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Current Affair 22 August 2021

Current Affairs – 22 August, 2021

भारतीय नौसेना के जहाज शिवालिक और कदमत बहुपक्षीय सामुद्रिक युद्धाभ्यास मालाबार में भाग लेने के लिए गुआम पहुंचे

भारतीय नौसेना के जहाज शिवालिक और कदमत दक्षिण पूर्व एशिया और प्रशांत महासागर के देशों में जारी तैनाती के अंतर्गत 21 अगस्त 2021 को संयुक्त राज्य अमेरिका के एक द्वीप क्षेत्र गुआम में पहुंचे। दोनों जहाजों को ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेनाओं के बीच वार्षिक अभ्यास मालाबार-21 में भाग लेने के लिए भेजना तय किया गया है। सामुद्रिक अभ्यास की मालाबार श्रृंखला 1992 में भारतीय तथा अमेरिकी नौसेना के बीच एक द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में शुरू हुई और प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र में चार प्रमुख देशों की नौसेनाओं को शामिल कर बाद के वर्षों में इसके कद में वृद्धि हुई है। अभ्यास के अंतर्गत वाइस एडमिरल एबी सिंह, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पूर्वी नौसेना कमान, रीयर एडमिरल लियोनार्ड सी, कमांडर सीटीएफ -74 के साथ एक कार्य योजना विकसित करने और समुद्री क्षेत्र में समन्वित संचालन पर ध्यान केंद्रित करते हुए अभियानगत वार्ता करेंगे। पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग, रियर एडमिरल तरुण सोबती 26 अगस्त 2021 से शुरू होने वाले समुद्री चरण की बारी के दौरान आईएनएस शिवालिक पर जाएंगे।

अभ्यास मालाबार-21 दिनांक 26 से 29 अगस्त 2021 से समुद्र में अमेरिकी नौसेना (यूएसएन), जापान की नौसेना (जेएमएसडीएफ) और ऑस्ट्रेलियाई नौसेना (आरएएन) के साथ आयोजित किया जाएगा। यह अभ्यास एकसमान समझ वाली नौसेनाओं को अंतर-संचालन बढ़ाने, नौसैनिक संचालन संबंधी सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं से लाभ प्राप्त करने और समुद्री सुरक्षा संचालन से जुड़ी प्रक्रियाओं की सामान्य समझ विकसित करने का अवसर प्रदान करेगा। मालाबार-21 में भाग लेने वाली नौसेनाओं के डिस्ट्रॉयर्स, फ्रिगेट्स, कॉर्वेट्स, सबमरीन, हेलिकॉप्टर्स और लॉन्ग रेंज मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट के बीच तीव्र सैन्य तौर तरीकों के अभ्यास होंगे। अभ्यास के दौरान कॉम्प्लेक्स सरफेस, सब सरफेस और एयर ऑपरेशन्स जिसमें लाइव वेपन फायरिंग ड्रिल, एंटी-सरफेस, एंटी-एयर और एंटी-सबमरीन वारफेयर ड्रिल, संयुक्त युद्धाभ्यास और सामरिक अभ्यास शामिल हैं। कोविड प्रतिबंधों के बावजूद इन अभ्यासों का संचालन भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच तालमेल और सुरक्षित समुद्र के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

भाग लेने वाले भारतीय जहाज शिवालिक और कदमत विशाखापत्तनम में पूर्वी नौसेना कमान में स्थित भारतीय नौसेना के नवीनतम स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित, बहु-भूमिका गाइडेड मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट और एंटी-सबमरीन कार्वेट हैं और नौसेना के पूर्वी बेड़े का हिस्सा हैं। आईएनएस शिवालिक की कमान कैप्टन कपिल मेहता के पास है जबकि आईएनएस कदमत की कमान कमांडर आर के महाराणा के पास है। दोनों जहाज हथियारों और सेंसर की एक बहुआयामी एरे से लैस हैं, अनेक भूमिकाओं में इस्तेमाल होने वाले हेलीकॉप्टर ले जा सकते हैं और भारत की युद्धपोत निर्माण क्षमताओं के विकास की अगुवाई कर सकते हैं।

शिवालिक और कदमत की खासियत

इस अभ्यास में भाग लेने वाले भारतीय जहाज शिवालिक और कदमत नवीनतम स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित, मल्टी-रोल गाइडेड मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट और एंटी-सबमरीन कार्वेट हैं। ये विशाखापत्तनम के पूर्वी नौसेना कमान में स्थित भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े का हिस्सा हैं। आईएनएस शिवालिक की कमान कैप्टन कपिल मेहता के पास है, जबकि आईएनएस कदमत की कमान कमांडर आरके महाराणा के पास है। दोनों जहाज हथियारों और सेंसर से लैस हैं। ये दोनों जहाज मल्टी-रोल वाले हेलीकॉप्टर ले जा सकते हैं और भारत की युद्धपोत निर्माण क्षमताओं के विकास का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

TOPIC-IR

 

आइकॉनिक वीक

केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय अपने ‘आइकॉनिक वीक’ समारोह के तहत 23 से 29 अगस्त, 2021 तक ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मनाने के लिए अनेक उत्कृष्ट कार्यकलापों की एक श्रृंखला शुरू करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। माननीय केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अनुराग ठाकुर भव्य समारोह की शुरुआत करेंगे जिसमें ‘जन भागीदारी और जन आंदोलन’ की समग्र भावना के तहत देश भर से लोगों की भागीदारी आकर्षित की जाएगी। इसका उद्देश्य व्यापक आउटरीच कार्यकलापों के माध्यम से ‘नए भारत’ की अद्भुत यात्रा को दर्शाना और स्वतंत्रता संग्राम के ‘गुमनाम नायकों’  सहित स्वतंत्रता सेनानियों के बहुमूल्य योगदान का जश्न मनाना है।

सहयोग की भावना पर आधारित महोत्सव के प्रमुख पहलुओं में से एक सांस्कृतिक कार्यक्रमों, नुक्कड़ नाटक और टेलीविजन कार्यक्रमों जैसे पारंपरिक साधनों के साथ-साथ डिजिटल/सोशल मीडिया के नवीन माध्यम से सभी जगह पहुंच संभव है। आकाशवाणी का दैनिक कैप्सूल ‘आजादी का सफर, आकाशवाणी के साथ’ विभिन्न राज्यों के सूचना और जनसंपर्क निदेशालय और सूचना और प्रसारण मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालयों के सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से भारत भर के स्कूलों और कॉलेजों तक पहुंचेगा। आकाशवाणी नेटवर्क द्वारा विशेष कार्यक्रमों की एक श्रृंखला शुरू की जाएगी, इनमें धरोहर (स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं के भाषण), निशान (75 प्रमुख ऐतिहासिक स्थल प्रदर्शित किए जाने हैं) और अपराजिता (महिला नेता) शामिल हैं। दूरदर्शन नेटवर्क पर चल रहे गुमनाम नायकों और स्वतंत्रता संग्राम दैनिक विशेष समाचार कैप्सूल के अलावा ‘नए भारत का नया सफर’ और ‘जर्नी ऑफ न्यू इंडिया’ के तहत क्षेत्रीय कार्यक्रमों का प्रसारण करेगा, जिसमें कूटनीति, डिजिटल भारत, विधायी सुधार आदि जैसे विषय शामिल होंगे।

इस विशेष सप्ताह की प्रमुख विशेषता प्रतिष्ठित फिल्मों का प्रदर्शन होगी। दूरदर्शन नेटवर्क ‘नेताजी’, ‘देसी रियासतों का विलय’, आदि जैसे वृत्तचित्रों की एक श्रृंखला का प्रदर्शन करेगा। इस दौरान ‘राज़ी’ जैसी लोकप्रिय भारतीय फिल्मों का भी प्रसारण किया जाएगा। राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम-एनएफडीसी अपने ओटीटी प्लेटफॉर्म www.cinemasofindia.com पर एक फिल्म फेस्टिवल का भी आयोजन कर रहा है, जिसमें एक विशेष रूप से तैयार किए गए फिल्मों के समूह में ‘आइलैंड सिटी’, ‘क्रॉसिंग ब्रिज’ आदि जैसी फिल्मों को दिखाया जाएगा। अन्य मुख्य आकर्षण में फिल्म छात्रों और उत्साही लोगों के लिए एक ऑनलाइन इंटरएक्टिव सत्र शामिल है। एनएफडीसी, और फिल्म प्रभाग द्वारा “फिल्म निर्माण में तकनीकी प्रगति” पर एक वेबिनार भी आयोजित होगा।

फिल्म प्रभाग द्वारा उत्साह को बढ़ाने के लिए, ‘इंडिया@75: प्रगति की यात्रा’ और ‘इंडिया@75: भारत के प्रतीक’ जैसे अन्य ऑनलाइन फिल्म समारोहों की एक श्रृंखला 23 से 25 अगस्त, और 26 से 28 अगस्त, 2021 तक आयोजित की जाएगी। फिल्म समारोह निदेशालय (डीएफएफ) भारत में अन्य देशों के विभिन्न दूतावासों में फिल्मों की स्क्रीनिंग के लिए विदेश मंत्रालय के साथ सहयोग कर रहा है। एनएफएआई 23 से 29 अगस्त, 2021 तक एनएफएआई की वेबसाइट पर क्लासिक सिनेमा के बारे में वर्चुअल माध्यम से लाइव फिल्म पोस्टर प्रदर्शनी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देगा।

ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन (बीओसी) देश भर में नुक्कड़ नाटकों, स्किट, मैजिक शो, कठपुतली, लोक गायन के माध्यम से आरओबी द्वारा 50 से अधिक एकीकृत संचार तथा आउटरीच कार्यक्रमों और सॉन्ग एंड ड्रामा डिवीजन द्वारा 1,000 से अधिक पीआरटी (प्राइवेट रेजिस्टर्ड ट्रूप) के माध्यम से लोगों तक पहुंचेगा। इसके अलावा, बीओसी ‘मेकिंग ऑफ द कॉन्स्टीट्यूशन’ पर एक ई-बुक का विमोचन करेगा जो इसकी वेबसाइट पर उपलब्ध होगी। उत्साही पाठक भारत भर में प्रकाशन विभाग की पुस्तक दीर्घाओं में संबंधित विषयों पर सूचनात्मक और रोमांचक पुस्तकें प्राप्त कर सकते हैं।

युवा दर्शक, स्वतंत्रता संग्राम और न्यू इंडिया की दृश्य-श्रव्य झलकियों के साथ-साथ मंत्रालय के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इंटरैक्टिव गतिविधियों, क्विज और प्रतियोगिताओं का भी आनंद ले सकते हैं।

‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत इस महत्वपूर्ण सप्ताह में सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा भव्य उत्सव मनाया जाएगा जो एक युवा, नए और शानदार भारत की आकांक्षाओं और सपनों के साथ अतीत के स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों और गौरव के मेल को प्रदर्शित करेगा।

देश की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर 75 सप्ताह पूर्व आजादी का अमृत महोत्सव शुरू होने जा रहा है। पूरे देश में यह महोत्सव मनाया जाएगा। इसके लिए हर राज्य ने अपने-अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं।

हम सभी जानते हैं कि 12 मार्च 1930 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह की शुरुआत की थी। 2020 में नमक सत्याग्रह के 91 वर्ष पूरे होने के पर प्रधानमंत्री मोदी ने साबरमती आश्रम से अमृत महोत्सव की शुरुआत पदयात्रा को हरी झंडी दिखाकर की। सोमवार को केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने 75 किलोमीटर की पदयात्रा पूरी कर ली है। अब इस महोत्सव की रूपरेखा तय करने के लिए गृहमंत्री की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय क्रियान्वयन समिति बनाई गई है।

आजादी का अमृत महोत्सव : इस तारीख तक जारी रहेगा महोत्सव

15 अगस्त, 2022 को देश की आजादी के 75 साल पूरे होने जा रहे हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए 75वीं वर्षगांठ से एक साल पहले यानी 15 अगस्त 2021 से इन कार्यक्रमों को शुरुआत की जाएगी। जिसमें देश की अदम्य भावना के उत्सव दिखाने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इनमें संगीत, नृत्य, प्रवचन, प्रस्तावना पठन (प्रत्येक पंक्ति देश के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली विभिन्न भाषाओं में) शामिल हैं। युवा शक्ति को भारत के भविष्य के रूप में दिखाते हुए गायकवृंद में 75 स्वर के साथ-साथ 75 नर्तक होंगे। यह कार्यक्रम 15 अगस्त 2023 तक जारी रहेंगे।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.1

TOPIC-HISTORY

 

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन

केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण कल नई दिल्ली में राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन का शुभारंभ करेंगी।

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) में केंद्र सरकार की ब्राउनफील्ड अवसंरचना परिसंपत्तियों की चार-वर्षीय पाइपलाइन भी शामिल है। निवेशकों को दृश्यता प्रदान करने के अलावा, एनएमपी सरकार की परिसंपत्ति मुद्रीकरण पहल के लिए एक मध्यम अवधि के रोडमैप के रूप में भी कार्य करेगी।

केंद्रीय बजट 2021-22 में अवसंरचना निर्माण के लिए नवीन और वैकल्पिक वित्तपोषण जुटाने के साधन के रूप में परिसंपत्ति मुद्रीकरण पर बहुत जोर दिया गया था और इसमें कई प्रमुख घोषणाओं को भी शामिल किया गया था।

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन पुस्तक का विमोचन नीति आयोग के उपाध्यक्ष, डॉ राजीव कुमार, सीईओ, श्री अमिताभ कांत और संबंधित मंत्रालयों, जिनकी परिसंपत्तियां पर मुद्रीकरण पाइपलाइन आधारित है, के सचिवों की उपस्थिति में किया जाएगा।

क्या है NMP

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (NMP) में केंद्र सरकार अपनी ब्राउनफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर संपत्तियों (Brownfield Infrastructure Assets) से पैसे जुटाने की योजना बना रही है। यह चार के हिसाब से बनी योजना है।

NMP से इन्वेस्टर्स को भारत सरकार की संपत्ति की विजिबिलिटी तो मिलेगी ही, इसके साथ ही यह सरकार की संपत्ति मुद्रीकरण पहल (Asset Monetisation initiative) के लिए एक मध्यम अवधि के रोडमैप के रूप में भी काम करेगा।

केंद्रीय बजट में हुई थी घोषणा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) में अपने 2021-22 के केंद्रीय बजट में बुनियादी ढांचे के लिए इनोवेटिव और वैकल्पिक फाइनेंस जुटाने के साधन के रूप में Asset Monetisation initiative पर बहुत जोर दिया है। वित्त मंत्री के बजट भाषण में भी Asset Monetisation initiative से जुड़ी कई प्रमुख घोषणाएं भी शामिल रही थीं।

राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन

मुख्य बिंदु:

  • टास्क फोर्स ने वित्त वर्ष 2019-25 के लिये NIP पर अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश की है। यहाँ ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि ‘टास्क फोर्स की सारांश’ रिपोर्ट वित्त मंत्री द्वारा 31 दिसंबर, 2019 को पहले ही जारी की जा चुकी है।
  • रिपोर्ट के अनुसार पाँच वित्तीय वर्षों में अर्थात वर्ष 2020-25 की अवधि के दौरान ‘अवसंरचना’ (Infrastructure) पर 111 लाख करोड़ रुपए के निवेश का अनुमान है।

पृष्ठभूमि:

  • वर्ष 2019 के स्वतंत्रता दिवस पर भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा था कि अगले 5 वर्षों में आधारभूत अवसंरचना पर 100 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। इसी का अनुसरण करते हुए 31 दिसंबर, 2019 को 103 करोड़ रुपए की लागत वाली राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन शुरू की गई। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के अंतर्गत 6500 से अधिक परियोजनाएँ शुरू की जाएगी।

विजन:

  • अवसंरचना सेवाओं के माध्यम से लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना तथा वैश्विक मानकों के अनुरूप ‘जीवन सुगमता’ (Ease of Living) को प्राप्त करना।

मिशन (Mission):

  • प्रमुख क्षेत्रों में भारत की आधारभूत अवसंरचना के विकास की 5 वर्षीय योजना विकसित करना।
  • वैश्विक मानकों के अनुसार सार्वजनिक अवसंरचना के डिज़ाइन, वितरण और रखरखाव को सुगम बनाना।
  • सार्वजनिक अवसंरचना सेवाओं के विनियमन और प्रशासन में सुधार करना।
  • सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में वैश्विक रैंकिंग में भारत की स्थिति में सुधार करना।

NIP में शामिल परियोजनाएँ:

  • ‘राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन’ में आवास, सुरक्षित पेयजल, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा उपलब्धता और आधुनिक रेलवे स्टेशन जैसी परियोजनाएँ शामिल हैं।

टास्क फोर्स की रिपोर्ट से संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य:

  • रिपोर्ट के अनुसार ऊर्जा (24%), शहरी नियोजन (17%), रेलवे (12%) और सड़क (18%) जैसे क्षेत्रों पर कुल परियोजना पूंजीगत व्यय के 70% निवेश की आवश्यकता होगी।
  • NIP के कार्यान्वयन में केंद्र (39%) और राज्यों (39%) की लगभग समान हिस्सेदारी होगी साथ ही निजी क्षेत्र से लगभग 22% तक सहयोग होने की उम्मीद है।
  • NIP में 100 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली सभी ग्रीनफील्ड या ब्राउनफील्ड परियोजनाओं को शामिल किया जाएगा।

ग्रीनफील्ड परियोजना (Greenfield Project):

  • ‘ग्रीनफील्ड परियोजना’ का तात्पर्य ऐसी परियोजना से है, जिसमें किसी पूर्व कार्य/परियोजना का अनुसरण नहीं किया जाता है। अवसंरचना में अप्रयुक्त भूमि पर तैयार की जाने वाली परियोजनाएँ जिनमें मौजूदा संरचना को फिर से तैयार करने या ध्वस्त करने की आवश्यकता नहीं होती है, उन्हें ‘ग्रीन फील्ड परियोजना’ कहा जाता है।

ब्राउनफील्ड परियोजना (Brownfield project):

  • जिन परियोजनाओं को संशोधित या अपग्रेड किया जाता है, उन्हें ‘ब्राउनफील्ड परियोजना’ कहा जाता है।

वित्त प्रबंधन की दिशा में सिफारिशें:

  • अगले पाँच वर्षों में अवसंरचना क्षेत्र में निवेश को बढ़ाने के लिये ‘म्यूनिसपल बॉण्ड’ बाज़ार, परिसंपत्ति की बिक्री द्वारा आय, आधारभूत ढाँचे की संपत्ति का मुद्रीकरण, ‘कॉर्पोरेट बॉण्ड’ बाज़ार और आधारभूत अवसंरचना के क्षेत्र के लिये वित्तीय संस्थान की स्थापना करना जैसे उपायों को अपनाना होगा।

समितियों का गठन:

  • NIP की प्रगति की निगरानी करने तथा कार्यों का समय पर पूरा करने की दिशा में एक समिति;
  • परियोजना में समन्वयन के लिये प्रत्येक अवसंरचना के लिये मंत्रालय स्तर पर एक संचालन समिति;
  • वित्तीय संसाधन जुटाने के लिये ‘आर्थिक मामलों का विभाग’ (Department of Economic Affairs-DEA) के नियंत्रण में एक संचालन समिति;

NIP का महत्त्व एवं आवश्यकता:

  • आधारभूत अवसंरचना की कमी आर्थिक विकास में सबसे बड़ी बाधा है।
  • वर्तमान में सरकार, निजी क्षेत्र को एक प्रमुख भागीदार के रूप में देखती है। अत: सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों को एक साथ लाने के लिये एक प्रभावी मॉडल तैयार करने की आवश्यकता है।
  • प्राकृतिक आपदाओं तथा अप्रत्याशित घटनाओं में वृद्धि के कारण किसी भी देश की आपूर्ति श्रृंखला की लोचशीलता बहुत महत्त्वपूर्ण हो जाती है।
  • आधारभूत संरचना की विकास के लिये वित्तपोषण वह मुद्दा है जिसका समाधान निकालना आवश्यक है।

निष्कर्ष:

  • राष्ट्रीय अवसंरचना परियोजनाओं से देश की आधारभूत अवसंरचना सुदृढ़ होगी, जिससे देश में उत्पादन की दर बढ़ेगी और साथ ही निवेशकों को आकर्षित करने की बेहतर परिस्थितियों का निर्माण होगा।
  • अर्थव्यवस्था की मांग में वृद्धि होगी और रोज़गार के अवसर निर्मित होंगे फलतः सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी। इस प्रकार भारतीय अर्थव्यवस्था के पाँच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का मार्ग प्रशस्त होगा।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

TOPIC-ECONOMY

 

भारत के सबसे ऊंचे हर्बल पार्क

उत्तराखंड के चमोली जिले के माणा गांव में भारत-चीन सीमा के पास 11,000 फीट की ऊंचाई पर भारत के सबसे ऊंचे हर्बल पार्क का उद्घाटन किया गया।

मुख्य बिंदु

इस ऊंचाई वाले हर्बल पार्क का उद्घाटन विभिन्न औषधीय और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण अल्पाइन प्रजातियों के संरक्षण और इन प्रजातियों के प्रसार और आवास पारिस्थितिकी पर अनुसंधान करने के उद्देश्य से किया गया है।

इसे कहाँ विकसित किया गया है?

माणा गांव में तीन एकड़ के क्षेत्र में यह पार्क विकसित किया गया है। माणा वन पंचायत ने जमीन दी थी। इसे उत्तराखंड वन विभाग के अनुसंधान विंग द्वारा विकसित किया गया है।

इसे कैसे विकसित किया गया?

इस पार्क को केंद्र सरकार की प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (Compensatory Afforestation Fund Management and Planning Authority – CAMPA) योजना के तहत तीन साल में विकसित किया गया था।

हर्बल पार्क

इस हर्बल पार्क में 40 प्रजातियां शामिल हैं जो भारतीय हिमालयी क्षेत्र में ऊंचाई वाले अल्पाइन क्षेत्रों में पाई जाती हैं। इनमें से कई प्रजातियों को International Union for Conservation of Nature (IUCN) की लाल सूची के साथ-साथ राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा लुप्तप्राय और संकटग्रस्त के रूप में वर्गीकृत किया गया है। पार्क में कई महत्वपूर्ण औषधीय जड़ी-बूटियाँ भी शामिल हैं।

पार्क के चार खंड

पार्क को चार वर्गों में बांटा गया है:

  • पहला खंड इसमें बद्रीनाथ (भगवान विष्णु) से जुड़ी प्रजातियां शामिल हैं जिनमें बद्री तुलसी, बद्री वृक्ष, बद्री बेर और भोजपत्र का पवित्र वृक्ष शामिल है।
  • दूसरा खंड यह अष्टवर्ग प्रजाति को समर्पित है। यह प्रजाति आठ जड़ी बूटियों का एक समूह है जो हिमालय क्षेत्र में पाई जाती है।
  • तीसरा खंड इसमें सौसुरिया प्रजाति शामिल है और इसमें ब्रह्मकमल शामिल है जो उत्तराखंड का राज्य फूल है।
  • चौथा खंड इसमें मिश्रित अल्पाइन प्रजातियां शामिल हैं जैसे कि अतीश, मीठाविश, चोरू और वंकाकडी।

SOURCE-GK TODAY

PAPER-G.S.3

TOPIC-ENVIRONMENT

 

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह (Kalyan Singh)
का निधन

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का 21 अगस्त को लखनऊ, उत्तर प्रदेश के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 89 वर्ष के थे।उनकी मृत्यु सेप्सिस और बहु अंग विफलता के कारण हुई।

मुख्य बिंदु

राजस्थान के राज्यपाल के रूप में भी कार्य करने वाले दिग्गज नेता को संक्रमण और चेतना के स्तर में कमी के कारण 4 जुलाई को अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में भर्ती कराया गया था।

कल्याण सिंह के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की जाएगी। उनका अंतिम संस्कार 23 अगस्त की शाम नरोरा में गंगा तट पर किया जाएगा। 23 अगस्त को सार्वजनिक अवकाश रहेगा।

कल्याण सिंह (Kalyan Singh)

5 जनवरी, 1932 को जन्मे, सिंह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य थे, उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में दो कार्यकाल और संसद सदस्य के रूप में दो कार्यकाल में कार्य किया। वह दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे।

SOURCE-GK TODAY

PAPER-G.S.1

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