Current Affair 25 December 2021

Current Affairs – 25 December, 2021

श्री अटल बिहारी वाजपेयी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की है भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसम्बर को हुआ था, उनके जन्म दिवस को सुशासन दिवस के रूप मनाया जाता है। इस दिवस को पहली बार 2014 में मनाया गया था। उन्हें भारतीय राजनीती के सर्वाधिक प्रभावशाली नेताओं में से एक माना जाता है।

अटल बिहारी वाजपेयी (25 दिसंबर 1924 – 16 अगस्त 2018) भारत के तीन बार के प्रधानमंत्री थे। वे पहले 16 मई से 1 जून 1996 तक, तथा फिर 1998 में और फिर19 मार्च 1999 से 22 मई 2004 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। वे हिंदी कवि, पत्रकार व एक प्रखर वक्ता थे। वे भारतीय जनसंघ के संस्थापकों में एक थे, और 1968 से 1973 तक उसके अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने लंबे समय तक राष्‍ट्रधर्म, पाञ्चजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का संपादन भी किया।

वह चार दशकों से भारतीय संसद के सदस्य थे, लोकसभा, निचले सदन, दस बार, और दो बार राज्य सभा, ऊपरी सदन में चुने गए थे। उन्होंने लखनऊ के लिए संसद सदस्य के रूप में कार्य किया, 2009 तक उत्तर प्रदेश जब स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण सक्रिय राजनीति से सेवानिवृत्त हुए। अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर प्रारंभ करने वाले वाजपेयी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के पहले प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने गैर काँग्रेसी प्रधानमंत्री पद के 5 वर्ष बिना किसी समस्या के पूरे किए। आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेने के कारण इन्हें भीष्मपितामह भी कहा जाता है। उन्होंने 24 दलों के गठबंधन से सरकार बनाई थी जिसमें 81 मंत्री थे।

2005 से वे राजनीति से संन्यास ले चुके थे और नई दिल्ली में 6-ए कृष्णामेनन मार्ग स्थित सरकारी आवास में रहते थे। 16 अगस्त 2018 को एक लंबी बीमारी के बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली में श्री वाजपेयी का निधन हो गया। वे जीवन भर भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे‍।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

 

शासन सूचकांक-2021

केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में सुशासन दिवस के अवसर पर सुशासन सूचकांक- 2021 जारी किया। इस सूचकांक को प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) ने तैयार किया है।

सुशासन सूचकांक (जीजीआई) 2021 के ढांचे में दस क्षेत्र और 58 संकेतक शामिल किए गए हैं। जीजीआई 2020-21 के क्षेत्र हैं : (1) कृषि और संबद्ध क्षेत्र, (2) वाणिज्य और उद्योग, (3) मानव संसाधन विकास, (4) सार्वजनिक स्वास्थ्य, (5) सार्वजनिक बुनियादी ढांचा और उपयोगिताएं, (6) आर्थिक शासन, (7) समाज कल्याण और विकास, (8) न्यायिक और सार्वजनिक सुरक्षा, (9) पर्यावरण और (10) नागरिक-केंद्रित शासन। सुशासन सूचकांक 2020-21 में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को चार श्रेणियों में बांटा गया है। ये श्रेणी हैं: (i) अन्य राज्य – समूह ए, (ii) अन्य राज्य – समूह बी, (iii) उत्तर-पूर्व व पहाड़ी राज्य और (iv) केंद्रशासित प्रदेश।

10 क्षेत्रों को कवर करते हुए गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा सम्मिलित रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर हैं। जीजीआई- 2021 के अनुसार जीजीआई 2019 संकेतकों पर गुजरात ने 12.3 फीसदी और गोवा ने 24.7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की है। गुजरात ने 10 में से 5 क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन किया है। इनमें आर्थिक शासन, मानव संसाधन विकास, सार्वजनिक बुनियादी ढांचा व उपयोगिताएं, सामाजिक कल्याण व विकास और न्यायिक व सार्वजनिक सुरक्षा हैं। वहीं, महाराष्ट्र ने कृषि व संबद्ध क्षेत्र, मानव संसाधन विकास, सार्वजनिक बुनियादी ढांचा व उपयोगिताएं और सामाजिक कल्याण व विकास में प्रभावी प्रदर्शन किया है। गोवा ने कृषि व संबद्ध क्षेत्र, वाणिज्य व उद्योग, सार्वजनिक बुनियादी ढांचा व उपयोगिताएं, आर्थिक शासन, सामाजिक कल्याण व विकास और पर्यावरण के क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन किया है।

सुशासन सूचकांक- 2021 के अनुसार उत्तर प्रदेश ने जीजीआई- 2019 के प्रदर्शन की तुलना में 8.9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की है। उत्तर प्रदेश ने सभी क्षेत्रों के बीच वाणिज्य व उद्योग में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। वहीं, समाज कल्याण व विकास और न्यायिक व सार्वजनिक सुरक्षा में भी वृद्धि प्रदर्शित की है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश ने लोक शिकायत निवारण सहित नागरिक केंद्रित शासन में भी अच्छा प्रदर्शन किया है।

सुशासन सूचकांक- 2021 के अनुसार झारखंड ने जीजीआई- 2019 के प्रदर्शन की तुलना में 12.6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की है। झारखंड ने 10 में से 7 क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन किया है। वहीं, राजस्थान ने जीजीआई- 2019 के प्रदर्शन की तुलना में 1.7 फीसदी की क्रमिक वृद्धि प्रदर्शित की है। राजस्थान ने अन्य राज्यों (ग्रुप बी) की श्रेणी में न्यायिक व सार्वजनिक सुरक्षा, पर्यावरण और नागरिक केंद्रित शासन के क्षेत्र में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।

सुशासन सूचकांक- 2021 के अनुसार उत्तर-पूर्व और पहाड़ी राज्यों की श्रेणी में मिजोरम व जम्मू और कश्मीर ने जीजीआई- 2019 की तुलना में क्रमशः 10.4 फीसदी और 3.7 फीसदी की सम्मिलित बढ़ोतरी दर्ज की है। मिजोरम ने वाणिज्य व उद्योग, मानव संसाधन विकास, सार्वजनिक स्वास्थ्य और आर्थिक शासन में काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। वहीं, जम्मू और कश्मीर ने वाणिज्य व उद्योग क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन किया है। इसके अलावा कृषि व संबद्ध क्षेत्र, सार्वजनिक बुनियादी ढांचा और उपयोगिताएं और न्यायिक व सार्वजनिक सुरक्षा के क्षेत्र में अपने अंक में सुधार किया है।

सुशासन सूचकांक- 2021 के अनुसार केंद्रशासित प्रदेशों की श्रेणी में दिल्ली जीजीआई- 2019 संकेतकों की तुलना में 14 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज करने के साथ सम्मिलित रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर है। दिल्ली ने कृषि व संबद्ध क्षेत्रों, वाणिज्य व उद्योग, सार्वजनिक बुनियादी ढांचा व उपयोगिताएं और समाज कल्याण व विकास में काफी अच्छा प्रदर्शन किया है।

सुशासन सूचकांक-2021 के अनुसार 20 राज्यों ने जीजीआई- 2019 तुलना में अपने सम्मिलित जीजीआई अंक में सुधार किया है। राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों के प्राप्त क्षेत्रवार अंक एक या अन्य क्षेत्र में ठोस प्रदर्शन को दिखाता है। अंकों के विश्लेषण से यह बात भी सामने आती है कि राज्यों के बीच उनके सम्मिलित शासन अंकों में बहुत ही मामूली अंतर है। यह इसका संकेत करता है कि भारत के राज्यों में व्यापक शासन सकारात्मक दिशा की ओर बढ़ रहा है।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

 

स्वस्थ राज्य, प्रगतिशील भारत का चौथा संस्करण

नीति आयोग भारत सरकार का एक प्रमुख नीतिगत ‘थिंक-टैंक’ है तथा वह ‘वॉट गेट्स मेजर्ड, गेट्स डन,’ यानी ‘जो मापा गया, समझो पूरा हुआ’ के मूलमंत्र में विश्वास करता है। सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद के अंग के रूप में नीति आयोग और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय मिलकर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को लगातार प्रेरित करते हैं कि वे स्वास्थ्य नतीजों में सुधार करते रहें।

वर्ष 2017 में नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांस्फार्मिंग इंडिया (नीति आयोग) ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और विश्व बैंक के साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्वास्थ्य के बारे में आमूल कामकाज तथा क्रमिक प्रदर्शन की ट्रैकिंग के लिये वार्षिक स्वास्थ्य सूचकांक की शुरूआत की थी। वार्षिक स्वास्थ्य सूचकांक का उद्देश्य है स्वास्थ्य नतीजों की प्रगति और स्वास्थ्य प्रणालियों के कामकाज को ट्रैक करना, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का विकास करना, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को एक-दूसरे से सीखने के लिये प्रोत्साहित करना। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिये स्वास्थ्य सूचकांक अंक और रैंकिंग का मूल्यांकन क्रमिक प्रदर्शन (वर्ष प्रति वर्ष प्रगति) तथा आमूल कामकाज (मौजूदा कामकाज) के आधार पर किया जाता है। आशा की जाती है कि इस प्रक्रिया से स्वास्थ्य सम्बंधी सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रयासों को बल मिलेगा। इसमें यूनीवर्सल हेल्थ कवरेज (आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच) और अन्य स्वास्थ्य नतीजों को भी शामिल किया गया है।

स्वास्थ्य सूचकांक एक ऐसा पैमाना है, जिसमें 24 संकेतकों को शामिल किया गया है, जो स्वास्थ्य क्षेत्र में कामकाज के सभी प्रमुख पक्षों से जुड़ा है। इस रिपोर्ट के दायरे में स्वास्थ्य नतीजे, शासन और सूचना तथा प्रमुख नतीजे और प्रक्रियायें आती हैं।

इन स्वास्थ्य सूचकांक रिपोर्टों का उद्देश्य है कि मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली तथा सेवा आपूर्ति में सुधार के लिये राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को प्रेरित किया जाये। इस वार्षिक प्रक्रिया के महत्त्व पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने जोर देते हुये स्वास्थ्य सूचकांक को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मिलने वाले प्रोत्साहन से जोड़ने का फैसला किया है। रिपोर्ट द्वारा कोशिश की गई है कि बजट राशि को खर्च करने, आगत और निर्गत की बजाय नतीजों पर ज्यादा ध्यान दिया जाये।

मजबूत और स्वीकार्य प्रणाली को कामकाज को मापने के लिये इस्तेमाल किया जाता है। इसके तहत संकेतकों की मंजूरी और आंकड़ों को जमा करने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। यह काम नीति आयोग द्वारा संचालित एक पोर्टल के माध्यम से होता है। यह प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद उसे एक प्रमाणन एजेंसी द्वारा सत्यापित कराया जाता है। प्रमाणन एजेंसी का चयन पारदर्शी बोली प्रक्रिया से किया जाता है। इसके बाद सत्यापित दस्तावेजों को आगे सत्यापन के लिये राज्यों के साथ साझा किया जाता। अंत में आंकड़ों को अंतिम रूप दिया जाता है। इन आंकड़ों का उपयोग विश्लेषण और रिपोर्ट लेखन के लिये होता है।

स्वास्थ्य सूचकांक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के आमूल कामकाज और क्रमिक प्रदर्शन को मापने तथा उनकी तुलना करने का एक उपयोगी माध्यम है। वह स्वास्थ्य नतीजों, शासन, आंकड़ों की सत्यता तथा प्रमुख आगत और प्रक्रियाओं सहित विभिन्न मापदंडों के संदर्भ में कामकाज के उतार-चढ़ाव को समझने का भी एक महत्त्वपूर्ण माध्यम है। इसके जरिये कामकाज की निगरानी करने के बारे में राज्य/केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर आंकड़ों के इस्तेमाल की संस्कृति को मजबूती मिली है। इसके साथ इसके जरिये ज्यादातर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में आंकड़ों की उपलब्धता, गुणवत्ता और सामयिकता में सुधार लाने की दिशा में भी योगदान हो रहा है। इस रिपोर्ट के माध्यम से राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के वार्षिक कामकाज की निगरानी सरकार के उच्चतम स्तर पर होती है। वित्त वर्ष 2019-20 के लिये रिपोर्ट 27 दिसंबर, 2021 को दोपहर बारह बजे जारी की जायेगी।

नीति आयोग

नीति आयोग (राष्‍ट्रीय भारत परिवर्तन संस्‍थान) भारत सरकार द्वारा गठित एक नया संस्‍थान है जिसे योजना आयोग के स्‍थान पर बनाया गया है।1 जनवरी 2015 को इस नए संस्‍थान के सम्बन्ध में जानकारी देने वाला मन्त्रिमण्डल का प्रस्‍ताव जारी किया गया। यह संस्‍थान सरकार के थिंक टैंक के रूप में सेवाएँ प्रदान करेगा और उसे निर्देशात्‍मक एवं नीतिगत गतिशीलता प्रदान करेगा। नीति आयोग, केन्‍द्र और राज्‍य स्‍तरों पर सरकार को नीति के प्रमुख कारकों के सम्बन्ध में प्रासंगिक महत्‍वपूर्ण एवं तकनीकी परामर्श उपलब्‍ध कराएगा। इसमें आर्थिक मोर्चे पर राष्‍ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय आयात, देश के भीतर, साथ ही साथ अन्‍य देशों की बेहतरीन पद्धतियों का प्रसार नए नीतिगत विचारों का समावेश और विशिष्‍ट विषयों पर आधारित समर्थन से सम्बन्धित मामले शामिल होंगे। नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कान्त हैं। नीति आयोग के सदस्यों में विवेक देवराय, वी॰के॰ सारस्वत, रमेश चन्द्र और विनोद पाल शामिल हैं। योजना आयोग और नीति आयोग में मूलभूत अन्तर है कि इससे केन्द्र से राज्यों की तरफ चलने वाले एक पक्षीय नीतिगत क्रम को एक महत्वपूर्ण विकासवादी परिवर्तन के रूप में राज्यों की वास्तविक और सतत भागीदारी से बदल दिया जाएगा।

नीति आयोग ग्राम स्तर पर विश्वसनीय योजना तैयार करने के लिए तन्त्र विकसित करेगा और इसे उत्तरोत्तर उच्च स्तर तक पहुँचायेगा। आयोग राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय विशेषज्ञों, प्रैक्टिशनरों तथा अन्य हितधारकों के सहयोगात्मक समुदाय के जरिए ज्ञान, नवाचार, उद्यमशीलता सहायक प्रणाली बनाएगा। इसके अतिरिक्‍त आयोग कार्यक्रमों और नीतियों के क्रियान्वयन के लिए प्रौद्योगिकी उन्नयन और क्षमता निर्माण पर बल देगा।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S2

 

पिलर ऑफ शेम

हांगकांग के सबसे पुराने विश्वविद्यालय ने बीजिंग के तियानमेन स्क्वायर (Tiananmen Square) में मारे गए लोगों की याद में एक प्रतिमा को नष्ट करने के लिए 23 दिसंबर, 2021 को एक रात भर का अभियान शुरू किया।

पिलर ऑफ शेम (Pillar of Shame)

  • “पिलर ऑफ शेम” 8-मीटर (26-फीट) ऊंची मूर्तियों की एक श्रृंखला है, जिसका निर्माण जेन्स गैल्सचियोट (Jens Galschiot) द्वारा किया गया है।
  • यह 1997 से हांगकांग विश्वविद्यालय (HKU) परिसर में है। उसी वर्ष, पूर्व ब्रिटिश कॉलोनी हांगकांग को वापस चीन को सौंप दिया गया था।
  • इस प्रतिमा में 50 पीड़ित चेहरे और उत्पीड़ित शरीर हैं। इन शवों को एक दूसरे पर ढेर कर दिया गया है।
  • यह लोकतंत्र के प्रदर्शनकारियों को याद करता है, जिन्हें 1989 में तियानमेन स्क्वायर में चीनी सैनिकों द्वारा मार दिया गया था।
  • प्रत्येक प्रतिमा कांस्य, तांबे या कंक्रीट की है।

मूर्ति का उद्घाटन कब और कहाँ हुआ था?

  • 1996 में, रोम में FAO शिखर सम्मेलन के एनजीओ फोरम में इस मूर्ति का उद्घाटन किया गया था।
  • तब से, हांगकांग, मैक्सिको और ब्राजील में तीन और स्तंभ बनाए गए हैं।

हांगकांग की रीमोल्डिंग

वर्तमान में, चीन दो साल पहले लोकतंत्र के विरोध के बाद हांगकांग को अपनी सत्तावादी छवि में बदल रहा है। इस प्रकार, तियानमेन का स्मरणोत्सव प्रभावी रूप से अवैध हो गया है। अक्टूबर 2021 में, विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने नए कानूनी जोखिमों को उजागर करते हुए, मूर्ति को हटाने का आदेश दिया।

23 दिसंबर को, विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने पुष्टि की कि रात भर के ऑपरेशन में प्रतिमा को हटा दिया गया था। ऑपरेशन पूरा करने के बाद इसे स्टोरेज में रखा गया है।

SOURCE-GK TODAY

PAPER-G.S.1PRE

 

इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने डासना, गाजियाबाद में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (Eastern Peripheral Expressway) पर भारत का पहला “इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम” (Intelligent Transport System) लॉन्च किया।

मुख्य बिंदु

  • इस प्रणाली को ट्रैफिक को कम करने और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए विकसित किया गया था।
  • इस अवसर पर, मंत्री ने कहा कि, भारत को अपनी सड़क इंजीनियरिंग में सुधार करने की आवश्यकता है, क्योंकि हर साल भारत में 5 लाख दुर्घटनाओं में लगभग 5 लाख लोग मारे जाते हैं।

एक्सप्रेसवे पर इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (Intelligent Transport System – ITS)

  • ITS एक क्रांतिकारी अत्याधुनिक तकनीक है। यह कुशल बुनियादी ढांचे के उपयोग को बढ़ावा देकर, ट्रैफिक की समस्याओं को कम करके, ट्रैफिक के बारे में पूर्व सूचना प्रदान क करके, यात्रा के समय को कम करके और यात्रियों की सुरक्षा और आराम को बढ़ाकर यातायात दक्षता हासिल करेगा।
  • यह प्रणाली किसी भी दुर्घटना का पता लगा सकती है और यह सुनिश्चित करने के लिए अलर्ट प्राप्त कर सकती है कि एम्बुलेंस 10-15 मिनट के भीतर दुर्घटना स्थल पर पहुंच जाए।

मेरठ और मुज़फ्फरनगर में हाईवे प्रोजेक्ट

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने उत्तर प्रदेश के मेरठ और मुजफ्फरनगर में 240 किलोमीटर लंबी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 9,119 करोड़ रुपये है। मंत्री के अनुसार, इन परियोजनाओं से किसानों के लिए अपनी फसल को बाजार तक ले जाना आसान हो जाएगा, और इस तरह उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

Eastern Peripheral Expressway (EPE)

कुंडली-गाजियाबाद-पलवल एक्सप्रेसवे को “ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे” कहा जाता है। यह 135 किमी लंबा, 6-लेन चौड़ा एक्सप्रेसवे है जो हरियाणा और उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। यह सोनीपत के कुंडली में वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से शुरू होता है और उत्तर प्रदेश में बागपत, गाजियाबाद और नोएडा और हरियाणा के फरीदाबाद जिले से होकर गुजरता है। यह अंत में पलवल में धोलागढ़ के पास वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जुड़ता है। मार्च 2006 में, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे को नेशनल एक्सप्रेसवे 2 (NE-2) के रूप में घोषित किया गया था।

SOURCE-GK TODAY

PAPER-G.S.3