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Current Affair 7 August 2021

Current Affairs – 7 August, 2021

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस

  • 7 अगस्त, 2021 को देशभर में सातवां ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ (National Handloom Day) मनाया गया।
  • उद्देश्य- हथकरघा उद्योग के महत्व एवं आमतौर पर देश के सामाजिक, आर्थिक विकास में इसके योगदान के बारे में जागरूकता फैलाना।
  • गौरतलब है कि 7 अगस्त, 1905 को कोलकाता के टाउनहाल में एक जनसभा में स्वदेशी आंदोलन की औपचारिक शुरुआत की गई थी।
  • इस आंदोलन की स्मृति में केंद्र सरकार द्वारा 29 जुलाई, 2015 को प्रति वर्ष 7 अगस्त को इस दिवस को मनाने की घोषणा की गई।
  • इस वर्ष इस दिवस को मनाने के लिए वस्त्र मंत्रालय कन्वेंसन सेंटर द अशोक, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली में एक समारोह का आयोजन किया गया।
  • इस दिवस के अवसर पर कांचीपुरम, तमिलनाडु में डिजाइन संसाधन केंद्र तथा रायगढ़, छत्तीसगढ़ में बुनकर सेवा केंद्र के भवन का उद्घाटन किया गया।

घोषणाएँ :

हथकरघा, पावरलूम, ऊन, जूट और रेशम बोर्डों की समाप्ति :

  • वस्त्र मंत्रालय ने हथकरघा, पावरलूम, ऊन, जूट और रेशम बोर्ड को समाप्त करने की घोषणा की।
  • न्यूनतम सरकार एवं अधिकतम शासन प्राप्त करने के दृष्टिकोण से बोर्ड को हटा दिया गया है।
  • इस कदम का उद्देश्य एक कम सरकारी हस्तक्षेप वाले तंत्र एवं सरकारी निकायों के व्यवस्थित सुव्यवस्थीकरण के लिये है।
  • ये बोर्ड राजनीतिक संरक्षण के स्थान बन गए थे और बुनकरों को इनसे कोई फायदा नहीं था।

न्यू हैंडलूम पोर्टल : बुनकर समुदाय में गर्व की भावना बढ़ाने के लिये सोशल मीडिया अभियान के साथ-साथ राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर एक हैंडलूम पोर्टल की शुरुआत की गई।

आभासी प्रदर्शनी :

  • हथकरघा निर्यात संवर्द्धन परिषद ने एक आभासी प्रदर्शनी का भी आयोजन किया।
  • यह प्रदर्शनी देश के विभिन्न क्षेत्रों से 150 से अधिक प्रतिभागियों को विशेष डिज़ाइन एवं कौशल के साथ अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने हेतु जोड़ने के लिये थी।
  • प्रदर्शनी में मनोहर एवं सुंदर हथकरघा उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा, जिन्हें खरीददारों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से हथकरघा मालिकों से खरीदा जा सकेगा।

मीट द मेकर्स अभियान : फैशन डिज़ाइन काउंसिल ऑफ़ इंडिया (FDCI), एक गैर-लाभकारी संगठन है जो भारत में फैशन के व्यवसाय को आगे बढ़ाने और इसके सतत् विकास को सुनिश्चित करने के लिये काम करता है, मीट द मेकर्स सहित कई अभियान शुरू किये जो हथकरघा निर्माताओं को बढ़ावा देंगे।

COVID-19 सहायता कोष :

  • एफडीसीआई द्वारा देश भर में आगामी डिज़ाइनरों का समर्थन करने के लिये एक नया कोष भी शुरू किया गया। एफडीसीआई बुनकरों से माल खरीदेगा, जिसका इस्तेमाल उच्च माँग वाले कॉटन मास्क या परिधान बनाने के लिये किया जाएगा।
  • इसके पीछे यह दृष्टिकोण है कि उनके बिना बिके हथकरघा वस्त्र भंडारों को खरीदा जाए, जो बुनकर समुदाय को बेहतर आजीविका कमाने में मदद करेगा।

आत्मनिर्भर भारत : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी से हस्तशिल्प के प्रति मुखर होने और एक आत्मनिर्भर भारत की दिशा में प्रयासों को मज़बूत करने का भी आग्रह किया। केंद्रीय वस्त्र मंत्री स्मृति ईरानी ने आमजन से हथकरघा उत्पाद खरीदने और इस भारतीय विरासत का कीर्तिगान करने का आग्रह किया।

चुनौतियाँ

नए संस्थान की स्थापना :

  • हथकरघा, पावरलूम, ऊन, जूट और रेशम बोर्ड को समाप्त किया जा सकता है, लेकिन इनकी समाप्ति को एक बेहतर संस्थान बनाने की ओर ले जाना चाहिये, न कि संबंधित बुनकरों की आवाज़ को दबाने का कार्य करना चाहिये।
  • इन्हें हथकरघा-बुनकर श्रृंखला से स्पिनरों-बुनकरों, खरीदारों, डिजाइनरों, निज़ी एवं सार्वजनिक शिल्प संस्थानों, ई-मार्केट प्लेटफॉर्म प्रदाताओं और विशेषज्ञों सहित वास्तव में अनुभवी, गतिशील, स्वायत्त तथा समावेशी निकाय द्वारा प्रतिस्थापित किया जाना चाहिये।

अंतर्संबंध :

  • घोषणा में पर्यटन जैसे अन्य मंत्रालयों के साथ योजनाओं का एकीकरण भी शामिल है। इसके अतिरिक्त, अन्य मंत्रालयों/विभागों जैसे संस्कृति, सामाजिक न्याय, महिला एवं बाल कल्याण, अल्पसंख्यक मामलों को भी शामिल किया जाना चाहिये।
  • ये सभी मंत्रालय वस्त्र और शिल्प से संबंधित होते हैं और अक्सर, इनके कार्यों का परिणाम वस्त्र मंत्रालय के साथ प्रभावी रूप से एकीकृत करने के बजाय प्रतिलिपिकरण और अतिव्यापीकरण के रूप में होता है।

सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना :

  • सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) निस्संदेह एक नई किरण है, लेकिन अगर बुनकरों को एक विशेष हथकरघा पोर्टल से ज्ञान प्राप्त करना है, तो उन्हें कनेक्टिविटी, कंप्यूटर एवं डिज़िटल ज्ञान की आवश्यकता है।
  • जैसा कि बाज़ार ऑनलाइन माध्यमों से चलते हैं, कारीगरों को पर्याप्त रूप से सुसज्जित करना और ऑनलाइन पोर्टल संचालित करने के लिये प्रशिक्षित करना भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है।
  • भारतीय दूतावासों के माध्यम से ऑनलाइन प्रदर्शनियों का आयोजन वैश्विक दर्शकों को हथकरघा की समृद्ध विरासत के बारे में जागरूक करने और भारत के कारीगरों को घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में सम्मानित करने के लिये किया जाना चाहिये।

कच्चा माल :

  • चतुर्थ अखिल भारतीय हथकरघा जनगणना (2019-2020) लगभग 5 प्रतिशत बुनकर परिवारों द्वारा आवश्यक कच्चे माल के लिये समर्थन का हवाला देती है।
  • कपास, रेशम, और ऊनी धागों से लेकर रंगों की लागत में वृद्धि हुई है अतः बुनकरों के पास इनकी कमी है।

क्रेडिट समर्थन :

  • टेक्सटाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने रिकॉर्ड किया है कि टेक्सटाइल सेक्टर के लिये बजट आवंटन पिछले वित्त वर्ष के 6,943 करोड़ रुपए की तुलना में घटकर 4,831 करोड़ रुपए (2019-2020) हो गया।
  • इसका अर्थ यह भी है कि बुनकरों की विभिन्न योजनाएँ आवासन, अनुदान, स्वास्थ्य बीमा, भी प्रभावित होंगी।
  • अक्सर छोटे बुनकर धन उधारदाताओं की दया पर निर्भर करते हैं और वे विपरीत परिस्थितियों में आत्महत्या कर लेते हैं।

घटती संख्या :

  • कई परिवार मज़दूरों के रूप में नौकरियों के लिये शहरों में पलायन कर, बुनकर हथकरघा उद्योग को छोड़ रहे हैं।
  • हालाँकि हाल ही में हथकरघा जनगणना (2019-2020) बताती है कि देश में लगभग 44 लाख हथकरघा परिवार हैं और इसमें पिछली जनगणना के 27.83 लाख हथकरघा परिवार की तुलना में वृद्धि देखी गई है, यह संख्या अभी भी निराशाजनक है।
  • यदि वर्ष 1995-96 में, संख्या 51 लाख थी, तो इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि यह एक बड़ी चिंता का विषय है।

पहुँच में कमी :

  • खराब बुनियादी ढाँचे, पुराने करघों और प्रमुख बाज़ारों तक पहुँचने की अयोग्यता ने हथकरघा बुनकरों के जीवन को और भी दुरूह बना दिया है।
  • हालाँकि कई संगठन एवं एनजीओ स्थानीय समुदायों को उपभोक्ताओं तक प्रत्यक्ष पहुँच में सहायता करते रहे हैं, फिर भी इसे प्रत्येक आय वर्ग के बुनकरों के लिये समान अवसरों वाला क्षेत्र बनाने की आवश्यकता है चाहे बड़ा बुनकर हो जिसके अधीन 50 से अधिक लोग काम करते हैं या एक छोटा बुनकर जो अपने छह सदस्यीय परिवार के साथ घर से काम करता है।
  • हालाँकि वर्तमान में बुनकरों के लिये कई सरकारी योजनाएँ हैं, बुनकरों के लिये स्वास्थ्य बीमा योजना के बारे में जानकारी रखने वाले बुनकर कुल बुनकरों की संख्या के केवल 3% हैं और केवल 5 प्रतिशत बुनकरों के लिये ऋण माफी के बारे में जानते हैं जिसका वे लाभ उठा सकते हैं (हथकरघा जनगणना 2019-2020)।

SOURCE-PIB

 

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के लाभार्थियों से बातचीत की। योजना के बारे में अधिक जागरूकता पैदा करने के लिए राज्य सरकार द्वारा एक व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, ताकि कोई पात्र व्यक्ति छूट ना जाये। राज्य 7 अगस्त, 2021 को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना दिवस के रूप में मना रहा है। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री उपस्थित थे। मध्य प्रदेश में लगभग 5 करोड़ लाभार्थियों को योजना का लाभ मिल रहा है।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा 26 मार्च 2020 को 21 दिन के लॉक डाउन को ध्यान में रखते हुए गरीब जनता को कोई समस्या ना आए इसके लिए आरंभ की है। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए हमारे वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने विभिन्न प्रकार के योजनाओं को प्रधानमंत्री जन कल्याण योजना के अंतर्गत आरंभ किया है योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए केंद्र सरकार द्वारा 1.70 करोड़ की धनराशि आवंटित की है प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का लाभ 80 करोड़ लाभार्थियों को प्रदान किया जाएगा।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत राशन प्रदान किए जाने की घोषणा की गई है। इस योजना के माध्यम से सभी पात्र लाभार्थियों तक राशन पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से देश के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के नागरिक जैसे की सड़क पर रहने वाले, कूड़ा उठाने वाले, फेरी वाले, रिक्शा चालक, प्रवासी मजदूर आदि को प्राथमिकता प्रदान दी जाएगी। इस बात की जानकारी डीएफपीडी के सचिव सुधांशु पांडे द्वारा प्रदान की गई।

प्रधानमंत्री द्वारा योजना के लाभार्थियों से की जाएगी बातचीत

5 अगस्त 2021 को हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा गरीब कल्याण योजना के लाभार्थियों से बातचीत की जाएगी। इस योजना के अंतर्गत 5 अगस्त 2021 से राशन वितरण प्रक्रिया आरंभ होने जा रही है एवं वन महोत्सव का भी आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर प्रधानमंत्री जी के द्वारा वाराणसी, गोरखपुर, मुरादाबाद, हमीरपुर, अयोध्या, बाराबंकी, शाहजहांपुर, कौशांबी, आगरा और बहराइच के चुनिंदा उचित मूल्य दुकानों के लाभार्थियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत की जाएगी। वन महोत्सव पर प्रत्येक उचित मूल्य की दुकान पर लगभग 100 लाभार्थियों उपस्थित होंगे एवं उचित मूल्य की दुकानों पर टेलीविजन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। जिससे कि वहां मौजूद लाभार्थी बातचीत देख सकें। प्रत्येक उचित मूल्य की दुकान पर खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित करने का दायित्व जिला आपूर्ति एवं विपरण अधिकारी को सौंपा गया है।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का विस्तार

एल सरकार द्वारा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का चौथा चरण आरंभ किया गया है। जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लाभार्थियों को 30 नवंबर 2021 तक अतिरिक्त खाद्यान्न आवंटन किए जाने की घोषणा की गई है। इस बात की जानकारी केंद्रीय उपभोक्ता मामलों मंत्रालय द्वारा दी गई है। यह फैसला 23 जून 2021 को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया है। 7 जून 2021 को देश को संबोधित करते हुए भी प्रधानमंत्री द्वारा यह घोषणा की गई थी कि इस योजना का दिवाली तक विस्तार किया जाएगा। पहले प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना को कोरोनावायरस संक्रमण के कारण 2 महीने के लिए आरंभ किया गया था। जिसके लिए 26,602 करोड़ रुपए के खर्च का आकलन लगाया गया था।

SOURCE-PIB

 

नीरज चोपड़ा

टोक्यो ओलंपिक में आज 23 वर्षीय भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने पुरुषों की भाला फेंक प्रतिस्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। नीरज चोपड़ा ने 87.58 मीटर के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके साथ ही, वह स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले एथलीट और अभिनव बिंद्रा के बाद भारत के दूसरे व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता बन गए। अभिनव बिंद्रा ने 2008 में बीजिंग ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था। इस शानदार प्रदर्शन के साथ, नीरज ने टोक्यो ओलंपिक में भारत के पदकों की संख्या सात तक पहुंचा दी, जो 2012 के लंदन ओलंपिक खेलों में जीते अभी तक के सबसे ज्यादा छह पदकों से ज्यादा हैं। राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, खेल मंत्री श्री अनुराग ठाकुर और उत्साही देशवासियों ने भारत को गौरवान्वित करने के लिए नीरज चोपड़ा को बधाई दी।

नीरज चोपड़ा का व्यक्तिगत विवरण :

खेल : पुरुष भाला फेंक

जन्म तिथि : 24 दिसंबर 1997

गृह स्थान : पानीपत, हरियाणा

प्रशिक्षण शिविर : साई एनएसएनआईएस पटियाला

वर्तमान प्रशिक्षण शिविर : उप्साला, स्वीडन

राष्ट्रीय कोच : डॉ. क्लोस बार्टोनिट्ज

नीरज हरियाणा के खंडरा गांव के रहने वाले हैं। वह जब 12 वर्ष के थे, तब उनके शरीर का वजन सामान्य से अधिक था और उनके परिवार के लोग लगातार उनसे खेल की दुनिया में उतरने के लिए कहते रहे। आखिरकार नीरज ने अपने परिवार वालों की बात मानते हुए पानीपत के शिवाजी स्टेडियम में प्रशिक्षण शुरू कर दिया। कुछ सीनियर को स्टेडियम में भाला फेंकते हुए देखने के बाद, नीरज ने भाला फेंक खेल में अपनी किस्मत आजमाने का फैसला किया। सौभाग्य से नीरज को तंदुरुस्त बनने के लिए कठोर प्रशिक्षण करने के एक माध्यम के तौर पर इस खेल ने आकर्षित किया। इसके बाद वह 2018 राष्ट्रमंडल खेलों और 2018 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले भाला फेंक खिलाड़ी बन गए।

उपलब्धियां

  • स्वर्ण पदक, एशियाई खेल 2018
  • स्वर्ण पदक, राष्ट्रमंडल खेल 2018
  • स्वर्ण पदक, एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2017
  • स्वर्ण पदक, विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2016
  • स्वर्ण पदक, दक्षिण एशियाई खेल 2016
  • रजत पदक, एशियाई जूनियर चैंपियनशिप 2016
  • वर्तमान राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक (07 मीटर – 2021)
  • वर्तमान विश्व जूनियर रिकॉर्ड धारक (48 मीटर – 2016)

सरकार से मिली प्रमुख मदद

  • यूरोप में प्रशिक्षण और प्रतियोगिता के लिए वीजा सपोर्ट लेटर
  • स्पोर्ट्स गियर और रिकवरी इक्विपमेंट की खरीद के लिए वित्तीय सहायता
  • नेशनल प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षण के लिए बायो-मैकेनिस्ट विशेषज्ञ सह कोच की भर्ती और विदेशों में खेलने के अवसर
  • महासंघ और एनजीओ के साथ इंजरी मैनेजमेंट और रिहैबिलिटेशन
  • वर्तमान ओलंपिक चक्र में 26 अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए वित्तीय सहायता

SOURCE-PIB

 

Coalition for Disaster Resilient Infrastructure

आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure – CDRI) में अब तक 25 देश और 7 अंतर्राष्ट्रीय संगठन शामिल हुए हैं।बांग्लादेश CDRI का नया सदस्य बना गया है।

आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure – CDRI)

  • CDRI को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में लॉन्च किया था।
  • यह सतत विकास का समर्थन करने के लिए जलवायु और आपदा जोखिमों के लिए नई और मौजूदा बुनियादी ढांचा प्रणालियों के लचीलेपन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था।
  • प्रधानमंत्री ने 23 सितंबर, 2019 को संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन में अपने भाषण के दौरान CDRI को लांच किया था।
  • यह देशों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, निजी क्षेत्र, बहुपक्षीय विकास बैंकों और शैक्षणिक संस्थानों का एक अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन है।
  • इसका प्राथमिक उद्देश्य बुनियादी ढांचे के जोखिम प्रबंधन, वित्तपोषण, मानकों और रिकवरी मैकेनिज्म के क्षेत्र में अनुसंधान और ज्ञान साझा करने को बढ़ावा देना है।

पृष्ठभूमि

CDRI को पहली बार नरेंद्र मोदी ने 2016 में आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर एशियाई मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (Asian Ministerial Conference on Disaster Risk Reduction) के दौरान प्रस्तावित किया था जो विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया गया था। CDRI की संकल्पना 2018-19 में आयोजित International Workshop on Disaster Resilient Infrastructure (IWDRI) के पहले और दूसरे संस्करण में की गई थी। IWDRI का आयोजन राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority – NDMA) द्वारा संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय (UNDRR), विश्व बैंक, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के सहयोग से किया गया था।

SOURCE-GK TODAY

 

पूर्वव्यापी कर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर अधिनियम के प्रावधानों को रद्द करने के लिए संसद में एक विधेयक पेश किया है। इस विधेयक ने विवादास्पद पूर्वव्यापी कर (retrospective tax) कानून को समाप्त कर दिया है जिसने वोडाफोन और केयर्न जैसे विदेशी निवेशकों के विश्वास को प्रभावित किया है।

मुख्य बिंदु

  • सरकार ने कंपनियों द्वारा मुकदमेबाजी में भुगतान की गई राशि को बिना किसी ब्याज के वापस करने का भी प्रस्ताव रखा।
  • वित्त सचिव टी.वी. सोमनाथन के अनुसार, सभी मामलों में शामिल कुल राशि लगभग 8,100 करोड़ रुपये है। करीब 7,900 करोड़ रुपये केयर्न विवाद से जुड़े हैं।

विधेयक के बारे में

यह विधेयक 1961 के आयकर अधिनियम में पूर्वव्यापी संशोधन को वापस ले लेगा जिसने वोडाफोन, केयर्न और कुछ अन्य पर मांग उठाई थी। यह विधेयक विदेशी निवेश को आकर्षित करने का प्रयास करता है। इस विधेयक के अनुसार, यदि 28 मई, 2012 से पहले लेनदेन किया गया था, तो भारतीय संपत्ति के किसी भी अप्रत्यक्ष हस्तांतरण के लिए पूर्वव्यापी संशोधन के आधार पर भविष्य में कोई कर मांग नहीं उठाई जाएगी।

वोडाफोन मामला

वोडाफोन का मामला 2007 में कंपनी द्वारा हचिसन एस्सार (Hutchison Essar) की भारतीय संपत्ति का अधिग्रहण करने का है। इस सम्बन्ध में 22,100 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। सरकार ने सिंगापुर में फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी। भारत केयर्न एनर्जी पीएलसी और केयर्न यूके होल्डिंग्स लिमिटेड पर 2020 में हेग में अन्तर्राष्ट्रीय मध्यस्थ न्यायाधिकरण (international arbitral tribunal) में कर लगाने के खिलाफ एक मामले में हार गया था, जो कंपनी ने 2006 में किए गए कथित पूंजीगत लाभ पर किया था। ट्रिब्यूनल ने भारत से केयर्न को $ 1232.8 मिलियन की राशि और ब्याज का भुगतान करने के लिए कहा था।

पूर्वव्यापी कराधान (Retrospective Taxation)

पूर्वव्यापी कराधान किसी भी देश को कुछ उत्पादों, वस्तुओं या सेवाओं पर कर लगाने पर एक नियम पारित करने की अनुमति देता है। यह किसी भी कानून के पारित होने की तारीख के पीछे के समय से कंपनियों से शुल्क लेता है। इस मार्ग का उपयोग देशों द्वारा अपनी कराधान नीतियों में किसी भी विसंगति को ठीक करने के लिए किया जाता है।

SOURCE-GK TODAY

 

धृति बनर्जी

भारत सरकार ने भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (Zoological Survey of India – ZSI) के नए निदेशक के रूप में डॉ. धृति बनर्जी (Dhriti Banerjee) की नियुक्ति को मंजूरी दी।

मुख्य बिंदु

  • धृति बनर्जी एक वैज्ञानिक हैं। वह जूगोग्राफी, टैक्सोनॉमी, मॉर्फोलॉजी और मॉलिक्यूलर सिस्टमैटिक्स में रिसर्च कर रही थीं।
  • वह एक हफ्ते में जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया का कार्यभार संभाल लेंगी।
  • उन्होंने 2012 से ZSI के डिजिटल अनुक्रम सूचना परियोजना (Digital Sequence Information Project) के समन्वयक के रूप में काम किया है।

भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (Zoological Survey of India – ZSI)

जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की स्थापना जुलाई, 1916 में हुई थी। इसका मुख्यालय कोलकाता में है। इसमें 16 क्षेत्रीय केंद्र शामिल हैं और यह पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत काम करता है। इसे प्राणी अनुसंधान में प्रमुख भारतीय संगठन के रूप में स्थापित किया गया था। यह भारत में जीवों के सर्वेक्षण, अन्वेषण और अनुसंधान का अध्ययन का कार्य करता है।

पृष्ठभूमि

जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया का इतिहास बंगाल की एशियाटिक सोसाइटी के दिनों से शुरू होता है जिसकी स्थापना 15 जनवरी, 1784 को सर विलियम जोन्स ने की थी। एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल भारतीय संग्रहालय (1875), भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (Zoological Survey of India) के साथ-साथ भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India) की मातृ संस्था थी। ZSI की स्थापना सर विलियम जोन्स के सपने की पूर्ति थी। एशियाटिक सोसाइटी ने 1796 से प्राणी और भूवैज्ञानिक नमूने एकत्र करना शुरू कर दिया था।

SOURCE-THE HINDU