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Current Affair 24 August 2021

Current Affairs – 24 August, 2021

मल्टी-मोड हैंड ग्रेनेड का पहला बैच भारतीय सेना को सौंपा गया

  • डीआरडीओ प्रयोगशाला से टेक्नोलॉजी हस्तातंतरण के बाद इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव लिमिटेड कंपनी द्वारा ग्रेनेड बनाया गया
  • मल्टी-मोड हैंड ग्रेनेड आक्रामक और रक्षात्मक दोनों मोड में अत्यधिक सटीक और विश्वसनीय ढंग से कार्य करता है
  • रक्षा मंत्री ने इसे रक्षा मैन्युफैक्चरिंग में महत्वपूर्ण मील का पत्थर और आत्म-निर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम बताया
  • पिछले दो वर्षों में 17,000 करोड़ रुपए से अधिक का रक्षा निर्यात किया गया

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के टर्मिनल बैलिस्टिक अनुसंधान प्रयोगशाला से टेक्नोलॉजी हस्तांतरण के बाद इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव लिमिटेड (ईईएल) द्वारा बनाया गया मल्टी-मोड हैंड ग्रेनेड (एमएमएचजी) का पहला बैच नागपुर,महाराष्ट्र में 24 अगस्त, 2021 को रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में भारतीय सेना को सौंपा गया।

ईईएल के अध्यक्ष श्री एस एन नुवाल ने निजी क्षेत्र से हथियार की पहली डिलीवरी के मौके पर एमएमएचजी की स्केल प्रतिकृति रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह को सौंपी। इस अवसर पर सेनाध्यक्ष जनरल एस एस नरवणे,रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी, इनफैंट्री महानिदेशक ले. जनरल ए के सामंत्रा और अन्य लोग भी उपस्थित थे।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए सेना को एमएमएचजी सौंपे जाने को सावर्जनिक और निजी क्षेत्र के बीच बढ़ते सहयोग का आदर्शउदाहरण और रक्षा मैन्युफैक्चरिंग में आत्म-निर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा “ आज का दिन भारतीय रक्षा क्षेत्र के इतिहास में यादगार दिन है। रक्षा उत्पादन के मामले में हमारा निजी उद्योग परिपक्व हो रहा है। यह न केवल रक्षा मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में मील का पत्थर है बल्कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आत्म-निर्भर भारत के विजन को हासिल करने में भी मील का पत्थर है।” रक्षा मंत्री ने कोविड-19 प्रतिबंधों  के बीच ऑर्डर की तेजी से डिलीवरी के लिए डीआरडीओ तथा ईईएल की सराहना की और आशा व्यक्त की कि अगली खेप की डिलीवरी तेजी से होगी।

रक्षा मंत्री ने रक्षा क्षेत्र को सशस्त्र बलों की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने वाले आत्म-निर्भर उद्योग में बदलने के लिए सरकार द्वारा किए गए उपायों की जानकारी दी। इन उपायों में उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में डिफेंस इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर की स्थापना, रक्षा उत्पादन और निर्यात संवर्धन नीति (डीपीईपीपी) 2020 का प्रारूप तैयार करना, घरेलू कंपनियों से खरीद के लिए 2021-22 के लिए पूंजी प्राप्ति बजट के अंतर्गत आधुनिकीकरण कोष का 64 प्रतिशत निर्धारित करना, आत्म-निर्भरता और रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 200 रक्षा सामग्रियों की स्वदेशीकरण की सार्थक सूचियों को अधिसूचित करना, आयुध फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) का निगमीकरण, ऑटोमेटिक रूट के अंतर्गत एफडीआई की सीमा 49 से 74 प्रतिशत तथा सरकारी रूट से 74 प्रतिशत से ऊपर करना तथा पूंजी प्राप्ति के लिए बाइ इंडियन – आईडीडीएम (स्वदेश में डिजायन, विकसित और निर्मित) को शीर्ष प्राथमिकता देना शामिल है।

एक अन्य पहल यानी डीआरडीओ द्वारा तकनीक हस्तांतरण का विशेष उल्लेख किया। इन उपायों को रक्षा उद्योग की रीढ़ बताते हुए उन्होंने इनक्यूबेटर होने के लिए डीआरडीओ की सराहना की जो निशुल्क टेक्नोलॉजी हस्तांतरण कर रहा है और 450 से अधिक पेटेंटों को परीक्षण सुविधाओं की पहुंच प्रदान कर रहा है। इससे उद्योग न केवल उपयोग के लिए तैयार टेक्नोलॉजी में सक्षम बना है बल्कि समय, ऊर्जा और धन की बचत की है।

रक्षा मंत्री ने रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार (आईडेक्स) के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इसका लक्ष्य आत्म-निर्भरता की प्राप्ति और एमएसएमई, स्टार्ट-अप,व्यक्तिगत अन्वेषकों, अनुसंधान और विकास संस्थानों तथा एकेडेमी को शामिल करके रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्रों में नवाचार तथा टेक्नोलॉजी विकास को बढ़ावा देना है। इस पहल के अंतर्गत सशस्त्र बलों, सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा प्रतिष्ठानों तथा ओएफबी की कठिनाइयों को चिन्हित किया गया है और समाधान के लिए डिफेंस इंडिया स्टार्ट-अप चैलेंज (डीआईएससी) के माध्यम से उद्यमियों, एमएसएमई, स्टार्ट-अप तथा अन्वेषकों के समक्ष लाया गया है।

मल्टी-मोड ग्रेनेड’, ‘अर्जुन-मार्क-1’ टैंक, ‘अनमैन्ड सरफेस व्हेकिल’ और ‘सी थ्रू आर्मर’ जैसे स्वदेश में विकसित उत्पादों के लिए उद्योग की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे उत्पाद न केवल तैयार किए जा रहे हैं बल्कि बड़े पैमान पर इनका निर्यात किया जा रहा है। वर्ष 2016-17 से 2018-19 के दौरान निर्यात प्राधिकृत संख्या 1,210 थी जो पिछले दो वर्षों में बढ़ कर 1,774 हो गई। परिणामस्वरूप पिछले दो वर्षों में 17,000 करोड़ रुपए से अधिक का रक्षा निर्यात हुआ। श्री राजनाथ सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत जल्द ही न केवल घरेलू उपयोग के लिए रक्षा उत्पाद बनाएगा बल्कि पूरे विश्व के लिए बनाएगा।

ग्रेनेड न केवल अधिक घातक है बल्कि उपयोग में भी सुरक्षित है। इसकी डिजायन विशिष्ट है जो रक्षात्मक (फ्रैगमेंटेशन) तथा आक्रामक (स्टन) मोड में भी काम करता है। इसमें सटीक विलंब  समय है, उपयोग में उच्च विश्वसनीयता है तथा ले जाने में सुरक्षित है।  नए ग्रेनेड प्रथम विश्व युद्धके विशिष्ट जायन के ग्रेनेड नंबर 36 का स्थान लेगा जो अभी तक सेवा में है।

ईएल ने भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना के लिए 10 लाख आधुनिक हैंड ग्रेनेड की आपूर्ति के लिए 01 अक्टूबर, 2020 को रक्षा मंत्रालय के साथ एक करार पर हस्ताक्षर किया था। डिलीवरी थोक उत्पादन मंजूरी से दो वर्षों में की जाएगी। ईईएल को थोक उत्पादन मंजूरी मार्च,2021 में दी गई थी। पहले आदेश की डिलीवरी पांच महीने के भीतर की गई है।

ईईएल ने 2016 में डीआरडीओ से तकनीक प्राप्त की थी, इसे डेटोनिक्स में उच्च गुणवत्ता बनाए रखते हुए सफलतापूर्वक समाविष्ट किया गया। भारतीय सेना और गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशालय (डीजीक्यूए) ने 2017-18 की गर्मियों और सर्दियों में मैदानों, रेगिस्तान और ऊंचाई पर व्यापक परीक्षण सफलतापूर्वक किया।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

 

फोरम फॉरडीकार्बनाइजिंग ट्रांसपोर्ट

नीति आयोग और वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (डब्ल्यूआरआई), इंडिया ने संयुक्त रूप से 23 अगस्त को एनडीसी-ट्रांसपोर्ट इनीशियेटिव फोर एशिया (एनडीसी-टीआईए) परियोजना के तहत भारत में ‘फोरम फॉर डीकार्बनाइजिंग ट्रांसपोर्ट’ शुरू किया।

यह कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित किया गया था और नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) श्री अमिताभ कांत ने इस फोरम (मंच) का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में विभिन्न मंत्रालयों और एनडीसी-टीआईए परियोजना भागीदारों के साथ-साथ मोबिलिटी (आवाजाही) और ऊर्जा क्षेत्र के हितधारकों सहित गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस परियोजना का उद्देश्य (दो डिग्री से नीचे के मार्ग के अनुरूप) एशिया में ग्रीन हाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन (परिवहन क्षेत्र) के चरम स्तर को नीचे लाना है। ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन की वजह सेसंकुलन और वायु प्रदूषण जैसी समस्याएं होती हैं।

भारत में एक विशाल और विविध परिवहन क्षेत्र है, जो कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करने वाला तीसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए), 2020; पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, 2018 के डेटा से पता चलता है कि परिवहन क्षेत्र में शामिल सड़क परिवहन, कॉर्बन डाईऑक्साइड के कुल उत्सर्जन में 90% से अधिक का योगदान देता है। विभिन्न नीतिगत उपायों और पहलों के माध्यम से, भारत सरकार देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को अपनाने पर मुख्य ध्यान देने के साथ सड़क परिवहन के कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को घटाने (डीकार्बनाइजेशन) की दिशा में लगातार काम कर रही है। नीति आयोग नेशनल मिशन ऑन ट्रांसफोर्मेटिव मोबिलिटी एंड बैटरी स्टोरेज के माध्यम से ईवी और सतत आवाजाही को बढ़ावा देने में शीर्ष भूमिका निभा रहा है।

हालांकि, देश भर में इलेक्ट्रिक वाहनों का लाभ उठाने और उन्हें कारगर बनाने की खातिर विभिन्न हितधारकों के लिए एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की आवश्यकता है। इन हितधारकों में केंद्र/राज्य सरकारें, राज्य-नामित एजेंसियां, वित्तीय संस्थान, व्यवसाय, मूल उपकरण विनिर्माता (ओईएम), अनुसंधान एवं तकनीकी संस्थान, निजी निकाय और थिंक टैंक शामिल हैं। इन हितधारकों के बीच एक समन्वित प्रयास निवेश को सक्षम बनाने, इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को प्रोत्साहित करने और उद्योग में उचित संचालन सुनिश्चित करने में मदद करेगा।

एनडीसी-टीआईए इंडिया घटक प्रभावी नीतियों की एक सुसंगत रणनीति विकसित करने और देश में परिवहन क्षेत्र में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम करने के लिए एक बहु-हितधारक मंच के गठन पर केंद्रित है। इस मंच के माध्यम से, डब्ल्यूआरआई, भारत की टीम;नीति आयोग और अन्य परियोजना भागीदार, इन सभी हितधारकों के साथ मिलकर करीब से काम करेंगे ताकि भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में तेजी लाने के लिए रणनीति तैयार की जा सके और व्यापार का उपयुक्त मॉडल विकसित किया जा सके। फोरम समान नीतियों के विकास के लिए संवाद शुरू करने और परिवहन क्षेत्र में उत्सर्जन को कम करने में विशिष्ट परिणाम प्राप्त करने में मदद करने के लिए एक मंच भी प्रदान करेगा।

नीति आयोग के सीईओ ने अपने मुख्य संबोधन में कहा, “स्टेकहोल्डर फोरम ऑन ट्रांसपोर्ट डीकार्बनाइजेशन (परिवहन क्षेत्र में कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को कम करने को लेकर हितधारकों का मंच) देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक क्रांतिकारी पड़ाव है। यह मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, बहुपक्षीय एजेंसियों, वित्तीय संस्थानों के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार को एक साझा मंच पर लाएगा। यह व्यापार के एक अभिनव मॉडल के विकास में मदद करेगा जिसके साथ लक्षित परिणाम मिलेंगे और भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी क्षेत्र का समग्र विकास होगा। प्रभावी सहयोग, समन्वय और अभिसरण के माध्यम से, हमें भारत में स्वच्छ आवाजाही की शुरुआत करनेके लिए मिलकर काम करना चाहिए।”

डब्ल्यूआरआई इंडिया के सीईओ डॉय ओ.पीय अग्रवाल ने कहा, “भारत के पास अपने शहरी परिवहन क्षेत्र में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कम करने का एक बड़ा अवसर है। देश को मोटर वाहनों के विद्युतीकरण के साथ-साथ पैदल चलने, साइकिल चलाने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की रणनीति अपनानी चाहिए।”

स्टेकहोल्डर फोरम इन डीकार्बनाइजिंग ट्रांसपोर्ट की आवश्यकता को लेकर डब्ल्यूआरआई इंडिया के कार्यकारी निदेशक (एकीकृत परिवहन) अमित भट्ट ने कहा, “परिवहन क्षेत्र में कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को कम करने के लिए कई मोर्चे पर कार्रवाई की आवश्यकता होगी। फोरम फोर डीकार्बनाइजेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट, भारत में परिवहन क्षेत्र को स्वच्छ बनाने के लिए विविध आवाजों को साथ लाने और एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत के लिए एक माध्यम के रूप में कार्य करेगा।”

एनडीसी ट्रांसपोर्ट इनिशिएटिव फोर एशिया (टीआईए 2020-2023)सात संगठनों का एक संयुक्त कार्यक्रम है जो चीन, भारत और वियतनाम को अपने-अपने देशों में परिवहन क्षेत्र में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कम करने के उद्देश्य से एक व्यापक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए अपने साथ जोड़ेगा। यह परियोजना इंटरनेशनल क्लाइमेट इनीशियेटिव (आईकेआई) का हिस्सा है। जर्मनी का पर्यावरण, प्रकृति संरक्षण और परमाणु सुरक्षा मंत्रालय (बीएमयू) जर्मन बुंडेस्टेग (जर्मनी की संसद) द्वारा अपनाए गए निर्णय के आधार पर पहल का समर्थन करता है।

नीति आयोग परियोजना के भारत घटक के लिए कार्यान्वयन भागीदार है।

विश्व संसाधन संस्थान

WRI एक वैश्विक अनुसंधान संगठन है जो 50 से अधिक देशों में फैला है और पर्यावरण और विकास के चौराहे पर छह महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करता है: जलवायु, ऊर्जा, भोजन, जंगल, पानी और शहर और परिवहन।

इसकी स्थापना 1982 में हुई थी। इसका मुख्यालय वाशिंगटन, अमेरिका में है।

नीति आयोग

नीति आयोग (राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान) भारत सरकार द्वारा गठित एक नया संस्थान है जिसे योजना आयोग के स्थान पर बनाया गया है। 1 जनवरी 2015 को इस नए संस्थान के सम्बन्ध में जानकारी देने वाला मन्त्रिमण्डल का प्रस्ताव जारी किया गया। यह संस्थान सरकार के थिंक टैंक के रूप में सेवाएँ प्रदान करेगा और उसे निर्देशात्मक एवं नीतिगत गतिशीलता प्रदान करेगा। नीति आयोग, केन्द्र और राज्य स्तरों पर सरकार को नीति के प्रमुख कारकों के सम्बन्ध में प्रासंगिक महत्वपूर्ण एवं तकनीकी परामर्श उपलब्ध कराएगा। इसमें आर्थिक मोर्चे पर राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय आयात, देश के भीतर, साथ ही साथ अन्य देशों की बेहतरीन पद्धतियों का प्रसार नए नीतिगत विचारों का समावेश और विशिष्ट विषयों पर आधारित समर्थन से सम्बन्धित मामले शामिल होंगे नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कान्त हैं। नीति आयोग के सदस्यों में विवेक देवराय, वी॰के॰ सारस्वत, रमेश चन्द्र और विनोद पाल शामिल हैं। योजना आयोग और नीति आयोग में मूलभूत अन्तर है कि इससे केन्द्र से राज्यों की तरफ चलने वाले एक पक्षीय नीतिगत क्रम को एक महत्वपूर्ण विकासवादी परिवर्तन के रूप में राज्यों की वास्तविक और सतत भागीदारी से बदल दिया जाएगा।

नीति आयोग ग्राम स्तर पर विश्वसनीय योजना तैयार करने के लिए तन्त्र विकसित करेगा और इसे उत्तरोत्तर उच्च स्तर तक पहुँचायेगा। आयोग राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय विशेषज्ञों, प्रैक्टिशनरों तथा अन्य हितधारकों के सहयोगात्मक समुदाय के जरिए ज्ञान, नवाचार, उद्यमशीलता सहायक प्रणाली बनाएगा। इसके अतिरिक्त आयोग कार्यक्रमों और नीतियों के क्रियान्वयन के लिए प्रौद्योगिकी उन्नयन और क्षमता निर्माण पर बल देगा

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

TOPIC-ENVIRONMENT

 

दास व्यापार और उसके उन्मूलन के स्मरण के लिए
अंतर्राष्ट्रीय दिवस

दास व्यापार और उसके उन्मूलन के स्मरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस (International Day for the Remembrance of the Slave Trade and its Abolition) हर साल 23 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिन उन लाखों लोगों को याद करने के उद्देश्य से मनाया जाता है जो ट्रांस-अटलांटिक दास व्यापार के शिकार थे।

मुख्य बिंदु

  • 23 अगस्त को यूनेस्को द्वारा दास व्यापार और उसके उन्मूलन के स्मरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित किया गया था। इस दिन, 1791 में, सैंटो डोमिंगो में एक विद्रोह शुरू हुआ था जिसने ट्रांस-अटलांटिक दास व्यापार के उन्मूलन का मार्ग प्रशस्त किया।
  • इस स्मरणोत्सव के साथ, यूनेस्को का उद्देश्य दास व्यापार के इतिहास के बारे में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता को उजागर करना है ताकि लोग आधुनिक दुनिया पर दासता के प्रभाव को स्वीकार कर सकें।

पृष्ठभूमि

  • यूनेस्को के सम्मेलन के 29वें सत्र द्वारा प्रस्ताव 29 सी/40 को अपनाकर इस तिथि का चयन किया गया था।
  • 29 जुलाई, 1998 के महानिदेशक के एक परिपत्र ने इस दिन को बढ़ावा देने के लिए संस्कृति मंत्रियों को आमंत्रित किया।

महत्व

23 अगस्त महत्वपूर्ण है क्योंकि, 1791 में 22 अगस्त-23 अगस्त की रात के दौरान, सेंट डोमिंग (अब हैती) द्वीप पर एक विद्रोह शुरू हुआ था। इस विद्रोह ने ट्रान्साटलांटिक दास व्यापार के उन्मूलन के लिए अग्रणी घटनाओं को जन्म दिया था।

SOURCE-GK TODAY

PAPER-G.S.1

TOPIC-CURRENT

 

भारत का पहला स्वदेशी मोटर चालित व्हीलचेयर वाहन

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास ने नियोबोल्ट (NeoBolt) नामक भारत का पहला स्वदेशी मोटर चालित व्हीलचेयर वाहन विकसित किया है।

मुख्य बिंदु

  • NeoBolt का उपयोग सड़कों के साथ-साथ असमान इलाकों में भी किया जा सकता है।
  • इसकी अधिकतम गति 25 किमी प्रति घंटा है और यह प्रति चार्ज 25 किमी तक की यात्रा कर सकती है।
  • यह व्हीलचेयर कारों, ऑटो रिक्शा और स्कूटरों की तुलना में परिवहन का एक सुविधाजनक, सुरक्षित और कम लागत वाला तरीका हैं।
  • यह लिथियम-आयन बैटरी द्वारा संचालित है।
  • NeoBolt मोटर से चलने वाला अटैचमेंट है जो व्हीलचेयर को सुरक्षित, सड़क पर चलने लायक वाहन में बदल देता है।

व्हीलचेयर आयात

भारत वर्तमान में भारत में सालाना बिकने वाले कुल 3 लाख व्हीलचेयर में से 2.5 लाख व्हीलचेयर आयात करता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि तुलनीय विशेषताओं वाले उत्पाद केवल अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध हैं। लेकिन वे व्हीलचेयर IIT मद्रास के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित किए गए व्हीलचेयर की तुलना में तीन से पांच गुना अधिक महंगे हैं।

यह व्हीलचेयर किसने डिजाइन किया है?

शोधकर्ताओं ने उन संगठनों और अस्पतालों के साथ सहयोग किया जो लोकोमोटर विकलांगता वाले लोगों के लिए काम कर रहे हैं ताकि उनके अनुभवों और डिजाइन समायोजन को देखते हुए इस व्हील चेयर का निर्माण किया जा सके।

व्हीलचेयर का विकास किसने किया?

इस व्हीलचेयर को IIT मद्रास के Centre for Rehabilitation Research and Device Development द्वारा विकसित किया गया है। इस वाहन का व्यवसायीकरण “Neo Motion” नामक स्टार्टअप के माध्यम से किया गया था।

व्हीलचेयर की कीमत क्या है?

यूजर्स के लिए यह व्हीलचेयर 55,000 रुपये की कीमत में उपलब्ध होगी।

SOURCE-GK TODAY

PAPER-G.S.3

 

युक्तधारा

सरकार ने भुवन के तहत ‘युक्तधारा’ (Yuktdhara) नामक एक नया भू-स्थानिक नियोजन पोर्टल लॉन्च किया। इसे ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह ने लॉन्च किया था।

युक्तधारा (Yuktdhara)

  • यह नया पोर्टल रिमोट सेंसिंग के साथ-साथ भौगोलिक सूचना प्रणाली-आधारित डेटा की मदद से नई मनरेगा संपत्तियों को सुविधाजनक बनाने में मदद करेगा ।
  • यह पोर्टल कई राष्ट्रीय ग्रामीण विकास कार्यक्रमों जैसे मनरेगा, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, एकीकृत वाटरशेड प्रबंधन कार्यक्रम, पर ड्राप मोर क्रॉप आदि के तहत बनाए गए जियोटैग के भंडार के रूप में भी काम करेगा ।
  • यह विश्लेषण उपकरणों के साथ कई विषयगत परतों और बहु-अस्थायी उच्च संकल्प पृथ्वी अवलोकन डेटा को एकीकृत करता है। इन उपकरणों का उपयोग करके, योजनाकार योजनाओं के तहत पिछली संपत्तियों का विश्लेषण करने में सक्षम होंगे और ऑनलाइन टूल का उपयोग करके नए कार्यों की पहचान करने में सुविधा प्रदान करेंगे।
  • युक्तधारा आधारित योजनाएं जमीनी स्तर के पदाधिकारियों द्वारा तैयार की जाएंगी। प्रासंगिकता और संसाधन आवंटन के उद्देश्य से योजनाओं को बाद में उपयुक्त अधिकारियों द्वारा सत्यापित किया जाएगा।

इस पोर्टल की योजना किसने बनाई?

इस पोर्टल का लांच विकेंद्रीकृत निर्णय लेने में सहायता के लिए ग्रामीण नियोजन के लिए G2G सेवा की आवश्यकता को साकार करने की दिशा में इसरो और ग्रामीण विकास मंत्रालय के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।

जियोपोर्टल भुवन (Geoportal Bhuvan)

जियोपोर्टल ‘भुवन’ इसरो का एक समृद्ध सूचना आधार है। यह उपग्रह चित्र और विश्लेषणात्मक क्षमता प्रदान करता है। इस प्रकार यह पूरे भारत में कई विकासात्मक योजना गतिविधियों के लिए एक वास्तविक भू-स्थानिक मंच (geospatial platform) बन गया है।

SOURCE-DANIK JAGARAN

PAPER-G.S.3

 

ऑपरेशन देवी शक्ति

अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए केंद्र सरकार लगातार काम कर रही है। अब तक करीब 600 से ज्यादा लोगों की भारत वापसी हो चुकी है। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के साथ भी केंद्र सरकार ने इस मिशन को शुरू कर दिया था। स्वदेश वापसी के इस मिशन का नाम ‘ऑपरेशन देवी शक्ति’ रखा गया है।

अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों को वहां से सुरक्षित निकालने के मिशन पर खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। आखिरकार तालिबान के क्रूर आतंकवादियों से लोगों की जान बचाने के इस मुश्किल मिशन को ऐसा नाम क्यों दिया गया, इसकी जानकारी रखने वाले लोग काफी दिलचस्प बातें बता रहे हैं

इस मिशन का नाम ‘ऑपरेशन देवी शक्ति’ इसलिए रखा गया है, क्योंकि जैसे ‘मां दुर्गा’ राक्षसों से लोगों की रक्षा करती हैं, इसीलिए इस मिशन का लक्ष्य नागरिकों को तालिबान के आतंकियों की हिंसा से सुरक्षित करना है।

SOURCE-BBC NEWS

PAPER-G.S.2

TOPIC-IR