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Current Affair 8 April 2021

8 April Current Affairs

कॉपीराइट (संशोधन) नियम, 2021

भारत सरकार ने कॉपीराइट (संशोधन) नियम, 2021 को राजपत्रित अधिसूचना जी एस आर 225 (ई) दिनांक 30 मार्च, 2021 के द्वारा राजपत्र में अधिसूचित किया है। भारत में, कॉपीराइट के लिए कॉपीराइट अधिनियम, 1957 और कॉपीराइट नियम, 2013 कानून हैं। कॉपीराइट नियम, 2013 को अंतिम बार वर्ष 2016 में संशोधित किया गया था।

मौजूदा नियमों को अन्य प्रासंगिक कानूनों के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से संशोधन पेश किए गए हैं। इसका उद्देश्य कॉपीराइट कार्यालय में कार्य और संचार के लिए इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों को प्राथमिक मोड के रूप में अपनाना है, ताकि डिजिटल युग में तकनीकी प्रगति के सन्दर्भ में सुचारू और बाधारहित अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। कॉपीराइट पत्रिका के प्रकाशन के बारे में एक नया प्रावधान शामिल किया गया है, जिससे आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। उक्त पत्रिका कॉपीराइट कार्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध होगी।

जवाबदेही और पारदर्शिता को प्रोत्साहित करने के लिए नए प्रावधान पेश किए गए हैं, जिससे वितरित नहीं की गयी रॉयल्टी राशियों का समाधान करने तथा रॉयल्टी संग्रह व वितरण के दौरान इलेक्ट्रॉनिक और पता लगाने योग्य भुगतान प्रणालियों के उपयोग की सुविधा प्राप्त होगी। कॉपीराइट सोसाइटी के काम-काज में पारदर्शिता को सुदृढ़ करने के लिए एक नया नियम पेश किया गया है, जिसके तहत कॉपीराइट सोसाइटी को प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए वार्षिक पारदर्शिता रिपोर्ट तैयार करने और इसे सार्वजनिक करने की आवश्यकता होगी।

इन संशोधनों से कॉपीराइट नियमों का, वित्त अधिनियम, 2017 के प्रावधानों के साथ सामंजस्य स्थापित हुआ है, जिसके तहत कॉपीराइट बोर्ड का अपीलीय बोर्ड में विलय कर दिया गया है।

सॉफ़्टवेयर कार्यों के पंजीकरण की अनुपालन आवश्यकताओं को काफी हद तक कम कर दिया गया है, क्योंकि अब आवेदक के पास स्रोत कोड के पहले 10 और अंतिम 10 पृष्ठों, या पूरे स्रोत कोड यदि 20 से कम पृष्ठ हैंको दर्ज करने की स्वतंत्रता है तथा खाका या संपादित अंश की जरूरत नहीं रह गयी है।

केंद्र सरकार के समक्ष कॉपीराइट सोसाइटी के पंजीकरण के आवेदन पर केंद्र सरकार द्वारा आवेदन का जवाब देने संबंधी समय-सीमा को बढाकर 180 दिन कर दिया गया है, ताकि आवेदन की अधिक व्यापक जांच की जा सके।

SOURCE-PIB

 

अभिनव परियोजना आरई-एचएबी (मधुमक्खियों का उपयोग कर हाथियों के मानव पर हमले कम करना)

सड़क परिवहन और राजमार्ग तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम-एमएसएमई ​​मंत्री श्री नितिन गडकरी ने खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) की अभिनव परियोजना आरई-एचएबी की सराहना की है। इस परियोजना के लागू होने से कर्नाटक के कोडागू जिले में चार स्थानों पर हाथियों की उपस्थिति काफी कम हो गई है। श्री गडकरी ने कहा कि परियोजना के लागू होने से कोडागू में मानव क्षेत्रों में हाथियों के आवागमन को रोकने में बहुत उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि आरई-एचएबी परियोजना में बहुत अधिक संभावनाएं हैं और इसे जल्द ही पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, असम, तमिलनाडु और केरल जैसे हाथियों के हमलों से प्रभावित सभी राज्यों में लागू किया जाएगा। उन्होंने देश भर में परियोजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए कृषि और पर्यावरण तथा वन मंत्रालयों की भागीदारी पर भी जोर दिया।

कर्नाटक के कोडागू जिले के नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान की परिधि में चार स्थानों पर आरई-एचएबी (मधुमक्खियों का उपयोग कर मानव पर हाथियों के हमले कम करना) परियोजना का शुभारंभ केवीआईसी के अध्यक्ष श्री विनय कुमार सक्सेना द्वारा पिछले महीने किया गया। यह हाथियों और मानव के बीच के संघर्ष को रोकने का एक अनूठा, लागत प्रभावी तरीका है। इससे जानवरों और मनुष्यों दोनों को कोई नुकसान नहीं होता। इस परियोजना के तहत, मधुमक्खियों के बक्सों को हाथियों को मानव बस्ती में प्रवेश करने से रोकने के लिए बाड़ के रूप में उपयोग किया जाता है| इस प्रकार जान और माल की हानि को कम किया जाता है। साथ ही, हाथियों को लगता है कि मधुमक्खियां उनकी आंखों और सूंड के अंदरूनी हिस्से में प्रवेश कर सकती हैं। इस तरह मधुमक्खियों का झुंड हाथियों को सबसे ज्यादा परेशान करता है।

मधुमक्खियों की बाड़ ने इन इलाकों में हाथियों की आवाजाही को काफी हद तक कम कर दिया है। इन स्थानों पर लगाए गए नाइट विज़न कैमरों ने मधुमक्खी के बक्सों को देखकर हाथियों के व्यवहार में बदलाव की अद्भुत तस्वीरें खींची हैं। कई हाथियों को मधुमक्खियों के डर से जंगलों में वापस लौटते हुए देखा गया है। इसके अलावा, इन क्षेत्रों में हाथियों द्वारा फसलों या संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है क्योंकि मधुमक्खी के बक्से को हाथियों के मार्ग पर रखा गया है।

खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष श्री विनय सक्सेना ने कहा कि आरई-एचएबी को अन्य राज्यों में लागू करने से सैकड़ों मानव और हाथी जीवन बचेंगे। उन्होंने कहा कि “केवीआईसी अन्य राज्यों में भी इस परियोजना को दोहराने के लिए तैयार है, जहां जंगली हाथियों के खतरे के कारण एक बड़ी आदिवासी और ग्रामीण आबादी रह रही है। प्रोजेक्ट आरई-एचएबी में मानव-हाथी संघर्ष को कम करने, मधुमक्खी पालन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने, जलवायु परिवर्तन की समस्या का समाधान करने और वन क्षेत्र में वृद्धि करने के लिए बहु-आयामी लाभकारी सुविधाएं प्राप्त होंगी।”

पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, असम, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्य प्रमुख रूप से हाथी – मानव संघर्ष वाले क्षेत्र हैं जहां केवीआईसी चरणबद्ध तरीके से आरई-एचएबी परियोजना को लागू करने की योजना बना रहे हैं। 2015 से देश भर में जंगली हाथियों के साथ संघर्ष में लगभग 2400 लोग मारे गए हैं।

केवीआईसी के अध्यक्ष ने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से, इन क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय लोगों को मधुमक्खी पालन के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा और मधुमक्खियों  के बक्से प्रदान किए जाएंगे जो जंगली हाथियों को भगाने के लिए उपयोग किए जाएंगे।

SOURCE-PIB

 

स्वामित्व योजना

केंद्रीय पंचायती राज, ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि स्वामित्व योजना हमारे देश के गांवों की दशा-दिशा में ऐतिहासिक परिवर्तन लाने वाली योजना है और देश ने इस योजना के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत अभियान के क्षेत्र में एक सशक्त कदम उठाया है। श्री तोमर ने गुरुवार को पंचायती राज मंत्रालय के साथ ही भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों एवं संस्थानों के अधिकारियों के साथ स्वामित्व योजना की प्रगति की समीक्षा की।

केंद्रीय पंचायती राज मंत्री श्री तोमर ने कहा कि वर्ष 2025 तक यह महत्वाकांक्षी योजना पूर्ण होनी है, इसलिए सभी संबंधित मंत्रालय एवं राज्य इस योजना के क्रियान्वयन के लिए एक रोड मैप बनाएं और चरणबद्ध तरीके से लक्ष्य निर्धारित कर कार्य पूरा करें।

श्री तोमर ने कहा कि आज तक गांववासियों के पास उनके आवास का मालिकाना हक का कोई दस्तावेज नहीं था। स्वामित्व योजना का शुभारंभ माननीय प्रधानमंत्री जी ने 24 अप्रैल 2020 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर करके एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रापर्टी कार्ड के माध्यम से गांव के लोग अब बिना किसी विवाद के संपत्ति खरीद और बेच पाएंगे। प्रापर्टी कार्ड मिलने के बाद गांव में लोगों के अपने घर पर होने वाले कब्जे की आशंका समाप्त हो जाएगी। गांव के घरों की संपत्ति के आधार पर नौजवान बैंक से कर्ज लेकर अपना भविष्य बना पाएंगे। ड्रोन जैसी नवीनतम टेक्नोलॉजी से जिस प्रकार मैपिंग और सर्वे किया जा रहा है उससे हर गांव का सटीक लैंड रिकार्ड भी बन पाएगा।

केंद्रीय पंचायती राज मंत्री श्री तोमर ने बताया कि आगामी 24 अप्रैल 2021 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी देश के सभी गांवों में स्वामित्व योजना के विस्तार का शुभारंभ करेंगे।

वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान पायलट फेज़ के अंतर्गत स्वामित्व योजना देश के 9 राज्यों उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में लागू की गई थी। अब तक देश के 2481 गांवों में 3 लाख से अधिक परिवारों को उनकी संपत्ति के अधिकार पत्र प्रदान किए जा चुके हैं। हर संपत्ति के सटीक सर्वे के लिए अब तक देश में लगभग 40,514 गांवों में ड्रोन द्वारा सर्वेक्षण पूर्ण हो चुका है। देश में कुल 567 कोर्स नेटवर्क स्टेशन स्थापित किए जाने हैं जिनमें से 210 का कार्य पूर्ण हो चुके हैं।

SOURCE-PIB

 

ऑक्सीजन संवर्धन इकाई

क्सीजन संवर्धन इकाई एक उपकरण है, जो हमारे आस-पास की हवा से ऑक्सीजन को इकट्ठा करता है और ऑक्सीजन-समृद्ध हवा की आपूर्ति के लिए उसमें से नाइट्रोजन को हटाता है। एकत्र की गई ऑक्सीजन को ऑक्‍सीजन मास्क या नाक में लगाए जाने वाले केनूला के जरिये उन रोगियों को दी जाती है, जिन्‍हें श्‍वास संबंधी बीमारियां हैं। इस उपकरण को सुदूरवर्ती स्थानों, घरों या अस्पताल में ऐसे रोगियों के लिए इस्‍तेमाल किया जा सकता है, जो क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), क्रोनिक हाइपॉक्‍सेमिया और पल्मोनरी एडिमा से पीडि़त हैं। इसका इस्‍तेमाल निंद्रा संबंधी गंभीर विकार-स्लीप एपनिया (एक निरंतर सकारात्मक वायुमार्ग दबाव इकाई के साथ संयोजन में) के इलाज के लिए किया जा सकता है।

सीएसआईआर-सीएमईआरआई की स्वदेश में विकसित ऑक्सीजन संवर्धन इकाई प्रेशर स्विंग ऐड्सॉर्प्शन (पीएसए) और जियोलाइट कॉलम के सिद्धांत पर काम करता है, ताकि कुछ दबाव के तहत हवा से नाइट्रोजन को चुनिंदा रूप से हटाया जा सके, जिससे ऑक्सीज़न जमा होने में वृद्धि होती है। ऑक्सीजन संवर्धन इकाई के उपतंत्र कंप्रेसर, सोलनॉयड संचालित 3/2 वाल्व, फ्लो मीटर और प्री-फिल्टर हैं। कंप्रेसर मॉड्यूल में दबाव वाली हवा को डालता है और ऑक्सीजन नाइट्रोजन के बेहतर पारगमन के कारण इसमें फैल जाती है। हवा में मौजूद निलंबित कणों, वायरस, बैक्टीरिया को उपलब्ध एचईपीए फिल्टर द्वारा फ़िल्टर किया जाता है। इस इकाई का इलेक्‍ट्रिकल सुरक्षा अनुपालन के लिए आईईसी 60601-1 3.1 संस्करण : 2012 के अनुसार टीयूवी रीनलैंड, बैंगलोर में परीक्षण किया गया है, जबकि ऑक्सीजन संवर्धन प्रतिशत के विषय में आउट फ्लो का सीएसआईआर-सीएमईआरआई में संस्‍थानिक परीक्षण किया गया है। सीएसआईआर-सीएमईआरआई द्वारा विकसित ऑक्सीजन संवर्धन इकाई 30 एलपीएम ऑक्सीजन समृद्ध हवा देने में सक्षम है, जो अन्य व्यावसायिक रूप से उपलब्ध इकाइयों में मौजूद नहीं है। मशीन 0.5 आईपीएम की  सटीकता के साथ प्रवाह को नियंत्रित कर सकती है। यह सुविधा हाई फ्लो ऑक्सीजन थेरेपी में मदद करेगी, जो कि कोविड-19 रोगियों के उपचार और प्रबंधन में एक बेहतर विधि साबित हुई है।

व्यावसायिक रूप से उपलब्ध ऑक्सीजन संवर्धन इकाइयाँ आमतौर पर समुद्र तल से 8000 फुट तक काम करती हैं। एक वैकल्पिक प्लग-इन मॉड्यूल के साथ, यह इकाई फ्लोरेट पर पैनल्‍टी के साथ 14000 फुट की ऊंचाई तक काम कर सकती है, जिससे आकस्मिक स्थिति में अधिक ऊंचाई वाले युद्धक्षेत्र के उपयोग के लिए यह बहुत आसान हो जाता है।

हालांकि देश में कुछ अन्य शोध प्रतिष्ठानों ने भी इस तरह की प्रणाली विकसित की है, सीएसआईआर-सीएमईआरआई की प्रणाली में 93 प्रतिशत ऑक्सीजन एकाग्रता स्तर पर बहिर्वाह है और 5 एलपीएम उस सुविधा से बहुत आगे है, जहां केवल 27-35 प्रतिशत का बहिर्वाह होता है। इकाई के प्रदर्शन के न्‍यूनतम मानदंड की बेंचमार्किंग की गई है, जो प्रतिष्ठित एमएनसी के बराबर है।

सीएसआईआर-सीएमईआरआई के निदेशक प्रो. डॉ. हरीश हिरानी ने सिस्टम के बारे में बात करते हुए कहा कि सीएसआईआर-सीएमईआरआई विकसित ऑक्सीजन संवर्धन इकाई घरों, अस्पतालों, विशेष रूप से उच्च ऊंचाई वाले इलाकों और दूरदराज के स्थानीय इलाकों में रक्षा बलों के लिए बहुत उपयोगी हो सकती है। यह कोविड-19 के रोगियों के इलाज के लिए अधिक प्रभावी और महत्वपूर्ण हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि यह इकाई ऑक्सीजन सिलेंडर और वेंटिलेटर की मांग को कम करने में मदद कर सकती है और वायु प्रदूषण में वृद्धि के कारण इसकी मांग बहुत तेजी से बढ़ने वाली है क्योंकि यह इष्टतम स्वस्थ वातावरण के लिए ऑक्सीजन का उचित स्तर बनाए रखने के लिए भी उपयोगी है।

SOURCE-PIB

 

वनधन विकास योजना

न्यूनतम समर्थन मूल्य के माध्यम से लघु वन उपजों (एमएफपी) के विपणन की प्रक्रिया के माध्यम से लघु वन उपजों के महत्व की श्रृंखला तैयार करने के एक घटक वनधन जन जातीय स्टार्ट-अप्स कार्यक्रम की सफलता को फिर से दर्शाता है। यह  कार्यक्रम  महाराष्ट्र के ठाणे जिले में शाहपुर की वीडीवीके आदिवासी एकात्मिक सामाजिक संस्था में जनजातीय उद्यमशीलता की सफलता गाथा का चित्रण है। साथ ही इस योजना से यहां स्थानीय जनजातियों को रोजगार का एक बड़ा अवसर भी मिला है ।

वीडीवीके आदिवासी एकात्मिक संस्था, शाहपुर जनजातीय उद्यमशीलता का आदर्श उदाहरण है जो यह दर्शाता है कि सामुदायिक विकास और उत्पादों की मूल्य वृद्धि से किस प्रकार संस्था के सदस्यों की आय में बड़ी वृद्धि करने में सहायता मिल सकती है।

पश्चिमी घाट पर्वतमालाओं से घिरा शाहपुर महाराष्ट्र के ठाणे जिला का सबसे बड़ा तालुका है और इसे भविष्य का विकसित क्षेत्र समझा जाता है। इस क्षेत्र में रहने वाली अधिकतर  जनजातियां यहां के वीडीवीके की सदस्य हैं और कात्करी समुदाय से आती हैं। कात्करी महाराष्ट्र (पुणे, ठाणे और रायगढ़) और गुजरात के कुछ भागों में रहने वाला सबसे पुराना जनजातीय समुदाय है। ये आदिवासी ग्रामीण श्रमिक हैं और जलावन की लकड़ी के साथ ही वनों में होने वाले फल बेचा करते हैं।

इस समुदाय के उद्यमशील सदस्य श्री सुनील पवारन और उनके मित्रों ने वनधन योजना के अंतर्गत अपरिष्कृत (कच्ची) गिलोय की बिक्री करने के लिए इस संस्था को शुरू किया था। अब इसके 300 सदस्य हैं। वीडीवीके के कार्यों का दायरा अब बहुत बड़ा हो गया है और अब यहां 35 से अधिक उत्पादों और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से जुड़े कार्य संपादित किए जाते हैं ।

गिलोय चूर्ण बनाने की प्रक्रिया आदिवासी समुदाय के लोगों द्वारा गिलोय की लताओं से गिलोय काटने से शुरू होती है और इसके बाद उन्हें अगले 8-10 दिनों तक सुखाया जाता है। सूखी हुई गिलोय को शाहपुर कार्यशाला में लाकर उसे पिसा और थैलियों में बंद करने के बाद उस पर ठप्पा लगा कर खरीददारों को भेजा जाता है जिनमें ट्राइब्स इण्डिया भी शामिल है। पिछले डेढ़ वर्ष के दौरान इस समूह ने 12,40,000/- रूपये (बारह लाख चालीस हजार रुपये) मूल्य का गिलोय चूर्ण और 6,10,000 रुपये मूल्य की सूखी गिलोय की बिक्री की है। इस प्रकार कुल मिलाकर 18,50,000 रुपये मूल्य के उत्पादों की बिक्री हुई।

एक समूह के रूप में कार्य करते हुए वीडीवीके ने पिछले डेढ़ वर्ष की अवधि में कई बड़ी कंपनियों, जिनमें डाबर, बैद्यनाथ, हिमालया, विठोबा, शारंधर, भूमि नेचुरल प्रोडक्ट्स केरला, त्रिविक्रम और मैत्री फूड्स शामिल हैं, को कच्ची गिलोय बेची है। इनमें से हिमालया, डाबर और भूमि ने अब तक इस संस्था को 1,57,00,000/- (एक करोड़ 57 लाख) रुपये मूल्य की 450 टन गिलोय की आपूर्ति करने के लिए आदेश दिया है।

जहां एक ओर वैश्विक महामारी कोविड-19 और राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के कारण वीडीवीके का काम रुक गया पर इसके चलते संस्था के कर्मियों के उत्साह और मनोबल में कोई कमी नहीं आई। उन्होंने इस संकट के दुष्प्रभावों को कम से कम रखने के लिए इस दौरान कठोर परिश्रम भी किया।

मार्च 2020 से आधे जून 2020 की अवधि में वीडीवीके ने स्थानीय आदिवासियों से 34,000 किलोग्राम से अधिक मात्रा में गिलोय खरीदी। फिर लॉकडाउन समाप्त होने और धीरे-धीरे स्थिति के सामान्य होने के बाद वीडीवीके अब तेजी से काम को बढ़ा रही है और ई-प्लेटफॉर्म पर भी अपने उत्पादों को बिक्री के लिए उपलब्ध करवा रही है।

एक ओर जहां अपरिष्कृत (कच्ची) और प्रसंस्कृत गिलोय अभी भी वीडीवीके के कारोबार का मुख्य आधार है वहीं अब यह संस्था सफ़ेद मूसली, जामुन, बहेड़ा, वायविडंग, मोरिंगा, नीम, आंवला और संतरे के छिलकों का चूर्ण जैसे पदार्थों के क्षेत्र में भी अपने कारोबार को बढ़ा रही है।

इस सफलता ने इस समुदाय के हजारों लोगों को प्रेरित किया है और अब वे ऐसे ही कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। अभी तक 12,000 लाभार्थियों वाली 39 वीडीवीके संस्थाओं को ट्राइफेड ने अतिरिक्त रूप से अपनी मंजूरी दी है I

वनधन जन जातीय स्टार्ट-अप्स कार्यक्रम, न्यूनतम समर्थन मूल्य के माध्यम से लघु वन उपजों (एमएफपी) के विपणन की प्रक्रिया के माध्यम से लघु वन उपजों के महत्व की श्रृंखला तैयार करने का एक घटक है। वनधन विकास योजना वनों में रहने वाले आदिवासियों को स्थायी रूप से लम्बे समय तक जीविकोपार्जन का साधन देने के लिए वनधन केन्द्रों की स्थापना के माध्यम से लघु वन उपजों की मूल्य वृद्धि, ब्राडिंग और क्रय-विक्रय करने का कार्यक्रम है। इस योजना का उद्देश्य जनजातियों को उनका अपना व्यवसाय बढ़ाने एवं आय में वृद्धि के उद्देश्य से वित्तीय पूंजी निवेश, प्रशिक्षण, संरक्षण जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देकर उनका सशक्तिकरण करना है।

लघु वन उपजों की मूल्यवृद्धि, ब्रांडिंग और विपणन के माध्यम से गंभीरता पूर्ण प्रयासों, समर्पण और दृढ़ निश्चय के साथ एक साथ शुरू किए गए जनजातीय उद्यमशीलता के इन सामूहिक प्रयासों के कारण ये वीडीवीके इस तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में सफल सिद्ध हो रहे हैं।

वीडीवीके की सफलता इस बात का उदाहरण है कि ‘गो लोकल फॉर वोकल– मेरा वन मेरा धन मेरा उद्यम के लक्ष्य के साथ कैसे ट्राइफेड की ऐसी पहलें आत्मनिर्भर अभियान के माध्यम से भारत को आत्मनिर्भर बना रही हैं और जिससे पूरे देश में जनजातीय पारिस्थितिकी में आमूल-चूल परिवर्तन होने लगा है।

SOURCE-PIB

 

लैब ऑन व्हील्स कार्यक्रम

दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के ‘लैब ऑन व्हील्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन किया है।

इसमें सरकारी स्कूल के छात्रों और वंचित बच्चों को पढ़ाने के लिए दिल्ली भर में एक बस में यात्रा करने वाले विश्वविद्यालय के छात्र होंगे।

यह विचार उन छात्रों को गणित और विज्ञान के क्षेत्र में शिक्षा प्रदान करने का है, जोहाशिए और खराब आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं। ताकि उच्च शिक्षा हासिल करते हुए इन विषयों में अपने हितों को साधने के लिए वह रुचि दिखाएँ।

अंत में, आशा है कि यह पारस्परिक रूप से फायदेमंद हो जाता है, अगर इनमें से कुछ छात्र स्कूली शिक्षा समाप्त करने के बाद डीटीयू में प्रवेश लेने का निर्णय लेते हैं।

‘लैब ऑन व्हील्स ’में 16 कंप्यूटर, दो टीवी, एक 3 डी प्रिंटर, एक लैपटॉप, कैमरा और एक प्रिंटर शामिल होंगे। यह वाई-फाई सक्षम होगा, जिसमें 100 प्रतिशत पावर बैक अप और पूरी तरह से वातानुकूलित होगा।

SOURCE-INDIAN EXPRESS

 

उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण

भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण की रिपोर्ट जारी की। यह सर्वेक्षण 5,000 उत्तरदाताओं के बीच देश के प्रमुख शहरों में आयोजित किया गया था।

सर्वेक्षण की मुख्य विशेषताएं

उपभोक्ता विश्वास सूचकांक जनवरी 2021 में 5 अंक से घटकर मार्च 2021 में 53.1 अंक हो गया है।

जनवरी, 2021 में भविष्य की उम्मीदें 1 से घटकर मार्च, 2021 में 108.8 हो गईं।

जब सूचकांक माप 100 से ऊपर होता है, तो यह आशावाद का संकेत देता है और जबकि यह 100 से नीचे होता है, यह निराशावाद का संकेत होता है।

अधिकांश उपभोक्ताओं ने उच्च समग्र व्यय की सूचना दी।

आने वाले वर्ष के लिए सामान्य आर्थिक स्थिति और रोजगार की स्थिति पर उपभोक्ताओं की उम्मीद भी निराशावादी थी।

उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण (Consumer Confidence Survey)

यह सर्वेक्षण पांच आर्थिक चर जैसे रोजगार, आर्थिक स्थिति, मूल्य स्तर, खर्च और आय पर उपभोक्ता धारणा को मापता है। कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे में दो मुख्य सूचकांक हैं, वर्तमान स्थिति सूचकांक और भविष्य की अपेक्षाएं सूचकांक। भविष्य की अपेक्षा सूचकांक यह मापता है कि उपभोक्ता एक वर्ष में आर्थिक मुद्दे में बदलाव के बारे में क्या सोचता है। वर्तमान स्थिति सूचकांक पिछले वर्ष में एक आर्थिक मुद्दे पर उपभोक्ता धारणा में बदलाव को मापता है।

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा हर दो महीने में उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण किया जाता है। सर्वेक्षण यह मापने के लिए किया जाता है कि उपभोक्ता अपनी वित्तीय स्थिति के बारे में निराशावादी या आशावादी हैं।

सर्वेक्षण कैसे किया गया था?

यह सर्वेक्षण टेलीफोनिक साक्षात्कार के माध्यम से किया गया था। यह बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, पटना, तिरुवनंतपुरम, मुंबई जैसे प्रमुख शहरों में आयोजित किया गया था।

G-SAP 1.0 क्या है

भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में सरकारी प्रतिभूति अधिग्रहण कार्यक्रम (Government Security Acquisition Programme), GSAP 1.0 की घोषणा की। स कार्यक्रम के तहत, केंद्रीय बैंक 1 ट्रिलियन (या एक लाख करोड़ रुपये) मूल्य के सरकारी बॉन्ड खरीदेगा। 25,000 करोड़ रुपये की पहली खरीद 15 अप्रैल, 2021 को की जाएगी।

GSAP 1.0

GSAP 0 बांड बाजार को और अधिक सुविधा प्रदान करेगा।इस वर्ष सरकार की उधारी बढ़ने के कारण, RBI को यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय बाजार में कोई व्यवधान न हो।

वित्तीय वर्ष 2021 में, भारतीय रिज़र्व बैंक ने द्वितीयक बाजार से 13 ट्रिलियन मूल्य के बांड खरीदे।

यह कार्यक्रम रेपो रेट और दस साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड के बीच प्रसार को कम करने में मदद करेगा।

यह वित्त वर्ष 2022 में केंद्र और राज्यों के लिए उधार लेने की कुल लागत को कम करने में भी मदद करेगा।

GSAP के प्रभाव

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) सेंसेक्स फरवरी और मार्च, 2021 में बॉन्ड यील्ड बढ़ने के कारण गिर गया था। हालांकि, आरबीआई द्वारा मौद्रिक नीति घोषणाओं में GSAP की घोषणा के बाद, दस-वर्षीय जी-सेक बांड यील्ड में 0.6% की गिरावट आई।

बॉन्ड यील्ड बढ़ने से इक्विटी मार्केट्स में कमजोरी आई।

सरकारी प्रतिभूतियाँ (Government Securities) क्या हैं?

सरकारी प्रतिभूतियां ऋण साधन हैं जो कि भारत सरकार द्वारा धन उधार लेने के लिए जारी किए जाते हैं। यह दो प्रकार के होते हैं – शॉर्ट टर्म इंस्ट्रूमेंट्स हैं जो 91 दिनों में और लॉन्ग टर्म इंस्ट्रूमेंट्स जो 5 साल से 40 साल के बीच मैच्योर होते हैं।

SOURCE-G.K.TODAY

 

जॉर्डन संकट

जॉर्डन एक एकात्मक राज्य (unitary state) है जो एक संवैधानिक राजतंत्र के तहत शासित है। एकात्मक राज्य वह राज्य है जिसे एक एकल इकाई के रूप में नियंत्रित किया जाता है जहां केंद्र सरकार अंततः सर्वोच्च है। एक संवैधानिक राजतंत्र में, एक सम्राट (शासक या राजा) लिखित या अलिखित संविधान के अनुसार अधिकार का प्रयोग करता है।

जॉर्डन संकट क्या है?

पूर्व क्राउन प्रिंस हमजा (Hamzah) को हाल ही में घर में ही नजरबंद किया गया था। वह राजा अब्दुल्ला के सौतेले भाई हैं। हमजा पर राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करने का आरोप लगाया गया था। ऐसा इसलिए था क्योंकि उन्होंने आदिवासी नेताओं के साथ बैठकों में भाग लिया, जिन्होंने सत्ताधारी सम्राट की खुलकर आलोचना की। जॉर्डन सरकार के अनुसार, देश को अस्थिर करने के लिए एक राजनीतिक तख्तापलट की कोशिश की गई थी। सरकार का यह भी कहना है कि इस बैठक में विदेशी संस्थाओं ने भी भाग लिया।

जॉर्डन में स्थिरता का क्या महत्व है?

प्रथम विश्व युद्ध के बाद जॉर्डन का निर्माण किया गया था।यह दुनिया के उस हिस्से में दशकों से स्थिर है जो संघर्ष और राजनीतिक अनिश्चितता से ग्रस्त है। खाड़ी और पश्चिमी देशों के अनुसार, जॉर्डन एक रणनीतिक साझेदार है जिसे क्षेत्र में आगे के राजनीतिक उद्देश्यों के लिए भरोसा किया जा सकता है। क्षेत्र में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए जॉर्डन के खुफिया तंत्र का समर्थन बहुत महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में संघर्ष में सीरियाई संकट, इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष आदि शामिल हैं, जॉर्डन ने युद्ध प्रवण क्षेत्रों से शरणार्थियों के लिए एक अच्छे मेजबान के रूप में कार्य किया है। आज शरणार्थी जॉर्डन की आधी आबादी का हिस्सा हैं।

2003 में इराक पर अमेरिकी आक्रमण के दौरान, जॉर्डन ने इराक से आए शरणार्थियों का स्वागत किया था।वर्तमान में यह सीरिया से आये 10 लाख शरणार्थियों की मेजबानी कर रहा है।

जॉर्डन इजराइल और फिलिस्तीन के बीच भविष्य के शांति सौदों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

क्षेत्रीय शक्तियों के साथ जॉर्डन के सम्बन्ध

शुरुआत में जॉर्डन ने अमेरिका के साथ और संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब की सुन्नी मुस्लिम शक्तियों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखे। वे एक साथ ईरान के शियाओं के खिलाफ खड़े हैं।

1994 में, जॉर्डन ने इजरायल के साथ एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए और तब से दोनों देश राजनयिक संबंध बनाए हुए हैं।हालांकि, 2017 में सऊदी-यूएई द्वारा कतर की नाकेबंदी के बाद घर्षण शुरू हुआ था। सऊदी और यूएई ने चरमपंथी समूहों के साथ अपने संबंधों के लिए कतर को दंडित करने करने का प्रयास किया था। जॉर्डन ने भी कतर के साथ अपने संबंधों को कम कर दिया था। हालांकि, इसने कतर के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखे। इसने कतर से वित्तीय सहायता भी स्वीकार की। इससे क्षेत्र में जॉर्डन और सऊदी अरब और उसके सहयोगियों के बीच तनाव पैदा हो गया।

जॉर्डन को तुर्की के साथ मजबूत संबंध बनाए रखने के लिए आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा।

यूएई के इजरायल के साथ अपने संबंधों को सामान्य करने के बाद, क्षेत्र के समन्वयक के रूप में जॉर्डन की भूमिका कम हो गई है।

एस. रमन को SIDBI का नया अध्यक्ष

भारत सरकार ने हाल ही में एस. रमन को लघु उद्योग और विकास बैंक (Small Industries and Development Bank of India) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक के रूप में नियुक्त किया है।

मुख्य बिंदु

यह नियुक्ति तीन साल की अवधि के लिए है।

नए अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक के नाम की सिफारिश बैंक बोर्ड ब्यूरो ने की थी।

बैंक बोर्ड ब्यूरो (Banks Board Bureau)

यह भारत सरकार का एक स्वायत्त निकाय है।यह एक सलाहकार संस्था है।

इसे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शासन में सुधार करने का काम सौंपा गया है।बैंक बोर्ड ब्यूरो सरकारी स्वामित्व वाले बैंकों और वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों के चयन की सिफारिश करता है।

यह गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों और ख़राब ऋणों से निपटने के लिए रणनीतियों के साथ बैंकों की सहायता करता है।

यह भारत सरकार को वित्तीय संस्थानों (गैर-बैंकिंग सहित) के शीर्ष स्तर की नियुक्तियों की सिफारिश करता है।

बैंक बोर्ड ब्यूरो की स्थापना 2016 में की गई थी।

यह पी.जे. नायक समिति द्वारा अनुशंसित सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सुधारों की दिशा में काम करता है।

पीजे नायक समिति (P.J. Nayak Committee)

पी.जे. नायक समिति की स्थापना 2014 में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा की गई थी। इस समिति ने बैंकों के बोर्ड के शासन की समीक्षा की। इस समिति द्वारा की गई सिफारिशें इस प्रकार हैं

बैंक राष्ट्रीयकरण अधिनियम, 1970, एसबीआई सहायक अधिनियम और एसबीआई अधिनियम को निरस्त किया जाना चाहिए।

उपरोक्त अधिनियम को निरस्त करने के बाद, भारत सरकार को बैंक निवेश कंपनी (BIC) की स्थापना करनी चाहिए।बैंकों में सरकार के शेयरों को बीआईसी में स्थानांतरित किया जाना चाहिए।

एस. रमन (S Ramann)

एस. रमन वर्तमान में नेशनल ई-गवर्नेंस सर्विसेज लिमिटेड (National E-Governance Services Limited) के सीईओ हैं। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस भारत की पहली सूचना उपयोगिता है। वह 1991 बैच के भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा सेवा अधिकारी हैं।

SOURCE-G.K.TODAY

 

IH2A क्या है

वैश्विक उर्जा  कंपनियों  ने मिलकर India H2 Alliance नामक एक नया गठबंधन बनाया है। इस गठबंधन बनाने की पहल रिलायंस इंडस्ट्रीज और चार्ट इंडस्ट्रीज द्वारा शुरू की गई थी। India H2 Alliance (IH2A) मुख्य रूप से हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियों के व्यवसायीकरण पर केंद्रित है। यह भारत में हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा देने की दिशा में काम करेगा।

India H2 Alliance

IH2A मुख्य रूप से रिफाइनरियों, स्टील, सीमेंट, उर्वरक, बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स और भारी शुल्क परिवहन उपयोग के मामलों जैसे औद्योगिक समूहों पर ध्यान केंद्रित करेगा। यह दबाव और तरलीकृत रूप में हाइड्रोजन के भंडारण और परिवहन के लिए मानक भी बनाएगा।

IH2A के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

भारत में हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण करना

नीले और हरे हाइड्रोजन उत्पादन और भंडारण को विकसित करने में मदद करना

हाइड्रोजन-उपयोग औद्योगिक क्लस्टर का निर्माण

हाइड्रोजन द्वारा संचालित ईंधन कोशिकाओं पर आधारित परिवहन को बढ़ावा देना

India H2 Alliance के प्रमुख कार्य क्या हैं?

भारत H2 एलायंस निम्नलिखित पाँच क्षेत्रों पर भारत सरकार के साथ मिलकर काम करेगा:

राष्ट्रीय हाइड्रोजन नीति और रोडमैप 2021-30 विकसित करना।

पीपीपी मॉडल में नेशनल H2 टास्क फोर्स और मिशन बनाना

National Large H2 Demonstration Stage Projects की पहचान करना

National India H2 Fund का निर्माण करना

एक अच्छी हाइड्रोजन से जुड़ी क्षमता का निर्माण करना।इसमें उत्पादन, वितरण, भंडारण, औद्योगिक उपयोग-मामले, मानक और परिवहन उपयोग के मामले शामिल हैं।

ब्लू हाइड्रोजन (Blue Hydrogen) क्या है?

ब्लू हाइड्रोजन का निर्माण प्राकृतिक गैस के कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन में विभाजन से होता है। यह स्टीम मीथेन रिफॉर्मिंग या ऑटो थर्मल रिफॉर्मिंग द्वारा प्राप्त किया जाता है।

ग्रीन हाइड्रोजन क्या है?

ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) गैर-जीवाश्म स्रोतों से बनाया गया है।

प्रीपेड भुगतान उपकरण

भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में प्रीपेड भुगतान उपकरण में तीन मुख्य बदलाव किए हैं।

प्रीपेड भुगतान उपकरण (Prepaid Payment Instruments) क्या हैं?

प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स या PPI ऐसे साधन हैं जिनके माध्यम से ऐसे उपकरणों में स्टोर किये गये मूल्य से  सामान और सेवाओं की खरीद की जाएगी। प्रीपेड उपकरणों को प्रीपेड राशि तक पहुंचने के लिए मैग्नेटिक स्ट्राइप कार्ड, स्मार्ट कार्ड, इंटरनेट खाते, मोबाइल खाते, ऑनलाइन वॉलेट, पेपर वाउचर या किसी अन्य उपकरण के रूप में उपयोग किया जाता है।

प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट्स (PPI) में RBI द्वारा किए गए तीन बदलाव

2018 में, PPI को इंटरऑपरेबल बनने का विकल्प प्रदान किया गया था। इस विकल्प के तहत, एक कंपनी के ग्राहक दूसरी कंपनी या बैंक या पीपीआई के ग्राहकों को धन भेज सकेंगे। RBI ने यह विकल्प केवल उन्हीं मामलों में प्रदान किया है जहाँ पूर्ण केवाईसी किया जाता है। दो साल बाद भी, केवाईसी (Know Your Customer) पीपीआई की ओर माइग्रेशन हासिल नहीं हुआ है।

इस प्रकार, पीपीआई के पूर्ण केवाईसी में माइग्रेशन को बढ़ाने के लिए, निम्नलिखित बदलाव पेश किए गए हैं

PPI में बकाया राशि की सीमा को मौजूदा स्तर 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये किया जायेगा।

गैर-बैंक पीपीआई जारीकर्ताओं के पूर्ण केवाईसी पीपीआई के लिए नकद निकासी की सुविधा की अनुमति है।

RBI द्वारा संचालित केंद्रीयकृत भुगतान प्रणाली (NEFT और RTGS) की सदस्यता को गैर-बैंक जैसे केंद्रीय बैंक विनियमित भुगतान प्रणाली ऑपरेटरों के लिए खोला जायेगा।

SOURCE-G.K.TODAY

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