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Current Affair 28 July 2021

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Current Affairs – 28 July, 2021

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भेंट की

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की।

विदेश मंत्री ब्लिंकेन ने राष्ट्रपति बाइडेन और उपराष्ट्रपति हैरिस की तरफ से प्रधानमंत्री का अभिवादन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री को दिन में ईएएम और एनएसए के साथ हुई सकारात्मक बातचीत के बारे में बताया, साथ ही रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार एवं निवेश, जलवायु परिवर्तन और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारत अमेरिका सामरिक संबंधों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता जाहिर की।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति बाइडेन और उपराष्ट्रपति को अपनी तरफ से शुभकामनाएं दीं। साथ ही क्वैड, कोविड-19 और जलवायु परिवर्तन से संबंधित पहलों के लिए राष्ट्रपति बाइडेन की सराहना की।

विदेश मंत्री ब्लिंकेन ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापक द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर तालमेल बढ़ने और इस तालमेल के ठोस व व्यावहारिक सहयोग में तब्दील करने के लिए दोनों सामरिक सहयोगियों की प्रतिबद्धता की सराहना की।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अमेरिका और भारत के समाज लोकतंत्र, स्वतंत्रता और उदारता के मूल्यों के लिए एक गहरी प्रतिबद्धता साझा करते हैं, वहीं अमेरिका में भारतीय समुदाय ने द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने में खासा योगदान किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के चलते पैदा चुनौतियों, वैश्विक आर्थिक सुधार और जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में आने वाले वर्षों में भारत-अमेरिका सामरिक भागीदारी का व्यापक वैश्विक महत्व होगा।

SOURCE-PIB

 

श्री बी.एस. बोम्मई

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने श्री बी.एस. बोम्मई को कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने पर बधाई दी है।

प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कहा, “कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने पर श्री बी.एस. बोम्मई जी को बधाई। उन्हेंविधायी और प्रशासनिक क्षेत्रों का व्यापक अनुभव है। मुझे भरोसा है कि वह राज्य में हमारी सरकार द्वारा किए गए असाधारण कार्य को और आगे बढ़ाएंगे। एक सार्थक कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं।

28 जनवरी 1960 को जन्मे बसवराज सोमप्पा बोम्मई कर्नाटक के गृह, कानून, संसदीय मामलों के मंत्री हैं। उनके पिता एस आर बोम्मई भी राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट बसवराज ने जनता दल के साथ राजनीति की शुरुआत की थी। वे धारवाड़ से दो बार 1998 और 2004 में कर्नाटक विधान परिषद के लिए चुने गए। इसके बाद वे जनता दल छोड़कर 2008 में भाजपा में शामिल हो गए। इसी साल हावेरी जिले के शिगगांव से विधायक चुने गए।

बसवराज बोम्मई मृदु भाषी हैं। उनकी भाषा पर बढ़िया पकड़ है। वे कन्नड़, हिंदी और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में पारंगत हैं। माना जाता है कि अमित शाह से उनके अच्छे संबंध हैं। वे बीजेपी में आने से पहले जनता दल सेक्युलर से दो बार विधायक रहे है। इंजीनियर और खेती से जुड़े होने के नाते बसवराज को कर्नाटक के सिंचाई मामलों का जानकार माना जाता है। राज्य में कई सिंचाई प्रोजेक्ट शुरू करने की वजह से उनकी तारीफ होती है। उन्हें अपने विधानसभा क्षेत्र में भारत की पहली 100% पाइप सिंचाई परियोजना लागू करने का श्रेय भी दिया जाता है।

कर्नाटक

कर्नाटक (कन्नड़: ಕರ್ನಾಟಕ), जिसे कर्णाटक भी कहते हैं, दक्षिण भारत का एक राज्य है। इस राज्य का गठन १ नवंबर, १९५६ को राज्य पुनर्गठन अधिनियम के अधीन किया गया था। पहले यह मैसूर राज्य कहलाता था। १९७३ में पुनर्नामकरण कर इसका नाम कर्नाटक कर दिया गया। इसकी सीमाएं पश्चिम में अरब सागर, उत्तर पश्चिम में गोआ, उत्तर में महाराष्ट्र, पूर्व में आंध्र प्रदेश, दक्षिण-पूर्व में तमिल नाडु एवं दक्षिण में केरल से लगती हैं। इसका कुल क्षेत्रफल ७४,१२२ वर्ग मील (१,९१,९७६ कि॰मी॰²) है, जो भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र का ५.८३% है। ३० जिलों के साथ यह राज्य छठा सबसे बड़ा राज्य है। राज्य की आधिकारिक और सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा कन्नड़ है।

कर्नाटक शब्द के उद्गम के कई व्याख्याओं में से सर्वाधिक स्वीकृत व्याख्या यह है कि कर्नाटक शब्द का उद्गम कन्नड़ शब्द करु, अर्थात काली या ऊंची और नाडु अर्थात भूमि या प्रदेश या क्षेत्र से आया है, जिसके संयोजन करुनाडु का पूरा अर्थ हुआ काली भूमि या ऊंचा प्रदेश। काला शब्द यहां के बयलुसीम क्षेत्र की काली मिट्टी से आया है और ऊंचा यानि दक्कन के पठारी भूमि से आया है। ब्रिटिश राज में यहां के लिये कार्नेटिक शब्द का प्रयोग किया जाता था, जो कृष्णा नदी के दक्षिणी ओर की प्रायद्वीपीय भूमि के लिये प्रयुक्त है और मूलतः कर्नाटक शब्द का अपभ्रंश है।

प्राचीन एवं मध्यकालीन इतिहास देखें तो कर्नाटक क्षेत्र कई बड़े शक्तिशाली साम्राज्यों का क्षेत्र रहा है। इन साम्राज्यों के दरबारों के विचारक, दार्शनिक और भाट व कवियों के सामाजिक, साहित्यिक व धार्मिक संरक्षण में आज का कर्नाटक उपजा है। भारतीय शास्त्रीय संगीत के दोनों ही रूपों, कर्नाटक संगीत और हिन्दुस्तानी संगीत को इस राज्य का महत्त्वपूर्ण योगदान मिला है। आधुनिक युग के कन्नड़ लेखकों को सर्वाधिक ज्ञानपीठ सम्मान मिले हैं। राज्य की राजधानी बंगलुरु शहर है, जो भारत में हो रही त्वरित आर्थिक एवं प्रौद्योगिकी का अग्रणी योगदानकर्त्ता है।

कर्नाटक राज्य में तीन प्रधान मंडल हैं: तटीय क्षेत्र करावली, पहाड़ी क्षेत्र मालेनाडु जिसमें पश्चिमी घाट आते हैं, तथा तीसरा बयालुसीमी क्षेत्र जहां दक्खिन पठार का क्षेत्र है। राज्य का अधिकांश क्षेत्र बयालुसीमी में आता है और इसका उत्तरी क्षेत्र भारत का सबसे बड़ा शुष्क क्षेत्र है। कर्नाटक का सबसे ऊंचा स्थल चिकमंगलूर जिले का मुल्लयनगिरि पर्वत है। यहां की समुद्र सतह से ऊंचाई 1,929 मीटर (6,329 फीट) है। कर्नाटक की महत्त्वपूर्ण नदियों में कावेरी, तुंगभद्रा नदी, कृष्णा नदी, मलयप्रभा नदी और शरावती नदी हैं।

कृषि हेतु योग्यता के अनुसार यहां की मृदा को छः प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है: लाल, लैटेरिटिक, काली, ऍल्युवियो-कोल्युविलय एवं तटीय रेतीली मिट्टी। राज्य में चार प्रमुख ऋतुएं आती हैं। जनवरी और फ़रवरी में शीत ऋतु, उसके बाद मार्च-मई तक ग्रीष्म ऋतु, जिसके बाद जून से सितंबर तक वर्षा ऋतु (मॉनसून) और अंततः अक्टूबर से दिसम्बर पर्यन्त मॉनसूनोत्तर काल। मौसम विज्ञान के आधार पर कर्नाटक तीन क्षेत्रों में बांटा जा सकता है: तटीय, उत्तरी आंतरिक और दक्षिणी आंतरिक क्षेत्र। इनमें से तटीय क्षेत्र में सर्वाधिक वर्षा होती है, जिसका लगभग 3,638.5 मि॰मी॰ (143 इंच) प्रतिवर्ष है, जो राज्य के वार्षिक औसत 1,139 मि॰मी॰ (45 इंच) से कहीं अधिक है। शिमोगा जिला में अगुम्बे भारत में दूसरा सर्वाधिक वार्षिक औसत वर्षा पाने वाला स्थल है। यहां का सर्वाधिक अंकित तापमान ४५.६ ° से. (११४ °फ़ै.) रायचूर में तथा न्यूनतम तापमान 2.8 °से. (37 °फ़ै) बीदर में नापा गया है।

कर्नाटक का लगभग 38,724 कि॰मी2 (14,951 वर्ग मील) (राज्य के भौगोलिक क्षेत्र का २०%) वनों से आच्छादित है। ये वन संरक्षित, सुरक्षित, खुले, ग्रामीण और निजी वनों में वर्गीकृत किये जा सकते हैं। यहां के वनाच्छादित क्षेत्र भारत के औसत वनीय क्षेत्र २३% से कुछ ही कम हैं, किन्तु राष्ट्रीय वन नीति द्वारा निर्धारित ३३% से कहीं कम हैं

कर्नाटक राज्य में भारत के अन्य राज्यों कि भांति ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया द्वारा चुनी गयी एक द्विसदनीय संसदीय सरकार है: विधान सभा एवं विधान परिषद। विधान सभा में 225 सदस्य हैं जो पांच वर्ष की अवधि हेतु चुने जाते हैं। विधान परिषद एक ७५ सदस्यीय स्थायी संस्था है और इसके एक-तिहाई सदस्य (२५) प्रत्येक २ वर्ष में सेवा से निवृत्त होते जाते हैं।

कर्नाटक सरकार की अध्यक्षता विधान सभा चुनावों में जीतकर शासन में आयी पार्टी के सदस्य द्वारा चुने गये मुख्य मंत्री करते हैं। मुख्य मंत्री अपने मंत्रिमंडल सहित तय किये गए विधायी एजेंडा का पालन अपनी अधिकांश कार्यकारी शक्तियों के उपयोग से करते हैं। फिर भी राज्य का संवैधानिक एवं औपचारिक अध्यक्ष राज्यपाल ही कहलाता है। राज्यपाल को ५ वर्ष की अवधि हेतु केन्द्र सरकार के परामर्श से भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है। कर्नाटक राज्य की जनता द्वारा आम चुनावों के माध्यम से २८ सदस्य लोक सभा हेतु भी चुने जाते हैं। विधान परिषद के सदस्य भारत के संसद के उच्च सदन, राज्य सभा हेतु १२ सदस्य चुन कर भेजते हैं।

कर्नाटक राज्य में विभिन्न बहुभाषायी और धार्मिक जाति-प्रजातियां बसी हुई हैं। इनके लंबे इतिहास ने राज्य की सांस्कृतिक धरोहर में अमूल्य योगदान दिया है। कन्नड़िगों के अलावा, यहां तुलुव, कोडव और कोंकणी जातियां, भी बसी हुई हैं। यहां अनेक अल्पसंख्यक जैसे तिब्बती बौद्ध तथा अनेक जनजातियाँ जैसे सोलिग, येरवा, टोडा और सिद्धि समुदाय हैं जो राज्य में भिन्न रंग घोलते हैं। कर्नाटक की परंपरागत लोक कलाओं में संगीत, नृत्य, नाटक, घुमक्कड़ कथावाचक आदि आते हैं। मालनाड और तटीय क्षेत्र के यक्षगण, शास्त्रीय नृत्य-नाटिकाएं राज्य की प्रधान रंगमंच शैलियों में से एक हैं। यहां की रंगमंच परंपरा अनेक सक्रिय संगठनों जैसे निनासम, रंगशंकर, रंगायन एवं प्रभात कलाविदरु के प्रयासों से जीवंत है। इन संगठनों की आधारशिला यहां गुब्बी वीरन्ना, टी फी कैलाशम, बी वी करंथ, के वी सुबन्ना, प्रसन्ना और कई अन्य द्वारा रखी गयी थी। वीरागेस, कमसेल, कोलाट और डोलुकुनिता यहां की प्रचलित नृत्य शैलियां हैं। मैसूर शैली के भरतनाट्य यहां जत्ती तयम्मा जैसे पारंगतों के प्रयासों से आज शिखर पर पहुंचा है और इस कारण ही कर्नाटक, विशेषकर बंगलौर भरतनाट्य के लिये प्रधान केन्द्रों में गिना जाता है।

कर्नाटक का विश्वस्तरीय शास्त्रीय संगीत में विशिष्ट स्थान है, जहां संगीत की कर्नाटक (कार्नेटिक) और हिन्दुस्तानी शैलियां स्थान पाती हैं। राज्य में दोनों ही शैलियों के पारंगत कलाकार हुए हैं। वैसे कर्नाटक संगीत में कर्नाटक नाम कर्नाटक राज्य विशेष का ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारतीय शास्त्रीय संगीत को दिया गया है।१६वीं शताब्दी के हरिदास आंदोलन कर्नाटक संगीत के विकास में अभिन्न योगदान दिया है। सम्मानित हरिदासों में से एक, पुरंदर दास को कर्नाटक संगीत पितामह की उपाधि दी गयी है। कर्नाटक संगीत के कई प्रसिद्ध कलाकार जैसे गंगूबाई हंगल, मल्लिकार्जुन मंसूर, भीमसेन जोशी, बसवराज राजगुरु, सवाई गंधर्व और कई अन्य कर्नाटक राज्य से हैं और इनमें से कुछ को कालिदास सम्मान, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से भी भारत सरकार ने सम्मानित किया हुआ है।

कर्नाटक संगीत पर आधारित एक अन्य शास्त्रीय संगीत शैली है, जिसका प्रचलन कर्नाटक राज्य में है। कन्नड़ भगवती शैली आधुनिक कविगणों के भावात्मक रस से प्रेरित प्रसिद्ध संगीत शैली है। मैसूर चित्रकला शैली ने अनेक श्रेष्ठ चित्रकार दिये हैं, जिनमें से सुंदरैया, तंजावुर कोंडव्य, बी.वेंकटप्पा और केशवैय्या हैं। राजा रवि वर्मा के बनाये धार्मिक चित्र पूरे भारत और विश्व में आज भी पूजा अर्चना हेतु प्रयोग होते हैं। मैसूर चित्रकला की शिक्षा हेतु चित्रकला परिषत नामक संगठन यहां विशेष रूप से कार्यरत है।

कर्नाटक में महिलाओं की परंपरागत भूषा साड़ी है। कोडगु की महिलाएं एक विशेष प्रकार से साड़ी पहनती हैं, जो शेष कर्नाटक से कुछ भिन्न है। राज्य के पुरुषों का परंपरागत पहनावा धोती है, जिसे यहां पाँचे कहते हैं। वैसे शहरी क्षेत्रों में लोग प्रायः कमीज-पतलून तथा सलवार-कमीज पहना करते हैं। राज्य के दक्षिणी क्षेत्र में विशेष शैली की पगड़ी पहनी जाती है, जिसे मैसूरी पेटा कहते हैं और उत्तरी क्षेत्रों में राजस्थानी शैली जैसी पगड़ी पहनी जाती है और पगड़ी या पटगा कहलाती है।

SOURCE-PIB

 

बीप सिस्टम

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि केंद्र सरकार कोविड बीप के उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर  कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि कोविड बीप भारत का पहला स्वदेशी और किफायती वायरलेस सिस्टम है जो कोविड मरीजों के शारीरिक मापदंडों पर नजर रखता है। कोविड बीप को ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, हैदराबाद ने इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और परमाणु ऊर्जा विभाग के सहयोग से विकसित किया है।

ईसीआईएल सीएसआर गतिविधियों के हिस्से के रूप में वित्तीय वर्ष 2020-2021 में अब तक हैदराबाद के सरकारी अस्पतालों को 40 कोविड-बीईईपी की आपूर्ति की गई। इसके अलावा, अगस्त 2021 के मध्य तक, ईएसआईसी, हैदराबाद को अतिरिक्त 100 कोविड बीप भेजने की तैयारी है।

इस उत्पाद की विशेषताओं पर 11 जून 2021 को एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस के माध्यम से श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सचिव को विस्तार से जानकारी दी गई। विचार-विमर्श के आधार पर, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को व्यापक उपयोग के लिए एक प्रस्ताव भी भेजा गया था।

SOURCE-PIB

 

सिक्योर्ड लॉजिस्टिक्स डॉक्यूमेंट एक्सचेंज

केंद्र सरकार द्वारा आज ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और ज्यादा बनाने के उद्देश्य से ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन के लिए कैलकुलेटर के साथ-साथ “सिक्योर्ड लॉजिस्टिक्स डॉक्यूमेंट एक्सचेंज” की शुरूआत की गई है।

डिजिटल पहल की शुरूआत लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार लाने, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी लाने और मल्टी-मॉडलिटी एवं निरंतरता को बढ़ावा देने के लिए की गई है।

इन डिजिटल पहलों की शुरूआत अंतराल क्षेत्रों को पूर्ण करने के लिए की गई हैं, जहां पर अब तक किसी भी निजी कंपनियों या संबंधित मंत्रालयों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस लोकार्पण कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्रालयों, बैंकों, आईटी कंपनियों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, लॉजिस्टिक क्षेत्र के हितधारकों और उद्योग निकायों के 75 से ज्यादा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

इस कार्यक्रम में स्वदेशी इंडिया-स्पेसिफिक मैट्रिक्स की स्थापना के महत्व पर बल दिया गया, जिससे लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक में भारत की रैंकिंग में सुधार लाने वाले लक्ष्यों की प्राप्ति की जा सके, लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी और लॉजिस्टिक्स में निरंतर सुधार लाया जा सके।

“लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के एकीकृत विकास” वाले अधिदेश के साथ, लॉजिस्टिक प्रभाग ने मंत्रालयों/विभागों में विभिन्न डिजिटल प्रणालियों को एकीकृत करने और पहचान किए गए अंतरालों को भरने पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ विशिष्ट डिजिटल पहलों वाली योजना बनाई है।इस संदर्भ में, लॉजिस्टिक संबंधित दस्तावेजों के डिजिटल आदान-प्रदानकरने वाले एसएलडीई प्लेटफॉर्म सहितप्रमुख डिजिटल पहल और माल ढुलाई का परिवहन करनेके लिए चिरस्थायी और सही माध्यम का चुनाव करने के लिए जीएचजी उत्सर्जन हेतु एक कैलकुलेटर को विकसित किया गया है।

एसएलडीई एक प्लेटफॉर्म है जो डिजिटलकृत, सुरक्षित और समेकित दस्तावेज विनिमय प्रणाली के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स दस्तावेजों का निर्माण, आदान-प्रदान और अनुपालन की वर्तमान मैनुअल प्रक्रिया को प्रतिस्थापित करने वाला एक उपाय है।

यह डेटा सुरक्षा एवं प्रमाणीकरण के लिए आधार और ब्लॉक-चेन आधारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का डिजिटल उपयोग करते हुए लॉजिस्टिक्स संबंधित दस्तावेजों का उत्पादन, भंडारण और वस्तु-विनिमय को संभव बनाएगा;यह दस्तावेज़ हस्तांतरण का एक पूरा ऑडिट मार्ग भी प्रदान करेगा, तीव्र गति से लेनदेन का निष्पादन, प्रेषण की लागत में कमी,संपूर्ण कार्बन फुटप्रिंट, दस्तावेजों की प्रामाणिकता का सरल सत्यापन, धोखाधड़ी के जोखिम में कमी भी लाएगा। इस प्लेटफॉर्मकी अवधारणा का विकास और निष्पादन (आईसीआईसीआई, एक्सिस बैंक, भारतीय स्टेट बैंक और एचडीएफसी बैंक) बैंकों और हितधारकों के साथमिलकर किया गया है, जिसमेंमाल भाड़ा प्रेषक, निर्यातक, आयातक और पोत ऑपरेटरभी शामिल हैं।

एसएलडीई के साथ-साथ, केंद्र सरकार द्वारा ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन कैलकुलेटर की भी शुरूआत की गई है। जीएचजी कैलकुलेटर एक कुशल और उपयोगकर्ता के अनुरूप उपकरण है और विभिन्न उपायों के माध्यम से जीएचजी उत्सर्जन की गणना और तुलना की सुविधा प्रदान करता है। यह सड़क और रेल द्वारा आवागमन करने के बीच जीएचजी उत्सर्जन की वस्तुआधारित तुलना और परिवहन की कुल लागत के लिए अनुमति प्रदान करता है, जिसमें पर्यावरण की लागत भी शामिल है। उपकरण का उद्देश्य सभी संबद्ध वस्तुओं के लिए उपयुक्त मॉडल विकल्प की सुविधा प्रदान करना है।

अपने उद्घाटन भाषण में विशेष सचिव (लॉजिस्टिक), श्री पवन कुमार अग्रवाल ने लॉजिस्टिक्स स्पेस में डिजिटल रूपांतरण के महत्व के संदर्भ में बताया और एक से अधिक मंत्रालय/विभाग के साथ इंटरफेस करने वाली ऐसी महत्वपूर्ण पहलों के माध्यम से पूरे क्षेत्र में डिजिटल एकीकरण को सुविधाजनक बनाने में लॉजिस्टिक्स डिवीजन की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने आगे कहा कि इस कार्यक्रम के दौरान शुरू की गई पहलों में ऐसी क्षमता है कि वह इस क्षेत्र में स्थायी और महत्वपूर्ण प्रभाव उत्पन्न कर सकता है।

लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में व्यापार करने वाले क्षेत्रों के लाभ पर बल देते हुए जिसे एसएलडीई प्लेटफॉर्म सुविधा प्रदान करेगा, बैंकिंग क्षेत्र द्वारा एसएलडीई मंच की मजबूती का समर्थन किया गया और इस दिशा में लॉजिस्टिक्स डिवीजन, एमओसीआई के प्रयासों की सराहना की गई।सभी औद्योगिक हितधारकों ने वस्तु के ई-बिल का डिजिटलीकरण सहित लॉजिस्टिक संबंधित दस्तावेजों के आदान-प्रदान को तीव्र, सुरक्षित और कुशलतापुर्वक करने की आवश्यकता पर बल देते हुए इस पहल को अपना समर्थन प्रदान किया और इसे अपनाया।

इस अवसर पर बोलते हुए उपयोगकर्ता उद्योग संघों के प्रतिनिधियों, जैसे फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (एफआईईओ), कंटेनर फ्रेट स्टेशन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएफएसआईए) आदि, ने जीएचजी उत्सर्जन की गणना करने के लिए एक उपकरण के महत्व और उपयोगिता पर बल दिया और कहा कि और पर्यावरण लागत अनुमानों की उपलब्धता पर आधारित मॉडल विकल्प हरित एवं चिरस्थायी लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देने की दिशा में बहुत ही लंबा रास्ता तय करेगा।

SOURCE-PIB

 

किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण)
संशोधन विधेयक, 2021

किशोर न्याय अधिनियम, 2015 में संशोधन करने के लिए किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2021, को आज राज्यसभा में पारित किया गया। सरकार ने इस वर्ष के बजट सत्र में इस बिल को संसद में पेश किया था। लोकसभा में इसे 24.03.2021 को ही पारित कर दिया गया था।

विधेयक पेश करते समय केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति जूबिन इरानी ने व्यवस्था में व्याप्त कमियों के आलोक में असुरक्षित बच्चों की देखभाल व सुरक्षा की जिम्मेदारी जिलाधिकारियों को सौंपने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सभी मुद्दों से ऊपर उठकर बच्चों की मूलभूत आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने के लिए संसद की प्रतिबद्धता को दोहराया।

इन संशोधनों में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट सहित जिला मजिस्ट्रेट को जेजे अधिनियम की धारा 61 के तहत गोद लेने के आदेश जारी करने के लिए अधिकृत करना शामिल है, ताकि मामलों का त्वरित निपटान होना सुनिश्चित किया जा सके और जवाबदेही बढ़ाई जा सके। अधिनियम के तहत जिलाधिकारियों को इसके सुचारू कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के साथ-साथ संकट की स्थिति में बच्चों के पक्ष में समन्वित प्रयास करने के लिए और अधिक अधिकार दिए गए हैं। अधिनियम के संशोधित प्रावधानों के अनुसार, किसी भी बाल देखभाल संस्थान को जिला मजिस्ट्रेट की सिफारिशों पर विचार करने के बाद ही पंजीकृत किया जाएगा। जिला मजिस्ट्रेट स्वतंत्र रूप से जिला बाल संरक्षण इकाइयों, बाल कल्याण समितियों, किशोर न्याय बोर्डों, विशेष किशोर पुलिस इकाइयों, बाल देखभाल संस्थानों आदि के कामकाज का मूल्यांकन करेंगे।

सीडब्ल्यूसी सदस्यों की नियुक्ति के लिए पात्रता मानकों को फिर से परिभाषित किया गया है। सीडब्ल्यूसी सदस्यों की अयोग्यता के मानदंड भी यह सुनिश्चित करने के लिए पेश किए गए हैं कि, केवल आवश्यक योग्यता और सत्यनिष्ठा के साथ गुणवत्तापूर्ण सेवा प्रदान करने में सक्षम व्यक्तियों को ही सीडब्ल्यूसी में नियुक्त किया जाए।

फिलहाल कानून के तहत तीन तरह के अपराधों (हल्के, गंभीर, घृणित) को परिभाषित किया गया है। जिनका बच्चों के मामले में कानून से संबंधी किसी उल्लंघन पर विचार करते समय संदर्भित किया जाता है। हालांकि यह देखा गया है कि कुछ ऐसे अपराध होते हैं, जो ऊपर बताए गई श्रेणियों में शामिल नहीं हो पाते हैं। यह निर्णय लिया गया है कि जिन अपराधों में अधिकतम सजा 7 वर्ष से अधिक कारावास है, लेकिन कोई न्यूनतम सजा निर्धारित नहीं की गई है या 7 वर्ष से कम की न्यूनतम सजा प्रदान की गई है, उन्हें इस अधिनियम के तहत गंभीर अपराध माना जाएगा।

अधिनियम के कई प्रावधानों के क्रियान्वन में आने वाली कठिनाइयों को इसमें संबोधित किया गया है। इसके तहत किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के विभिन्न प्रावधानों की व्याख्या में उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए संशोधन किए गए हैं। साथ ही अधिनियम में शामिल किए गए कुछ प्रावधानों के इस्तेमाल की संभावनाओं को स्पष्ट किया गया है।

SOURCE-PIB

 

हड़प्पा शहर धोलावीरा

27 जुलाई, 2021 को धोलावीरा (हड़प्पा शहर), जो गुजरात के कच्छ जिले में स्थित है, को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल किया जाने वाला 40वां भारतीय स्थान है।

मुख्य बिंदु

  • इस साइट को प्रतिष्ठित सूची में शामिल करने का निर्णय फ़ूज़ौ, चीन में 44वीं यूनेस्को विश्व विरासत समिति सत्र में लिया गया।
  • 25 जुलाई को एक और भारतीय स्थल तेलंगाना में रामप्पा मंदिर को इस सूची में जोड़ा गया था।
  • चंपानेर, अहमदाबाद के चारदीवारी वाले क्षेत्र और रानी की वाव के बाद, धोलावीरा यूनेस्को की इस सूची में शामिल होने वाला गुजरात का चौथा स्थल बन गया है।
  • धोलावीरा दक्षिण एशिया की सबसे अच्छी तरह से संरक्षित शहरी बस्तियों में से एक है।

धोलावीरा (Dholavira)

यह शहर वर्ष 1968 में खोजा गया था, और यह गुजरात राज्य में कच्छ जिले के कच्छ के ग्रेट रण में खादिर द्वीप पर स्थित है। धोलावीरा शहर 22 हेक्टेयर में फैला हुआ है और यह सिंधु घाटी सभ्यता का पांचवां सबसे बड़ा पुरातात्विक स्थल है। यह शहर लगभग 3,000 ईसा पूर्व का है और ऐसा माना जाता है कि इस शहर में  1500 ईसा पूर्व तक तक रहते थे। इसका नाम भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित धोलावीरा गांव से लिया गया है। स्थानीय रूप से इस स्थल को कोटड़ा टिम्बा के नाम से जाना जाता है।

इस साइट को तीन भागों में बांटा गया है। वे मध्य शहर, गढ़ और निचला शहर हैं। गढ़ में किलेबंदी की विस्तृत संरचनाएँ हैं। इस साइट पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा खुदाई से पता चला है कि शहर के घरों का निर्माण चूने के पत्थरों से किया गया था और ये सभी एक सीवेज नेटवर्क से जुड़े थे। यहाँ पर ताजा या बारिश के पानी को स्टोर करने के लिए टैंक भी मिले हैं। इसमें खुदाई के दौरान सजावटी मोती, लाल मिट्टी के बर्तन और सूक्ष्म पाषाण उपकरण भी मिले हैं।

युनेस्को

यूनेस्को (UNESCO) ‘संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (United Nations Educational Scientific and Cultural Organization)’ का लघुरूप है।

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) संयुक्त राष्ट्र का एक घटक निकाय है। इसका कार्य शिक्षा, प्रकृति तथा समाज विज्ञान, संस्कृति तथा संचार के माध्यम से अंतराष्ट्रीय शांति को बढ़ावा देना है। संयुक्त राष्ट्र की इस विशेष संस्था का गठन 16 नवम्बर 1945 को हुआ था। इसका उद्देश्य शिक्षा एवं संस्कृति के अंतरराष्ट्रीय सहयोग से शांति एवं सुरक्षा की स्थापना करना है, ताकि संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में वर्णित न्याय, कानून का राज, मानवाधिकार एवं मौलिक स्वतंत्रता हेतु वैश्विक सहमति बने।

परिचय

यूनेस्को के 193 सदस्य देश हैं और 11 सहयोगी सदस्य देश और दो पर्यवेक्षक सदस्य देश हैं। इसके कुछ सदस्य स्वतंत्र देश भी नहीं हैं। इसका मुख्यालय पेरिस (फ्रांस) में है। इसके ज्यादार क्षेत्रीय कार्यालय क्लस्टर के रूप में है, जिसके अंतर्गत तीन-चार देश आते हैं, इसके अलावा इसके राष्ट्रीय और क्षेत्रीय कार्यालय भी हैं। यूनेस्को के 27 क्लस्टर कार्यालय और 21 राष्ट्रीय कार्यालय हैं।

यूनेस्को मुख्यतः शिक्षा, प्राकृतिक विज्ञान, सामाजिक एवं मानव विज्ञान, संस्कृति एवं सूचना व संचार के जरिये अपनी गतिविधियां संचालित करता है। वह साक्षरता बढ़ानेवाले कार्यक्रमों को प्रायोजित करता है और वैश्विक धरोहर की इमारतों और पार्कों के संरक्षण में भी सहयोग करता है। यूनेस्को की विरासत सूची में हमारे देश के कई ऐतिहासिक इमारत और पार्क शामिल हैं। दुनिया भर के 332 अंतरराष्ट्रीय स्वयंसेवी संगठनों के साथ यूनेस्को के संबंध हैं। फिलहाल यूनेस्को के महानिदेशक आंद्रे एंजोले हैं। भारत 1946 से यूनेस्को का सदस्य देश है।

SOURCE-GK TODAY

 

पासेओ डेल प्राडो और बुएन रेटिरो पार्क

मैड्रिड, स्पेन के बुएन रेटिरो पार्क (Buen Retiro Park) और पासेओ डेल प्राडो (Paseo del Prado) को यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में जोड़ा गया है।

मुख्य बिंदु

  • इस घोषणा के साथ स्पेन में विश्व धरोहर स्थलों की कुल संख्या 49 हो गई है जो इटली और चीन के बाद विश्व स्तर पर तीसरी सबसे ज्यादा संख्या है।
  • इन दो स्थलों को जोड़ने से पहले कोई भी विरासत स्थल स्पेन की राजधानी मैड्रिड में स्थित नहीं था।

बुएन रेटिरो पार्क और पासेओ डेल प्राडो (Buen Retiro Park and Paseo Del Prado)

बुएन रेटिरो पार्क राजधानी शहर के केंद्र में स्थित कुल 118 हेक्टेयर क्षेत्र के साथ एक हरा आश्रय (green refuge) है। Paseo del Prado में छह संग्रहालय, प्रसिद्ध Plaza de Cibeles Square और प्रसिद्ध Fuente de Cibeles Fountain है।

निष्कर्ष

यूनेस्को विश्व विरासत सूची में शामिल किए जाने के लिए हर साल 25 प्रस्तावों का मूल्यांकन करता है। स्पेन ने इन दो स्थलों को विश्व विरासत सूची में शामिल करने के प्रयास वर्ष 2014 से  शुरू किए थे।

स्पेन

स्पेन (स्पैनिश: España, इस्पान्या), आधिकारिक तौर पर स्पेन की राजशाही (स्पैनिश: Reino de España), एक यूरोपीय देश और यूरोपीय संघ का एक सदस्य राष्ट्र है। यह यूरोप के दक्षिणपश्चिम में इबेरियन प्रायद्वीप पर स्थित है, इसके दक्षिण और पूर्व में भूमध्य सागर सिवाय ब्रिटिश प्रवासी क्षेत्र, जिब्राल्टर की एक छोटी से सीमा के, उत्तर में फ्रांस, अण्डोरा और बिस्के की खाड़ी (Gulf of Biscay) तथा और पश्चिमोत्तर और पश्चिम में क्रमश: अटलांटिक महासागर और पुर्तगाल स्थित हैं। 674 किमी लंबे पिरेनीज़ (Pyrenees) पर्वत स्पेन को फ्रांस से अलग करते हैं। यहाँ की भाषा स्पानी (Spanish) है।

स्पेनिश अधिकार क्षेत्र में भूमध्य सागर में स्थित बेलियरिक द्वीप समूह, अटलांटिक महासागर में अफ्रीका के तट पर कैनरी द्वीप समूह और उत्तरी अफ्रीका में स्थित दो स्वायत्त शहर सेउटा और मेलिला जो कि मोरक्को सीमा पर स्थित है, शामिल है। इसके अलावा लिविया नामक शहर जो कि फ्रांसीसी क्षेत्र के अंदर स्थित है स्पेन का एक बहि:क्षेत्र है। स्पेन का कुल क्षेत्रफल 504,030 किमी² का है जो पश्चिमी यूरोप में इसे यूरोपीय संघ में फ्रांस के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश बनाता है।

स्पेन एक संवैधानिक राजशाही के तहत एक संसदीय सरकार के रूप में गठित एक लोकतंत्र है। स्पेन एक विकसित देश है जिसका सांकेतिक सकल घरेलू उत्पाद इसे दुनिया में बारहवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाता है, यहां जीवन स्तर बहुत ऊँचा है (20 वां उच्चतम मानव विकास सूचकांक), 2005 तक जीवन की गुणवत्ता सूचकांक की वरीयता के अनुसार इसका स्थान दसवां था। यह संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, नाटो, ओईसीडी और विश्व व्यापार संगठन का एक सदस्य है।

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