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Current Affair 5 June 2021

5 June Current Affairs

सीईओ वाटर मैंडेट

देश की सबसे बड़ी विद्युत कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड ने प्रतिष्ठित यूएन ग्लोबल कॉम्पेक्ट के सीईओ वाटर मैंडेट पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस तरह एनटीपीसी कुशल जल प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने वाली कंपनियों की प्रतिष्ठित लीग में शामिल हो गया है। एनटीपीसी ने जल प्रबंधन पर प्रभावी तौर पर ध्यान देते हुए अपने संयंत्रों में पहले ही कई उपाय किए हैं। अब वाटरमैंडेट पर हस्ताक्षर करने के बाद एनटीपीसी विद्युत उत्पादन की अपनी मुख्य व्यावसायिक गतिविधि को अंजाम देते हुए जल संरक्षण और प्रबंधन के लिए 3आर (रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकिल) को और अधिक बढ़ावा देगा।

सीईओ वाटर मैंडेट एक संयुक्त राष्ट्र ग्लोबलकॉम्पैक्ट पहल है जो पानी, स्वच्छता और सतत विकास लक्ष्यों पर बिजनेस लीडर्स को एकजुट करती है और पानी और स्वच्छता एजेंडा को बेहतर बनाने के लिए कंपनियों की प्रतिबद्धता और प्रयासों को प्रदर्शित करती है।सीईओ वाटर मैंडेट को जल संबंधी व्यापक रणनीतियों और नीतियों के विकास, कार्यान्वयन और प्रकटीकरण में कंपनियों की सहायता के लिए डिजाइन किया गया है। यह कंपनियों को समान विचारधारा वाले व्यवसायों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, सार्वजनिक प्राधिकरणों, नागरिक समाज संगठनों और अन्य प्रमुख हितधारकों के साथ साझेदारी करने के लिए एक प्लेटफार्म भी प्रदान करता है।

दुनिया के कई हिस्सों में पानी और स्वच्छता दोनों क्षेत्रों में बढ़ते संकट के कारण सभी उद्योगों में कंपनियों के लिए अनेक नए जोखिम सामने आए हैं और कुछ मामलों में अनेक नए अवसर भी उपलब्ध हुए हैं। एनटीपीसी जल नीति को लागू करने के माध्यम से जल स्थिरता के मुद्दों को सक्रिय रूप से संबोधित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो जल प्रबंधन रणनीतियों, प्रणालियों, प्रक्रियाओं, प्रथाओं और अनुसंधान पहलों की स्थापना के लिए एक निर्देश के रूप में काम करेगा।

SOURCE-PIB

 

हरित मानकों के साथ समुद्री अभियान

नौसेना एक स्व-चालित और पर्यावरण की दृष्टि से जिम्मेदार सैन्य बल के रूप में हमेशा पर्यावरण संरक्षण और हरित शुरुआत करने के प्रति प्रतिबद्ध रही है। समुद्र का संरक्षक होने के नाते नौसेना के पास अनेक जहाज, पनडुब्बियां तथा विमान हैं जिनकी ऊर्जा की तीव्रता अधिक है। जीवाश्म ऊर्जा संसाधनों के घटने के साथ ही नौसेना द्वारा चलाए जा रहे प्रत्येक अभियान एवं प्रक्रिया में ऊर्जा दक्षता में वृद्धि सुनिश्चित करने की आवश्यकता उभरी है। इसी दिशा में नौसेना ने ‘हरित मानकों के साथ समुद्री अभियान’ के उद्देश्य से तालमेल बिठाने के लिए एक व्यापक ‘भारतीय नौसेना पर्यावरण संरक्षण रोडमैप’ (आईएनईसीआर) अपनाया है।

भारतीय नौसेना ने जुलाई 2020 में भारतीय नौसेना अकादमी (आईएनए), एझिमाला में 3 मेगावॉट की क्षमता वाले सबसे बड़े सौर संयंत्र में से एक को शुरू किया। जुलाई 2020 में नौसेना स्टेशन करंजा, मुंबई में एक और 2 मेगावॉट का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया। इसके साथ ही नौसेना स्टेशनों पर कुल स्थापित सौर संयंत्र क्षमता 11 मेगावाट है। ये संयंत्र कंप्यूटरीकृत निगरानी और नियंत्रण के साथ अत्याधुनिक सिंगल एक्सिस सन ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हुए ग्रिड से कनेक्टेड हैं।

पिछले वर्ष के दौरान निरंतर वनीकरण की दिशा में 30,000 पौधे लगाए गए हैं ताकि प्रतिवर्ष अनुमानित 630 टन कार्बन डाईऑक्साइड को कम किया जा सके। इसके अलावा, विश्व पर्यावरण दिवस 2021-पारिस्थितिकी तंत्र बहाली के विषय की धारणा के अनुरूप मियावाकी वनों, सदाबहार वनों की बहाली समेत तटीय वनों जैसे शहरी वनों की स्थापना की व्यवहार्यता पर जोर दिया जा रहा है।

दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि द्वारा ‘विश्व नदी दिवस’ के अवसर पर वेंडुरुथी चैनल के साथ केरल वन विभाग के सहयोग से एक मैंग्रूव पौधरोपण अभियान चलाया गया था, जिसमें लगभग 200 पौधे लगाए गए थे। आईएनएस वेंडुरुथी के साथ दक्षिणी नौसेना कमान मुख्यालय हमेशा पर्यावरण संरक्षण एवं ऊर्जा संरक्षण में लगा हुआ है जिसने इस स्टेशन को सरकारी (रक्षा) क्षेत्र में वर्ष 2020 के लिए प्रतिष्ठित ‘गोल्डन पीकॉक पर्यावरण प्रबंधन पुरस्कार (जीपीईएमए)’ से सम्मानित किया।

‘स्वच्छता सेवा’ अभियान के तहत नौसेना स्टेशनों ने सफाई अभियान चलाया, तूफान/वर्षा जल नालों को साफ करना, हेजेज की छंटाई और बगीचों का रखरखाव किया। इसके अलावा ‘अंतर्राष्ट्रीय तटीय सफाई दिवस’ समारोह के हिस्से के रूप में विभिन्न नौसेना इकाइयों ने कोविड-19 प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करते हुए तटीय क्लीन-अपड्राइव चलाया।

लोगों तथा सामग्री के परिवहन के लिए बैटरी संचालित ई-वाहनों के प्रगतिशील इस्तेमाल से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता में कमी आई है जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी हुई है। इसके अलावा जीवाश्म ईंधन आधारित वाहनों पर निर्भरता को कम करने के लिए, नौसेना की इकाइयां नियमित रूप से ‘नोव्हीकलडेज’ का पालन करते हैं।

नौसेना बंदरगाहों पर तेल रिसाव का मुकाबला करने की दिशा में पर्यावरण के अनुकूल समुद्री जैव-उपचारात्मक एजेंटों को एनएमआरएल के माध्यम से स्वदेश में विकसित किया गया है। यह अत्याधुनिक तकनीक समुद्री क्षेत्र में अनूठी है। उत्पाद में सूक्ष्म जीवों और उनके विकास को बढ़ावा देने वाली सामग्री का संयोजन होता है, जो विभिन्न प्रकार के तेल जैसे डीजल, चिकनाई, गंदे तेल आदि को खाते हैं, इस प्रकार समुद्री जल को किसी भी तेल से होने वाले प्रदूषण और इसके परिणामस्वरूप समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को होने वाले नुकसान को कम करते हैं। इस तकनीक को जून 2020 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया है।

SOURCE-PIB

 

लिनेटहोल्म द्वीप

डेनमार्क की संसद ने एक कृत्रिम द्वीप की योजना को मंजूरी दे दी है जिसमें 35,000 लोग रहेंगे और यह कोपेनहेगन के बंदरगाह को समुद्र के बढ़ते स्तर से बचाने में मदद करेगा।

लिनेटहोल्म द्वीप (Lynette Holm Island)

इस विशाल द्वीप का क्षेत्रफल 1 वर्ग मील होगा और यह रिंग रोड, सुरंगों और मेट्रो लाइन के माध्यम से मुख्य भूमि से जुड़ा होगा।  इसकी परिधि में एक बांध प्रणाली का निर्माण भी शामिल है। यह बांध बंदरगाह को बढ़ते समुद्र के स्तर और तूफान से बचाने में मदद करेगा।

निर्माण में समस्या

इस द्वीप के निर्माण को पर्यावरणविदों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है और इसका पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। द्वीप के निर्माण से बड़ी संख्या में वाहनों के माध्यम से सड़क मार्ग से सामग्री का परिवहन होगा। निर्माण शुरू होने के बाद कोपेनहेगन के माध्यम से एक दिन में लगभग 350 लॉरी यात्रा की आवश्यकता होगी। इस प्रकार, पर्यावरणविद् समुद्र में तलछट की हलचल पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं। इसके बाद, लिनेटहोल्म के विकास के खिलाफ पर्यावरण समूहों द्वारा यूरोपीय न्यायालय के समक्ष एक मामला दायर किया गया है।

कोपेनहेगन (Copenhagen)

कोपेनहेगन डेनमार्क की राजधानी होने के साथ-साथ सबसे अधिक आबादी वाला शहर भी है। यह शहर ज़ीलैंड द्वीप के पूर्वी तट पर स्थित है। इस शहर का एक और हिस्सा अमेजर पर स्थित है जो स्वीडन में माल्मो से ओरेसंड जलडमरूमध्य से अलग होता है। ओरेसुंड ब्रिज दोनों शहरों को रेल और सड़क मार्ग से जोड़ता है।

SOURCE-GK TODAY

 

इथेनॉल मिश्रण

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विश्व पर्यावरण दिवस समारोह को संबोधित किया। समारोह का आयोजन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। प्रधानमंत्री ने समारोह के दौरान पुणे के एक किसान के साथ बातचीत भी की जिन्होंने जैविक खेती और कृषि में जैव-ईंधन के उपयोग के बारे में अपने अनुभव को साझा किया।

प्रधानमंत्री ने “रिपोर्ट ऑफ द एक्सपर्ट कमेटी ऑन रोडमैप फॉरइथेनॉल ब्लेंडिंग इन इंडिया 2020-2025” जारी की। उन्होंने पुणे में इथेनॉल के उत्पादन और पूरे देश में वितरण के लिए महत्वाकांक्षी ई-100 पायलट परियोजना का शुभारंभ किया। इस वर्ष के समारोह का विषय ‘बेहतर पर्यावरण के लिए जैव-ईंधन को प्रोत्साहन’ था। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी, श्री नरेंद्र सिंह तोमर, श्री प्रकाश जावडेकर,श्री पीयूष गोयल तथा श्री धर्मेन्द्र प्रधान उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर इथेनॉल क्षेत्र के विकास के लिए विस्तृत रोडमैप जारी करके भारत ने एक और छलांग लगाई है। उन्होंने कहा कि इथेनॉल 21वीं सदी के भारत की बड़ी प्राथमिकता बन गई है। उन्होंने कहा कि इथेनॉल पर फोकस करने का बेहतर प्रभाव पयार्वरण के साथ-साथ किसानों के जीवन पर भी हो रहा है।  उन्होंने कहा कि सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य प्राप्त करने का समय कम करके 2025 करने का संकल्प लिया है। इससे पहले इस लक्ष्य की प्राप्ति का समय 2030 तय किया गया था जिसे 5 वर्ष कम कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि 2014 तक पेट्रोल में औसत रूप में केवल 1.5 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता था जो अब बढ़कर 8.5 प्रतिशत हो गया है। 2013-14 में देश में लगभग 38 करोड़ लीटर इथेनॉल की खरीद हुई थी जो अब बढ़कर 320 करोड़ लीटर हो गई है। उन्होंने कहा कि इथेनॉल खरीद में आठ गुना वृद्धि से देश के गन्ना उत्पादक किसानों को लाभ हुआ है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का भारत आधुनिक सोच और 21वीं सदी की आधुनिक नीतियों से ही ऊर्जा प्राप्त कर सकता है। सरकार इसी सोच के साथ लगातार हर क्षेत्र में नीतिगत फैसले ले रही है। उन्होंने कहा कि आज देश में इथेनॉल के उत्पादन और खरीद के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। इथेनॉल तैयार करने वाली अधिकतर इकाइयां उन 4-5 राज्यों में केंद्रित हैं जहां गन्ने का अधिक उत्पादन होता है लेकिन अब खाद्यान्न आधारित डिस्टिलरी स्थापित की जा रही हैं ताकि पूरे देश में इसका विस्तार हो। देश में आधुनिक टेक्नोलॉजी आधारित संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं ताकि कृषि अपशिष्ट से इथेनॉल बनाया जा सके।

इथेनॉल मिश्रित कार्यक्रम (Ethanol Blended Programme)

इसे 2003 में लॉन्च किया गया था। ओएमसी को कार्यक्रम के तहत निम्नलिखित प्राथमिकता क्रम पर इथेनॉल प्राप्त करने की सलाह दी जाती है

गन्ना

बी-हैवी मोलासेस

सी-हैवी मोलासेस

क्षतिग्रस्त अनाज

इथेनॉल

इथेनॉल का उत्पादन मक्का, गन्ना, गेहूँ आदि से किया जा सकता है। भारत में इथेनॉल मुख्य रूप से किण्वन प्रक्रिया द्वारा निर्मित होता है।

इथेनॉल में ऑक्सीजन होती है, यह ईंधन के आसान और पूर्ण दहन की अनुमति देती है।

इथेनॉल को एक नवीकरणीय ईंधन के रूप में माना जाता है क्योंकि इथेनॉल का उत्पादन पौधों से होता है जो सूर्य की शक्ति का उपयोग करते हैं।

एक बार मिश्रित इथेनॉल को पेट्रोल से अलग नहीं किया जा सकता है।

अलग-अलग मिश्रणों को बनाने के लिए इथेनॉल को गैसोलीन के साथ मिलाया जा सकता है।

हालांकि, इथेनॉल का उपयोग करने में प्रमुख नुकसान यह है कि इथेनॉल वातावरण से नमी को अवशोषित कर सकता है क्योंकि यह वाहन इंजन के साथ समस्या पैदा कर सकता है।

SOURCE-PIB

 

YounTab योजना

लद्दाख के उपराज्यपाल आर.के. माथुर ने छात्रों के लिए यूनटैब योजना (YounTab Scheme) लांच की। इस योजना के तहत लेह में करीब 12,300 टैबलेट बांटे गए।

यूनटैब योजना (YounTab Scheme)

यह स्कूल शिक्षा विभाग की एक पहल है। इसे सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के तकनीकी सहयोग से लॉन्च किया गया है। इस योजना के तहत सरकारी स्कूलों में पाठ्य पुस्तकों, वीडियो लेक्चर और ऑनलाइन क्लास एप्लीकेशन से प्री-लोडेड 12,300 टेबलेट कक्षा 6 से 12 के छात्रों के बीच वितरित किये जायेंगे। इस योजना को शिक्षा प्रणाली में दीर्घकालीन प्रौद्योगिकी संचार के प्रयास के रूप में शुरू किया गया है।

लद्दाख (Ladakh)

जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम पारित होने के बाद 31 अक्टूबर, 2019 को लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश के रूप में स्थापित किया गया था। यह पूर्व में तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र, दक्षिण में हिमाचल प्रदेश, पश्चिम में जम्मू और कश्मीर और उत्तर में काराकोरम दर्रे के शिनजियांग से घिरा है। यह काराकोरम रेंज में सियाचिन ग्लेशियर से उत्तर से दक्षिण तक महान हिमालय तक फैला हुआ है। इसका पूर्वी भाग निर्जन अक्साई चिन मैदानों से युक्त है, जो 1962 से चीनी नियंत्रण में है। लद्दाख का सबसे बड़ा शहर लेह और उसके बाद कारगिल है। लेह जिले में श्योक, सिंधु और नुब्रा नदी घाटियां शामिल हैं। जबकि कारगिल जिले में द्रास, सुरू और ज़ांस्कर नदी घाटियाँ शामिल हैं। यह  भारत में दूसरा सबसे कम आबादी वाला केंद्र शासित प्रदेश है।

 

ज्वालामुखी माउंटमेरापी

Geological Disaster Technology Research and Development Centre के अनुसार इंडोनेशिया के मेरापी ज्वालामुखी में चार बार विस्फोट हुआ और लावा क्रेटर से 1,500 मीटर तक फैल गया है।

मेरापी को इंडोनेशिया का सबसे सक्रिय ज्वालामुखी माना जाता है। यह चार बार फटा और 43 हिमस्खलन भूकंपों (avalanche earthquakes) का अनुभव किया। पहाड़ की चोटी से 50 मीटर की ऊँचाई पर घने सफेद धुएँ के बादल छाए हुए हैं। 2,968 मीटर ऊंचा यह ज्वालामुखी प्राचीन शहर योग्याकार्टा (Yogyakarta) के निकट घनी आबादी वाले जावा द्वीप पर है।

माउंटमेरापी (Mount Merapi)

माउंटमेरापी पर्वत इंडोनेशिया में स्थित है।

यह एक सक्रिय स्ट्रैटोवोल्केनो है जो इंडोनेशिया के मध्य जावा और याग्याकार्टा प्रांतों के बीच की सीमा पर स्थित है।

इसे इंडोनेशिया में सबसे सक्रिय ज्वालामुखी माना जाता है और इसमें 1548 के बाद से लगातार विस्फोट हो रहा है।

यह दक्षिणी जावा में ज्वालामुखियों का सबसे छोटा समूह है जो इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट और सुंडा प्लेट के एक उप-क्षेत्र जोन में स्थित है।

मध्य जावा (Central Java)

इंडोनेशिया का यह प्रांत जावा द्वीप के मध्य में स्थित है। इसकी प्रशासनिक राजधानी सेमारंग (Semarang) है। यह पश्चिम जावा, हिंद महासागर, योग्याकार्ता विशेष क्षेत्र, पूर्वी जावा और जावा सागर से घिरा हुआ है। यह जावा के साथ-साथ इंडोनेशिया में तीसरा सबसे अधिक आबादी वाला प्रांत है।

योग्यकार्ता विशेष क्षेत्र (Special Region of Yogyakarta)

यह दक्षिण जावा में इंडोनेशिया का एक प्रांतीय स्तर का स्वायत्त क्षेत्र (autonomous region) है। यह हिंद महासागर से घिरा है और मध्य जावा के साथ सीमा साझा करता है। यह प्रांत योग्याकार्ता सल्तनत (Yogyakarta Sultanate) द्वारा शासित है। इस प्रकार, यह इंडोनेशिया की सरकार के भीतर आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त राजतंत्र है। यह एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल और सांस्कृतिक केंद्र है।

इंडोनेशिया (Indonesia)

इंडोनेशिया, 270 मिलियन लोगों का द्वीपसमूह, भारतीय और प्रशांत महासागरों के बीच दक्षिण पूर्व एशिया और ओशिनिया में स्थित है। इसमें जावा, सुमात्रा, जावा, सुलावेसी, बोर्नियो (कालीमंतन) और न्यू गिनी (पापुआ) सहित सत्रह हजार से अधिक द्वीप शामिल हैं।  यह देश दुनिया का चौथा सबसे अधिक आबादी वाला देश भी है। यह सबसे अधिक आबादी वाला मुस्लिम बहुल देश भी है। इंडोनेशिया का सबसे अधिक आबादी वाला द्वीप जावा है। यह देश भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधि से ग्रस्त है क्योंकि यह “पैसिफिक रिंग ऑफ फायर” के साथ स्थित है।

पैसिफिक रिंग ऑफ फायर (Pacific Ring of Fire)

यह क्षेत्र प्रशांत महासागर के रिम के आसपास है जो ज्वालामुखी विस्फोटों और भूकंपों से ग्रस्त है। यह एक घोड़े की नाल के आकार की बेल्ट है जिसकी लंबाई लगभग 40,000 किमी है। इसमें पश्चिमी प्रशांत महासागर क्षेत्रों के अलावा दक्षिण अमेरिका, उत्तरी अमेरिका और कामचटका इत्यादि शामिल है।

SOURCE-GK TODAY

 

नॉलेज इकोनॉमी मिशन

केरल सरकार ने ज्ञान कार्यकर्ताओं का समर्थन करके राज्य में नौकरी की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए ‘नॉलेज इकोनॉमी मिशन’ (Knowledge Economy Mission) लांच किया है।

मुख्य बिंदु

4 जून को राज्य के बजट में इस पहल की घोषणा की गई। इसका नेतृत्व केरल विकास और नवाचार सामरिक परिषद (Kerala Development and Innovation Strategic Council – K-DISC) द्वारा किया जा रहा था और वे 15 जुलाई से पहले एक व्यापक परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।

नॉलेज इकोनॉमी मिशन (Knowledge Economy Mission)

शिक्षित लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने और ‘ज्ञान कार्यकर्ताओं’ (knowledge workers) का समर्थन करने के लिए चल रहे प्रयासों को एक कार्यक्रम के तहत लाने के लिए यह परियोजना शुरू की जाएगी। अपने घरों के करीब काम करने वाले और नियोक्ताओं के साथ इंटरैक्ट करने वाले ज्ञान श्रमिकों के लिए बुनियादी सुविधाएं और सामाजिक सुरक्षा प्रणाली प्रदान करने की योजना बनाई जाएगी। कार्यान्वयन और वित्त पोषण उद्देश्यों के लिए, ‘नॉलेज इकोनॉमीफंड’ (Knowledge Economy Fund) बनाया जाएगा। कौशल को बढ़ावा देने और उच्च शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने और तकनीकी परिवर्तन के लिए, Knowledge Economy Fund को ₹ 200 करोड़ से बढ़ाकर ₹ 300 करोड़ कर दिया गया है।

Kerala Digital Workforce Management System

Kerala Digital Workforce Management System की स्थापना एपीजे अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (APJ Abdul Kalam Technological University) द्वारा की गयी थी। इसने अब तक 27,000 से अधिक नौकरी के इच्छुक लोगों को पंजीकृत किया है। यह प्रणाली कुदुम्बश्री मिशन (Kudumbasree Mission) का एक उप-मिशन है। यह K-DISC और Additional Skill Acquisition Programme (ASAP) के कार्यकर्ताओं और अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान करता है।

 

विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन 2021

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये ’विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन 2021’ का उद्घाटन किया। इस सम्‍मेलन का मुख्य विषय है – सबके लिए सुरक्षित और संरक्षित पर्यावरण और हमारा साझा भविष्य।

विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन (World Sustainable Development Summit)

विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन The Energy and Resources Institute (TERI) द्वारा आयोजित वार्षिक कार्यक्रम है। यह शिखर सम्मेलन राजनीतिक नेताओं, नोबेल पुरस्कार विजेताओं, द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संस्थानों के निर्णय निर्माताओं, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं और मीडिया कर्मियों को सतत विकास से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक साथ लाता है।

शिखर सम्मेलन का उद्देश्य

विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन का उद्देश्य एक मंच पर विभिन्न हितधारकों को इकट्ठा करके वैश्विक समुदाय के लाभ के लिए दीर्घकालिक समाधान प्रदान करना है।

विश्व पर्यावरण दिवस 2021

विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को मनाया जाता है। यह पर्यावरण पर दुनिया भर में जागरूकता और कार्रवाई को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त राष्ट्र का एक प्रमुख दिन है। इस वर्ष, पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के साथ साझेदारी में विश्व पर्यावरण दिवस की मेजबानी कर रहा है।

SOURCE-https://mea.gov.in/

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