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CURRENT AFFAIRS – 16th JULY 2021

CURRENT AFFAIRS – 16th JULY 2021

प्रधानमंत्री ने गुजरात में विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन किया

 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से गुजरात में रेलवे की कई प्रमुख परियोजनाओं का उद्घाटन किया और कई अन्य परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने गुजरात साइंस सिटी में एक्वेटिक्स व रोबोटिक्स गैलरी और नेचर पार्क का भी उद्घाटन किया। उन्होंने दो नई ट्रेनों – गांधीनगर कैपिटल वाराणसी सुपरफास्ट एक्सप्रेस तथा गांधीनगर कैपिटल और वरेथा के बीच मेमू सर्विस ट्रेन – को भी झंडी दिखाकर रवाना किया।

उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश का लक्ष्य न सिर्फ एक ठोस ढांचा तैयार करना है, बल्कि ऐसा इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है जिसका अपना चरित्र हो। उन्होंने कहा कि बच्चों के प्राकृतिक विकास के लिए उनके मनोरंजन के साथ उनकी शिक्षा और रचनात्मकता को भी जगह मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि साइंस सिटी एक ऐसी परियोजना है, जो मनोरंजन और रचनात्मकता का संयोजन है। इसमें मनोरंजन की ऐसी गतिविधियां हैं जो बच्चों में रचनात्मकता को प्रोत्साहन देती हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि साइंस सिटी में बनी एक्वेटिक्स गैलरी और भी मनोरंजक होने वाली है। यह न केवल देश में बल्कि एशिया में भी सबसे बड़ी एक्वैरियम में से एक है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर की समुद्री जैव विविधता का एक ही स्थान पर नजारा अपने आप में एक अद्भुत अनुभव है।

प्रधानमंत्री ने भारत जैसे विशाल देश में रेलवे द्वारा निभाई गई अहम भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रेलवे विकास और सुविधाओं के नए आयाम लेकर आता है। बीते कुछ साल के दौरान किए गए प्रयासों के कारण, आज ट्रेनें पहली बार पूर्वोत्तर की राजधानियों में पहुंच रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “आज वडनगर भी इस विस्तार का अंग बन गया है। वडनगर स्टेशन के साथ मेरी कई यादें जुड़ी हुई हैं। नया स्टेशन वास्तव में काफी आकर्षक दिखता है। इस नई ब्रॉड गेज लाइन के निर्माण के साथ, वडनगर-मोढेरा-पाटन हेरिटेज सर्किट बेहतर रेल सेवा से जुड़ गया है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि नए भारत के विकास का वाहन एक साथ दो पटरियों पर चलकर ही आगे बढ़ेगा। एक पटरी आधुनिकता की है, दूसरी गरीब, किसानों और मध्यम वर्ग के कल्याण की है।

SOURCE-PIB

 

 

इंस्टीट्यूट ऑफ टीचिंग एंड रिसर्च इन आयुर्वेद (आईटीआरए) और गुजरात सरकार के बीच समझौते पर हस्ताक्षर

गुजरात के उप-मुख्यमंत्री श्री नितिनभाई पटेल और आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा की उपस्थिति में 15 जुलाई, 2021 को आयुष मंत्रालय के अधीनस्थ जामनगर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ टीचिंग एंड रिसर्च इन आयुर्वेद (आईटीआरए) और गुजरात सरकार के बीच एक समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये। इस समझौता-ज्ञापन के जरिये जामनगर में आयुर्वेद परिसर में चलने वाले सभी संस्थानों को आईटीआरए के तहत लाया गया है। उल्लेखनीय है कि आयुष मंत्रालय के अधीन आईटीआरए ऐसी एकमात्र संस्था है, जिसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा प्राप्त है। समझौता-ज्ञापन के महत्‍व का उल्लेख करते हुये श्री नितिन भाई ने कहा कि इस समझौते से आयुर्वेद की सभी शाखाओं की शिक्षण प्रणाली को मजबूत बनाने की राह खुलेगी।

“इस व्यवस्था से शिक्षा, अनुसंधान और औषधि के क्षेत्रों में नये द्वार खुलेंगे।” उम्मीद की जाती है कि आयुर्वेद के क्षेत्र में नये तरीके से शिक्षण की तैयारी करने में आसानी होगी। इसके अलावा चिकित्सा और अनुसंधान प्रणालियों तथा अध्ययन-अनुसंधान प्रक्रिया को भी बल मिलेगा। इस तरह आयुर्वेद की शिक्षा और अनुसंधान का दायरा बढ़ जायेगा।

इंस्टीट्यूट ऑफ टीचिंग एंड रिसर्च इन आयुर्वेद

आयुर्वेद में शिक्षण और अनुसंधान संस्थान गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय परिसर, जामनगर, गुजरात, भारत में स्थित है। इसे आयुर्वेदिक अध्ययन और अनुसंधान के लिए समर्पित राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया है

2020 में, इसने पूर्ववर्ती संस्थानों, अर्थात् आयुर्वेद में स्नातकोत्तर शिक्षण और अनुसंधान संस्थान, श्री गुलाबकुंवरबा आयुर्वेद महाविद्यालय और जामनगर में स्थित भारतीय आयुर्वेदिक औषधि विज्ञान संस्थान को अपने कब्जे में ले लिया। इसने महर्षि पतंजलि इंस्टीट्यूट फॉर योग एंड नेचुरोपैथी एजुकेशन एंड रिसर्च को स्वस्थवृत विभाग स्थापित करने के लिए भी अपने हाथ में ले लिया। अगस्त 1947 में भारत को ब्रिटेन से स्वतंत्रता मिलने के बाद, गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय की स्थापना आयुर्वेद के पुनर्गठन के हिस्से के रूप में की गई थी। इसकी स्थापना 1967 में जामनगर, गुजरात में मुख्यालय के साथ की गई थी।

संस्थान का

विश्वविद्यालय में निम्नलिखित घटक संस्थान शामिल हैं:

  • आयुर्वेद में स्नातकोत्तर शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान
  • आयुर्वेदिक अध्ययन के लिए अंतर्राष्ट्रीय केंद्र
  • श्री गुलाबकुंवरबा आयुर्वेद महाविद्यालय
  • इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट टीचिंग एंड रिसर्च इन आयुर्वेद पीजीटी सेल्फ फाइनेंस कोर्स सेल
  • महर्षि पतंजलि इंस्टीट्यूट फॉर योग नेचुरोपैथी एजुकेशन एंड रिसर्च Education
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदिक फार्मास्युटिकल साइंसेज
  • आयुर्वेद में यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ कंटिन्यूइंग एजुकेशन

SOURCE-PIB

 

 

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का 93वां स्थापना दिवस

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने आज वर्चुअल रूप से अपना 93वां स्थापना दिवस मनाया। समारोह में, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर और केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने संयुक्त रूप से किसानों को अपनी इच्छित भाषा में सही समय पर सही जानकारी प्राप्त करने की सुविधा के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘किसान सारथी’ लॉन्च किया।

स्थापना दिवस के अवसर पर, श्री तोमर ने विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कारों की घोषणा की और केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री परशोत्तम रूपाला, केंद्रीय कृषि  एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी और सुश्री शोभा करंदलाजे की उपस्थिति में आईसीएआर के प्रकाशनों का विमोचन किया।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुपअंग्रेज़ी: Indian Council of Agricultural Research) भारत सरकार के कृषि मंत्रालय में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के तहत एक स्वायत्तशासी संस्था है। रॉयल कमीशन की कृषि पर रिपोर्ट के अनुसरण में सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 के तहत पंजीकृत और 16 जुलाई 1929 को स्थापित इस सोसाइटी का पहले नाम इंपीरियल काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च था। इसका मुख्यालय नयी दिल्ली में है।

नेशनल एग्रीकल्चरल एजुकेशन एक्रीडेशन बोर्ड

राष्ट्रीय कृषि शिक्षा प्रत्यायन बोर्ड अथवा नेशनल एग्रीकल्चरल एजुकेशन एक्रीडेशन बोर्ड (एनएईएबी) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत शिक्षण संस्थाओं का मूल्यांकन करने वाली इकाई है। इससे मान्यता पाए बिना कालेज/विश्वविद्यालय से कृषि में स्नातक और परास्नातक किए छात्र वर्ष 2019-20 से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के किसी भी सरकारी कालेज अथवा विश्वविद्यालय में परास्नातक और पीएचडी नहीं कर सकता है। इसके चार क्षेत्रीय कार्यालय क्रमशः नई दिल्ली, कोलकाता, मुम्बई और बैंगलोर में स्थित है

कृषि विज्ञान केंद्र: कृषि विज्ञान केंद्र, ग्रामीण स्तर पर कृषि में विज्ञान और तकनीकी को बढ़ावा देने के लिये भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की एक पहल है। ICAR की पहल पर वर्ष 1974 में तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय,कोयंबटूर के अंतर्गत पुद्दुचेरी में पहले कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना की गई। वर्तमान में भारत में लगभग 716 कृषि विज्ञान केंद्र हैं

कृषक नवोन्मेष कोष

  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की योजना के अनुसार, प्रगतिशील किसानों को वैज्ञानिक प्रयोग करने, उनके नवाचारों को वैज्ञानिक वैधता प्रदान करने और इन नवाचारों को आगे ले जाने के लिये एक कृषक नवोन्मेष कोष की स्थापना की जाएगी।
  • इस कोष के अगले वित्तीय वर्ष तक सक्रिय हो जाने की संभावना है।
  • इस योजना के अंतर्गत नई दिल्ली में एक नवोन्मेष केंद्र (Innovation Centre) की स्थापना की जाएगी। इस केंद्र पर कृषि नवाचारों को वैज्ञानिक वैधता प्रदान करने के साथ ही किसानों को शोध की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
  • परिषद के अनुसार, वर्तमान में कृषि नवाचारों कोकृषि विज्ञान केंद्रों पर अभिलिखित किया जा रहा है, प्रस्तावित तंत्र किसानों को उनके नवाचारों को आगे ले जाने के लिये प्रोत्साहित करेगा।
  • इस योजना का प्रमुख उद्देश्य कृषि को विज्ञान से जोड़ना और विज्ञान आधारित कृषि को बढ़ावा देना है।
  • परिषद के विशेषज्ञों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कृषि पूर्णरूप से वैज्ञानिक प्रक्रिया है और यदि हम कृषि में विज्ञान के सिद्धांतों का सही प्रयोग नहीं करते हैं, तो हम हर बार असफल होंगे।
  • इस योजना के अंतर्गत कृषि क्षेत्र में तकनीकी को बढ़ावा देने के लिये किसानों और 105 स्टार्ट-अप के बीच संपर्क स्थापित करने की व्यवस्था की गई है।
  • इसके साथ ही कृषि आय को बढ़ाने के लिये ICAR ने अलग-अलग कृषि जलवायु क्षेत्रों के अनुकूल 45 जैविक कृषि मॉडल तैयार किये हैं और 51 समायोजित कृषि तंत्रों को प्रमाणित किया है।

SOURCE-PIB

 

 

Child Tax Credit Programme

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाईडेन ने कांग्रेस से “चाइल्ड टैक्स क्रेडिट प्रोग्राम” (Child Tax Credit Programme) का विस्तार करने का आह्वान किया क्योंकि इस कार्यक्रम में अमेरिका में बाल गरीबी (child poverty) को कम करने की क्षमता है।

मुख्य बिंदु

  • इस कार्यक्रम को इसकी दिसंबर समाप्ति तिथि से आगे बढ़ाया जाएगा।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ने शुरू में इस क्रेडिट को स्थायी बनाने के उद्देश्य से चार साल के लिए बढ़ाने की योजना बनाई है।
  • चाइल्ड टैक्स क्रेडिट प्रोग्राम को स्थायी बनाना बजट समझौते के पाँच मुख्य पहलुओं में से एक था।
  • IRS के अनुमानों के अनुसार, लगभग 39 मिलियन परिवारों और 65 मिलियन बच्चों को $15 बिलियन का वितरण किया जाएगा।
  • पात्र परिवार 2021 के लिए क्रेडिट का विस्तार कर सकते हैं, 6 वर्ष से 17 वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे के लिए मौजूदा $2,000 चाइल्ड टैक्स क्रेडिट में $1,000 और 5 वर्ष और उससे कम आयु के बच्चे के लिए $1,600 जोड़ सकते हैं।

चाइल्ड टैक्स क्रेडिट (Child Tax Credit – CTC)

CTC कई देशों में आश्रित बच्चों वाले माता-पिता को प्रदान किया जाने वाला टैक्स क्रेडिट है। क्रेडिट एक करदाता के आश्रित बच्चों की संख्या और उसकी आय के स्तर के आधार पर दिया जाता है। अमेरिका में, प्रति वर्ष $4,00,000 से कम आय वाले परिवार पूर्ण CTC का दावा कर सकते हैं, जबकि यूनाइटेड किंगडम में, £42,000 से कम आय वाले परिवारों को टैक्स क्रेडिट दिया जाता है। विकलांग बच्चों के लिए उच्च दर प्रदान की जाती है।

SOURCE-GK TODAY

 

 

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत खरीफ सीजन 2021 के लिए किसानों के नामांकन की कट-ऑफ तिथि 15 जुलाई से बढ़ाकर 23 जुलाई कर दी है।

मुख्य बिंदु

  • महाराष्ट्र सरकार ने फसल बीमा योजना की समय सीमा 23 जुलाई तक बढ़ाने का अनुरोध किया था।
  • राज्य सरकार ने कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न चुनौतियों के बाद खरीफ 2021 के लिए कट-ऑफ बढ़ाने का अनुरोध किया है।
  • महाराष्ट्र सरकार के अनुसार, 46 लाख किसानों ने योजना के लिए आवेदन किया है, लेकिन उनमें से कई ने अभी तक नामांकन की औपचारिकताएं पूरी नहीं की हैं।
  • भारत किसानों का देश है जहां ग्रामीण आबादी का अधिकतम अनुपात कृषि पर आश्रित है। माननीय प्रधानमंत्रीश्री नरेन्द्र मोदी नें 13 जनवरी 2016 को एक नई योजना प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) का अनावरण किया।
  • यह योजना उन किसानों पर प्रीमियम का बोझ कम करने में मदद करेगी जो अपनी खेती के लिए ऋण लेते हैं और खराब मौसम से उनकी रक्षा भी करेगी।
  • बीमा दावे के निपटान की प्रक्रिया को तेज और आसान बनाने का निर्णय लिया गया है ताकि किसान फसल बीमा योजना के संबंध में किसी परेशानी का सामना न करें। यह योजना भारत के हर राज्य में संबंधित राज्य सरकारों के साथ मिलकर लागू की जायेगी। एसोसिएशन में के निपटान की प्रक्रिया बनाने का फैसला किया गया है। इस योजना का प्रशासनकृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया जाएगा।

योजना के मुख्य आकर्षण

  • किसानों द्वारा सभी खरीफ फसलों के लिए केवल 2% एवं सभी रबी फसलों के लिए 5% का एक समान प्रीमियम का भुगतान किया जाना है। वार्षिक वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के मामले में प्रीमियम केवल 5% होगा।
  • किसानों द्वारा भुगतान किये जानेवाले प्रीमियम की दरें बहुत ही कम हैं और शेष प्रीमियम का भुगतान सरकार द्वारा किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं में फसल हानि के लिए किसानों को पूर्ण बीमित राशि प्रदान की जाए।
  • सरकारी सब्सिडी पर कोई ऊपरी सीमा नहीं है। भले ही शेष प्रीमियम 90% हो, यह सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
  • इससे पहले, प्रीमियम दर पर कैपिंग का प्रावधान था जिससे किसानों को कम कम दावे का भुगतान होता था। अब इसे हटा दिया गया है और किसानों को बिना किसी कटौती के पूरी बीमित राशि का दावा मिलेगा।
  • काफी हद तक प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। दावा भुगतान में होने वाली देरी को कम करने के लिए फसल काटने के डेटा को एकत्रित एवं अपलोड करने हेतु स्मार्ट फोन, रिमोट सेंसिंग ड्रोन और जीपीएस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
  • 2016-2017 के बजट में प्रस्तुत योजना का आवंटन 5, 550 करोड़ रूपये का है।
  • बीमा योजना को एक मात्र बीमा कंपनी, भारतीय कृषि बीमा कंपनी (एआईसी)द्वारा नियंत्रित किया जाएगा।
  • पीएमएफबीवाईराष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (एनएआईएस) एवं संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (एमएनएआईएस) की एक प्रतिस्थापन योजना है और इसलिए इसे सेवा कर से छूट दी गई है।

योजना के उद्देश्य

  • प्राकृतिक आपदाओं, कीट और रोगों के परिणामस्वरूप अधिसूचित फसल में से किसी की विफलता की स्थिति में किसानों को बीमा कवरेज और वित्तीय सहायता प्रदान करना।
  • कृषि में किसानों की सतत प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए उनकी आय को स्थायित्व देना।
  • किसानों को कृषि में नवाचार एवं आधुनिक पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • कृषि क्षेत्र में ऋण के प्रवाह को सुनिश्चित करना।

किसानों का कवरेज

अधिसूचित क्षेत्रों में अधिसूचित फसल उगानेवाले पट्टेदार/ जोतदार किसानों सहित सभी किसान कवरेज के लिए पात्र हैं। गैर ऋणी किसानों को राज्य में प्रचलित के भूमि रिकार्ड अधिकार (आरओआर), भूमि कब्जा प्रमाण पत्र (एल पी सी) आदि आवश्यक दस्तावेजी प्रस्तुत करना आवश्यक हैं। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा अनुमति अधिसूचित लागू अनुबंध, समझौते के विवरण आदि अन्य संबंधित दस्तावेजों भी आवश्यक हैं।

अनिवार्य घटक वित्तीय संस्थाओं से अधिसूचित फसलों के लिए मौसमी कृषि कार्यों (एस ए ओ) के लिए ऋण लेने वाले सभी किसान अनिवार्यतः आच्छादित होंगें।

स्वैच्छिक घटक गैर ऋणी किसानों के लिए योजना वैकल्पिक होगी।

योजना के तहत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/महिला किसानों की अधिकतम कवरेज सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किया जाएगा। इस के तहत बजट आबंटन और उपयोग संबंधित राज्य के अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/सामान्य वर्ग द्वारा भूमि भूमि-धारण के अनुपात में होगा। पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) को कार्यान्वयन एवं फसल बीमा योजनाओं पर किसानों की प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए शामिल किया जा सकता है।

प्रबंधन और योजना की निगरानी

राज्य में योजना के कार्यक्रम की निगरानी के लिए संबंधित राज्य की मौजूदा फसल बीमा पर राज्य स्तरीय समन्वय समिति (SLCCCI) जिम्मेदार होगी। हालांकि कृषि सहयोग और किसान कल्याण विभाग (डीएसी और परिवार कल्याण) के संयुक्त सचिव (क्रेडिट) की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय स्तर की निगरानी समिति (NLMC) राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना की निगरानी करेगी।

किसानों को अधिकतम लाभ सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक फसली मौसम के दौरान प्रभावी कार्यान्वयन के लिए निम्नलिखित निगरानी उपायों का पालन प्रस्तावित है:

  • नोडल बैंकों के बिचौलिये आगे मिलान के लिए बीमित किसानों (ऋणी और गैर-ऋणी दोनों) की सूची अपेक्षित विवरण जैसे नाम, पिता का नाम, बैंक खाता नंबर, गांव, श्रेणी – लघु और सीमांत समूह, महिला, बीमित होल्डिंग, बीमित फसल, एकत्र प्रीमियम, सरकारी सब्सिडी आदि सॉफ्ट कॉपी में संबंधित शाखा से प्राप्त कर सकते हैं। इसे ई मंच तैयार हो जाने पर ऑनलाइन कर दिया जाएगा।
  • संबंधित बीमा कंपनियों से दावों की राशि प्राप्त करने के बाद, वित्तीय संस्थाओं/बैंकों को एक सप्ताह के भीतर दावा राशि लाभार्थियों के खाते में हस्तांतरण कर देना चाहिए। इसे किसानों के खातों में बीमा कंपनी द्वारा सीधे ऑनलाइन हस्तांतरित कर दिया जाएगा।
  • लाभार्थियों की सूची (बैंकवार एवं बीमित क्षेत्रवार) फसल बीमा पोर्टल एवं संबंधित बीमा कंपनियों की वेबसाइट पर अपलोड किया जा सकता है।
  • करीब 5% लाभार्थियों को क्षेत्रीय कार्यालयों/बीमा कंपनियों के स्थानीय कार्यालयों द्वारा सत्यापित किया जा सकता है जो संबंधित जिला स्तरीय निगरानी समिति (DLMC) और राज्य सरकार/फसल बीमा पर राज्य स्तरीय समन्वय समिति (SLCCCI) को प्रतिक्रिया भेजेंगें।
  • बीमा कंपनी द्वारा सत्यापित लाभार्थियों में से कम से कम 10% संबंधित जिला स्तरीय निगरानी समिति (DLMC) द्वारा प्रतिसत्यापित किए जायेंगें और वे अपनी प्रतिक्रिया राज्य सरकार को भेजेंगें।
  • लाभार्थियों में से 1 से 2% का सत्यापन बीमा कंपनी के प्रधान कार्यालय/केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त स्वतंत्र एजेंसियों/राष्ट्रीय स्तर की निगरानी समिति द्वारा किया जा सकता है और वे आवश्यक रिपोर्ट केन्द्र सरकार को भेजेंगें।

इसके अलावा, जिला स्तरीय निगरानी समिति (DLMC) जो पहले से ही चल रही फसल बीमा योजनाओं जैसे राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (एनएआईएस), मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS), संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (MNAIS) और नारियल पाम बीमा योजना (CPIS) के कार्यान्वयन और निगरानी की देखरेख कर रही है, योजना के उचित प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होगी।

SOURCE-THE HINDU

 

 

Monk Fruit’

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में चीन से लाये गये ‘monk fruit’ की खेती शुरू हो गई है। इस फल को हिमाचल प्रदेश में फील्ड परीक्षण के लिए पालमपुर स्थित वैज्ञानिक अनुसंधान और औद्योगिक प्रौद्योगिकी परिषद-हिमालयी जैव-संसाधन प्रौद्योगिकी संस्थान (CSIR-IHBT) द्वारा पेश किया गया था।

मुख्य बिंदु 

  • ‘Monk fruit’ अपने गुणों के लिए गैर-कैलोरी प्राकृतिक स्वीटनर (non-caloric natural sweetener) के रूप में जाना जाता है।
  • CSIR-IHBT द्वारा चीन से बीज आयात करने और इसे घर में उगाने के तीन साल बाद फील्ड परीक्षण शुरू हो गया है।
  • रायसन (Raison) गांव के एक किसान के खेत में परीक्षण के लिए इन फलों के 50 पौधे लगाए गए और किसान के साथ एक ‘सामग्री हस्तांतरण समझौते’ पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
  • नई फसल से 3 लाख रुपये से 5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर के बीच आर्थिक लाभ होने का अनुमान है।
  • क्षेत्र की कृषि-जलवायु परिस्थितियों में ‘monk fruit’ के पूर्ण जीवन-चक्र को आकर्षित करने के लिए फूलों के पैटर्न, परागण व्यवहार और फल सेटिंग समय का भी डॉक्यूमेंटेशन किया गया था।

‘Monk Fruit’ की खेती के लिए शर्तें

‘Monk fruit’ “एक बारहमासी फसल” है। इसका जीवनकाल चार से पांच साल का होता है। इस फसल पर अंकुरण के आठ से नौ महीने बाद फल लगना शुरू हो जाता है। यह 16-20 डिग्री सेल्सियस के वार्षिक औसत तापमान और आर्द्र परिस्थितियों वाले पहाड़ी क्षेत्र में अच्छे से उगता है।

पृष्ठभूमि

‘Monk fruit’ ने इसका नाम बौद्ध भिक्षुओं से लिया जिन्होंने पहली बार इसका इस्तेमाल किया था।

बीज अंकुरण दर

‘Monk fruit’ की बीज अंकुरण दर धीमी और कम होती है। इस प्रकार, अंकुरण दर बढ़ाने और अंकुरण समय को कम करने के लिए CSIR-IHBT द्वारा बीज अंकुरण तकनीक विकसित की गई है। इस संस्थान ने रोपण विधि और मानकीकृत रोपण समय भी तैयार किया है।

‘Monk fruit’  के बारे में

‘Monk fruit’ (siraitia grosvenorii), अपने तीव्र मीठे स्वाद के लिए जाना जाता है। इसका उपयोग गैर-कैलोरी प्राकृतिक स्वीटनर के रूप में किया जाता है। इसका मीठा स्वाद कुकुरबिटेन-प्रकार ट्राइटरपीन ग्लाइकोसाइड्स (cucurbitane-type triterpene glycosides) के समूह की सामग्री के कारण होता है जिसे मोग्रोसाइड (mogrosides) कहा जाता है।

SOURCE-GK TODAY

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