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Current Affair 24 September 2021

Current Affairs – 24 September, 2021

ग्लोबल सिटीजन लाइव

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 25 सितंबर, 2021 की शाम को ‘ग्लोबल सिटीजन लाइव’ कार्यक्रम को वीडियो के माध्यम से संबोधित करेंगे।

‘ग्लोबल सिटीजन’ एक वैश्विक संगठन है, जो गरीबी को खत्म करने की दिशा में काम कर रहा है। ‘ग्लोबल सिटीजन लाइव’ एक 24 घंटे का कार्यक्रम है, जो 25 और 26 सितंबर को होगा और इसमें मुंबई, न्यूयॉर्क, पेरिस, रियो डि जेनेरो, सिडनी, लॉस एंजेलिस, लागोस और सियोल सहित प्रमुख शहरों में सजीव कार्यक्रम होंगे। इन कार्यक्रमों का 120 देशों और कई सोशल मीडिया चैनलों पर प्रसारण किया जाएगा।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.1 PRE

 

मेडिकल डिवाइस पार्कों

भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक साहसिक कदम के रूप में, भारत सरकार ने आने वाले वर्षों में अपनी क्षमता तक पहुंचने के लिए चिकित्सा उपकरण उद्योग को समर्थन प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है, उद्योग की पहचान विविधीकरण और रोजगार सृजन के लिए एक उभरते हुए क्षेत्र के रूप में की गई है। इस क्षेत्र में उचित अवसंरचना का निर्माण करने हेतु निवेश के उच्च स्तर तक पहुंचने की आवश्यकता को समझते हुए, फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने निम्नलिखित उद्देश्यों के साथ “मेडिकल डिवाइस पार्कों को बढ़ावा देने” के लिए योजना को अधिसूचित किया है :

  • प्रतिस्पर्धाओं में हुई बढ़ोत्तरी से निपटने के लिए, वैश्वित स्तर वाली सामान्य बुनियादी सुविधाओं के निर्माण के माध्यम से मानक परीक्षण और बुनियादी सुविधाओं तक आसान पहुंच के कारण, चिकित्सा उपकरणों के उत्पादन की लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे घरेलू बाजार में चिकित्सा उपकरणों की बेहतर उपलब्धता और सामर्थ्य प्राप्त होगा।
  • उपयुक्त संसाधनों और बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं से उत्पन्न होने वाले लाभों को प्राप्त करना।

इस योजना के अंतर्गत विकसित किए जाने वाले मेडिकल डिवाइस पार्क एक ही स्थान पर सामान्य बुनियादी सुविधाएं प्रदान करेंगे, जिससे देश में चिकित्सा उपकरणों का विनिर्माण करने के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण होगा और विनिर्माण लागत में भी बहुत कमी आएगी। इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 400 करोड़ रुपये है और इस योजना की अवधि वित्त वर्ष 2020-2021 से लेकर वित्त वर्ष 2024-2025 तक है। चयनित किए गए मेडिकल डिवाइस पार्क को सामान्य बुनियादी सुविधाओं की परियोजना लागत का 70 प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। पूर्वोत्तर राज्यों और पहाड़ी राज्यों के मामले में वित्तीय सहायता परियोजना लागत का 90 प्रतिशत होगी। योजना के अंतर्गत एक मेडिकल डिवाइस पार्क को अधिकतम 100 करोड़ रुपये तक की वित्तिय सहायता प्रदान की जाएगी।

इस योजना के अंतर्गत कुल मिलाकर 16 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों का चयन चुनौती पद्धति पर आधारित है, जो योजना के मूल्यांकन मानदंडों में प्रतिबिंबित होता है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए रैंकिंग पद्धति योजना दिशा-निर्देशों में निर्धारित मापदंडों जैसे उपयोगिता शुल्क, राज्य नीति प्रोत्साहन, पार्क का कुल क्षेत्रफल, भूमि का पट्टा दर, पार्क की कनेक्टिविटी, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग, तकनीकी जन शक्ति की उपलब्धता आदि पर आधारित है। इस योजना के अंतर्गत मूल्यांकन के आधार पर, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश राज्य सरकार के प्रस्तावों को “सैद्धांतिक” मंजूरी प्रदान की गई है। उक्त राज्यों की राजकोषीय क्षमता, पारिस्थितिकी तंत्र आकर्षण और औद्योगिक उपस्थिति के संदर्भ में किए गए गुणात्मक मूल्यांकन के आधार पर भी इन राज्यों के चयन को मान्यता प्रदान की गई है।

यह योजना को-ऑपरेटिव फेडरलिज्म (सहकारी संघवाद) की भावना को दर्शाती है, जहां पर केंद्र सरकार और राज्य सरकारें इस क्षेत्र के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए मध्यस्थ डिवाइस पार्क विकसित करने में साझेदारी करेंगी।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

 

संयुक्त युद्धाभ्यास पीसफुल मिशन 2021

रूस द्वारा आयोजित एससीओ सदस्य देशों के संयुक्त युद्धाभ्यास पीसफुल मिशन 2021 के छठे संस्करण का समापन दक्षिण पश्चिम रूस के ऑरेनबर्ग क्षेत्र में दिनांक 24 सितंबर 2021 को हुआ। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सभी सदस्य देशों के सशस्त्र बलों को शामिल कर 12 दिनों का यह संयुक्त प्रशिक्षण एससीओ सदस्य देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों को बढ़ावा देने और बहुराष्ट्रीय सैन्य टुकड़ियों को कमांड करने की सैन्य लीडरान की क्षमताओं को बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।

दिनांक 14 सितंबर 2021 को शुरू हुए इस संयुक्त बहुराष्ट्रीय अभ्यास में, एससीओ सदस्य देशों ने आतंकवाद का मुकाबला करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास आयोजित किया। सभी सैन्य टुकड़ियों ने अंतिम संयुक्त अभ्यास में भाग लिया, जिसमें बहुराष्ट्रीय बलों ने अपने सामरिक कौशल, युद्ध शक्ति और आतंकवादी समूहों पर हावी होने वाली क्षमताओं का प्रदर्शन किया। अभ्यास के सत्यापन चरण को एससीओ सदस्य देशों के जनरल स्टाफ के सभी प्रमुखों ने देखा। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत, जो वर्तमान में रूस की यात्रा पर हैं, ने दिनांक 23 सितंबर 2021 को सत्यापन अभ्यास देखा और अभ्यास के दौरान सदस्य देशों के बीच तालमेल तथा घनिष्ठ संबंधों के उच्च मानकों पर संतोष व्यक्त किया।

SCO क्या है?

  • SCO एक स्थायी अंतर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संगठन है।
  • यह एक यूरेशियन राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संगठन है, जिसका उद्देश्य संबंधित क्षेत्र में शांति, सुरक्षा व स्थिरता बनाए रखना है।
  • इसकी स्थापना 15 जून, 2001 को शंघाई में हुई थी।
  • SCO चार्टर पर वर्ष 2002 में हस्ताक्षर किए गए थे और यह वर्ष 2003 में लागू हआ।
  • यह चार्टर एक संवैधानिक दस्तावेज है जो संगठन के लक्ष्यों व सिद्धांतों आदि के साथ इसकी संरचना तथा प्रमुख गतिविधियों को रेखांकित करता है।
  • रूसी और चीनी SCO की आधिकारिक भाषाएँ हैं।

गठन

  • वर्ष 2001 में SCO की स्थापना से पूर्व कज़ाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, रूस और ताजिकिस्तान ‘शंघाई-5’ नामक संगठन के सदस्य थे।
  • वर्ष 1996 में ‘शंघाई-5’ का गठन विसैन्यीकरण वार्ता की श्रृंखलाओं से हुआ था, जो चीन के साथ चार पूर्व सोवियत गणराज्यों ने सीमाओं पर स्थिरता के लिये किया था।
  • वर्ष 2001 में उज़्बेकिस्तान के संगठन में प्रवेश के बाद ‘शंघाई-5’ को SCO नाम दिया गया।
  • वर्ष 2017 में भारत तथा पाकिस्तान को इसके सदस्य का दर्जा मिला।

सदस्य देश

  • वर्तमान में इसके सदस्य देशों में कज़ाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, भारत और पाकिस्तान शामिल हैं।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

 

इलेक्ट्रॉनिक पॉलीमर आधारित सेंसर विकसित किया गया

भारतीय वैज्ञानिकों ने पहली बार उच्च-ऊर्जा विस्फोटकों में प्रयुक्त नाइट्रो-एरोमैटिक रसायनों का तेजी से पता लगाने के लिए तापीय रूप से स्थिर (थर्मली स्टेबल) और कम लागत वाला इलेक्ट्रॉनिक पॉलीमर-आधारित सेंसर विकसित किया है। विस्फोटकों को नष्ट किए बिना उनका पता लगाना सुरक्षा के लिए आवश्यक है और ऐसे मामलों में आपराधिक जांच, बारूदी सुरंग वाले क्षेत्र में ही उपचार (माइनफील्ड रिमेडिएशन), सैन्य अनुप्रयोगों, गोला-बारूद उपचार स्थल, सुरक्षा अनुप्रयोगों और रासायनिक सेंसर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हालांकि विस्फोटक पॉली-नाइट्रोएरोमैटिक यौगिकों का विश्लेषण आमतौर पर परिष्कृत उपकरणों में प्रयुक्त तकनीकों द्वारा किया जा सकता है लेकिन अपराध विज्ञान प्रयोगशालाओं या  कब्जे से मुक्त कराए गए सैन्य स्थलों में त्वरित निर्णय लेने अथवा उग्रवादियों के पास विद्यमान विस्फोटकों का पता लगाने के लिए अक्सर सरल, कम लागत वाली और ऐसी चयनात्मक क्षेत्र तकनीकों की आवश्यकता होती है जिनकी प्रकृति गैर – विनाशकारी हो। नाइट्रोएरोमैटिक रसायनों (एनएसी) की गैर-विनाशकारी पहचान करना एक कठिन कार्य है। जबकि पहले के अध्ययन ज्यादातर फोटो-ल्यूमिनसेंट गुणधर्म पर आधारित होते हैं,  फिर भी अब तक इन गुणों की प्रविधि के आधार का पता नहीं लगाया गया है। गुणों के आधार पर पता लगाने से विस्फोटकों को ढूँढ़ निकालने में सक्षम सरल कहीं भी ले जाए जा सकने योग्य ऐसा उपकरण बनाने में सहायता मिलती है जिसमें एक एलईडी की मदद से परिणाम देखे जा सकते हैं।

इस तरह की कमियों को दूर करने के लिए, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के एक स्वायत्त संस्थान, विज्ञान और प्रौद्योगिकी उच्च अध्ययन संस्थान (इंस्टीटयूट ऑफ़ एडवांस्ड, स्टडी इन साइंस एंड टेक्नॉलोजी), गुवाहाटी के डॉ नीलोत्पल सेन सरमा के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम ने परत दर परत विकसित की है (एलबीएल) पॉलीमर डिटेक्टर विकसित किया है जिसमें दो कार्बनिक पॉलिमर होते हैं – पहला, पॉली-2-विनाइल पाइरीडीन जिसमें एक्रिलोनिट्राइल (पी2वीपी –सीओ- एएन) होता है और दूसरा, हेक्सेन (पीसीएचएमएएसएच)  के साथ कोलेस्ट्रॉल मेथाक्राइलेट का को-पॉलीसल्फोन होता है जो कुछ सेकंड के भीतर एनएसी वाष्प की बहुत कम सांद्रता की उपस्थिति में अवरोध (किसी एसी सर्किट में प्रतिरोध) आने से  पर भारी परिवर्तन से गुजरता है। यहां पिक्रिक एसिड (पीए) को मॉडल एनएसी के रूप में चुना गया था, और पीए की दृश्य पहचान के लिए एक सरल और लागत प्रभावी इलेक्ट्रॉनिक प्रोटोटाइप विकसित किया गया था। इस टीम ने इलेक्ट्रोनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (डीईआईटीवाई), भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित इस नई प्रौद्योगिकी के लिए एक पेटेंट के लिए भी आवेदन किया है।

इस सेंसर उपकरण (डिवाइस) में तीन परतें शामिल हैं – 1- हेक्सेन (पीसीएचएमएएसएच)  के साथ कोलेस्ट्रॉल मेथाक्राइलेट का को-पॉलीसल्फोन, और पी2वीपी –सीओ- एएन युक्त स्टेनलेस स्टील की दो जालियों वाली बाहरी परतों के बीच में पीसीएचएमएएसएच को रखकर करके एक्रिलोनिट्राइल के साथ पॉली-2-विनाइल पाइरीडीन का कोपॉलीमर। इस प्रणाली की संवेदनशीलता विश्लेषक अर्थात पिक्रिक एसिड की वाष्प की उपस्थिति में समय (सेकंड) के साथ आए अवरोध की प्रतिक्रिया में परिवर्तन की निगरानी के द्वारा निर्धारित की जाती है।

त्रि-स्तरीय बहुलक मैट्रिक्स (ट्राई-लेयर पॉलीमर मैट्रिक्स) नाइट्रोएरोमैटिक रसायनों के लिए बहुत कुशल एवं प्रभावी  आणविक सेंसर पाया गया। यह  सेंसर उपकरण डिवाइस) प्रकृति में काफी सरल और प्रतिवर्ती (रिवर्सिबल) है और इसकी प्रतिक्रिया अन्य सामान्य रसायनों और आर्द्रता की उपस्थिति में अलग-अलग संचालनीय (ऑपरेटिंग) तापमान के साथ नहीं बदलती है।

इस उपकरण (डिवाइस) को कमरे के सामान्य तापमान पर संचालित किया जा सकता है, इसमें कम प्रतिक्रिया समय होता है और अन्य रसायनों से नगण्य हस्तक्षेप होता है। इसका निर्माण बहुत ही सरल है और नमी से नगण्य रूप से प्रभावित होता है तथा इसमें उपयोग किए जाने वाले कोलेस्ट्रॉल-आधारित पॉलिमर प्रकृति में स्वतः ही विनष्ट हो जाते हैं।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

 

दुनिया के सबसे ऊँचे इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए दुनिया के सबसे ऊंचे चार्जिंग स्टेशन का उद्घाटन हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले के काजा में किया गया। इसका उद्घाटन एसडीएम महेंद्र प्रताप सिंह ने किया। इसकी स्थापना goEgo कंपनी ने की थी।

मुख्य बिंदु

इस चार्जिंग स्टेशन का उद्घाटन क्षेत्र के पर्यावरण की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करने वाले यात्री काजा में चार्जिंग सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। परीक्षण के आधार पर, दो इलेक्ट्रिक स्कूटरों को सफलतापूर्वक चार्ज किया गया।

काजा

काजा हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीती जिले में स्थित एक नगर है। यह समुद्रतल से 3650 मीटर की ऊंचाई पर स्पीती नदी के किनारे पर स्थित है।

फेम योजना (FAME Scheme)

यह योजना राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन योजना (National Electric Mobility Mission Plan) का एक हिस्सा है। सब्सिडी प्रदान करके इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए यह योजना शुरू की गई थी। इस योजना का उद्देश्य सभी वाहन खंडों को प्रोत्साहित करना है। इसे दो चरणों में लॉन्च किया गया था। चरण 1 2015 में शुरू किया गया था और 31 मार्च, 2019 को समाप्त हुआ था। जबकि, चरण II अप्रैल 2019 से शुरू हुआ था और 2024 में समाप्त होगा। इस योजना की निगरानी भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय के तहत भारी उद्योग विभाग द्वारा की जाती है।

SOURCE-GK TODAY

PAPER-G.S.1 PRE

 

पेटेंट (संशोधन) नियम, 2021

पेटेंट (संशोधन) नियम, 2021 को 21 सितंबर, 2021 से लागू किया गया।

मुख्य बिंदु

  • नियमों में संशोधन करके, केंद्र सरकार ने शैक्षणिक संस्थानों पर लगने वाले पेटेंट फाइलिंग और प्रसंस्करण शुल्क को 80% तक कम कर दिया है।
  • फीस में यह कमी स्टार्ट-अप इंडिया पहल के तहत स्टार्ट-अप के लिए उपलब्ध समान रियायत के बराबर है।

पेटेंट शुल्क क्यों कम किया गया है?

  • पेटेंट के लिए आवेदन करते समय, नवोन्मेषकों (innovators) को इन पेटेंटों को उन संस्थानों के नाम पर आवेदन करना होता है, जिन्हें बड़े आवेदकों के लिए बहुत अधिक शुल्क देना पड़ता है।
  • इस प्रकार, भारत के नवाचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए शैक्षणिक संस्थानों की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए, आधिकारिक शुल्क कम कर दिया गया है।
  • DPIIT के अनुसार, शैक्षणिक संस्थान विभिन्न शोध गतिविधियों में संलग्न हैं, जहां प्रोफेसर या शिक्षक के साथ-साथ छात्र कई नई प्रौद्योगिकियां उत्पन्न करते हैं जिन्हें उसी के व्यावसायीकरण की सुविधा के लिए पेटेंट कराने की आवश्यकता होती है।
  • लेकिन उच्च पेटेंट शुल्क इन प्रौद्योगिकियों को पेटेंट कराने के लिए प्रतिबंधित करता है।
  • इस समस्या को दूर करने के लिए, आवेदनों को संसाधित करने के लिए प्रक्रियात्मक विसंगतियों और अनावश्यक कदमों को दूर करने के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए पेटेंट नियमों में कई बार संशोधन किया गया है।

SIPP योजना

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) ने अपने आवेदनों को दाखिल करने और प्रसंस्करण के साथ सुविधा प्रदान करने के लिए स्टार्ट-अप बौद्धिक संपदा संरक्षण (SIPP) की सुविधा प्रदान करने के लिए योजना शुरू की।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

 

विश्व समुद्री दिवस

हर साल, 24 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा विश्व समुद्री दिवस मनाया जाता है।

मुख्य बिंदु

विश्व समुद्री दिवस पहली बार मार्च 1978 में मनाया गया था। तब इसे IMO कन्वेंशन को चिह्नित करने के लिए मनाया गया था। 1948 में जिनेवा में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ने IMO कन्वेंशन को अपनाया।

पहले IMO को अंतर-सरकारी समुद्री परामर्शदात्री संगठन कहा जाता था।

महत्व

विश्व का लगभग 80% व्यापार समुद्र के माध्यम से होता है। यह माल का कम लागत वाला परिवहन प्रदान करता है और इस प्रकार सतत समुद्री विकास को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रीय समुद्री दिवस (National Maritime Day)

भारत हर साल 5 अप्रैल को अपना समुद्री दिवस मनाता है। यह 1964 में पहली बार मनाया गया था। भारत सरकार राष्ट्रीय समुद्री दिवस पर वरुण पुरस्कार, समुद्री शिक्षा और प्रशिक्षण में उत्कृष्ट योगदान और NMD उत्कृष्टता पुरस्कार जैसे पुरस्कार प्रदान करती है।

भारत की समुद्री पहल

‘इंडो-पैसिफिक इनिशिएटिव’ भारत की वर्तमान समुद्री पहल है। भारत ने सुरक्षित समुद्र के लिए इस पहल को अपनाया है। इसे समुद्री संसाधनों के माध्यम से विभिन्न देशों के साथ साझेदारी के जरिए हासिल किया जायेगा। इंडो-पैसिफिक पहल को ऑस्ट्रेलिया, जापान और थाईलैंड का समर्थन प्राप्त है। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के तहत विवादों को सुलझाने में मदद करेगा।

SOURCE-GK TODAY

PAPER-G.S.2

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