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CURRENT AFFAIRS – 19th JULY 2021

CURRENT AFFAIRS – 19th JULY 2021

डेयरी इन्वेस्टमेंट ऐक्सेलरेटर की स्थापना

पशुपालन एवं डेयरी विभाग (डीएएचडी), भारत सरकार ने डेयरी क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने और उसे सुगम बनाने को ध्यान में रखते हुए,अपने निवेश सुविधा प्रकोष्ठ के अंतर्गत डेयरी इन्वेस्टमेंट ऐक्सेलरेटर की स्थापना की है। यह इन्वेस्टमेंट ऐक्सेलरेटर निवेशकों के साथ इंटरफेस के रूप में काम करने के लिए गठित की गई एक क्रॉस फंक्शनल टीम है, जो निवेश चक्र में सहायता प्रदान करेगी:

  • निवेश अवसरों के मूल्यांकन के लिए विशिष्ट जानकारी प्रदान करना
  • सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन संबंधित सवालों का जवाब देना
  • रणनीतिक साझीदारों के साथ जुड़ना
  • राज्य के विभागों और संबंधित प्राधिकरणों के साथ जमीनी रूप से सहायता प्रदान करना

इसके अलावा, पशुपालन एवं डेयरी विभाग (डीएएचडी) के साथ मिलकर डेयरी इन्वेस्टमेंट ऐक्सेलरेटर वैश्विक एवं स्थानीय उद्योग प्रतिभागियों के साथ मिलकर कई कार्यक्रमों का आयोजन करेगा और निवेशकों के साथ आमने-सामने चर्चा करेगा जिससे उनके दृष्टिकोण को समझा जा सके, सरकारी अधिकारियों के साथ उनकी सीधी बातचीत को सुगम बनाया जा सके और उद्योग के अन्य निवेशकों के साथ जुड़ा जा सके।

डेयरी इन्वेस्टमेंट ऐक्सेलरेटर द्वारा निवेशकों के बीच पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (एएचआईडीएफ) के बारे में जागरूकता फैलाने का भी काम किया जाता है। एएचआईडीएफ, भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग की प्रमुख योजनाओं में से एक है जिसके अंतर्गत उद्यमियों, निजी कंपनियों, एमएसएमई,
किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और संभाग 8 कंपनियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए 15,000 करोड़ रुपये का कोष स्थापित किया गया है। पात्र संस्थाओं द्वारा इस योजना का लाभ डेयरी प्रसंस्करण एवं संबंधित मूल्य संवर्धन बुनियादी अवसंरचना, मांस प्रसंस्करण एवं संबंधित मूल्य संवर्धन बुनियादी अवसंरचना और पशु आहार संयंत्र के क्षेत्रों में नई इकाइयों की स्थापना करने अथवा मौजूदा इकाइयों का विस्तार करने के लिए उठाया जा सकता है।

  • ऋण पर 3% ब्याज की छूट
  • 6 वर्ष अदायगी अवधि के साथ 2 वर्ष अवधि की छूट
  • 750 करोड़ रुपये की क्रेडिट गारंटी

डीएएचडी द्वारा उन सभी निजी कंपनियों, विशिष्ट उद्यमियों और स्टार्ट-अप को प्रोत्साहित किया जाता है, जो dairy-accelerator@lsmgr.nic.in पर डेयरी क्षेत्र में निवेश करने और इन्वेस्टमेंट ऐक्सेलरेटर तक पहुंच प्राप्त करने में दिलचस्पी दिखाते हैं।

भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है जिसका वैश्विक दुग्ध उत्पादन में 23% का योगदान है। पिछले 5 वर्षों में देश के वार्षिक दुग्ध उत्पादन में 6.4% (सीएजीआर) की बढ़ोतरी हुई है। अपने सामाजिक-आर्थिक महत्व के कारण डेयरी, भारत सरकार के लिए एक उच्च प्राथमिकता वाला क्षेत्र है। यह देश की अर्थव्यवस्था में 5% का योगदान करने वाला एकमात्र सबसे बड़ा कृषि उत्पाद है और 80 करोड़ से ज्यादा किसानों को सीधे रोजगार प्रदान करता है। इसके अलावा, देश में पैकेज्ड डेयरी उत्पाद का बहुत बड़ा घरेलू बाजार हैं, जिनकी कीमत 2.7 से लेकर 3.0 लाख करोड़ रुपये है, जोदहाई अंकोंकी वृद्धि दिखाती है।

डेयरी क्षेत्र में बाजार में वृद्धि के लिए प्रसंस्करण, शीतलन, लॉजिस्टिक, पशु चारा इत्यादि में महत्वपूर्ण बुनियादी अवसंरचना निवेश की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, मूल्य संवर्धित डेयरी उत्पादों, जैविक/फॉर्म ताजा दूध और निर्यात जैसे क्षेत्रों में नए आकर्षक अवसर मौजूद हैं। डेयरी क्षेत्र में पर्याप्त रूप से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) किया जा रहा है जो कि भारतीय खाद्य क्षेत्र में एफडीआई का लगभग 40% है। इस क्षेत्र में बुनियादी अवसंरचना के विकास को सुगम बनाने के लिए, केंद्र/राज्य सरकार द्वारा निवेश को आकर्षित करने के लिए विभिन्न प्रोत्साहन प्रदान किए गए हैं।

पशुपालन अवसंरचना विकास कोष

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घोषित प्रोत्साहन पैकेज के अंतर्गत 15000 करोड़ रुपए के पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF) की स्थापना की बात की गई थी।
  • इस कोष के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों में, किसान उत्पादक संगठन (FPO), MSMEs, कंपनी अधिनियम की धारा 8 में शामिल कंपनियाँ, निजी क्षेत्र की कंपनियाँ और व्यक्तिगत उद्यमी शामिल होंगे।
  • उल्लेखनीय है कि पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF) से संबंधित प्रावधान देश भर के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू होंगे।

उद्देश्य 

  • पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF) का प्रमुख उद्देश्य दूध और माँस प्रसंस्करण की क्षमता और उत्पाद विविधीकरण को बढ़ावा देना है, ताकि भारत के ग्रामीण एवं असंगठित दुग्ध और माँस उत्पादकों को संगठित दुग्ध और माँस बाज़ार तक अधिक पहुँच प्रदान की जा सके।
  • उत्पादकों को उनके उत्पाद की सही कीमत प्राप्त करने में मदद करना।
  • स्थानीय उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण दुग्ध और माँस उपलब्ध कराना।
  • देश की बढ़ती आबादी के लिये प्रोटीन युक्त समृद्ध खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करना और बच्चों में कुपोषण की बढ़ती समस्या को रोकना।
  • देश भर में उद्यमिता को प्रोत्साहित करना और संबंधित क्षेत्र में रोज़गार सृजित करना।
  • दुग्ध और माँस उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित करना।

कोष के कार्यान्वयन संबंधी दिशा-निर्देश

  • पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF) के तहत सभी पात्र परियोजनाएँ अनुमानित परियोजना लागत का अधिकतम 90 प्रतिशत तक ऋण के रूप में अनुसूचित बैंकों से प्राप्त करने में सक्षम होंगी, जबकि सूक्ष्म एवं लघु इकाई की स्थिति में पात्र लाभार्थियों का योगदान 10 प्रतिशत, मध्यम उद्यम इकाई की स्थिति में 15 प्रतिशत और अन्य श्रेणियों में यह 25 प्रतिशत हो सकता है।
  • पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF) के तहत 15000 करोड़ रुपए की संपूर्ण राशि बैंकों द्वारा 3 वर्ष की अवधि में वितरित की जाएगी।
  • पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF) के तहत मूल ऋण राशि के लिये 2 वर्ष की ऋण स्थगन (Moratorium) अवधि और उसके पश्चात् 6 वर्ष के लिये पुनर्भुगतान अवधि प्रदान की जाएगी, इस प्रकार कुल पुनर्भुगतान अवधि 8 वर्ष की होगी, जिसमें 2 वर्ष की ऋण स्थगन (Moratorium) अवधि भी शामिल है।
  • संबंधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, अनुसूचित बैंक यह सुनिश्चित करेंगे कि ऋण के वितरण के पश्चात् पुनर्भुगतान अवधि 10 वर्ष से अधिक न हो, जिसमें ऋण स्थगन (Moratorium) अवधि भी शामिल है।
  • इसके अलावा भारत सरकार द्वारा नाबार्ड (NABARD) के माध्यम से प्रबंधित 750 करोड़ रुपए के ऋण गारंटी कोष की भी स्थापना की जाएगी।
  • इसके तहत उन स्वीकृत परियोजनाओं को ऋण गारंटी प्रदान की जाएगी जो MSMEs की परिभाषित सीमा के अंतर्गत आती हैं।
  • ऋण गारंटी की सीमा उधारकर्त्ता द्वारा लिये गए ऋण के अधिकतम 25 प्रतिशत तक होगी।

पशुपालन अवसंरचना विकास कोष का महत्त्व

  • आँकड़ों के अनुसार, भारत द्वारा वर्तमान में, 188 मिलियन टन दुग्ध उत्पादन किया जा रहा है और वर्ष 2024 तक दुग्ध उत्पादन बढ़कर 330 मिलियन टन तक होने की संभावना है।
  • वर्तमान में केवल 20-25 प्रतिशत दूध ही प्रसंस्करण क्षेत्र के अंतर्गत आता है, हालाँकि सरकार ने इसे 40 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
  • इस कोष के माध्यम से बुनियादी ढाँचा तैयार होने के पश्चात् लाखों किसानों को इससे फायदा पहुँचेगा और दूध का प्रसंस्करण भी अधिक होगा।
  • इससे डेयरी उत्पादों के निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा जो कि वर्तमान समय में नगण्य है। गौरतलब है कि डेयरी क्षेत्र में भारत को न्यूज़ीलैंड जैसे देशों के मानकों तक पहुँचने की आवश्यकता है।
  • चूँकि, भारत में डेयरी उत्पादन का लगभग 50-60 प्रतिशत अंतिम मूल्य प्रत्यक्ष रूप से किसानों को वापस मिल जाता है, इसलिये इस क्षेत्र में होने वाले विकास से किसान की आय पर प्रत्यक्ष रूप से महत्त्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
  • ध्यातव्य है कि भारत में प्रौद्योगिकी हस्तक्षेपों के माध्यम से पशुओं की नस्ल सुधार का कार्य तेज़ी से किया जा रहा है, आँकड़ों के अनुसार सरकार द्वारा 53.5 करोड़ पशुओं के टीकाकरण का निर्णय लिया गया है, वहीं 4 करोड़ पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है।
  • हालाँकि अभी भी भारत प्रसंस्करण के क्षेत्र में काफी पीछे है, इस कोष के माध्यम से विभिन्न प्रसंस्करण संयंत्र भी स्थापित किये जाएंगे।
  • इस कोष के माध्यम से भारत के किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य में मदद मिलेगी और यह 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था के सपने को साकार करने की दिशा में भी एक महत्त्वपूर्ण कदम होगा।
  • अनुमान के अनुसार, सरकार द्वारा गठित इस कोष और इसके तहत स्वीकृति उपायों के माध्यम से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से 35 लाखों लोगों के लिये आजीविका का निर्माण होगा।

SOURCE-PIB

 

 

3डी रोबोटिक मोशन फैंटम

  • फिलहाल परीक्षण के अंतिम चरण में, उपकरण‘मेक इन इंडिया’ पहल के अनुसार
  • वैज्ञानिकों के एक समूह द्वारा स्वेदशी स्तर पर विकसित;3डी प्लेटफॉर्म की लागत काफी कम

भारत में डॉक्टरों को जल्द ही कैंसर के मरीज के पेट के ऊपरी हिस्से या वक्ष क्षेत्र में रेडिएशन में मदद करने के लिए फेफड़ों की गति की नकल की सुविधा मिल जाएगी।

पेट के ऊपरी हिस्से या वक्ष क्षेत्रों से जुड़े कैंसर ट्यूमर पर केंद्रित रेडिएशन की डोज देने में श्वास की गति एक बाधा है। इस गति से कैंसर के उपचार के दौरान रेडिएशन में ट्यूमर से ज्यादा बड़े क्षेत्र पर असर पड़ता है, जिससे ट्यूमर के आसपास के ऊतक प्रभावित होते हैं। किसी भीमरीज के फेफड़ों की गति पर नजर रखकर मरीज के लिये केंद्रित रेडिएशन को उसके मुताबिक किया जा सकता है जिसके बाद रेडियेशन देने से वहन्यूनतम खुराक के साथ प्रभावी हो सकता है। एक मानव पर ऐसा करने से पहले, एक रोबोट फैंटम पर इसकी जांच किए जाने की जरूरत है।

हाल में तकनीक विकास के चलते गेटिंग और ट्रैकिंग जैसी अत्याधुनिक गति प्रबंधन तकनीक सामने आई हैं। भले ही श्वसन संबंधी गतिशील लक्ष्यों के रेडिएशन उपचार में निरंतर विकास हुआ है, लेकिन इसके समानांतर गुणवत्ता आश्वासन (क्यूए) टूल विकसित नहीं हुए हैं। श्वसन संबंधी गति प्रबंधन तकनीकों की उपचार प्रक्रिया में एक विशेष प्रकार की सटीकता के उद्देश्य से मरीज के एक अंग में अवशोषित खुराक की मात्रा के निर्धारण के लिए अतिरिक्त श्वसन संबंधी गतिशील फैंटम की जरूरत होती है।

भारतीय वैज्ञानिकों के एक समूह ने एक नवीन और सस्ती 3डी रोबोटिक मोशन फैंटम का विकास किया है, जो श्वास लेने के दौरान एक मानव के फेफड़ेजैसी गति पैदा कर सकते हैं। फैंटम एक ऐसे प्लेटफॉर्म का हिस्सा है, जो न सिर्फ एक मरीज के श्वास लेने के दौरान मानव फेफड़े जैसी गति पैदा करता है, बल्कि यह जांच करने के लिए भी उसका इस्तेमाल किया जा सकता है कि क्या रेडिएशन का एक गतिशील लक्ष्य पर सही प्रकार से केंद्रित उपयोग हो रहा है। फैंटम को इंसान की जगह सीटी स्कैनर के अंदर बेड पर रखा जाता है और यह उपचार के दौरान रेडिएशन के समय मानव फेफड़े की तरह गति करता है। इर्रेडिएशन के दौरान, मरीज और कर्मचारियों पर न्यूनतम असर के साथ निरंतर उन्नत 4डी रेडिएशन थेरेपी उपचारों की उच्च गुणवत्ता वाली छवियां प्राप्त होती हैं। एक मानव पर लक्षित रेडिएशन से पहले, फैंटम के साथ सिर्फ ट्यूमर पर केंद्रित इसके प्रभाव की जांच की जाती है।

फैंटम का बड़ा भाग एक गतिशील प्लेटफॉर्म है, जिस पर कोई भी डोसिमिट्रिक या तस्वीर की गुणवत्ता सुनिश्चित करने वाली डिवाइस लगाई जा सकती है और प्लेटफॉर्म तीन स्वतंत्र स्टेपर मोटर प्रणालियों के इस्तेमाल से 3डी ट्यूमर मोशन की नकल कर सकता है। यह प्लेटफॉर्म एक बेडपर रखा जाता है, जहां मरीज रेडिएशन थेरेपी के दौरान लेटता है। एक फैंटम जैसे ही फेफड़ों की गति की नकल करता है, वैसे ही रेडिएशन मशीन से रेडिएशन को गतिशील ट्यूमर पर केंद्रित करने के लिए एक गतिशील या गेटिंग विंडो का इस्तेमाल किया जाता है। फैंटम में लगे डिटेक्टर्स से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि ट्यूमर पर रेडिएशन कहां किया गया है।

उपचार के दौरान डोज के प्रभाव की जांच की जाती है। शोधकर्ता एक फैंटम पर प्रणाली की जांच की प्रक्रिया का काम कर रहे हैं। इसके पूरा होने के बाद, वे मानव पर इसकी जांच करेंगे।

इस प्रकार के रोबोटिक फैंटम के निर्माण का काम भारत में पहली बार हुआ है और बाजार में उपलब्ध अन्य आयातित उत्पादों की तुलना में यह ज्यादा किफायती है, क्योंकि फेफड़ों की विभिन्न प्रकार की गति पैदा करने के लिए इस प्रोग्राम को लागू किया जा सकता है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), भारत सरकार के उन्नत तकनीक निर्माण कार्यक्रम की सहायता से विकसित और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के साथ जुड़ी यह तकनीक वर्तमान में एसजीपीजीआईएमएस, लखनऊ में अंतिम दौर के परीक्षण से गुजर रही है।

इनोवेटर इस उत्पाद के व्यवसायीकरण की कोशिश कर रहे हैं, जिसे विदेशी मॉडल के स्थान पर इस्तेमाल किया जा सकता है। विदेशी मॉडल खासा महंगा होने के साथ ही इसके सॉफ्टवेयर पर नियंत्रण भी हासिल नहीं होता है।

SOURCE-PIB

 

 

पेगासस

भारत के मंत्रियों, विपक्षी नेताओं, पत्रकारों, सरकारी अधिकारियों और वैज्ञानिकों पर निगरानी रखने के लिए पेगासस (Pegasus) स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया गया है।

मुख्य बिंदु

  • निगरानी के लिए संभावित लक्ष्यों की एक लीक की गयी सूची में लगभग 40 भारतीय पत्रकारों के फोन नंबर पाए गए।इस सूची में किए गए फोरेंसिक परीक्षणों ने पुष्टि की है कि एक अज्ञात एजेंसी ने पेगासस सॉफ्टवेयर का उपयोग करके उनमें से कुछ की सफलतापूर्वक जासूसी की है।
  • लीक हुई लोगों की सूची में भारतीय मंत्री, विपक्षी नेता, सरकारी अधिकारी और व्यवसायी भी शामिल हैं।
  • लीक हुए डेटाबेस में दुनिया भर के करीब 50,000 फोन नंबर हैं। इस सॉफ़्टवेयर का उपयोग करके जिन अन्य लोगों को टारगेट किए जाने का संदेह है, उनके नाम बाद में प्रकट किए जाएंगे।
  • सबसे अधिक संख्या वाले 10 देशों में भारत शामिल है और 15,000 नंबर के साथ मेक्सिको इस सूची में शीर्ष पर है।संख्या का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों जैसे बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब से भी था, पाकिस्तान, हंगरी और फ्रांस सूची में अन्य प्रमुख देश थे।

पेगासस को इसराइल की साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ ने तैयार किया है. बांग्लादेश समेत कई देशों ने पेगासस स्पाईवेयर ख़रीदा है. इसे लेकर पहले भी विवाद हुए हैं. मेक्सिको से लेकर सऊदी अरब की सरकार तक पर इसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए जा चुके हैं. व्हाट्सऐप के स्वामित्व वाली कंपनी फ़ेसबुक समेत कई दूसरी कंपनियों ने इस पर मुकदमे किए हैं.

कैसे करता है काम?

पेगासस एक स्पाइवेयर है जिसे इसराइली साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ ग्रुप टेक्नॉलॉजीज़ ने बनाया है. ये एक ऐसा प्रोग्राम है जिसे अगर किसी स्मार्टफ़ोन फ़ोन में डाल दिया जाए, तो कोई हैकर उस स्मार्टफोन के माइक्रोफ़ोन, कैमरा, ऑडियो और टेक्सट मेसेज, ईमेल और लोकेशन तक की जानकारी हासिल कर सकता है.

साइबर सुरक्षा कंपनी कैस्परस्काई की एक रिपोर्ट के अनुसार, पेगासस आपको एन्क्रिप्टेड ऑडियो सुनने और एन्क्रिप्टेड संदेशों को पढ़ने लायक बना देता है.

एन्क्रिप्टेड ऐसे संदेश होते हैं जिसकी जानकारी सिर्फ मेसेज भेजने वाले और रिसीव करने वाले को होती है. जिस कंपनी के प्लेटफ़ॉर्म पर मेसेज भेजा जा रहा, वो भी उसे देख या सुन नहीं सकती.

पेगासस के इस्तेमाल से हैक करने वाले को उस व्यक्ति के फ़ोन से जुड़ी सारी जानकारियां मिल सकती हैं

पहली बार 2016 में सामने आया नाम

रिपोर्ट के मुताबिक पेगासस से जुड़ी जानकारी पहली बार साल 2016 में संयुक्त अरब अमीरात के मानवाधिकार कार्यकर्ता अहमद मंसूर की बदौलत मिली.

उन्हें कई एसएमएस प्राप्त हुए थे, जो उनके मुताबिक संदिग्ध थे. उनका मानना था कि उनमें लिंक गलत मकसद भेजे गए थे. उन्होंने अपने फोन को टोरंटो विश्वविद्यालय के ‘सिटीजन लैब’ के जानकारों को दिखाया. उन्होंने एक अन्य साइबर सुरक्षा फर्म ‘लुकआउट’ से मदद

मंसूर का अंदाज़ा सही था. अगर उन्होंने लिंक पर क्लिक किया होता, तो उनका आइफ़ोन मैलवेयर से संक्रमित हो जाता. इस मैलवेयर को पेगासस का नाम दिया गया. लुकआउट के शोधकर्ताओं ने इसे किसी “एंडपॉइंड पर किया गया सबसे जटिल हमला बताया.”

इसके बाद साल 2017 में न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक मेक्सिको की सरकार पर पेगासस की मदद से मोबाइल की जासूसी करने वाला उपकरण बनाने का आरोप लगा.

रिपोर्ट के मुताबिक इसका इस्तेमाल मेक्सिको में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और भ्रष्टाचाररोधी कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ किया जा रहा था.

मैक्सिको के जानेमाने पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी सरकार पर मोबाइल फोन से जासूसी करने का आरोप लगाते हुए इसके ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि पेगासस सॉफ्टवेयर मैक्सिको की सरकार को इसरायली कंपनी एनएसओ ने इस शर्त पर बेचा थी कि वो इसका इस्तेमाल सिर्फ़ अपराधियों और चरमपंथियों के ख़िलाफ़ करेंगे.

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इस सॉफ्टवेयर की खासियत यह है कि यह स्मार्टफोन और मॉनिटर कॉल्स, टेक्स्ट्स और दूसरे संवादों का पता लगा सकता है. यह फोन के माइक्रोफोन या कैमरे को एक्टिवेट भी कर सकता है

SOURCE-BBC NEWS

 

 

UNDP Equator Prize 2021

दो भारतीय समुदायों ने इस वर्ष का UNDP Equator Prize 2021 जीता है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के नुकसान से निपटने और अपने स्थानीय विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अभिनव, स्थानीय और विभिन्न प्रकृति-आधारित समाधानों को प्रदर्शित करने में उनकी असाधारण उपलब्धि के लिए यह प्रतिष्ठित पुरस्कार जीता है।

भारतीय विजेता

  • विश्व स्तर पर 10 विजेताओं में से, दो भारतीय विजेता संगठन स्नेहकुंजा ट्रस्ट (Snehakunja Trust) और अधिमलाई पझंगुडियिनर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (Aadhimalai Pazhangudiyinar Producer Company Limited) हैं।
  • ये दो समुदाय 10,000 अमरीकी डालर की पुरस्कार राशि जीतेंगे।
  • उन्हें इस वर्ष के अंत में नेचर फॉर लाइफ हब, संयुक्त राष्ट्र महासभा और संयुक्त राष्ट्र खाद्य प्रणाली शिखर सम्मेलन से जुड़े आभासी कार्यक्रमों की एक श्रृंखला में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
  • भारत के विजेता 255 समुदायों के नेटवर्क में शामिल होंगे, जिन्हें 80 से अधिक देशों से Equator Prize मिला है।
  • वर्चुअल पुरस्कार समारोह अक्टूबर, 2021 के महीने में आयोजित किया जायेगा।
  • UNDP Equator Prize 2002 से शुरू किया गया था।

अधिमलाई पझंगुडियिनर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (Aadhimalai Pazhangudiyinar Producer Company Limited)

आधीमलाई पझंगुडियिनर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड 1700 सदस्य वाली एक सहकारी समिति है। यह पूरी तरह से नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व, तमिलनाडु के स्वदेशी लोगों द्वारा चलाई जाती है। पिछले 8 वर्षों में इस समुदाय द्वारा किए गए कार्यों ने विभिन्न प्रकार की फसलों और वन उपज के विपणन और प्रसंस्करण द्वारा 147 गांवों में आजीविका में सुधार किया है। फसल की कटाई और कृषि पद्धतियों की नियमित रूप से निगरानी की जाती है ताकि उत्पाद की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके और संसाधनों के अति प्रयोग को भी रोका जा सके।

स्नेहकुंजा ट्रस्ट (Snehakunja Trust) 

45 वर्षों के लिए, स्नेहकुंजा ट्रस्ट ने समुदाय-आधारित संरक्षण और बहाली पर ध्यान केंद्रित करते हुए कर्नाटक तट और पश्चिमी घाट में तटीय पारिस्थितिक तंत्र और संवेदनशील आर्द्रभूमि की रक्षा की है। इस संगठन ने सैकड़ों ग्राम वन समितियों और स्वयं सहायता समूहों को विभिन्न प्राकृतिक कृषि तकनीकों, पारंपरिक ज्ञान, स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग, उद्यमिता को बढ़ावा देने, और सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के आधार पर संसाधनों का स्थायी प्रबंधन करने में सहायता और सहायता की है। वर्तमान में, यह ट्रस्ट भारत की पहली ब्लू कार्बन परियोजना का संचालन का रही है।

SOURCE-GK TODAY

 

 

शेर बहादुर देउबा

नेपाल के नए प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा (Sher Bahadur Deuba)  ने नेपाली संसद में विश्वास मत जीत लिया है। शेर बहादुर देउबा को 275 सदस्यों वाली प्रतिनिधि सभा में 136 मतों की आवश्यकता थी, जबकि उन्हें 165 मत मिले। इससे पहले नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय ने नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा नेपाल का प्रधानमंत्री नियुक्त करने का आदेश पारित किया था।

मुख्य बिंदु

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने भंग की गयी प्रतिनिधि सभा को पांच महीने में दूसरी बार बहाल कर दिया है।

पृष्ठभूमि

राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी (Bidya Devi Bhandari) ने प्रधानमंत्री ओली की सिफारिश पर 22 मई, 2021 को पांच महीने में दूसरी बार 275 सदस्यीय निचले सदन को भंग कर दिया था। उन्होंने 12 नवंबर और 19 नवंबर को मध्यावधि चुनाव की भी घोषणा की थी। चुनाव आयोग ने हाल ही में चुनावों को लेकर अनिश्चितता के बावजूद मध्यावधि चुनाव के कार्यक्रम की भी घोषणा की थी।

राष्ट्रपति को संसद भंग करने की शक्ति कैसे प्राप्त होती है?

राष्ट्रपति के पास नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 76 (7) के तहत प्रतिनिधि सभा या संसद को भंग करने की शक्ति है।

अनुच्छेद 76 (7) के बारे में

अनुच्छेद 76 (7) के तहत, प्रधानमंत्री प्रतिनिधियों के सदन को भंग कर सकते हैं और छह महीने के भीतर चुनाव कराने की नई तारीख की घोषणा कर सकते हैं, यदि प्रधानमंत्री की नियुक्ति खंड (5) के तहत विश्वास मत में विफल हो जाती है या जब किसी सदस्य को प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त नहीं किया जा सकता है।

नेपाल में राजनीतिक संकट

नेपाल में राजनीतिक संकट मई 2018 में शुरू हुआ जब के.पी. शर्मा ओली के नेतृत्व वाली CPN-UML और नेशनल कम्युनिस्ट पार्टी ने हाथ मिलाया। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में CPN-UML सबसे बड़ी पार्टी थी, हालांकि, सत्तारूढ़ दल के भीतर बढ़ते विवादों के परिणामस्वरूप फिर से विभाजन हो गया। विभाजन के बाद, दिसंबर 2020 में, प्रचंड के नेतृत्व वाली पार्टी ने प्रधानमंत्री ओली को सह-अध्यक्ष के रूप में निष्कासित कर दिया और प्रचंड को पहला अध्यक्ष बनाया गया। 2020 में, प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया गया था जिसे 2021 में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद फिर से बहाल कर दिया गया था। 10 मई, 2021 को प्रधानमंत्री ओली विश्वास मत खो दिया और सदन फिर से भंग कर दिया गया था।

SOURCE-GK TODAY

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