Current Affairs 30 December 2021

Current Affairs – 30 December, 2021

उपभोक्ता संरक्षण (जिला आयोग, राज्य आयोग और राष्ट्रीय आयोग के अधिकार क्षेत्र) नियम, 2021

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 34 की उप धारा (1), धारा 47 की उप धारा (1) के खंड (ए) के उपखंड (i) और धारा 58 की उप धारा (1) के खंड (ए) के उपखंड (i) के साथ ही धारा 101 की उप धारा (2) के उपखंड (ओ), (एक्स) और (जेडसी) के प्रावधानों द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए केन्द्र सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण (जिला आयोग, राज्य आयोग और राष्ट्रीय आयोग के अधिकार क्षेत्र) नियम, 2021 अधिसूचित कर दिए हैं।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 उपभोक्ता विवादों के समाधान के लिए तीन स्तरीय अर्ध न्यायिक तंत्र की घोषणा करता है, जिनमें जिला आयोग, राज्य आयोग और राष्ट्रीय आयोग शामिल हैं। अधिनियम उपभोक्ता आयोग के हर स्तर के आर्थिक क्षेत्राधिकार को भी निर्धारित करता है। अधिनियम के मौजूदा प्रावधानों के मुताबिक, जिला आयोगों को उन शिकायतों को देखने को अधिकार है, जहां वस्तु या सेवाओं का मूल्य एक करोड़ रुपये से ज्यादा न हो। राज्य आयोगों के अधिकार क्षेत्र में वे शिकायतें आती हैं, जहां वस्तुओं या सेवाओं का मूल्य 1 करोड़ रुपये से ज्यादा हो, लेकिन 10 करोड़ रुपये से ज्यादा न हो। वहीं राष्ट्रीय आयोग उन शिकायतों पर विचार करेगा, जहां वस्तुओं या सेवाओं के लिए भुगतान का मूल्य 10 करोड़ रुपये से ज्यादा हो।

अधिनियम के लागू होने के साथ, यह देखा गया कि उपभोक्ता आयोगों के आर्थिक क्षेत्राधिकार से संबंधित मौजूदा प्रावधानों के चलते ऐसे मामले सामने आ रहे थे, जो राष्ट्रीय आयोग से पहले राज्य आयोग में दायर किए गए थे और जो राज्य आयोग से पहले जिला आयोग में दायर किए गए थे। इसके चलते जिला आयोगों पर काम का बोझ खासा बढ़ गया, जिसे लंबित मामलों की संख्या बढ़ गई और निस्तारण में देरी हो रही थी। इससे अधिनियम के तहत परिकल्पित उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित समाधान का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा था।

आर्थिक क्षेत्राधिकार में संशोधन के साथ, केन्द्र सरकार ने राज्यों/ केन्द्र शासित प्रदेशों, उपभोक्ता संगठनों, कानून के जानकारों आदि के साथ व्यापक विचार विमर्श किया और लंबित मामलों के चलते पैदा हुई समस्याओं की विस्तार से जांच की।

उपरोक्त नियमों के अधिसूचित होने के साथ, अधिनियम के अन्य प्रावधानों के साथ नए आर्थिक क्षेत्राधिकार इस प्रकार होंगे :

  1. जिला आयोगों के क्षेत्राधिकार में वे शिकायतें आएंगी, जहां वस्तुओं या सेवाओं के लिए किए गए भुगतान का मूल्य 50 लाख रुपये से ज्यादा न हो।
  2. राज्य आयोगों के क्षेत्राधिकार में वे शिकायतें आएंगी, जहां वस्तुओं या सेवाओं के लिए किए गए भुगतान का मूल्य 50 लाख रुपये से ज्यादा हो, लेकिन 2 करोड़ रुपये से ज्यादा न हो।
  3. राष्ट्रीय आयोगों के क्षेत्राधिकार में वे शिकायतें आएंगी, जहां वस्तुओं या सेवाओं के लिए किए गए भुगतान का मूल्य 2 करोड़ रुपये से ज्यादा हो।

उल्लेखनीय है कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 कहता है कि हर शिकायत का जल्दी से जल्दी निस्तारण किया जाएगा और विपक्षी पार्टी को नोटिस प्राप्त होने की तारीख से 3 महीने की अवधि के भीतर शिकायत पर फैसला करने का प्रयास किया जाएगा, जहां शिकायत के कमोडिटीज के विश्लेषण या जांच की जरूरत न हो और यदि कमोडिटीज के विश्लेषण या जांच की जरूरत होने पर शिकायत के निस्तारण की अवधि 5 महीने होगी।

अधिनियम शिकायतों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से शिकायत दर्ज करने का विकल्प देता है। उपभोक्ताओं को ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा देने के लिए, केन्द्र सरकार ने ई-दाखिल पोर्ट बनाया है जो देश भर के उपभोक्ताओं को सुविधाजनक रूप से संबंधित उपभोक्ता फोरम से संपर्क करने, यात्रा करने और अपनी शिकायत दर्ज करने के लिए वहां मौजूदगी की जरूरत को समाप्त करने के उद्देश्य से एक झंझट मुक्त, त्वरित और किफायती सुविधा प्रदान करता है। ई-दाखिल में ई-नोटिस, केस दस्तावेज डाउनलोड लिंक और वीसी सुनवाई लिंक, विपक्षी पार्टी द्वारा लिखित जवाब दाखिल करने, शिकायतकर्ता द्वारा प्रत्युत्त दाखिल करने और एसएमएस/ईमेल के माध्यम से अलर्ट भेजने जैसी कई खूबियां हैं। वर्तमान में, ई-दाखिल की सुविधा 544 उपभोक्ता आयोगों को उपलब्ध हैं, जिसमें 21 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के राष्ट्रीय आयोग और उपभोक्ता आयोग शामिल हैं। अभी तक, ई-दाखिल पोर्टल के इस्तेमाल से 10,000 से ज्यादा मामले दर्ज हो चुके हैं और 43,000 से ज्यादा उपयोगकर्ताओं ने पोर्टल पर पंजीकरण कराया है।

उपभोक्ता विवादों को निपटाने का एक तेज और सौहार्दपूर्ण तरीका उपलब्ध कराने के लिए, अधिनियम में उपभोक्ता विवादों को दोनों पक्षों की सहमति के साथ मध्यस्थता के लिए भेजने का प्रावधान है। इससे न सिर्फ विवाद में शामिल पक्षों का समय और पैसा बचेगा, बल्कि लंबित मामलों की संख्या कम करने में भी मदद मिलेगी।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 भारत सरकार द्वारा पारित एक उपभोक्ता संरक्षण कानून है जिसे देश के उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए एवं उनके साथ होने वाली धोखाधड़ी रोकने के लिए मोदी सरकार ने 2019 पारित किया था। यह अधिनियम 20 जुलाई 2020 से ही प्रभावी हो गया है। इस नए अधिनियम ने पुराने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 की जगह ली है। इस नए कानून का पहला ड्राफ्ट 2014 में तैयार किया गया था। पहले यह कानून जनवरी 2020 में लागू होना था परन्तु उसके बाद कोरोना के कारण इसमें ओर विलम्ब हुआ। उपभोक्ता अदालत के अतिरिक्त नए कानून के अंतर्गत केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) का भी गठन किया जाएगा।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 में CCPA की स्थापना का प्रावधान है जो उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करने के साथ-साथ उनको बढ़ावा देगा और लागू करेगा। यह प्राधिकरण अनुचित व्यापार प्रथाओं, भ्रामक विज्ञापनों और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित मामलों को भी देखेगा।

इसके पास उल्लंघनकर्ताओं पर जुर्माना लगाने और बिके हुए माल को वापस लेने या सेवाओं को वापस लेने के आदेश पारित करना, अनुचित व्यापार प्रथाओं को बंद करने और उपभोक्ताओं द्वारा भुगतान की गई कीमत को वापिस दिलाने का अधिकार भी होगा।

इस प्राधिकरण का नेतृत्व महानिदेशक करेंगे।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (The Consumer Protection Act, 2019) को बनाए जाने का उद्देश्य ग्राहकों के अधिकारों को सुरक्षित करना है। एक अर्थव्यवस्था में कोई भी व्यक्ति अनेक उत्पाद खरीदता है और अनेक सेवाओं को खरीदता है। एक खरीदने वाले के पास यह अधिकार होना चाहिए कि जिस उत्पाद और सेवा को उसे बेचा गया है उसके संबंध में समस्त अधिकार होना चाहिए। जैसे कि यदि उसे कोई गलत उत्पाद देता गया है तो वह प्रतिकर प्राप्त कर सके, यदि उसे बताई गई इस सेवा के अनुरूप सेवा नहीं दे रही गई है तथा उसने भुगतान कर दिया है ऐसी स्थिति में उसके पास में प्रतिकर प्राप्त करने का अधिकार होना चाहिए भारत की संसद में इन्हीं महान उद्देश्यों को तथा प्रगतिशील भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम बनाया है। किसी भी बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के लिए यह आवश्यक है कि वहां उसके ग्राहकों के भी अधिकार सुनिश्चित होना चाहिए तथा एक ग्राहक के पास यह अधिकार होना चाहिए कि यदि वह कोई भी उत्पाद या सेवा को खरीद रहा है आश्वस्त होना चाहिए कि उसके सभी अधिकार सुरक्षित हैं तथा उसके साथ किसी भी प्रकार की ठगी नहीं की जाएगी। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम को वर्ष 1986 में अधिनियमित किए जाने से लेकर माल और सेवाओं के लिए उपभोक्ता बाजारों में भारी परिवर्तन आया है। आधुनिक बाजारों में माल और सेवाओं का अम्बार लग गया है।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

 

विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना

श्री श्वेता हरीश ने बैंगलोर में अनुग्रह इंटीरियर सॉल्यूशंस नाम से अपने सपनों का उद्यम स्थापित किया। सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्‍यम उद्यम मंत्रालय ने विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना के तहत उनकी सहायता की। बाजार की बढ़ती मांग ने सुश्री श्वेता हरीश को अपने सहयोगियों के साथ मिलकर स्कूलों, कॉरपोरेट कार्यालयों और घरों के लिए मॉड्यूलर फर्नीचर का डिजाइन और निर्माण करने के लिए प्रेरित किया। अखबार में प्रकाशित उद्यम पंजीकरण के तहत आवेदन आमंत्रित करने से संबंधित एक विज्ञापन ने उनका ध्यान आकृष्ट किया और उन्हें रास्ता दिखाया। सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्‍यम उद्यम मंत्रालय की सहायता ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने की शक्ति दी।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSMEs) ने सेवा क्षेत्र के लिये विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना (Special Credit Linked Capital Subsidy Scheme- SCLCSS) शुरू की है।

विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना :

यह योजना सेवा क्षेत्र में उद्यमों की प्रौद्योगिकी संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करेगी। इसमें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सूक्ष्म और लघु उद्यमों को बिना किसी क्षेत्र विशेष प्रतिबंध के प्रौद्योगिकी के उन्नयन पर संयंत्र और मशीनरी तथा सेवा उपकरणों की खरीद के लिये संस्थागत ऋण के माध्यम से 25% पूंजीगत अनुदान (सब्सिडी) दिये जाने का प्रावधान है।

महत्त्व :

यह योजना MSEs को प्रौद्योगिकी उन्नयन, MSMEs द्वारा सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करने, उत्पादकता में वृद्धि और निरंतर सुधार की संस्कृति को बढ़ावा देने में मददगार साबित होगी। यह MSMEs में नवाचार, डिज़िटल सशक्तीकरण और डिज़ाइन हस्तक्षेप को भी बढ़ावा देगा।

प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिये क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना :

इसे वर्ष 2000 में लॉन्च किया गया था। योजना का उद्देश्य अनुमोदित निर्दिष्ट 51 उप-क्षेत्रों/उत्पादों में सुस्थापित और उन्नत प्रौद्योगिकी को शामिल करने के लिये 15% की अग्रिम पूंजी सब्सिडी (उनके द्वारा प्राप्त 1 करोड़ रुपए तक के संस्थागत वित्त पर) प्रदान करके MSEs में प्रौद्योगिकी उन्नयन की सुविधा प्रदान करना है। दूसरे शब्दों में योजना का मुख्य उद्देश्य अपने संयंत्र और मशीनरी को अत्याधुनिक तकनीक के साथ या बिना विस्तार के तथा नए MSEs के लिये अपग्रेड करना है, जिन्होंने योजना दिशा-निर्देशों के तहत विधिवत अनुमोदित उपयुक्त योग्य और सिद्ध तकनीक के साथ सुविधाएँ प्रदान की हैं।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

 

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की
वर्ष
2021 के दौरान प्रमुख पहलें

1. नशा मुक्त भारत अभियान

मादक पदार्थों के दुरुपयोग के मुद्दे से निपटने और भारत को नशा मुक्त बनाने के लिए देश में नशीले पदार्थों के उपयोग के मामले में सबसे संवेदनशील रूप से पहचान किए गए 272 जिलों में 15 अगस्त, 2020 को नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) की शुरुआत की गई थी। इन संवेदनशील जिलों की पहचान व्यापक राष्ट्रीय सर्वेक्षण के निष्कर्षों और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर की गई थी।

यह अभियान नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा नशीले पदार्थों की आपूर्ति पर लगाए गए अंकुश, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा पहुंच और जागरूकता तथा मांग में कमी लाने के प्रयास एवं स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से उपचार को शामिल करते हुए एक तीन-आयामी हमला है।

युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों, महिलाओं, बच्चों और नागरिक समाज संगठनों/गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) की प्रमुख लक्षित आबादी और नशा मुक्ति अभियान के हितधारकों के रूप में परिकल्पना की गई है।

नशा मुक्त भारत अभियान 15 अगस्त, 2020 को पहचान किए गए 272 जिलों में शुरू किया गया था। इसकी शुरुआत से ही पूरे देश में अनेक प्रकार की गतिविधियों का आयोजन किया गया है, जिनमें समाज के सभी वर्गों और हितधारकों की भागीदारी को बढ़ावा दिया गया है। जिला कलेक्टर/मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जिला स्तर नशा मुक्त समितियों ने योजना बनाकर अपने-अपने जिलों में इस अभियान के कार्यान्वयन में अग्रणी भूमिका निभाई है।

2. आजीविका और उद्यम के लिए हाशिए पर रहने वाले व्यक्तियों के लिए ‘स्माइल’ योजना

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने एक प्रमुख योजना ‘स्माइल-सपोर्ट फॉर मार्जिनेलाइज्ड इंडिविजुअल फॉर लाइव्लीहुड एंड इंटरप्राइज’ योजना तैयार की है, जिसमें दो उप योजनाएं- ‘ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण के लिए व्यापक पुनर्वास हेतु केंद्रीय क्षेत्र योजना’ और दूसरी भीख मांगने के कार्य में लगे व्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास के लिए’ केंद्रीय क्षेत्र योजना शामिल हैं। इस अम्ब्रेला योजना में कई व्यापक उपाय शामिल हैं, जिनमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और भीख मांगने के काम में लगे व्यक्तियों के लिए कल्याण उपायों सहित अनेक व्यापक उपाय शामिल हैं, जिनमें राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों, स्थानीय शहरी निकायों, स्वैच्छिक संगठनों, समुदाय आधारित संगठनों (सीबीओ) और अन्य संस्थानों की सहायता से पुनर्वास, चिकित्सा सुविधाओं, परामर्श, शिक्षा, कौशल विकास और आर्थिक संबंधों के बारे में व्यापक रूप से ध्यान केंद्रित किया गया है। इस योजना के जल्दी ही शुरू होने की उम्मीद है।

3. अनुसूचित जाति (एससी) छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना

एससी छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत केंद्रीय कैबिनेट ने दिसंबर, 2020 में 2020-21 से 2025-26 की अवधि के लिए योजना में परिवर्तनकारी बदलावों को मंजूरी दी थी। इनमें केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 की तय साझेदारी ढांचा और 2021-22 के बाद लाभार्थियों को केंद्रीय शेयर का डीबीटी शामिल है। मार्च, 2021 के दौरान संशोधित योजना के कार्यान्वयन को लेकर समय कम होने के बावजूद योजना के तहत आवंटन की उपलब्धि असाधारण थी और यह आवंटित बजट के 105 प्रतिशत से अधिक थी। 62 लाख से अधिक लाभार्थियों (अब तक राज्यों ने सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं करवाए हैं) को कवर करते हुए 4008.60 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की गई।

वित्तीय वर्ष 2021-22 से लाभार्थियों के बैंक खाते में प्रत्यक्ष केंद्रीय हिस्सा प्रदान किए जाने की बड़ी पहल को विभाग सफलतापूर्वक लागू कर रहा है। इसके तहत 6 दिसंबर, 2021 तक 4 लाख से अधिक लाभार्थियों के लिए कुल 245.42 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है।

वरिष्ठ नागरिक

अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस (आईडीओपी) के अवसर पर, मंत्रालय ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में एक समारोह का आयोजन किया जिसकी अध्यक्षता माननीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने की। माननीय उपराष्ट्रपति वयो नमन-2021 नामक इस समारोह में मुख्य अतिथि थे। इस अवसर पर निम्नलिखित कार्यकलाप आयोजित किए गए:

  1. वयोश्रेष्ठ सम्मान प्रदान किया जाना -वरिष्ठ नागरिकों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार
    माननीय उपराष्ट्रपति ने 05 संस्थानों तथा 06 व्यक्तियों को वयोश्रेष्ठ सम्मान प्रदान किया। ये पुरस्कार बुजुर्गों के कल्याण के क्षेत्र में सेवाएं प्रदान करने के लिए संस्थानों को तथा अलग-अलग वरिष्ठ नागरिकों को विभिन्‍न क्षेत्रों में अनुकरणीय कार्य प्रदर्शित करने के लिए प्रदान किए गए।
  2. राष्ट्र को एल्डरलाइन समर्पित करना
    राष्ट्रपति ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए एल्डरलाइन-14567 नामक एक टॉल फ्री राष्ट्रीय हेल्पलाइन समर्पित की। यह हेल्पलाइन शिकायत निवारण के लिए वरिष्ठ नागरिकों को एक मंच उपलब्ध कराती है। यह हेल्पलाइन माता-पिता तथा वरिष्ठ नागरिकों की देखरेख एवं कल्याण (एमडब्ल्यूपीएससी), 2007 तथा वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए निमित्त केंद्रीय सरकार की स्कीमों के संबंध में जागरूकता निर्माण के क्षेत्र में भी योगदान देती है।
  3. सैक्रेड (एसएसीआरईडी) पोर्टल लॉन्‍च किया जाना
    माननीय उपराष्ट्रपति द्वारा सीनियर एबल सिटीजन फार री-एंप्लायमेंट इन डिगनिटी (एसएसीआरईडी) (https://sacred.dosje.gov.in/)  नामक एक पोर्टल लॉन्‍च किया गया। यह पोर्टल ऐसी कंपनियों की प्राथमिकताओं को जो ऐसे वरिष्ठ नागरिकों को नियुक्त करने के लिए तैयारी है, इच्छुक वरिष्ठ नागरिकों की प्राथमिकताओं के साथ वर्चुअल रूप से मिलान करने के द्वारा उन्हें रोजगार प्रदान करने के लिए लॉन्‍च किया गया।
  4. एसएजीई (सेज) पोर्टल
    अटल वयो अभ्युदय योजना के तहत देश में रजत अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा एक स्कीम लॉन्‍च की गई थी जिसका उद्देश्‍य वृद्धजन कल्याण (रजत अर्थव्यवस्था) के क्षेत्र में स्टार्टअप्स की सहायता करना है। इन स्टार्टअप्स की भारत सरकार की इक्विटी भागीदारी के तहत सहायता की जानी है जो अधिकतम 49 प्रतिशत इक्विटी के अधीन तथा अधिकतम प्रति स्टार्टअप 1 करोड़ रुपये के अधीन होगी। आईडीओपी के अवसर पर, वित्त वर्ष 2021-22 के लिए चयनित स्टार्टअप्स की घोषणा की गई।

4. डीएनटी समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए स्कीम (सीड)

मंत्रालय ने डीएनटी समुदायों के कल्याण के लिए अगले पांच वर्षों के लिए कुल 200 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ ‘डीएनटी समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए स्कीम (सीड)’ नामक एक स्कीम का निर्माण किया है जिसके निम्नलिखित चार घटक हैं :-

  1. डीएनटी प्रत्याशियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने में सक्षम बनाने के लिए उन्हें अच्छी गुणवत्ता की कोचिंग प्रदान करना,
  2. उन्हें स्वास्थ्य बीमा प्रदान करना,
  3. सामुदायिक स्तर पर आजीविका पहल को सुगम बनाना और
  4. इन समुदाय के सदस्यों के लिए घरों के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

 

एयर बबल समझौते

भारत सरकार और सऊदी अरब सरकार ने सभी पात्र यात्रियों को दोनों देशों के बीच यात्रा करने की अनुमति देने के लिए एक एयर बबल समझौते को अंतिम रूप दिया है।

मुख्य बिंदु

एयर बबल समझौता दोनों देशों के बीच 1 जनवरी, 2022 से उड़ानों की अनुमति देगा।

निम्नलिखित यात्री भारत से सऊदी अरब के लिए उड़ान भरने के पात्र होंगे:

  1. सऊदी अरब के नागरिक या निवासी।
  2. भारतीय नागरिक या नेपाल या भूटान के नागरिक, जिनके पास सऊदी अरब का वैध वीज़ा है और केवल सऊदी अरब के लिए नियत किया गया है। यह उन एयरलाइनों के लिए होगा जो यह सुनिश्चित करने के लिए चिंतित हैं कि भारतीय या भूटानी या नेपाली नागरिक के सऊदी अरब में प्रवेश करने के लिए कोई यात्रा प्रतिबंध नहीं है।

एयर बबल समझौता

एयर बबल समझौता दो देशों के बीच अस्थायी व्यवस्था है। इस तरह की व्यवस्था का उद्देश्य वाणिज्यिक यात्री सेवाओं को फिर से शुरू करना है, अगर नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानें निलंबित हैं।

भारत ने किन देशों के साथ बबल समझौता किया है?

कोविड-19 महामारी के बीच, भारत ने अफगानिस्तान, बहरीन, ऑस्ट्रेलिया, भूटान, बांग्लादेश, इथियोपिया, कनाडा, जर्मनी, फिनलैंड, फ्रांस, जापान, इराक, केन्या, कजाकिस्तान, नेपाल, कुवैत, मालदीव, मॉरीशस, ओमान, नीदरलैंड, नाइजीरिया, रूस, कतर, सेशेल्स, रवांडा, सऊदी अरब, श्रीलंका, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, तंजानिया, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूक्रेन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), और उज़्बेकिस्तान सहित 35 देशों के साथ एक हवाई बुलबुला समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

उड़ानों का निलंबन

भारत ने कोविड-19 के बढ़ते मामलों और ओमिक्रोन वेरिएंट के कारण 31 जनवरी तक भारत में सभी निर्धारित अंतरराष्ट्रीय यात्री उड़ान संचालन को निलंबित कर दिया है।

SOURCE-GK TODAY

PAPER-G.S.2

 

Atal Ranking of Institutions on Innovation Achievements 2021 जारी की गई

29 दिसंबर, 2021 को, सरकार ने “Atal Ranking of Institutions on Innovation Achievements (ARIIA) 2021” पुरस्कार सूची जारी की।

मुख्य बिंदु

  • इस सूची में शीर्ष स्थान IIT मद्रास ने हासिल किया। यह तकनीकी श्रेणी में भारत में सबसे नवीन शैक्षणिक संस्थान के रूप में रैंकिंग में सबसे ऊपर है।
  • IIT मद्रास ने लगातार तीसरी बार यह सम्मान जीता है।
  • शीर्ष 10 संस्थानों में शामिल संस्थानों में शामिल हैं- IIT बॉम्बे, IIT दिल्ली, IIT रुड़की, IIT कानपुर, IIT खड़गपुर, भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) और IIT हैदराबाद।
  • “विश्वविद्यालय और डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी (सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त) (तकनीकी)” श्रेणी के तहत, पंजाब विश्वविद्यालय और दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय शीर्ष स्थान पर थे।
  • ‘कॉलेजों/संस्थानों (सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त) (तकनीकी)’ श्रेणी के तहत, पुणे में इंजीनियरिंग कॉलेज और पीएसजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी ने पुरस्कार जीते।
  • “गैर-तकनीकी संस्थान” श्रेणी के तहत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU), दिल्ली और भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM), कोझीकोड ने पुरस्कार जीते।

ARIIA रैंक

  • ARIIA रैंकों की घोषणा 9 अलग-अलग श्रेणियों में की जाती है, जिसमें केंद्र द्वारा वित्त पोषित तकनीकी संस्थान जैसे IIT, NIT, राज्य स्टैंडअलोन तकनीकी कॉलेज, राज्य विश्वविद्यालय, निजी स्टैंडअलोन तकनीकी कॉलेज, निजी विश्वविद्यालय और गैर-तकनीकी सरकारी कॉलेज शामिल हैं।
  • यह शिक्षा मंत्रालय और AICTE की एक संयुक्त पहल है, जो छात्रों और शिक्षकों के बीच स्टार्ट-अप, इनोवेशन और उद्यमिता विकास जैसे संकेतकों पर पूरे भारत में उच्च शिक्षण संस्थानों को व्यवस्थित रूप से रैंक करती है।
  • इस पहल के तहत, संस्थानों का मूल्यांकन पंजीकृत छात्रों और फैकल्टी स्टार्ट-अप्स की संख्या, पेटेंट फाइलिंग और स्वीकृत, इनक्यूबेटेड स्टार्ट-अप्स द्वारा फंड जनरेशन आदि जैसे मापदंडों पर किया जाता है।

SOURCE-INDIAN EXPRESS

PAPER-G.S.1PRE