भारतीय अर्थव्यवस्था ‘मध्यम-तेज’ रफ्तार से बढ़ेगी, महंगाई नीचे आएगी: वित्त मंत्रालय

भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यमतेजरफ्तार से बढ़ेगी, महंगाई नीचे आएगी: वित्त मंत्रालय

  • वैश्विक स्तर पर मौद्रिक नीति में आक्रामक रुख के बावजूद व्यापक आर्थिक स्थिरता के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों मेंमध्यमतेजरफ्तार से बढ़ने के लिए अच्छी स्थिति में है।
  • वित्त मंत्रालय ने 24 नवंबर को जारी रिपोर्ट में कहा कि खरीफ की फसल की आवक के साथ आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति का दबाव कम होगा और साथ ही कारोबार की संभावनाओं में सुधार के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

  • मंत्रालय की अक्टूबर 2022 के लिए मासिक आर्थिक समीक्षारिपोर्ट में साथ ही आगाह किया गया है कि अमेरिका की सख्त मौद्रिक नीतिभविष्य का एक जोखिमहै। इससे शेयर बाजार में गिरावट, मुद्राओं की विनियम दर में कमजोरी और बॉन्ड पर प्रतिफल ऊंचा हो सकता है।
  • रिपोर्ट में कहा गया कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक वृद्धि के अनुमान में तेजी से गिरावट, उच्च मुद्रास्फीति और बिगड़ती वित्तीय स्थिति ने वैश्विक मंदी की आशंका को बढ़ाया है। साथ ही वैश्विक स्तर मंदी का भारत के निर्यात कारोबार पर अप्रत्यक्ष प्रभाव भी पड़ सकता है। हालांकि, लचीली घरेलू मांग, मजबूत वित्तीय प्रणाली और पुन: सक्रिय निवेश चक्र के साथ संरचनात्मक सुधार आर्थिक वृद्धि को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे।
  • इस साल फरवरी में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद आपूर्ति श्रृंखला में मुख्य रूप से व्यवधान के कारण देश में थोक और खुदरा मुद्रास्फीति साल के ज्यादातर समय में उच्चस्तर पर बनी रही। हालांकि, इसमें अक्टूबर में कमी आई है। भारत की खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल 2022 से दो महीनों को छोड़कर सभी में 7% से अधिक रही है, और अक्टूबर में8% रही।
  • वित्त मंत्रालय की अक्टूबर के लिए अर्थव्यवस्था की मासिक समीक्षा में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत मांग पिछले महीने इस साल अपने सबसे निचले स्तर पर गई है, यह कहते हुए कि सितंबर और अक्टूबर में ट्रैक्टर की बिक्री में तेज वृद्धि और बोए गए फसल क्षेत्र में अपेक्षित वृद्धि ‘बेहतर भावनाओं’ को दर्शाती है।
  • मनरेगा के तहत काम की मांग मई 2022 से घट रही है और चालू वित्त वर्ष की शुरुआत के बाद से अक्टूबर में सबसे कम थी, जो ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर में गिरावट और कृषि और गैरकृषि गतिविधियों में रोजगार में वृद्धि का संकेत है। जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सामान्यीकरण और ग्रामीण नौकरी बाजार में स्थिरीकरण से उपजी है।
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