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Current Affair 21 September 2021

Current Affairs – 21 September, 2021

निर्वाचन आयोग ने सुगम्य चुनावों के बारे में राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

निर्वाचन आयोग ने सुगम्य चुनाव 2021 विषय पर आज एक आभासी राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन का उद्देश्य सुगम्यता से जुड़ी वर्तमान नीतियों का आकलन करना और चुनावी प्रक्रिया में दिव्यांग मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने की राह में आने वाली बाधाओं को दूर करने से संबंधित रणनीतियों पर चर्चा करना था। इस आभासी सम्मेलन में मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, विभिन्न प्रकार की दिव्यांगता के शिकार लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले सामाजिक संगठनों और सरकारी मंत्रालयों व संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

चुनाव को और अधिक समावेशी, सुलभ तथा दिव्यांग मतदाताओं के अनुकूल बनाने के प्रति निर्वाचन आयोग की वचनबद्धता की पुष्टि करते हुए, मुख्य चुनाव आयुक्त श्री सुशील चंद्रा ने कहा कि आयोग प्राथमिक हितधारकों – दिव्यांगजनों सहित सभी मतदाताओं, जो चुनावी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा सकते हैं और जिन्हें भूमिका निभानी चाहिए – के निर्णय लेने की भूमिका को बेहद महत्व देता है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया के हर चरण में समावेशिता और सुगम्यता बढ़ाने से संबंधित दिशानिर्देश तैयार करते समय दिव्यांगजनों और उनके प्रतिनिधि संगठनों द्वारा सुझाए गए सभी सार्थक इनपुट और सिफारिशों को ध्यान में रखा जाता है। श्री चंद्रा ने चुनावी प्रक्रिया में दिव्यांगजनों को शामिल करने पर जोर देने से संबंधित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों और करारों के प्रति निर्वाचन आयोग की वचनबद्धता को दोहराया। उन्होंने दिव्यांगजनों के लिए मतदान के सुखद और सम्मानजनक अनुभव सुनिश्चित करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि रैंप और व्हीलचेयर की सुविधा से लैस सभी मतदान – केंद्र भूतल पर स्थित हैं और सुचारू एवं परेशानी मुक्त मतदान के अनुभव के लिए मतदान केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में स्वयंसेवक रखे जाते हैं।

चुनाव आयुक्त श्री राजीव कुमार ने कहा कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 में सभी मतदान केंद्रों को दिव्यांगजनों के लिए सुगम्य बनाने और चुनावी प्रक्रिया से संबंधित सभी सामग्री को आसानी से समझने और उपयोग करने योग्य बनाने के लिए वैधानिक शक्ति प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि चुनाव अधिकारियों और सीएसओ हितधारकों के सामूहिक प्रयासों ने विभिन्न आबादी समूहों के लिए चुनावी प्रक्रिया को सुलभ, सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने के अलावा देश भर में बड़ी संख्या में दिव्यांग मतदाताओं तक पहुंचने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

चुनाव आयुक्त श्री अनूप चंद्र पांडेय ने उन्नत डेटा प्रोसेसिंग, सामुदायिक हित के निर्दिष्ट बिंदुओं की पहचान करने और दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों जैसे विशिष्ट नागरिक समूहों के लिए सामंजस्यपूर्ण इकोसिस्टम बनाने जैसे उपायों के जरिए सामुदायिक सहायता प्रणालियों को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। श्री पांडेय ने कहा कि सुगम्य चुनाव हमेशा से आयोग के लिए एक महत्वपूर्ण विषय रहा है और इसके तहत निर्वाचन आयोग विशेष रूप से सभी लक्षित समूहों को शामिल करने पर ध्यान केन्द्रित करता है ताकि पूरी चुनावी प्रक्रिया में सभी लोगों की समान पहुंच सुनिश्चित हो।

महासचिव  श्री उमेश सिन्हा ने कहा कि ऐसे समय में जब चुनाव आयोग आगामी राज्य विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रहा है, उसे देखते हुए चुनाव आयोग ने इस सम्मेलन का आयोजन बिल्‍कुल सही समय पर किया है। विभिन्न सीईओ, सीएसओ और ईसीआई के आइकन से प्राप्त जानकारियों व सुझावों को इस बारे में समुचित योजना बनाने एवं इसकी उपयुक्‍त तैयारी में शामिल किया जाएगा, ताकि दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए चुनाव कहीं अधिक सुगम, समावेशी और मतदाता हितैषी हो सके।

यह जानकारी दी गई है कि आज की तारीख तक लगभग 77.4 लाख दिव्यांगों ने स्‍वयं को मतदाता के रूप में पंजीकृत करा लिया है। आज हुए विचार-विमर्श के दौरान यह बात स्वीकार की गई कि समावेश एवं भागीदारी के आधार पर ही एक सुदृढ़ और जीवंत लोकतंत्र की स्थापना होती है। इसके साथ ही आज व्‍यापक विचार-विमर्श के दौरान अनेक थीम या विषयों पर फोकस किया गया जिनमें दिव्यांगजनों की पहचान करना/पता लगाना, सुगम पंजीकरण, मतदान केंद्रों पर सुविधा, सुगम चुनाव के लिए प्रौद्योगिकी का कुशल उपयोग, सुगम मतदाता शिक्षा और साझेदारियों व सहयोग एवं मीडिया आउटरीच का लाभ उठाना शामिल हैं।

सम्मेलन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त श्री सुशील चंद्रा और चुनाव आयुक्तों श्री राजीव कुमार एवं श्री अनूप चंद्र पांडेय ने निम्नलिखित जारी किए;

  1. बाधाओं को पार करना – सुगम्यता पहल 2021। यह पुस्तिका दिव्‍यांग मतदाताओं की सुविधा और सशक्तिकरण के लिए अभिनव प्रथाओं एवं सुगम्यता पहलों का संकलन है।
  2. हाल ही में शुरू की गई पहलों के ब्रेल भाषा संस्करण जैसे कि मतदाता गाइड, नए मतदाता को पत्र, और मतदाताओं की जागरूकता पर 50 प्रेरक गीतों की एक गीत पुस्तिका।
  3. मतदाता हेल्पलाइन एप और ईवीएम-वीवीपीएटी के दो जागरूकता वीडियो के सांकेतिक भाषा संस्करण
  4. ‘स्वीप’ गतिविधियों के परिणामों के साथ-साथ कर्नाटक में विधानसभा चुनाव 2018 एवं लोकसभा चुनाव 2019 में दिव्‍यांगजनों को प्रदान की गई सुविधाओं का आकलन अध्ययन भी आयोग द्वारा जारी किया गया।

भारत निर्वाचन आयोग

भारत निर्वाचन आयोग (अंग्रेज़ी: Election Commission of India) एक स्वायत्त एवं अर्ध-न्यायिक संस्थान है जिसका गठन भारत में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से विभिन्न से भारत के प्रातिनिधिक संस्थानों में प्रतिनिधि चुनने के लिए किया गया था। भारतीय चुनाव आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को की गयी थी।

संरचना

आयोग में वर्तमान में एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त होते हैं। जब यह पहले पहल 1950 में गठित हुआ तब से और 15 अक्टूबर, 1989 तक केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त सहित यह एक एकल-सदस्यीय निकाय था। 16 अक्टूबर, 1989 से 1 जनवरी, 1990 तक यह आर. वी. एस. शास्त्री (मु.नि.आ.) और निर्वाचन आयुक्त के रूप में एस.एस. धनोवा और वी.एस. सहगल सहित तीन-सदस्यीय निकाय बन गया। 2 जनवरी, 1990 से 30 सितम्बर, 1993 तक यह एक एकल-सदस्यीय निकाय बन गया और फिर 1 अक्टूबर, 1993 से यह तीन-सदस्यीय निकाय बन गया।

निर्वाचन आयोग की शक्तियाँ

सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयानुसार अनु 324[1] मे निर्वाचन आयोग की शक्तियाँ कार्यपालिका द्वारा नियंत्रित नहीं हो सकती उसकी शक्तियां केवल उन निर्वाचन संबंधी संवैधानिक उपायों तथा संसद निर्मित निर्वाचन विधि से नियंत्रित होती है निर्वाचन का पर्यवेक्षण, निर्देशन, नियंत्रण तथा आयोजन करवाने की शक्ति मे देश मे मुक्त तथा निष्पक्ष चुनाव आयोजित करवाना भी निहित है जहां कही संसद विधि निर्वाचन के संबंध मे मौन है वहां निष्पक्ष चुनाव करवाने के लिये निर्वाचन आयोग असीमित शक्ति रखता है यधपि प्राकृतिक न्याय, विधि का शासन तथा उसके द्वारा शक्ति का सदुपयोग होना चाहिए।

निर्वाचन आयोग विधायिका निर्मित विधि का उल्लघँन नहीं कर सकता है और न ही ये स्वेच्छापूर्ण कार्य कर सकता है उसके निर्णय न्यायिक पुनरीक्षण के पात्र होते है।

निर्वाचन आयोग की शक्तियाँ निर्वाचन विधियों की पूरक है न कि उन पर प्रभावी तथा वैध प्रक्रिया से बनी विधि के विरूद्ध प्रयोग नही की जा सकती है।

यह आयोग चुनाव का कार्यक्रम निर्धारित कर सकता है चुनाव चिन्ह आवंटित करने तथा निष्पक्ष चुनाव करवाने के निर्देश देने की शक्ति रखता है।

सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी शक्तियों की व्याख्या करते हुए कहा कि वह एकमात्र अधिकरण है जो चुनाव कार्यक्रम निर्धारित करे चुनाव करवाना केवल उसी का कार्य है।

जनप्रतिनिधित्व एक्ट 1951 के अनु 14,15 भी राष्ट्रपति, राज्यपाल को निर्वाचन अधिसूचना जारी करने का अधिकार निर्वाचन आयोग की सलाह के अनुरूप ही जारी करने का अधिकार देते है।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

 

अरोमा डेयरी उद्यमिता

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने आज केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री पुरुषोत्तम रूपाला से मुलाकात की और जम्मू-कश्मीर के लिए एकीकृत अरोमा डेयरी उद्यमिता का प्रस्ताव रखा, जिससे किसानों की आय को दोगुना किया जा सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने श्री रूपाला को बताया कि जम्मू-कश्मीर में पशुपालन एवं डेयरी संसाधनों का भंडार प्रचुर मात्रा में है और यह सुझाव दिया कि इसे केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तत्वावधान में सीएसआईआर द्वारा जम्मू-कश्मीर में शुरू किए जा चुके अरोमा मिशन के साथ प्रभावी रूप से एकीकृत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इससे एकीकृत अरोमा डेयरी उद्यमिता का मार्ग प्रशस्त होगा, चिरस्थायी विकास सुनिश्चित होगा, आय में वृद्धि होगी और किसानों के लिए आजीविका का नया रास्ता भी खुलेगा।

“लैवेंडर या पर्पल रिवोल्यूशन” के रूप में लोकप्रिय अरोमा मिशन की शुरूआत जम्मू-कश्मीर से हुई है, जिसने किसानों के जीवन का कायाकल्प कर दिया है और वह अब  आकर्षक लाभ प्राप्त करने के साथ अपने जीवन को बेहतर बनाने में सक्षम बन चुके हैं। उन्होंने सीएसआईआर-आईआईआईएम के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर के डोडा, किश्तवाड़ और राजौरी जिलों में यूरोप के मूल फसल की शुरुआत की है।

सीएसआईआर द्वारा अरोमा मिशन की शुरुआत किसानों की आजीविका में सुधार लाने वाले प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप की गई थी। किसानों को रोपण सामग्री प्रदान करने के अलावा, शुद्धिकरण इकाइयां भी प्रदान की जाती हैं और उन्हें बेहतर प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है, जिनमें से कई किसान अब उद्यमी बन चुके हैं क्योंकि लैवेंडर तेल की बहुत ही ज्यादा मांग है। सीएसआईआर द्वारा जम्मू-कश्मीर में लैवेंडर के अलावा उच्च मूल्य की कई सुगंधित और औषधीय नकदी फसलों की शुरूआत की गई हैं।

इसका विस्तार अब अरोमा मिशन फेज-2 के रूप में किया जा रहा है और हाल ही में फ्लोरीकल्चर मिशन की भी शुरूआत की गई है। इससे किसानों और महिलाओं के जीवन में बहुत ही परिवर्तनकारी बदलाव आएगा।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के आह्वान का उल्लेख करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सहयोगी क्षेत्रों और आईआईआईएम, जम्मू जैसे संस्थानों के सहयोग से किसानों की आय में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि कृषि और संबद्ध क्षेत्रों एवं शोधकर्ताओं का ध्यान उत्पादन के बदले उत्पादकता पर केंद्रित होना चाहिए।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

 

पेट्रोलियम और विस्फोटक पदार्थ क्षेत्र में औद्योगिक सुरक्षा को भारी प्रोत्साहन

कोविड-19 महामारी के दौरान भारत सरकार ने आत्मनिर्भर भारत के विजन को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी), वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने अभी हाल में महत्वपूर्ण परिसरों (जैसे पेट्रोलियम प्रतिष्ठानों, विस्फोटक पदाक विनिर्माण सुविधाओं, सिलेंडर भरने और भंडारण परिसरों आदि) में औद्योगिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुधारों को लागू किया है, इस प्रकार सार्वजनिक सुरक्षा के साथ-साथ व्यापार करने की लागत घटाने तथा घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के लिए एक सक्षम ईको सिस्टम स्थापित करने को बढ़ावा मिला है। इस संदर्भ में विभाग ने पेट्रोलियम और विस्फोटक पदार्थ सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) के साथ मिलकर काम किया है, जो डीपीआईआईटी के तहत एक स्वायत्त निकाय है और उस पर विस्फोटक पदार्थों, पेट्रोलियम के साथ-साथ खतरनाक रसायनों के विनिर्माण, भंडारण, ढुलाई और उपयोग के लिए नीतियां और मानक संचालन प्रक्रियाएं लागू करने का दायित्व है। यह जानकारी डीपीआईआईटी में अपर सचिव सुश्री सुमिता डावरा ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए दी।

इस संदर्भ में पांच प्रमुख क्षेत्रों अर्थात स्थिर और मोबाइल प्रेशर वैसल्स (अनफायर) (एसएमपीवी(यू), कैल्शियम कार्बाइड, अमोनियम नाइट्रेट, गैस सिलेंडर, पेट्रोलियम और विस्फोटक पदार्थों की जांच की गई और निजी क्षेत्र, उद्योगिक निकायों और अन्य मंत्रालयों सहित संबंधित हितधारकों और प्रतिनिधियों के साथ विस्तार से चर्चा की गई। कई महीनों तक हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श और फीडबैक के बाद जनवरी 2021 से प्रमुख नियमों में संशोधनों के प्रस्ताव किए गए। इन संशोधनों को अंतिम रूप दिया गया तथा तीन मामलों यानि (1) एसएमपीवी, (2) कैल्शियम कार्बाइड और (3) अमोनियम नाइट्रेट के बारे में 31 अगस्त, 2021 को अंतिम संशोधनों को अधिसूचित किया गया। इसके अलावा 25 जून 2021 को गैस सिलेंडर नियमों में मसौदा संशोधनों को अधिसूचित किया गया।

तीन मुख्य संशोधनों में से प्रत्येक के तहत किए गए विशिष्ट सुधारों की विशेषताओं को नीचे सूचीबद्ध किया गया है।

(ए) स्थिर और मोबाइल प्रेशर वैसल्स (अनफायर्ड) (संशोधन) नियमावली, 2021

  1. यह संशोधन लाइसेंस प्राप्त परिसरों के प्रमाणन, निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट संबंधित कार्य करने के लिए तृतीय-पक्ष निरीक्षण एजेंसी (टीपीआईए) की अवधारणा को शुरू करने के लिए किया गया है।
  2. परीक्षण और प्रमाणन करने के लिए सक्षम व्यक्तियों की संख्या बढ़ाने के लिए न्यूनतम अनुभव के दिशानिर्देशों को 10 साल से घटाकर 5 साल कर दिया गया है।
  3. कोविड 19 महामारी को ध्यान में रखते हुए सरप्लस क्षेत्रों से कमी वाले क्षेत्रों में अल्पावधि में ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध कराने की जरूरत से निपटने के लिए आईएसओ कंटेनरों को तरल ऑक्सीजन की घरेलू ढुलाई करने की अनुमति 23 सितंबर, 2020 को दी गई।
  4. घरेलू क्षेत्रों के लिए आईएसओ कंटेनरों के माध्यम से क्रायोजेनिक संपीड़ित गैसों जैसे ऑक्सीजन, आर्गन, नाइट्रोजन, एलएनजी आदि की ढुलाई की अनुमति देने के लिए अब नियमों में प्रावधानों को शामिल किया गया है। इससे सरप्लस क्षेत्रों से कमी वाले क्षेत्रों में तरल ऑक्सीजन गैस की ढुलाई में मदद मिलेगी और इन गैसों के बहुविध परिवहन (सड़क, रेल और जलमार्ग) को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ ढुलाई लागत में भी कमी आएगी।
  5. आवेदनों का तेजी से निपटान सुनिश्चित करने के लिए, जिला प्राधिकरण से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) प्राप्त करने की समय-सीमा अब दो महीने निर्धारित की गई है। निर्धारित समय में एनओसी के आवेदन का निपटारा न होने के मामले में एनओसी जारी किया हुआ माना जाएगा।
  6. डुप्लीकेट लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवेदन और शुल्क जमा करने की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है। सिस्टम द्वारा जारी की गई ऑनलाइन कॉपी पर्याप्त होगी।

(बी) कैल्शियम कार्बाइड (संशोधन) नियमावली, 2021

  1. अनुपालन भार कम करने के लिए, पीईएसओ ने कैल्शियम कार्बाइड के भंडारण के लिए लाइसेंस की वैधता को 3 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया है।
  2. डुप्लीकेट लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवेदन और शुल्क जमा करने की जरूरत को समाप्त कर दिया गया है। सिस्टम द्वारा जारी की गई ऑनलाइन कॉपी ही पर्याप्त होगी।
  3. नियमों में ऑनलाइन शुल्क भुगतान की सुविधा का प्रावधान किया गया है।
  4. कैल्शियम कार्बाइड के भंडारण के लिए परिसरों की जीओ मैपिंग के प्रावधान को नियमों में शामिल किया गया है, जिसे संबंधित राज्य और केंद्रीय प्राधिकरणों को उपलब्ध कराया जाएगा।
  5. पारदर्शिता बढ़ाने और सूचना तक पहुंच के लिए भंडारण संबंधी जानकारी के उचित रिकॉर्ड और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए संशोधन किए गए हैं।

(सी) अमोनियम नाइट्रेट (संशोधन) नियमावली, 2021

  1. इन संशोधनों में भंडारण और रखरखाव क्षेत्रों में पर्याप्त अग्निशमन सुविधाओं, भंडारण और रखरखाव क्षेत्र के फर्श में सुधार और सर्विस योग्य जब्त अमोनियम नाइट्रेट की नीलामी एवं उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं होने पर उसके निपटान के साथ-साथ बंदरगाह क्षेत्र से सुरक्षा दूरी के विनिर्देश शामिल हैं।
  2. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने के लिए उसी लाइसेंसधारक को एक स्थान से दूसरे स्थान तक अमोनियम नाइट्रेट का हस्तांतरण करने की अनुमति दी गई है। इस नियमावली से स्टीवडोर्स (जहाज पर अमोनियम नाइट्रेट की लोडिंग/अनलोडिंग संभालने वाली एजेंसी) के विनियमन को बाहर रखने के लिए नियमों में संशोधन किया गया है।
  3. सुरक्षा गार्डों के लिए पर्याप्त अग्निशमन सुविधाओं और शेल्टरों का प्रावधान किया गया है। बंदरगाहों पर प्राप्त किए गए अमोनियम नाइट्रेट को अब बंदरगाह क्षेत्र से 500 मीटर की दूरी पर स्थित भंडारण गृहों से हटाने/स्थानांतरित करने की आवश्यकता है।
  4. जिला प्राधिकरण या महानिदेशक खान सुरक्षा से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए आवेदन का निपटान करने के लिए (जांच, देने या अस्वीकार करने के निर्णय सहित) का समय 6 महीने से घटाकर 3 महीने कर दिया गया है।
  5. छोटे भंडारगृहों में जगह और आवश्यक मात्रा की जरूरत के अनुसार छोटे भंडार गृह में अमोनियम नाइट्रेट की भंडारण क्षमता को बढ़ाया गया है। सुरक्षित और तेज निस्तारण के लिए नियमों को अमोनियम नाइट्रेट के जब्त खेपों की नीलामी की अनुमति देने के लिए संशोधित किया गया है।
  6. अमोनियम नाइट्रेट में कदाचार पर अंकुश लगाने के लिए अमोनियम नाइट्रेट को केवल बैग के रूप में आयात करने का प्रावधान किया गया है। इससे बंदरगाह पर खुले अमोनियम नाइट्रेट का रखरखाव करने में कमी आएगी और सुरक्षा में बढोतरी होगी।
  7. डुप्लीकेट लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवेदन और शुल्क जमा करने की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है। सिस्टम द्वारा ऑनलाइन प्रति ही पर्याप्त होगी।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.3

 

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस

शांति दिवस (International Day of Peace) हर साल 21 सितंबर को दुनिया भर में सभी देशों और लोगों के बीच शांति के आदर्शों को मजबूत करने के लिए मनाया जाता है।

थीम : ‘Recovering better for an equitable and sustainable world’

महत्व

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस उन लोगों के प्रयासों को स्वीकार करता है जिन्होंने संघर्ष को समाप्त करने और शांति को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। इस दिन को युद्धविराम के दिन के रूप में भी मनाया जाता है।

पृष्ठभूमि

  • संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने प्रस्ताव 36/67 पास करके 1981 में शांति के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में 21 सितंबर नामित किया था।
  • यह दिन UNGA के अपने उद्घाटन सत्र के साथ मेल खाता है जो आमतौर पर सितंबर के तीसरे मंगलवार को सालाना आयोजित किया जाता है।

शांति में एक साथ रहने के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस (International Day of Living Together in Peace)

  • हर साल, 16 मई को संयुक्त राष्ट्र और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कई अन्य संगठनों द्वारा शांति में एक साथ रहने का अंतर्राष्ट्रीय दिवस (International Day of Living Together in Peace) मनाया जाता है।
  • यह दिन जाति, लिंग, धर्म और भाषा के बावजूद अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्राप्त करने, मानवाधिकारों के सम्मान को बढ़ावा देने और स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र ने 2001 से 2010 के दशक को बच्चों के लिए शांति और अहिंसा की संस्कृति के लिए अंतर्राष्ट्रीय दशक (International Decade for a Culture of Peace and Non-Violence for the Children of the World) के रूप में घोषित किया।

SOURCE-PIB

PAPER-G.S.2

 

वैक्सीन मैत्री

भारत अक्टूबर से COVID 19 टीकों का निर्यात शुरू करने जा रहा है, इस साल अप्रैल में COVID 19 मामलों में अचानक वृद्धि और देश में टीकों की घरेलू मांग में वृद्धि के कारण टीकों का निर्यात बंद कर दिया गया था।

मुख्य बिंदु

स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने घोषणा की कि भारत अपनी घरेलू मांग को पूरा करने के बाद साल की आखिरी तिमाही से अपने ‘वैक्सीन मैत्री’ कार्यक्रम के तहत अन्य देशों में COVID वैक्सीन पहुंचाना शुरू कर देगा। यह वैश्विक वैक्सीन शेयरिंग प्लेटफॉर्म COVAX और पड़ोसी देशों को आपूर्ति में वृद्धि के रूप में प्राथमिकता देगा। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि देश में मासिक टीके का उत्पादन अगले महीने से 30 करोड़ खुराक तक पहुंचने की उम्मीद है।

वैक्सीन मैत्री पहल (Vaccine Maitri Initiative)

  • वैक्सीन मैत्री पहल 20 जनवरी 2021 को लांच की गई थी।
  • इस पहल के तहत, भारत अपने पड़ोसी देशों को मेड-इन-इंडिया कोविड-19 टीके की आपूर्ति कर रहा है। नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी के अन्य प्रमुख साझेदारों को भी वैक्सीन दी जाएगी।
  • भूटान और मालदीव टीके प्राप्त करने वाले पहले देश थे।
  • इसके बाद बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार और सेशेल्स को टीके दिए गये।
  • विनियामक अनुमोदन के बाद श्रीलंका को वैक्सीन की खुराक मिल रही है।
  • अफगानिस्तान और मॉरीशस को भी आवश्यक नियामक मंजूरी देने के बाद टीके मिलेंगे।
  • अब तक, भारत ने भूटान को 1,50,000 खुराक, मालदीव को 100,000 खुराक, बांग्लादेश को 2 मिलियन खुराक, नेपाल को 1 मिलियन खुराक, म्यांमार को 5 मिलियन खुराक, सेशेल्स को 50,000 खुराक और मॉरीशस को 100,000 खुराक प्रदान की है।

भारत की वैक्सीन कूटनीति (India’s Vaccine Diplomacy)

  • अनुदान सहायता के रूप में टीकों का वितरण भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी नीति’ और SAGAR सिद्धांत के अनुरूप है।
  • वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए 2020 में, भारत ने श्रीलंका में 400 मिलियन डॉलर की मुद्रा विनिमय सुविधा का विस्तार किया था। भारत ने 26 टन आवश्यक जीवन रक्षक दवाओं और उपकरणों की सहायता भी प्रदान की।
  • भारत ने महामारी के दौरान सक्रिय रूप से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, रेमेडिसविर, पेरासिटामोल टैबलेट, डायग्नोस्टिक किट, मास्क, दस्ताने, वेंटिलेटर और कई देशों को अन्य चिकित्सा आपूर्ति की।
  • भारत ने अपने पड़ोसी देशों को प्रशिक्षण भी प्रदान किया है ताकि क्लिनिकल परीक्षण (PACT) कार्यक्रम के लिए भागीदारी के तहत अपनी नैदानिक क्षमताओं को बढ़ाया जा सके।

SOURCE-THE HINDU

PAPER-G.S.2

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