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Current Affair 22 June 2021

22 June Current Affairs

भारत और फिजी ने कृषि व सहायक
क्षेत्रों में सहयोग के लिए एमओयू

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर और फिजी के कृषि, जलमार्ग व पर्यावरण मंत्री डॉ. महेंद्र रेड्डी ने आज एक वर्चुअल बैठक में भारत और फिजी के बीच कृषि एवं सहायक क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये।

इस अवसर पर, श्री तोमर ने कहा कि भारत का ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना में विश्वास रहा है। भारत ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कोरोना महामारी के दौरान भी इसी भावना के साथ सभी देशों की सहायता की। श्री तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने शुरुआत से ही कृषि और गांवों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया। इस दिशा में, देश में 1 लाख करोड़ रुपये के कृषि अवसंरचना कोष की स्थापना और 10 हजार एफपीओ का निर्माण जैसे कई ठोस कदम उठाए गए हैं। कोरोना महामारी के दौरान किसानों को 2 लाख करोड़ रुपये के कर्ज बांटे गए और इसके परिणाम स्वरूप पहले की तुलना में ज्यादा उत्पादन और आमदनी हुई।

भारत और फिजी के बीच सौहार्दपूर्ण व मैत्रीपूर्ण संबंध परस्पर सम्मान, सहयोग और मजबूत सांस्कृतिक व लोगों के बीच संबंधों पर आधारित हैं। प्रधानमंत्री मोदी की फिजी की ऐतिहासिक यात्रा और भारत प्रशांत द्वीपीय सहयोग के लिए पहले मंच से भारत के फिजी और प्रशांत क्षेत्र से जुड़ाव को एक नया प्रोत्साहन मिला है। यह एमओयू दोनों देशों के बीच बहुआयामी सहयोग को मजबूती देने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

श्री तोमर ने कहा, “खाद्य एवं कृषि का जलवायु परिवर्तन के बीच गहरा संबंध है। दोनों देश इस संबंध में वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सहयोग कर रहा है। कोरोना महामारी के बावजूद, हमने फिजी के अनुरोध पर यासा चक्रवात से प्रभावित समुदायों की आजीविका बहाल करने के लिए भारत सरकार की तरफ से अनुदान के रूप में फलों और सब्जियों की 14 किस्मों के लगभग 7 टन बीज वितरित किए हैं।”

फ़िजी

फ़िजी जो कि आधिकारिक रूप से फ़िजी द्वीप समूह गणराज्य (फ़िजीयाई : Matanitu Tu-Vaka-i-koya ko Viti) के नाम से जाना जाता है, दक्षिण प्रशान्त महासागर के मेलानेशिया मे एक द्वीप देश है। यह न्यू ज़ीलैण्ड के नॉर्थ आईलैंड से करीब 2000 किमी उत्तर-पूर्व मे स्थित है। इसके समीपवर्ती पड़ोसी राष्ट्रों मे पश्चिम की ओर वनुआतु, पूर्व में टोंगा और उत्तर मे तुवालु हैं। 17वीं और 18वीं शताब्दी के दौरान डच एवं अंग्रेजी खोजकर्तओं ने फ़िजी की खोज की थी। 1970 तक फ़िजी एक अंग्रेजी उपनिवेश था। प्रचुर मात्रा मे वन, खनिज एवं जलीय स्रोतों के कारण फ़िजी प्रशान्त महासागर के द्वीपों मे सबसे उन्नत राष्ट्र है। वर्तमान मे पर्यटन एवं चीनी का निर्यात इसके विदेशी मुद्रा के सबसे बड़े स्रोत हैं। यहाँ की मुद्रा फ़िजी डॉलर है।

फ़िजी के अधिकांश द्वीप 15 करोड़ वर्ष पूर्व आरंभ (आरम्भ) हुए ज्वालामुखीय गतिविधियों से गठित हुए। इस देश के द्वीपसमूह में कुल 322 द्वीप हैं, जिनमें से 106 स्थायी रूप से बसे हुए हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ लगभग 500 क्षुद्र द्वीप हैं जो कुल मिला कर 18,300 वर्ग किमी के क्षेत्रफल का निर्माण करते हैं। द्वीपसमूह के दो प्रमुख द्वीप विती लेवु और वनुआ लेवु हैं जिन पर देश की लगभग 8,50,000 आबादी का 87% निवास करती है।

राजनीति

फिजी की राजनीति आम तौर पर एक संसदीय प्रतिनिधि लोकतांत्रिक गणराज्य के दायरे में काम करती है। इसके तहत प्रधानमंत्री सरकार का मुखिया, और राष्ट्रपति राष्ट्र का मुखिया होता है। देश मे बहुदलीय प्रणाली है। कार्यकारी शक्तियों का प्रयोगाधिकार सरकार के पास है। विधायी शक्तियाँ सरकार और संसद दोनों में निहित हैं। न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका से स्वतंत्र है।

आजादी के बाद से अब तक फिजी मे चार तख्तापलट हो चुके हैं, दो 1987 में, एक 2000 में और एक 2006 के अंत में। 1987 के बाद से सेना या तो शासन मे है या उसका निर्वाचित सरकारों पर पूरा प्रभाव है।

फिजी चार राजनैतिक प्रभागों मे विभाजित है :

  • मध्य
  • पूर्वी
  • उत्तरी
  • पश्चिमी

इन प्रभागों को आगे 14 जिलों मे बाँटा गया है।

अर्थव्यवस्था

फिजी मे प्रचुर मात्रा मे वन, खनिज और मतस्य संसाधन हैं जिसके कारण यह् प्रशांत द्वीप क्षेत्र की तुलनात्मक रूप से अधिक विकसित अर्थव्यवस्थाओं मे से एक है। फिजी ने 1960 व 1970 के दशक में तेजी से वृद्धि की लेकिन 1980 के दशक की शुरुआत में अर्थव्यवस्था मे ठहराव आ गया, 1987 के तख्तापलट ने तो इसे और मंदा कर दिया। तख्तापलट के बाद के वर्षों में आर्थिक उदारीकरण के चलते कपड़ा उद्योग का विकास बडी़ तेज गति से हुआ है साथ ही चीनी उद्योग से जुडी़ जमीन के पट्टों की अनिश्चितता के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था ने अपनी वृद्धि दर कायम रखी है। गन्ना किसानों के पट्टों की अवधि समाप्त हो जाने से चीनी के उत्पादन में रियायती मूल्य के बावजूद गिरावट आयी है। चीनी के लिए यूरोपीय संघ द्वारा सब्सिडी का प्रावधान किया गया है और सबसे अधिक लाभान्वित होने वालों मे मॉरिशस के बाद फिजी दूसरे स्थान पर है। शहरीकरण और सेवा क्षेत्र के विस्तार ने, हाल के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि में योगदान किया है। तेजी से बढ़ रहा चीनी का निर्यात और पर्यटन उद्योग विदेशी मुद्रा के प्रमुख स्रोत हैं। फिजी राजस्व के लिए पर्यटन पर निर्भर है। चीनी प्रसंस्करण सारी औद्योगिक गतिविधियों का एक तिहाई बनता है। लंबे समय की समस्याओं मे कम निवेश और अनिश्चित संपदा अधिकार शामिल हैं। फिजी में राजनीतिक उथलपुथल ने अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाला है, जो वर्ष 2000 में 2.8% से घटी और 2001 में केवल 1 % की दर से बढ़ी है। पर्यटन क्षेत्र में तेजी से बढोत्तरी हुई है फिर भी यह अभी 2002 के तख्तापलट के पहले के स्तर को छू पाने मे नाकाम रही है। हालाँकि मुद्रास्फीति कम है फिर भी फिजी के रिजर्व बैंक ने ऋण द्वारा वित्तपोषित, अत्यधिक उपभोग के भय के कारण नीति सूचक दर फरवरी 2006 में 1 % से बढा़कर 3.25 % कर दी है। कम ब्याज दरों ने अब तक निर्यात के लिए अधिक निवेश नहीं जुटाया है लेकिन आवास क्षेत्र मे, तेजी से गिर रही वाणिज्यिक बंधक दर के चलते उछाल आया है।

सुवा में 1984 में खोली गयी रिजर्व बैंक की चौदह मंजिला इमारत फिजी की सबसे उँची इमारत है। सुवा का केन्द्रीय वाणिज्यिक केंद्र जो नवंबर 2005 में खोला गया था योजना के मुताबिक सबसे उँची इमारत होनी थी लेकिन अंत में इसके डिजाइन में परिवर्तन कर दिया गया और इसके चलते रिजर्व बैंक अभी भी सबसे उँची इमारत है।

SOURCE-PIB

 

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर

भारतीय रेल के सार्वजनिक उपक्रम, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (डीएफसीसीआईएल) ने गुजरात में वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर स्थित वलसाड रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) को गिराने और उसके पुनर्निर्माण (डीएफसीट्रैक के लिए रास्ता बनाने के बाद) का काम रिकॉर्ड 20 दिनों में पूरा कर लिया है।

विभिन्न सरकारी एजेंसियों और नागरिक प्रशासन के साथ मिलकर काम करते हुए इस आरओबी, जो मुंबई-दिल्ली राजमार्ग से वलसाड शहर में जाने वाले व्यस्त यातायात को संभव बनाता है, के काम की चुनौती से निपटने के लिए 02.06.2021 को यातायात को 20 दिनों के लिए अवरुद्ध रखने की अनुमति हासिल की गई।

पृष्ठभूमि

पश्चिमी डीएफसी के वैतरणा-सचिन सेक्शन में चलने वाले इस काम को दक्षिण गुजरात के वलसाड शहर के पास एक आरओबी को पार करने से संबंधित एक अड़चन का सामना करना पड़ा। विभिन्न किस्म की सीमाओं के कारण आरओबी का काम शुरू नहीं किया जा सका और पटरी (ट्रैक) बिछाने की गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावनाथी। इससे अत्याधुनिक न्यू ट्रैक कंस्ट्रक्शन (एनटीसी) मशीन का उपयोग कर पटरी बिछाने की परियोजनाएं प्रभावित होतीं।

  • डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC)
  • यह उच्च गति और उच्च क्षमता वाला विश्व स्तरीय तकनीक के अनुसार बनाया गया एक रेल मार्ग होता है, जिसे विशेष तौर पर माल एवं वस्तुओं के परिवहन हेतु बनाया जाता है।
  • डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का मतलब ऐसी रेल लाइन से है, जिसका इस्तेमाल सिर्फ मालगाड़ियों के आवागमन के लिए किया जाएगा। देश में ईस्टर्न और वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर बनाया जा रहा है। इनकी कुल लंबाई 3000 किलोमीटर है. इनका इस्तेमाल सिर्फ मालगाड़ियों के लिए होगा।
  • डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) में बेहतर बुनियादी ढाँचे और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का एकीकरण शामिल होता है।
  • सरकार द्वारा दो डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर-ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC) और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) बनाए जा रहे हैं।
  • ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC)
  • यह डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पंजाब में साहनेवाल (लुधियाना) से शुरू होकर पश्चिम बंगाल के दनकुनी में समाप्त होता है।
  • ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC) के मार्ग में कोयला खदानें, थर्मल पावर प्लांट और औद्योगिक शहर मौजूद हैं।
  • इसके मार्ग में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल आदि राज्य शामिल हैं।
  • इस परियोजना का अधिकांश हिस्सा विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित है।
  • 351 किमी. लंबा ‘न्यू भूपुर-न्यू खुर्जा खंड’ मौजूदा कानपुर-दिल्ली लाइन पर भीड़ को कम करेगा और साथ ही यह मालगाड़ियों की गति को 25 किमी. प्रति घंटा से 75 किमी. प्रति घंटा कर देगा।
  • वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC)
  • 1504 किलोमीटर लंबा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल (महाराष्ट्र) से दादरी (उत्तर प्रदेश) तक है और यह देश के प्रमुख बंदरगाहों से होकर गुज़रता है।
  • इसमें हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश शामिल हैं।
  • यह जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) द्वारा वित्तपोषित है।
  • ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को आपस में जोड़ने के लिये दादरी और खुर्जा के बीच एक खंड निर्माणाधीन है।

 

महत्त्व

  • क्षमता में बढ़ोतरी
  • डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) भारत के परिवहन क्षेत्र में सुधार करेगा और भारतीय रेलवे के ट्रंक मार्गों की क्षमता में बढ़ोतरी करेगा, क्योंकि इस मार्ग पर माल गाड़ियाँ बिना किसी रोक-टोक के स्वतंत्र रूप से आवागमन कर सकेंगी।
  • भीड़ में कमी
  • वर्तमान में भारतीय रेलवे नेटवर्क पर चलने वाली लगभग 70 प्रतिशत माल गाड़ियाँ डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) पर स्थानांतरित कर दी जाएंगी, जिससे यात्री ट्रेनों को अधिक रास्ता मिल सकेगा।
  • व्यापार सृजन
  • डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) रेल लाइन को भारतीय रेलवे की अन्य रेल लाइनों की तुलना में अधिक भार उठाने के लिये डिज़ाइन किया गया है, जो कि व्यावसायिक एवं व्यापारिक दृष्टि से भी काफी महत्त्वपूर्ण है।
  • सामयिकता
  • इस नए फ्रेट रेल मार्ग से भारतीय रेलवे की मुख्य लाइनों पर अधिक गाड़ियाँ चलाई जा सकेंगी, जिससे भारतीय ट्रेनें अधिक समयबाद्ध हो सकेंगी।

लाभ

  • इससे रसद लागत कम हो जाएगी।
  • उच्च ऊर्जा दक्षता।
  • माल की तीव्रता से आवाजाही।
  • यह पर्यावरण के अधिक अनुकूल है।
  • यह व्यापार की सुगमता प्रदान करेगा।
  • रोज़गार सृजन में सहायक।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड

  • यह रेल मंत्रालय के तहत गठित एक इकाई है, जिसका उद्देश्य 3,306 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से संबंधित योजना बनाना और इसके निर्माण का कार्य पूरा करना है।
  • इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है और यह एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (PSU) है।
  • यह डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के नियोजन एवं विकास, वित्तीय साधनों की तैनाती, निर्माण, रखरखाव और संचालन आदि गतिविधियों में संलग्न है।

SOURCE-PIB &ECONOMICES TIMES

 

ओडिशा मगरमच्छों की तीनों प्रजातियों वाला
भारत का एकमात्र राज्य बन गया है।

प्रमुख बिंदु

  • ओडिशा राज्य में तीन प्रजातियां हैं :
  1. महानदी में सतकोसिया में मीठे पानी के घड़ियाल,
  2. भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यानमें मगर,
  3. खारे पानी के मगरमच्छ।
  • 1975 में इसकी नदियों में आने के बाद पहली बार ओडिशा में घड़ियाल (एक गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति) का प्राकृतिक घोंसला देखा गया है।
  • सतकोसिया रेंज (Satkosia range) के पास बलदामारा क्षेत्र में महानदी नदी में घड़ियाल के लगभग 28 बच्चे देखे गए।

ओडिशा में घड़ियाल

मूल घड़ियाल जो ओडिशा में पेश किए गए थे, अब मर चुके हैं। उनकी संख्या के स्वाभाविक रूप से बढ़ने के लिए 40 वर्षों तक प्रतीक्षा करने के बाद, ओडिशा ने महानदी में पिछले तीन वर्षों में 13 और घड़ियाल पेश किए। लेकिन अब केवल आठ जीवित हैं।

मगरमच्छ

मगरमच्छ रेप्टीलिया वर्ग के सबसे बङे जंतुओं में एक है। यह 4 से 25 मीटर तक लंबा हो सकता है।

खारे पानी के मगरमच्छ (Crocodile)  दुनिया में सबसे बड़े सरीसृप हैं। वे 6.17 मीटर (20 फीट 3 इंच) तक बढ़ सकते हैं और एक टन से अधिक वजन हो सकते हैं।

खारे पानी का मगरमच्छ भारत में पाई जाने वाली मगरमच्छ की तीन प्रजातियों में से एक है, इसके अलावा मगर कहे जाने मगरमच्छ और घड़ियाल पाए जाते हैं।

भारत के पूर्वी तट के अलावा, यह मगरमच्छ भारतीय उपमहाद्वीप में अत्यंत दुर्लभ है। खारे पानी के मगरमच्छों की एक बड़ी आबादी (इनमें कई बड़े आकार के व्यस्क हैं, एक 7 मीटर की लम्बाई का नर भी शामिल है) उड़ीसा के भीतरकनिका वन्यजीव अभयारण्य में मौजूद है और ये सुंदरवन के भारतीय और बांग्लादेश के हिस्सों में कम संख्या में पाए जाते हैं।

विश्व भर में मगरमच्छों के कुल 24 प्रजातियाँ हैं, जो साफ पानी या समुद्र के खारे जल मे रहते हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो कि एक खास भौगोलिक क्षेत्र में पाए जाते हैं जिससे उनका नामकरण भी उसी आधार पर किया गया है।

भारत में मगरमच्छों के सिर्फ 3 प्रजातियाँ ही पायी जाती हैं :

  1. खारे जल का मगरमच्छ (Saltwater crocodile) Crocodylus porosus
  2. मगरमच्छ (Marsh crocodile) Crocodylus palustris
  3. घड़ियाल (Gharial / Fish-eating crocodile) Gavialis gangeticus

खारे जल का मगरमच्छ (Saltwater crocodile) Crocodylus porosus

  • बंगाल की खाड़ी से लगे समुद्री तटों जैसे ओड़िशा, पश्चिम बंगाल और तमिल नाडु में पाए जाते हैं।
  • ये भारत के पूर्वी समुन्द्री तटों से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक पाए जाते हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) के अगस्त 1996 के आकलन के अनुसार संकटग्रस्त प्रजातियों की “रेड डाटा सूची” / लाल सूची में इसे “संकटमुक्त (Least Concern या LC)” श्रेणी मे रखा गया है।
  • खारे पानी के मगरमच्छ को भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के सूची 1 के तहत संरक्षित किया गया है।

मगरमच्छ (Marsh crocodile) Crocodylus palustris

  • मगरमच्छ पूरे भारत में साफ जल के स्रोतों जैसे झील, तालाब तथा मंदगति वाली नदियाँ, दलदली भूमि और कच्छ भूमि में पाए जाते हैं।
  • ये भारत, ईरान, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश में पाए जाते हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) के जून 2009 के आकलन के अनुसार संकटग्रस्त प्रजातियों की “रेड डाटा सूची” / लाल सूची में इसे “असुरक्षित (Vulnerable या VU)” श्रेणी मे रखा गया है।
  • मगरमच्छ को भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के सूची 1 के तहत संरक्षित किया गया है।

घड़ियाल (Gharial / Fish-eating crocodile) Gavialis gangeticus

  • घड़ियाल भारत में मुख्य रूप से गंगा एवं इसकी सहायक नदियां जैसे सोन, चंबल नदी, कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य / जलाशय (गिरवा नदी पर), कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान और गंडक नदी आदि जगहों में पाए जाते हैं।
  • ये भारत, नेपाल और बांग्लादेश में पाए जाते हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) के दिसम्बर 2017 के आकलन के अनुसार संकटग्रस्त प्रजातियों की “रेड डाटा सूची” / लाल सूची में इसे “घोर-संकटग्रस्त (Critically Endangered या CR)” श्रेणी मे रखा गया है।
  • घड़ियाल को भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के सूची 1 के तहत संरक्षित किया गया है।

SOURCE-THE HINDU

 

आभासी जल विश्लेषण

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने आभासी जल विश्लेषण (Virtual Water Analysis) के माध्यम से भारत में बेहतर जल प्रबंधन नीतियों का रास्ता खोज लिया है। इस अध्ययन का नेतृत्व आईआईटी-गुवाहाटी की प्रोफेसर अनामिका बरुआ (Anamika Barua) ने किया।

आभासी पानी (Virtual Water)

  • प्रोफेसर के अनुसार, वर्चुअल वाटर (VW) खाद्य और गैर-खाद्य वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन और व्यापार में शामिल पानी है।
  • आभासी पानी वह “अदृश्य” पानी है जिसका उपभोग उत्पाद या सेवा के पूरे जीवनचक्र में किया गया है।

आभासी जल विश्लेषण (Virtual Water Analysis)

आईआईटी गुवाहाटी के अध्ययन से प्राप्त परिणाम आभासी जल प्रवाह मूल्यांकन में पानी की कमी को कम करने के लिए ज्ञान शासन अंतर को पाटने में मदद करेंगे। इस अध्ययन के अनुसार, पानी और खाद्य सुरक्षा प्राप्त करने के लिए सतत कृषि की योजना और कार्यान्वयन के लिए निरंतर पानी की कमी वाले राज्य महत्वपूर्ण हैं। इस अध्ययन से पता चलता है कि, जल संकट वाले राज्यों में मीठे पानी के संसाधनों पर दबाव को, कृषि-जलवायु रूप से उपयुक्त खाद्यान्नों का उत्पादन करने के लिए वर्चुअल वाटर फ्लो विश्लेषण का उपयोग करके, उत्पादन क्षेत्रों में विविधता लाकर कम किया जा सकता है।

आभासी पानी और पानी का निर्यात!

कृषि और औद्योगिक उत्पाद को तैयार करने में जितने पानी की खपत होती है, उसे आभासी पानी (Virtual Water) कहा जाता है। भारत, अमेरिका और चीन को विश्व में आभासी पानी के उपयोगकर्ताओं के रूप में जाना जाता है और बढ़ती खपत के मद्देनज़र इस तरह के पानी का व्यापार देश की जल-निरंतरता में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

आभासी जल व्यापार यह विचार है कि जब वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान होता है, तो आभासी पानी होता है। जब कोई देश घरेलू उत्पादन के बजाय एक टन गेहूं का आयात करता है, तो यह लगभग 1,300 घन मीटर वास्तविक स्वदेशी जल बचा रहा है। अगर यह देश है पानी दुर्लभ, जो पानी ‘बचा’ है, उसे दूसरे छोरों की ओर इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि निर्यात करने वाला देश जल-दुर्लभ है, तथापि, उसने 1,300 घन मीटर आभासी पानी का निर्यात किया है क्योंकि गेहूं उगाने के लिए उपयोग किया जाने वाला वास्तविक पानी अब अन्य उद्देश्यों के लिए उपलब्ध नहीं होगा। इसमें उन देशों के लिए स्पष्ट रणनीतिक निहितार्थ हैं जो पानी के लिए विवश हैं जैसे कि दक्षिणी अफ्रीकी विकास समुदाय (SADC) क्षेत्र में पाए जाते हैं।

पानी की कमी वाले देशों को पसंद करते हैं इजराइल संतरे के निर्यात (अपेक्षाकृत पानी की गहन फसलों) को हतोत्साहित करने के लिए दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बड़ी मात्रा में पानी को निर्यात करने से रोकने के लिए ठीक है।

हाल के वर्षों में, आभासी जल व्यापार की अवधारणा ने वैज्ञानिक और राजनीतिक बहस दोनों में वजन बढ़ाया है। अवधारणा की धारणा अस्पष्ट है। यह एक विश्लेषणात्मक, वर्णनात्मक अवधारणा और एक राजनीतिक प्रेरित रणनीति के बीच बदलता है। एक विश्लेषणात्मक अवधारणा के रूप में, आभासी जल व्यापार एक ऐसे उपकरण का प्रतिनिधित्व करता है जो न केवल वैज्ञानिक बल्कि राजनीतिक प्रवचन में नीति विकल्पों की पहचान और मूल्यांकन की अनुमति देता है। राजनीतिक रूप से प्रेरित रणनीति के रूप में, प्रश्न आभासी जल व्यापार में लागू किया जा सकता है सतत जिस तरह से, कार्यान्वयन को एक सामाजिक, आर्थिक और पारिस्थितिक फैशन में प्रबंधित किया जा सकता है, और किन देशों के लिए अवधारणा एक सार्थक विकल्प प्रदान करती है।

आभासी जल अवधारणा, जिसे मूर्त जल के रूप में भी जाना जाता है, द्वारा गढ़ा गया था जॉन एंथोनी एलन (टोनी एलन) 1993 में। उन्होंने प्राप्त किया स्टॉकहोम वॉटर प्राइज़ 2009 के अंत में इस अभिनव अवधारणा के लिए।

वाटर फुटप्रिंट

हमारे प्रतिदिन के बहुत से उत्पादों में आभासी या छिपा जल शामिल होता है। उदाहरणार्थ, एक कप कॉफी के उत्पादन के लिए आभासी पानी की मात्रा 140 लीटर तक होती है| वाटर  फुटप्रिंट केवल प्रयोग किए गए प्रत्यक्ष पानी की मात्रा को हे नहीं दर्शाता, बल्कि उपभोग किए गए आभासी पानी की मात्रा को भी दर्शाता है। जैसे कि भारत में एक किलो गेहूं उगाने के लिए लगभग 1700 लीटर पानी खर्च होता है, अर्थात् यदि कोई व्यक्ति एक दिन एक किलो गेहूँ की खपत करता है, तो वह उसके साथ लगभग 1700 लीटर पानी की भी खपत करता है। इस 1700 लीटर पानी को हम आभासी पानी कहेंगे।

SOURCE-INDIAN EXPRESS

 

लॉरेल हबर्ड

न्यूजीलैंड ओलंपिक समिति (NZOC) ने भारोत्तोलक लॉरेल हबर्ड (Laurel Hubbard) को महिलाओं के +87 किग्रा वर्ग में लड़ने के लिए चुना है। वह ओलंपिक में हिस्सा लेने वाली पहली ट्रांसजेंडर एथलीट होंगी।

मुख्य बिंदु

43 वर्षीय भारोत्तोलक ने 2013 में लिंग परिवर्तन से पहले पुरुषों की भारोत्तोलन प्रतियोगिताओं में भाग लिया था।हबर्ड 2015 से ओलंपिक में भाग लेने के लिए पात्र हैं। 2015 में, अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने किसी भी ट्रांसजेंडर एथलीट को इस शर्त पर महिला के रूप में प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति देने के लिए दिशानिर्देश जारी किए कि पहली प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले उनके टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम से कम 12 महीने के लिए 10 नैनोमोल प्रति लीटर से कम होना चाहिए।

लॉरेल हबर्ड (Laurel Hubbard)

हबर्ड न्यूजीलैंड की भारोत्तोलक हैं जिन्हें 2020 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा करने के लिए चुना गया है। वह लिंग परिवर्तन के बाद ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाली पहली ट्रांसजेंडर एथलीट होंगी। अपने लिंग परिवर्तन से पहले, हबर्ड ने 1998 में नव स्थापित M105+ डिवीजन में 135 किग्रा, क्लीन एंड जर्क 170 किग्रा के साथ न्यूजीलैंड जूनियर रिकॉर्ड बनाया था। हालांकि, बाद में इन रिकॉर्ड्स को डेविड लिटि ने पीछे छोड़ दिया। बाद में हबर्ड ने महिला में परिवर्तन किया और 2012 में लॉरेल हबर्ड बन गईं। उन्होंने 2017 विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक और समोआ में 2019 प्रशांत खेलों में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में भी भाग लिया।

SOURCE-GK TODAY