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Current Affair 22 March 2021

22 March Current Affairs

अंतर्राष्ट्रीय पत्र लेखन प्रतियोगिता 2021

भारतीय डाक विभाग देश के सभी राज्यों में युवाओं के लिए यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (यूपीयू) 2021 अंतरराष्ट्रीय पत्र लेखन प्रतियोगिता का आयोजन कर रहा है। यह आयोजन संबंधित डाक सर्कल कार्यालयों के माध्यम से किए जाएंगे। इस प्रतियोगिता का विषय है कोविड-19 के बारे में आपके अपने अनुभव जिसे अपने परिवार के किसी एक सदस्य को संबोधित करते हुए पत्र लिखें। 15 वर्ष तक के स्कूली बच्चे इस प्रतियोगिता के अंतर्गत 31 मार्च, 2021 तक लेखन प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकते हैं। इस प्रतियोगिता का आयोजन राज्यों के डाक सर्कल द्वारा विद्यालयों और केंद्रों में किया जाएगा। हालांकि अभ्यर्थियों को इन केंद्रों में उपस्थित हुए बिना भी अपने घर से पत्र लेखन प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर दिया गया है। जो छात्र अपने घरों से ही इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेना चाहते हैं उन्हें संबंधित डाक सर्कल कार्यालय द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी तक अपनी प्रविष्टि के संबंध में स्पीड पोस्ट से सूचना देनी होगी, साथ ही अपना परिचय पत्र भी प्रेषित करना होगा।

SOURCE-PIB

 

उदारीकृत भू-स्‍थानिक नीति और अंतरिक्ष आ‍धारित सुदूर संवेदन नीतियां

अंतरिक्ष आयोग के अध्‍यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. के सिवन ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की स्‍वर्ण जयंती संवाद श्रृंखला के मौके पर कहा है कि उदारीकृत, भू-स्‍थानिक डाटा नीति से हर क्षेत्र को लाभ होगा और ये फायदे देश के कोने-कोने तक पहुंचेंगे।

डॉ. सिवन ने “अनलॉकिंग इंडियाज स्‍पेस पोटेंशियल, जियोस्‍पेशियल डाटा एण्‍ड मैपिंग” पर एक संबोधन में कहा कि भू-स्‍थानिक डाटा को उदार बनाने वाले नये दिशानिर्देश एक साहसिक कदम हैं जो विभिन्‍न क्षेत्रों में संभावनाओं के नए द्वार खोलेंगे। इसका आयोजन राष्‍ट्रीय विज्ञान एवं तकनीकी संचार परिषद (एनसीएसटीसी) और विज्ञान प्रसार ने किया है।

उन्‍होंने कहा कि अंतरिक्ष आधारित सुदूर संवेदन नीति के साथ-साथ उदारीकृत भू-स्‍थानिक नीति भारत के लिए चमत्‍कारी साबित होने जा रही है जो संभावनाओं के नए द्वार खोलेगी और देश को आत्‍मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम भूमिका अदा करेगी।

डॉ. सिवन ने कहा कि सभी क्षेत्रों के विकास के लिए भू-स्‍थानिक डाटा की ज़रूरत होती है और यह सुशासन में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है तथा आत्‍मनिर्भर भारत के लक्ष्‍य को हासिल करने के बहुत ही अनुरूप है।

उन्‍होंने कहा कि “हम अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्‍मनिर्भर हैं और भारत ऐसा पहला देश है जिसने घरेलू कार्यक्रमों के लिए अंतरिक्ष कार्यक्रमों का उपयोग किया है और हमारा ध्‍यान स्‍वदेशी एवं लागत प्रभावी प्रौद्योगिकियों के निर्माण पर रहा है। इस समय मांग बढ़ रही है और देश की अंतरिक्ष क्षेत्र की क्षमताओं का लाभ उठाने के लिए मूल्‍य क्षेत्र की भागीदारी भी आवश्‍यक हो गई है।”

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. आशुतोष शर्मा ने कहा कि भू-स्‍थानिक नीति को उदारीकृत करने का समग्र प्रभाव देश की अर्थव्‍यवस्‍था पर काफी व्‍यापक होगा और भू-स्‍थानिक क्षेत्र में एक लाख करोड़ की अर्थव्‍यवस्‍था बनाने के अलावा इसका अन्‍य क्षेत्रों पर भी अप्रत्‍यक्ष प्रभाव पडेगा जिससे भविष्‍य में विभिन्‍न क्षेत्रों में लाखों रोजग़ारों का सृजन होगा।

प्रो. शर्मा ने जोर देते हुए कहा “केंद्रीय क्षेत्रों में से एक कृषि क्षेत्र को इसका सबसे अधिक लाभ होने जा रहा है और स्‍वामित्‍व योजना ग्रामीण आबादी तथा अर्थव्‍यवस्‍था को सशक्‍त बना रही है और कई सालों से चले आ रहे भूमि विवाद निपटारों में मदद करेगी।”

प्रो. शर्मा ने कहा कि भू-स्‍थानिक दिशानिर्देश भारतीय उद्योग और सर्वेक्षण एजेंसियों की सुरक्षा चिंताओं पर कोई प्रभाव डाले बगैर इन्‍हें सशक्‍त बनाएंगे और प्रोत्‍साहित करेंगे।

15 फरवरी, 2021 को भू-स्थानिक डेटा के लिए उदार दिशा-निर्देशों की घोषणा करते हुए, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, डॉ. हर्षवर्धन ने कहा था की “सुरक्षा/कानून प्रवर्तन एजेंसियों की ओर से एकत्रित वर्गीकृत भू-स्थानिक डेटा को छोड़कर, सार्वजनिक धन से तैयार किए गए सभी भू-स्थानिक डेटा को सभी भारतीय संस्थाओं के लिए वैज्ञानिक, आर्थिक और विकासात्मक उद्देश्यों के लिए सुलभ बनाया जाएगा और उनके उपयोग पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं होगी। सरकारी एजेंसियों और अन्य संस्थाओं को खुले तौर पर जुड़ाव वाले भू-स्थानिक डेटा के लिए साझेदारी और काम करने की जरूरत है।” उन्होंने जोर दिया, “लाभान्वित हितधारकों में उद्योग से लेकर अकादमिक क्षेत्र और सरकारी विभागों तक, व्यावहारिक रूप से समाज के हर वर्ग को शामिल किया जाएगा।” मंत्री ने आगे कहा कि यह परिवर्तनकारी सुधार है।

सरकार ने हाल ही में भू-स्‍थानिक डाटा के लिए उदार दिशानिर्देशों की घोषणा की है और भारतीय उद्योग की सहभागिता को बढ़ावा देने तथा डाटा तक आसानी से पहुंच बनानें के लिए एक नई अंतरिक्ष आधारित रिमोर्ट सेंसिंग नीति को बना रही है। इसमें प्रक्रियाओं को बहुत ही सरल बनाया गया है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से भू-स्‍थानिक डाटा के लिए जो दिशानिर्देश तैयार किए गए हैं वे भारत की मैपिंग नीति खासकर भारतीय कंपनियों के लिए काफी परिवर्तनकारी साबित होंगे। अंतरिक्ष विभाग की ओर से इन नए अंतरिक्ष आधारित रिमोर्ट सेंसिंग नीति दिशानिर्देशों का लक्ष्‍य देश में विभिन्‍न हितधारकों को अंतरिक्ष आधारित रिमोर्ट सेंसिंग गतिविधियों में सहभागिता के लिए प्रोत्‍साहित करना है ताकि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के वाणिज्यिकरण को बढ़ावा दिया जा सके।

SOURCE-PIB

 

नई नगर वन स्कीम

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने कहा है कि नई नगर वन योजना शहरों में शहरी जंगलों के निर्माण में मदद करेगी।

यह योजना शहरों और गांवों के बीचअपने स्वयं के वन कवर होने के संदर्भ में अंतर को भरेगी।  उन्होंने भारत के लगभग हर ग्रामीण पैच के आसपास के गांवों में जंगलों के विकास और देखभाल की पुरानी परंपरा का हवाला दिया।

Nagar Van Yojana 2021

शहरी वनाच्छादित क्षेत्र है जो शहरों के आसपास के क्षेत्रों में स्थित होते हैं जो शहरवासियों के लिए सुलभ रहते हैं और उपयुक्त रूप से प्रबंधित भी। ये शहर के जंगल मनोरंजन, शिक्षा, जैव विविधता, जल और मिट्टी के संरक्षण के लिए संपूर्ण प्राकृतिक वातावरण प्रदान करते हैं और प्रदूषण, गर्मी को कम करते हैं।

प्रथम वर्ग वाले प्रत्येक शहर में सरकार कम से कम एक CITY FOREST बनाना / विकसित करना चाहती है। यह पूर्ण स्वस्थ रहने का वातावरण प्रदान करेगा और स्मार्ट, स्वच्छ, हरित, सतत और स्वस्थ शहरों के विकास में भी योगदान देगा।

Nagar Van Scheme Key Highlights

योजना का नाम           – नगर वन योजना

द्वारा प्रायोजित          – केंद्र सरकार

शुरू होने की तारीख     – 5 जून 2020

किसने घोषणा की        – श्री प्रकाश जावड़ेकर

उद्देश्य                          – शहरी वन विकसित करना

लाभार्थी                       – शहरी छेत्र

विभाग                        – पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय

नगर वन योजना के उद्देश्य

सरकार द्वारा Nagar Van Yojana के नए संस्करण को देश के सभी राज्यों में लागू किया जाएगा, भारत के सभी राज्यों में इस नगर वन योजना को शुरू करने के मुख्य उद्देश्य कुछ इस प्रकार से हैं :

देश के विभिन्न हिस्सों में सिटी फॉरेस्ट बनाने के लिए।

देश के सभी शहरी नागरिकों को स्वास्थ्य लाभ।

शहरों की जलवायु को लचीला बनाना।

प्रत्येक शहर में एक नगर वन को नगरपालिका परिषद के साथ विकसित किया जाएगा।

ताकि पौधों और जैव विविधता पर जागरूकता पैदा हो सके।

क्षेत्र की वनस्पतियों और जीवों के संरक्षण पर शिक्षा जिसमें खतरों की धारणा भी शामिल है।

शहरों का पारिस्थितिक कायाकल्प। वन हरे फेफड़े हैं जो प्रदूषण शमन, स्वच्छ हवा, शोर में कमी, जल संचयन और गर्मी द्वीपों के प्रभाव में कमी से शहरों के पर्यावरण की रक्षा करते हैं।

In-Situ Biodiversity Conservation.

मोटे तौर पर कहे तो इस योजना का मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में शुद्ध पर्यावरण का निर्माण करना है।

SOURCE-DANIK JAGRAN

 

दक्षिण चीन सागर

फिलीपींस ने दक्षिण चीन सागर में अपने जल क्षेत्र पर अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए चीन से 200 से अधिक जहाज़ों को हटाने के लिए है।

फिलीपींस के रक्षा मंत्री डेल्फ़िल लोरेन्ज़ाना ने कहा है कि चीन के जहाज़ फिलीपींस के समुद्री अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं। फिलीपींस का कहना है कि ऐसा नहीं लगता कि मछली पकड़ने वाले जहाज़ मछली पकड़ रहे हैं और इन जहाज़ों पर चीन के समुद्री लड़ाके हैं।

पाँच साल पहले एक अंतरराष्ट्रीय अदालत ने 90% पानी पर प्रभुत्व के चीनी दावों को ख़ारिज कर दिया थाफिलीपींस, ब्रुनेई, मलेशिया, ताइवान और वियतनाम दशकों से पूरे दक्षिण चीन सागर पर चीन से दावों पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में तनाव काफ़ी बढ़ गया है। चीन उस क्षेत्र पर बार-बार दावा करता है, जो ‘नाइन डैश लाइन’ कहा जाता है। चीन ने अपने दावे के समर्थन में वहाँ द्वीपों का निर्माण किया है और वहाँ गश्त भी करता रहता है। चीन ने वहाँ अपनी सैन्य मौजूदगी का विस्तार किया है। हालाँकि उसका ये कहना है कि उसके इरादे शांतिपूर्ण हैं।

7 मार्च को दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस के तटरक्षकों ने कई तस्वीरें जारी की थीं, जिसमें व्हिटसन रीफ़ (फिलीपींस इसे जुलियन फिलीप रीफ़ कहता है) पर कई चीनी जहाज़ों को एक साथ खड़े देखा जा सकता है।

फिलीपींस के क्रॉस-गवर्नमेंट टास्क फ़ोर्स ने शनिवार को कहा कि ये रीफ़ फिलीपींस के विशेष आर्थिक क्षेत्र के भीतर हैं।

दक्षिणी चीन सागर की इतनी अहमियत क्यों

दक्षिणी चीन सागर, प्रशांत महासागर और हिंद महासागर के बीच स्थित बेहद अहम कारोबारी इलाक़ा भी है। दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का 20 फ़ीसदी हिस्सा यहाँ से गुज़रता है।

क्लाइव स्कोफ़ील्ड बताते हैं कि 2016 में दक्षिणी चीन सागर से होकर 6 ख़रब डॉलर का समुद्री व्यापार हुआ था। इस इलाक़े में अक़्सर अमेरिकी जंगी जहाज़ गश्त लगाते हैं, ताकि समुद्री व्यापार में बाधा न पहुँचे। मगर, चीन इसे अमेरिका का आक्रामक रवैया कहता है।

चीन का इरादा है कि दक्षिणी चीन सागर से होने वाली कारोबारी आवाजाही पर उसका नियंत्रण हो. लेकिन अमेरिका मानता है कि ये दुनिया के कारोबार के लिए ठीक नहीं होगा। ये चीन की दादागिरी है।

जानकार कहते हैं कि चीन का इरादा दक्षिणी चीन सागर का आर्थिक रूप से फ़ायदा उठाने का है।

SOURCE-BBC

 

67वां राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार

67वें राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। साल 2019 में बनी फ़िल्मों और उनके कलाकारों के लिए पुरस्कारों की घोषणा की गई है।

दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत अभिनीत ‘छिछोरे’ को बेस्ट हिन्दी फ़िल्म का अवॉर्ड मिला है। कंगना रनौत को मणिकर्णिका और पंगा के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का अवॉर्ड मिला है। मनोज वाजपेयी को भोसले के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अवॉर्ड मिला है।

इस बार बेस्ट फीचर फ़िल्म का अवॉर्ड ‘मारक्कर लायन ऑफ द अरबियन सी’ को दिया गया है। यह मलयाली फ़िल्म है। मनोज वाजपेयी को ‘भोसले’ और धनुष को असुरान (तमिल) के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अवॉर्ड दिया गया है।

हालाँकि इसकी घोषणा पिछले साल मई महीने में ही होने वाली थी लेकिन कोरोना वायरस महामारी के कारण नहीं हो पाई थी। सिक्किम को फ़िल्म शूटिंग के लिए पसंदीदा राज्य अवॉर्ड दिया गया है। सोहिनी चट्टोपाध्याय को बेस्ट फ़िल्म समीक्षक का अवॉर्ड दिया गया है।

यह अवॉर्ड डायरेक्टोरेट ऑफ फ़िल्म फेस्टिवल की तरफ़ से दिया जाता है। यह संस्था सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है। अवॉर्ड पारंपरिक रूप से राष्ट्रपति देते हैं लेकिन 66वें राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने दिया था। हालांकि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने विजेताओं के साथ चाय के दौरान मौजूद।

SOURCE-PIB

 

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र में जल जीवन मिशन की मददकरने को लेकर
संयुक्त राष्ट्र परियोजना सेवा कार्यालय ने डेनमार्क सरकार के साथसाझेदारी की

संयुक्त राष्ट्र परियोजना सेवा कार्यालय (यूएनओपीएस) ने विश्व जल दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश में केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम, जल जीवन मिशन की मदद करने के लिएडेनमार्क सरकार के साथ एक साझेदारी की। डेनमार्क सरकार और यूएनओपीएस के बीच इस साझेदारी का उद्देश्य जल जीवन मिशन (जल कार्यक्रम) के लिए रणनीतिक तकनीकी सहायता प्रदान करना है। यूएनओपीएस जल की कमी से जूझ रहेउत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र स्थित 11 जिलों में मापने योग्यडिलीवरी मॉडल स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। यह जल जीवन मिशन के संचालन संबंधित दिशानिर्देशों में निर्धारित प्राथमिकताओं के अनुरूप होगा।

यूएनओपीएस और डेनमार्क के दूतावास के बीच समन्वय के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जल जीवन मिशन पर साझेदारी और द्वीपक्षीय भारत-डेनमार्क सहयोग पारस्परिक रूप से एक-दूसरे का समर्थन करें और जल जीवन मिशन के लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायता के लिए एक-दूसरे को मजबूत करें। यूएनओपीएस इन जिलों में अपने संसाधनों को विशेष रूप से सामुदायिक एकत्रीकरण, क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण आदि के क्षेत्र में उपयोग करेगा, जो एकसमयबद्ध तरीके से हर घर को नल जल कनेक्शन प्रदान करने के मिशन के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता करेगा।

जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन प्रदान करना है। यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-6 के अनुरूप है। पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार और नागरिक समाज के साथ सभी स्तरों पर यूएनओपीएस की साख को देखते हुए इसका रणनीतिक महत्व है कि डेनमार्क सरकार और यूएनओपीएस के बीच यह सहयोग मिशन के उद्देश्यों को प्राप्त करने को लेकर सार्थक प्रभाव डालेगा।

SOURCE –PIB

 

अंतर्राष्‍ट्रीय वन दिवस

आज अंतर्राष्‍ट्रीय वन दिवस है। 21 मार्च को यह दिवस मनाने की घोषणा 2012 में खाद्य और कृषि संगठन तथा संयुक्‍त राष्‍ट्र द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्‍य वनों के महत्‍व और योगदान के बारे में विभिन्‍न समुदायों में जन-जागरूकता पैदा करना है। इस दिन प्रतिवर्ष सरकारी तंत्र और निजी संगठन मिलकर लोगों को वनों के महत्‍व और पर्यावरण तथा अर्थव्‍यवस्‍था में उनकी भूमिका के बारे में जागरूक करते हैं।

2021 के लिए अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस की थीम “फ़ोरेस्ट रिस्टोरेशन: ए पाथ टू रेकव्री एंड वेलबीइंग”।

2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस (IDF) घोषित किया।

SOURCE- Newsonair

 

बिहार दिवस

बिहार 22 मार्च, 2021 को अपना 109वां स्थापना दिवस मना रहा है। इस स्थापना दिवस को “बिहार दिवस” के रूप में जाना जाता है।

बिहार दिवस

यह दिवस हर साल 22 मार्च को मनाया जाता है। यह बिहार राज्य के गठन का प्रतीक है। इस दिन, बिहार को ब्रिटिश सरकार द्वारा बंगाल से अलग करके 1912 में बनाया गया था।

बिहार

बिहार जो पूर्वी भारत का एक राज्य है, भारत में यह जनसंख्या के हिसाब से तीसरा सबसे बड़ा राज्य है। यह क्षेत्र के हिसाब से 12वां सबसे बड़ा राज्य है। इसका क्षेत्रफल 94,163 वर्ग किलोमीटर है। यह पश्चिम में उत्तर प्रदेश, उत्तर में नेपाल, पूर्व में पश्चिम बंगाल के उत्तरी भाग और दक्षिण में झारखंड से घिरा हुआ है। इसके तीन मुख्य सांस्कृतिक क्षेत्रों में मिथिला, मगध और भोजपुर शामिल हैं। राज्य की आधिकारिक भाषाएं हिंदी और उर्दू।

SOURCE-G.K.TODAY

 

विश्व जल दिवस

1993 से हर साल, विश्व जल दिवस (World Water Day) 22 मार्च को मनाया जाता है। यह ताजे पानी के महत्व को फैलाने के लिए मनाया जाता है। यह दिन संयुक्त राष्ट्र द्वारा और साथ ही दुनिया भर में विभिन्न अन्य संगठनों द्वारा मनाया जाता है।

Theme : Valuing Water

महत्व

विश्व जल दिवस का मुख्य उद्देश्य सतत विकास लक्ष्य 6 (Sustainable Development Goal 6) प्राप्त करना है। इसमें 2030 तक सभी के लिए जल और स्वच्छता शामिल है।

आवश्यकता

2050 तक, 5.7 बिलियन से अधिक लोग उन क्षेत्रों में होंगे, जहां पानी दुर्लभ होगा। दुनिया भर में पानी की मांग 2040 तक 50% तक बढ़ जाएगी। इसलिए, जल संरक्षण पर बल देना आवश्यक है।

इतिहास

1992 में पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (United Nations Conference on Environment and Development) में इस दिवस की शुरुआत हुई थी। इस सम्मेलन में, संयुक्त राष्ट्र ने विश्व जल दिवस मनाने का प्रस्ताव पारित किया था। तब से कई इवेंट्स को जोड़ा गया है। इसमें 2013 में जल क्षेत्र में सहयोग का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष (International Year of Cooperation in the Water Sphere) भी शामिल है। इसके अलावा, वर्तमान में सतत विकास के लिए पानी पर अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई दशक (2018-28) (International Decade for Action on Water for Sustainable Development) को भी मनाया जा रहा है।

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