गियर में ड्रॉप लिंक हैं।

हाई स्ट्रेंथ बीटा टाइटेनियम मिश्र धातु अपनी उच्च शक्ति, लचीलेपन, फेटिग और फ्रैक्चर टफनेस के कारण अद्वितीय हैं – जो उन्हें विमान संरचनात्मक अनुप्रयोगों के लिए काफी बेहतर बनाते हैं। इसके अलावा, स्टील्स की तुलना में बेहतर संक्षारण प्रतिरोध के कारण उनकी अपेक्षाकृत कम जीवनकाल लागत, भारत में भी इस महंगी सामग्री के उपयोग को सही ठहराने के लिए प्रभावी है।

डीएमआरएल ने कई एजेंसियों के साथ सक्रिय सहयोग में कच्चे माल का चयन, मिश्र धातु पिघलाने, थर्मो-मैकेनिकल प्रसंस्करण, अल्ट्रासोनिक्स-आधारित नॉन डिस्ट्रीक्टिव इवैल्यूएशन (एनडीई), हीट ट्रीटमेंट, मैकेनिकल करैक्टेराईज़ेशन और टाइप सर्टिफिकेशन किया है।

वैमानिकी विकास एजेंसी (एडीए) ने 15 से अधिक इस्पात कलपुर्जों की पहचान की है जिन्हें निकट भविष्य में 40 प्रतिशतवजन कम करने की क्षमता के साथ Ti-10V-2Fe-3Al मिश्र धातु फोर्जिंग द्वारा प्रतिस्थापित किया जा सकता है। लैंडिंग गियर ड्रॉप लिंक डीएमआरएल की भागीदारी के साथ एचएएल, बेंगलुरु में एडीए द्वारा सफलतापूर्वक निर्मित और उड़ान योग्यता के लिए विधिवत प्रमाणित पहला घटक है।

डीआरडीओ के विषय

डीआरडीओ भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय का आर एंड डी विंग है, जो अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों और महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों और प्रणालियों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए भारत को सशक्त बनाने के लिए एक दृष्टि के साथ है, जबकि हमारे सशस्त्र बलों को राज्य के साथ लैस करता है। तीनों सेवाओं द्वारा निर्धारित आवश्यकताओं के अनुसार-कला हथियार प्रणाली और उपकरण। डीआरडीओ ने आत्मनिर्भरता का पीछा किया और मिसाइलों की अग्नि और पृथ्वी श्रृंखला जैसे रणनीतिक प्रणालियों और प्लेटफार्मों के सफल स्वदेशी विकास और उत्पादन; हल्के लड़ाकू विमान, तेजस; मल्टी बैरल रॉकेट लांचर, पिनाका; वायु रक्षा प्रणाली, आकाश; रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली की एक विस्तृत श्रृंखला; आदि ने, भारत की सैन्य ताकत को क्वांटम जम्प दिया, जिससे प्रभावी निरोध पैदा हुआ और महत्वपूर्ण लाभ हुआ।

“बलस्य मूलम् विज्ञानम्” – शक्ति का स्रोत विज्ञान है जो शांति और युद्ध में राष्ट्र को संचालित करता है। डीआरडीओ ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के मामले में राष्ट्र को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने का दृढ़ निश्चय किया है, विशेषकर सैन्य प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में।

डीआरडीओ का गठन 1958 में भारतीय सेना के तत्कालीन पहले से चल रहे तकनीकी विकास प्रतिष्ठान (TDEs) और रक्षा विज्ञान संगठन (DSO) के साथ तकनीकी विकास एवं उत्पादन निदेशालय (DTDP) के समामेलन से किया गया था। डीआरडीओ तब 10 प्रतिष्ठानों या प्रयोगशालाओं वाला एक छोटा संगठन था। वर्षों से, यह विषय-विषयों की विविधता, प्रयोगशालाओं की संख्या, उपलब्धियों और कद के मामले में बहु-प्रत्यक्ष रूप से बढ़ा है।

आज, डीआरडीओ 50 से अधिक प्रयोगशालाओं का एक नेटवर्क है, जो विभिन्न विषयों को कवर करने वाली रक्षा प्रौद्योगिकियों को विकसित करने में लगे हुए हैं, जैसे कि वैमानिकी, आयुध, इलेक्ट्रॉनिक्स, लड़ाकू वाहन, इंजीनियरिंग सिस्टम, इंस्ट्रूमेंटेशन, मिसाइल, उन्नत कंप्यूटिंग और सिमुलेशन, विशेष सामग्री, नौसेना प्रणाली। जीवन विज्ञान, प्रशिक्षण, सूचना प्रणाली और कृषि। मिसाइलों, आयुध, प्रकाश का मुकाबला करने वाले विमान, रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली आदि के विकास के लिए कई प्रमुख परियोजनाएं हाथ में हैं और ऐसी कई तकनीकों में महत्वपूर्ण उपलब्धियां पहले ही हासिल की जा चुकी हैं।

SOURCE-PIB

 

भारत का पहला ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट

भारत की सबसे बड़ी तेल कंपनी IOC (Indian Oil Corporation) मथुरा में अपनी रिफाइनरी में देश का पहला ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ प्लांट बनाएगी। यह निर्णय ऊर्जा के स्वच्छ रूपों की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए भविष्य की तैयारी की दृष्टि से लिया गया है।

मुख्य बिंदु

  • यह परियोजना भारत की पहली हरित हाइड्रोजन इकाई होगी।
  • इससे पहले, प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधन का उपयोग करने वाली ‘ग्रे हाइड्रोजन’ उत्पादन परियोजनाओं की घोषणा की गई है।
  • IOC द्वारा कई हाइड्रोजन उत्पादन इकाइयां स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है।
  • हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलने वाली बसें सड़कों पर चल रही हैं, इसलिए हाइड्रोजन पावर प्लांट लगाना जरूरी है।

हाइड्रोजन प्लांट के प्रकार

  • हाइड्रोजन नवीनतम चर्चा है क्योंकि यह एक स्वच्छ ईंधन है लेकिन इसके निर्माण से कार्बन उप-उत्पादों उत्पन्न होते हैं और यह ऊर्जा-गहन (energy-intensive) है।
  • कोयले के गैसीकरण की प्रक्रिया के माध्यम से ब्राउन हाइड्रोजन (brown hydrogen) का निर्माण होता है जबकि इस प्रक्रिया से कार्बन अपशिष्ट बाहर निकल जाता है।
  • ब्लू हाइड्रोजन कार्बन कैप्चर का उपयोग करता है।
  • परम स्वच्छ हाइड्रोजन संसाधन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन है और यह हाइड्रोजन ईंधन बनाने के लिए अक्षय ऊर्जा का उपयोग करता है।
  • हाइड्रोजन को भविष्य का ईंधन भी कहा जाता है।

भारत में स्वच्छ ऊर्जा का महत्व

पूर्वानुमान बताते हैं कि भारतीय ईंधन की मांग 2040 तक 250 मिलियन टन के मुकाबले 400-450 मिलियन टन तक पहुंच जाएगी और इसलिए, सीएनजी, एलएनजी, इथेनॉल और बायोडीजल में निवेश करना महत्वपूर्ण होगा।

IOC

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) एक सरकारी स्वामित्व वाली गैस और तेल कंपनी है जिसकी स्थापना वर्ष 1959 में हुई थी। इसका मुख्यालय दिल्ली में स्थित है और इसके वर्तमान अध्यक्ष श्रीकांत माधव वैद्य हैं।

SOURCE-GK TODAY

 

ADB ने भारत के आर्थिक विकास अनुमान को घटाकर 10% किया

एशियाई विकास बैंक (Asian Development Bank) ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के आर्थिक विकास के अनुमान को 11% से घटाकर 10% कर दिया है। यह डाउनग्रेड कोरोनावायरस महामारी की दूसरी लहर के प्रतिकूल प्रभाव को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

मुख्य बिंदु

  • मार्च 2021 में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही में, भारत की जीडीपी वृद्धि 6% हो गई थी।
  • महामारी की दूसरी लहर ने कई राज्य सरकारों को सख्त रोकथाम उपायों को लागू करने के लिए प्रेरित किया, इसलिए वित्त वर्ष 2021-2 के लिए विकास अनुमान को पहले के अनुमानित 11% से 10% तक घटा दिया गया है।
  • वित्त वर्ष 2022-23 के लिए अनुमान को 7% से बढ़ाकर 5% कर दिया गया है क्योंकि उस समय तक अधिकांश आबादी का टीकाकरण हो जाएगा और आर्थिक गतिविधियाँ सामान्य हो जाएँगी।

चीन और दक्षिण एशिया के लिए आर्थिक अनुमान

  • चीन के लिए आर्थिक वृद्धि 2021 में 1% और 2022 में 5% अनुमानित है।
  • दक्षिण एशिया के बारे में, ADB ने कहा कि इस उप-क्षेत्र के लिए आर्थिक दृष्टिकोण मार्च से जून 2021 तक COVID-19 की नई लहरों से प्रभावित हो रहा है।
  • दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि का अनुमान वर्ष 2021-22 के लिए 5% से घटाकर 9% कर दिया गया है।
  • वर्ष 2022 के लिए पूर्वानुमान को 6% से बढ़ाकर 7% कर दिया गया है।

विकासशील एशिया के लिए अनुमान

विकासशील एशिया में रिकवरी चल रही है, लेकिन इस वर्ष के लिए विकास अनुमान को संशोधित कर 7.2% कर दिया गया है, जो अप्रैल के महीने में Asian Development Outlook 2021 में 7.3% अनुमानित था। यह डाउनग्रेड इस क्षेत्र की कुछ अर्थव्यवस्थाओं में हाल ही में वायरस के प्रकोप के कारण किया गया था। वर्ष 2022 के लिए विकासशील एशिया का अनुमान 5.3% से बढ़ाकर 5.4% कर दिया गया है।

एशियाई विकास बैंक (ADB)

एडीबी एक क्षेत्रीय विकास बैंक है जिसका उद्देश्य एशिया में सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। इसकी स्थापना दिसंबर 1966 में की गयी थी। इसका मुख्यालय मनीला (फिलीपींस) में स्थित है। इसके कुल 68 सदस्य हैं, जिनमें से 48 एशिया और प्रशांत क्षेत्र जबकि बाकी 19 अन्य क्षेत्र के हैं। एडीबी का मुख्य उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ऋण, तकनीकी सहायता, अनुदान और इक्विटी निवेश प्रदान करके अपने सदस्यों और भागीदारों की सहायता करना है।

SOURCE-GK TODAY

 

पेड्रो कैस्टिलो

पेड्रो कैस्टिलो (Pedro Castillo) को पेरू के नए राष्ट्रपति-चुनाव के रूप में घोषित किया गया है, चुनाव में कैस्टिलो के दक्षिणपंथी प्रतिद्वंद्वी केलिको फुजीमोरी (Keliko Fujimori) ने चुनावी धोखाधड़ी का आरोप लगाया था।

मुख्य बिंदु

  • आधिकारिक गिनती सोमवार को जारी की गई जिसमें कैस्टिलो ने फुजीमोरी को हराया।
  • अपनी हार के बाद फुजीमोरी को अब भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है।

कैस्टिलो के वादे

  • कैस्टिलो ने पेरू के लोगों के जीवन को बेहतर बनाने का वादा करके राष्ट्रपति पद के लिए प्रचार किया था, जो मंदी की चपेट में हैं।
  • COVID-19 से पेरू की प्रति व्यक्ति मृत्यु दर दुनिया में सबसे अधिक है और कैस्टिलो ने इस कष्टदायक स्थिति को सुधारने का वादा किया है।
  • कैस्टिलो ने देश के संविधान को फिर से तैयार करने का भी वादा किया है और विभिन्न खनन फर्मों पर करों में वृद्धि पर भी बल दिया है।

पेड्रो कैस्टिलो (Pedro Castillo)

कैस्टिलो पेरू के उत्तरी क्षेत्र के पैतृक गांव में प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक के रूप में कार्य करते थे और उन्हें राष्ट्रपति पद के लिए दौड़ने से पहले चार साल पहले राष्ट्रीय हड़ताल का नेतृत्व करने के लिए जाना जाता है।

SOURCE-THE HINDU

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