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Current Affair 13 April 2021

13 April Current Affairs

डॉ. बी. आर. आंबेडकर जयंती

राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं।

अपने संदेश में, राष्ट्रपति ने कहा, “भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की जयंती पर, मैं देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।

अपने पूरे प्रेरक जीवन में, डॉ. आंबेडकर ने भारी मुश्किलों के बीच अपने विशेष मार्ग का निर्माण किया और अपनी असाधारण व बहुआयामी उपलब्धियों के लिए सराहना हासिल की।

वह मानवाधिकारों के पुरजोर समर्थक थे, जिन्होंने भारत के वंचित समुदायों के लोगों के सामाजिक-आर्थिक स्तर में सुधार और उनके बीच शिक्षा के प्रसार के उद्देश्य से ‘बहिष्कृत हितकारिणी सभा’ का गठन किया था। डॉ. आंबेडकर ने एक बेहतर और न्यायपूर्ण समाज की कल्पना की थी और जीवन भर इसके लिए संघर्ष किया। वह एक आधुनिक भारत का निर्माण करना चाहते थे, जहां जाति के आधार पर या किसी अन्य वजह से कोई भेदभाव न हो; जहां सदियों से पिछड़ेपन से जूझ रहीं महिलाएं और समुदाय आर्थिक व सामाजिक अधिकारों की समानता का लुत्फ उठा सकें।

डॉ. आंबेडकर की जंयती के अवसर पर, आइए उनके जीवन और विचारों से सबक लेकर उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लें तथा भारत को मजबूत व संपन्न बनाने में योगदान करें।”

अम्बेडकर जयंती या भीम जयंती डॉ. भीमराव आम्बेडकर जिन्हें डॉ० बाबा साहेब अम्बेडकर के नाम से भी जाना जाता है, का जन्म दिन १४ अप्रैल को पर्व के रूप में भारत समेत पूरे विश्व में मनाया जाता है। इस दिन को ‘समानता दिवस’ और ‘ज्ञान दिवस’ के रूप में

भी मनाया जाता है, क्योंकि जीवन भर समानता के लिए संघर्ष करने वाले अम्बेडकर को समानता और ज्ञान के प्रतीक माना जाता है। अम्बेडकर को विश्व भर में उनके मानवाधिकार आंदोलन संविधान निर्माता और उनकी प्रकांड विद्वता के लिए जाने जाते हैं और यह दिवस उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। अम्बेडकर की पहली जयंती सदाशिव रणपिसे इन्होंने १४ अप्रेल १९२८ में पुणे शहर में मनाई थी। रणपिसे अम्बेडकर के अनुयायी थे। उन्होंने अम्बेडकर जयंती की प्रथा शुरू की और भीम जयंती के अवसरों पर बाबा साहेब की प्रतिमा हाथी के अंबारी में रखकर रथसे, उंट के उपर कई मिरवणुक निकाली थी

Source –PIB

 

पुथांडु पिरापु, रंगाली बिहू, नब वर्ष और वैसाखड़ी

राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने पुथांडु पिरापु, रंगाली बिहू, नब वर्ष और वैसाखड़ी, जो 14 और 15 अप्रैल, 2021 को देश के विभिन्न भागों में मनाए जाएंगे, की पूर्व संध्या पर अपने संदेश में कहा-

“पुथांडु पिरापु,रंगाली बिहू, नब वर्ष और वैसाखड़ी के शुभ अवसर पर, मैं भारत और विदेश में रह रहे सभी भारतीयों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।

ये नव वर्ष उत्सव हमारे देश के विभिन्न भागों में नई उम्मीदों और उत्साह के साथ अलग-अलग तरीके से मनाए जाते हैं। साथ ही यह हमारी विविधता और बहु सांस्कृतिक परम्परा के प्रतीक हैं। ये उत्सव हमारे किसानों के अथक परिश्रम के प्रति सम्मान को प्रकट करते हैं।

इस अवसर पर, आइए हम अपने देशवासियों की शांति, संपन्नता और उल्लास व राष्ट्र की एकता और भाईचारे को बढ़ाने का संदेश फैलाने का संकल्प लेते हैं।

हम सभी स्वस्थ और उद्यमी बने रहें तथा देश की प्रगति के लिए एक नए उत्साह के साथ एकजुट होकर आगे बढ़ें।

पुत्ताण्डु (तमिल: புத்தாண்டு), जिसे पुथुरूषम या तमिल नव वर्ष भी कहा जाता है, तमिल कैलेंडर पर वर्ष का पहला दिन है।  तमिल तारीख को तमिल महीने चिधिराई के पहले दिन के रूप में, लन्नीसरोल हिंदू कैलेंडर के सौर चक्र के साथ स्थापित किया गया है। इसलिए यह हर साल ग्रेगोरियन कैलेंडर के 14 अप्रैल या उसके आस पास ही मनाया जाता हैं।  यह दिन हिंदुओं के द्वारा पारंपरिक तौर पर नए साल के रूप में मनाया जाता है, लेकिन इसके नाम अलग अलग होते हैं जिसे केरल में विशु एवं मध्य और उत्तर भारत में वैसाखी जैसे अन्य नामों से जाना जाता है।

इस दिन, तमिल लोग “पुट्टू वतुत्काका!” कहकर एक-दूसरे को बधाई देते हैं जो हिंदी के “नया साल मुबारक हो” के बराबर है।  इस दिन ज्यादातर लोग अपने परिवार के साथ समय बिताते हैं एवं लोग अपने घर-द्वार की साफ सफाई करते हैं। एक थाली भी सजाते हैं जिसमे फलों, फूलों और अन्य शुभ वस्तुएं राखी जाती हैं। पुत्ताण्डु तमिलनाडु और पोंडिचेरी के बाहर रहने वाले तमिल हिंदुओं के द्वारा भी मनाया जाता है, जैसे श्रीलंका, मलेशिया, सिंगापुर, रीयूनियन, मॉरीशस और अन्य देशों में भी जहाँ तमिल लोग प्रवासी के तौर पर रहते हैं।

बोहाग बिहू, भारत के असम और उत्तर-पूर्वी राज्यों में मनाया जाने वाला एक प्रसिद्ध त्यौहार है। इसे ‘रोंगाली बिहू’ या हतबिहू भी कहते हैं। यह असमी नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। भारत में यह वैशाख महीने के विशुवर संक्रांति या स्थानीय रूप से बोहाग (भास्कर पंचांग) के सात दिन बाद मनाया जात है। यह आमतौर पर १३ अप्रैल को पड़ता है और फसल कटाई के समय को दर्शाता है। बिहू के तीन प्राथमिक प्रकार हैं: रोंगाली बिहू, कोंगाली बिहू और भोगली बिहू। प्रत्येक त्यौहार ऐतिहासिक रूप से धान की फसलों के एक अलग कृषि चक्र को स्वीकार करता है। रोंगाली बिहू के दौरान ७ चरण हैं: ‘चट’, ‘राती’, ‘गोरु’, ‘मनु’, ‘कुतुम’, ‘मेल’, और ‘चेरा’।

बैसाखी का अर्थ वैशाख माह कात्यौहार है। यह वैशाख सौर मास का प्रथम दिन होता है। बैसाखी वैशाखी का ही अपभ्रंश है। इस दिन गंगा स्नान का बहुत महत्व है। हरिद्वार और हृषिकेश में बैसाखी पर्व पर भारी मेला लगता है। बैसाखी के दिन सूर्य मेष राशि में संक्रमण करता है । इस कारण इस दिन को मेष संक्रान्ति भी कहते है। इसी पर्व को विषुवत संक्रांति भी कहा जाता है। बैसाखी पारम्परिक रूप से हर साल 13 या 14 अप्रैल को मनाया जाता है। यह त्योहार हिन्दुओं, बौद्ध और सिखों के लिए महत्वपूर्ण है। वैशाख के पहले दिन पूरे भारतीय उपमहाद्वीप के अनेक क्षेत्रों में बहुत से नव वर्ष के त्यौहार जैसे जुड़ शीतल, पोहेला बोशाख, बोहाग बिहू, विशु, पुथंडु मनाए जाते हैं।

SOURCE-PIB

 

प्रधानमंत्री ने उगादी पर लोगों को बधाई दी

उगादी या फिर जिसे समवत्सरदी युगादी के नाम से भी जाना जाता है दक्षिण भारत का एक प्रमुख पर्व है। इसे कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना जैसे राज्यों में नववर्ष के रुप में मनाया जाता है। यह पर्व चैत्र माह के पहले दिन मनाया जाता है। ग्रागेरियन कैलेंडर के हिसाब से यह पर्व मार्च या अप्रैल में आता है। दक्षिण भारत में इस पर्व को काफी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है क्योंकि वसंत आगमन के साथ ही किसानों के लिए यह पर्व नयी फसल के आगमन का भी अवसर होता है।

उगादी पर्व को चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। इस पर्व को प्रमुख रूप से दक्षिण भारत के राज्यों कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में मनाया जाता है। इस तिथि को शास्त्रों में बड़ा महत्व दिया गया है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान राम का राज्याभिषेक और सतयुग का प्रारंभ हुआ था। इसलिए इस दिन का काफी महत्व बताया गया है। इस तिथि को देवी उपासना का पर्व चैत्र नवरात्र का आरंभ होता है।

उगादी त्योहार क्यों मनाते हैं? (Why Ugadi Festival is Celebrated)

उगादी का पर्व दक्षिण भारत के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है, इसे नववर्ष के आगमन के खुशी में मनाया जाता है। उगादी के पर्व को लेकर कई सारी मान्यताएं प्रचलित हैं, ऐसी ही एक मान्यता के अनुसार जब शिवजी ने ब्रम्हा जी को श्राप दिया था कि कही भीं उनकी पूजा नही कि जायेगी, लेकिन आंध्रप्रदेश में उगादी अवसर पर ब्रम्हाजी की ही पूजा की जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इसी दिन ब्रम्हा जी ब्रह्माण्ड की रचना शुरु की थी।

यही कारण है कि इस दिन को कन्नड़ तथा तेलगु नववर्ष के रुप में भी मनाया जाता है। इसके साथ ही पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु मतस्य अवतार में अवतरित हुए थे।

उगादी को लेकर कई सारे ऐतहासिक तथा पौराणिक वर्णन मिलते हैं। ऐसा माना जाता है कि उगादि के दिन ही भगवान श्री राम का राज्याभिषेक भी हुआ था।  इसके साथ ही इसी दिन सम्राट विक्रमादित्य ने शकों पर विजय प्राप्त की थी।

यदि सामान्य परिपेक्ष्य से देखा जाये तो उगादि का यह त्योहार उस समय आता है जब भारत में वसंत ऋतु अपने चरम पर होती है और इस समय किसानों को नयी फसल भी मिलती है और क्योंकि भारत एक कृषि प्रधान देश है। इसलिए प्रचीन समय से ही किसानों द्वारा इस पर्व को नयी फसल के लिए ईश्वर को दिये जाने वाले धन्यवाद के रुप में मनाया जाता है।

SOURCE-PIB

 

चेती चांद

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने चेती चांद के अवसर पर लोगों को बधाई दी है।

श्री मोदी ने एक ट्वीट में कहाः

“विशेष रूप से सिंधी समुदाय को चेती चांद पर बधाई। ईश्वर करे, भगवान झूलेलाल का विशेष आशीर्वाद हम पर सदैव बना रहे। मैं प्रार्थना करता हूं कि आने वाले वर्ष में प्रत्येक व्यक्ति की इच्छाएं पूरी हों

सिंधी समुदाय का त्योहार भगवान झूलेलाल का जन्मोत्सव ‘चेटीचंड’ के रूप में पूरे देश में हर्षोल्लास से मनाया जाता है।

इस त्योहार से जुड़ी हुई वैसे तो कई किवंदतियां हैं परंतु प्रमुख यह है कि चूंकि सिंधी समुदाय व्यापारिक वर्ग रहा है सो ये व्यापार के लिए जब जलमार्ग से गुजरते थे तो कई विपदाओं का सामना करना पड़ता था।

जैसे समुद्री तूफान, जीव-जंतु, चट्‍टानें व समुद्री दस्यु गिरोह जो लूटपाट मचा कर व्यापारियों का सारा माल लूट लेते थे। इसलिए इनके यात्रा के लिए जाते समय ही महिलाएं वरुण देवता की स्तुति करती थीं व तरह-तरह की मन्नते मांगती थीं। चूंकि भगवान झूलेलाल जल के देवता हैं अत: यह सिंधी लोग के आराध्य देव माने जाते हैं। जब पुरुष वर्ग सकुशल घर लौट आता था तब चेटीचंड को उत्सव के रूप में मनाया जाता था। मन्नतें मांगी जाती थी और भंडारा किया जाता था।

पार्टीशन के बाद जब सिंधी समुदाय भारत में आया तब सभी तितर-बितर हो गए। तब सन् 1952 में प्रोफेसर राम पंजवानी ने सिंधी लोगों को एकजुट करने के लिए अथक प्रयास किए। वे हर उस जगह गए जहां सिंधी लोग रह रहे थे। उनके प्रयास से दोबारा भगवान झूलेलाल का पर्व धूमधाम से मनाया जाने लगा जिसके लिए पूरा समुदाय उनका आभारी है।

SOURCE-PIB

 

राष्ट्रीय कृषि बाजार

कृषि बाजार (ई-नाम) की 5वीं वर्षगांठ 14 अप्रैल को है। इस उपलक्ष्य की पूर्व संध्या पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर के मुख्य आतिथ्य में कृषि भवन में गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया। ‘भारत की आजादी के अमृत महोत्सव’ के अंतर्गत यह आयोजन हुआ, जिसमें श्री तोमर ने ई-नाम के माध्यम से अपनी उपज के विपणन में किसानों की सुविधा के लिए ई-नाम पर मंडी जानकारी पृष्ठ, ई-नाम प्लेटफॉर्म के साथ आईएमडी मौसम पूर्वानुमान सूचना का एकीकरण और सहकारी मॉड्यूल जैसे नए मॉड्यूल लांच किए।

कार्यक्रम में श्री तोमर ने देश में कृषि क्षेत्र की प्रगति बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने साहसपूर्वक कृषि सुधार किए व कानून लाए गए हैं। देश में बड़ा वर्ग इन कृषि सुधारों का समर्थन और स्वागत कर रहा है। जब तक साहसपूर्वक सुधार नहीं किए जाते, तब तक किसी भी क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन करना बहुत मुश्किल काम है। ई-नाम प्रोजेक्ट हो या कृषि सुधार बिल, ये सब किसानों के जीवन स्तर में सुधार लाने वाले है, किसानों की आमदनी बढ़ाने वाले हैं, किसानों के घर में समृद्धि लाने वाले हैं, किसानों के बच्चों को कृषि की ओर आकर्षित करने वाले हैं। इसलिए भारत सरकार पूरी दृढ़ता के साथ इस पर काम कर रही है।

श्री तोमर ने कहा कि 1000 मंडियों में ई-नाम की सफलता को देखते हुए अब 1000 अतिरिक्त मंडियों को जोड़ने का निर्णय लिया गया है। अब तक 1.70 करोड़ से अधिक किसान और 1.63 लाख व्‍यापारी ई-नाम प्‍लेटफार्म पर पंजीकृत हुए हैं। किसान ई-नाम पोर्टल पर पंजीकरण कराने के लिए स्‍वतंत्र हैं और वे सभी ई-नाम मंडियों पर व्‍यापारियों के साथ ऑन-लाइन के माध्‍यम से बिक्री के लिए अपनी उपज को अपलोड कर रहे हैं और व्‍यापारी किसी भी स्‍थान से ई-नाम पर बिक्री के लिए उपलब्‍ध लॉट की बोली लगा सकते हैं। ई-नाम प्‍लेटफार्म पर अनुमानित 1.30 लाख करोड़ रूपए मूल्‍य का कुल संयुक्‍त व्‍यापार रिकॉर्ड किया गया है। कृषि राज्य मंत्री श्री परषोत्तम रूपाला व श्री कैलाश चौधरी, सचि‍व श्री संजय अग्रवाल, संयुक्त सचिव श्री पी.के. स्वेन ने भी संबोधित किया।

नई सुविधाएं- मंडी जानकारी पृष्ठ किसानों को एक ही वेब पेज में संबंधित राज्य की ई-नाम मंडियों में कारोबार की जाने वाली जिंसों के वास्तविक समय मूल्य प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। अब ई-नाम पर प्रदान किए गए सहकारी व्यापार मॉड्यूल का उद्देश्य सहकारी समितियों को अपने संग्रह केंद्र/ गोदामों से एपीएमसी में उपज लाए बिना सदस्यों के फार्मगेट के पास व्यापार करने की सुविधा प्रदान करना है। भारतीय मौसम विज्ञान (आईएमडी), मौसम पूर्वानुमान सूचना समेत ई-नाम मंडियों और आसपास के क्षेत्रों के लिए वर्षा और आंधी-तूफ़ान की सूचना के साथ अधिकतम-न्यूनतम तापमान की सूचना मिलेगी। मौसम सूचना से कटाई करने और विपणन निर्णय लेने में किसानों को अतिरिक्त मदद मिलेगी।  उपयोगकर्ता अनुकूल ई-नाम निर्देशिका भी लांच की गई है, जो ई-नाम मंडियों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करके हितधारकों की मदद करेगी।

क्या है राष्ट्रीय कृषि बाजार (NAM) ?

राष्ट्रीय कृषि बाजार (एनएएम या NAM) एक राष्‍ट्रीय स्‍तर का इलेक्‍ट्रॉनिक पोर्टल आधारित बाजार है, जिसे भारत सरकार के कृषि मंत्रालय ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य देश के विभिन्‍न राज्‍यों में स्थित कृषि उपज मंडी को इन्‍टरनेट के माध्‍यम से जोड़कर एकीकृत राष्‍ट्रीय कृषि उपज बाजार (NAM) बनाना है। एनएएम के पीछे स्‍थानीय कृषि उपज मंडी समिति रहेगी।

क्या है राष्ट्रीय कृषि बाजार (NAM) का लक्ष्य? राष्‍ट्रीय कृषि बाजार (NAM) का लक्ष्‍य यह है कि पूरा देश एक मण्‍डी क्षेत्र बने। अगर अलीगढ़ का कोई किसान अपनी कृषि उपज हरियाणा के हिसार में बेचना चाहे तो कृषि उपज को लाने-ले जाने तथा विपणन आसानी से व कम समय में हो। इसका सीधा लाभ किसानों, व्‍यापारियों और ग्राहकों को मिलेगा। बड़े पैमाने पर
कृषि उत्‍पाद का व्‍यापार किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम देगा, वहीं व्‍यापारियों को भी कारोबार के अधिक मौके मिलेंगे। किसान और व्यापारियों के बीच के इस कारोबार में स्‍थानीय कृषि उपज मण्‍डी के हित को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा, क्‍योंकि पूरा व्‍यापार उसके माध्‍यम से ही होगा।

NAMकैसे करेगा काम?

इस समय किसान अपनी उपज को स्थानीय कृषि मंडी में ले जाते हैं, जहां कारोबारी उनके कृषि उत्पाद खरीदते हैं। एनएएम से जुड़ने के बाद कोई भी कृषि उपज मण्‍डी राष्‍ट्रीय व्‍यापार नेटवर्क में भाग ले सकती है। किसान जब स्‍थानीय स्‍तर पर अपने उत्‍पाद बेचने के लिए मण्‍डी में लाएंगे तो उन्‍हें स्‍थानीय व्‍यापारियों के साथ-साथ इंटरनेट के माध्‍यम से देश के अन्‍य राज्‍यों में स्थित व्‍यापारियों को भी अपने माल बेचने का विकल्‍प मिलेगा। ऐसे में किसानों को जहां अपनी उपज का बेहतर भाव मिलेगा, किसान वहां बेचने के लिए स्‍वतंत्र होंगे।

किसी राज्य की कृषि उपज मंडी को राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ने के लिए कुछ शर्त हैं: राज्‍य मंडी अधिनियम में इंटरनेट के माध्‍यम से व्‍यापार का प्रावधान होना चाहिए। राज्‍य मंडी अधिनियम में भारत के अन्‍य राज्‍यों के व्‍यापारियों को लाइसेंस देने का प्रावधान होना चाहिए, जिससे कि वे किसी भी मंडी में एनएएम के माध्‍यम से कृषि व्‍यापार प्रक्रिया में भाग ले सकें। मंडी अधिनियम में यह प्रावधान भी होना चाहिए कि केवल एक लाइसेंस लेकर व्‍यापारी प्रदेश की सभी मंडी में व्‍यापार कर सकता है। इसमें मंडी शुल्‍क एक स्‍थान पर अदा किये जाने की व्यवस्था होनी चाहिए।

केंद्र सरकार का कृषि मंत्रालय इसके लिए वित्तीय मदद दे रहा है। कृषि उपज मंडी के इम्पलॉई व व्‍यापारी को प्रशिक्षण, आधारभूत संरचना आदि के लिए वित्‍तीय सहायता भी केंद्र की तरफ से उपलब्‍ध कराई जा रही है जिससे कृषि उपज मंडी इस व्‍यवस्‍था को प्रभावशाली रूप से चलाने में सक्षम हो सके।

SOURCE-PIB

 

जय सहकार कार्यक्रम

कृषि‍ भवन, नई दिल्ली में मंगलवार को आयोजित एक समारोह में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के जय सहकार कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर एनसीडीसी व इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के बीच समझौता ज्ञापन एवं डोयशे बैंक से ऋण अनुबंध हुआ। कार्यक्रम में श्री तोमर ने कहा कि यह को-ऑपरेटिव के माध्यम से देश के किसानों को मजबूत करने की पहल है। किसानों को उनकी उपज के वाजिब दाम मिलें और मूल्य संवर्धन हो सकें, इसके लिए अन्य संस्थाओं की तरह एनसीडीसी सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने में जुटा है।

केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने उम्मीद जताई कि कृषि क्षेत्र की चुनौतियां दूर करते हुए गैप्स भरने के लिए सभी संस्थाएं और लोग भारत सरकार के साथ हमकदम होंगे। सरकार की नीतियों, किसानों के परिश्रम व वैज्ञानिकों के अनुसंधान के कारण भारत आज कृषि के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है, साथ ही खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बन चुका है। श्री तोमर ने कहा कि डोयशे बैंक के साथ ऋण अनुबंध एक नए संबंध की शुरूआत का प्रतीक है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि भारत के किसानों को सस्ते वित्तपोषण तक पहुंच के माध्यम से लाभ हो सकें।

डोयशे बैंक एजी भारत में किसानों की सहकारी समितियों द्वारा कार्यकलापों के लिए एनसीडीसी को ऋण देने के लिए आगे आया है। यह पहली बार है कि जब कोई जर्मन बैंक एनसीडीसी को बहुत कम ब्याज दर पर ऋण प्रदान रहा है। इसने एनसीडीसी को 600 करोड़ रूपए का ऋण देने के लिए सहमति प्रदान की है। बैंक द्वारा प्रदत्त ऋण छोटे-सीमांत किसानों, महिलाओं व युवाओं की सहायता में एक कदम आगे जाएगा।

कार्यक्रम में कृषि राज्य मंत्री श्री परषोत्तम रूपाला व श्री कैलाश चौधरी, सचि‍व श्री संजय अग्रवाल, एनसीडीसी के प्रबंध नि‍देशक श्री संदीप कुमार नायक, नेशनल को-आपरेटिव यूनियन के अध्यक्ष श्री दिलीप संघानी तथा डोयशे बैंक, इंडियन चैंबर ऑफ़ कॉमर्सव इंडो-जर्मन चैंबर आफ कामर्स के प्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया।

SOURCE-PIB

 

ESanta

केंद्रीय मंत्री श्री पीयूष गोयल ने हाल ही में समुद्री उत्पादों के लिए “eSanta” नामक एक प्लेटफार्म लांच किया है। इस प्लेटफार्म का मुख्य उद्देश्य जलीय खेती करने वाले किसानों (aqua farmers) को सशक्त बनाना है।

eSanta

किसान अपनी उपज eSanta पोर्टल में बेच सकते हैं।

यह खरीदारों और किसानों के बीच एक पुल की तरह काम करेगा।

eSanta पोर्टल बिचौलियों की आवश्यकता को पूरी तरह से समाप्त कर देता है।

यह पोर्टल अंग्रेजी, तमिल, तेलुगु, हिंदी, ओडिया और बंगाली जैसी भाषाओं में उपलब्ध है।

eSanta पोर्टल लॉन्च करने की पहल NaCSA द्वारा की गई थी।

NaCSA

NaCSA का अर्थ National Centre for Sustainable Aquaculture है, यह समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (Marine Products Export Development Authority – MPEDA) का हिस्सा है जो वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत काम करता है। NaCSA का मुख्य उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को समूहों के माध्यम से प्रोत्साहित करना और उनका उत्थान करना है और झींगा संस्कृति में सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना है।

पोर्टल के लाभ

आधुनिक उपकरणों और तकनीकों का उपयोग वर्तमान 40,000 टन से झींगा उत्पादन को बढ़ाकर छह से सात लाख टन करने में मदद करेगा।

इस पोर्टल से 18,000 किसानों को लाभ होगा जो वर्तमान में देश के समुद्री निर्यात में योगदान कर रहे हैं।

eSanta पोर्टल की आवश्यकता

जलीय उत्पादों को अमेरिका, यूरोपीय संघ, चीन, जापान और अन्य एशियाई देशों में निर्यात किया जाता है। दुनिया में एक्वाकल्चर (जलीय कृषि) में दूसरी रैंकिंग के बावजूद, भारत में एक्वा किसानों को बाजार से सर्वोत्तम मूल्य प्राप्त करने के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यह पोर्टल इस समस्या को दूर करने में मदद करेगा।

भारत में मत्स्यिकी

भारत में मछली पकड़ने के लिए 14.5 मिलियन लोग काम करते हैं। यह कुल जीडीपी का 1.07% योगदान देता है।

राष्ट्रीय मछली किसान दिवस (National Fish Farmers Day)

हर साल, भारत 10 जुलाई को राष्ट्रीय मछली किसान दिवस मनाता है।

भारत में मत्स्य पालन अर्थव्यवस्था के मुद्दे

भारत में मछली उत्पादन 1950-51 में 7.52 लाख टन से बढ़कर 2018-19 में 125.90 लाख टन हो गया है। उद्योग में तेजी से विकास के बावजूद, एक व्यक्तिगत मछली किसान का वार्षिक उत्पादन केवल 2 टन है। दूसरी ओर, यह चीन में 6 टन, चिली में 72 टन और नॉर्वे में 172 टन है।

SOURCE-G.K.TODAY

 

2021 वैश्विक खाद्य नीति रिपोर्ट जारी की गयी

अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (International Food Policy Research Institute) द्वारा Global Food Policy Report प्रकाशित की जाती है। इस वर्ष संस्थान ने “Transforming Food Systems After COVID-19” थीम पर आधारित रिपोर्ट जारी की है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु : भारत

COVID-19 लॉकडाउन के कारण स्कूल और डे केयर सेंटर बंद किये गये थे। इससे पौष्टिक नाशवान खाद्य उत्पादों की उपलब्धता प्रभावित हुई। कई घरों में महंगे पौष्टिक खाद्य पदार्थ जैसे फलों और सब्जियों के स्थान पर सस्ते प्रधान खाद्य पदार्थों का उपयोग शुरू हुआ।

भारत का मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम जिसमें देश के 80% प्राथमिक स्कूली बच्चे शामिल हैं, COVID-19 लॉकडाउन के कारण प्रभावित हुआ।

भारत में 50% परिवारों ने बताया कि महिलाओं ने पिछले वर्ष की तुलना में जलाऊ लकड़ी और पानी लाने में अधिक समय बिताया।

प्रवासी कामगारों को सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में शामिल करने के लिए भारत का प्रयास एक बड़ी सफलता थी।

भारत में लगभग 80 मिलियन हेक्टेयर भूमि को कॉमन्स के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसमें वन, जल निकाय और चारागाह शामिल थे। कॉमन्स देश में 350 मिलियन से अधिक लोगों के लिए आजीविका का स्रोत प्रदान करता है। वे अपने वन उत्पादों और चारे के लिए इन क्षेत्रों पर निर्भर हैं।

सिफारिशें

सरकारों को विकास के एजेंडे पर खाद्य प्रणाली परिवर्तन को सही तरीके से रखने के लिए COP26, UNFSS (संयुक्त राष्ट्र खाद्य प्रणाली शिखर सम्मेलन) और Nutrition for Growth Summit जैसे वैश्विक आयोजनों का उपयोग करना चाहिए।

सभी खाद्य प्रणालियों के लिए लचीलापन बढ़ाया जाना चाहिए।

स्वास्थ्य संकट के समय में कमजोर आबादी की रक्षा के लिए सामाजिक सुरक्षा नीतियों के लचीलेपन का विस्तार किया जाना चाहिए।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु : विश्व

लगभग 95 मिलियन लोग, ज्यादातर अफ्रीका में अत्यधिक गरीबी में रह रहे हैं।

पूर्व-महामारी के स्तर की तुलना में गरीबी में रहने वाले गरीब लोगों की संख्या में 150 मिलियन की वृद्धि हुई है।

वैश्विक स्तर पर महिलाओं का रोजगार 39% है। हालांकि, महामारी के दौरान उन्हें 54% नौकरी का नुकसान हुआ।

 

पोषण ज्ञान (Poshan Gyan)

नीति आयोग, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और Centre for Social and Behaviour Change के साथ मिलकर अशोका यूनिवर्सिटी ने स्वास्थ्य और पोषण पर एक राष्ट्रीय डिजिटल रिपोजिटरी ‘पोषण ज्ञान’ (Poshan Gyan) लॉन्च की है।

मुख्य बिंदु

पोषण ज्ञान के लॉन्च के अवसर पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार, सीईओ अमिताभ कांत, महिला एवं बाल विकास सचिव राम मोहन मिश्रा और अतिरिक्त सचिव डॉ. राकेश सरवाल ने अपने विचार प्रकट किये। गौरतलब है कि भारत के खाद्य-अधिशेष राष्ट्र होने के बावजूद देश में उच्च कुपोषण की स्थिति है, इसलिए कुपोषण को समाप्त करने के लिए व्यवहार परिवर्तन की आवश्यकता है।

मिशन आहार क्रांति (Mission Aahaar Kranti)

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने हाल ही में “मिशन आहार क्रांति” लांच किया। इस मिशन का लक्ष्य पोषण संतुलित आहार के महत्व का संदेश फैलाना है। यह स्थानीय फलों और सब्जियों तक पहुंच के महत्व को भी बढ़ावा देगा।

भारत जितनी कैलोरी की खपत करता है उससे दो गुना का उत्पादन करता है। लेकिन अभी भी देश में कई लोग कुपोषित हैं।

यह मिशन विज्ञान भारती (Vijnana Bharti) और ग्लोबल साइंटिस्ट्स एंड टेक्नोक्रेट्स फोरम (Global Scientists and Technocrats Forum) द्वारा भी साथ में लॉन्च किया गया है।

इस मिशन का आदर्श वाक्य “Good Diet-Good Cognition” है।

यह मिशन शिक्षकों को प्रशिक्षित करेगा। इसके बाद शिक्षक छात्रों को इसका संदेश भेजेंगे। छात्रों के माध्यम से, इस मिशन का उद्देश्य बड़े पैमाने पर परिवारों और समाजों को संदेश पहुँचाना है।

नीति आयोग

यह भारत में एक पॉलिसी थिंक टैंक है जिसे 2015 में योजना आयोग के स्थान पर स्थापित किया गया था। सस निकाय की स्थापना सहकारी संघवाद के साथ सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से की गई थी। प्रधानमंत्री नीति आयोग के अध्यक्ष होते हैं।

नीति आयोग के सदस्य

प्रधानमंत्री नीति आयोग के अध्यक्ष होते हैं।

इसमें एक गवर्निंग काउंसिल भी शामिल है जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ विधानसभाओं और केंद्र शासित प्रदेशों के लेफ्टिनेंट गवर्नर शामिल हैं। हालांकि, इसमें दिल्ली और पुदुचेरी शामिल नहीं है।

इसमें क्षेत्रीय परिषदें भी हैं जो राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों से बनी हैं।

SOURCE-G.K.TODAY