मत्स्यपालन विभाग ‘सागर परिक्रमा’ कार्यक्रम के तृतीय चरण की मेजबानी करने जा रहा है

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मत्स्यपालन विभागसागर परिक्रमाकार्यक्रम के तृतीय चरण की मेजबानी करने जा रहा है

  • सागर परिक्रमा का उद्देश्य मछुआरों और अन्य हितधारकों के मुद्दे का समाधान करना और भारत सरकार द्वारा कार्यान्वित की जा रही विभिन्न मत्स्यपालन योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से उनके आर्थिक उत्थान को सुनिश्चित करना है

  • कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के जीवन गुणवत्ता और आर्थिक विकास में सुधार लाना और ज्यादा से ज्यादा आजीविका उत्पन्न करना है।
  • तीसरे चरण कीसागर परिक्रमाकी शुरुआत 19 फरवरी, 2023 को हजीरा बंदरगाह, सूरत, गुजरात में मीडिया की उपस्थिति में शुरू होगी, जिसके बाद व महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्र की ओर बढ़ेगी और 20-21 फरवरी, 2023 में उत्तरी महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों सतपति, वसई, वर्सोवा, सैसन डॉक और मुंबई के अन्य क्षेत्रों को कवर करेगी।

सागर परिक्रमाकार्यक्रम:

  • सागर परिक्रमाएक विकासवादी यात्रा है, जिसकी परिकल्पना भारत के समुद्री तटीय क्षेत्र के लिए की गई है, जिसका उद्देश्य देश के सभी मछुआरों, मत्स्य किसानों और संबंधित हितधारकों के साथ एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए 75वें वर्ष में आजादी का अमृत महोत्सव की भावना के रूप में की गई है।
  • सागर परिक्रमायात्रा की शुरुआत 05 मार्च 2022 को मांडवी, गुजरात (श्यामजी कृष्ण वर्मा का स्मारक) से ओखाद्वारका तक चरण-1 के रूप में “क्रांति से शांति” वाली थीम के साथ शुरू की गई थी। इस यात्रा का दूसरा चरण 23 से 25 सितंबर 2022 तक जारी रहा।
  • सागर परिक्रमा की यात्रा देश की खाद्य सुरक्षा और तटीय मछुआरा समुदायों की आजीविका और समुद्री पारिस्थितिक तंत्र को सुरक्षा प्रदान करने के लिए समुद्री मत्स्य संसाधनों का उपयोग करने के बीच स्थायी संतुलन पर केंद्रित होगी
  • सागर परिक्रमा कार्यक्रम सभी तटीय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मनाया जाएगा, जिसमें गुजरात, दीव, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, अंडमान और निकोबार और लक्षद्वीप द्वीप आदि शामिल हैं।

भारत में मत्स्य पालन की स्थिति:

  • उल्लेखनीय है कि हमारे देश की विशाल समुद्री तट रेखा है जो 09 समुद्री राज्य और 04 केंद्र शासित प्रदेश से होकर गुजरती है। इसके माध्यम से 2.8 मिलियन तटीय मछुआरों को आजीविका सहायता प्राप्त होता है
  • भारत वैश्विक रूप से मत्स्य उत्पादन का आठ प्रतिशत का योगदान देता है और यह विश्व का तीसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है।
  • देश में मछली का कुल उत्पादन 162.48 लाख टन है, जिसमें से 121.21 लाख टन अंतर्देशीय और 41.27 लाख टन समुद्री है। देश में मत्स्य निर्यात कुल मूल्य 57,586.48 करोड़ रुपये है।
  • यह क्षेत्र जीवीए में एक स्थिर वृद्धि दर दर्शाता है, जो कि कृषि जीडीपी का 6.72 प्रतिशत है और यह कृषि निर्यात में लगभग 17 प्रतिशत का योगदान देता है।

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