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Current Affair 28 April 2021

CURRENTS AFFAIRS – 28th APRIL

कृषि अवसंरचना फंड

कृषि अवसंरचना फंड (एआईएफ) ने 8,216 करोड़ रुपये के बराबर के 8,665 आवेदन प्राप्त करने के बाद 8000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा प्राइमरी एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसाइटीज (पैक्स) (58 प्रतिशत), कृषि-उद्यमियों (24 प्रतिशत) और अलग अलग किसानों (13 प्रतिशत) है। ये निवेश परियोजनाओं की व्यापक श्रृंखला के लिए हैं जो देश भर में किसानों के लिए मूल्य का सृजन करेंगे। इसमें अग्रणी भूमिका निभा रहे राज्यों में आंध्र प्रदेश (2,125 आवेदन), मध्य प्रदेश (1,830 आवेदन), उत्तर प्रदेश (1,255 आवेदन), कर्नाटक (1,071 आवेदन) और राजस्थान (613) शामिल हैं। जहां अधिकांश राज्य बढ़त लेने के लिए अपने मजबूत सहकारी संघ नेटवर्कों का लाभ उठा रहे हैं, मध्य प्रदेश में सर्वाधिक गैर-पैक्स आवेदन प्राप्त हुए हैं। कृषि अवसंरचना फंड कृषि प्रणाली से जुड़े सभी हितधारकों की सामूहिक शक्ति को एक साथ लाएगा।

कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग (डीएसीएंडएफडब्ल्यू) वास्तविक निवेशों में तेजी लाने के लिए कई पहल कर रहा है। विभाग ने इफको, हैफेड, नाफेड तथा अन्य के साथ साथ प्रत्यक्ष रूप से 150 से अधिक एफपीओ तथा आजीविका संगठनों से संपर्क किया है। विभाग ने 90 से अधिक कृषि व्यवसाय प्रतिभागयिों के साथ सीआईआई एवं फिक्की के सहयोग से एक एग्रीबिजनेस कांकलेव की मेजबानी की है जहां आर्या सीएमए, महिन्द्रा एग्री, टाटा कंज्यूमर, इफको तथा एस्कार्ट्स क्रापिंग सॉल्यूशंस ने किसानों,  कृषक समूहों तथा स्थानीय उद्यमियों की साझीदारी के जरिये एआईएफ के तहत बुनियादी ढांचे के निर्माण में अपनी भूमिका पर प्रस्तुतियां दीं।

विभाग प्रगति की निगरानी करने तथा क्रॉस लर्निंग्स को बढ़ावा देने के लिए नियमित रूप से राज्यों की समीक्षा का आयोजन कर रहा है। इसके अतिरिक्त, राज्य विभागों के 190 से अधिक प्रतिभागियों के
साथ एक राज्य कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया जहां आंध्र प्रदेश ने अपना पैक्स आधारित
मॉडल तथा मध्य प्रदेश ने अपनी स्थानीय उद्यमशीलता आधारित मॉडल प्रदर्शित किया। इसके परिणामस्वरूप, राज्य बड़ी संख्या में किसानों तथा स्थानीय उद्यमियों के साथ जुड़ रहे हैं।

इन पहलों से न केवल आवेदनों की समग्र संख्या में बढोतरी हुई है बल्कि कस्टम हायरिंग सेंटर्स तथा फार्म मशीनरी बैंकों ( 25 करोड़ रुपये के बराबर के 130 आवेदन) तथा स्मार्ट और उत्कृष्ट कृषि के लिए इंफ्रा ( 1,300 करोड़ रुपये के बराबर के 200 आवेदन) जैसे नवोन्मेषी इंफ्रा प्रकारों के प्रति दिलचस्पी में वृद्धि हुई है। एआईएफ हब एंड स्पोक मॉडल में फर्म-गेट के निकट डिस्ट्रिब्यूटेड इंफ्रा के सृजन के लिए उभरते नए साझीदारी मॉडल के साथ किसानों और एग्रीबिजनेस को साथ लाया है। ये एग्रीबिजनेस एफपीओ के बीच एआईएफ तथा नई कृषि-तकनीकों के बारे में जागरूकता बढ़ा रहे हैं और उनके प्रयोग तथा उन्हें अपनाने में सहायता कर रहे हैं। URL https://agriinfra.dac.gov.inके साथ स्कीम के लिए एक पोर्टल बनाया गया है जहां आवेदक आवेदन जमा कर सकते हैं और सभी हितधारक आवेदनों की प्रगति की निगरानी कर सकते हैं।

कृषि व्यवसायों तथा किसानों को एक साथ लाने, राज्यों के बीच क्रॉस – लर्निंग्स को बढ़ावा देने और विश्व स्तरीय कृषि बुनियादी ढांचा के निर्माण के लिए ग्लोबल बेंचमार्किंग आरंभ करने के लिए की जा रही सही पहलों के साथ एआईएफ में तेजी आ रही है। एआईएफ में देश के कृषि बुनियादी ढांचे के परिदृश्य को पूरी तरह रूपांतरित कर देने की क्षमता है।

कृषि अवसंरचना फंड के बारे में

कृषि अवसंरचना फंड ब्याज छूट तथा ऋण गारंटी के जरिये फसल उपरांत प्रबंधन अवसंरचना तथा समुदाय खेती के लिए व्यावहार्य परियोजनाओं में निवेश करने के लिए एक मध्यम-दीर्घ अवधि ऋण वित्तपोषण सुविधा है। योजना की अवधि वित वर्ष 2020 से 2029 (10 वर्ष) है। इस योजना के तहत, सालाना 3 प्रतिशत की ब्याज छूट के साथ ऋण के रूप में बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों द्वारा 1 लाख करोड़ रुपये तथा 2 करोड़ रुपये तक के ऋण के लिए सीजीटीएमएसई के तहत क्रेडिट गारंटी कवरेज उपलब्ध कराये जाएंगे। पात्र लाभार्थियों में किसान, एफपीओ, पैक्स, मार्केटिंग कॉपरेटिव सोसाइटीज, एसएचजी, ज्वायंट लायबिलिटी ग्रुप्स (जेएलजी), बहुद्वेशीय सहकारी संघ, कृषि उद्यमी, स्टार्ट-अप्स और केंद्रीय/राज्य एजेंसी या स्थानीय निकाय प्रायोजित सार्वजनिक-निजी साझीदारी परियोजनाएं शामिल हैं।

SOURCE-PIB

 

मिसाइल पाइथन-5

भारत के स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस ने 27 अप्रैल, 2021 को सफल परीक्षणों के बाद 5वीं पीढ़ी की पाइथन-5 एयर-टू-एयर मिसाइल (एएएम) को हवा से हवा (एयर-टू-एयर) में मार कर सकने वाले हथियारों के अपने बेड़े में शामिल कर लिया। इन परीक्षणों का उद्देश्य तेजस में पहले से ही समन्वित डर्बी बियॉन्ड विजुअल रेंज (बीवीआर) एयर-टू-एयर मिसाइल (एएएम) की बढ़ी हुई क्षमता का आकलन करना भी था। गोवा में किये गयेइस निशानेबाजी परीक्षण (टेस्ट फायरिंग) ने बेहद चुनौतीपूर्ण परिदृश्यों मेंइस मिसाइल के प्रदर्शन को सत्यापित करने के लिए उससे जुड़ी परीक्षणों की एक श्रृंखला को अंजाम दिया। डर्बी मिसाइल द्वारा तेज गति के साथ पैंतरेबाज़ी करने वाले एक हवाई लक्ष्य पर सीधा प्रहार करने में सफल रहनेऔर पाइथन मिसाइलों द्वारा भी निशानेबाजी का शत–प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के साथउनकी संपूर्ण क्षमता का सत्यापन हुआ। इन परीक्षणों ने अपने सभी नियोजित उद्देश्यों को पूरा किया।

इन परीक्षणों से पहले, तेजस में लगी एवियोनिक्स, फायर-कंट्रोल रडार, मिसाइल वेपन डिलीवरी सिस्टम और फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम जैसे विमान प्रणालियों के साथ इस मिसाइल के समन्वय का आकलन करने के लिए बेंगलुरु में मिसाइल ढुलाई में सक्षम उड़ानों का व्यापक परीक्षण किया गया था। गोवा में, पृथक्करण के सफल परीक्षणों के बाद, काल्पनिक लक्ष्य पर मिसाइल का लाइव प्रक्षेपण किया गया। सभी पहलुओं के साथ-साथ दृश्य सीमाओं से परे लक्ष्य को निशाना बनाने की क्षमता का आकलन करने के लिए पाइथन-5 मिसाइलके लाइव फायरिंग का आयोजन किया गया था। सभी लाइव फायरिंग में, इस मिसाइल ने अपने हवाई लक्ष्यों को मार गिराया।

इन मिसाइलों को नेशनल फ्लाइट टेस्ट सेंटर (एनएफटीसी) से संबद्ध भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के टेस्ट पायलटों द्वारा उड़ाए गए एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) के तेजस विमान से दागा गया था। यह सफल आयोजन सीईएमआईएलएसी, डीजी – एक्यूए, आईएएफ पीएमटी, एनपीओ (एलसीए नेवी) और आईएनएस हंसा के सराहनीय सहयोग के साथ-साथ एडीए और एचएएल-एआरडीसी के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीशियनों की टीम के वर्षों की कड़ी मेहनत की वजह से संभव हुआ।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, एडीए, भारतीय वायु सेना, एचएएल की टीमों और इस परीक्षण में शामिल सभी लोगों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. जी. सतीश रेड्डी ने विभिन्न संगठनों और उद्योग के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीशियनों के प्रयासों की सराहना की।

SOURCE-PIB

 

युद्धाभ्यास वरुण– 2021

भारतीय और फ्रांसीसी नौसेना के बीच द्विपक्षीय अभ्यास ‘वरुण-2021’ का 19वां संस्करण दिनांक 27 अप्रैल 2021 को संपन्न हुआ।

युद्धाभ्यास वरुण उच्च स्तर का संचालन कायम करने और दोनों नौसेनाओं के बीच समन्वय मजबूत करने में महत्वपूर्ण रहा है। पिछले कुछ वर्षों में यह अभ्यास स्कोप में वृद्धि, भागीदारी के स्तर एवं सैन्य ऑपेरशन की जटिलता के मामले में परिपक्व हो गया है। अरब सागर में दिनांक 25 से 27 अप्रैल 2021 के बीच आयोजित इस अभ्यास में समुद्र में उच्च गति वाले नौसैनिक अभियानों का संचालन किया गया, जिसमें उन्नत वायु रक्षा और पनडुब्बी रोधी अभ्यास, क्रॉस डेक हेलीकॉप्टर लैंडिंग समेत तीव्र गति वाले फिक्स्ड एवं रोटरी विंग युद्धाभ्यास, सामरिक युद्धाभ्यास, सतह और हवाई हथियार विरोधी फायरिंग, अंडरवे रेपलेनिश्मेन्ट एवं अन्य समुद्री सुरक्षा अभियान शामिल हैं। दोनों नौसेनाओं की इकाइयों ने समुद्री क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए एक एकीकृत बल के रूप में अपनी क्षमता प्रदर्शित करते हुए युद्ध-लड़ने के कौशल को धार दी एवं बेहतर बनाया।

समुद्री अभियानों को क्रियान्वित करने में दोनों नौसेनाओं की आम समझ अभ्यास की शुरुआत से ही स्पष्ट थी जिसमें पूरी योजना वर्चुअल मीटिंग के माध्यम से की गई थी और अभ्यास पूरी तरह से गैर-संपर्क प्रारूप में आयोजित किए गए थे।

जटिल अभ्यासों में निर्बाध समन्वय, युद्धाभ्यास का सटीक निष्पादन और सटीकता वरुण-2021 के संचालन की विशेषता है और इससे आपसी विश्वास, अंतर-संचालनीयता और दोनों नौसेनाओं के बीच सर्वश्रेष्ठ परिपाटियों को साझा करने एवं अधिक मजबूत बनाने में मदद मिली है।

भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट तरकश दिनांक 28 अप्रैल से 1 मई 2021 तक फ्रांसीसी नौसेना के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (सीएसजी) के साथ उन्नत सतह, पनडुब्बी रोधी और वायु रक्षा अभियानों में भाग लेना जारी रखेगा।

SOURCE-PIB

 

भारतीय खगोलविदों द्वारा किए गए अध्ययन से सुपरनोवा के विस्फोट तंत्र,
जोकि ब्रह्मांड संबंधी दूरियों की प्रमुख माप हैंके बारे में संकेत मिले है

वर्ष 2011 में, सुदूर स्थित सुपरनोवा के अवलोकनों के जरिए ब्रह्मांड के अभूतपूर्व तेज गति से फैलने के बारे में पता लगाने के लिए तीन वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था। लेकिन अब भारतीय खगोलविदों की एक टीम ने इस तरह के सुपरनोवा का अवलोकन करके ऐसे सुपरनोवा के विस्फोट के संभावित तंत्र के बारे में पता लगाया है, जोकि ब्रह्मांड संबंधी दूरियों की प्रमुख माप की जानकारी प्रदान करते हैं।

एसएन 2017एचपीए नाम के एक सुपरनोवा, जोकि एक विशेष प्रकार का सुपरनोवा है और जिसे आई ए सुपरनोवा कहा जाता है और जिसमें 2017 में विस्फोट हो गया, के बारे में इन खगोलविदों के विस्तृत अध्ययन ने शुरुआती चरण के स्पेक्ट्रा में बिना जले हुए कार्बन के अवलोकनों के जरिए सुपरनोवा के विस्फोट तंत्र के बारे में पता लगाने में मदद की।

सुपरनोवा के रूप में एक तारे की विस्फोटक अंत ब्रह्मांड की सबसे विलक्षण और भयावह घटनाओं में से एक है। टाइप आई ए सुपरनोवा उन व्हाइट ड्वार्फ के विस्फोटों का नतीजा हैं जो अपना द्रव्यमान पदार्थ के उपचय के जरिए चंद्रशेखर सीमा से अधिक कर लेते हैं। उनकी समांगी प्रकृति उन्हें ब्रह्मांड की दूरी को मापने का उत्कृष्ठ मानक कैंडल बनाती है। हालांकि विस्फोट तंत्र, जो इन सुपरनोवा (एसएनई) का निर्माण करते हैं, और उनके पूर्वज प्रणाली (तारे जो सुपरनोवा परिघटना के मूल में है) की सटीक प्रकृति को अभी भी स्पष्ट रूप से समझा नहीं जा सका है। यों तो ज्यादातर एसएनईआईए समांगी हैं, इन परिघटनाओं का एक खासा अंश उनके प्रकाश वक्र के साथ – साथ उनके वर्णक्रमीय गुणों, दोनों, में विविधता दिखाते हैं।

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत एक स्वायत्त संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स में पीएचडी के छात्र अनिर्बन दत्ता द्वारा अपने सहयोगियों के साथ इस संबंध में किया गया शोध हाल ही में ‘मंथली नोटिसेस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी (एमएनआरएएस)’ नाम  की पत्रिका  में प्रकाशित हुआ है। यह शोध सुपरनोवा की पूर्वज प्रणाली के एक कार्य के साथ-साथ इसके गुणों और इस तरह के सुपरनोवा के विस्फोट तंत्र के रूप में इस विविधता को समझने में मदद करेगा।

व्हाइट ड्वार्फ में जलने वाला भाग, जोकि ध्वनि की गति से कम गति से आगे बढ़ता है या फैलता है, बिना जली हुई सामग्री को पीछे छोड़ देता है। इन बिना जले हुई अवयवों का उपयोग करके गणना किया गया विस्तार वेग उत्सर्जित सामग्री की वेग संरचना के बारे में एक जरूरी संकेत प्रदान कर सकता है। आम तौर पर यह उम्मीद की जाती है कि यह बिना जली हुई सामग्री इजेक्टा की सबसे बाहरी परतों में मौजूद होगी और तारे की सबसे बाहरी परत की गति, जिसे फोटोफेरिक वेलोसिटी कहा जाता है, की तुलना में अधिक गति के साथ विस्तारित होगी। इस शोध में, लेखकों ने दिखाया है कि बिना जली हुई परत फोटोफेरिक वेलोसिटी के साथ घूम रही है, जोकि यह दर्शाता है कि विस्फोट सामग्री का मिश्रण उत्सर्जित सामग्री के भीतर प्रबल है।

शोधकर्ताओं में से एक अनिर्बन दत्ता का कहना है कि “विस्फोट के तंत्र के साथ ही पूर्वज प्रणाली पर सख्त बंधनों को रखने के लिए ऐसे और अधिक वस्तुओं का विस्फोट के शुरुआती घंटों से लेकर विस्फोट के बिल्कुल अंतिम चरण तक अध्ययन करना बेहद महत्वपूर्ण है।”

ADB ने भारत के सकल घरेलू उत्पाद का पूर्वानुमान को बढ़ाकर 11% किया

एशियाई विकास बैंक ने हाल ही में अपना एशियाई विकास आउटलुक, 2021 जारी किया। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत 11% की दर से विकास करेगा। हाल ही में ADB ने COVID-19 के खिलाफ लड़ने के लिए भारत को 1.5 बिलियन अमरीकी डालर की वित्तीय सहायता प्रदान की है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

ADB के अनुसार, दक्षिण एशिया में 2021 में 5% की वृद्धि की उम्मीद है। 2020 में दक्षिण एशियाई क्षेत्र में 6% की गिरावट आई थी। इस क्षेत्र की वृद्धि 2022 में 6.6% तक सीमित हो जाएगी।

एशिया की आर्थिक वृद्धि 2021 में 3% रहेगी।

चीन, हांगकांग, सिंगापुर और ताइपे जैसे देश 2021 में 7% की वृद्धि और 2022 में 5.6% की वृद्धि दर्ज करेंगे। रिपोर्ट में इन देशों को नए औद्योगिक देशों के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

पूर्वी एशिया की जीडीपी 2021 में 4% और 2022 में 5.1% वृद्धि होने की उम्मीद है।

चीन के बारे में रिपोर्ट

चीन की जीडीपी 2021 में 1% की दर से बढ़ेगी और 2022 में 5.5% की दर से बढ़ेगी।

चीन का मजबूत निर्यात 2021 में देश की आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा देगा।

रिकवरी के कारण

COVID-19 टीकों के उत्पादन और वितरण में प्रगति ने एशिया को वर्तमान स्थिति तक पहुँचने में मदद की। हालांकि, महत्वपूर्ण नए प्रकोप क्षेत्र के विकास को कमजोर कर सकते हैं।

आदित्यएल 1 सपोर्ट सेल

भारत के पहले समर्पित सौर अंतरिक्ष मिशन पर एक सामुदायिक सेवा केंद्र स्थापित किया गया है। इस केंद्र को ALISC कहा जाता है। ALISC का अर्थ Aditya-L1 Support Cell है। यह उत्तराखंड के हल्द्वानी में ARIES में स्थापित किया गया है।

ALISC

यह इसरो और ARIES का संयुक्त प्रयास है। ISRO का अर्थ  Indian Space Research Organisation है और ARIES का अर्थ Arybhata Research Institute for Observational Sciences है।

यह केंद्र अतिथि पर्यवेक्षकों को समायोजित करेगा और निष्कर्षों का विश्लेषण करने के लिए मिशन से डाटा प्रदान करके उनकी मदद करेगा।

यह एक सिंगल इंटरफ़ेस के तहत मिशन से सभी डाटा लाएगा।

इसके अलावा, ALISC डाटा विश्लेषण पर आवधिक प्रशिक्षण स्थापित करेगा।यह लगातार ई-वर्कशॉप भी आयोजित करेगा।

आदित्यएल 1 (Aditya-L1)

आदित्य-एल 1 एक भारतीय अंतरिक्ष मिशन है जो सूर्य तथा पृथ्वी और सूर्य के बीच के क्षेत्र का भी अध्ययन करेगा।यह देश के विभिन्न संस्थानों द्वारा विकसित सात पेलोड को ले जायेगा।

इस पेलोड में से एक VELC यानी Visible Emission Line Coronograph है।

इस उपग्रह का वजन 400 किलोग्राम है और इसे 800 किमी की ऊंचाई पर निम्न पृथ्वी की कक्षा में लॉन्च किया जायेगा।पृथ्वी से 1000 किमी से कम की ऊंचाई पर स्थित कक्षाओं को लो अर्थ ऑर्बिट कहा जाता है।

SOURCE-GK TODAY

 

18 वर्ष के ऊपर के लोगों के लिए COVID टीकाकरण के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हुई

COVID टीकाकरण के लिए 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया आज से शुरू हो गयी है। सभी पात्र लोग Co-Win पोर्टल cowin.gov.in पर पंजीकरण कर सकते हैं । COVID टीकाकरण का तीसरा चरण अगले 1 मई, 2021 से शुरू हो रहा है।

कोविड-19 टीकाकरण का पहला चरण

कोविड-19 टीकाकरण अभियान का पहला चरण 16 जनवरी, 2021 को शुरू किया गया था। यह अभियान पूरे देश में 3006 टीकाकरण केंद्रों पर शुरू किया गया था। पहले चरण में केवल स्वास्थ्य कर्मियों और फ्रंटलाइन श्रमिकों का टीकाकरण शुरू किया गया था। चरण 1 के तहत, लगभग 1,26,71,163 लोगों को अब तक टीका की पहली खुराक दी गयी है। उनमें से, लगभग 14 लाख लोगों ने दूसरी खुराक भी प्राप्त की है। टीकाकरण अभियान में 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को भी शामिल किया गया है।

दूसरा चरण

कोविड-19 टीकाकरण के दूसरे चरण के तहत, 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को टीका लगाया जा रहा है।

इसके अलावा, दिशानिर्देशों के अनुसार, 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और रोगों से पीड़ित लोगो का टीकाकरण भी किया जा रहा है।

लाभार्थी देश भर में 10,000 सरकारी और लगभग 20,000 निजी टीकाकरण केंद्रों पर अपना टीकाकरण करवा सकते हैं।

COVAXIN

COVAXIN भारत बायोटेक द्वारा निर्मित एक सरकारी समर्थित टीका है। इसकी प्रभावकारिता दर 81% है। COVAXIN वैक्सीन के चरण तीन परीक्षणों में 27,000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया है। COVAXIN दो खुराक में दिया जाता है। खुराक के बीच का समय अंतराल चार सप्ताह है। COVAXIN को मृत COVID-19 वायरस से तैयार किया गया था।

COVISHIELD

COVISHIELD वैक्सीन एस्ट्राज़ेनेका द्वारा निर्मित है। स्थानीय रूप से, COVISHIELD सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया द्वारा निर्मित किया जा रहा है। यह चिम्पांजी के एडेनोवायरस नामक एक सामान्य कोल्ड वायरस के कमजोर संस्करण से तैयार किया गया था। COVID-19 वायरस की तरह दिखने के लिए वायरस को संशोधित किया गया है। यह दो खुराक में लगाया जाता है।

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