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Current Affair 21 October 2021

Current Affairs – 21 October, 2021

डिजी-बुक इनोवेशन्‍स फॉर यू सेक्टर इन फोकस-हेल्थ केयर का लोकार्पण

नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम) ने “इनोवेशन्‍स फॉर यू, सेक्‍टर इन फोकस हेल्‍थकेयर” का लोकार्पण किया है जो विभिन्न डोमेन में अटल इनोवेशन मिशन के स्टार्टअप्स की सफलताओं को दर्शाने का प्रयास है। इन स्टार्टअप्स ने नए, बाधाकारी और नवोन्मेषी उत्पादों, सेवाओं और समाधान के लिए काम किया है जो एक स्थायी भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। इस पुस्तक का पहला संस्करण स्वास्थ्य देखभाल में नवाचारों पर केन्द्रित है और जल्द ही अन्य क्षेत्र भी इसका अनुसरण करेंगे।

देश स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, इनोवेशन्‍स फॉर यू श्रृंखला में अटल इनोवेशन मिशन विभिन्न क्षेत्रों में अभिव्‍यक्ति स्टार्टअप को आकर्षित कर रहा है जो महामारी के बाद के युग में एक स्थायी भविष्य बनाने के लिए नव परिवर्तन ला रहे हैं।

इस पुस्तक में देश भर में फैले अटल इनक्यूबेशन सेंटर्स में विकसित 45 हेल्थ टेक स्टार्टअप्स का संकलन किया गया है। ये स्टार्टअप एआई, आईओटी, आईसीटी और अन्य प्रमुख तकनीकों का लाभ उठा रहे हैं ताकि एनीमिया, मलेरिया, दंत चिकित्सा देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य, नवजात और बच्चे की देखभाल और मानव जीवन के आवश्‍यक अंगों की निगरानी जैसी समस्याओं के लिए सामाजिक रूप से उचित समाधान प्रदान किए जा सकें।

नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन के बारे में

अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम) देश में नवोन्‍मेष और उद्यमिता संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की प्रमुख पहल है। एआईएम को देश के इनोवेशन इकोसिस्टम का प्रबंध करने और इनोवेशन इको-सिस्टम में क्रांति लाने के लिए उद्योग विशिष्‍ट संस्‍थानों की एक संस्‍था बनाने का काम सौंपा गया है-जो विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से समूचे नवोन्‍मेषी चक्र का मोटे तौर पर जिक्र करता है।

अटल टिंकरिंग लेबोरेटरीज (एटीएल) नई खोज करने वालों को तैयार करता है, अटल इनक्यूबेशन केन्‍द्र स्थापित इनक्यूबेशन केन्‍द्रों की सहायता करते हैं, यह सुनिश्चित करते हैं कि नई खोज को बाजार में ले जाया जाए और इन नवोन्‍मेषों के आसपास उद्यम बनाने में मदद मिले, अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर आधिकारिक तौर पर भारत के क्षेत्रों में किसी व्‍यक्ति को नहीं प्राप्‍त/पर्याप्‍त तौर पर नहीं प्राप्‍त सेवा अथवा सुविधा वाले लोगों के लिए प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार के लाभों को बढ़ावा दे रहे हैं। अटल न्यू इंडिया चुनौतियां राष्ट्रीय सामाजिक-आर्थिक प्रभाव वाले उत्पाद और सेवा नवाचार पैदा कर रही हैं और एआरआईएसई एएनआईसी चुनौतियां एमएसएमई/स्टार्टअप क्षेत्र में चरणबद्ध तरीके से नवाचार को बढ़ावा देती हैं।

नीति आयोग

नीति आयोग (राष्‍ट्रीय भारत परिवर्तन संस्‍थान) भारत सरकार द्वारा गठित एक नया संस्‍थान है जिसे योजना आयोग के स्‍थान पर बनाया गया है। 1 जनवरी 2015 को इस नए संस्‍थान के सम्बन्ध में जानकारी देने वाला मन्त्रिमण्डल का प्रस्‍ताव जारी किया गया। यह संस्‍थान सरकार के थिंक टैंक के रूप में सेवाएँ प्रदान करेगा और उसे निर्देशात्‍मक एवं नीतिगत गतिशीलता प्रदान करेगा। नीति आयोग, केन्‍द्र और राज्‍य स्‍तरों पर सरकार को नीति के प्रमुख कारकों के सम्बन्ध में प्रासंगिक महत्‍वपूर्ण एवं तकनीकी परामर्श उपलब्‍ध कराएगा। इसमें आर्थिक मोर्चे पर राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय आयात, देश के भीतर, साथ ही साथ अन्‍य देशों की बेहतरीन पद्धतियों का प्रसार नए नीतिगत विचारों का समावेश और विशिष्‍ट विषयों पर आधारित समर्थन से सम्बन्धित मामले शामिल होंगे। नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कान्त हैं। नीति आयोग के सदस्यों में विवेक देवराय, वी॰के॰ सारस्वत, रमेश चन्द्र और विनोद पाल शामिल हैं। योजना आयोग और नीति आयोग में मूलभूत अन्तर है कि इससे केन्द्र से राज्यों की तरफ चलने वाले एक पक्षीय नीतिगत क्रम को एक महत्वपूर्ण विकासवादी परिवर्तन के रूप में राज्यों की वास्तविक और सतत भागीदारी से बदल दिया जाएगा।

नीति आयोग ग्राम स्तर पर विश्वसनीय योजना तैयार करने के लिए तन्त्र विकसित करेगा और इसे उत्तरोत्तर उच्च स्तर तक पहुँचायेगा। आयोग राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों, प्रैक्टिशनरों तथा अन्य हितधारकों के सहयोगात्मक समुदाय के जरिए ज्ञान, नवाचार, उद्यमशीलता सहायक प्रणाली बनाएगा। इसके अतिरिक्‍त आयोग कार्यक्रमों और नीतियों के क्रियान्वयन के लिए प्रौद्योगिकी उन्नयन और क्षमता निर्माण पर बल देगा।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

 

पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान को मंजूरी दी है, जिसमें मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए इसकी शुरुआत, कार्यान्वयन, निगरानी और समर्थन तंत्र के लिए संस्थागत ढांचा स्थापित करना शामिल है।

माननीय प्रधानमंत्री ने 13 अक्टूबर, 2021 को मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के लिए पीएम गतिशक्ति एनएमपी का शुभारंभ किया। कार्यान्वयन ढांचे में सचिवों का अधिकार प्राप्त समूह (ईजीओएस), नेटवर्क योजना समूह (एनपीजी) और आवश्यक तकनीकी दक्षताओं से परिपूर्ण तकनीकी सहायता इकाई (टीएसयू) शामिल हैं।

ईजीओएस की अध्यक्षता कैबिनेट सचिव करेंगे और इसमें सदस्य के रूप में 18 मंत्रालयों के सचिव और सदस्य संयोजक के रूप में लॉजिस्टिक विभाग के प्रमुख शामिल होंगे। ईजीओएस लॉजिस्टिक क्षमता को सुनिश्चित करने के लिए पीएम गतिशक्ति एनएमपी के कार्यान्वयन की समीक्षा और निगरानी करेगी। इसे एनएमपी में किसी भी अनुवर्ती संशोधन के लिए रूपरेखा और मानदंड निर्धारित करने का अधिकार है। ईजीओएस विभिन्न गतिविधियों को एक ही समय पर संचालित करने के लिए प्रक्रिया और अंतिम रूपरेखा भी निर्धारित करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि अवसंरचना विकास की विभिन्न पहल इस संयुक्त एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म का हिस्सा बनें। ईजीओएस विभिन्न मंत्रालयों जैसे इस्पात, कोयला, उर्वरक, आदि की आवश्यकता पर थोक माल के कुशलतापूर्वक परिवहन की मांग को पूरा करने के लिए आवश्यक कार्यों को भी देखेगा।

सीसीईए ने नेटवर्क योजना समूह (एनपीजी) के गठन, संरचना और अधिकार क्षेत्र को भी मंजूरी दे दी है। एनपीजी में संबंधित अवसंरचना मंत्रालयों की नेटवर्क योजना इकाइयों के प्रमुख शामिल हैं और यह ईजीओएस की सहायता करेगा।

इसके अलावा, नेटवर्कों के समग्र एकीकरण में शामिल जटिलताओं को देखते हुए, किसी भी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए कार्यों के दोहराव से बचने के लिए योजना की प्रभावोत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ सूक्ष्म योजना विवरण के माध्यम से लॉजिस्टिक लागत को कम करने हेतू आवश्यक दक्षताओं को प्रदान करने के लिए तकनीकी सहायता इकाई (टीएसयू) को मंजूरी दी गई है। टीएसयू के ढांचे को भी मंजूरी मिल गई है। टीएसयू में विमानन, समुद्री, सार्वजनिक परिवहन, रेल, सड़क एवं राजमार्ग, बंदरगाह आदि जैसे विभिन्न अवसंरचना क्षेत्रों के प्रक्षेत्र विशेषज्ञ होंगे और शहरी एवं परिवहन योजना, संरचनाएं (सड़क, पुल और भवन), बिजली, पाइपलाइन, जीआईएस, आईसीटी, वित्त/बाजार पीपीपी, लॉजिस्टिक, डेटा विश्लेषण आदि विषयों के विशेषज्ञ (एसएमई) होंगे।

पीएम गतिशक्ति एनएमपी का उद्देश्य मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी और लास्ट माइल कनेक्टिविटी की समस्याओं को हल करने के लिए विभागीय दायरों को तोड़ना और परियोजनाओं की अधिक समग्र और एकीकृत योजना बनाकर उसे क्रियान्वित करना है। इससे लॉजिस्टिक लागत को कम करने में मदद मिलेगी। इससे उपभोक्ताओं, किसानों, युवाओं के साथ-साथ व्यवसायों में लगे लोगों को अधिक आर्थिक लाभ होगा।

इस मंजूरी के साथ, पीएम गतिशक्ति की शुरुआत और गति मिलेगी जिसके परिणामस्वरूप देश में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए समग्र और एकीकृत योजना ढांचा तैयार होगा।

मंत्रिमंडल की इस मंजूरी के साथ, पीएम गतिशक्ति विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाएगी और परिवहन के विभिन्न माध्यमों को एकीकृत करने में मदद करेगी। मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के लिए पीएम गतिशक्ति एनएमपी केंद्र में समग्र सुशासन सुनिश्चित करेगी, जिसके केंद्र में भारत के लोग, भारत के उद्योग, भारत के निर्माता और भारत के किसान हैं।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

 

गीता गोपीनाथ

मुख्य अर्थशास्त्री और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसंधान विभाग की निदेशक, गीता गोपीनाथ ने, जनवरी 2022 में IMF को छोड़ने का निर्णय लिया है।

पृष्ठभूमि

गीता गोपीनाथ का जन्म दिसंबर 1971 में मलयाली माता-पिता के यहाँ हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा कोलकाता में की। उन्होंने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और वाशिंगटन विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने 2001 में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में Ph.D. पूरी की। वर्ष 2001 में, वह एक सहायक प्रोफेसर के रूप में शिकागो विश्वविद्यालय में शामिल हुईं और 2005 में हार्वर्ड चली गईं। वर्ष 2010 में, वह वहां एक कार्यरत प्रोफेसर बन गईं। वह हार्वर्ड में अर्थशास्त्र विभाग में कार्यरत प्रोफेसर बनने वाली केवल तीसरी महिला हैं। वह नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के बाद हार्वर्ड में यह पद संभालने वाली पहली भारतीय भी हैं।

  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की अभिकल्पना जुलाई 1944 में संयुक्त राज्य के ‘न्यू हैम्पशायर’ में संयुक्त राष्ट्र के ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में की गई थी।
  • उक्त सम्मेलन में 44 देशों नें एक साथ मिलकर आर्थिक-सहयोग हेतु एक फ्रेमवर्क के निर्माण की बात की ताकि प्रतिस्पर्द्धा अवमूल्यन की पुनरावृत्ति से बचा जा सके जिसके कारण वर्ष 1930 के दशक में आए विश्वव्यापी महामंदी जैसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो गई थी।
  • जब तक कोई देश अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का सदस्य नहीं बनता, तब तक उसे विश्व बैंक की शाखा अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक (International Bank for Reconstruction and Development-IBRD) में सदस्यता नहीं मिलती है।
  • ब्रेटन वुड्स समझौते के अनुरूप अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिये IMF ने निश्चित विनिमय दरों पर मुद्रा परिवर्तन की एक प्रणाली स्थापित की और आधिकारिक भंडार के लिये सोने को यू.एस. डॉलर (प्रति औंस गोल्ड पर 35 यूएस डॉलर) से प्रतिस्थापित किया।
  • वर्ष 1971 में ब्रेटन वुड्स प्रणाली (स्थायी विनिमय दरों की प्रणाली) के समाप्त हो जाने के पश्चात् IMF ने अस्थायी विनिमय दरों की प्रणाली को प्रोत्साहित किया है। देश अपनी विनिमय व्यवस्था को चुनने के लिये स्वतंत्र हैं जिसका अर्थ है कि बाज़ार की शक्तियाँ एक दूसरे के सापेक्ष मुद्रा के मूल्यों को निर्धारित करती है। यह प्रणाली आज भी जारी है।
  • वर्ष 1973 के तेल संकट के दौरान वर्ष 1973 और 1977 के बीच तेल-आयात करने में 100 विकासशील देशों के विदेशी ऋण में 150 प्रतिशत तक की वृद्धि हो गई जिसने आगे दुनिया भर में अस्थायी विनिमय दरों को लागू करना कठिन बना दिया। IMF ने वर्ष 1974-1976 के दौरान एक न्यू लेंडिंग प्रोग्राम (New Lending Program) की शुरुआत की जिसे तेल सुविधा’ (Oil Facility) कहते हैं। तेल आयातक राष्ट्रों एवं अन्य उधारदाताओं (Lenders) द्वारा वित्तपोषित यह सुविधा।
  • उन राष्ट्रों के लिये उपलब्ध है जो तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण व्यापार-संतुलन (Balance Of Trade) बनाए रखने में समस्याओं से गुज़र रहे हों।
  • IMF, अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली के प्रमुख संगठनों में से एक है। IMF की संरचना अंतर्राष्ट्रीय पूंजीवाद के पुनर्निर्माण को राष्ट्रीय आर्थिक संप्रभुता एवं मानव कल्याण के उच्चतम मूल्यांकन (Maximisation) के साथ संतुलित करने में सुविधा प्रदान करती है। इस प्रणाली को सन्निहित उदारवाद (Eembedded Liberalism) कहते हैं।
  • IMF ने पूर्व सोवियत ब्लाक के देशों की केंद्रीय योजना आधारित अर्थव्यवस्था को बाज़ार संचालित अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करने में प्रमुख भूमिका निभाई है।
  • वर्ष 1997 के दौरान पूर्व एशिया में थाइलैंड से लेकर इंडोनेशिया और कोरिया तक एक वित्तीय संकट ने दस्तक दी थी। IMF ने इस संकट से प्रभावित अर्थव्यवस्थाओं के लिये एक राहत पैकेज़ शृंखला की शुरुआत की ताकि उन्हें डिफॉल्ट से बचने, बैंकिंग एवं वित्तीय व्यवस्था में सुधार के लिये सक्षम बनाया जा सके।
  • वैश्विक आर्थिक संकट (2008) : IMF ने वैश्वीकरण एवं पूरी दुनिया को आर्थिक तौर पर जोड़ने तथा निगरानी तंत्र को मज़बूत करने हेतु प्रमुख पहलें की हैं। इन पहलों में स्पिल-ओवर (जब किसी एक देश की आर्थिक नीतियाँ किसी अन्य देशों को प्रभावित कर सकती हो) को कवर करने, वित्तीय प्रणाली एवं जोखिमों के विश्लेषण की निगरानी हेतु कानूनी ढाँचे का पुनर्निर्माण करना, आदि शामिल था।

कार्य

  • वित्तीय सहयोग प्रदान करना : भुगतान संतुलन की समस्याओं से जूझ रहे सदस्य देशों को वित्तीय सहयोग प्रदान करना और अंतर्राष्ट्रीय भंडार की भरपाई करने, मुद्रा विनिमय को स्थिर करने और आर्थिक विकास के लिये ऋण वितरण करना।
  • IMF निगरानी तंत्र : यह अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक प्रणाली का निरीक्षण करता है एवं अपने 189 सदस्य देशों की आर्थिक और वित्तीय नीतियों की निगरानी करता है। इस प्रक्रिया के एक भाग के रूप में यह निगरानी किसी एक देश के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी की जाती है। IMF आर्थिक स्थिरता के संबंध में संभावित जोखिमों पर प्रकाश डालने के साथ ही आवश्यक नीति समायोजन (Needed policy Adjustments) पर भी सलाह देता है।
  • क्षमता विकास : यह केंद्रीय बैंकों, वित्त मंत्रालयों, कर अधिकारियों एवं अन्य आर्थिक संस्थानों को प्रौद्योगिकी सहयोग और प्रशिक्षण प्रदान करता है। यह राष्ट्रों के सार्वजनिक राजस्व को बढ़ाने, बैंकिंग प्रणाली का आधुनिकीकरण करने, मज़बूत कानूनी ढाँचे का विकास करने, शासन में सुधार करने में सहयोग करता है और वित्तीय आँकड़ों एवं व्यापक आर्थिक रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित करता है। यह राष्ट्रों को सतत् विकास लक्ष्य (SDG) की ओर प्रगति करने में भी सहयोग करता है

SOURCE-THE HINDU

PAPER-G.S.1 PRE

 

‘Gen-Next Democratic Network’ पहल क्या है

“जेन-नेक्स्ट डेमोक्रेटिक नेटवर्क” नामक नई पहल के तहत, भारत 35 वर्ष से कम आयु के युवा नेताओं की मेजबानी करने जा रहा है।

मुख्य बिंदु

  • यह कार्यक्रम नवंबर, 2021 में आयोजित किया जाएगा।
  • इसकी योजना भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) द्वारा बनाई गई है।
  • ICCR विदेश मंत्रालय के तहत काम करने वाली एक स्वायत्त संस्था है। यह भारत के बाहरी सांस्कृतिक संबंधों से संबंधित नीतियों से संबंधित है।
  • 75 विभिन्न लोकतंत्रों से युवा नेताओं को आमंत्रित किया जाएगा।
  • इन युवा नेताओं को सत्तारूढ़ दल, विपक्षी दल और अन्य प्रमुख दलों से आमंत्रित किया जाएगा।
  • इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए विभिन्न समूहों में 5-7 नेताओं को आमंत्रित किया जाएगा।

उद्घाटन बैच

उद्घाटन बैच में बांग्लादेश, बांग्लादेश, चिली, श्रीलंका, इंडोनेशिया, जापान और जाम्बिया जैसे देशों के नेता शामिल होंगे। इस संरचना में दक्षिण पूर्व एशिया और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों और महाद्वीपों का प्रतिनिधित्व करने वाले देश शामिल हैं। इस कार्यक्रम का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे। यह आयोजन 25 नवंबर से शुरू होगा।

बैठक का उद्देश्य

इस आयोजन के माध्यम से, आयोजक 75 लोकतंत्रों के अगली पीढ़ी के नेताओं के साथ संबंध बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ये लोग अपने-अपने देशों के भावी नेता बनेंगे। इससे उन्हें इस आयोजन के माध्यम से भारत में समृद्ध लोकतांत्रिक संस्कृति का व्यापक विचार मिलेगा। वे ICCR के साथ कम से कम एक राज्य में भी जाएंगे।

पृष्ठभूमि

यह पहल इस प्रकाश में शुरू की गई है कि, भारत लोकतंत्रों की भू-राजनीति के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

SOURCE-GK TODAY

PAPER-G.S.1PRE

 

मुख्यमंत्री राशन आपके द्वार योजना

मध्य प्रदेश के राज्य मंत्रिमंडल ने 19 अक्टूबर, 2021 को अपनी बैठक में ‘मुख्यमंत्री राशन आपके द्वार योजना’ को लागू करने का निर्णय लिया।

मुख्यमंत्री राशन आपके द्वार योजना

  • गरीब आदिवासी परिवारों को लाभ पहुंचाने के लिए ‘मुख्यमंत्री राशन आपके द्वार योजना’ लागू की जाएगी।
  • इसे राज्य के आदिवासी विकास खंडों में लागू किया जाएगा, उन ब्लॉकों को छोड़कर जो उपचुनाव वाले जिलों के अंतर्गत आते हैं।
  • इस योजना से 16 जिलों के 74 विकासखंडों के लगभग 7511 गांवों के आदिवासी परिवारों को लाभ मिलेगा।

राशन कैसे बांटा जाएगा?

  • राशन का वितरण मुख्यालय गांव से साथ ही वाहन के माध्यम से दुकान से जुड़े अन्य गांवों में पहुंचाया जाएगा।
  • कलेक्टर प्रत्येक माह के दिन गांव में वितरण के लिए निर्धारित करेंगे।
  • एक माह में औसतन 22 से 25 दिन तक एक वाहन द्वारा 220 से 440 क्विंटल राशन वितरित किया जाएगा।

वार्षिक व्यय

इस योजना के तहत एक मीट्रिक टन वाहन पर प्रति माह 24,000 रुपये का वार्षिक व्यय होगा जबकि 2 मीट्रिक टन वाहन पर 31,000 रुपये प्रति माह का व्यय होगा। इस तरह कुल 14.07 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

खाद्यान्न की गुणवत्ता

इस योजना के तहत वाहन में लदे खाद्यान्न की गुणवत्ता की भी जांच की जाएगी।

SOURCE-GK TODAY

PAPER-G.S.1 PRE

 

ब्लू स्काई एनालिटिक्स

क्लाइमेट टेक स्टार्ट-अप, ब्लू स्काई एनालिटिक्स (Blue Sky Analytics) ने फसल जलने से संबंधित उत्सर्जन पर अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की। इस रिपोर्ट में भारत को शीर्ष स्थान पर रखा गया है।

मुख्य बिंदु

  • इस रिपोर्ट के अनुसार, 2015-2020 की अवधि में भारत का योगदान कुल वैश्विक उत्सर्जन में 13% था।
  • इस रिपोर्ट में डेटा 2016 और 2019 के बीच फसल जलाने सम्बंधित उत्सर्जन के नीचे की प्रवृत्ति की पुष्टि करता है। इस रिपोर्ट के अनुसार, 2016-2019 के बीच फसल अवशेष जलाने के कारण ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में 39% की कमी आई है।
  • 2019-20 के बीच, GHG उत्सर्जन में 8% की वृद्धि हुई है। इसके परिणामस्वरूप भारत का वैश्विक योगदान 12.2% हो गया है।

ब्लू स्काई एनालिटिक्स (Blue Sky Analytics)

ब्लू स्काई एनालिटिक्स एक भारतीय क्लाइमेट टेक स्टार्ट-अप है। इसकी स्थापना एक IIT के पूर्व छात्र ने की थी। यह “क्लाइमेट ट्रेस” नामक वैश्विक गठबंधन का एक हिस्सा है।

Climate TRACE

क्लाइमेट ट्रेस एक वैश्विक गठबंधन है जो निकट-वास्तविक समय और स्वतंत्र हाई-रिज़ॉल्यूशन GHG उत्सर्जन डेटा प्रदान करके जलवायु कार्रवाई में तेजी लाने के मिशन पर काम करता है।

उत्सर्जन अनुमान

ब्लू स्काई एनालिटिक्स द्वारा प्रदान किए गए उत्सर्जन अनुमान मानवीय गतिविधियों के कारण होने वाली आग सम्बन्धी घटनाओं को कवर करते हैं। इसमें वन क्षेत्रों, कृषि भूमि या फसल अवशेषों को जलाना शामिल है। इसने कई उपग्रह डेटा स्रोतों को मिलाकर रिपोर्ट तैयार की।

SOURCE-GK TODAY

PAPER-G.S.3