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Current Affair 20 May 2021

CURRENTS AFFAIRS – 20th MAY 2021

विश्व मधुमक्खी दिवस

विश्व मधुमक्खी दिवस पर एवं भारत की आजादी के अमृत महोत्सव के शुभ संदर्भ में, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली में शहद परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने की परियोजना का शुभारंभ किया।

राष्ट्रीय मधुमक्खीपालन एवं शहद मिशन के अंतर्गत, मधु एवं मधुमक्खीपालन के अन्य उत्पादों के गुणवत्ता परीक्षण हेतु भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) में क्षेत्रीय मधु गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने की परियोजना का शुभारंभ करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने कहा कि किसानों को जब डीएपी का एक बैग 1200 रूपए में मिलता था, तब इसकी वास्तविक कीमत 1700 रू. होती थी, 500 रू. सरकार देती थी। एकाएक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फॉस्फोरिक एसिड, अमोनिया आदि के भाव बढ़ने के कारण डीएपी की कीमत बढ़ी, जिससे एक बैग 2400 रू. का हो गया। ऐसे में यदि सरकार की ओर से 500 रू. प्रति बैग की ही सहायता मिलती होती तो किसानों को बैग 1900 रू. में पड़ता। इस पर प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि किसानों पर एक रूपए का भी बोझ नहीं आना चाहिए, इसलिए अब केंद्र सरकार द्वारा 140 प्रतिशत अधिक सब्सिडी के रूप में 700 रू. सहायता देते हुए कीमत 1200 रू. ही रहने दी गई है। श्री तोमर ने इस ऐतिहासिक फैसले के लिए प्रधानमंत्री का आभार माना।

श्री तोमर ने कहा कि देश में शहद का उत्पादन व निर्यात बढ़ रहा है तथा अच्छी गुणवत्ता के शहद के लिए भी पूरे प्रयत्न हो रहे हैं। छोटे-मझौले किसान इस काम से जुड़े ताकि उनकी आमदनी बढ़े, इसके लिए इस काम को मोदी जी की सरकार ने तेज गति दी है। राष्ट्रीय मधुमक्खीपालन व शहद मिशन (NBHM) में समग्र संवर्धन तथा वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन के विकास व ‘‘मीठी क्रांति’’ का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए 300 करोड़ रू. की मंजूरी दी गई है। साथ ही, NBHM को आत्मनिर्भर भारत अभियान में केंद्र सरकार द्वारा 500 करोड़ रू. आवंटित किए गए है। इसमें राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB), आणंद में 5 करोड़ रू. की सहायता से विश्वस्तरीय स्टेट आफ द आर्ट हनी टेस्टिंग लैब स्थापित की जा चुकी है। इसके अलावा, दो अन्य क्षेत्रीय/बड़ी शहद व मधुमक्खी पालन के अन्य उत्पादों की परीक्षण प्रयोगशालाएं आठ-आठ करोड़ रू. की राशि सहित मंजूर की गई है। इस क्षेत्र के विकास की दृष्टि से, 13 मिनी/सैटेलाइट जिला स्तरीय शहद व मधुमक्खीपालन के अन्य उत्पादों की प्रयोगशालाएं तथा ऑनलाइन पंजीकरण एवं शहद व अन्य उत्पादों के ट्रेसिबिलिटी स्रोत के विकास से संबंधित तथा अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाएं भी स्वीकृत की गई है। शहद और अन्य मधुमक्खी उत्पादों के स्रोत का पता लगाने संबंधी ऑनलाइन पंजीकरण व ट्रेसिबिलिटी सिस्टम के लिए मधु क्रांति पोर्टल का शुभारंभ भी दो महीने पूर्व किया जा चुका है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक मधुमक्खीपालन को बढ़ावा देने के लिए अन्य प्रयासों के साथ-साथ मधुमक्खीपालकों के FPO बनाने की भी शुरूआत हो चुकी है। इनके सहित देशभर में 10 हजार FPO बनाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री जी ने आत्मनिर्भर भारत की बात कही, तब कृषि क्षेत्र के लिए 1 लाख करोड़ रू. के इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के अलावा मधुमक्खी पालन सहित अन्य सम्बद्ध क्षेत्रों का भी ध्यान रखा है। श्री तोमर ने कहा कि शहद का उत्पादन बढ़ना चाहिए व गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए। छोटे से छोटा किसान भी इस कार्य से जुड़े। जो भूमिधारक नहीं है, उनके लिए यह क्षेत्र रोजगार का बड़ा साधन बने, इसके लिए राज्यों को प्रयत्न करना चाहिए।

SOURCE-PIB

 

खरीफ रणनीति, 2021

तिलहन के उत्पादन में आत्म-निर्भरता हासिल करने के लिए, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने एक बहुआयामी रणनीति तैयार की है। इस रणनीति के तहत, भारत सरकार ने खरीफ सत्र, 2021 के लिए किसानों को मिनी किट्स के रूप में बीजों की ऊंची उपज वाली किस्मों के मुफ्त वितरण की महत्वाकांक्षी योजना को स्वीकृति दी है। विशेष खरीफ कार्यक्रम के माध्यम से तिलहन के अंतर्गत अतिरिक्त 6.37 लाख हेक्टेयर क्षेत्र आ जाएगा और 120.26 लाख क्विंटल तिलहन और 24.36 लाख टन खाद्य तेल के उत्पादन का अनुमान है।

तिलहन में आत्मनिर्भर बनने के लिए, केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों को उनके खेतों में इस्तेमाल के लिए ज्यादा उपज वाली किस्मों के बीजों की उपलब्धता बढ़ाकर तिलहन की उत्पादकता बढ़ाने पर भी जोर दिया है। इस क्रम में, अप्रैल, 2021 में हुई एक वेबिनार में राज्य सरकारों के साथ और 30 अप्रैल, 2021 को खरीफ सम्मेलन में भी विस्तार से चर्चा हुई थी। इन विचार विमर्श के माध्यम से, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (तिलहन और ताड़ का तेल) के अंतर्गत मुफ्त में ज्यादा पैदावार वाले बीजों की किस्मों के मुफ्त वितरण पर जोर के साथ सोयाबीन और मूंगफली के लिए क्षेत्र और उत्पादकता दोनों में बढ़ोतरी की रणनीति इस प्रकार है;

तिलहन और ताड़ तेल पर राष्ट्रीय मिशन के बारे में

तिलहन और ताड़ तेल पर राष्ट्रीय मिशन के माध्यम से भारत सरकार का लक्ष्य तिलहन और ताड़ के तेल का उत्पादन व उत्पाकता बढ़ाकर खाद्य तेलों की उपलब्धता बढ़ाना और खाद्य देलों के आयात में कमी लाना है। इसके लिए, एक बहुआयामी रणनीति अपनाई गई है, जिसमें निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं :

  • बीजों की किस्मों में बदलाव पर जोर के साथ बीज प्रतिस्थापन अनुपात में बढ़ोतरी
  • सिंचाई क्षेत्र में बढ़ोतरी
  • पोषण प्रबंधन
  • अनाज/दालें/गन्ने के साथ सहरोपण
  • उत्पादकता में सुधार और प्रमाणित व जलवायु लचीली तकनीकों को अपनाना
  • कम उपज वाले खाद्यान्न के विविधीकरण के माध्यम से क्षेत्र विस्तार।
  • धान के परती क्षेत्रों और ज्यादा संभावनाओं वाले जिलों को लक्षित करना
  • गैर पारम्परिक राज्यों में प्रोत्साहन
  • यंत्रीकरण को प्रोत्साहन
  • शोध परियोजनाएं
  • किसानों को प्रशिक्षण और अधिकारियों को बढ़ाना
  • अच्छी कृषि विधियों को अपनाने के लिए क्लस्टर प्रदर्शन को समर्थन
  • गुणवत्तापूर्ण बीजों की व्यापक उपलब्धता के लिए क्षेत्रीय रणनीति पर केन्द्रित 36 तिलहन हब का निर्माण
  • खेत और ग्राम स्तर पर कटाई बाद प्रबंधन
  • कृषक उत्पादक संगठनों का गठन

SOURCE-PIB

 

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग का 12वां स्थापना दिवस मनाया

केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज वर्चुअल माध्यम से भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के 12वें वार्षिक दिवस को मनाया। सीसीआई की स्थापना प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत 20 मई, 2009 को हुई थी। जब प्रतिस्पर्धा-विरोधी आचरण से संबंधित मूल प्रावधान लागू हुए थे।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (अंग्रेजी नाम- competition Commission of India / CCI) भारत की एक विनियामक संस्था है। इसका उद्देश्य स्वच्छ प्रतिस्पर्धा को बढावा देना है ताकि बाजार उपभोक्ताओं के हित का साधन बनाया जा सके।

जार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा उपभोक्ताओं को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर वस्तुओं और सेवाओं की विस्तृत श्रृंखला तक सुगम पहुंच को सुनिश्चित करती है। व्यावसायिक उद्यम अपने हितों की रक्षा के लिए विभिन्न प्रकार की रणनीतियों और युक्तियों को अपनाते हैं। वे अधिक शक्ति और प्रभाव प्राप्त करने के लिए एक साथ मिल जाते हैं जो उपभोक्ताओं के हितों के लिए हानिकारक हो सकता है और कई बार उनके द्वारा गलत प्रकार से मूल्य निर्धारण, कीमत बढ़ाने के लिए जानबूझकर उत्पाद आगत में कटौती, प्रवेश के लिए अवरोध का निर्माण, बाजारों का आवंटन, बिक्री में गठजोड़, अधिक मूल्य निर्धारण और भेदभावपूर्ण मूल्य निर्धारण जैसी पद्धतियां अपनाई जाती हैं जिसका विभिन्न हित समूहों के समाजिक और आर्थिक कल्याण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए न केवल एकाधिकार अथवा व्यापारिक संयोजनों के गठन को रोकना आवश्यक है बल्कि एक निष्पक्ष और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना भी आवश्यक है ताकि उपभोक्ताओं को अपनी खरीद का बेहतर मोल प्राप्त हो सके।

अर्थव्यवस्था में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के सृजन और इस संदर्भ में ‘सबको समान अवसर प्रदान करने’ के लिए भारतीय संसद द्वारा 13 जनवरी 2003 को प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 को लागू किया गया। इसके उपरान्त 14 अक्टूबर 2003 से केन्द्र सरकार द्वारा भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की स्थापना की गई।

इसके बाद प्रतिस्पर्धा (संशोधन) अधिनियम, 2007 द्वारा इस अधिनियम में संशोधन किया गया। 20 मई 2009, को प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौते और प्रमुख स्थितियों के दुरुपयोग से संबंधित अधिनियम के प्रावधानों को अधिसूचित किया गया। यह अधिनियम जम्मू-कश्मीर के अलावा संपूर्ण भारत में लागू होता है।एक अध्यक्ष और 6 सदस्यों के साथ भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग पूरी तरह से कार्यात्मक है। प्रतिस्पर्धा आयोग चार प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केन्द्रित करता है-

प्रतिस्पर्धा विरोधी समझौते,

प्रमुख स्थितियों का दुरुपयोग,

संयोजन विनियमन और

प्रतिस्पर्धा हिमायत।

प्रतिस्पर्धा की जांच के लिए अधिनियम व्यवहारजन्य दृष्टिकोण पर बल देता है। यह एमआरटीपी अधिनियम के दृष्टिकोण से अलग है जिसमें संरचनात्मक दृष्टिकोण को अपनाया गया था।

उद्देश्य

भारत के आर्थिक विकास को ध्यान में रखते हुए प्रतिस्पर्धा अधिनियम में प्रतिस्पर्धा आयोग की स्थापना का प्रावधान है ताकि निम्नलिखित उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सके-

प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली पद्धतियों को रोकना

बाजार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और इसे बनाए रखना

उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना

भारतीय बाजार में अथवा इसके अलावा आनुषांगिक जुडे मामलों के लिए अन्य प्रतिभागियों द्वारा किए जाने वाले व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना

SOURCE-PIB

 

परमाणु ऊर्जा परियोजना

19 मई, 2021 को चीन और रूस ने सबसे बड़ी परमाणु ऊर्जा परियोजना लांच की। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) और चीनी राष्ट्रपति शी जिंग पिंग (Xi Jing Ping) ने इस समारोह में भाग लिया।

पृष्ठभूमि

2018 में, रूस और चीन ने परमाणु ऊर्जा सहयोग परियोजना पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत, दोनों देश शुदापु (Xudapu) परमाणु ऊर्जा संयंत्र की इकाई तीन और इकाई चार और तियानवान परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Tianwan Nuclear Power Plant) की इकाई 7 और इकाई 8 के निर्माण पर सहमत हुए थे।

परियोजना के बारे में

उपरोक्त चार इकाइयों का निर्माण देशों के बीच विज्ञान और प्रौद्योगिकी नवाचार और हाई-एंड उपकरण निर्माण के क्षेत्र में सहयोग का परिणाम है। इस परियोजना का अनुबंध मूल्य 20 बिलियन डालर है। इस परियोजना में उपयोग किए जाने वाले परमाणु रिएक्टर तीसरी पीढ़ी के VVER-1200 रिएक्टर हैं। पूरा होने के बाद, यह रिएक्टर 37.6 अरब किलोवाट ऑवर बिजली पैदा करेंगे। साथ ही वे 30.68 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड को कम करेंगे और जीवाश्म ईंधन के उपयोग को भी कम करेंगे।

पृष्ठभूमि

यह परियोजना इस बात का मज़बूत प्रमाण है कि मानवाधिकार उल्लंघन सहित कई मुद्दों पर यूरोपीय संघ और अमेरिका के भारी दबाव का सामना करने के बाद रूस और चीन अपने घनिष्ठ संबंध बढ़ा रहे हैं। कोयले से चलने वाले संयंत्रों पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए चीन अपने परमाणु विकास में तेजी ला रहा है। ऐसा 2060 तक कार्बन न्यूट्रल बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए किया जा रहा है।

चीन की परमाणु शक्ति

अप्रैल 2021 तक, चीन में  39 परमाणु ऊर्जा संयंत्र हैं। इसके साथ चीन परमाणु शक्तियों के बीच तीसरे स्थान पर है। दूसरी ओर चीन अपनी तीसरी पीढ़ी की परमाणु तकनीक Hualong Two को भी आगे बढ़ा रहा है। चीन ने 2035 तक 200 गीगावॉट परमाणु क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की संभावित सूची

केंद्रीय संस्कृति मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने हाल ही में घोषणा की कि 6 सांस्कृतिक विरासत स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों (UNESCO World Heritage Sites) में जोड़ा गया है।

मुख्य बिंदु

निम्नलिखित छह स्थानों ने यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की संभावित सूची में प्रवेश किया है।

वाराणसी के गंगा घाट

तमिलनाडु में कांचीपुरम के मंदिर

मध्य प्रदेश में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व

महाराष्ट्र सैन्य वास्तुकला

हीरे बेंकल मेगालिथिक साइट

मध्य प्रदेश में नर्मदा घाटी के भेड़ाघाट लमेताघाट

इसके साथ, यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की संभावित सूची में स्थानों की कुल संख्या बढ़कर 48 हो गई है।

पृष्ठभूमि

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India) ने नौ प्रविष्टियां भेजीं थीं। इसमें से 6 ने संभावित सूची में प्रवेश किया है। ये प्रस्तावित स्थल एक वर्ष तक संभावित सूची में रहेंगे।

वाराणसी के गंगा घाट (Ganga Ghats of Varanasi)

वाराणसी के घाट नदी के किनारे की सीढ़ियाँ हैं जो गंगा नदी के किनारे तक जाती हैं। इस प्रकार के 88 घाट हैं। इनमें से अधिकांश घाट 18वीं शताब्दी में बनाए गए थे जब यह शहर मराठों के शासन में था।

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (Satpura Tiger Reserve)

यह मध्य प्रदेश में स्थित है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के अन्य प्रमुख आकर्षण पांडव गुफाएं, धूपगढ़ चोटी, डेनवा बैकवाटर और रॉक पेंटिंग हैं। डेनवा बैकवाटर डेनवा नदी पर बने बांध द्वारा निर्मित जलाशय है।

महाराष्ट्र सैन्य वास्तुकला (Maharashtra Military Architecture)

विभिन्न युगों के 500 से अधिक किले हैं जो महाराष्ट्र को दुनिया में सैन्य वास्तुकला में सबसे समृद्ध स्थानों में से एक बनाते हैं। वे 1500 और 1800 के बीच बनाए गए थे।

हीरे बेंकल मेगालिथिक साइट (Hire Benkal Megalithic Site)

यह कर्नाटक में स्थित है। मेगालिथिक साइट एक बड़ा प्रागैतिहासिक पत्थर है जिसका उपयोग किसी स्मारक या संरचना के निर्माण के लिए किया जाता है।

नर्मदा घाटी का भेड़ाघाट लमेताघाट (Bhedaghat Lametaghat of Narmada Valley)

उन्हें भारत का ग्रांड कैन्यन (Grand Canyon of India) भी कहा जाता है। नर्मदा नदी के दूसरी ओर संगमरमर की चट्टानों की उत्कृष्ट सुंदरता और उनके शानदार रूपों का अनुभव किया जा सकता है। यहां कई डायनासोर जीवाश्म पाए गए हैं।यहां नर्मदा नदी तीस मीटर गहरी खाई में बहती है और संगमरमर की चट्टानों के बीच बहती है। ये संगमरमर की चट्टानें चूना पत्थर के रूपांतर तंत्र द्वारा बनाई गई हैं।

SOURCE-GK TODAY

 

 

विश्व मेट्रोलॉजी दिवस

विश्व मेट्रोलॉजी/माप विज्ञान दिवस (World Metrology Day) हर साल 20 मई को मनाया जाता है, जो 1875 में मीटर कन्वेंशन (Metre Convention) पर हस्ताक्षर करने की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

विश्व मेट्रोलॉजी दिवस (World Metrology Day)

पृष्ठभूमि:यह दिन 20 मई 1875 को पेरिस में मीटर कन्वेंशन नामक अंतर्राष्ट्रीय संधि पर हस्ताक्षर करने की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में मनाया जाता है , जिसके द्वारा अंतर्राष्ट्रीय भार और माप ब्यूरो (International Bureau of Weights and Measures – BIPM) बनाया गया था। इस कन्वेंशन ने विज्ञान और माप के साथ-साथ इसके वाणिज्यिक, सामाजिक और औद्योगिक अनुप्रयोगों में वैश्विक सहयोग के लिए रूपरेखा निर्धारित की।

मेट्रोलॉजी: का अर्थ हैमाप विज्ञान

मीटर कन्वेंशन (Metre Convention): जिसे ‘मीटर की संधि’ भी कहा जाता है, एक वैश्विक सुसंगत माप प्रणाली का आधार प्रदान करती है जो वैज्ञानिक खोज और नवाचार, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, औद्योगिक निर्माण और जीवन की गुणवत्ता में सुधार और वैश्विक पर्यावरण की सुरक्षा को प्रोत्साहित करती है।

अंतर्राष्ट्रीय भार और माप ब्यूरो (International Bureau of Weights and Measures – BIPM)

अंतर्राष्ट्रीय भार और माप ब्यूरो (International Bureau of Weights and Measures – BIPM) एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो chemistry, ionising radiation, physical metrology और co-ordinated universal time जैसे 4 क्षेत्रों में मानक माप के लिए कार्य करता है। इस संगठन की स्थापना 20 मई, 1875 को हुई थी, इसका मुख्यालय फ्रांस के सेंट-क्लाउड में है। वर्तमान में 61 देश इस संगठन के सदस्य हैं।

विश्व मधुमक्खी दिवस

संयुक्त राष्ट्र द्वारा हर साल 20 मई को विश्व मधुमक्खी दिवस (World Bee Day) के रूप में मनाया जाता है।

मुख्य बिंदु

विश्व मधुमक्खी दिवस स्लोवेनियाई मधुमक्खी पालन के अग्रणी एंटोन जानसा (Anton Jansa) के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। परागणकों, चिड़ियों, तितलियों, चमगादड़ों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए यह दिन मनाया जा रहा है। जैव विविधता पर कन्वेंशन (Convention on Biological Diversity) इन परागणकों के संरक्षण पर भी ध्यान केंद्रित करता है। 2000 में, COP (Conference of Parties) V में अंतर्राष्ट्रीय परागकण पहल (International Pollinator Initiative) शुरू की गई थी। यह पहल कृषि में परागणकों की स्थिरता पर केंद्रित है।

महत्व

मधुमक्खियां सबसे बड़ी परागणकर्ता (pollinator) हैं। वे वर्तमान में निवास स्थान के नुकसान, परजीवियों, बीमारियों और कृषि कीटनाशकों के कारण बड़े खतरों में हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, विश्व की लगभग 35% कृषि अभी भी परागणकों पर निर्भर है।

अंतर्राष्ट्रीय परागक पहल (International Pollinator Initiative)

इंटरनेशनल पोलिनेटर इनिशिएटिव का मुख्य उद्देश्य समन्वित विश्वव्यापी कार्रवाई को बढ़ावा देना है। इसे जैविक विविधता पर कन्वेंशन (Convention on Biological Diversity) के तहत लॉन्च किया गया था। यह पहल 2030 तक चलने वाली है। भारत भी इस पहल का हिस्सा है।

जैव विविधता पर कन्वेंशन (Convention on Biological Diversity ) एक बहुपक्षीय संधि है। इसे 1992 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित पृथ्वी शिखर सम्मेलन में शुरू किया गया था।

SOURCE-GK TODAY