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Current Affair 3 August 2021

Current Affairs – 3 August, 2021

फ्लेक्स-ईंधन चालित मोटरवाहनों

केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने निजी, वाणिज्यिक एवं दुपहिया मोटरवाहन निर्माताओं की सोसाइटी ऑफ इंडिया ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (एसआईएएम) के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की।

प्रतिनिधिमंडल ने मोटरवाहन उद्योग की नवीनतम स्थिति से अवगत कराया और बीएस-6 चरण 2, सीएएफई चरण 2 जैसे उत्सर्जन आधारित नियमनों के साथ-साथ दुपहिया वाहनों के लिए ओबीडी नियमनों को स्थगित करने का अनुरोध किया। श्री गडकरी ने एक साल के भीतर शत-प्रतिशत इथेनॉल और गैसोलीन चालित फ्लेक्स-ईंधन वाहनों (एफएफवी) के त्वरित निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया। ब्राजील और अमरीका में इसकी सफल प्रौद्योगिकियां उपलब्ध हैं। श्री गडकरी ने वाहन-इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने वाले ओईएम को बधाई दी और सभी निजी वाहन निर्माताओं से यात्री सुरक्षा के हित में वाहन के सभी वेरिएंट और सेगमेंट में न्यूनतम 6 एयरबैग अनिवार्य रूप से लगाने की अपील की।

फ्लेक्स ईंधन वाहन

फ्लेक्स ईंधन वाहन वे पर्यावरण के अनुकूल वाहनों की श्रेणी से संबंधित हैं क्योंकि वे दो ईंधन का उपयोग करते हैं। कई संस्करण हैं, सबसे आम हैं गैसोलीन और इथेनॉल किसी भी अनुपात में मिश्रित।

ऐसे वाहन भी हैं जो उपयोग करते हैं मिथेन और इथेनॉल। लगभग 19 मिलियन फ्लेक्स ईंधन दुनिया में फैलता है, ब्राज़ील वह देश है जिसने इस प्रकार के परिवहन को सबसे अधिक विकसित और बढ़ावा दिया है। इस देश में निर्मित लगभग 90% वाहन फ्लेक्स ईंधन हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, स्वीडन और यूरोपीय संघ के कुछ अन्य देश भी इसका उपयोग करते हैं, लेकिन बहुत कम अनुपात में क्योंकि इथेनॉल को ब्राजील में प्राप्त करना उतना आसान नहीं है, जो इस ईंधन का एक बड़ा उत्पादक है।

इस प्रकार के वाहन का लाभ यह है कि यह पारंपरिक ऑटोमोबाइल की तुलना में कम प्रदूषणकारी है क्योंकि यह विशेष रूप से उत्सर्जन से बचा जाता है CO2 और इसका संचालन सामान्य वाहनों की तरह ही है।

कारें तकनीकी संशोधनों के साथ कारखाने को छोड़ देती हैं ताकि यह ठीक से काम कर सके। कई कार कंपनियां उन्हें प्यूज़ो, रेनॉल्ट, शेवरले, होंडा, फोर्ड जैसे अन्य ब्रांडों के साथ बनाती हैं। यह फ्लेक्स फ्यूल सिस्टम मोटरसाइकिल पर भी लागू होता है।

उपभोक्ता के लिए यह एक मध्यवर्ती विकल्प है, उन लोगों के लिए आदर्श है जो अधिग्रहण नहीं कर सकते हैं इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड कार लागत के लिए लेकिन वे चाहते हैं कि उनका वाहन कम प्रदूषणकारी हो।

इसका प्रयोग वैकल्पिक इंधन निजी वाहनों में यह एक वास्तविकता है और पर्यावरण के बारे में चिंतित उपभोक्ताओं की मांग है।

इसलिए मोटर वाहन उद्योग तेजी से जनता के कुछ दबावों को स्वीकार कर रहा है, लेकिन राज्यों से भी जो ऑटोमोबाइल से उत्पन्न प्रदूषण को काफी कम करना चाहते हैं।

इसके लिए कम हानिकारक तकनीक में निवेश करने वाले वाहन निर्माता वातावरण लेकिन यह लोगों की परिवहन आवश्यकताओं की गारंटी देता है।

फ्लेक्स ईंधन वाहन प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकते हैं, इसलिए उनके विकास को बढ़ावा देने के लिए सफल होने के लिए एक निजी-राज्य की प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है।

SOURCE-PIB

 

विद्युत वितरण सेक्टर

नीति आयोग ने आज एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें ऐसे सुधारों के बारे में बताया गया है, जो देश के विद्युत वितरण सेक्टर को बदल देंगे। यह रिपोर्ट इस बिजली वितरण क्षेत्र सम्बंधी नीति-निर्माण में सुधार लाने की पहल है।

रिपोर्ट का शीर्षक टर्निंग एराऊंड दी पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर (विद्युत वितरण सेक्टर में आमूल परिवर्तन) है और इसे नीति आयोग, आरएमआई और आरएमआई इंडिया ने मिलकर तैयार किया है। उल्लेखनीय है कि आरएमआई इंडिया, भारत में स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में काम करता है और यह अमेरिका के रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट (आरएमआई) से सम्बद्ध है।

भारत में ज्यादातर बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) हर साल घाटे में रहती हैं। वित्त वर्ष 2021 में उन्हें कुल 90,000 करोड़ रुपये का घाटा होने का अनुमान है। एक के बाद एक होने वाले घाटे के कारण बिजली उत्पादकों को समय पर भुगतान नहीं कर पातीं, बेहतर तरीके से बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये जरूरी निवेश नहीं कर पातीं या विभिन्न नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल करने की तैयारी नहीं कर पातीं।

रिपोर्ट में भारतीय और दुनिया के बिजली वितरण सेक्टर में किये जाने वाले सुधार प्रयासों की समीक्षा की गई है। देश में मौजूद नीतिगत अनुभवों से प्राप्त होने वाले उत्कृष्ट व्यवहारों और सीख को इसमें शामिल किया गया है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने कहा, “इस रिपोर्ट में कई महत्त्वपूर्ण सुधारों को परखा गया, जैसे वितरण में निजी क्षेत्र की भूमिका, बिजली की खरीद, नियमों की स्थिति, नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण और बुनियादी ढांचे को उन्नत बनाना।” उन्होंने कहा कि एक मजबूत और कारगर वितरण सेक्टर जरूरी है, चाहे व्यापार सुगमता में सुधार लाने के लिये हो या जीवन को और आसान बनाने के लिये हो।

रिपोर्ट को अध्यायों में बांटा गया है, जिनके तहत ढांचागत सुधार, नियमों में सुधार, संचालन में सुधार, प्रबंधन में सुधार और नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण को रखा गया है। डॉ. वीके सारस्वत, सदस्य नीति आयोग ने कहा, “इस रिपोर्ट में नीति-निर्माताओं के लिये सुधार विकल्प की एक पूरी सूची दी गई है, जिससे वे बिजली वितरण सेक्टर को सही रास्ते पर ला सकें और उसे फायदेमंद बना सकें। नीति आयोग इन सुधारों पर अमल करने के लिये कुछ राज्यों के साथ साझेदारी करेगा।”

मौजूदा चुनौतियों से निपटने की जरूरत पर जोर देते हुये आरएमआई के प्रबंध निदेशक श्री क्ले स्ट्रेंजर ने कहा, “डिस्कॉम की परेशानियों को ध्यान में रखते हुये लंबे और मजबूत समाधान के लिये नीति में बदलाव की जरूरत है। इसके साथ संगठन, प्रबंधन और प्रौद्योगिकी सम्बंधी सुधार भी करने पड़ेंगे। भिन्न-भिन्न राज्य सुधारों के भिन्न-भिन्न रास्तों पर आगे बढ़े हैं, जिससे सीखने के लिये नीतिगत प्रयोगों का पूरा समुच्चय मौजूद है।”

SOURCE-PIB

 

ड्रैगन फ्रूट

विदेशी फलों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए, गुजरात और पश्चिम बंगाल के किसानों से प्राप्त किए गए फाइबर और खनिज से समृद्ध, ड्रैगन फ्रूट की खेप को पहली बार लंदन, यूनाइटेड किंगडम और बहरीन को निर्यात किया गया। ड्रैगन फ्रूट को भारत में कमलम भी कहा जाता है।

विदेशी फलों की खेप, जिसे लंदन को निर्यात किया गया उसे कच्छ क्षेत्र के किसानों से प्राप्त किया गया और गुजरात के भरूच में एपीडा पंजीकृत पैकहाउस द्वारा निर्यात किया गया, जबकि बहरीन को निर्यात किए गए ड्रैगन फ्रूट की खेप को पश्चिम बंगालकेपश्चिम मिदनापुर के किसानों से प्राप्त किया गया और कोलकाता में एपीडा पंजीकृत उद्यमोंद्वारा निर्यात किया गया।

इससे पहले जून 2021 में,’ड्रैगन फ्रूट’ की एक खेप कोमहाराष्ट्र के सांगली जिले के तडासर गांव के किसानों से प्राप्त किया गया था औरउसे एपीडा से मान्यता प्राप्त निर्यातक द्वारा दुबई को निर्यात किया गया था।

भारत में ‘ड्रैगन फ्रूट’ का उत्पादन 1990 के दशक की शुरुआत में किया गया था और इसे घरेलू उद्यानों के रूप में उगाया जाने लगा।’ ड्रैगन फ्रूट’ का निर्यात मूल्य अधिक होने के कारणहाल के वर्षों में देश में इसकी काफी लोकप्रियता काफी बढ़ी है और विभिन्न राज्यों के किसानों द्वारा इसे खेती के रूप में शुरू किया जाने लगा है।

ड्रैगन फ्रूट की मुख्य रूप से तीन किस्में होती है : गुलाबी परत के साथ सफेद गूदा वाला फल, गुलाबी परत के साथ लाल गूदा वाला फलऔर पीलीपरत के साथ सफेद गूदा वाला फल। हालांकि, आम तौर पर उपभोक्ताओं द्वारा लाल और सफेद गूदा वाला फलपसंद किया जाता है।

वर्तमान समय में, ड्रैगन फ्रूट की पैदावार अधिकांश रूप से कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और अंडमान निकोबार द्वीप समूह में की जाती है। पश्चिम बंगाल नया राज्य है जो इस विदेशी फल की खेती करने लगा है।

ड्रैगन फ्रूट का वैज्ञानिक नाम हाइलोसेरेसुंडाटस है। ड्रैगन फूट की पैदावार प्रमुख रूप से मलेशिया, थाईलैंड, फिलीपींस, संयुक्त राज्य अमेरिका और वियतनाम जैसे देशों में की जाती है और ये देश भारतीय ड्रैगन फ्रूट के लिए प्रमुख प्रतिस्पर्धी देश हैं।

ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए पानी की आवश्यकता कम होती है और इसे विभिन्न प्रकार की मिट्टियों में उगाया जा सकता है। फल में फाइबर, विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इस फल की विशेषता है कि यह किसी व्यक्ति में तनाव के कारण क्षतिग्रस्त हुई कोशिकाओं की मरम्मत और शरीर में आई सूजन में कमी लाने और पाचन तंत्र में सुधार करने में सहायक होता है। चूंकि इस फल में कमल के समान स्पाइक्स और पंखुड़ियां होती हैं, इसलिए इसे ‘कमलम’ भी कहा जाता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आकाशवाणी पर जुलाई, 2020 में अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में गुजरात के शुष्क क्षेत्र कच्छ में ड्रैगन फ्रूट की खेती का उल्लेख किया था। उन्होंने भारत को उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनानेहेतु फलों की खेती करने के लिए कच्छ के किसानों को बधाई भी दी थी। प्रधानमंत्री का सपना तब साकार हो गया जब ब्रिटेन और बहरीन को फल का निर्यात किया जाने लगा।

एपीडा द्वारा ड्रैगन फ्रूटके निर्यात को अन्य यूरोपीय देशों को करने की कोशिश की जा रही है जिससे किसानों को उनके उत्पाद के लिए बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके।

एपीडा द्वारा कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए, आधारभूत संरचनाओं का विकास, गुणवत्ता विकास और बाजार के विकास पर बल दिया जाता है। इसके अलावा, वाणिज्य विभाग विभिन्न योजनाओं जैसे निर्यात योजना के लिए व्यापार बुनियादी संरचना, बाजार पहुंच पहल आदि के माध्यम से निर्यात को भी समर्थन प्रदान करता है।

SOURCE-PIB

 

विश्व स्तनपान सप्ताह

1 अगस्त से 7 अगस्त, 2021 तक विश्व स्तनपान सप्ताह (World Breastfeeding Week) मनाया जा रहा है।

मुख्य बिंदु

  • विश्व स्तनपान सप्ताह एक वार्षिक उत्सव है जो हर साल 120 से अधिक देशों में आयोजित किया जाता है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, बच्चे के स्वास्थ्य और अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए स्तनपान सबसे प्रभावी तरीका है।
  • इस वर्ष, विश्व स्तनपान सप्ताह की थीम ‘Protect Breastfeeding: A Shared Responsibility’ है।

यह सप्ताह क्यों मनाया जाता है?

स्तनपान को प्रोत्साहित करने और दुनिया भर में शिशुओं के स्वास्थ्य में सुधार के लिए विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है।

पृष्ठभूमि

विश्व स्तनपान सप्ताह स्मरणोत्सव की पृष्ठभूमि 1990 के दशक की है जब WHO और  यूनिसेफ ने स्तनपान को बढ़ावा देने और समर्थन करने के लिए ‘Innocenti Declaration’ बनाया था। यूनिसेफ और WHO के लक्ष्यों को क्रियान्वित करने के लिए 1991 में ‘World Association of Breastfeeding Action’ नामक एक एसोसिएशन की स्थापना की गई थी। 1992 में, इस अभियान को बढ़ावा देने के लिए पूरे सप्ताह को समर्पित किया गया था।

स्तनपान महत्वपूर्ण क्यों है?

स्तनपान शिशुओं को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करने का सबसे अच्छा तरीका है जो वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक हैं। WHO के अनुसार, मां का दूध शिशुओं के लिए आदर्श भोजन है। यह सुरक्षित, स्वच्छ और उनके लिए पहले टीके के रूप में कार्य करता है। यह उन्हें कई सामान्य बचपन की बीमारियों से बचाता है। भारत के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, स्तनपान शिशु की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने में मदद करता है, शिशु मृत्यु दर को कम करता है, श्वसन पथ के संक्रमण, एलर्जी रोग, मधुमेह और बचपन के ल्यूकेमिया जैसे संक्रमणों के विकास के जोखिम को कम करता है।

SOURCE-GK TODAY

 

बेरोजगारी दर

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (National Statistical Office – NSO) ने हाल ही में आठवां आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (Periodic Labour Force Survey) प्रकाशित किया है। इस सर्वे के मुताबिक जुलाई-सितंबर 2020 की अवधि में भारत में बेरोजगारी दर बढ़कर 13.3% हो गई है।

मुख्य निष्कर्ष

  • इस सर्वेक्षण के अनुसार, अप्रैल-जून 2020 में बेरोजगारी दर 9% थी। बेरोजगारी दर को श्रम बल में बेरोजगार व्यक्तियों के प्रतिशत के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • सितंबर 2020 में, सभी उम्र के लिए श्रम बल की भागीदारी दर 37% थी।
  • अप्रैल-जून 2020 में श्रम बल की भागीदारी दर 9% थी।

श्रम बल (Labour Force)

यह जनसंख्या के उस हिस्से को संदर्भित करता है जो वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन के लिए आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए श्रम की आपूर्ति करता है। इसमें नौकरीपेशा और बेरोजगार दोनों तरह के लोग शामिल हैं।

आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (Periodic Labour Force Survey – PLFS)

NSO द्वारा अप्रैल, 2017 में आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण शुरू किया गया था। PLFS के आधार पर, तिमाही बुलेटिन श्रम बल संकेतकों जैसे बेरोज़गारी दर, श्रमिक जनसंख्या अनुपात, श्रम बल भागीदारी दर, श्रमिकों के वितरण का अनुमान देकर प्रदान किया जाता है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग

भारत का राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग एक स्वायत्त संस्था है जिसकी स्थापना २००६ में की गयी थी। २००५ में भारत सरकार ने सी रंगराजन की अध्यक्षता वाली आर्थिक सलाहकार समिति की संस्तुति के आधार पर इसकी स्थापना का निर्णय लिया।

आयोग में एक अंशकालिक अध्यक्ष, चार अंश कालिक सदस्य तथा एक पदेन सदस्य हैं। भारत के मुख्य सांख्यिकीविद् का पद विशेष रूप से राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अध्यक्ष के तौर पर सृजित किया गया है। राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के लिए विशेष रूप से सृजित भारत के मुख्य सांख्यिकीविद् का पद आयोग के सचिव हैं। वे भारत सरकार में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव भी हैं।

डा.सी. रंगराजन की अध्यक्षता में जनवरी,2000 में सरकार द्वारा गठित आयोग द्वारा देश में सांख्यिकीय प्रणाली तथा सरकारी सांख्यिकी के समस्त कार्यक्षेत्र की समीक्षा की गई। रंगराजन आयोग ने अगस्त, 2001 में सरकार को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस आयोग की प्रमुख सिफारिशों में से एक सिफारिश देश के सभी कोर सांख्यिकीय कार्यकलापों हेतु एक नोडल तथा शक्ति प्रदत्त निकाय के रूप में सांख्यिकीय संबंधी एक स्थायी राष्ट्रीय आयोग स्थापित करने के बारे में थी ताकि सांख्यिकीय प्राथमिकताओं तथा मानकों का विकास, प्रबोधन एवं प्रवर्तन किया जा सके और सांख्यिकी से जुड़े विभिन्न अभिकरणों के बीच सांख्यिकीय समन्वय सुनिश्चित हो सके। रंगराजन आयोग ने यह भी सिफारिश की थी कि शुरुआती तौर पर आयोग का गठन सरकारी आदेश के माध्यम से किया जाए।

रंगराजन आयोग के सिफारिशों के अनुसरण में, 1 जून,2005 को, भारत सरकार ने राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग स्थापित करने का निर्णय लिया। आयोग में एक अंशकालिक अध्यक्ष, चार अंश कालिक सदस्य तथा एक पदेन सदस्य हैं। भारत के मुख्य सांख्यिकीविद् का पद विशेष रूप से राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अध्यक्ष के तौर पर सृजित किया गया है। राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के लिए विशेष रूप से सृजित भारत के मुख्य सांख्यिकीविद् का पद आयोग के सचिव हैं। वे भारत सरकार में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव भी हैं।

सरकार ने सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation- MoSPI) के तहत राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (National Sample Survey Office- NSSO) को केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (Central Statistics Office- CSO) के साथ विलय करने का निर्णय लिया।

प्रमुख बिंदु

  • दिनांक 23 मई, 2019 के आदेशानुसार, NSSO और CSO के विलय के माध्यम से राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (National Statistical Office- NSO) के गठन को मंज़ूरी दे दी गई है।
  • आदेश में कहा गया है कि प्रस्तावित राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की अध्यक्षता सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन के सचिव द्वारा की जाएगी किंतु इस आदेश में राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (National Statistical Commission- NSC) का कोई उल्लेख नहीं है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग देश में किये जाने वाले सभी सांख्यिकीय कार्यों की देखरेख करने वाला निकाय रहा है।
  • यह आदेश भारत के मुख्य सांख्यिकीविद् के साथ सचिव (सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन) की बराबरी स्थापित नहीं करता है, जैसा कि 1 जून, 2005 को MoSPI द्वारा अधिसूचित पहले के प्रस्ताव में किया गया था।
  • राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (NSC) सांख्यिकीय कार्य के सभी तकनीकी पहलुओं, मसलन किस सर्वेक्षण को कब, कहाँ और कैसे किया जाना चाहिये, की देखरेख करता है।
  • मंत्रालय के वर्तमान नोडल कार्यों को सुव्यवस्थित और सुदृढ़ करने तथा मंत्रालय के आतंरिक प्रशासनिक कार्यों को एकीकृत कर अधिक तालमेल बिठाने हेतु भारतीय आधिकारिक सांख्यिकी प्रणाली के पुनर्गठन का आदेश जारी किया गया है।

SOURCE-THE HINDU

 

पिंगली वेंकैया

पिंगली वेंकैया की जयंती के अवसर पर उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और केंद्रीय मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। वर्ष 2021 में पिंगली वेंकय्या की 145वीं वर्षगांठ है।

मुख्य बिंदु

  • पिंगली वेंकैया भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के डिजाइन के वास्तुकार थे।
  • भारत का वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज पिंगली वेंकैया के डिजाइन से प्रेरित है।
  • इस प्रकार, उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज के माध्यम से भारत को विशिष्ट पहचान दी।

राष्ट्रीय ध्वज का महत्व

  • किसी भी देश की पहचान उसके अद्वितीय ध्वज, प्रतीक और गान से होती है।
  • झंडा एक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है।
  • भारत का राष्ट्रीय ध्वज इसके मूल्यों और विचारों का प्रतिनिधित्व करता है।
  • शीर्ष पर केसरिया रंग शक्ति और साहस का प्रतीक है, बीच में सफेद रंग शांति और सच्चाई का प्रतिनिधित्व करता है जबकि नीचे हरा रंग उर्वरता, विकास और भूमि की शुभता का प्रतीक है।
  • अशोक चक्र की 24 तीलियाँ इस बात का प्रतीक हैं कि गति में ही जीवन है।

पिंगली वेंकैया कौन हैं?

वह एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे जिनका जन्म 1876 में हुआ था। उनका जन्म और पालन-पोषण आंध्र प्रदेश में एक तेलुगु ब्राह्मण परिवार में हुआ था। हनुमंतरायडू उनके पिता थे। उन्होंने मद्रास में अपनी हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की और स्नातक स्तर की पढ़ाई के लिए कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय चले गए। वे एक गांधीवादी, कृषक, शिक्षाविद, भाषाविद्, भूविज्ञानी और लेखक थे।

पिंगली के झंडे का डिजाइन

उन्होंने स्वराज ध्वज नामक एक ध्वज डिजाइन किया। इसमें भारत के दो प्रमुख समुदायों- हिंदू और मुस्लिम के प्रतीक के लिए लाल और हरे रंग की पट्टियां शामिल थीं। उनके डिजाइन ने भारत और उसके लोगों को एक पहचान प्रदान की थी। ध्वज ने उस समय लोगों में स्वतंत्रता की भावना को एकजुट करने में मदद की। उन्होंने महात्मा गांधी द्वारा सुझाए गए चरखा डिजाइन के साथ एक सफेद रंग की पट्टी भी जोड़ी। सफेद रंग शांति और भारत में रहने वाले बाकी समुदायों का प्रतिनिधित्व करता है जबकि चरखा राष्ट्र की प्रगति का प्रतीक है।

SOURCE-GK TODAY

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