तमिलनाडु के दो गांव जैव विविधता विरासत स्थल के रूप में अधिसूचित

तमिलनाडु के दो गांव जैव विविधता विरासत स्थल के रूप में अधिसूचित

  • तमिलनाडु सरकार ने मदुरै जिले के अरिट्टापट्टी और मीनाक्षीपुरम गांवों को जैव विविधता विरासत स्थल के रूप में अधिसूचित किया है। राज्य में इस तरह के यह पहले स्थल हैं जहां 2,000 साल से अधिक पुरानी कई स्थानिक वन्य प्रजातियों और ऐतिहासिक संरचनाएं हैं।

  • जारी अधिसूचना के तहत मदुरै तालुक के मीनाक्षीपुरम गांव में कुल2 हेक्टेयर और मेलूर तालुक में अरिट्टापट्टी को जैव विविधता विरासत स्थलों के रूप में अधिसूचित किया गया है।
  • तमिलनाडु में पहली जैव विविधता विरासत स्थल के रूप में मदुरै में अरिट्टापट्टी को तमिलनाडु सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया है।
  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुप्रिया साहू द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार, क्षेत्र की कुछ पहाडिय़ों में लगभग 250 पक्षी प्रजातियों की उपस्थिति के साथ समृद्ध जैविक और ऐतिहासिक महत्व के अन्य वन्यजीव हैं, जिनमें तीन रैप्टर, लैगर बाज और लुप्तप्राय: स्लेंडर लोरिस भी शामिल हैं।

जैन मूर्तियां और गुफा मंदिर:

  • इस क्षेत्र में वाटरशेड के रूप में सात ग्रेनाइट पहाडिय़ों की एक शृंखला है जो 72 झीलों, 200 प्राकृतिक तालाबों और तीन चेक बांधों के लिए जल का आधार है।
  • अरिट्टापट्टी क्षेत्र में पाए जाने वाले मेगालिथिक संरचनाओं में तमिल ब्राह्मी शिलालेख, जैन धर्म की मूर्तियां और गुफा में बने मंदिर हैं जो 2,200 साल पुराने हैं।
  • इन गांवों को विरासत घोषित करने का उद्देश्य संरक्षण उपाय के माध्यम से स्थानीय समुदायों के जीवन का स्तर बढ़ाना भी है। इससे प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन पर रोक लगेगी और पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचा जा सकेगा।
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