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Current Affair 9 June 2021

9 June Current Affairs

उर्वरक विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने उर्वरक विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के तहत नई निवेश नीति (एनआईपी)-2012, सात अक्टूबर, 2014 के अपने संशोधन के साथ अब रामागुंडम फर्टिलाइजर्स एंड कैमिकल्स लिमिटेड (आरएफसीएल) पर भी लागू होगी।

आरएफसीएल एक संयुक्त उपक्रम है, जिसमें नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एनएफएल), इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) और फर्टिलाइजर्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआईएल) शामिल हैं। इसे 17 फरवरी, 2015 को निगमित किया गया था। आरएफसीएल, एफसीआईएल की पुरानी रामागुंडम इकाई को दोबारा चलाने योग्य बना रहा है। इसके तहत एक नई गैस आधारित ग्रीन फील्ड नीम-कोटेडयूरिया संयंत्र लगाया जा रहा है, जिसकी उत्पादन क्षमता 12.7 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष है। आरएफसीएल यूरिया परियोजना की लागत 6165.06 करोड़ रुपये है। इस संयंत्र को गैस गेल द्वारा मिलती है, जो जीएसपीएल इंडिया ट्रांसको लिमिटेड (जीआईटीएल) की एमबीबीवीपीएल (मल्लावरम-भोपाल-भीलवाड़ा-विजयपुर गैस पाइपलाइन) के जरिये प्रदान करता है।

आरएफसीएल की उत्कृष्ट गैस आधारित इकाई भारत सरकार की उस पहल का हिस्सा है, जिसके तहत एफसीआईएल/एचएफसीएल की बंद पड़ी यूरिया इकाइयों को दोबारा शुरू करने का लक्ष्य है, ताकि यूरिया सेक्टर में आत्मनिर्भरता हासिल हो सके। रामागुंडम संयंत्र के शुरू हो जाने से देश में यूरिया के घरेलू उत्पादन में 12.7 लाख मीट्रिक टन वार्षिक का इजाफा हो जायेगा। इसके जरिये यूरिया क्षेत्र में माननीय प्रधानमंत्री का ‘आत्मनिर्भर भारत’ का विजन भी पूरा होगा। यह दक्षिण भारत में सबसे बड़ी उर्वरक निर्माण इकाई बन जायेगी। परियोजना से न केवल किसानों को उर्वरकों की उपलब्धि में सुधार आयेगा, वरन क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में भी इजाफा होगा। इसके साथ-साथ इलाके में सड़क, रेल, सहायक उद्यम आदि जैसे बुनियादी ढांचे का विकास होगा तथा देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

आरएफसीएल में कई अनोखी खूबियां हैं, जैसे आधुनिकतम प्रौद्योगिकी, एचटीईआर (हालदर टॉपसे एक्सचेंज रिफॉर्मर), जिनसे यूरिया संयंत्रों में यूरिया उत्पादन में ऊर्जा की बचत होगी। साथ ही 140 मीटर ऊंचे प्रिलिंगटॉवर से यूरिया की गुणवत्ता बढ़ेगी, ऑटोमैटिक रूप से यूरिया खाद बोरों में भर जायेगी और मालगाड़ियों में लाद दी जायेगी। इस तरह हर रोज 4000 मीट्रिक टन यूरिया भेजने की क्षमता होगी। एमसीआर (मुख्य नियंत्रक कक्ष) डीसीएस (डिस्ट्रीब्यूटेड कंट्रोल सिस्टम), ईएसडी (सुरक्षा के लिये एमरजेंसी शट-डाउन सिस्टम), वन-लाइन एमएमएस (मशीन मॉनिटरिंग सिस्टम), ओटीएस (ऑप्रेटर ट्रेनिंग साइम्यूलेटर) और पर्यावरण की निगरानी करने वाली प्रणाली से लैस है। इन प्रणालियों को कर्मठ, समर्पित और सुप्रशिक्षित ऑपरेटर चलाते हैं।

इस सुविधा में विश्व की बेहतरीन प्रौद्योगिकी का समावेश किया गया है। इसका लक्ष्य है कि तेलंगाना सहित भारत के दक्षिण और मध्य क्षेत्र के राज्यों की यूरिया की मांग पूरी की जा सके। इनमें आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र आदि राज्य शामिल हैं। आरएफसीएल द्वारा उत्पादित यूरिया का विपणन नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड करेगा।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार एफसीआईएल/एचएफसीएल की पांच बंद पड़ी इकाइयों को दोबारा चलाने योग्य बना रही है। यह काम रामागुंडम (तेलंगाना), तलचर (ओडिशा), गोरखपुर (उत्तरप्रदेश), सिंद्री (झारखंड) और बरौनी (बिहार) में 12.7 लाख मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता वाले अमोनिया यूरिया संयंत्र लगाकर पूरा किया जायेगा। इसमें 40 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा और इसके लिये अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के संयुक्त उपक्रमों को तैयार किया जायेगा। इन संयंत्रों के चालू हो जाने से घरेलू यूरिया उत्पादन में 63.5 लाख मीट्रिक टन वार्षिक का इजाफा हो जायेगा। इससे यूरिया के आयात में कटौती होगी और भारी विदेशी मुद्रा की बचत होगी। इसके जरिये यूरिया सेक्टर में आत्मनिर्भता आयेगी, जो माननीय प्रधानमंत्री के “आत्मनिर्भर भारत” विजन के अनुकूल है।

नई निवेश नीति-2012

सरकार ने 2 जनवरी, 2013 को नए निवेश नीति को अधिसूचित किया है ताकि नए निवेश को सुविधाजनक बनाने, भारत को आत्मनिर्भर बनाने और यूरिया क्षेत्र में आयात निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से। एनआईपी-2012 की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं: –

(i)        नीति गैस आधारित पौधों का समर्थन करती।

(ii)       इसमें एक लचीली मंजिल की संरचना है और छत की कीमत यूएस $ 6.5 से यूएस $ 14 / एमएमबीटीयू तक गैस की डिलीवरी कीमत पर गणना की जाती है।

(iii)      फर्श की कीमत 12% की इक्विटी (आरओई) पर रिटर्न और 20% की आरओई पर छत की कीमत पर निर्धारित की गई है।

(iv)      ग्रीनफील्ड / रिवाइवल और ब्राउनफील्ड परियोजनाओं के लिए, मंजिल और छत वितरित गैस मूल्य में वृद्धि के साथ बढ़ेगी यानी वितरित गैस मूल्य में प्रत्येक अमरीकी डालर 0.1 / एमएमबीटीयू की वृद्धि से फर्श और छत 2 अमरीकी डालर अमरीकी डॉलर तक पहुंच जाएगी 14 / एमएमबीटीयू।

(v)       14 अमरीकी डालर / एमएमबीटीयू की गैस कीमत से परे, केवल मंजिल में वृद्धि होगी।

(vi)      रेवंप प्रोजेक्ट्स के लिए, फर्श और छत को 7.5 / एमएमबीटीयू के डिलीवरी गैस मूल्य से जोड़ा गया है और 0.1 / एमएमबीटीयू के वितरित गैस मूल्य में हर वृद्धि के लिए मंजिल और छत 2.2 / एमटी की बढ़ोतरी होगी।

(vii)     यह बंद इकाइयों के पुनरुद्धार का समर्थन करता है।

(viii)    यह संसाधन उद्योग समृद्ध देशों में विदेशों में संयुक्त उद्यम में भारतीय उद्योग द्वारा निवेश को प्रोत्साहित करता है

(ix)      उत्तर पूर्वी राज्यों में इकाइयों के लिए, जीओआई / राज्य सरकारों द्वारा विस्तारित गैस मूल्य के संबंध में विशेष छूट किसी भी नए निवेश के लिए उपलब्ध होगी। वितरित मूल्य (विशेष छूट के लिए अनुमति देने के बाद) लागू मंजिल और छत की कीमत पर उचित समायोजन किया जाएगा, वित्त मंत्रालय की मंजूरी के अधीन 6.5 अमरीकी डालर प्रति एमएमबीटीयू से नीचे गिरता है।

एनआईपी-2012 में संशोधन

7 अक्टूबर, 2014 की अधिसूचना के अनुसार, निम्नलिखित संशोधन नई निवेश नीति-2012 (एनआईपी-2012) में किए गए थे:-

(i)        एनआईपी-2012 के पैरा 8.1 को निम्नानुसार बदला गया है:

‘केवल उन्हीं इकाइयों का उत्पादन, जो इस संशोधन अधिसूचना की तारीख से पांच साल के भीतर शुरू होता है, पॉलिसी के तहत कवर किया जाएगा। सब्सिडी वर्तमान में घरेलू बिक्री पर उत्पादन की शुरुआत से 8 साल की अवधि के लिए दी जाएगी। इसके बाद, इकाइयों को उस समय प्रचलित यूरिया नीति द्वारा शासित किया जाएगा।’

(ii)       एनआईपी-2012 के तहत परियोजना समर्थकों की गंभीरता / विश्वसनीयता सुनिश्चित करने और परियोजनाओं के समय पर निष्पादन के लिए, सभी परियोजना समर्थकों को रुपये की बैंक गारंटी (बीजी) प्रस्तुत करने की आवश्यकता होगी। प्रत्येक परियोजना के लिए 300 करोड़। परियोजना चक्र में बीजी को मील का पत्थर से जोड़ा जाएगा। रु. 300 करोड़, रु. एलएसटीके / ईपीसीए ठेकेदारों को अंतिम रूप देने और ठेकेदार के खाते में अग्रिम रिलीज के बाद 100 करोड़ बीजी जारी किया जाएगा; रुपये। परियोजना चक्र के साइट या मिडपॉइंट को जो भी पहले हो, उपकरण आदेश और आपूर्ति के पूरा होने पर 100 करोड़ बीजी जारी किया जाएगा; और रुपये का शेष परियोजना के पूरा होने पर 100 करोड़ बीजी। हालांकि, पीएसयू को बीजी प्रस्तुत करने से छूट दी गई है।

(iii)      विभिन्न मुद्दों पर निर्णय लेने के लिए सचिव (उर्वरक), सचिव (व्यय विभाग), सचिव (एमओपीएन और जी), सचिव (योजना आयोग) और सचिव (उर्वरक) के सचिव (कृषि) के सचिव के रूप में सचिवों की एक समिति गठित की गई है। जो एनआईपी-2012 के कार्यान्वयन के दौरान उत्पन्न होगा।

यूरिया मूल्य नीति

यूरिया नीति (मूल्य निर्धारण और प्रशासन) और यूरिया मूल्य निर्धारण नीति अनुभाग वर्तमान में, देश में 31 यूरिया इकाइयां हैं जिनमें से 28 यूरिया इकाइयां प्राकृतिक गैस (घरेलू गैस / एलएनजी / सीबीएम का उपयोग करके) का उपयोग करती हैं और शेष तीन यूरिया इकाइयां नाफ्था को फीडस्टॉक के रूप में उपयोग करती हैं।

यूरिया का एमआरपी वैधानिक रूप से भारत सरकार द्वारा तय किया जाता है और वर्तमान में यह रुपये है। 508 ग्राम बैग यूरिया / रुपये के लिए 268 रुपये 242 रुपये के यूरिया के लिए 242 रुपये जिसमें निजी व्यापारियों / पीएसयू / सहकारी समितियों के लिए डीलर मार्जिन के रूप में 354 / एमटी और 50 / एमटी शामिल है, जो खुदरा विक्रेताओं को रसीद को स्वीकार करने और अतिरिक्त प्रोत्साहन के रूप में एमएफएमएस (iiFMS) में स्टॉक की रिपोर्ट करने के लिए भुगतान किया जाता है। हालांकि, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्राकृतिक गैस पर अतिरिक्त वैट के लेवी के कारण उत्तर प्रदेश की कीमतें रु. यूरिया के 50 किलो बैग के लिए 298 और रु. यूरिया के 45 किलो बैग के लिए 269 रु. उपर्युक्त दरों केंद्रीय उत्पाद शुल्क, केंद्रीय कर, एकीकृत कर, संघ शासित कर या काउंटरवेलिंग ड्यूटी, राज्य कर और जहां भी लगाए गए अन्य स्थानीय करों से अलग हैं, भले ही खुदरा बिक्री बिंदु पर या मध्यवर्ती चरणों में और नीम कोटिंग के लिए अन्य शुल्क। फार्म गेट में उर्वरकों की वितरित लागत और किसान द्वारा देय एमआरपी के बीच अंतर भारत सरकार द्वारा उर्वरक निर्माता / आयातक को सब्सिडी के रूप में दिया जाता है।

SOURCE-PIB ANDhttps://fert.nic.in/

 

खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्यों

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने कृषि उपज की सरकारी खरीद, सीजन 2021-22 के लिए सभी खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी को स्वीकृति दे दी है।

सरकार ने किसानों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकारी खरीद, सीजन 2021-22 के लिए खरीफ फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी की है। बीते साल की तुलना में सबसे ज्यादा तिल यानी सेसामम (452 रुपये प्रति क्विंटल) और उसके बाद तुअर व उड़द (300 रुपये प्रति क्विंटल) के एमएसपी में बढ़ोतरी की सिफारिश की गई। मूंगफली और नाइजरसीड के मामले में, बीते साल की तुलना में क्रमशः 275 रुपये और 235 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। मूल्यों में इस अंतर का उद्देश्य फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन देना है।

कृषि उपज की सरकारी खरीद, सीजन 2021-22 के लिए सभी खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य इस प्रकार है

फसल एमएसपी2020-21 एमएसपी2021-22 उत्पादन की लागत* 2021-22 (रुपये/क्विंटल) एमएसपी में बढ़ोतरी (पूर्ण) लागत पर रिटर्न (प्रतिशत में)
धान (सामान्य) 1868 1940 1293 72 50
धान (ग्रेड ए)^ 1888 1960 72
ज्वार (हाइब्रिड) 2620 2738 1825 118 50
ज्वार (मलडंडी)^ 2640 2758 118
बाजरा 2150 2250 1213 100 85
रागी 3295 3377 2251 82 50
मक्का 1850 1870 1246 20 50
तुअर (अरहर) 6000 6300 3886 300 62
मूंग 7196 7275 4850 79 50
उड़द 6000 6300 3816 300 65
मूंगफली 5275 5550 3699 275 50
सूरजमुखी के बीज 5885 6015 4010 130 50
सोयाबीन (पीली) 3880 3950 2633 70 50
तिल 6855 7307 4871 452 50
नाइजरसीड 6695 6930 4620 235 50
कपास (मध्यम रेशा) 5515 5726 3817 211 50
कपास (लंबा रेशा)^ 5825 6025 200

इसका मतलब समग्र लागत से है, जिसमें मानव श्रम, बैल श्रम, मशीन श्रम, पट्टे पर ली गई जमीन का किराया, बीज, उर्वरक, खाद जैसी उपयोग की गई सामग्रियों पर व्यय, सिंचाई शुल्क, उपकरण और कृषि भवन पर मूल्यह्रास, कार्यशील पूंजी पर ब्याज, पम्प सेट आदि चलाने के लिए डीजल/बिजली आदि पर व्यय, मिश्रित खर्च और पारिवारिक श्रम के मूल्य को शामिल किया जाता है।

^ धान (ग्रेड ए), ज्वार (मलडंडी) और कपास (लंबे रेशे) के लिए लागत के आंकड़े को अलग से शामिल नहीं किया गया है।

सरकारी खरीद, सीजन 2021-22 के लिए खरीफ फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी, आम बजट 2018-19 में उत्पादन की अखिल भारतीय भारित औसत लागत (सीओपी) से कम से कम 1.5 गुने के स्तर पर एमएसपी के निर्धारण की घोषणा के क्रम में की गई है, जिसका उद्देश्य किसानों के लिए तार्किक रूप से उचित लाभ सुनिश्चित करना है। किसानों को उनकी उत्पादन लागत पर सबसे ज्यादा अनुमानित रिटर्न बाजरा (85 प्रतिशत) पर, उसके बाद उड़द (65 प्रतिशत) और तुअर (62 प्रतिशत) होने की संभावना है। बाकी फसलों के लिए, किसानों को उनकी लागत पर कम से कम 50 प्रतिशतरिटर्न होने का अनुमान है।

पिछले कुछ साल के दौरान तिलहनों, दालों और मोटे अनाज के पक्ष में एमएसपी में बदलाव की दिशा में हुए ठोस प्रयासों का उद्देश्य किसानों को अपने खेतों के ज्यादा हिस्से में इन फसलों को लगाने और सर्वश्रेष्ठ तकनीकों व कृषि विधियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जिससे मांग-आपूर्ति में संतुलन कायम किया जा सके। पोषण संपन्न पोषक अनाजों पर जोर ऐसे क्षेत्रों में इनके उत्पादन को प्रोत्साहन देना है, जहां भूजल पर दीर्घकालिक विपरीत प्रभावों के बिना धान-गेहूं पैदा नहीं किए जा सकते हैं।

इसके अलावा, वर्ष 2018 में सरकार द्वारा घोषित अम्ब्रेला योजना “प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान” (पीएम-आशा) से किसानों को उनकी उपज के लिए लाभकारी रिटर्न में बढ़ोतरी होगी। अम्ब्रेला योजना में प्रायोगिक आधार पर तीन उप-योजनाएं- मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस), मूल्य अंतर भुगतान योजना (पीडीपीएस) और निजी खरीद व भंडारण योजना (पीपीएसएस) शामिल हैं।

दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के उद्देश्य से, आगामी खरीफ सीजन 2021 में कार्यान्वयन के लिए विशेष खरीफ रणनीति तैयार की गई है। तुअर, मूंग और उड़द के लिए रकबा और उत्पादकता दोनों बढ़ाने के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की गई है। इस रणनीति के तहत, बीजों की सभी उपलब्ध अधिक उपज वाली किस्मों (एचवाईवी) को सहरोपण और एकल फसल के माध्यम से रकबा बढ़ाने के लिए मुफ्त वितरित किया जाएगा। इसी प्रकार, तिलहनों के लिए भारत सरकार ने खरीफ सीजन 2021 में किसानों को मिनी किट्स के रूप में बीजों की ऊंची उपज वाली किस्मों के मुफ्त वितरण की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है। विशेष खरीफ कार्यक्रम से तिलहन के अंतर्गत अतिरिक्त 6.37 लाख हेक्टेयर क्षेत्र आ जाएगा और इससे 120.26 लाख क्विंटल तिलहन और 24.36 लाख क्विंटल खाद्य तेल पैदा होने की संभावना है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)

यह किसी भी फसल की वह कीमत होती है, जो कि सरकारी एजेंसी द्वारा फसल की खरीद करते समय भुगतान की जाती है। वित्तीय वर्ष 2018-19 के केंद्रीय बजट में सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को किसानों की उत्पादन लागत का डेढ़ गुना करने की घोषणा की थी।

भारत में कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण कृषि लागत एवं मूल्य आयोग के द्वारा किया जाता है।

कौन तय करता है MSP

फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य CACP यानी कृषि लागत एवं मूल्य आयोग तय करता है। CACP तकरीबन सभी फसलों के लिए दाम तय करता है। हालांकि, गन्ने का समर्थन मूल्य गन्ना आयोग तय करता है। आयोग समय के साथ खेती की लागत के आधार पर फसलों की कम से कम कीमत तय करके अपने सुझाव सरकार के पास भेजता है।

कृषि मूल्य से आप क्या समझते हैं?

उत्पादक और उपभोक्ता दोनों को सुरक्षा प्रदान करना अर्थात राष्ट्रीय कृषि मूल्य नीति का उद्देश्य जहां किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाकर उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करना है वहीं दूसरी ओर इसके माध्यम से उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर खाद्यान्नों की उपलब्धता कराना है। … कृषि उत्पादों में मूल्य की स्थिरता को बनाये रखना।

वर्ष 1965 में ग्रीन रिवॉल्यूशन के समय एमएसपी को घोषणा हुई थी। साल 1966-67 में गेहूं की खरीद के समय इसकी शुरुआत हुई। आयोग ने 2018-19 में खरीफ सीजन के दौरान मूल्य नीति रिपोर्ट में कानून बनाने का सुझाव दिया था।

SOURCE-PIB

 

श्री अनूप चंद्र पांडेय

श्री अनूप चंद्र पांडेय ने आज भारत के नए निर्वाचन आयुक्त (ईसी) के रूप में पदभार ग्रहण किया। मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री सुशील चंद्रा की अध्यक्षता वाले भारत के निर्वाचन आयोग में निर्वाचन आयुक्त श्री राजीव कुमार के साथ श्री पांडे तीन सदस्यीय निकाय में दूसरे निर्वाचन आयुक्त के रूप में शामिल हुए।

श्री अनूप चंद्र पांडेय 1984 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रह चुके हैं। श्री पांडेय का जन्म 15 फरवरी, 1959 को हुआ था। भारत सरकार की लगभग 37 वर्षों की प्रतिष्ठित सेवा अवधि के दौरान, श्री पांडेय ने केंद्र के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों और उत्तर प्रदेश के अपने राज्य संवर्ग में काम किया है।

पेशे से नौकरशाह श्री अनूप चंद्र पांडेय ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री और पंजाब विश्वविद्यालय से सामग्री प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है। इतिहास के अध्ययन में गहरी रुचि रखने वाले श्री अनूप चंद्र पांडेय ने मगध विश्वविद्यालय से प्राचीन भारतीय इतिहास में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है।

श्री पांडेय अगस्त 2019 में उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव के रूप में सेवानिवृत्त हुए। भारत के निर्वाचन आयोग में शामिल होने से पहले, श्री पांडेय ने उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय हरित अधिकरण निरीक्षण समिति के सदस्य के रूप में कार्य किया है।

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव के रूप में उनके प्रशासनिक नेतृत्व में, राज्य ने 2019 में प्रयागराज में कुंभ मेला और वाराणसी दिवस में प्रवासी भारतीय दिवस समारोह का सफलतापूर्वक आयोजन किया।

इससे पहले, उत्तर प्रदेश में श्री अनूप चंद्र ने राज्य के औद्योगिक विकास आयुक्त के रूप में कार्य किया और 2018 में लखनऊ में एक विशाल निवेशक सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया। उन्होंने एकल खिडकी निवेश मित्र पोर्टल सहित उद्योगों और व्यापार क्षेत्र में विभिन्न नीतिगत सुधारों की शुरुआत की।

उत्तर प्रदेश सरकार में अपर मुख्य सचिव (वित्त) के रूप में श्री पांडेय के प्रयासों से उत्तर प्रदेश कृषि ऋण माफी योजना की सफल डिजाइनिंग, योजना और कार्यान्वयन किया गया।

श्री पांडेय ने केंद्र सरकार में अपनी प्रतिनियुक्ति के दौरान विविध विभागों में कार्यभार संभाला है। उन्होंने भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव तथा श्रम और रोजगार मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में कार्य किया, जहां उन्होंने जी-20 और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन जैसे विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व किया। वह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और उपभोक्ता कार्य विभाग में निदेशक भी रह चुके हैं।

श्री पांडेय की लेखन में गहरी रुचि है। उन्होंने “प्राचीन भारत में शासन” नामक एक पुस्तक लिखी है, जो ऋग्वैदिक काल से 650 ईस्वी तक प्राचीन भारतीय नागरिक सेवा के विकास, प्रकृति, कार्यक्षेत्र, कार्यों और सभी संबंधित पहलुओं के बारे में जानकारी प्रदान करती है।

भारत निर्वाचन आयोग

भारत निर्वाचन आयोग (अंग्रेज़ी: Election Commission of India) एक स्वायत्त एवं अर्ध-न्यायिक संस्थान है जिसका गठन भारत में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से विभिन्न से भारत के प्रातिनिधिक संस्थानों में प्रतिनिधि चुनने के लिए किया गया था। भारतीय चुनाव आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को की गयी थी।

संरचना

आयोग में वर्तमान में एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त होते हैं। जब यह पहले पहल 1950 में गठित हुआ तब से और 15 अक्टूबर, 1989 तक केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त सहित यह एक एकल-सदस्यीय निकाय था। 16 अक्टूबर, 1989 से 1 जनवरी, 1990 तक यह आर. वी. एस. शास्त्री (मु.नि.आ.) और निर्वाचन आयुक्त के रूप में एस.एस. धनोवा और वी.एस. सहगल सहित तीन-सदस्यीय निकाय बन गया। 2 जनवरी, 1990 से 30 सितम्बर, 1993 तक यह एक एकल-सदस्यीय निकाय बन गया और फिर 1 अक्टूबर, 1993 से यह तीन-सदस्यीय निकाय बन गया।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एवं कार्यावधि

मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति भारत का राष्ट्रपति करता है। मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल 6 वर्ष या आयु 65 साल, जो पहले हो, का होता है जबकि अन्य चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल 6 वर्ष या आयु 62 साल, जो पहले हो, का होता हैं। चुनाव आयुक्त का सम्मान और वेतन भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीश के सामान होता है। मुख्य चुनाव आयुक्त को संसद द्वारा महाभियोग के जरिए ही हटाया जा सकता हैं।

भारत निर्वाचन आयोग के पास विधानसभा, लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति आदि चुनाव से सम्बंधित सत्ता होती है जबकि ग्रामपंचायत, नगरपालिका, महानगर परिषद् और तहसील एवं जिला परिषद् के चुनाव की सत्ता सम्बंधित राज्य निर्वाचन आयोग के पास होती है।

निर्वाचन आयोग का कार्य तथा कार्यप्रणाली

  1. निर्वाचन आयोग के पास यह उत्तरदायित्व है कि वह निर्वाचनॉ का पर्यवेक्षण, निर्देशन तथा आयोजन करवाये वह राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति, संसद, राज्य विधानसभा के चुनाव करता है।
  2. निर्वाचक नामावली तैयार करवाता है।
  3. राजनैतिक दलॉ का पंजीकरण करता है।
  4. राजनैतिक दलॉ का राष्ट्रीय, राज्य स्तर के दलॉ के रूप में वर्गीकरण, मान्यता देना, दलॉ-निर्दलीयॉ को चुनाव चिन्ह देना।
  5. सांसद/विधायक की अयोग्यता (दल बदल को छोडकर) पर राष्ट्रपति/राज्यपाल को सलाह देना।
  6. गलत निर्वाचन उपायों का उपयोग करने वाले व्यक्तियॉ को निर्वाचन के लिये अयोग्य घोषित करना।

निर्वाचन आयोग की शक्तियाँ

सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयानुसार अनु. 324[1] में निर्वाचन आयोग की शक्तियाँ कार्यपालिका द्वारा नियंत्रित नहीं हो सकती उसकी शक्तियां केवल उन निर्वाचन संबंधी संवैधानिक उपायों तथा संसद निर्मित निर्वाचन विधि से नियंत्रित होती है निर्वाचन का पर्यवेक्षण, निर्देशन, नियंत्रण तथा आयोजन करवाने की शक्ति में देश में मुक्त तथा निष्पक्ष चुनाव आयोजित करवाना भी निहित है जहां कही संसद विधि निर्वाचन के संबंध में मौन है वहां निष्पक्ष चुनाव करवाने के लिये निर्वाचन आयोग असीमित शक्ति रखता है यधपि प्राकृतिक न्याय, विधि का शासन तथा उसके द्वारा शक्ति का सदुपयोग होना चाहिए।

निर्वाचन आयोग विधायिका निर्मित विधि का उल्लघँन नहीं कर सकता है और न ही ये स्वेच्छापूर्ण कार्य कर सकता है उसके निर्णय न्यायिक पुनरीक्षण के पात्र होते है।

निर्वाचन आयोग की शक्तियाँ निर्वाचन विधियों की पूरक है न कि उन पर प्रभावी तथा वैध प्रक्रिया से बनी विधि के विरूद्ध प्रयोग नहीं की जा सकती है।

यह आयोग चुनाव का कार्यक्रम निर्धारित कर सकता है चुनाव चिन्ह आवंटित करने तथा निष्पक्ष चुनाव करवाने के निर्देश देने की शक्ति रखता है।

सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी शक्तियों की व्याख्या करते हुए कहा कि वह एकमात्र अधिकरण है जो चुनाव कार्यक्रम निर्धारित करें चुनाव करवाना केवल उसी का कार्य है।

जनप्रतिनिधित्व एक्ट 1951 के अनु 14, 15 भी राष्ट्रपति, राज्यपाल को निर्वाचन अधिसूचना जारी करने का अधिकार निर्वाचन आयोग की सलाह के अनुरूप ही जारी करने का अधिकार देते है।

SOURCE-PIB

 

क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2022

क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2022 के शीर्ष-200 स्थानों में तीन भारतीय विश्वविद्यालयों ने अपनी जगह बनायी है। आईआईएससी बंगलुरू अनुसंधान के क्षेत्र में विश्व में प्रथम स्थान पर है। क्यूएस क्वाक्वेरेली साइमंडस, वैश्विक उच्च शिक्षा विश्लेषकों ने आज विश्व की अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय रैंकिंग का 18वां संस्करण जारी किया है।

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने विश्वविद्यालय रैंकिंग में आईआईटी बॉम्बे को 177वां स्थान, आईआईटी दिल्ली को 185वां स्थान और आईआईएससी बंगलुरू को 186वां स्थान प्राप्त करने पर बधाई दी।

श्री पोखरियाल ने कहा कि भारत शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगा रहा है और एक विश्वगुरू के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि हमें प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जैसे गुरु पर भी उतना ही गर्व है, जो लगातार छात्रों, संकाय के कर्मचारियों और भारतीय शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े अन्य सभी हितधारकों के कल्याण के बारे में सोचते रहे हैं।

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने आगे कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 2020 और इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस जैसी पहल हमारे कॉलेजों और संस्थानों को वैश्विक स्तर पर रैंकिंग दिलाने में सहायक साबित हुए हैं। उन्होंने कहा कि क्यूएस एवं टाइम्स ग्रुप द्वारा घोषित विश्वविद्यालय रैंकिंग को देखकर इस तथ्य को महसूस किया जा सकता है।

SOURCE-PIB

 

भारत-थाईलैंड समन्वित गश्त

भारतीय नौसेना और रॉयल थाई नौसेना के बीच भारत-थाईलैंड समन्वित गश्त (इंडो-थाई कॉर्पेट) का 31वां संस्करण दिनांक 09 से 11 जून 2021 के बीच आयोजित किया जा रहा है। भारतीय नौसेना का स्वदेशी निर्मित नौसैनिक अपतटीय गश्ती पोत जहाज (आईएनएस) सरयू एवं थाईलैंड का अपतटीय गश्ती पोत हिज मजेस्टीस थाइलैंड शिप (एचटीएमएस) कर्बी तथा दोनों नौसेनाओं के डोर्नियर समुद्री गश्ती विमान- कॉर्पेट में भाग ले रहे हैं।

दोनों देशों के बीच समुद्री संपर्कों को मजबूत करने और हिंद महासागर के इस महत्वपूर्ण हिस्से को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए सुरक्षित रखने के उद्देश्य से दोनों नौसेनाएं 2005 से अपनी अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) पर कॉर्पेट का द्वि-वार्षिक आयोजन कर रही हैं। कॉर्पेट नौसेनाओं के बीच समझ और अंतरसंचालनीयता निर्मित करती है और अवैध असूचित अनियमित (आईयूयू) मछली पकड़ना, मादक पदार्थों की तस्करी, समुद्री आतंकवाद, सशस्त्र डकैती और समुद्री डकैती जैसी गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने और ख़त्म करने के उपायों के ढांचे को सुविधा प्रदान करता है। यह तस्करी रोकने, अवैध आप्रवास की रोकथाम करने और समुद्र में खोजबीन एवं बचाव के संचालन के लिए सूचनाओं का आदान-प्रदान करके अभियान संबंधी तालमेल को बढ़ाने में मदद करता है।

सागर (सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फ़ॉर ऑल इन द रीजन) के भारत सरकार के दृष्टिकोण के एक भाग के तौर पर, भारतीय नौसेना क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ रही है। ऐसा द्विपक्षीय और बहुपक्षीय अभ्यासों, समन्वित गश्ती, संयुक्त ईईजेड निगरानी और मानवीय सहायता तथा आपदा राहत (एचएडीआर) अभियानों के माध्यम से किया गया है। भारतीय नौसेना और रॉयल थाई नौसेना के बीच विशेष रूप से एक घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं जिसमें अनेक प्रकार की गतिविधियां और आपसी तालमेल शामिल हैं, जो पिछले कुछ वर्षों में मजबूत हुए हैं।

31वीं भारत-थाई कॉर्पेट भारतीय नौसेना के अंतर-संचालनीय क्षमता को मजबूत करने एवं रॉयल थाई नौसेना के साथ मित्रता के सुदृढ संबंध बनाने के प्रयासों में योगदान देगी।

SOURCE-PIB

 

बिटकॉइन

अल सल्वाडोर (El Salvador) औपचारिक रूप से बिटकॉइन (Bitcoin) को कानूनी रूप से वैध मुद्रा के रूप में अपनाने वाला पहला देश बन गया है। बिटकॉइन को वैध बनाने का प्रस्ताव राष्ट्रपति नायब बुकेले (Nayib Bukele) द्वारा रखा गया था, जिसे बाद में कांग्रेस द्वारा मंज़ूरी दी गयी।

मुख्य बिंदु

हालाँकि अल साल्वाडोर के अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ $1 बिलियन के कार्यक्रम पर क्रिप्टोकरेंसी को वैध बनाने के संभावित प्रभाव के बारे में चिंता थी, परन्तु यह प्रस्ताव 84 वोटों में से 62 के बहुमत के साथ पारित किया गया।

बिटकॉइन की सहायता से विदेशों में रहने वाले सल्वाडोर के नागरिक,  प्रेषण (remittance) को आसानी से घर भेज सकते हैं, इसे देखते हुए बिटकॉइन को कानूनी मुद्रा के रूप में मंज़ूरी दी गयी है। अमेरिकी डॉलर भी अल सल्वाडोर में कानूनी मुद्रा के रूप में जारी रहेगा।

यह अल साल्वाडोर में वित्तीय समावेशन, निवेश, नवाचार, पर्यटन और आर्थिक विकास लाएगा।

अल साल्वाडोर में बिटकॉइन प्रेषण (Bitcoin Remittances in El Salvador)

विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 2019 में बिटकॉइन से अल साल्वाडोर में प्रेषण $6 बिलियन का था। यह सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का पांचवां हिस्सा है और यह दुनिया भर में उच्चतम अनुपात है।

क्रिप्टोकरेंसी क्या है

Crypto currency को digital  currency भी कहा जाता है। यह एक तरह का Digital Asset होता है जिसका इस्तेमाल चीज़ों की खरीदारी या Services के लिए किया जाता है। इन currencies में cryptography का इस्तेमाल होता है। यह एक Peer to Peer Electronic System होता है जिसका इस्तेमाल हम Internet के माध्यम से regular currencies के जगह में Goods और Services को purchase करने के लिए कर सकते हैं। इस व्यवस्था में सरकार ये Banks को बिना बताए भी काम हो सकता है इसलिए कुछ लोगों का मानना है की Crypto currency का इस्तेमाल गलत तरीके से भी किया जा सकता है।

अगर हम सबसे पहले Crypto currency की करें तो वो होगा Bitcoin जिसे सबसे पहले दुनिया में इन्हीं कार्यों के लिए लाया था। अगर आज हम देखें तो लगभग 1000 से भी ज्यादा Crypto currency पूरी दुनिया में मेह्जुद हैं।

सभी crypto currency की बात करें तो उनमें से जो सबसे पहले प्रसिद्ध हुआ वो है Bitcoin। इसे सबसे पहले भी बनाया गया था और इसे सबसे ज्यादा भी इस्तेमाल में लाया जाता है। Bitcoin को लेकर काफी controversies आयीं लेकिन आज में Bitcoin Crypto currencies में सबसे ऊपर स्थित है।

Crypto currencies के प्रकार

Crypto currencies बहुत सारे हैं लेकिन उनमें से कुछ ही ऐसे हैं जो की अच्छा perform कर रहे हैं और जिन्हें आप Bitcoin के अलावा भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

  1. Bitcoin (BTC)

अगर हम Crypto currency की बात करें और Bitcoin की बात न हो तब तो ये बिलकुल भी मुमकिन नहीं है। क्यूंकि Bitcoin दुनिया से सबसे पहला Crypto currency है। जिसे Satoshi Nakamoto ने 2009 में बनाया था। ये एक digital currency है जिसे की केवल online ही goods और services खरीदने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह एक De-centralized currency है जिसका मतलब है की इसपर Government या कोई भी institution का कोई भी हाथ नहीं है। अगर हम आज की बात करें तो इसका मूल्य अब काफी बढ़ गया है जो की अब लगभग 13 Lacks के करीब है एक coin का मूल्य। इससे आप इसके वर्तमान के महत्व के बारे में पता लगा सकते हैं।

  1. Ethereum (ETH)

Bitcoin के जैसे ही Ethereum भी open-source, decentralized block chain-based computing platform है। इसके Founder का नाम है Vitalik Buterin। इसके Crypto currency token को ‘Ether’ भी कहा जाता है। ये Platform इसके users को digital token बनाने में मदद करता है जिसकी मदद से इसे currency के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। हाल ही में ही एक Hard Fork के होने से Ethereum दो हिस्सों में विभाजित हो गया है Etherem (ETH) और Etheriem Classic (ETC)। Bit coin के बाद ये दूसरा सबसे प्रसिद्ध Crypto currency है।

  1. Lit coin (LTC)

Lit coin भी decentralized peer-to-peer crypto currency है जिसे की एक open source software जो की release हुआ है under the MIT/X11 license के अंतर्गत October, 2011 में Charles Lee के द्वारा जो की पहले एक Google Employee रह चुके हैं। इसके बनने के पीछे Bitcoin का बहुत बड़ा हाथ है और इसकी बहुत सारी features Bitcoin से मिलती झूलती हैं। Lit coin की block generation की time Bitcoin के मुकाबले 4 गुना कम है। इसलिए इसमें Transaction बहुत हो जल्दी पूर्ण हो जाती हैं। इसमें Scrypt algorithm का इस्तेमाल होता है Mining करने के लिए।

  1. Doge coin (Doge)

Doge coin की बनने की कहानी काफी रोचक है। इसे Bitcoin को मजाक करने के लिए कुत्ते से उसकी तुलना की गयी जो आगे चलकर एक Crypto currency का रूप ले लिया। इसके Founder का नाम है Billy Markus। Lit coin  की तरह ही इसमें भी Scrypt Algorithm का इस्तेमाल होता है।

  1. Fair coin (FAIR)

Fair coin एक बहुत ही बड़े grand socially-conscious vision का हिस्सा है जो की Spain-based  co-operative organization है और जिसे Catalan Integral Cooperative, or CIC के नाम से भी जाता है। ये Bitcoin की block chain technology का इस्तेमाल करता है, लेकिन ज्यादा socially-constructive design के साथ। दूसरे crypto currencies के जैसे Fair coin mining or minting new coins के ऊपर तो बिलकुल भी निर्भर नहीं करता है। लेकिन उसके जगह में ये certified validation nodes, or CDNs, का इस्तेमाल करते हैं block generation के लिए। Fair coin में coins को verify करने के लिए proof-of-stake or proof-of-work के बदले में ‘proof-of-cooperation’ का इस्तेमाल किया जाता है।

  1. Dash (DASH)

इसके पहले के नाम थे XCoin और Dark coin, Dash, का अर्थ है की ‘Digital’ और ‘Cash’। ये एक open source, peer-to-peer crypto currency है Bitcoin के जैसे ही। लेकिन इसमें Bitcoin की तुलना में ज्यादा features मेह्जुद है जैसे की ‘Instant Send’ और ‘Private Send’। Instant Send में Users आसानी से अपने transactions को पूर्ण कर सकते हैं वहीं Private send में transaction पूरी तरह से safe होता है जहाँ की users की privacy को काफी importance दिया जाता है।

Dash में एक uncommon algorithm का इस्तेमाल होता है जिसे की ‘X11’ जिसकी खासियत ये है की ये बहुत ही कम powerful hardware से भी Compatible हो जाता है, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग अपने currency को खुद ही mine कर सकें। X11 बहुत ही energy efficient  algorithm है, जो की Scrypt की तुलना में 30% तक कम बिजली की खपत करता है।

  1. Peer coin (PPC)

Peer coin जो की पूरी तरह से Bitcoin protocol पर based है और जिसमें की बहुत सी Source code दोनों में मिलती झूलती हैं। इसमें transaction को verify करने के लिए केवल Proof of work पर ही निर्भर नहीं किया जाता बल्कि इसके साथ Proof of stake system को भी नज़र में रखा जाता है। जैसे की नाम से पता चलता है की Peer coin भी peer-to-peer crypto currency है Bitcoin के जैसे ही, जिसमें की source code को release किया गया है MIT/X11 software license के अंतर्गत।

Peer coin भी Bitcoin के जैसे ही SHA-256 algorithm का इस्तेमाल करता है और इसमें transaction और mining करने के लिए बहुत ही कम पॉवर की जरूरत पड़ती है।

  1. Ripple (XRP)

Ripple 2012 में release हुआ और ये distributed open source protocol के ऊपर based है, Ripple एक real-time gross settlement system (RTGS) है जो की अपनी खुद की Crypto currency चलता है जिसे की Ripples (XRP) भी कहा जाता है। ये बहुत ही ज्यादा और famous Crypto currency है और जिसकी overall market cap है लगभग $10 billion। इनके Officials के अनुसार Ripple users को “secure, instant and nearly free global financial transactions किसी भी size के करने के लिए प्रदान करती है और जिसमें कोई भी charge backs नहीं होती है।

  1. Monero (XMR)

ये असल में Byte coin के fork से पैदा हुआ है सन 2014 में और उसके बाद से ही ये प्रसिधी लाभ की है। ये crypto currency सभी systems जैसे की Windows, Mac, Linux, Android, and FreeBSD में काम करती है। Bitcoin के जैसे ही Monero भी privacy और decentralization पर focus करती है। Bitcoin और Monero में जो सबसे महत्वपूर्ण अंतर है वो ये की Bitcoin में high-end GPUs का इस्तेमाल होता है वहीं Monero में consumer-level CPUs का इस्तेमाल होता है।

SOURCE-THE HINDU

 

मोनाल

मध्य अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सियांग जिले में स्थानीय वन्यजीव उत्साही लोगों द्वारा मोनाल की दो प्रजातियों को एक साथ देखा गया।

मुख्य बिंदु

खोजी गई प्रजाति हिमालयन मोनाल है, इसे लोफोफोरस इम्पेजेनस (Lophophorus Impejanus) भी कहा जाता है। यह अफगानिस्तान से पूर्वोत्तर भारत में व्यापक रूप से पाया जाता है।

जबकि, दूसरी प्रजाति स्क्लेटर मोनाल (Sclater’s Monal) है जिसे लोफोफोरस स्क्लेटेरी (Lophophorus Sclateri) भी कहा जाता है। यह दक्षिणी चीन और उत्तरी म्यांमार में पाया जाता है। इसे IUCN (International Union of Conservation of Nature) द्वारा असुरक्षित के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इसे कोमजी लिपिक (Komji Lipik) के पास 2,850 मीटर की ऊंचाई पर देखा गया।

इन पक्षियों को समुद्र तल से 4,173 मीटर की ऊंचाई पर माउंट एको डंबिंग (Mount Eko Dumbing) पर देखा गया।

मोनाल पक्षी (Monal)

मोनाल पक्षी तीतर (pheasant) परिवार के जीनस लोफोफोरस से संबंधित है जिसे फासियानिडे (Phasianidae) कहा जाता है। नर पक्षियों में रंगीन, इंद्रधनुषी पंख होते हैं। वे आहार के रूप में जड़ों, बल्बों और कीड़ों को पसंद करते हैं। आवास विनाश और शिकार के कारण उन्हें कमजोर के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

सियांग जिला (Siang District)

यह अरुणाचल प्रदेश का 21वां जिला है जिसे पश्चिम सियांग और पूर्वी सियांग जिलों को विभाजित करके बनाया गया था। इसका उद्घाटन 27 नवंबर, 2015 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नबामतुकी द्वारा किया गया था। इसका नाम सियांग नदी पर रखा गया है जो इस जिले से होकर बहती है। माना जाता है कि सियांग की उत्पत्ति हिमालय के उत्तरी हिस्से में अंगसी ग्लेशियर (Angsi Glacier) से हुई है। इस जिले में मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश की आदि जनजाति (Adi Tribe) निवास करती है।

SOURCE-GK TODAY

 

विश्व बैंक ने Global Economic Prospects Update जारी की

विश्व बैंक ने हाल ही में Global Economic Prospects Update जारी की। इस अपडेट के अनुसार, 2021 में वैश्विक अर्थव्यवस्था के 5.6% का बढ़ने की उम्मीद है। कुछ प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से मजबूत रिबाउंड के कारण यह 80 वर्षों में सबसे तेज मंदी के बाद की गति होगी।

मुख्य निष्कर्ष

इस अपडेट के अनुसार, कई उभरते बाजार और विकासशील अर्थव्यवस्थाएं COVID-19 महामारी और उसके बाद के संकट से जूझ रही हैं।

वैश्विक सुधार के संकेत हैं लेकिन कोविड-19 महामारी विकासशील देशों में लोगों के बीच गरीबी और असमानता को बढ़ा रही है।

दो-तिहाई उभरते बाजार और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए 2022 तक प्रति व्यक्ति आय के नुकसान की भरपाई नहीं होगी।

कम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं में, महामारी के प्रभाव ने गरीबी कम करने के लाभ को उलट दिया है और असुरक्षा को बढ़ा दिया है।

बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता और महामारी प्रतिबंधों में ढील के कारण 2021 में अमेरिकी विकास दर 8% रहने का अनुमान है।

चीन 5 प्रतिशत की दर से बढेगा।

उभरते बाजार और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का 2021 में 6% तक विस्तार होगा।

कई देशों में COVID-19 मामलों के फिर से बढ़ने और टीकाकरण की प्रगति में देरी के कारण रिकवरी में देरी हो रही है।

चीन के अलावा विकासशील देशों के समूह में रिबाउंड 4% होने की उम्मीद है।

रिपोर्ट की सिफारिशें

इस रिपोर्ट में विशेष रूप से कम आय वाले देशों के बीच वैक्सीन वितरण और ऋण राहत में तेजी लाने के लिए विश्व स्तर पर समन्वित प्रयास समय की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है। स्वास्थ्य संकट कम होने के बाद, नीति निर्माताओं को महामारी के स्थायी प्रभावों को संबोधित करना चाहिए और हरित, लचीला और समावेशी विकास लाने के लिए कदम उठाने चाहिए।

 

विश्व प्रत्यायन दिवस

हर साल, विश्व प्रत्यायन दिवस (World Accreditation Day) 9 जून को मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने की पहल अंतर्राष्ट्रीय प्रत्यायन मंच (International Accreditation Forum) और अंतर्राष्ट्रीय प्रयोगशाला प्रत्यायन सहयोग (International Laboratory Accreditation Cooperation) द्वारा शुरू की गई थी।

भारत

भारत में, क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (Quality Council of India) द्वारा यह दिवस मनाया जाता है। इसके अलावा, National Accreditation Board for Testing and calibration Laboratories और National Accreditation Board for Certification Bodies द्वारा वेबिनार आयोजित किए जाते हैं।

FSSAI के अनुसार, भारत में प्रत्यायन के संबंध में वर्तमान आवश्यकताएं निम्नलिखित हैं:

प्रवीणता परीक्षण

रैपिडटेस्टकिट विकसित करना

मान्यता प्राप्त संदर्भ सामग्री उत्पादकों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए

सूचना के आदान-प्रदान के लिए एकीकृत प्रणाली

खाद्य विश्लेषण के लिए रैपिड टेस्ट किट

उत्पादों को प्रमाणित करने के लिए प्रत्यायन योजना

भारत को भी वर्चुअल असेसमेंट को संस्थागत बनाने की जरूरत है।

क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (Quality Council of India)

भारतीय गुणवत्ता परिषद की स्थापना 1997 में हुई थी। QCI का मुख्य उद्देश्य देश में सभी सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में गुणवत्ता मानकों को स्थापित करना है। इसे नीदरलैंड मॉडल के आधार पर एक सार्वजनिक निजी भागीदारी के रूप में स्थापित किया गया था। यह उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा स्थापित की गयी थी।

QCI के प्रमुख प्रवर्तक CII (भारतीय उद्योग परिसंघ), FICCI (फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री) हैं।

SOURCE-GK TODAY

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